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Sunday, July 26, 2026

प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ ऐलान

प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ ऐलान

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सीजेपी ने खत्म किया आंदोलन

आंदोलन खत्म करने के एलान के बाद सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों से घर लौटने की अपील की

जनभावनाओं को देखते हुए और ग्राउंड रिपोर्ट मिलने के बाद त्यागपत्र का फैसला


नई दिल्ली । धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है. राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देने की मंजूरी दी है। हालांकि, उनके पास पहले से मौजूद मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी. यानी फिलहाल वह अपने मौजूदा कामकाज के साथ शिक्षा मंत्रालय का काम भी संभालेंगे। 

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है. इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन लगातार चर्चा में था 


नई दिल्लीः नीट पेपर लीक से उठे विवाद में आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। सरकार ने इस्तीफे के साथ साथ आंदोलनकारियों पर हुए सभी केस वापस करने और नीट के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी मान ली। इसके साथ ही जंतर मंतर पर काकरोच जनता पार्टी (रॉजेपी) का छात्र आंदोलन भी खत्म हो गया। केंद्रीय स्वास्म्म मंत्री जेपी नड्‌डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह के साथ प्रर्ता व सरकार की ओर से सभी मांगें माने जाने के बाद सीजेपी के प्रतिनिधि आशुतोष कर संका में जंतर-मंतर पर 35 दिन से चल रहा आंदोलन तत्काल खत्म करने का एलान किया और सभी प्रदर्शनकारियों से अपस अपने घर लौटने की अपील की। इस बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्भु ने प्रधान क इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक शिशारण मंत्री प्रल्हाद जोरी को शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

जनभावनाओं को देखते हुए और सुरक्षा को लेकर ग्राउंड रिपोर्ट मिलने के बाद प्रधान का इस्तीपय लेने का फैसला लिया गया। इस्तीफा देते हुए प्रधान ने भारत की दुवा शक्ति' को देश की असली ताकत बताते हुए कहा कि वह वह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है और पहले ही दिन से इस पर मैंने अपनी जिम्मेदारी ली है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्तियों द्वारा छात्रों को गुमराह करने की कोशिशों लेकर भी का व्यथित हैं। सूत्रों के अनुसार, शनिवार की सुबह उन्हें बताया गया कि आज की स्थिति में त्यागपत्र जरूरी है। प्रधान ने रॉजेपी के साथ सरकार की वार्ता से पहले दोपहर ढाई बजे पोस्ट के जरिये अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। बताते चलें, आंदोलन खत्म करने के लिए सीजेपी की सत्तों में धर्मेंद्र प्रबयान का इस्तीफा, केस वापस लेने और आत्महत्या करने वाले नोट छात्रओं के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग शामिल थी। सोमवार को प्रदर्शनकारियों के सांसद मार्च के पैरान हुई हिंसक झड़पों के बाद से ही सरकार ने इस आंदोलन को खत्म करने को लेकर गंभीरता से सोचना शुरू किया था।


Thursday, April 23, 2026

विधान भवन पर 69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित अभ्यर्थी जुटे, पुलिस ने जबरन इको गार्डन पहुंचाया

विधान भवन पर 69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित अभ्यर्थी जुटे, पुलिस ने जबरन इको गार्डन पहुंचाया 

23 अप्रैल 2026
लखनऊ । 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में याची बनकर न्याय की लड़ाई लड़ रहे आरक्षित श्रेणी के भारी संख्या में अभ्यर्थी बुधवार को विधान भवन के सामने प्रदर्शन कर धरने पर बैठ गए। आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों ने योगी जी हमें न्याय दो, सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों के पक्ष में याची लाभका प्रस्ताव पेश करो के नारे लगाने लगे। पुलिस ने आकर अभ्यर्थियों को रोक लिया। दोनों के बीच गहमागहमी होने लगी। पुलिस ने इनकी एक नहीं सुनी। सभी को जबरन पुलिस बस में बैठाकर इको गार्डन भिजवाया। अभ्यर्थी पहले भी न्याय के लिये डिप्टी सीएम समेत शिक्षामंत्री आदि के यहां कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं।


धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप एवं धनंजय गुप्ता का कहना है कि आरक्षण घोटाले का यह मामला लखनऊ हाई कोर्ट में वर्ष 2020 से चल रहा है। इस भर्ती में ओबीसी वर्ग को 27% की जगह सिर्फ 3.86% वहीं एससी वर्ग को ज्यादा आरक्षण दिया गया है।

 बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 तथा आरक्षण नियमावली 1994 का घोर उल्लंघन किया गया है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ 13 अगस्त 2024 को इस शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को रद्द कर चुकी है। प्रदेश सरकार को शिक्षक भर्ती की सूची तीन महीने के अंदर मूल चयन सूची के रूप में लिस्ट बनाने का आदेश दे चुकी है लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया।

जारी रहेगा प्रदर्शन...
पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश प्रदेश महासचिव सुमित यादव का कहना है कि प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण पीड़ित यांची अभ्यर्थियों के पक्ष में उन्हें न्याय देने के लिए याची लाभ का प्रपोजल पेश नहीं कर देती तब तक आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थी धरना प्रदर्शन करते रहेंगे। प्रदर्शन में सुशील कश्यप, धनंजय गुप्ता, सुमित यादव आदि शामिल रहे।




69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में देरी से नाराज अभ्यर्थियों संग परिजन भी करेंगे 22 अप्रैल को आंदोलन

