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Friday, May 22, 2026

69000 शिक्षक भर्ती में फिर बनेगी मूल चयन सूची, चयन से वंचित याची लाभ देने की मांग पर अड़े


69000 शिक्षक भर्ती में फिर बनेगी मूल चयन सूची, चयन से वंचित याची लाभ देने की मांग पर अड़े

69000 शिक्षक भर्ती: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने शुरू किया मंथन

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 69 हजार शिक्षक भर्ती की नए सिरे से मेरिट बनाने की तैयारी शुरू, आरक्षण के नियमों के अनुसार बनेगी सूची, चयन से वंचित याची लाभ देने की मांग कर रहे

22 मई 2026
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने नई चयन सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर विभाग आरक्षण नियमों का पालन करते हुए मूल चयन सूची बनाने पर मंथ कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के फैसले के आधार पर छह सप्ताह में नई सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। विभागीय अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलने के बाद बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। दूसरी ओर, पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि सरकार 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण से प्रभावित सभी याची अभ्यर्थियों को नौकरी देने का प्रस्ताव पेश करे। मोर्चा का कहना है कि 2020 से हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे अभ्यर्थियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। 


69 हजार शिक्षक भर्ती की नए सिरे से मेरिट बनाने की तैयारी शुरू

लखनऊ। यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग ने नए सिरे से चयन सूची तैयार करने पर मंथन कर रहा है। अब आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए मूल चयन सूची बनाने की तैयारी है। वहीं चयन से वंचित अभ्यर्थी याची लाभ देने की मांग कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के फैसले के आधार पर मूल चयन सूची बनाने का आदेश दिए हैं। जिसके लिए सरकार को छह हफ्ते का समय दिया गया है। इसके तहत बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिल गया। विभागीय अधिकारियों ने इसके अनुसार बैठक कर मंथन शुरू किया।

 वहीं पिछड़ा - दलित संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि प्रदेश सरकार 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सभी आरक्षण प्रभावित याची अभ्यर्थियों को नौकरी देने का प्रस्ताव पेश करे तो यह मामला पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। क्योंकि इस पर पहला हक उन प्रभावित अभ्यर्थियों का है जो 2020 से हाईकोर्ट में याची बनकर तथा 2023 से डबल बेंच में याची बनकर जीते और अब सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवादी के रूप में लड़ाई लड़ रहे हैं। पीड़ितों की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट की सामान्य बेंच 21 जुलाई को सुनवाई करेगी।



न्यूनतम योग्यता वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर होगा विचार, 69000 शिक्षक भर्ती मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रखा प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश सरकार ने शीर्ष अदालत में कहा- मगर यह भविष्य के लिए नजीर नहीं होगा

कोर्ट ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को रिकार्ड में लेते हुए छह सप्ताह का दिया समय

भर्ती का मामला वर्ष 2018 से है लंबित, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने दी है चुनौती

20 मई 2026
ई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के मामले में नियुक्ति की योग्यता रखने वाले लेकिन चयन सूची से बाहर रह गए आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में क्हा कि वह उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने पर विचार करने के लिए राजी है, जो हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश के अनुसार मूल चयन सूची में शामिल होने की योग्यता रखते हैं। हालांकि, यह नियुक्ति उम्मीदवारों की प्राथमिक शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करने और उपलब्ध रिक्तियों के अधीन होगी।


राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय मामले की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए लिया जाएगा और इसे भविष्य में किसी अन्य चयन में नजीर नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए इस प्रस्ताव को रिकार्ड पर लिया और प्रक्रिया तैयार करने के लिए छह  सप्ताह का समय दिया है। मामले की आठ सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

इस भर्ती का मामला 2018 से लंबित है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने भर्ती की मेरिट लिस्ट को रद कर दिया था और प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि इस शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को मूल चयन सूची के रूप में आरक्षण के सभी नियमों के अनुसार तीन महीने के भीतर फिर से तैयार किया जाए।

