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Friday, May 22, 2026

69000 शिक्षक भर्ती में फिर बनेगी मूल चयन सूची, चयन से वंचित याची लाभ देने की मांग पर अड़े


69000 शिक्षक भर्ती में फिर बनेगी मूल चयन सूची, चयन से वंचित याची लाभ देने की मांग पर अड़े

69000 शिक्षक भर्ती: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने शुरू किया मंथन

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 69 हजार शिक्षक भर्ती की नए सिरे से मेरिट बनाने की तैयारी शुरू, आरक्षण के नियमों के अनुसार बनेगी सूची, चयन से वंचित याची लाभ देने की मांग कर रहे

22 मई 2026
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने नई चयन सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर विभाग आरक्षण नियमों का पालन करते हुए मूल चयन सूची बनाने पर मंथ कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के फैसले के आधार पर छह सप्ताह में नई सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। विभागीय अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलने के बाद बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। दूसरी ओर, पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि सरकार 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण से प्रभावित सभी याची अभ्यर्थियों को नौकरी देने का प्रस्ताव पेश करे। मोर्चा का कहना है कि 2020 से हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे अभ्यर्थियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। 


69 हजार शिक्षक भर्ती की नए सिरे से मेरिट बनाने की तैयारी शुरू

लखनऊ। यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग ने नए सिरे से चयन सूची तैयार करने पर मंथन कर रहा है। अब आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए मूल चयन सूची बनाने की तैयारी है। वहीं चयन से वंचित अभ्यर्थी याची लाभ देने की मांग कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के फैसले के आधार पर मूल चयन सूची बनाने का आदेश दिए हैं। जिसके लिए सरकार को छह हफ्ते का समय दिया गया है। इसके तहत बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिल गया। विभागीय अधिकारियों ने इसके अनुसार बैठक कर मंथन शुरू किया।

 वहीं पिछड़ा - दलित संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि प्रदेश सरकार 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सभी आरक्षण प्रभावित याची अभ्यर्थियों को नौकरी देने का प्रस्ताव पेश करे तो यह मामला पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। क्योंकि इस पर पहला हक उन प्रभावित अभ्यर्थियों का है जो 2020 से हाईकोर्ट में याची बनकर तथा 2023 से डबल बेंच में याची बनकर जीते और अब सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवादी के रूप में लड़ाई लड़ रहे हैं। पीड़ितों की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट की सामान्य बेंच 21 जुलाई को सुनवाई करेगी।



न्यूनतम योग्यता वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर होगा विचार, 69000 शिक्षक भर्ती मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रखा प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश सरकार ने शीर्ष अदालत में कहा- मगर यह भविष्य के लिए नजीर नहीं होगा

कोर्ट ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को रिकार्ड में लेते हुए छह सप्ताह का दिया समय

भर्ती का मामला वर्ष 2018 से है लंबित, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने दी है चुनौती

20 मई 2026
ई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के मामले में नियुक्ति की योग्यता रखने वाले लेकिन चयन सूची से बाहर रह गए आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में क्हा कि वह उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने पर विचार करने के लिए राजी है, जो हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश के अनुसार मूल चयन सूची में शामिल होने की योग्यता रखते हैं। हालांकि, यह नियुक्ति उम्मीदवारों की प्राथमिक शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करने और उपलब्ध रिक्तियों के अधीन होगी।


राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय मामले की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए लिया जाएगा और इसे भविष्य में किसी अन्य चयन में नजीर नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए इस प्रस्ताव को रिकार्ड पर लिया और प्रक्रिया तैयार करने के लिए छह  सप्ताह का समय दिया है। मामले की आठ सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

इस भर्ती का मामला 2018 से लंबित है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने भर्ती की मेरिट लिस्ट को रद कर दिया था और प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि इस शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को मूल चयन सूची के रूप में आरक्षण के सभी नियमों के अनुसार तीन महीने के भीतर फिर से तैयार किया जाए।

