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Sunday, November 23, 2025

मदरसा शिक्षक को अनियमित वेतन - पेंशन देने के मामले में शासन की बड़ी कार्रवाई, ज्वाइंट डायरेक्टर समेत चार का निलंबन

मदरसा शिक्षक को अनियमित वेतन - पेंशन देने के मामले में शासन की बड़ी कार्रवाई, ज्वाइंट डायरेक्टर समेत चार का निलंबन 

लखनऊ: आजमगढ़ के तत्कालीन मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा खान को विदेश में रहने के दौरान नियम विरुद्ध वेतन, पेंशन व अन्य देयों का भुगतान किए जाने के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई की गई है। शासन ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेष नाथ पांडेय, आजमगढ़ के तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक अधिकारी साहित्य निकष सिंह, प्रभात कुमार व लालमन को निलंबित किया है। वर्तमान में साहित्य निकष सिंह गाजियाबाद, प्रभात कुमार अमेठी और लालमन बरेली में तैनात हैं।


मदरसा दारूल उलूम अहिले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उजूम, आजमगढ़ के तत्कालीन शिक्षक शमशुल हुदा खान ने 19 दिसंबर, 2013 को स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता का परित्याग कर ब्रिटिश नागरिकता ली थी। इसके बाद भी शमशुल मदरसा प्रबंधक प्रधानाचार्य व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से 31 जुलाई, 2017 तक अनियमित रूप से वेतन लेता रहा। अनियिमत तरीके से उसके चिकित्सा अवकाश स्वीकृत किए गए। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद सेवानिवृत्ति लाभ जीपीएफ व पेंशन प्रदान कर दी गई। 

इस मामले की जांच संयुक्त निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण ने कराई थी। मामले में एडीएम प्रशासन आजमगढ़ ने 29 जनवरी, 2022 को खान को अनियमित वेतन के रूप में दिए गए 16.59 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश जारी किया था। इसके विरोध में शमशुल हुदा खान ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने एडीएम प्रशासन आजमगढ़ के रिकवरी आदेश को निरस्त कर प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाने तथा समिति की रिपोर्ट के आधार पर सक्षम अधिकारी द्वारा आदेश जारी किए जाने का आदेश दिया था।

हाई कोर्ट के आदेश पर तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी, जिसमें आजमगढ़ के अपर जिलाधिकारी व अपर पुलिस अधीक्षक और मंडलीय उप निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण शामिल थे। समिति ने शमशुल खान को दी गई अनियमित पेंशन व वेतन की धनराशि की रिकवरी किए जाने की संस्तुति की थी। साथ ही मामले में संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही तथा खान के मदरसा शिक्षक रहते हुए आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, सिंगापुर, श्रीलंका व खाड़ी देशों के अलावा दो-तीन बार पाकिस्तान की यात्रा किए जाने की जांच एजेंसी से पड़ताल कराए जाने की सिफारिश भी की गई थी। एटीएस की वाराणसी इकाई ने भी शमशुल की विदेश यात्राओं को लेकर जांच की थी।



मदरसा शिक्षकों की उपस्थिति की गहनता से होगी जांच, शासन ने दिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को निर्देश


लखनऊ। प्रदेश में मदरसा शिक्षकों की उपस्थिति की गहनता से जांच होगी। अनुदानित मदरसों में प्रबंधन से हर माह उपस्थिति प्रमाणपत्र लेने के बाद ही शिक्षकों का वेतन जारी होगा। ब्रिटेन में जा बसे संदिग्ध मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा का मामला सामने आने पर शासन ने चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

उत्तर प्रदेश में 561 मदरसे सरकार से अनुदानित हैं। इनमें कुल 231806 छात्र पंजीकृत हैं। अनुदानित मदरसों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की कुल संख्या क्रमशः 9889 और 8367 है। हाल ही में एटीएस की जांच में मदरसा शिक्षक शमशुल के संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आए हैं।

वह 2007 से वह ब्रिटेन में रह रहा था और 19 दिसंबर 2013 को उसने ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 2007 से 2017 तक बिना उसकी सेवा पुस्तिका की जांच किए प्रति वर्ष वेतन वृद्धि की गई। इतना ही नहीं 1 अगस्त 2017 से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रदान करते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई।

एटीएस की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में कई अधिकारी फंस गए हैं। साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ऐसी स्थिति दुबारा उत्पन्न न होने देने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। एक-एक शिक्षक की हाजिरी सत्यापित होगी, उसके बाद ही भुगतान होगा।

