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Tuesday, October 21, 2025

MDM में तिथि भोजन योजना का यूपी में नहीं हो पा रहा सफल क्रियान्वयन, प्रयागराज की रिपोर्ट ने खोला सच

MDM में तिथि भोजन योजना का यूपी में नहीं हो पा रहा सफल क्रियान्वयन, प्रयागराज की रिपोर्ट ने खोला सच


उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में तिथि भोजन योजना को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। सरकार और विभागीय अधिकारी इस योजना को सामुदायिक सहभागिता और बच्चों में पोषण के प्रति जागरूकता का माध्यम मानते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत अभी भी उम्मीदों से बहुत दूर है। प्रयागराज से आई रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि योजना के दिशा-निर्देशों और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच गहरी खाई मौजूद है।


 प्रयागराज से प्रकाशित अखबारी खबरों के अनुसार, परिषदीय स्कूलों में तिथि भोजन के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं कि विद्यालय परिसर के भीतर केवल पका हुआ भोजन ही बच्चों को दिया जाए और फास्ट फूड या तले हुए पदार्थों को पूरी तरह प्रतिबंधित रखा जाए। विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्यों की जिम्मेदारी तय की गई है कि वे भोजन की गुणवत्ता और वितरण प्रक्रिया की निगरानी करें। यहां तक कि भोजन कराने वाला व्यक्ति भी बच्चों के साथ बैठकर भोजन करेगा, ताकि बच्चों में समानता और सहभागिता की भावना विकसित हो।

लेकिन, योजना की भावनात्मक और प्रशासनिक गंभीरता के बावजूद, राज्य के अधिकांश जिलों में यह पहल अपेक्षित रूप से सफल नहीं हो पाई है। प्रयागराज की न्यूज रिपोर्ट में साफ उल्लेख किया गया है कि बीएसए देवेंद्र सिंह के निर्देशों के बावजूद, तिथि भोजन कराने के इच्छुक लोगों की संख्या बहुत कम है। कई विद्यालयों में महीनों से कोई तिथि भोजन कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ है।

सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में आर्थिक सीमाएँ, समय की कमी और अभिभावकों की अनिच्छा इसके प्रमुख कारण हैं। कई स्थानों पर एसएमसी सदस्य और ग्राम पंचायतें भी सक्रिय भूमिका नहीं निभा पा रही हैं। जिन विद्यालयों में तिथि भोजन होता भी है, वहाँ अक्सर मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर सवाल उठते हैं।

विभागीय अधिकारी मानते हैं कि तिथि भोजन की भावना अत्यंत नेक है, लेकिन बिना सामुदायिक भागीदारी के यह योजना केवल कागज़ों पर ही सजीव रह जाएगी। प्रयागराज की तरह कई जिलों में जब तक स्थानीय समाज और अभिभावक सक्रिय भागीदारी नहीं निभाते, तब तक यह योजना अपने वास्तविक उद्देश्य — सामाजिक एकता, स्वच्छता और पोषण सुधार — को हासिल नहीं कर सकेगी।


इस पूरे परिदृश्य में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि योजनाओं का मसौदा और क्रियान्वयन प्रक्रिया प्रायः ज़मीनी सच्चाइयों को जाने बिना तैयार की जाती है। विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों से न तो व्यावहारिक सुझाव लिए जाते हैं, न ही स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर योजना बनाई जाती है। नतीजतन, ऐसी योजनाएँ जमीनी हकीकत से कटकर केवल “अच्छे इरादों के दस्तावेज़” बनकर रह जाती हैं। तिथि भोजन जैसी सामाजिक रूप से सार्थक पहल को सफल बनाने के लिए आवश्यक है कि शिक्षक, अभिभावक, ग्राम प्रतिनिधि और प्रशासन — सभी एक साथ मिलकर व्यवहारिक ढंग से आगे बढ़ें, वरना यह योजना भी अन्य अनेक योजनाओं की तरह केवल आदेशों और फाइलों में सिमट कर रह जाएगी।


Sunday, September 1, 2024

Mid Day Meal in Bihar : बिहार में शिक्षकों को मिलेगी मध्याह्न भोजन योजना से मुक्ति! तमिलनाडु मॉडल लागू करने की तैयारी


Mid Day Meal in Bihar : बिहार में शिक्षकों को मिलेगी मध्याह्न भोजन योजना से मुक्ति! तमिलनाडु मॉडल लागू करने की तैयारी


बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को मध्याह्न भोजन योजना से मुक्त करने पर विचार किया जा रहा है। तमिलनाडु की शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन करने वाली टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है जिसमें मध्याह्न भोजन योजना को समाज कल्याण विभाग के तहत संचालित करने की सिफारिश की गई है। शिक्षा विभाग इस योजना के क्रियान्वयन से शिक्षकों को मुक्त करने संबंधी विकल्पों पर विचार कर रहा है।