रद हुई चयन सूची के अनुसार, सामान्य वर्ग के जिन शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी थी, उन्होंने नौकरी पर खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने शुरू में ही हाई कोर्ट के इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। आरक्षण के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल की हैं और वे मूल याचिका में प्रतिवादी भी हैं। 
पिछली सुनवाई पर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के वकील मनीष गोस्वामी ने कहा था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के साथ इस मामले में अन्याय हुआ है और वे न्याय के लिए 2020 से भटक रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग यह नहीं है कि जिन शिक्षकों की भर्ती हो गई है और जो पांच साल से नौकरी कर रहे हैं, उन्हें नौकरी से बाहर किया जाए।

इस सिलसिले में मंगलवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ में हुई सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडीशनल सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और अंकित गोयल ने राज्य सरकार का प्रस्ताव कोर्ट के समक्ष रखा। भाटी ने कहा कि राज्य सरकार मामले पर विचार करने के लिए राजी है और प्रक्रिया पूरी करके कोर्ट में स्थिति रिपोर्ट देगी। कोर्ट ने उनके प्रस्ताव को रिकार्ड पर लेते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह का समय दिया। दूसरी ओर, कुछ वकीलों ने प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर दलीलें देने की कोशिश की, लेकिन पीठ ने कहा कि पहले राज्य सरकार को काम करने दिया जाए।




69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर टिकीं निगाहें, 
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन

18 मई 2026
लखनऊपरिषदीय विद्यालयों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने दंडवत प्रणाम करते हुए धरना दिया। उनका कहना था कि वे छह साल से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है। इस मामले में अगली सुनवाई 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जार्ज मसीह की बेंच में होनी है। सरकार इसमें अपना पक्ष पर रख देती है तो मामले का जल्द समाधान हो सकता है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने कहा कि इस मामले की पहली सुनवाई सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट में हुई थी। इसके बाद लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन मामले का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख रही, जिससे मामला लटकता जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट की डबल बेंच का फैसला उनके पक्ष में है। इसके बावजूद न्याय नहीं मिल रहा। 


अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमण्डल ने बेसिक शिक्षा मंत्री को दिया ज्ञापन, मिला आश्वासन

69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का तपती सड़क पर लेटकर प्रदर्शन


लखनऊ ।  प्राइमरी स्कूल की 69 हजार शिक्षक भर्ती के सुप्रीम कोर्ट में याची बने आरक्षित अभ्यर्थी सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे भीषण गर्मी में तपती सड़क पर लेट-लेट कर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पहुंचे। अभ्यर्थियों ने 20 मिनट तक लेटकर प्रदर्शन किया और खूब नारेबाजी की। हाथ, पैर व पेट सड़क की गर्मी से तप गया। बेहाल अभ्यर्थी पसीने से तर-बतर हो गए। बेहाल अभ्यर्थियों को पुलिस ने पानी पिलाया।

सूचना मिलते ही बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि मंडल को बुलाकर वार्ता की। अभ्यर्थियों ने उन्हें ज्ञापन देकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को होने वाली सुनवाई पर बात की। अभ्यर्थियों कहा कि प्रदेश सरकार याची लाभ का प्रस्ताव पेश कर ने इस मामले का निस्तारण करे। मंत्री अभ्यर्थियों के प्रस्ताव पर सहमति और आश्वासन दिया। इसके बाद पुलिस ने इन्हें बस में बैठाकर इको गार्डन भिजवाया। पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में 31 बार यह मामला सूचीबद्ध हो चुका है, लेकिन किसी भी तारीख में सरकार अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुई। अब फिर मंगलवार को सुनवाई होनी है।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रामविलास, सुमित यादव, धनंजय गुप्ता, अमित, विक्रम ने बताया कि अभ्यर्थी न्याय के लिए बीते छह साल से याची बनकर न्याय मांग रहे हैं। चार दिसंबर 2018 को 69000 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन मांगे गए। छह जनवरी 2019 परीक्षा हुई। एक जून 2020 को परिणाम जारी हुआ। आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी 19000 आरक्षण सीट पर अनियमितता का आरोप लगाकर हाईकोर्ट चले गए


इतनी बार अभ्यर्थियों ने किया प्रदर्शन

मुख्यमंत्री आवास का घेराव-छह बार
डिप्टी सीएम के आवास का घेराव व प्रदर्शन- 10 बार
बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव 10 से अधिक बार
पूर्व शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के आवास का घेराव-8 बार

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