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Thursday, September 17, 2020

प्रयागराज : अनुपस्थित चल रहे 9 शिक्षकों को अंतिम चेतावनी, 24 सितंबर तक उपस्थित हों, नहीं तो सेवा समाप्त

प्रयागराज : अनुपस्थित चल रहे 9 शिक्षकों को अंतिम चेतावनी,  24 सितंबर तक उपस्थित हों, नहीं तो सेवा समाप्त


प्रयागराज। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जनपद के परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत नौ शिक्षकों को सेवा समाप्ति की चेतावनी जारी की है। बीएसए संजय कुमार कुशवाहा की ओर से बिना किसी सूचना के अध्यापक- अध्यापिकाओं को नोटिस भेजकर 24 सितंबर तक उनके कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब देने को कहा है। 24 सितंबर को उनके कार्यालय में उपस्थित नहीं होने वाले शिक्षकों को सेवा समाप्ति की चेतावनी दी गई है। बीएसए की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि उपस्थित नहीं होने पर यह माना जाएगा कि वह काम करने के इच्छुक नहीं हैं।


बीएसए की ओर से जिन शिक्षकों को नोटिस जारी की गई है उनमें प्राथमिक विद्यालय पहाड़पुर बहादुरपुर के अनुपम सिंह, प्राथमिक विद्यालय छतौना प्रतापपुर की सोनाली गुप्ता, प्राथमिक विद्यालय राजापुर धनूूपुर की आराधना वर्मा, प्राथमिक विद्यालय खिरिजपुर धनूपुर के प्रेम शंकर द्विवेदी, प्राथमिक विद्यालय ऊगापुर प्रतापपुर की प्रधानाध्यापक विद्या सिंह, प्राथमिक विद्यालय जगदीशपुर धनूपुर की अनीता, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बहरैचा कोरांव के संजय कुमार पांडेय, प्राथमिक विद्यालय दुधरा जोकहाई कोरांव के नील कंडेश्वर, प्राथमिक विद्यालय भगतपुर कोरांव के व्योमकेश द्विदी का नाम शामिल है।

Tuesday, September 15, 2020

ऑफलाइन के बाद अब 15 सितम्बर को दो पालियों में ऑनलाइन होगी पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा

यूपीः पॉलीटेक्निक की ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा आज, अभ्यर्थी के पर्स और जेवर लाने पर पाबंदी

यूपीः पॉलीटेक्निक की ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा आज, अभ्यर्थी के पर्स और जेवर लाने पर पाबंदी।


पॉलीटेक्निक संस्थानों में दाखिले के लिए 15 सितंबर को ऑनलाइन परीक्षा होगी। दोनों पालियों में परीक्षा शुरू होने से पहले सभी कक्ष, कंप्यूटर, टेबल व कुर्सी को सैनिटाइज किया जाएगा। अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में पर्स व जेवर लाने पर पाबंदी है। परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की थर्मल स्कैनिंग होगी। फिर सैनिटाइज किए जाएंगे। इसके बाद मेटल डिटेक्टर से जांच की जाएगी।




प्रदेश के 23 जिलों में होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2020 की ऑनलाइन परीक्षा के लिए 46,443 छात्र पंजीकृत हैं। राजधानी लखनऊ में परीक्षा के लिए 7,675 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया गया है। पहली पाली सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:30 से शाम 5:30 बजे तक होगी। प्रवेश परीक्षा परिषद के सचिव एसके वैश्य ने बताया कि कोविड-19 के मद्देनजर जारी गाइडलाइन के तहत अभ्यर्थियों को मास्क व सैनिटाइजर लाने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि अगर किसी अभ्यर्थी के प्रवेश पत्र में कोई त्रुटि है तो वह परीक्षा केंद्र पर डिस्क्रिपेंसी शीट भरकर सुधार करा सकता है। परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र की दो कॉपी और स्वघोषणा पत्र भरकर लाने के निर्देश दिए गए हैं। अगर प्रवेश पत्र पर फोटो स्पष्ट नहीं है तो अभ्यर्थियों को दो कलर फोटो साथ लानी होगी। परीक्षा केंद्र पर उन्हें डेढ़ घंटा पहले पहुंचना होगा।

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ऑफलाइन के बाद अब 15 सितम्बर को दो पालियों में ऑनलाइन होगी पॉलीटेक्निक  प्रवेश परीक्षा।