18 अप्रैल 2026
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने से नाराज आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी 22 अप्रैल को फिर से राजधानी में दम दिखाएंगे। इस बार अभ्यर्थियों के साथ-साथ उनके परिजन और अलग-अलग कई संगठन एकजुट होकर आंदोलन करेंगे। अभ्यार्थियों ने बताया कि दो फरवरी से राजधानी के ईको गार्डेन में उनका अनवरत धरना चल रहा है। किंतु सरकार इस मामले में चुप्पी साधे बैठी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार कोई पहल नहीं कर रही, जिससे मामला टल रहा है। इस प्रकारण की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सितंबर 2024 में हुई थी। उसके बाद से लगातार तारीख पर तारीख मिल रही है।


अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने कहा कि पिछली सुनवाई 19 मार्च को होनी थी लेकिन नहीं हुई। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में अनलिस्टेड है। इससे सभी अभ्यर्थियों में बहुत आक्रोश है। हमने 22 अप्रैल को महाआंदोलन करने का फैसला लिया है। सुशील कश्यप ने बताया कि सभी जिले में समन्वयक बनाकर ब्लाक स्तर पर संपर्क किया जा रहा है, ताकि अभ्यर्थियों के साथ उनके परिजन भी आ सकें।

आंदोलन में शामिल सुमित कुमार, विक्रम, अमित मौर्या आदि ने कहा कि इस मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाईकोर्ट डबल बेंच का फैसला, सब हमारे पक्ष में है। फिर भी हमारे साथ न्याय इसलिए किया जा रहा है क्योंकि हम पिछड़े समाज से आते हैं। सरकार जल्द इस मामले में ठोस पहल नहीं करती है तो आंदोलन व्यापक होगा।

Tuesday, December 2, 2025

टीईटी के विरोध में शिक्षक सांसदों को देंगे ज्ञापन, संसद सत्र के बाद होगी TFI की दिल्ली में रैली

टीईटी के विरोध में शिक्षक सांसदों को देंगे ज्ञापन, संसद सत्र के बाद होगी TFI की दिल्ली में रैली

लखनऊ। बेसिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद दस राज्यों के संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) ने दिल्ली में रैली ही करने का निर्णय लिया है। इसके लिए संसद सत्र के बाद फिर से अनुमति ली जाएगी। इस बीच 5 से 7 दिसंबर तक शिक्षक क्षेत्रीय सांसदों को प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन देंगे।

टीएफआई व उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की सोमवार को हुई अलग-अलग बैठकों में दिल्ली पुलिस द्वारा पांच दिसंबर की रैली की अनुमति निरस्त किए जाने के बाद की रणनीति तय की गई। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सभी राज्यों के शिक्षक संगठन दिल्ली में सीमित संख्या में नहीं, बल्कि शिक्षकों की बड़ी रैली ही करेंगे।

रैली की तिथि दिल्ली पुलिस की अनुमति के बाद घोषित की जाएगी। उन्होंने बताया कि बैठक में तय हुआ कि सांसदों को दिए जाने वाले ज्ञापनों में आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसको लागू न करने की मांग की जाएगी। सांसदों से संसद में इस मुद्दे को उठाने का आग्रह किया जाएगा ताकि लाखों शिक्षकों का हित सुरक्षित हो सके। 

बता दें, संगठन ने पहले 21 नवंबर और फिर दिल्ली पुलिस के कहने पर 5 दिसंबर को रामलीला मैदान में रैली की घोषणा की थी। पर, हाल ही में दिल्ली पुलिस ने 5 दिसंबर की रैली की अनुमति निरस्त कर दी है। इससे शिक्षकों में नाराजगी है। 







टीईटी अनिवार्यता के विरोध में पांच दिसंबर को दिल्ली में होने वाली रैली की अनुमति निरस्त

दिल्ली पुलिस ने टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया को भेजी सूचना

30 नवंबर 2025
लखनऊ। दस प्रदेशों के शिक्षक संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) की पांच दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली की अनुमति को दिल्ली पुलिस ने निरस्त कर दिया है। अब सोमवार को शिक्षक संगठन ऑनलाइन बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे।

देशभर के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद यूपी समेत दस राज्यों ने टीएफआई का गठन किया था। साथ ही टीईटी अनिवार्यता समाप्त किए जाने के लिए पांच दिसंबर को दिल्ली में रैली करने की घोषणा की थी। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने हाल ही में कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए पांच दिसंबर को रैली की अनुमति निरस्त कर दिया है।

माना जा रहा है कि शीतकालीन सत्र भी शुरू हो रहा है। शायद इसी वजह से रैली की अनुमति निरस्त कर दी गई है। सोमवार को संगठन के पदाधिकारियों की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। हमारा प्रयास है कि देश भर के प्रभावित शिक्षकों को इससे राहत दिलाई जाए। इसके लिए सभी मिलकर रैली के लिए आगे की भी कोई तिथि या निर्णय ले सकते हैं।



टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ 5 दिसंबर को दिल्ली कूच को शिक्षक तैयार

10 नवंबर 2025
रविवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की कार्यसमिति की बैठक में संघ के अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि पांच दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली महारैली में पूरे देश से दो लाख शिक्षक शामिल होंगे, जिनमें से एक लाख शिक्षक उत्तर प्रदेश से पहुंचेंगे। सभी राज्यों में रैली की तैयारी जोरों पर है और अब तक 14 राज्यों के संगठन इससे जुड़ चुके हैं।  

अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ संगठन न्यायालय में लड़ाई लड़ने के साथ ही टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने के लिए इस महारैली के माध्यम से केंद्र सरकार तथा एनसीईटी से भी मांग करेगा। उन्होंने कहा कि इसी दौरान संसद सत्र भी चल रहा होगा, यह शिक्षकों के लिए अपनी ताकत का एहसास कराने का सही समय होगा। एकजुटता से शिक्षक महारैली में शामिल हों। 

महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि रैली में जाने के लिए ब्लॉकवार शिक्षकों की संख्या निर्धारित कर दी गई है। शिक्षकों को ले जाने के लिए प्रत्येक ब्लॉक के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। महारैली में संगठन में शामिल देश के 14 राज्यों से भी दो लाख से अधिक शिक्षक दिल्ली पहुंचेंगे। 





टीईटी अनिवार्यता पर TFI की महारैली अब 5 दिसंबर को, दिल्ली प्रशासन द्वारा 21 नवंबर की अनुमति रद्द करने के बाद नई तिथि का ऐलान  


लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षण सेवा में बने रहने व पदोन्नति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद शिक्षक संगठनों ने नवंबर-दिसंबर में दिल्ली कूच का एलान किया है। लेकिन नवंबर अंत में होने वाले एक बड़े कार्यक्रम से अब इसकी संभावना नहीं है। यही वजह है कि नौ राज्यों के शिक्षक संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) ने अब पांच दिसंबर को दिल्ली कूच का एलान किया है।

टीएफआई ने पिछले दिनों दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में बैठक कर 21 नवंबर को महारैली की घोषणा की थी। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि नवंबर के अंत में सिख समाज ने एक राष्ट्रीय आयोजन किया है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हो रहे हैं। इससे दिल्ली प्रशासन ने नवंबर में रैली की अनुमति निरस्त कर दी है। इसे देखते हुए हमने पांच दिसंबर को महारैली करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली रैली के लिए संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। महारैली के माध्यम से हम 27 जुलाई 2011 को टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को इससे मुक्त रखने की मांग करेंगे ताकि देश भर के लाखों शिक्षकों को राहत मिल सके।


शिक्षक संघर्ष मोर्चा भी कर रहा तैयारी

अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा भी 24 नवंबर को दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। मोर्चा पदाधिकारियों के अनुसार इसमें यूपी से दो लाख से अधिक शिक्षक जाएंगे। इसके लिए सभी संघटक संगठनों को अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। मोर्चा ने टीईटी लागू होने से पहले शिक्षकों पर इसे थोपे जाने का विरोध कर रहे हैं।

सभी प्रस्तावित कार्यक्रम

🔴 अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा का 24 नवंबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन
🔴 अटेवा का 25 नवंबर को दिल्ली कूच मामले को लेकर पुरानी पेंशन व टीईटी का विरोध
🔴 अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ का जंतर मंतर पर धरना 11 दिसंबर को



टीईटी को लेकर देशभर के शिक्षक 21 नवंबर को दिल्ली में करेंगे महारैली, नौ राज्यों के शिक्षक संगठनों ने चुने टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारी

दिल्ली की बैठक में यूपी के डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा बने टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष

कहा, 27 जुलाई 2011 के पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता न्याय के खिलाफ


लखनऊ। देशभर के परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी गई है। इसके विरोध में देशभर के शिक्षक 21 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली करेंगे। इसके माध्यम से 27 जुलाई 2011 से पहले के नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखने की मांग करेंगे।


यह निर्णय नौ राज्यों के शिक्षक संगठनों द्वारा टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) की शनिवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक में लिया गया। बैठक में पहले संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारियों का चुनाव हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश के डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष, झारखंड के राम मूर्ति ठाकुर महासचिव, संजय सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष, शिवशंकर पांडेय कोषाध्यक्ष व देवेंद्र श्रीवास्तव संयुक्त महासचिव चुने गए। 

राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने कहा कि 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्याय के सिद्धांत के विपरीत है। पूरे देश का शिक्षक इसके खिलाफ हैं इसलिए 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखने के लिए देश भर के शिक्षक 21 नवंबर को दिल्ली में महारैली कर केंद्र सरकार को ज्ञापन देंगे। महासचिव राममूर्ति ठाकुर ने कहा कि कोई भी कानून बनने की तिथि से लागू होता है किंतु शिक्षकों पर पूर्व से लागू करके लाखों शिक्षकों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।


ये पदाधिकारी भी चुने गए
उपाध्यक्ष पद पर अनूप केसरी, केदार जैन, मुनीष मिश्रा, विनोद यादव, राधेरमण त्रिपाठी, राजेश धर दुबे, मेघराज भाटी, बालेंद्र चौधरी, दीपक शर्मा, वंदना सक्सेना चुने गए। सचिव पद पर संजीव शर्मा, यशपाल सिंह, वेदप्रकाश मिश्रा, अनुज कुमार, त्रिवेंद्र कुमार, राजेश लिटौरिया, देवेश कुमार, आशुतोष त्रिपाठी, अर्चना तिवारी, कल्पना रजौरिया चुने गए। अरुणेंद्र वर्मा व अजय सिंह राष्ट्रीय सचिव बने।




टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन के लिए साथ आए नौ राज्यों के शिक्षक, बनाया नया संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) 

दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में तय होगी रैली की तिथि, पदाधिकारियों का चुनाव भी होगा


लखनऊ। देशभर के लाखों स्कूली शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए यूपी समेत नौ राज्यों के शिक्षक संगठन एक साथ आए हैं। उन्होंने आंदोलन के लिए नए संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) का गठन किया है। इसके माध्यम से आगे का आंदोलन संचालित किया जाएगा।