रद हुई चयन सूची के अनुसार, सामान्य वर्ग के जिन शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी थी, उन्होंने नौकरी पर खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने शुरू में ही हाई कोर्ट के इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। आरक्षण के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल की हैं और वे मूल याचिका में प्रतिवादी भी हैं। 
पिछली सुनवाई पर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के वकील मनीष गोस्वामी ने कहा था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के साथ इस मामले में अन्याय हुआ है और वे न्याय के लिए 2020 से भटक रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग यह नहीं है कि जिन शिक्षकों की भर्ती हो गई है और जो पांच साल से नौकरी कर रहे हैं, उन्हें नौकरी से बाहर किया जाए।

इस सिलसिले में मंगलवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ में हुई सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडीशनल सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और अंकित गोयल ने राज्य सरकार का प्रस्ताव कोर्ट के समक्ष रखा। भाटी ने कहा कि राज्य सरकार मामले पर विचार करने के लिए राजी है और प्रक्रिया पूरी करके कोर्ट में स्थिति रिपोर्ट देगी। कोर्ट ने उनके प्रस्ताव को रिकार्ड पर लेते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह का समय दिया। दूसरी ओर, कुछ वकीलों ने प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर दलीलें देने की कोशिश की, लेकिन पीठ ने कहा कि पहले राज्य सरकार को काम करने दिया जाए।




69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर टिकीं निगाहें, 
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन

18 मई 2026
लखनऊपरिषदीय विद्यालयों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने दंडवत प्रणाम करते हुए धरना दिया। उनका कहना था कि वे छह साल से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है। इस मामले में अगली सुनवाई 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जार्ज मसीह की बेंच में होनी है। सरकार इसमें अपना पक्ष पर रख देती है तो मामले का जल्द समाधान हो सकता है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने कहा कि इस मामले की पहली सुनवाई सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट में हुई थी। इसके बाद लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन मामले का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख रही, जिससे मामला लटकता जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट की डबल बेंच का फैसला उनके पक्ष में है। इसके बावजूद न्याय नहीं मिल रहा। 


अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमण्डल ने बेसिक शिक्षा मंत्री को दिया ज्ञापन, मिला आश्वासन

69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का तपती सड़क पर लेटकर प्रदर्शन


लखनऊ ।  प्राइमरी स्कूल की 69 हजार शिक्षक भर्ती के सुप्रीम कोर्ट में याची बने आरक्षित अभ्यर्थी सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे भीषण गर्मी में तपती सड़क पर लेट-लेट कर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पहुंचे। अभ्यर्थियों ने 20 मिनट तक लेटकर प्रदर्शन किया और खूब नारेबाजी की। हाथ, पैर व पेट सड़क की गर्मी से तप गया। बेहाल अभ्यर्थी पसीने से तर-बतर हो गए। बेहाल अभ्यर्थियों को पुलिस ने पानी पिलाया।

सूचना मिलते ही बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि मंडल को बुलाकर वार्ता की। अभ्यर्थियों ने उन्हें ज्ञापन देकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को होने वाली सुनवाई पर बात की। अभ्यर्थियों कहा कि प्रदेश सरकार याची लाभ का प्रस्ताव पेश कर ने इस मामले का निस्तारण करे। मंत्री अभ्यर्थियों के प्रस्ताव पर सहमति और आश्वासन दिया। इसके बाद पुलिस ने इन्हें बस में बैठाकर इको गार्डन भिजवाया। पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में 31 बार यह मामला सूचीबद्ध हो चुका है, लेकिन किसी भी तारीख में सरकार अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुई। अब फिर मंगलवार को सुनवाई होनी है।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रामविलास, सुमित यादव, धनंजय गुप्ता, अमित, विक्रम ने बताया कि अभ्यर्थी न्याय के लिए बीते छह साल से याची बनकर न्याय मांग रहे हैं। चार दिसंबर 2018 को 69000 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन मांगे गए। छह जनवरी 2019 परीक्षा हुई। एक जून 2020 को परिणाम जारी हुआ। आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी 19000 आरक्षण सीट पर अनियमितता का आरोप लगाकर हाईकोर्ट चले गए


इतनी बार अभ्यर्थियों ने किया प्रदर्शन

मुख्यमंत्री आवास का घेराव-छह बार
डिप्टी सीएम के आवास का घेराव व प्रदर्शन- 10 बार
बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव 10 से अधिक बार
पूर्व शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के आवास का घेराव-8 बार

