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Wednesday, January 6, 2021

उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए नया पाठ्यक्रम शुरू, राज्यपाल ने किया उद्घाटन New Syllabus in Anganwadi Centers 2021

उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए नया पाठ्यक्रम शुरू, राज्यपाल ने किया उद्घाटन
New Syllabus in Anganwadi Centers 2021


1.25 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में इस सत्र से शुरू होंगी प्री प्राइमरी कक्षाएं


आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए नए पाठ्यक्रम 'प्रारंभिक बाल्यावस्था, देखभाल और शिक्षा' का शुभारंभ सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बीएचयू के विज्ञान संकाय सभागार में किया। तीन साल से छह साल तक के बच्चों के लिए तीन खंडों में बने इस पाठ्यक्रम को पॉयलट प्रोजेक्ट के तहत सेवापुरी ब्लाक के आंगनबाड़ी केंद्रों में शुरू किया जाएगा। यहां तीन से छह माह का शिक्षण देने के बाद इसे राज्य में लागू करने का प्रस्ताव राज्रू सरकार को दिया जाएगा। इसके बाद यह पाठ्यक्रम प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर संचालित होगा।


चार दिवसीय दौरे के पहले दिन राज्यपाल ने बीएचयू में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के तीन दिन के प्रशिक्षण कार्यक्रम में नए पाठ्यक्रम की पुस्तिका का भी विमोचन किया। यह विद्याभारती की ओर से तैयार किया गया है। इसमें बच्चों के लिए कविताएं, खेल के साथ मोरल साइंस समेत अन्य मनोरंजन विषयों को समावेश किया गया है। ताकि बच्चों को पढ़ने के प्रति लगाव हो सके। अभी तक आंगनबाड़ी केंद्र पर केवल पहल नाम की एक पुस्तिका से पढ़ाया जाता था।


बच्चों में शुरुआती शिक्षा सांस्कारित होनी चाहिए
राज्यपाल ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से कहा कि नई शिक्षा नीति में बहुत बल है। इसमें चार वर्ष, चार से पांच व 5 से 6 वर्ष की शिक्षा आंगनबाड़ी केंद्र का भाग है। भारत का भविष्य बनाने के लिए नन्हे-मुन्नों को संस्कारित शिक्षा दी जानी चाहिए। बच्चे को 8 वर्ष तक जो सिखाया व पढ़ाया जाता है, उसका 80 फीसदी उनकी आदत में ढल जाती है। इसलिए प्रारंभिक शिक्षा अतिमहत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी में आने से पहले बच्चे अपने घर में देखी, सुनी हुई चीजों व व्यवहार को लेकर आंगनबाड़ी में आते हैं। इसलिए आंगनबाड़ी को बच्चे के अंदर की कमियों को दूर कर उसी के अनुरूप बात, व्यवहार, पढ़ाई, खेल आदि क्रियाकलाप करें।

Friday, August 21, 2020

किशोरी बालिकाओं को प्रशिक्षण दिलाकर आत्मनिर्भर बनाएगी सरकार

किशोरी बालिकाओं को प्रशिक्षण दिलाकर आत्मनिर्भर बनाएगी सरकार


राज्य मुख्यालय : प्रदेश सरकार स्कूली शिक्षा से दूर किशोरी बालिकाओं के वीरांगना समूहों को प्रशिक्षण दिला कर आत्म निर्भर बनाएगी। प्रशिक्षण की गाइड लाइन जारी कर जिलाधिकारियों को इसी माह प्रशिक्षण शुरू करने का निर्देश दिया गया है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता और निगरानी के लिए ब्लाक स्तर पर कमेटी भी गठित की गई है। 


बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की निदेशक डा. सारिका मोहन ने इस बारे में आदेश जारी कर कहा है कि 11 से 14 साल की स्कूल न जाने वाली किशोरी बालिका की बहुआयामी आवश्यकता को समझने एवं इनको औपचारिक शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए किशोरी बालिकाओं के लिए योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत सखी-सहेली प्रशिक्षण का कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। इसके लिए 25 से 30 लक्षित किशोरी बालिकाओं के 10151 वीरांगना समूह का प्रदेश में गठन किया गया है।



उन्होंने कहा है कि प्रत्येक परियोजना में चयनित सखी-सहेलियों के अधिकतम 10 समूह को 25-30 किशोरियों के बैच में प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कोविड -19 के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग बैच में बांट कर दिया जाएगा। सामाजिक दूरी का पालन किया जाएगा।आयुष मंत्रालय द्वारा नियुक्त योग प्रशिक्षक योग की उपयोगिता सिखाएंगे। इसके अलावा पोषण, व्यक्तिगत स्वच्छता, सामान्य स्वास्थ्य, हक एवं अधिकार, सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच से लेकर शिक्षा का महत्व तक इसमें शामिल है। किशोरी बालिकाओं को किचन गार्डनिंग सिखाने के साथ बीज और पौधा उपलब्ध कराया जाएगा। पोषण वाटिका बनाने की जानकारी दी जाएगी।

Tuesday, June 16, 2020

अब डीएम की संस्तुति के बाद ही पोषाहार की आपूर्ति के आदेश, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में व्यवस्था सुधारने की कवायद शुरू

अब डीएम की संस्तुति के बाद ही पोषाहार की आपूर्ति के आदेश

बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में व्यवस्था सुधारने की कवायद शुरू


लखनऊ। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में पोषाहार आपूर्ति की व्यवस्था सुधारने की कवायद शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने तय किया है कि लाभार्थियों (6 माह से 6 साल के बच्चे और गर्भवती व धात्री माताओं) की वास्तविक संख्या के आधार पर हर महीने पोषाहार के आपूर्ति आदेश (डीआई) जारी की जाएगी। इतना ही नहीं, आदेश जारी करने से पहले संबंधित जिले के डीएम के स्तर से आपूर्ति की मांग का सत्यापन व अनुमोदन भी किया जाएगा। इससे जरूरत से ज्यादा पोषाहार की आपूर्ति दिखाकर हो रहे खेल पर लगाम लगेगी।


 बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग काफी दिनों से पोषाहार आपूर्ति व्यवस्था में गड़बड़ी को लेकर सुर्खियों में रहा है। इस मामले में एक के बाद एक नए खुलासे को सरकार ने गंभीरता से लिया। प्रमुख सचिव व निदेशक को पद से हटाने के साथ ही निदेशालय में पंजीरी सिंडिकेट की सबसे प्रमुख कड़ी रहीं डीपीओ कल्पना पांडेय को निलंबित कर दिया गया था। सारिका मोहन ने सबसे पहले वर्षों से निदेशालय में अब विभागीय कार्यभार पोषाहार आपूर्ति की व्यवस्था को अधिकारियों और बाबुओं को संभालने के बाद प्रमुख सचिव एस पारदर्शी बनाने की कवायद शुरू काकस को खत्म करने की राधा चौहान और निदेशक डॉ. कर दी है। दोनों अधिकारियों ने कार्यवाही शुरू कर दी है।