बेसिक शिक्षा के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सोमवार के दिन मौसमी फल बच्चों को दिए जाने का बंदोबस्त शासन स्तर पर बैठे अधिकारियों ने किया था। योजना के पहले ही दिन तमाम ग्राम प्रधानों ने अपनी रिपोर्ट में योजना का क्रियान्वयन हो जाने की जानकारी दी, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है तमाम विद्यालयों में फल बच्चों को नहीं दिए गए, लेकिन रिपोर्ट में फल वितरण होना दर्शाया गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए कई योजनाएं चला रहे हैं। गत साल जहां प्रत्येक बुधवार को दूध वितरण कराने के निर्देश जारी किए थे। अब प्रत्येक सोमवार को मौसमी फल दिए जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। दो बार बच्चों को मौसमी फल मिल चुके हैं, लेकिन यह योजना कागजों में ही चल रही है। जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जहां कागजों में मात्र 23 विद्यालयों में फल वितरित न होना दर्शाया गया है, जबकि चर्चा है कि पहले सोमवार को प्रधानों को भी विद्यालयों में जाकर इस योजना का शुभारंभ कराना था और अपनी रिपोर्ट देनी थी। कुछ प्रधानों ने योजना का संचालन विद्यालयों में नहीं कराया, जबकि रिपोर्ट में योजना संचालित होना दर्शा दिया है। इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को भी लग गई है। अब बीएसए रेखा सुमन ऐसे विद्यालयों की जानकारी करा रही हैं, जहां हकीकत में योजना का क्रियान्वयन नहीं हुआ। दूध के नाम पर पानी : देहात क्षेत्र के विद्यालयों में जहां हेड मास्टर दूध का वितरण करा रहे हैं, वहीं एनजीओ के स्तर से भी विद्यालयों में दूध भेजा जा रहा है। बुधवार को तमाम विद्यालयों में दूध की क्वालिटी ठीक नहीं थी। वहीं कम मात्र में दूध बच्चों को उपलब्ध कराया गया
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