Friday, February 20, 2026

अस्थाई शिक्षकों और कर्मियों की भर्ती में आरक्षण पर UGC की सख्ती, 45 दिन या अधिक समय के लिए अस्थाई पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों के पालन का ब्यौरा तलब

अस्थाई शिक्षकों और कर्मियों की भर्ती में आरक्षण पर UGC की सख्ती, 45 दिन या अधिक समय के लिए अस्थाई पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों के पालन का ब्यौरा तलब


लखनऊ । विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में अस्थाई पदों पर शिक्षकों व कर्मचारियों की हुई भर्ती में आरक्षण का हिसाब किताब लिया जाएगा। 45 दिन व उससे अधिक समय के लिए इन अस्थाई पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों से इसका ब्योरा तलब किया गया है। अब वर्ष 2023 से 2025 तक हुई भर्तियों की जांच होगी। 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह शिक्षकों और कर्मचारियों के अस्थाई पदों पर की जा रही भर्तियों में आरक्षण के नियमों का सख्ती से पालन करें। ओबीसी व एससी-एसटी श्रेणी के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दिया जाए। 45 दिन व उससे अधिक समय के लिए जितने भी अस्थाई पदों पर भर्ती हो रही है, उसमें आरक्षण के मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए।

Wednesday, January 21, 2026

जूनियर एडेड प्रधानाध्यापक भर्ती में अनुभव प्रमाणपत्र से छूट की मांग को लेकर अभ्यर्थियों में बने दो गुट

जूनियर एडेड प्रधानाध्यापक भर्ती में अनुभव प्रमाणपत्र से छूट की मांग को लेकर अभ्यर्थियों में बने दो गुट

प्रयागराजअशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) जूनियर हाईस्कूल की वर्ष 2021 की शिक्षक भर्ती में प्रधानाध्यापक पद के अनुभव प्रमाणपत्र को लेकर अभ्यर्थियों में दो गुट बन गए हैं। कटआफ सूची में रिक्त पदों के सापेक्ष जारी क्रमांक में ऊपरी क्रम के अभ्यर्थी विद्यालय द्वारा अनुमोदन नहीं लिए जाने के कारण अनुभव प्रमाणपत्र से राहत की मांग कर रहे हैं तो नीचे क्रम के अभ्यर्थी अनुभव प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को सही बता रहे हैं। 

प्रधानाध्यापक के 253 पदों पर चयन के लिए काउंसलिंग कराई जा चुकी है, जिसमें करीब 100 अभ्यर्थियों ने बीएसए द्वारा जारी अनुभव प्रमाणपत्र लगाए हैं। इसके आधार पर चयन किए जाने पर शेष बचे पदों के लिए द्वितीय काउंसलिंग में निचले क्रम के अनुभव प्रमाणपत्रधारी अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने की उम्मीद है।

प्रधानाध्यापक पद के लिए 15, 16, 17 व 19 जनवरी को काउंसलिंग कराई गई। 253 पदों के सापेक्ष 506 अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया था। ज्यादा संख्या में अभ्यर्थियों ने अनुभव प्रमाणपत्र नहीं लगाए गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन का अनुमोदन कराने की जिम्मेदारी संबंधित वित्तविहीन विद्यालयों की थी, लेकिन न तो विद्यालयों ने ध्यान दिया और न ही विभाग और शासन ने। 

ऐसे में पांच वर्ष से ज्यादा समय तक वित्तविहीन विद्यालयों में पढ़ाने वालों की कोई गलती नहीं है। कुछ ऐसे वित्तविहीन विद्यालय हैं, जिन्होने विज्ञापन जारी कर आवेदन लेकर चयन प्रक्रिया पूरी की और उसका अनुमोदन बीएसए से कराया, जिसके कारण उन्हें अनुभव प्रमाणपत्र जारी किया गया है। अभ्यर्थियों का दावा है कि करीब 100 अभ्यर्थियों ने काउंसलिंग के समय अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए हैं। ऐसे में मांग की गई है कि रिक्त रह जाने वाले पदों पर नियुक्ति के लिए नीचे के क्रम के अनुभव प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों का चयन काउंसलिंग के माध्यम से किया जाए।