मिड डे मील स्कीम में तमिलनाडु मॉडल लागू होने के आसार
तमिलनाडु से अध्ययन करने वाली टीम ने शिक्षा विभाग को दी रिपोर्ट


पटना। राज्य के सरकारी विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना (पीएम पोषण स्कीम) से शिक्षक मुक्त होंगे! इससे संबंधित प्रस्ताव पर शिक्षा विभाग द्वारा काम कराया जा रहा है। तमिलनाडु की शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की सेवा शर्त, स्थानातंरण व पदस्थापन और प्रशासनिक ढांचे का अध्ययन करके लौटी अफसरों की टीम ने विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ को रिपोर्ट दी है।


इसमें कहा गया है कि तमिलनाडु में मध्याह्न भोजन योजना वहां के समाज कल्याण विभाग से संचालित है। उसमें शिक्षकों की कोई भूमिका नहीं है। वहां के स्कूली शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार लाने में शिक्षकों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। अपर मुख्य सचिव ने तमिलनाडु की अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर एक समेकित प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश अफसरों को दिया है।


एक अधिकारी ने बताया कि स्कूली शिक्षा की बेहतरी के मद्देनजर राज्य में मध्याह्न भोजन योजना में तमिलनाडु मॉडल लागू होने के आसार बढ़ गए हैं, क्योंकि शिक्षक संगठनों और कई जनप्रतिनिधियों की अरसे से यह मांग रही है कि इस योजना से शिक्षकों को मुक्त रखा जाएस इसलिए विभाग इस योजना के क्रियान्वयन से शिक्षकों को मुक्त करने संबंधी विकल्पों पर विचार कर रहा है। वैसे टीम की अनुशंसा रिपोर्ट व प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री के स्तर पर ही लिया जाएगा।


तमिलनाडु में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन योजना केंद्र प्रायोजित है, जबकि नौवीं-दसवीं कक्षा के बच्चों के लिए मुख्यमंत्री ब्रेकफास्ट योजना वहां की राज्य सरकार द्वारा चलायी जा रही है। आधे घंटे मिड डे मील के लिए निर्धारित है। इसके बाद बच्चों के स्पीच प्रैक्टिस के लिए हर दिन 20 मिनट तेज आवाज में बोल करके पढ़ना अनिवार्य है। सभी काम मोबाइल और टैब पर होता है।


शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति, पढ़ाई, प्रश्नों के उत्तर सहित अन्य काम मोबाइल और टैब के माध्यम से किया जाता है। स्कूल से लेकर मुख्यालय तक आनलाइन सिस्टम है। प्रत्येक वर्ष हर बच्चे को चार सेट ड्रेस दिया जाता है। सीनियर छात्रों के लिए दो घंटे का अतिरिक्त क्लास होता है।


अध्ययन टीम की रिपोर्ट
तमिलनाडु में विद्यालयों का संचालन पूर्वाह्न नौ से अपराह्न चार बजे तक 75 प्रतिशत प्रधानाध्यापक बनते हैं जिला शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी -संविदा और अस्थायी की जगह शिक्षक से लेकर रसोईया तक की स्थायी नौकरी सेवानिवृत्त के बाद पेंशन का प्रविधान भी प्रबंधक स्तर के कर्मचारी को 24 हजार रुपये वेतनमान रसोइया को 14 हजार रुपये और सहायक रसोइया को 8 हजार रुपये वेतन तथा सेवानिवृत्ति के बाद 1 लाख रुपये एकमुश्त राशि और प्रतिमाह 2 हजार रुपये पेंशन प्रत्येक विद्यालय में कम से कम तीन स्थायी कर्मचारी शहरी क्षेत्रों के विद्यालय नगर निगम के अधीन


ये अधिकारी गए थे तमिलनाडु: प्राथमिक शिक्षा निर्देशक मिथिलेश मिश्र, राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक सज्जन आर., उपनिदेशक संजय कुमार चौधरी, कटिहार के जिला शिक्षा पदाधिकारी अमित कुमार तथा पश्चिम चंपारण के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) योगेश कुमार।

Friday, August 16, 2024

पांच रुपये में पोषण फिर बनेगा शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती

पांच रुपये में पोषण फिर बनेगा शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती


लखनऊ, अगस्त 2024:  बेसिक स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील के साथ सप्ताह में एक दिन पोषक आहार देने की योजना का स्वागत हो सकता था, लेकिन यह अब शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के लिए तनाव और असंतोष का कारण बन गई है। नवंबर 2024 से मार्च 2025 तक चलने वाली इस योजना के तहत विद्यार्थियों को भुना चना, गजक, चिक्की, बाजरे के लड्डू, रामदाना के लड्डू और लाई के लड्डू दिए जाने हैं, लेकिन समस्या यह है कि प्रति बच्चा 50 ग्राम सामग्री के लिए मात्र पांच रुपये का बजट तय किया गया है।


