शासन ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय और मान्यता प्राप्त स्कूलों के छात्र-छात्रओं की खेलकूद प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने पर रोक लगा दी है। शासन के इस आदेश से मान्यता प्राप्त स्कूलों के करीब एक करोड़ छात्र-छात्रएं और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की 1.25 लाख छात्रएं जिला, मंडल और प्रदेशस्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग नहीं कर पाएंगे। यह आदेश शासन ने 22 अगस्त 2016 को जारी किया है। इस शासनादेश ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धज्जियां उड़ाई हैं। 1भारत सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 इसलिए लागू किया कि देश में 6 से 14 वर्ष तक का प्रत्येक बच्चा पढ़े और खेले। इस अधिनियम के अंतर्गत देश के सभी प्रदेशों में बच्चों को पढ़ाना और खिलाना अनिवार्य कर दिया गया। उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा निदेशक दिनेश बाबू शर्मा ने 22 अगस्त 2016 को आदेश जारी किया है कि सभी परिषदीय स्कूलों में खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन कराना है। पहले न्याय पंचायत, ब्लॉक और फिर जिलास्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन करना है। जिलास्तरीय प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्रओं को मंडलीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करना है। मंडल के विजेता छात्र-छात्रओं को लखनऊ में होने वाली राज्यस्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में प्रतिभाग करना है। 1उन्होंने आदेश में लिखा है कि केवल बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्रएं ही प्रतिभाग करें। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय और मान्यता प्राप्त स्कूलों के छात्र-छात्रओं को प्रतियोगिता में प्रतिभाग नहीं कराया जाए। 1इस आदेश से मान्यता प्राप्त स्कूलों में मायूसी है, जबकि गत वर्षों में मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के छात्र-छात्रएं प्रतिभाग करते थे। इस आदेश से जनपद के मान्यता प्राप्त स्कूलों के डेढ़ लाख छात्र-छात्रएं प्रतिभाग नहीं कर पाए और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की 1600 छात्रएं। जबकि प्रदेश में मान्यता प्राप्त स्कूलों के एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्रएं और कस्तूरबा विद्यालयों के लगभग 1.25 लाख छात्रएं प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने से वंचित रह गईं।शासन ने यह आदेश जारी करने के बाद शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की खुलकर धज्जियां उड़ाई हैं। निदेशक के आदेश के बाद विभाग के मंत्री तक ने आदेश में दखल नहीं दिया, जबकि पूरे प्रदेश के अंदर सबसे अधिक बच्चे मान्यता प्राप्त स्कूलों में ही पढ़ते हैं। गत वर्षों के आंकड़े उठाकर भी देखे जाएं तो मान्यता प्राप्त स्कूलों के बच्चों ने अधिक मेडल जीते हैं।शिक्षा निदेशक के आदेश पर प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जा रही हैं। उन्होंने आदेश दिया है कि कस्तूरबा विद्यालय और मान्यता प्राप्त स्कूलों के छात्र-छात्रओं को प्रतिभाग नहीं कराना है। ऐसे में उनको प्रतिभाग नहीं कराया जा रहा है। शासनादेश से बाहर जाकर काम नहीं कर सकते हैं।
गुलावठी क्षेत्र निवासी कमल यादव ने निदेशक के आदेश के खिलाफ आरटीआइ से जवाब मांगा था, लेकिन एडी बेसिक के यहां से कोई जबाव नहीं मिला और उन्होंने उसको निदेशक लखनऊ के यहां को ट्रांसफर कर दिया। वहां से भी कोई जबाव नहीं दिया गया है।
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