टीईटी मामले में आंदोलन के लिए उत्तर प्रदेश के साथ ही बिहार, उत्तराखंड, झारखंड, दिल्ली, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हरियाणा व राजस्थान के शिक्षक संगठन एक साथ एक मंच पर आए हैं। इसी क्रम में टीएफआई की पहली बैठक 25 नवंबर को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में होगी। इसमें दिल्ली रैली के लिए तिथि तय की जाएगी। साथ ही इसमें संगठन के पदाधिकारियों का चुनाव भी होगा।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव राममूर्ति ठाकुर के संयोजन में टीएफआई का गठन हुआ है। 25 अक्टूबर की बैठक में फेडरेशन के अन्य पदाधिकारियों का चुनाव होगा। फिर नई कमेटी टीईटी के विरुद्ध दिल्ली में होने वाली रैली की तिथि की घोषणा करेगी। 

उन्होंने कहा कि आरटीई लागू होने के पहले राज्य सरकारों व एनसीटीई द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को ही शिक्षक नियुक्त किया गया है। अब 20-25 साल पहले नियुक्त शिक्षक को वर्तमान में नियुक्ति के लिए निर्धारित योग्यता अर्जित करने को विवश करना कैसा न्याय है। जब तक यह निर्णय वापस नहीं होता इसके विरुद्ध व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाया जाएगा।

Tuesday, November 25, 2025

टीईटी के विरोध में यूपी समेत देश के शिक्षकों ने भरी हुंकार, करीब 22 राज्यों से आए शिक्षकों ने दिल्ली में किया प्रदर्शन

टीईटी के विरोध में यूपी समेत देश के शिक्षकों ने भरी हुंकार, करीब 22 राज्यों से आए शिक्षकों ने दिल्ली में किया प्रदर्शन

देश भर से आए शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सोमवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर ताकत दिखाई

शीतकालीन सत्र के बीच संसद के घेराव का ऐलान, 22 राज्यों के करीब एक लाख शिक्षक साथ आए

25 नवंबर 2025
नई दिल्ली/लखनऊ। शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व के सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता से छूट दिए जाने की मांग को लेकर देशभर के 22 राज्यों के करीब एक लाख से अधिक शिक्षकों ने सोमवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। 28 शिक्षक संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से गठित अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले शिक्षकों ने सरकार को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि संसद के शीतकालीन सत्र में सेवारत शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किए जाने संबंधी संशोधित अध्यादेश पारित नहीं किया जाता है तो देशभर के लाखों अध्यापक संसद का घेराव करेंगे।


कई संगठन एक साथ जुटेः धरना प्रदर्शन में अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक बासवराज गुरिकर, सह संयोजक एवं यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर, प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी, महामंत्री उमाशंकर सिंह, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक एसोसिएशन के विनय तिवारी, शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के अनिल यादव, यादवेन्द्र शर्मा, अभय पांडेय, के.के. शर्मा, पीयूष कटियार, रविप्रकाश सिंह, अंकित राय, प्रकाशनाथ त्रिपाठी, हेमंत तिवारी, पंकज यादव, संतोष यादव, धर्मेंद्र चाहर व निधि वर्मा आदि ने शिक्षकों को संबोधित कर शिक्षकों की आवाज को बुलन्द किया। धरना प्रदर्शन कार्यक्रम का संचालन संजय मिश्रा ने किया।





टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का दिल्ली में विरोध आज 

24 नवंबर 2025
लखनऊ। देश भर के सेवारत परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में विरोध-प्रदर्शन दिल्ली में भी सोमवार से शुरू होगा। विभिन्न शिक्षकों के संगठन अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से सोमवार 24 नवंबर को जंतर-मंतर पर धरना दिया जाएगा। इसके लिए काफी संख्या में शिक्षक प्रदेश से भी रविवार को रवाना हुए।

भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा में शामिल यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि देश भर के 22 राज्यों के शिक्षक संगठन इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। शिक्षक प्रदर्शन से न सिर्फ अपनी मांग बुलंद करेंगे बल्कि केंद्र सरकार को चेतावनी भी देंगे कि इस मामले में लड़ाई आर-पार की होगी। उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र में आरटीई लागू होने से पहले से नियुक्त शिक्षकों को इससे छूट देने की मांग की है।



टीईटी अनिवार्यता के विरोध में 22 राज्यों के शिक्षक 24 नवंबर को करेंगे दिल्ली कूच, अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने किया एलान


नई दिल्ली। वर्ष 2011 से पहले नियुक्त पहली से आठवीं कक्षा के लाखों शिक्षकों ने अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का विरोध करते हुए 24 नवंबर को दिल्ली कूच का एलान किया है। 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षक संसद के शीतकालीन सत्र से पहले विरोध धरने में अपनी मांग रखेंगे। उन्होंने सरकार से उनके हितों की रक्षा करने की मांग दोहराई है।


अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह संयोजक अनिल यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, राजस्थान, झारखंड, दिल्ली समेत अन्य राज्यों के लाखों सेवारत शिक्षक एकजुट हो गए हैं। भर्ती विज्ञापन में 2011 से पहले ऐसी कोई शर्त नहीं थी, फिर इतने सालों की सेवा के बाद यह बदलाव गलत है। यादव ने कहा कि सरकार शीतकालीन सत्र में अध्यादेश लाकर टीईटी को अनिवार्य करने के आदेश में संशोधन करे


