DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Wednesday, October 5, 2016

इलाहाबाद : सेवा नियमावली को धता बताकर केंद्र राज्य पुस्तकालय में शिक्षक नियुक्त, खास संस्थानों में आम शिक्षक हुए तैनात

 के प्रमोशन एवं तबादलों में नियम-कानून का पाठ पढ़ाने वाले अफसर खुद नियमों की अनदेखी करके अपनों को उपकृत कर रहे हैं। प्रदेश के खास संस्थानों के अहम पदों पर आम शिक्षकों की तैनाती इस खामी को बयां कर रही है। शासन ने इस संबंध में नाराजगी जाहिर की है, लेकिन अफसर ने आदेश में बदलाव नहीं किया है। अन्य शैक्षिक संस्थानों में भी ऐसे शिक्षक भेजे जा रहे हैं, जो वहां के योग्य नहीं हैं। केंद्रीय राज्य पुस्तकालय उत्तर प्रदेश में संगीत के सहायक अध्यापक की तैनाती कर दी गई है। दरअसल उनका प्रमोशन पांच मार्च 2013 को हुआ, उन्हें प्रदेश के किसी हाईस्कूल स्तर के राजकीय कालेज में प्रधानाचार्य पद पर होना चाहिए या फिर अन्य 17 अनुभागों में तैनाती मिलनी चाहिए, लेकिन उन्हें शैक्षणिक अध्यापन सेवा संवर्ग नियमावली 1993 को धता बताकर पुस्तकालय जैसे तकनीकी संस्थान में नियुक्ति मिल गई है। इसी तरह 2011 में सुशील कुमार की भी नियुक्ति पुस्तकालय में हुई थी, लेकिन शासन के संज्ञान में आने पर उसे तत्काल निरस्त कर दिया गया था। इस बार भी शासन की ओर से शिक्षा निदेशक माध्यमिक को कड़ा पत्र लिखा गया है, लेकिन आदेश में अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह हाल तब है जब विद्यालयों में शिक्षकों का संकट है और खास संस्थानों में उन्हें तैनात करके उपकृत किया जा रहा है। इलाहाबाद में तमाम शैक्षिक संस्थान (राज्य शैक्षिक संस्थान, राज्य विज्ञान संस्थान, मनोविज्ञानशाला आदि) हैं यहां पर नियुक्त होने वाले शिक्षकों की भी अर्हता है, लेकिन अक्सर यहां ऐसे शिक्षक भेजे जाते हैं जो वहां के योग्य नहीं है। सिर्फ अफसर अपनों को खुश करने के लिए संस्थान के नियमित कार्यो में बाधा पहुंचा रहे हैं।6सेवा नियमावली को धता बताकर केंद्र राज्य पुस्तकालय में शिक्षक नियुक्त

No comments:
Write comments