लखनऊ : प्रदेश के निजी, राज्य व अनुदानित पॉलिटेक्निक संस्थानों में हुई ऑफलाइन संयुक्त प्रवेश परीक्षा-2020 के बाद अब विभाग ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा कराने की तैयारी कर रहा है। 15 सितंबर को दो पालियों में होने वाली प्रवेश परीक्षा प्रदेश के 23 जिलों में होगी। प्रवेश परीक्षा परिषद के सचिव एसके वैश्य ने बताया कि परीक्षा की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में एक-एक जिला संयोजक और केंद्र पर दो-दो विभागीय अधिकारियों को पर्यवेक्षक बनाया गया है। स्कूल में बने कंप्यूटर सेंटर व निजी कंप्यूटर सेंटरों को केंद्र बनाया गया है। परीक्षा के पहले केंद्रों को सैनिटाइज किया गया है। सभी छात्रों को मास्क और सैनिटाइजर साथ लाने के निर्देश दिए गए हैं।


छात्रों को डेढ़ घंटा पहले पहुंचना होगा केंद्र पर : मंगलवार को सुबह 9:00 से 12:00 की प्रथम पाली में 115 और 2:30 से 5:30 तक शाम की पाली के लिए 116 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। छात्रों को तय समय से डेढ़ घंटा पहले केंद्र पर पहुंचना होगा। कुल पंजीकृत 46443 छात्रों में सुबह 22597 और शाम को 23846 छात्र बैठेंगे। वहीं, राजधानी में सुबह और शाम की पाली में 17-17 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सुबह 3795 और शाम को 3880 छात्र परीक्षा देंगे।

यह लाना होगा साथ : यदि किसी छात्र के एडमिट कार्ड में नाम, अभिभावक का नाम, कैटेगरी आदि को लेकर त्रुटि है तो वह केंद्र पर डिस्क्रिपेंसी शीट भरकर सुधार करा सकता है। छात्रों को एडमिट कार्ड की दो कॉपी और साथ में एडमिट कार्ड के साथ दिए गए स्व घोषणा पत्र को भरकर भी लाना होगा। यदि एडमिट कार्ड में फोटो स्पष्ट नहीं है तो छात्रों को दो कलर फोटो भी लाने होंगे। परीक्षा खत्म होने के उपरांत छात्रों की लॉग डिटेल को सीडी के रूप में संबंधित जिले के डीएम के कारागार में सील पैक कर रखा जाएगा।

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पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा : 35 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने छोड़ दी परीक्षा, 75 जिलों में आज था एग्जाम।

लखनऊ : इंजीनियरिंग और फार्मेसी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए रविवार को प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया। पहले जहां, इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए मारामारी रहती थी, इस बार अभ्यर्थी परीक्षा देने ही नहीं पहुंचे। राजधानी लखनऊ में 40 प्रतिशत ने यह परीक्षा छोड़ दी। वहीं, प्रदेश भर में 65 प्रतिशत अभ्यर्थी ही पेपर देने पहुंचे। 35 प्रतिशत तक अनुपस्थिति दर्ज की गई है।



बता दें, इस बार संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद ने प्रवेश परीक्षा के प्रारूप में बदलाव किया है। परीक्षा दो दिन कराई जा रही है। रविवार को इंजीनियरिंग और फार्मेसी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑफलाइन परीक्षा कराई गई। वहीं, आगामी मंगलवार को अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन परीक्षा कराई जाएगी।

राजधानी में पहली पाली में सुबह नौ से 12 बजे के बीच हुई परीक्षा के लिए कुल 22 केन्द्र बनाए गए थे। पहली पाली में करीब 8231 अभ्यर्थियों का शामिल होना प्रस्तावित था। लेकिन, 4955 ही पेपर देने पहुंचे।  कोरोना संक्रमण को देखते हुए परीक्षा केन्द्रों पर कई दावे किए गए थे। लेकिन, कुछ केन्द्रों पर स्थितियां ठीक नजर नहीं आई। लखनऊ पॉलीटेक्निकल कॉलेज में छात्रों को एक लाइन में खड़े होने की फोटो सामने आई हैं। इसमें, सोशल डिस्टेंसिंग नजर नहीं आ रही है।