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मदरसों का औचक मुआयना करके भी देखेंगे कि जिन शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है, वे नियमित मदरसों में आ भी रहे हैं या नहीं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध के साथ बताया कि शिक्षकों की उपस्थिति चेक करने के नियम पहले से भी थे, अब इन निर्देशों पर कड़ाई से अमल करना है। ताकि, शमशुल जैसे मामले सामने नहीं आ सके।

Wednesday, June 23, 2021

परिषदीय स्कूल खुलने पर शिक्षकों को आवश्यकतानुसार विद्यालयों में बुलाया जा सकेगा

परिषदीय स्कूल खुलने पर शिक्षकों को आवश्यकतानुसार विद्यालयों में बुलाया जा सकेगा

शिक्षकों व शिक्षणोत्तर कर्मियों की उपस्थिति का निर्णय लेगा प्रबंधन


■  यह भी देखें: संबंधित आदेश पढ़ने के लिए क्लिक करें। 👇


आजमगढ़ : बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े स्कूल पहली से आठवीं तक के परिषदीय विद्यालय एक जुलाई से खुल जाएंगे लेकिन छात्र-छात्रओं के लिए बंद रहेंगे। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों को आवश्यकतानुसार विद्यालय बुलाया जाएगा। दूसरे बोर्ड से जुड़े मान्यता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षकों एवं शिक्षणोत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए प्रबंधन निर्णय लेगा।


इसका मतलब यह कि छोटे बच्चों को स्कूल जाने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। 2702 परिषदीय विद्यालय हैं जिसमें प्राथमिक विद्यालय 1737, उच्च प्राथमिक विद्यालय 484 व कंपोजिट विद्यालय 481 हैं। इनमें पुराने छात्रों की संख्या 4,11,727 हैं। कोरोना की दूसरी लहर में मार्च से ही विद्यालयों को बंद किया गया है।

डेढ़ साल से ठप है पठन-पाठन:

कोरोना के चलते बच्चों की पढ़ाई पर डेढ़ साल से बंद है। आनलाइन शिक्षा के नाम पर बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि बच्चों को लाभ मिला है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा से अभिभावक परेशान हैं। ऐसे में छोटे बच्चे कितना लाभ ले पा रहे हैं, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि स्कूल खोले जाने की अवधि में 100 फीसद बच्चों का विद्यालय में नामांकन कराना होगा। मिड-डे-मील की धनराशि को छात्र-छात्रओं, अभिभावकों के बैंक खाते में समय से भेजने की व्यवस्था करनी होगी। निश्शुल्क किताबों का वितरण, मिशन प्रेरणा के कार्यों में सहयोग एवं जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के कार्यो में सहयोग करना होगा।

परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो इसके लिए मिशन प्रेरणा के जरिए ई-पाठशाला चलाया जा रहा है। सभी प्रधानाचार्य, शिक्षक और समाज के जागरूक लोग भी जुड़े हैं।

Sunday, May 23, 2021

आजमगढ़ : मदरसों में फर्जी नियुक्ति में नपेंगे कुछ और अफसर, एसआईटी को मिले मिलीभगत के साक्ष्य, जल्द होगी पूछताछ

आजमगढ़ : मदरसों में फर्जी नियुक्ति में नपेंगे कुछ और अफसर, एसआईटी को मिले मिलीभगत के साक्ष्य, जल्द होगी पूछताछ

20 मदरसों के स्थलीय निरीक्षण में मिली है। चौंकाने वाली जानकारी

02 अफसरों को निदेशालय के प्रथम दृष्टया पाया गया है दोषी 


लखनऊ : मदरसों में अनियमित ढंग से हुई। नियुक्तियों के मामले में अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय भी जांच के घेरे में आ गया है। प्रदेश पुलिस के विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) को प्रारंभिक जांच में ही निदेशालय की मिली भगत के साक्ष्य मिले हैं। एसआईटी ने दो अफसरों को तो प्रथम दृष्ट्या दोषी भी पाया है। जल्द ही निदेशालय व मदरसा बोर्ड के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों ने पूछताछ हो सकती है। जांच में सामने आया है कि आजमगढ़ में एक सोसाइटी के अध्यक्ष ने अपनी बेटी को प्रधानाचार्य बना दिया और बाकी दो बेटियों को सहायक अध्यापक...।