एडेड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती में विवाद, विशेष वर्गों में आरक्षण की अनदेखी पर हाईकोर्ट पहुंचे बेरोजगार

2021 की जानेयर एडेड शिक्षक भर्ती में क्षैतिज आरक्षण का पालन न करने से नाराज

शिक्षा निदेशालय में अफर शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन

प्रयागराज । सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के 1262 पदों पर भर्ती में आरक्षण की अनदेखी के खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों के 1262 पदों में से 1051 पद (83 फीसदी) अनारक्षित वर्ग के है। 115 पद ओबीसी और 96 एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 

भूतपूर्व सैनिक नागेन्द्र पांडेय और 17 अन्य की ओर से दायर याचिका में 12 जनवरी को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का समय देते हुए, 27 जनवरी को अगली सुनवाई की तारीख तय की है। ओबीसी, एससी के साथ ही विशेष आरक्षण वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके साथ अन्याय हुआ है।

इंडब्ल्यूएस, एसटी और क्षैतिज आरक्षण (पूर्व सैनिक, दिव्यांग एवं स्वतंत्रता सेनानी आश्रित) का आरक्षण एकदम शून्य घोषित कर दिया गया है। वहीं ओबीसी और अनुसूचित जातियों का आरक्षण एकदम कम दिखाया जा रहा है। अफसरों का तर्क है कि स्कूल को इकाई मानने के कारण कई वर्गों का आरक्षण नहीं मिल पा रहा है वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती में भी स्कूल को इकाई मानने के बावजूद सभी वर्ग को आरक्षण मिलता है। 

जब एक ही माध्यमिक शिक्षा विभाग में कक्षा नौ से 12 तक के स्कूलों में आरक्षण नियमों का पालन हो रहा है तो बेसिक शिक्षा विभाग के एडेड जूनियर हाईस्कूलों में आरक्षण की अनदेखी समझ से परे है। 19 सितंबर को जारी संयुक्त सचिव के आदेश में भी वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही आरक्षण देने की बात कही गई थी।


भूतपूर्व सैनिकों व स्वतंत्रता सेनानी आश्रितों ने मांगा शिक्षक भर्ती में आरक्षण

प्रयागराज ।  जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती-2021 में सैन्ज अरक्ष्य नहीं देर जाने से भूतपूर्व सैनिक, स्वत्त्रत संग्राम सेनानी के अश्रिले व दिव्यांग अभ्यर्थियों का आरक्षण शून्य हो गय है। भर्ती के लिए जाउसलिंग प्रक्रिन्य चल रही है, लेकिन क्षैतिज आरक्षन के मन्कों का पालन की किए जाने लाभ से बचेत अभ्यर्थियों ने सेम्बर ओ शक्ष निदेशालय प्रयागरज में अपर शेक्ष निदेशक (बेसिक) के कार्यात्रय ने बाहर प्रदर्शन कर मोर की कि क्षैतिज आरक्षन का उन्हें भी लाम देया जाए।

नेदेशल्य में प्रदर्शन जरने पहुंचे रहुल पासवान, पूर्व सैनेक विजय शंकर नष्डेय, पूर्व सैन्कि कृष्ण रजभर, सुनीता यादव, प्रियंका पुरवर, उपेंद्र सिंह, पूर्णिमा चौरसिय, शिकुमार आदि ने अरो लगया कि इस भर्ती में अरक्षण नियमों को अवहेलना में गई है। इस भर्ती में सहायक अध्यापक के कुल 1362 पद दिए जा रहे हैं। इसमें ऊर्जाकार (बर्टकल) आरक्षण में अनारक्षिर के 1051 पद, 115 ओबेंसी, इन्ची के 95 पद सृजित है, जबकि टी व इंडज्यूएस के न्द शून्य हो ग हैं इसके अलब क्षैरिज (होरेजेंटल) आरक्षण के ननक का पालन नहीं किए जाने से भूतपूर्व सैनिक, स्वतंत्रता संग्राम सेनन के अधित्व दिल्यांग के पद शून्य हे गए है इसके विपरीत वर्तमान अरक्षण नियनों के अनुसार क्षेतेज आरक्षण में भूतपूर्व सैनिक के पांच प्रतिशत आरक्षण के अनुपात में भूतपूर्व सैनिक के 53 नद. स्वतंत्रता संगमनाने के आश्रितों में 25 पद तथ देयांन के चार प्रतिश्त आरक्षण के अनुपात में 50 पद होने चाहिए। अभ्यर्देयों ने आरक्षण में नियनानुसार नेर्धारित हेने वाले पदों के विवरन के साथ पंचायते राज था अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर को में नत्र भेजकर अनुन्य आरक्षण देलार जाने के मंर को है। नामले पर जूनैयर एडेड शिक्षक भर्ती संघ के प्रदेश अब्यअ नगेंद्र पाप्डेय ने कहा कि आरक्षण निर्धारण में नियमों की अनदेखी कर अभ्यर्थियों के साथ अन्याय क्रिय ग्या है। उन्होंने आरक्षण क निर्धारण न हिरे से कर न्याय दिलाए जाने के मांग की है