बच्चों को पढ़ाएं या परीक्षा की तैयारी करें
शिक्षक संगठनों ने सवाल उठाया है कि शिक्षकों पर 2025 में अचानक टीईटी अनिवार्य का फैसला क्यों थोपा गया। वे बच्चों को पढ़ाएं या अपनी परीक्षा की तैयारी करें? एक अनुमान के मुताबिक, टीईटी लागू होने से उत्तर प्रदेश में लगभग 1.86 लाख और देश भर में लगभग 10 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। जंतर-मंतर पर होने वाले इस आंदोलन के लिए अक्तूबर से ही जनसंपर्क और बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया था।




टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक संघर्ष मोर्चा दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन की तैयारी में जुटा, 24 नवंबर को देशभर से दिल्ली पहुंचेंगे शिक्षक

लखनऊ। देशभर के प्राथमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में अलग-अलग शिक्षक संगठनों ने दिल्ली कूच का एलान कर रखा है। इसी क्रम में अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा 24 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर घोषित प्रदर्शन को सफल बनाने की तैयारी में जुटा है।

मोर्चा पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रदर्शन में प्रदेश ही नहीं देशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल होकर टीईटी अनिवार्यता का विरोध करेंगे। वे एनसीटीई द्वारा देशभर के शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य किए जाने का हर स्तर पर विरोध करेंगे। शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय 2011 से पहले कार्यरत शिक्षकों के साथ अन्याय है। मोर्चा किसी भी दशा में इस काले कानून को लागू नहीं होने देगा।

मोर्चा के राष्ट्रीय सह संयोजक अनिल यादव ने कहा कि जरूरत पड़ी तो शिक्षक संसद का घेराव भी करेंगे। बता दें कि उत्तर प्रदेश सहित चार राज्यों की सरकारों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दायर की है। हालांकि अभी इस पर सुनवाई नहीं हुई है। 



टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली कूच के लिए जिलों में शुरू होगा जनसंपर्क, अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा 24 नवंबर को करेगा दिल्ली में प्रदर्शन

लखनऊ। देशभर के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद शिक्षकों का विरोध तेज हो रहा है। कई शिक्षक संगठनों के मोर्चे ने 24 नवंबर को दिल्ली कूच का एलान किया है। इसके लिए 25 अक्तूबर से देशभर के सभी जिलों में जनसंपर्क और बैठकों का सिलसिला शुरू होगा।

शिक्षक संगठनों के संयुक्त मोर्चा अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने 24 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलन की तैयारी तेज कर दी है। इसमें लाखों शिक्षक शामिल होंगे। दिवाली आदि त्योहारों के बाद शिक्षकों ने इसके लिए तैयारी तेज कर दी है। इसी क्रम में 25 से 31 अक्टूबर तक पूरे देश के जिला मुख्यालयों पर मोर्चे में शामिल सभी घटक संगठन शिक्षकों की बैठकें करेंगे।

अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह संयोजक अनिल यादव ने बताया कि बैठक कर अधिक से अधिक शिक्षकों को दिल्ली जंतर मंतर पर पहुंचने के लिए तैयार करेंगे। इसके लिए स्कूलों में जनसंपर्क भी किया जाएगा। उन्होंने कहा की दिल्ली जाने वालों की संख्या और तैयारी की जानकारी शीर्ष नेतृत्व को 10 नवंबर तक सभी प्रदेशों द्वारा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि टीईटी लागू होने से उत्तर प्रदेश में लगभग 1.86 लाख और देशभर में लगभग 10 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।


संयुक्त मोर्चा की मांगें

केंद्र सरकार टीईटी को अनिवार्य करने के आदेश में संशोधन करे
शिक्षकों की सेवा सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं
केंद्र सरकार संसद में अध्यादेश लाकर देश के शिक्षकों के हितों की रक्षा करे




टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन 24 नवंबर को, संयुक्त मोर्चा में शामिल प्रदेश के 12 शिक्षक संगठनों ने बैठक कर तय की रणनीति

शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के खिलाफ अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा की पहली राज्य स्तरीय बैठक 

शिक्षकों के अलग-अलग संगठनों ने संयुक्त मोर्चा बनाकर आंदोलन की रणनीति तैयार की 


 लखनऊ: कक्षा एक से आठ तक के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ देश भर के शिक्षक एकजुट हो गए हैं। बुधवार को लखनऊ में अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा की पहली राज्य स्तरीय बैठक में शिक्षकों ने 24 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आर-पार के संघर्ष का एलान किया। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि केंद्र सरकार ने आदेश वापस नहीं लिया, तो पूरे देश से करीब 10 लाख शिक्षक दिल्ली पहुंचकर आंदोलन करेंगे जिनमें उत्तर प्रदेश के लगभग 1.86 लाख शिक्षक भी होंगे।

बैठक में सोचा के राष्ट्रीय संयोजक योगेश त्यागी, सह-संयोजक विनय तिवारी, अनिल यादव और संतोष तिवारी ने कहा कि 23 अगस्त 2010 से पहले कार्यरत शिक्षकों पर किसी भी दशा में टीईटी लागू नहीं होने दिया जाएगा। यदि जरूरत पड़ी तो संसद का घेराव भी किया जाएगा। बैठक में तय किया गया कि 25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक देशभर के सभी जिलों में शिक्षकों की बैठकें आयोजित की जाएंगी ताकि 24 नवंबर के आंदोलन की पूरी तैयारी की जा सके।


नेताओं ने कहा कि एनसीटीई (नेशनल काउंसिल फार टीचर एजुकेशन) का आदेश शिक्षकों की वर्षों की मेहनत और योग्यता पर सवाल खड़ा करता है। 55 वर्ष का शिक्षक अब बच्चों को पढ़ाए या खुद परीक्षा की तैयारी करें? शिक्षक नेताओं उत्तर प्रदेश सरकार भी मांग की कि वह सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिव्यू पिटीशन के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं का पैनल तैयार करे और केंद्र सरकार से बातचीत कर 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई द्वारा जारी आदेश के पालन की दिशा में पहल करे।