एसआईटी को आजमगढ़ के 20 मदरसों के स्थलीय निरीक्षण तथा मदरसों एवं जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से प्राप्त अभिलेखों की जांच से चौंकाने वाली जानकारी मिली मदरसों में ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति की गई, जिनके प्रमाणपत्र ऐसी संस्था से निर्गत थे जो न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार की किसी संस्था द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। कुछ शिक्षक तो अपने पद पर नियुक्ति के अनुरूप शैक्षिक योग्यता ही नहीं रखते थे। कुछ की नियुक्ति सहायक अध्यापक आलिया के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता फाजिल के 55 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त होने पर भी की गई। एक शिक्षक द्वारा एक अंक के ग्रेस मार्क से तृतीय श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण की गई है। इसी तरह एक शिक्षक द्वारा तीन वर्ष का शिक्षण अनुभव दर्शाया गया। यह अनुभव प्रमाणपत्र जिस मदरसे से जारी किया गया वह उस समय मान्यता प्राप्त ही नहीं था ।

अपनी चारों बेटियों को बना दिया शिक्षक

एसआईटी की जांच में पता चला कि मदरसा जामिया नुरूल ओलूम मुबारकपुर आजमगढ़ में तो बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया यह मदरसा अंजूमन सिद्दीकीया जामिया नुरूल ओलूम मुबारकपुर सोसाइटी के द्वारा संचालित है। सोसाइटी के अध्यक्ष ने खुद चयन समिति का अध्यक्ष बनकर अपनी चार बेटियों में से एक तो प्रधानाचार्य तथा तीन को सहायक अध्यापक नियुक्त कर दिया। यह नियुक्तियां वर्ष 2013 से 2014 के बीच की गई हैं।




आजमगढ़ के मदरसों में फर्जी नियुक्ति : कुल 21 लोगों के खिलाफ एसआईटी ने दर्ज कराया केस, कई बड़े नाम शामिल।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के 20 मदरसों में फर्जी नियुक्ति मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद एसआईटी ने कुल 21 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें कई बड़े नाम शामिल  हैं। 


आजमगढ़ के मदरसों में फर्जी नियुक्तियों के मामले में एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद लखनऊ स्थित एसआईटी थाने में 21 लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। एसआईटी द्वारा लखनऊ में मुकदमा दर्ज कराने की खबर मिलते ही मदरसा प्रबंधकों में हड़कंप मच गया।

जिले के 20 मदरसों में फर्जी नियुक्तियों का मामला वर्ष 2017 में प्रकाश में आया था। मदरसा प्रबंधकों द्वारा फर्जी तरीके से शिक्षकों की तैनाती दिखा कर सरकारी अनुदान का गबन किया जा रहा था। शासन ने इस प्रकरण की जांच वर्ष 2020 में एसआईटी को सौंपी थी।

जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद एसआईटी थाना लखनऊ में मदरसा जामिया नुरूल उलूम के अध्यक्ष जहीर अहमद, प्रबंधक अहमदुल्लाह समेत 21 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इसमें अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय के तत्कालीन संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय, रजिस्ट्रार राहुल गुप्ता पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है। 

जिले के जिन मदरसों की जांच हुई है उनमें मुबारकपुर के मदरसा जामिया नुरुल उलूम, मदरसा अशरफिया सिराजुल उलूम नेवादा अमिलो, अरबिया दारूतालीम सोफीपुरा, बाबुल ईल्म निस्वां, जफरपुर का मदरसा अरबिया जियाउल उलूम मंदे, बम्हौर का मदरसा मदरसतुल आलिया शेख रज्जब अली, जामिया अरबिया तनवीर उल उलूम नौशहरा, अरबिया कासिमुल मगरांवा, इस्लामिया जमीअतुल कुरैश जालंधरी समेत कुल 20 मदरसे शामिल है।

मामले में एसआईटी, लखनऊ के डीजी राजेंद्र पाल सिंह ने कहा कि  एक आरटीआई के माध्यम से आजमगढ़ व मिर्जापुर जिले के मदरसों में फर्जी नियुक्ति का खुलासा हुआ था। इसके बाद ही शासन ने एसआईटी को जांच सौंपी थी। आजमगढ़ के 20 मदरसों में फर्जीवाड़े की बात थी। जांच में आरोप की पुष्टि होने पर एसआईटी थाने में कुल 21 लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया गया है।

इन लोगों पर भी हुआ है मुकदमा
फर्जीवाड़े के इस प्रकरण में इन मदरसा प्रबंधकों अख्तर अब्बास, फैजान अहमद, मोहम्मद आरिफ, गुलाम मोहम्मद, गयासुद्दीन, हाफिजुर रहमान के अलावा सहायक अध्यापक गयासुर रहमान, अब्दुल अलीम, अब्बास अली, बरकत अहमद, यासमीन अख्तर ,अरमान अहमद खान, मोहम्मद मेहंदी, साजिदा बानो तथा लिपिक शादाब अहमद, फहीम एजाज, मोहम्मद अरशद, मोहम्मद शाहनवाज और चपरासी मुश्ताक अहमद के खिलाफ नामजद एफआईआर की गई है। इस मामले में अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

