सरकार का हुक्म है कि रिटायर होने के साथ ही शिक्षक को सभी प्रकार के देयक दे दिए जाएं, मगर सरकार के इस आदेश को हवा में कैसे उड़ाया जाता है ये कोई शिक्षा विभाग के लेखानुभाग से पूछे। यहां रिटायर हुए एक दो नहीं पूरे छह महीने गुजरने को हैं और बाबू उसे उसका पैसा देने की जगह नया पहाड़ा पढ़ा रहे हैं। ताजा मामला पसगवां ब्लाक के एक सेवानिवृत्त टीचर शिवराम वर्मा का है, जिनको रिटायर हुए छह महीने हो गए लेकिन लेखा अनुभाग के अफसर और बाबू कमीशनबाजी के लिए उसे महीनों से टरका रहे हैं। पीड़ित शिक्षक ने डीएम के जनतादर्शन से लेकर सीएम दरबार तक गुहार लगाई लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। बुधवार को उसे एक नया शगूफा और बता दिया गया। अब उसे उसकी फाइल लखनऊ में रुकी बता दी गई। शिवराम वर्मा ने डीएम को दिए गए प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया है कि उसका रिटायरमेंट 31 मार्च को हो गया था। उसने 20 अप्रैल को अपनी पूरी पत्रवली भी सौंप दी। उसके बाद से उसे लगातार लेखा विभाग के बाबुओं द्वारा टरकाया जा रहा है। इसकी शिकायत जिलाधिकारी आकाशदीप के जनतादर्शन में भी की गई। वर्मा का कहना है कि उसके सामने ही डीएम ने लेखाधिकारी को फोन भी मिलाया लेकिन इसका भी विभाग या लेखाधिकारी पर कोई असर नहीं हुआ। शिक्षक का कहना है उसके पूरे भुगतान पर दस से 12 फीसदी कमीशन भी मांगा जा रहा है। उसका कहना है कि वह कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित है और उसे पैसों की सख्त आवश्यकता है।
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