बैठक में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री उमाशंकर सिंह, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के महामंत्री नरेश कौशिक, उत्तर प्रदेश बीटीसी संघ के अध्यक्ष अनिल यादव, टीएससीटी के अध्यक्ष विवेकानंद आर्य, प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम प्रकाश साहू, एससी/एसटी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुंदर सिंह शास्त्री, यूटा के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर, महामंत्री ओम पोरवाल, अशासकीय सहायता प्राप्त शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष सुशील सिंह, अखिल भारतीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समर बहादुर सिंह और बेसिक शिक्षक एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र यादव प्रमुख रूप से शामिल हुए।



टेट के अनिवार्यता के खिलाफ 24 नवंबर को जंतर-मंतर पर जुटेंगे शिक्षक

लखनऊ : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) अनिवार्यता कानून में संशोधन और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर शिक्षक 24 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन करेंगे। रविवार को अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ की आनलाइन बैठक में इसे लेकर राज्यवार जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। 

राष्ट्रीय अध्यक्ष वासवराज गुरिकर और महासचिव कमलाकांत त्रिपाठी ने कहा कि जब शिक्षा का अधिकार अधिनियम और टेट परीक्षा व्यवस्था अस्तित्व में नहीं थी, उस समय नियुक्त शिक्षकों पर वर्तमान नियम लागू करना अन्याय है। प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर गठित अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के तहत सभी संगठनों को एक मंच पर लाने की तैयारी चल रही है।




अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ की बैठक में टीईटी के मुद्दे पर सड़क से संसद तक संघर्ष का एलान

लखनऊ। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ की राष्ट्रीय वर्किंग कमेटी की बैठक रविवार को मदुरई तमिलनाडु में हुई। इसमें टीईटी के मुद्दे पर सड़क से संसद तक संघर्ष का ऐलान किया गया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि बैठक में टीईटी अनिवार्यता, विभिन्न प्रांत के शिक्षकों से संबंधित समस्याओं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षक विरोधी मुद्दों, संविदा शिक्षको के नियमितीकरण, 8वें वेतन आयोग पर त्वरित कार्रवाई पर विस्तृत चर्चा हुई। वर्किंग कमेटी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सभी ने एक स्वर में संघर्ष की सहमति दी। 

उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षक को टीईटी से छूट दी गई थी। इस पर एनसीटीई को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। ताकि देश भर के लाखों शिक्षकों को राहत मिल सके।

बैठक में राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ मजबूत आंदोलन व सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी करने की रणनीति बनी। बैठक में उत्तर प्रदेश से ठाकुरदास यादव, आलोक मिश्रा, अनुज त्यागी, नरेश कौशिक, योगेश शुक्ला, संजय पांडेय आदि उपस्थित थे।




टीईटी अनिवार्यता के मामले में तमिलनाडु में आज बैठक कर रणनीति बनाएंगे शिक्षक प्रतिनिधि

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद देश भर के शिक्षक आंदोलन तेज करने की तैयारी में जुटे हैं। इसके लिए अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की 12 अक्तूबर को तमिलनाडु के मदुरई में बैठक होगी। इसमें देश के सभी राज्यों के शिक्षक प्रतिनिधि भाग लेंगे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि बैठक में आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। टीईटी अनिवार्यता से जुड़ी जटिलताओं पर केंद्र सरकार को कैसे समाधान निकालने के लिए तैयार जाए, इस पर भी मंथन होगा। बैठक में विभिन्न राज्यों के शिक्षकों के लिए समान वेतन आयोग लागू करना, पुरानी पेंशन की बहाली आदि पर भी चर्चा होगी। 

इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के शिक्षकों के लिए समान वेतन आयोग लागू करना, पुरानी पेंशन की बहाली विभिन्न राज्यों में खाली पदों को भरने, 8वें वेतन आयोग पर त्वरित कार्यवाही के लिए चर्चा की जाएगी। उन्होंने बताया कि बैठक में इन सभी मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन की रणनीति व तिथि भी तय की जाएगी।




टीईटी अनिवार्यता के मामले को लेकर लखनऊ में शिक्षक मोर्चा की बैठक में बनेगी रणनीति

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के मामले में चल रहा आंदोलन तेजी पकड़ रहा है। इस क्रम में प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों - के मोर्चा अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा की पहली - बैठक 15 अक्तूबर को लखनऊ में होगी। इसमें आंदोलन - की अगली रणनीति तय की जाएगी। 

मोर्चा के राष्ट्रीय सह - संयोजक अनिल यादव ने बताया कि राजधानी के डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ हाल, लोक निर्माण विभाग में सुबह 11 बजे - से बैठक आहूत की गई है। इसमें सभी शिक्षक संगठनों के - प्रतिनिधि शामिल होंगे। वहीं जो शिक्षक संगठन मोर्चा में नहीं - भी हैं, वे भी इसमें शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई शिक्षक हित की है। इसके लिए सभी का एकजुट होना जरूरी है। 




टीईटी अनिवार्यता के मुद्दे पर दीपावली बाद दिल्ली जाम करने की तैयारी

लखनऊ । टीईटी मुद्दे पर देश भर के प्राइमरी शिक्षक दीपावली बाद दिल्ली जाम करने की तैयारी में हैं। आगामी 15 अक्टूबर को इसके लिए प्रत्येक राज्य की राजधानियों में उस राज्य के शिक्षकों की बैठक बुलाई गई है। यूपी सबसे अधिक शिक्षकों वाला राज्य होने के कारण प्रस्तावित आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता की भूमिका में है।

