DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Sunday, November 23, 2025

मदरसा शिक्षक को अनियमित वेतन - पेंशन देने के मामले में शासन की बड़ी कार्रवाई, ज्वाइंट डायरेक्टर समेत चार का निलंबन

मदरसा शिक्षक को अनियमित वेतन - पेंशन देने के मामले में शासन की बड़ी कार्रवाई, ज्वाइंट डायरेक्टर समेत चार का निलंबन 

लखनऊ: आजमगढ़ के तत्कालीन मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा खान को विदेश में रहने के दौरान नियम विरुद्ध वेतन, पेंशन व अन्य देयों का भुगतान किए जाने के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई की गई है। शासन ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेष नाथ पांडेय, आजमगढ़ के तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक अधिकारी साहित्य निकष सिंह, प्रभात कुमार व लालमन को निलंबित किया है। वर्तमान में साहित्य निकष सिंह गाजियाबाद, प्रभात कुमार अमेठी और लालमन बरेली में तैनात हैं।


मदरसा दारूल उलूम अहिले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उजूम, आजमगढ़ के तत्कालीन शिक्षक शमशुल हुदा खान ने 19 दिसंबर, 2013 को स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता का परित्याग कर ब्रिटिश नागरिकता ली थी। इसके बाद भी शमशुल मदरसा प्रबंधक प्रधानाचार्य व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से 31 जुलाई, 2017 तक अनियमित रूप से वेतन लेता रहा। अनियिमत तरीके से उसके चिकित्सा अवकाश स्वीकृत किए गए। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद सेवानिवृत्ति लाभ जीपीएफ व पेंशन प्रदान कर दी गई। 

इस मामले की जांच संयुक्त निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण ने कराई थी। मामले में एडीएम प्रशासन आजमगढ़ ने 29 जनवरी, 2022 को खान को अनियमित वेतन के रूप में दिए गए 16.59 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश जारी किया था। इसके विरोध में शमशुल हुदा खान ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने एडीएम प्रशासन आजमगढ़ के रिकवरी आदेश को निरस्त कर प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाने तथा समिति की रिपोर्ट के आधार पर सक्षम अधिकारी द्वारा आदेश जारी किए जाने का आदेश दिया था।

हाई कोर्ट के आदेश पर तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी, जिसमें आजमगढ़ के अपर जिलाधिकारी व अपर पुलिस अधीक्षक और मंडलीय उप निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण शामिल थे। समिति ने शमशुल खान को दी गई अनियमित पेंशन व वेतन की धनराशि की रिकवरी किए जाने की संस्तुति की थी। साथ ही मामले में संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही तथा खान के मदरसा शिक्षक रहते हुए आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, सिंगापुर, श्रीलंका व खाड़ी देशों के अलावा दो-तीन बार पाकिस्तान की यात्रा किए जाने की जांच एजेंसी से पड़ताल कराए जाने की सिफारिश भी की गई थी। एटीएस की वाराणसी इकाई ने भी शमशुल की विदेश यात्राओं को लेकर जांच की थी।



मदरसा शिक्षकों की उपस्थिति की गहनता से होगी जांच, शासन ने दिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को निर्देश


लखनऊ। प्रदेश में मदरसा शिक्षकों की उपस्थिति की गहनता से जांच होगी। अनुदानित मदरसों में प्रबंधन से हर माह उपस्थिति प्रमाणपत्र लेने के बाद ही शिक्षकों का वेतन जारी होगा। ब्रिटेन में जा बसे संदिग्ध मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा का मामला सामने आने पर शासन ने चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

उत्तर प्रदेश में 561 मदरसे सरकार से अनुदानित हैं। इनमें कुल 231806 छात्र पंजीकृत हैं। अनुदानित मदरसों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की कुल संख्या क्रमशः 9889 और 8367 है। हाल ही में एटीएस की जांच में मदरसा शिक्षक शमशुल के संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आए हैं।

वह 2007 से वह ब्रिटेन में रह रहा था और 19 दिसंबर 2013 को उसने ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 2007 से 2017 तक बिना उसकी सेवा पुस्तिका की जांच किए प्रति वर्ष वेतन वृद्धि की गई। इतना ही नहीं 1 अगस्त 2017 से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रदान करते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई।

एटीएस की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में कई अधिकारी फंस गए हैं। साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ऐसी स्थिति दुबारा उत्पन्न न होने देने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। एक-एक शिक्षक की हाजिरी सत्यापित होगी, उसके बाद ही भुगतान होगा।

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मदरसों का औचक मुआयना करके भी देखेंगे कि जिन शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है, वे नियमित मदरसों में आ भी रहे हैं या नहीं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध के साथ बताया कि शिक्षकों की उपस्थिति चेक करने के नियम पहले से भी थे, अब इन निर्देशों पर कड़ाई से अमल करना है। ताकि, शमशुल जैसे मामले सामने नहीं आ सके।

No comments:
Write comments