शिक्षा निदेशालय में पीड़ितों ने किया प्रदर्शन

एडेड जूनियर शिक्षक भर्ती में आरक्षण की अनदेखी पर पीड़ित अभ्यर्थियों ने सोमवार को शिक्षा निदेशालय में अपर शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर नियमानुसार आरक्षण देने की मांग की। कृष्णा कुमार राजभर, जितेन्द्र कुमार शुक्ला, राहुल, पूर्णिमा चौरसिया, विजय सिंह यादव, रोमन कुमार, कृपा शंकर, विपिन कुमार आदि ने चेतावनी दी कि नियमानुसार आरक्षण मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


अनुभव प्रमाणपत्र के लिए सीएम से लगाई गुहार

प्रयागराज। जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती 2021 के तहत प्रधानाध्यापक के 253 पदो पर नियुक्ति में अनुभव प्रमाणपत्र का मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया है। अभ्यर्थी ज्ञानवेन्द्र सिंह बंटी ने सोमवार को मुख्यमंत्री से लखनऊ में मुलाकात कर समस्या बताई। कहा कि लगभग 99 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने वित्तविहीन विद्यालय में पांच साल या अधिक वर्ष तक सहायक अध्यापक के रूप में शिक्षण कार्य किया है और वे प्रधानाध्यापक पद के लिए अनुभव की योग्यता रखते हैं। अब जब इस भर्ती की काउंसिलिंग कराई जा रही है तब कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारी यह कहते हुए अनुभव प्रमाणपत्र निरस्त कर रहे है कि उस पद के सापेक्ष अनुमोदन नहीं लिया गया था। 

यह तब है जबकि अभ्यर्थियों का नाम यू-डायस पोर्टल पर पांच साल या अधिक समय से मौजूद है। सभी योग्यता पूरी करने के बावजूद हमारे अनुभव प्रमाणपत्र पर संकट मंडरा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने यूपी में जुलाई 2011 में आरटीई लागू होने के 14 साल में कभी अनुमोदन नहीं दिया और अब परेशान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

Wednesday, December 17, 2025

69,000 शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई चार फरवरी तक टली

69,000 शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई चार फरवरी तक टली


17 दिसम्बर 2025
नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती मामले की सुनवाई चार फरवरी तक के लिए टल गई है। मंगलवार को यह मामला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस अगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ के समक्ष सुनवाई पर लगा था, लेकिन मामले पर सुनवाई नहीं हो पाई। अगली तिथि चार फरवरी तय हुई है।

2018 में हुई 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 13 अगस्त, 2024 को मेरिट लिस्ट रद कर दी थी और तीन महीने में नई मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश दिया था। इस फैसले को सामान्य वर्ग के नौकरी ज्वाइन कर चुके अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। हालांकि इस मामले में आरक्षित वर्ग ने भी हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल कर खंडपीठ के आदेश का समर्थन करते हुए अंतरिम रोक का विरोध किया है।