यही कारण है कि टीईटी मामले को लेकर हाल ही में देश भर के शिक्षक संगठनों को मिलाकर बना संयुक्त मंच अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा की अगुवाई भी यूपी के ही जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी को सौंपी गई है। योगेश मोर्चा के संयोजक बनाए गए हैं।

लखनऊ में 15 अक्तूबर को बड़े स्तर पर मोर्चा से जुड़े यूपी के सभी शिक्षक संगठनों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें दिल्ली में नवम्बर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित बैठक के एजेण्डे को अन्तिम रूप दिया जाएगा।


नौकरी पर संकट गहरा गया है: शिक्षक संगठन

बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से शिक्षकों की नौकरी पर संकट गहरा गया है। अगले दो वर्ष के भीतर टीईटी देनी होगी अन्यथा नौकरी छोड़नी पड़ सकती है। वहीं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के मंत्री वीरेन्द्र सिंह का कहना है कि कोर्ट के आदेश को शिथिल कराने के लिए हम सरकार पर कानून में संशोधन करने का दबाव बना रहे हैं।


यूपी के एक संगठन ने निर्णय को दी है चुनौती

यूपी के यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ याचिका दायर की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिक दाखिल कर केन्द्र सरकार के वर्ष 2017 के अधिनियम को चुनौती दी है, जिसमें संबंधित अधिनियम संशोधन को मौलिक अधिकारों के विरुद्ध बताते हुए असंवैधानिक करार दिया गया है।




टीईटी के मुद्दे पर केंद्र का रुख अब तक स्पष्ट न होने से शिक्षकों की बढ़ रही नाराजगी 

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने बैठक कर जताई नाराजगी


लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट से टीईटी की अनिवार्यता के आदेश के एक महीने बाद भी केंद्र सरकार द्वारा अपना पक्ष स्पष्ट न करने पर प्रदेश के शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शनिवार को बैठक कर केंद्र सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई और ठोस निर्णय न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देश भर के शिक्षक नौकरी को लेकर चिंतित हैं। विभिन्न संगठनों ने प्रधानमंत्री व शिक्षामंत्री को हजारों पत्र भेजे हैं, लेकिन अब तक इस पर केंद्र सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने कहा, केंद्र सरकार को इसका समाधान प्राथमिकता से करना चाहिए।

प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष शालिनी मिश्रा ने कहा, अगर जल्द ही केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की तो एसोसिएशन शिक्षक संगठनों के साथ मिलकर देशव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होगा। बैठक में विधि

सलाहकार आमोद श्रीवास्तव, विनीत सिंह, शशि प्रभा सिंह, राकेश तिवारी, सुशील रस्तोगी, धर्मेंद्र शुक्ला, तुलाराम गिरी, सुशील यादव आदि शामिल हुए।




कानूनी लड़ाई के साथ-साथ आंदोलन की तैयारी में भी जुटे शिक्षक संघ, टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली कूच की तैयारी

15 अक्टूबर तक कालीपट्टी बांधकर विरोध कर रहे हैं शिक्षक

परिषदीय विद्यालयों में 1.86 लाख शिक्षक बगैर टीईटी के सेवारत


लखनऊ: कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए सेवा में बने रहने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा टीईटी) पास करना अनिवार्य करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विवाद गहराता जा रहा है। शिक्षक संगठनों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। वहीं, राज्य सरकार भी शिक्षकों के पक्ष में पहले ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुकी है। अब शिक्षक संगठन कानूनी लड़ाई के साथ-साथ आंदोलन की तैयारी में भी जुट गए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नरना-प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई जा रही है, ताकि सरकार पर बाव बनाया जा सके। वहीं, बहुत वे शिक्षक टीईटी की तैयारियों में भी जुटे हैं।


प्रदेश में प्राथमिक व उच्च ाथमिक विद्यालयों में चार लाख ० हजार शिक्षक कार्यरत हैं, इनमें करीब एक लाख 86 हजार शिक्षक बगैर टीईटी के हैं। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल हो चुकी है।


15 अक्टूबर तक काली पट्टी बांधकर शिक्षक आपत्ति जताते हुए शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इसके बाद दिल्ली कूच किया जाएगा। उधर, उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने सरकार से मांग की है कि प्राथमिक विद्यालयों में 25 वर्षों से काम कर रहे बीटीसी, सीटीईटी और यूपी टीईटी पास शिक्षामित्रों को नई नियमावली बनाकर सुपर-टीईटी से मुक्त करते हुए सहायक अध्यापक पद पर स्थायी किया जाए।


प्रदेश में करीब 70 हजार ऐसे शिक्षामित्र हैं, जिनके पास बीटीसी प्रशिक्षण और टीईटी या सीटीईटी की पात्रता है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 1.48 लाख से अधिक शिक्षामित्र परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत हैं। इनमें से अधिकतर ने दो वर्षीय दूरस्थ बीटीसी प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। खास बात यह है कि करीब 70 हजार शिक्षामित्र बीटीसी के साथ टीईटी या सीटीईटी भी पास कर चुके हैं। जिस तरह उत्तराखंड सरकार ने 29 जुलाई 2019 को नियमावली जारी कर योग्य शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त किया था, उसी तरह यूपी सरकार को भी आदेश जारी करना चाहिए। जब तक सभी शिक्षामित्रों को स्थायी नियुक्ति नहीं दी जाती, तब तक उनके मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जानी चाहिए।