उधर, प्रदेश के सभी 75 जिलों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। यहां, 2,78,145 अभ्यर्थियों का शामिल होना प्रस्तावित था। इसमें, करीब 65 प्रतिशत उपस्थित रहे। दूसरे पाली की परीक्षाएं चल रही हैं।  शाम की पाली के लिए 66,306 छात्र पंजीकृत हैं।



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Wednesday, July 29, 2020

प्रदेश में लगातार बढ़ते कोरोना केसों के चलते शिक्षकों ने की सरकार से कर्मचारियों की भांति रोस्टर की मांग

प्रदेश में लगातार बढ़ते कोरोना केसों के चलते शिक्षकों ने की सरकार से कर्मचारियों की भांति रोस्टर की मांग


प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, मंगलवार को 3490 नये केस आये तो अब तक कुल संख्या 74 हजार के करीब हो चुकी है। इस बीच शिक्षकों ने सरकार से गुहार से लगायी है कि जिस तरह से सचिवालय में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को बुलाकर काम कराया जा रहा है उसी तरह से सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को बुलाया जाना चाहिए। 



इस बारे में शिक्षक संगठनों ने भी सरकार से अपील की है शिक्षकों को रोस्टर के हिसाब से बुलाया जायेगा तो उनको आने में कोई परेशानी नहीं होगी। वहीं कई शिक्षक आक्रोशित भी हैं कि शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय आते-आते कई शिक्षक बुखार से पीड़ित हैं लेकिन अधिकारियों के आदेश के चलते फिर भी उन्हें आना पड़ रहा है। शिक्षकों कहना है कि मौजूदा समय में सवारी साधन की भी स्थिति इतनी खराब है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है। उसके बाद भी शिक्षकों की ड्यूटी घर-घर अभिभावकों से मिलने के लिए कोरोनावायरस के रूप में लगा दी गयी है। इस संबंध में शिक्षक यह भी कहते हैं कि अन्य सरकारी कर्मचारियों को कोरोना वायरस सरकार ने माना है तो उनके लिए उचित मुवाअजा भी निर्धारित किया गया है, लेकिन यहां तो मौत होने के बाद उनकी पेंशन तक नहीं है।


यात्रा के दौरान कोरोना का ज्यादा खतरा

लखनऊ मंडल में आने वाले लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, लखीमपुर के अधिकांश शिक्षकों का कहना है कि जब वह बस या मैक्सी कैब से यात्रा करके अपने विद्यालय पहुंचते है तो इस दौरान सवारियों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पाता है, इस स्थिति में कभी भी कोरोना वायरस फैल सकता है।


बीआरसी पर भी बढ़ा खतरा

वहीं ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर कार्यालय बीआरसी पर भी कोरोना का खतरा बढ़ रहा है, मानव संपदा पोर्टल पर चल रहे कार्य के चलते शिक्षक भारी संख्या  में बीआरसी पर पहुंच रहे हैं, जहां न तो सोशल डिस्टेसिंग का पालन हो पा रहा है न ही वेबसाइट चलने से कार्य में तेजी आ पा रही है। 


"प्रदेश में कोरोना के तेजी से मामले बढ़ रहे हैं। शिक्षक जिस तरह सवारी करके विद्यालय पहुंच रहे है, ऐसे में रोस्टर लागू किया जाना बहुत जरूरी हैं नहीं तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।" -महेश मिश्रा, अध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ

"स्कूल में जो भी कार्य हैं वह रोस्टर के हिसाब से शिक्षक जाये तो भी किए जा सकते हैं, कोई भी शिक्षक अपने कामों से नहीं भाग रहा है, और फिर जब सचिवालय में रोस्टरलागू है तो विद्यालय में क्यों नहीं?" -विनय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन

Saturday, July 25, 2020

बेसिक स्कूलों में भी बनाया जाए एकेडमिक कैलेंडर, परिषदीय स्कूलों में बच्चों के ड्रॉप आउट पर ध्यान देने की जरूरत: आनंदीबेन

● परिषदीय स्कूलों में बच्चों के ड्रॉप आउट पर ध्यान देने की जरूरत: आनंदीबेन

● बेसिक स्कूलों में भी बनाया जाए एकेडमिक कैलेंडर, बेसिक शिक्षा विभाग ने राज्यपाल को दिया प्रस्तुतीकरण

● दो साल में यूपी को टॉप 5 राज्यों की सूची में लाने का लक्ष्य निर्धारित - DGSE

● कहा- प्राथमिक स्कूल के बच्चों का भी शैक्षणिक कैलेंडर होना चाहिए

● वर्तमान परिवेश को देखते हुए शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करने की जरूरत


