जिले की शिक्षा व्यवस्था में नजर दौड़ाएं तो दावे पूरी तरह से फेल रहे। आश्रम पद्धति के स्कूल के संचालन की बात छोड़ दें तो साल भर परंपरागत तरीकों से शिक्षा के प्रचार प्रसार के काम होते रहे। नए काम गिनाने को शासन और प्रशासन के पास कुछ नहीं है। जिले में खुले शिक्षा के मंदिरों में गुरुओं की कमी में बेसिक शिक्षा छोड़कर बाकी सब जगह बढ़ता गया। शिक्षा के सुधार के दावों की बात करें तो बीत रहा साल भी बेमानी भरा रहा। माध्यमिक शिक्षा में नजर दौड़ाएं तो राजकीय और सवित्त विद्यालयों में शिक्षकों का जबरदस्त टोटा है। बेसिक शिक्षा में अलबत्ता 800 नए शिक्षकों की भर्ती हुई, लेकिन गैर जनपद स्थानांतरण से यह लाभ आधे में सिमट कर रह गया है। उच्च शिक्षा में जहां 4 कॉलेज हैं, वहीं निजी डिग्री कॉलेज गली कूचों तक में खुल गए हैं। तकनीकी शिक्षा एवं शिक्षा के प्रसार के लिए निजी कॉलेजों की धमाचौकड़ी देखते ही बनती है। राजकीय और सवित्त विद्यालय बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। 2354 शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाया गया। माध्यमिक शिक्षा में अध्यापकों को रखे जाने की बोहनी तक नहीं हुई है।
परिषदीय स्कूलों को मिला सोलर लाइट का तोहफा
परिषदीय स्कूलों को 24 घंटे की बिजली की सुविधा देने के लिए जिले में 13 स्कूलों को सोलर लाइट योजना से जोड़ा गया है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत इस योजना को क्रियान्वित किया गया है। जिसमें पांच पंखे, पांच सीएफएल और शुद्ध पानी की मशीन लगने पर इसको इससे जोड़ा जाएगा। इस योजना को धरातल पर क्रियान्वित कर दिया गया है। पूरे साल की सौगात के रूप में मिली यह योजना खासी सराही जा रही है। सुरक्षा को लेकर स्कूलों के जिम्मेदार चिंतित रहते हैं।
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