टीईटी की तैयारी में जुटे कई शिक्षक

कई शिक्षक किसी भी स्थिति में रिस्क नहीं लेना चाहते। उन्होंने टीईटी के सैंपल पेपर खरीदकर तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही वे माक टेस्ट भी दे रहे है। कई वाट्सएप ग्रुप पर शिक्षक आपस में आनलाइन लिंक शेयर कर टीईटी का सिलेबस और माक टेस्ट उपलब्ध करा रहे हैं। यानी एक तरफ टीईटी की अनिवार्यता को लेकर विरोध और आंदोलन की तैयारी है, तो दूसरी तरफ कई शिक्षक भविष्य सुरक्षित करने के लिए परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं।
 

Saturday, July 26, 2025

01 अगस्त 2025 को पूरे प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर NPS/UPS एवं निजीकरण के खिलाफ रोष मार्च हेतु अटेवा ने संगठनों से मांगा समर्थन

01 अगस्त 2025 को पूरे प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर NPS/UPS एवं निजीकरण के खिलाफ रोष मार्च हेतु अटेवा ने संगठनों से मांगा समर्थन

23 जुलाई 2025





पुरानी पेंशन बहाली के लिए होगा देशव्यापी आंदोलन, 
एक अगस्त को देशभर में रोष मार्च पांच सितंबर को सामूहिक उपवास, 25 नवंबर को दिल्ली में रैली

NMOPS की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने की घोषणा

14 जुलाई 2025
लखनऊ। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) ने पुरानी पेंशन बहाली के लिए फिर व्यापक आंदोलन की घोषणा की है। संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की रविवार को हुई ऑनलाइन बैठक में पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन पर चर्चा की गई। इसके बाद आंदोलन का विस्तृत प्रस्ताव पास किया गया।


संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि सरकार लगातार सरकारी संस्थाओं का निजीकरण कर रही है। सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। इससे शिक्षक-कर्मचारियों में निराशा है। इसे देखते हुए शिक्षकों कर्मचारियों ने व्यापक आंदोलन की घोषणा की है। इस क्रम में एक अगस्त को पूरे देश में सभी जिला मुख्यालयों पर पुरानी पेंशन बहाली के लिए रोष मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद 5 सितंबर शिक्षक दिवस पर सभी शिक्षक व कर्मचारी सामूहिक उपवास करेंगे।

उन्होंने बताया कि 1 अक्तूबर को सोशल मीडिया एक्स पर अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद 25 नवंबर को दिल्ली में रैली होगी। राष्ट्रीय महासचिव स्थित प्रज्ञा ने सरकार से निजीकरण समाप्त करने की मांग की। राष्ट्रीय सचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी ने कहा कि सरकार स्कूलों का मर्जर कर बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रही है। संगठन इसका हर स्तर पर विरोध करेगा। बैठक में राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राजेश कुमार, शांताराम तेजा, वरुण पांडेय, अमरीक सिंह, प्रेमसागर, परमानंद डहरिया शामिल हुए। 

Thursday, July 24, 2025

न दूरी देखी न दिक्कत, बस कर दिया स्कूलों का विलय, जिलों में बढ़ रहा है बेसिक शिक्षा विभाग की मनमानी का विरोध, अभिभावकों-बच्चों के वीडियो सोशल मीडिया पर हो रहे वायरल

न दूरी देखी न दिक्कत, बस कर दिया स्कूलों का विलय, जिलों में बढ़ रहा है बेसिक शिक्षा विभाग की मनमानी का विरोध, अभिभावकों-बच्चों के वीडियो सोशल मीडिया पर हो रहे वायरल


लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में कम नामांकन वाले 10827 परिषदीय विद्यालयों का विलय (पेयरिंग) किया है। हालांकि, विलय में स्पष्ट मानक न होने से जिलास्तर पर मनमानी की गई। कहीं स्कूलों का विलय दो से तीन किमी दूर कर दिया गया तो कहीं बच्चों को हाईवे और रेलवे लाइन पार करके जाना पड़ रहा है। कहीं पूरे शिक्षक नहीं हैं तो कई जगह खराब रास्ते शिक्षा की राह में रोड़ा बन रहे हैं। बच्चे स्कूल जाने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में अधिकारियों को बच्चों व अभिभावकों को मनाने के लिए गांव-गांव जाना पड़ रहा है। 


कुशीनगर में 178 विद्यालयों के विलय के बाद आधे बच्चे भी स्कूल नहीं पहुंच रहे। अब जिले-जिले में स्कूलों के विलय का विरोध मुखर हो रहा है। कानपुर देहात, उन्नाव, हरदोई समेत कई जिलों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शिक्षक संगठनों के साथ लोग व जनप्रतिनिधि भी सड़क पर उतर रहे हैं। 


अभिभावकों का कहना है कि बिना संवाद और जमीनी हकीकत समझे निर्णय लिया। अगर अधिकारियों ने संवाद के बाद फैसला लिया होता तो यह स्थिति न आती। विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने न तो विद्यालयों की दूरी देखी न बच्चों की दिक्कत, बस ताबड़तोड़ विलय कर दिया। 


देवरिया में तो ज्यादा दूरी को देखते हुए बीएसए ने 30 विद्यालयों के विलय आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, कई जिलों में अब भी बच्चों व अभिभावकों की दिक्कत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों के विरोध के बीच आशंका है कि आने वाले दिनों में ड्रॉपआउट दर बढ़ सकती है।