 इस मामले में भर्ती नियमों के मुताबिक, सामान्य वर्ग के लिए एटीआरई में 65 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 60 प्रतिशत अंकों की कटआफ तय थी। इसके अलावा 40 प्रतिशत अंक हाईस्कूल, इंटर, स्नातक और बीटीसी की परीक्षा के औसत से लिए गए थे। ऐसे में आरक्षित वर्ग के जिन अभ्यर्थियों के ये सभी अंक मिलाकर सामान्य वर्ग की मेरिट सूची से ज्यादा हो गए, उन्हें सामान्य वर्ग श्रेणी में गिने जाने की मांग की गई है। 

हाई कोर्ट ने ये दलीलें स्वीकार कर ली थीं। कहा गया कि अगर कोई उम्र या फीस आदि में छूट लेता है तो वह मेरिट में आने पर बाद में सामान्य वर्ग में स्थानांतरित हो सकता है, लेकिन अगर कोई परीक्षा में अंकों की छूट लेता है तो वह बाद में अधिक अंकों की दलील देकर सामान्य श्रेणी में शामिल होने का दावा नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट में अभी आरक्षित वर्ग की हस्तक्षेप अर्जियों पर सुनवाई का नंबर नहीं आया है।




आखिरकार 69000 शिक्षक भर्ती मामले की सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई सुनवाई, सामान्य वर्ग ने आरक्षित वर्ग को दोहरे लाभ पर जताई आपत्ति, 16दिसंबर को अगली सुनवाई 

19 नवंबर 2025
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाला मामले की मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई। जस्टिस दीपांकर दत्ता एवं जस्टिस एजी मसीह की पीठ के समक्ष हुई बहस में चयनित सामान्य वर्ग के शिक्षकों की तरफ से अधिवक्ता मनीष सिंघवी ने कहा कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी टीईटी में उम्र, शुल्क और उत्तीर्णता अंक की छूट ले रहे और यह सहायक अध्यापक लिखित परीक्षा में भी छूट ले रहे, जो गलत है।

उन्होंने कहा, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी दोहरा लाभ नहीं ले सकते। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि एक बार कम कटऑफ अंकों का लाभ ले चुके आरक्षित वर्ग को बाद में अधिक अंकों के आधार पर सामान्य श्रेणी का नहीं माना जा सकता। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट की एकलपीठ तथा खंडपीठ में वे पक्षकार नहीं थे। हमने कोविड काल में भी सेवाएं दीं, ऐसी स्थिति में हमें हाईकोर्ट में नहीं सुना गया। मामले को हाईकोर्ट में भेज दिया जाए। इस पर आरक्षित वर्ग के वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकट सुब्रमण्यम गिरी और निधेश गुप्ता ने कहा, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी कोर्ट को गुमराह कर रहे। वे लखनऊ हाईकोर्ट की एकलपीठ तथा खंडपीठ में पक्षकार थे। इन्हें नोटिस दिया गया था।


16 दिसंबर को होगी अगली सुनवाईः सुनवाई के दौरान अचयनित सामान्य वर्ग से ईडब्ल्यूएस के मुद्दे को भी उठाया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामला लखनऊ हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश पर है। हमें इसे सुनकर निस्तारित करना है, इसलिए ईडब्ल्यूएस मुद्दे को हम इसमें शामिल करके नहीं सुन सकते। कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस मुद्दे को इस मामले से अलग कर दिया।

दूसरी तरफ आरक्षित वर्ग का कहना था कि 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती की लिस्ट 1 जून 2020 को प्रकाशित हुई तथा आरक्षण घोटाले के तहत यह मामला हाईकोर्ट की एकलपीठ में अगस्त 2020 को पहुंच गया था। इस भर्ती में बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 तथा आरक्षण नियमावली 1994 का घोर उल्लंघन हुआ है। अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती में आरक्षण नियमों का ठीक से पालन नहीं किया गया और करीब 19,000 सीटों का घोटाला हुआ है। 


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरक्षण को लेकर रद्द कर दी थी मेरिट लिस्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 13 अगस्त 2024 को आरक्षण को लेकर मेरिट लिस्ट रद्द कर दी थी और सरकार को 3 महीने में नई मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी और दोनों पक्षों से जवाब मांगा था। गौरतलब है कि 2018 में यूपी सरकार ने 69 हजार सहायक शिक्षक पदों की भर्ती के लिए अधिसूचना निकाला था।