Thursday, May 6, 2021

कोविड से ठहर गई कायाकल्प योजना, अधिकांश स्कूलों की नहीं बदली सूरत

कोविड से ठहर गई कायाकल्प योजना, अधिकांश स्कूलों की नहीं बदली सूरत


आजमगढ़। आपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों को बुनियादी सुविधाओं से लैस करना है। विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों व अन्य कार्यों पर बड़ी धनराशी खर्च की जा रही है इसके बावजूद विद्यालयों की सूरत नहीं बदली है।


कायाकल्प के नाम पर परिषदीय स्कूलों में बड़ी धनराशि खर्च की जा रही है। पर धरातल पर यह नजर नहीं आ रहा है। क्षेत्र के कई स्कूल आज भी सुविधाविहीन हैं। फर्श टूटी है विद्यालयों के परिसर चहारदीवारी क्षतिग्रस्त हो गए। यह सब जिम्मेदारों की जानकारी में है मगर वह कुछ नहीं कर रहे हैं।


जिले में करीब 2702 परिषदीय विद्यालय है जिसमें 1737 प्राथमिक व 484 उच्च प्राथमिक व 481 कंपोजिट विद्यालय शामिल हैं। इनमें करीब चार लाख 11 हजार 727 बच्चे अध्ययनरत है। राज्य सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प के तहत उक्त विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं में सुधार एवं संतृप्तिकरण के आदेश दिए हैं। ग्राम प्रधान व पंचायती राज विभाग की ओर से प्रस्तावित कार्यों को पूरा किया जाना था।


तय बिंदुओं पर सुधारात्मक कार्य बेसिक शिक्षा और पंचायती राज विभाग के आपसी समन्वय से पूरे होने थे लेकिन बहुतायत ऐसे विद्यालय हैं जिसमें अभी तक कार्य ही नहीं हो सके। बीएसए अम्बरीष कुमार ने बताया कि करीब एक हजार विद्यालय ऐसे हैं जिनमें 14 बिंदुओं पर काम पूरा कर लिया गया है। बाकी के विद्यालयों में कोरोना संक्रमण के कारण सभी कार्य रुक गए हैं। जल्द ही उनमें भी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे और स्कूल के छात्रों को आधुनिक शिक्षा और उपकरण के जरिए शिक्षित किए जाएंगे।


इन बिंदुओं पर कराया जाएगा काम
आजमगढ़। कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयों के तय मानकों के अनुसार ब्लैक बोर्ड, छात्र संख्या के अनुरूप शौचालय और मूत्रालय का निर्माण, स्वच्छ पेयजल और मल्टीपल हैंडवॉशिंग सिस्टम, जल निकासी की सुविधा उपलब्ध करानी थी। साथ ही विद्यालय की दीवार, छत की मरम्मत, कमरों के फर्श पर टाइल्स, विद्युतीकरण कार्य, किचिन शेड का जीर्णोद्धार, फर्नीचर, चाहरदीवारी और गेट, इंटरलॉकिंग टाइल्स और अतिरिक्त कक्षा कक्ष का निर्माण, दीवारों पर पेंटिंग अन्य कार्य स्थानीय आवश्यकतानुसार कराए जाने हैं। 

विद्यालय पर लगेगा कार्यों का बोर्ड

आजमगढ़। ऑपरेशन कायाकल्प योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों में प्रस्तावित कार्य और उन पर होने वाले खर्च का ब्यौरा ग्राम प्रधान को विद्यालय में बोर्ड पर लिखकर देना होगा। इससे आम आदमी भी जान सके कि ग्राम पंचायत विद्यालय में किस मद से कितनी राशि किस कार्य पर खर्च कर रही है। 

Saturday, May 1, 2021

पंचायत चुनाव प्रक्रिया पूरी होते ही नीति आयोग के 9 मानकों पर स्कूलों का निरीक्षण होगा शुरू

पंचायत चुनाव प्रक्रिया पूरी होते ही नीति आयोग के 9 मानकों पर स्कूलों का निरीक्षण होगा शुरू


आजमगढ़। ऑपरेशन कायाकल्प में चमके स्कूलों को नीति आयोग रैंकिंग से नवाजेगा। इसमें स्कूलों में कार्यों के साथ-साथ शैक्षणिक गुणवत्ता भी देखी जाएगी। चुनाव संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्कूलों में निरीक्षण शुरू होगा।


