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Friday, January 13, 2017

हरदोई : बच्चों के ‘खेल’ की अब खुलेगी पोल, विद्यालय में पढ़ने वाले हर बच्चे का सॉफ्टवेयर पर फीड हो रहा ब्योरा,हर बच्चे का डाटा आनलाइन, होगी निगरानी

विद्यालयों में बच्चों की कुंडली बड़ों के खेल की पोल खोलेगी। अब बच्चों के नामांकन में फर्जीवाड़ा नहीं हो सकेगा और हर बच्चे का डाटा आनलाइन हो जाएगा। अगर कोई बच्चा किसी दूसरे विद्यालय में पड़ता है तो वह पकड़ में आ जाएगा।

सर्व शिक्षा अभियान में स्टूटेंट डाटा फी¨डग का अभियान चल रहा है शुरुआत में ही काफी संख्या में बच्चे पकड़ में आ भी रहे हैं।

विद्यालयों में बच्चों के नामांकन में हमेशा से खेल होता रहा। सरकारी विद्यालयों में कहीं बच्चों की अधिक संख्या दिखाकर शिक्षकों की तैनाती बढ़ाने तो कहीं मिड-डे मील से लेकर बच्चों की ड्रेस आदि में खेल के लिए अधिक बच्चे नामांकित कर दिए जाते हैं। बहुत से ऐसे भी बच्चे होते हैं जोकि किसी निजी विद्यालय में पढ़ाई करते हैं और उनका नाम सरकारी विद्यालयों में भी लिखा होता। निजी विद्यालय में उनके नाम पर खेल होता तो सरकारी विद्यालयों में भी होता रहता है।

निजी और मान्यता प्राप्त विद्यालय भी खेल करते हैं और काफी संख्या में ऐसे विद्यालय हैं जोकि बच्चों का फर्जी नामांकन भी किए रहते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। 1पूर्व की व्यवस्था के अनुसार यू डाइस पर केवल विद्यालयों का विवरण फीड होता था लेकिन बदली व्यवस्था में अब यूनीफाइड डाइस में हर बच्चे का विवरण फीड कराया जा रहा है। जिसमें हर सरकारी, सहायता प्राप्त या गैर सहायता प्राप्त विद्यालय में पढ़ने वाले हर बच्चे का पूरा ब्योरा जैसे नाम, पिता का नाम, कक्षा, माता का नाम आदि सब कुछ विशेष साफ्टवेयर पर दर्ज कराया जाएगा।

जिले में देखा जाए तो 3858 परिषदीय विद्यालयों में 2833 प्राथमिक व 1025 उच्च प्राथमिक तथा निजी 1844 विद्यालयों को मिलाकर 5702 विद्यालयों में करीब सात 93 हजार 165 बच्चों का डाटा फीड किया जाएगा। बीएसए कार्यालय के एमआईएस प्रभारी शैलेंद्र झा ने बताया कि हर बच्चे का विवरण फीड होने से किसी भी बच्चे का दो स्थानों पर नाम फीड नहीं होगा। अगर बच्चा प्रदेश के किसी भी सरकारी या गैर सरकारी विद्यालय में पढ़ता है तो एक स्थान पर उसका विवरण फीड होने के बाद दूसरे स्थान पर नहीं दर्ज होगा। इससे बच्चों की डवलिंग समाप्त होगी।

उन्होंने बताया कि विद्यालयों से फार्मेट पर विवरण आया है और उसे बीआरसी स्तर पर फीड किया जा रहा है और फिर जिला मुख्यालय पर परीक्षण होगा। इससे बच्चों के फर्जी नामांकन के खेल की पोल खुल जाएगी

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