Thursday, December 11, 2025

जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती में राज्य मेरिट के लिए मुख्यमंत्री से मिले अभ्यर्थी, वर्तमान आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं होने पर कोर्ट जाएंगे

जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती में राज्य मेरिट के लिए मुख्यमंत्री से मिले अभ्यर्थी, वर्तमान आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं होने पर कोर्ट जाएंगे


प्रयागराज ।  वर्ष 2021 की जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती में कानूनी बाधा खत्म होने और भर्ती के संबंध में शासनादेश जारी होने के बावजूद प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। चयन प्रक्रिया विद्यालय को इकाई मानकर अपनाए जाने से भूतपूर्व सैनिक, दिव्यांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, ईडब्ल्यूएस व एसटी अभ्यर्थियों का आरक्षण शून्य हो गया है। इसकी जानकारी देने के साथ अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से गोरखपुर में जनता दरबार में मिलकर मांग की कि चयन प्रक्रिया विद्यालय इकाई न मानकर प्रदेश स्तर पर बनाई जानी चाहिए। 


अभ्यर्थी राहुल पासवान ने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि वर्तमान में पद भी घट गए हैं। जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती के प्रदेश अध्यक्ष नागेंद्र पाण्डेय ने बताया कि बेसिक शिक्षा निदेशक ने 15 फरवरी 2025 को उच्च न्यायालय में एक शपथपत्र के माध्यम से जानकारी दी थी कि भर्ती प्रक्रिया गतिमान है और वर्तमान आरक्षण व्यवस्था के अनुसार सभी वर्गों को आरक्षण दिया जाएगा। 


अब जब तीन नवंबर को भर्ती पूर्ण करने के संबंध में आदेश जारी हुआ तो सभी क्षैतिज आरक्षण (भूतपूर्व सैनिक/दिव्यांग/स्वतंत्रता सेनानी), ईडब्ल्यूएस व एसटी अभ्यर्थियों का आरक्षण शून्य कर दिया गया। ओबीसी व एससी अभ्यर्थियों का भी आरक्षण निम्नतम कर दिया गया। पद भी घट जाने से अवसर कम हो गए हैं। अभ्यर्थियों ने कहा कि चयन मेरिट प्रदेश स्तर पर न बनाए जाने व वर्तमान आरक्षण व्यवस्था नहीं लागू होने पर वह न्याय के लिए कोर्ट जाएंगे।

Sunday, October 26, 2025

सरकार की ओर से पैरवी न होने से नाराज अभ्यर्थियों ने घेरा बेसिकशिक्षा मंत्री का आवास, कोर्ट से मिल रही तारीख पर तारीख के बीच लटकी 69000 शिक्षक भर्ती

सरकार की ओर से पैरवी न होने से नाराज अभ्यर्थियों ने घेरा बेसिकशिक्षा मंत्री का आवास, कोर्ट से मिल रही तारीख पर तारीख के बीच लटकी 69000 शिक्षक भर्ती


लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट में मिल रही तारीख पर तारीख की वजह से 69000 शिक्षक भर्ती लटकी हुई है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार की ओर से पैरवी न होने की वजह से बीते एक साल में कोर्ट में 22 तारीखें पड़ने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। इससे नाराज आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने शनिवार को एक बार फिर बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया। अभ्यर्थियों को पुलिस ने जबरन बस से ईको गार्डेन रवाना किया।


बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन में शामिल धनंजय गुप्ता ने कहा कि हाईकोर्ट का जो फैसला आया था सरकार ने उसे जानबूझ कर लटका दिया, जिससे मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया। उन्होंने बताया कि 2018 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। परिणाम में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय कर उन्हें नौकरी देने से वंचित किया गया। लंबे आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद बीते 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में फैसला सुनाया और नियमानुसार नियुक्ति देने का आदेश दिया लेकिन सरकार मामले में हीलाहवाली करती रही।


प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे अमरेंद्र पटेल ने बताया कि साल में सुप्रीम कोर्ट में 22 तारीखें लग चुकी हैं लेकिन सरकार की ओर से कोई वकील न होने से सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि 28 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। हमारा सरकार से निवेदन है कि वो सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता भेजे और न्याय दिलाए।