स्कूलों के लिए नीति आयोग ने नौ मानक तय किए हैं और इनकी पूरी जांच होने के बाद जिला समिति की रिपोर्ट के बाद आयोग स्कूलों को रैंक देगा। प्रदेश स्तर पर यह स्कूल रैंक के हिसाब से अपनी अलग छाप छोड़ेंगे। नीति आयोग की टीम भी जिले में स्कूलों को देखने के लिए आ सकती है। चुनाव संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्कूलों में निरीक्षण शुरू करा दिया जाएगा। 


नीति आयोग की टीम भी जिले में स्कूलों को देखने के लिए आ सकती है। शासन के आदेश पर बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों को ऑपरेशन कायाकल्प के तहत चकाचक किया जा रहा है। जिले के करीब एक हजार स्कूलों में विकास संबंधित सभी सुविधाएं दुरूस्त किया जा चुका हैं।


बेसिक शिक्षा और ग्राम पंचायतों द्वारा स्कूलों में 14 बिंदुओं पर कार्य कराए हैं। स्कूलों में शौचालय, किचन, चारदीवारी, बच्चों के बैठने की व्यवस्था, रंगाई-पुताई और टायल्स बिछाने सहित अन्य सभी पूरे हो गए हैं। जिसके बाद अब नीति आयोग इन स्कूलों को शैक्षणिक गुणवत्ता और ऑपरेशन कायाकल्प में हुए कार्यों की रैंक देगा। बताया जा रहा कि जिले के सभी स्कूलों में पहले निरीक्षण होगा और फिर यह देखा जाएगा कि क्या-क्या कार्य हुए और स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता क्या है। 


पहले चरण के निरीक्षण में स्कूलों में विकास कार्य और दूसरे चरण में स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता को परखा जाएगा। इसके लिए जिला स्तरीय समिति गठित होगी और पूरी रिपोर्ट तैयार करने के बाद नीति आयोग को भेजी जाएगी। समिति द्वारा भेजी रिपोर्ट पर टीम के आधार पर आयोग के सदस्य स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। विभाग के अनुसार स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प का कार्य लगभग पूरा हो गया है। स्कूल खुलने के बाद इस पर तेजी से कार्य शुरू होगा।

Monday, April 26, 2021

कोरोना प्रभाव : बेपटरी हुई शिक्षा व्यवस्था, बच्चों को डिजिटल कंटेंट पहुंचाएगा बेसिक शिक्षा विभाग

कोरोना प्रभाव : बेपटरी हुई शिक्षा व्यवस्था, बच्चों को डिजिटल कंटेंट पहुंचाएगा बेसिक शिक्षा विभाग


आजमगढ़। सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को डिजिटल कंटेंट पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। वर्ग, विषय और चैप्टर के आधार पर हर दिन का कंटेंट तैयार किया जा रहा है। शुरुआत में व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से अधिक से अधिक बच्चों तक डिजिटल कंटेंट पहुंचाया जाएगा।


व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए बच्चों या फिर उनके अभिभावकों के पास कंटेंट भेजे जाएंगे, जिससे बच्चे अभ्यास कर सकेंगे। बच्चों को ऑडियो और वीडियो के माध्यम से भी गणित समेत अन्य विषयों की जानकारी दी जाएगी। सरकार ने 2020 में अप्रैल के पहले सप्ताह से ही डिजिटल कंटेंट बच्चों को उपलब्ध कराना शुरू किया था। 30 फ़ीसदी बच्चों तक ही डिजिटल कंटेंट पहुंच पा रहे थे। चार लाख बच्चों तक डिजिटल कंटेंट नियमित पहुंचाने का प्रयास किया गया। हालांकि बहुतायत ऐसे बच्चे रहे जिनके पास मोबाइल तक नहीं थे।


उन्हें ऑफलाइन या फिर दूसरे माध्यम से पढ़ाने की भी तैयारी की जा रही है। डिजिटल कंटेंट के साथ-साथ सभी बच्चों के हाथों में पाठ्य पुस्तकें हो इसके लिए निर्देश जारी किए जा चुके हैं। जल्द से जल्द सभी बच्चों को किताबें मिल सके इसके लिए स्कूलों तक किताब पहुंचाने की गाइडलाइन भेजी गई थी। स्कूल के शिक्षक और क्लास वार बच्चों का व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किया जा रहा है।


विद्यालय बंद है। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया जाएगा। व्हाट्सएप ग्रुप पर बच्चों को कंटेंट उपलब्ध कराया जाएगा। ताकि वह घर पर रहकर पढ़ाई कर सके। साथ ही अन्य संसाधनों के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा दी जाएगी। - अम्बरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़।