लखनऊ : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रदेश के वेसिक स्कूल के बच्चों का भी शैक्षणिक कैलेंडर होना चाहिए, जिसमें पूरे साल पड़ने वाले राष्ट्रीय पर्व, महापुरुषों के जन्मदिन और त्योहारों का जिक्र हो। वच्चों का पाठ्यक्रम तैयार करने में इस वात का ध्यान रखना कि उसमें प्रस्तुतिकरण बच्चो के आसपास के परिवेश का हो। 


राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बेसिक शिक्षा से जुड़े अध्यापकों को इस तरह प्रशिक्षित करने को कहा है कि जिससे वे बच्चों को कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा अंक और अक्षर ज्ञान आसानी से सिखा सकें। उन्होंने बच्चों के ड्राप आउट पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि जिन बच्चों का नामांकन हुआ है, वे अगली कक्षा में भी रहें। इसके लिए बच्चों के साथ उन्होंने अभिभावकों को भी प्रेरित करने का सुझाव दिया।


राजभवन में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से परिषदीय विद्यालयों के संचालन को लेकर किये गए प्रस्तुतीकरण के दौरान राज्यपाल ने कहा कि एक से आठ तक की उम्र के बच्चों में सीखने की शक्ति ज्यादा होती है। उनमें सुधार की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए बच्चों को आसानी से सिखाने के तौर-तरीके ईजाद किये जाने चाहिए।

पोस्टर व चित्रों से बच्चों को सिखाएं

राज्यपाल ने कहा कि छोटे बच्चों को पोस्टर व चित्रों से सिखाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। विद्यालय की दीवारों पर बच्चों की समझ के हिसाब से पोस्टर व चित्र बनाए जाएं जिन्हें देखकर बच्चे सीख लें। पोस्टर व चित्र बच्चों की लंबाई के हिसाब से लगाए जाएं। उन्होंने बच्चों के ड्रॉप आउट पर विशेष रूप से ध्यान देने को कहा। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जिन बच्चों का नामांकन हुआ है, वे अगली कक्षा में भी रहें। इसके लिए बच्चों के अभिभावकों को भी प्रेरित करते रहना चाहिए।


दो साल में यूपी को टॉप 5 राज्यों की सूची में लाने का लक्ष्य निर्धारित - DGSE 

महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरण आनंद ने मिशन प्रेरणा के प्रस्तुतीकरण के माध्यम से केंद्र की रैंकिंग में सुधार लाने के लिए राज्य सरकार के उठाए गए कदमों की जानकारी दी।


 उन्होंने बताया कि अगले 2 वर्षों में यूपी को टॉप 5 राज्यों की सूची में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उसी के अनुरूप सभी आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश द्विवेदी, अपर मुख्य सचिव, राज्यपाल, महेश कुमार गुप्ता, अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार भी मौजूद थीं।

Saturday, July 4, 2020

31 जुलाई तक बंद रखने के आदेश के बावजूद मेडिकल छात्रों को पढ़ाई व प्रैक्टिकल कराने के निर्णय पर हाईकोर्ट ने किया जवाब तलब

मेडिकल छात्रों की उपस्थिति क्यों जरूरी? 

हाईकोर्ट ने कहा- कॉलेज बुलाकर पढ़ाई कराने की तर्कसंगत वजह बताए सरकार

मेडिकल कॉलेजों को खोलने के निर्णय को चुनौती


प्रयागराज। स्कूल-कॉलेजों तथा सभी प्रकार के शिक्षण संस्थानों को 31 जुलाई तक बंद रखने के आदेश के बावजूद मेडिकल छात्रों को कक्षा में बुलाकर पढ़ाई व प्रैक्टिकल कराने के निर्णय पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया। 




Wednesday, January 22, 2020

फतेहपुर : प्रेरणा एप पर रिपोर्ट अपलोड होने पर लगेगी एआरपी की नियमित हाजिरी, हर माह करना होगा कम से कम 30 विद्यालयों का ऑनलाइन सपोर्टिव सुपरविजन

फतेहपुर : प्रेरणा एप पर रिपोर्ट अपलोड होने पर लगेगी एआरपी की नियमित हाजिरी, हर माह करना होगा कम से कम 30 विद्यालयों का ऑनलाइन सपोर्टिव सुपरविजन।








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