शिक्षकों का कहना है कि इस मामूली बजट में सुपरफूड्स जैसी पोषक सामग्री देना व्यावहारिक नहीं है। मौजूदा महंगाई को देखते हुए, गजक की कीमत 300 से 500 रुपये प्रति किलो, चिक्की 200 रुपये प्रति किलो, और रामदाना के लड्डू भी महंगे दरों पर बिक रहे हैं। पांच रुपये में 50 ग्राम पोषण सामग्री की मांग करना, जब बाजार में इन वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं, शिक्षकों के लिए असंभव साबित हो रहा है।


एक प्रधानाध्यापक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यह योजना कागज पर तो बहुत अच्छी दिखती है, लेकिन वास्तविकता में इसे लागू करना असंभव है। हमें समझ नहीं आता कि इस बजट में बच्चों को पोषक आहार कैसे दिया जाए।"


शिक्षाधिकारियों को भी प्रधानाध्यापकों की इस परेशानी से अवगत करा दिया गया है। हालांकि, उच्च अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि योजना की घोषणा करते समय व्यावहारिकता को नज़रअंदाज़ किया गया, जिससे अब स्कूल प्रशासन और शिक्षक मुश्किल में फंस गए हैं।


पीएम पोषण योजना का उद्देश्य बच्चों के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करना है, लेकिन सवाल उठता है कि अगर सही तरीके से यह पोषण नहीं पहुंचाया जा सका, तो योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। अब देखना यह है कि सरकार इस स्थिति को कैसे संभालती है, क्योंकि शिक्षकों की स्थिति दिन-ब-दिन अधिक कठिन होती जा रही है।

Friday, June 28, 2024

बांदा बीएसए कार्यालय के MDM जिला समन्वयक को दस हजार रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम ने किया गिरफ्तार

बांदा बीएसए कार्यालय के MDM जिला समन्वयक को दस हजार रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम ने किया गिरफ्तार

यूपी के बांदा जिले में एंटी करप्शन टीम ने एमडीएम जिला समन्वयक को दस हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है।


बांदा जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में मध्याह्न भोजन योजना के जिला समन्वयक को एंटी करप्शन टीम ने दस हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार दोपहर टीम शिकायतकर्ता सेवानिवृत्त शिक्षक को लेकर साथ पहुंची तो पूरे कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। आरोपी कर्मचारी को वाहन में बैठाकर टीम कोतवाली देहात थाने ले गई। आरोपी कर्मचारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।


विकास खंड नरैनी क्षेत्र में तैनात रहे शिक्षक गंगा सागर पिछले वर्ष सेवानिवृत्त हुए थे। तैनाती के दौरान विद्यालय में रसोईया की नियुक्ति को लेकर मध्याह्न भोजन योजना के जिला समन्वयक भाष्कर आसवानी ने उन्हें दो दिन पूर्व नोटिस भेजी थी। इससे सेवानिवृत्त शिक्षक काफी परेशान थे। पीड़ित गंगा सागर ने बताया कि डीसी भाष्कर आसवानी ने उनसे रिश्वत में दस हजार रुपये की मांग की थी। उन्होंने इसकी सूचना भ्रष्टाचार निवारण टीम को दी। गुरुवार को सुबह शिक्षक दस हजार रुपये लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे।


यहां उन्होंने रुपये जिला समन्वयक भाष्कर आसवानी को दिए। वह नोट गिन ही रहे थे कि प्रभारी निरीक्षक राकेश सिंह की अगुवाई में एंटी करप्शन की टीम ने छापा मारा। टीम को देखते ही उनके हाथ से दस हजार रुपये छूट कर नीचे गिर गए। पूरे आफिस में अफरा-तफरी मच गई। टीम के अधिकारी भाष्कर आसवानी को वाहन में अपने साथ कोतवाली देहात थाने ले गए। यहां डीसी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई। 


टीम में निरीक्षक ओम प्रकाश सहित शिव कुमार शर्मा, अनिल कुमार, चंद्रपाल सिंह, अभिषेक सिंह, सचिन चौरसिया, नितिन कंचन व शारदा प्रसाद शामिल रहे। बीएसए प्रिंसी मौर्या से इस संबंध में बात करने का प्रयास किया, पर सफलता नहीं मिली। बीएसए की नाक तले पनप रहे भ्रष्टाचार को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं रहीं।


उगाही से शिक्षक परेशान
शिकायतकर्ता शिक्षक गंगा सागर का कहना है कि एमडीएम जिला समन्वयक भास्कर आसवानी से काफी शिक्षक परेशान हैं। इसी तरह फर्जी कार्रवाई कर शिक्षकों से धन उगाही करते हैं और मामले को रफा दफा कर दिया जाता है।

Saturday, November 25, 2023

मुख्यमंत्री ने अयोध्या से हॉट कुक्ड मील योजना का किया शुभारंभ, पोषण भी, पढ़ाई भी किट वितरित, 3,401 भवनों का शिलान्यास

सूबे के 80 लाख बच्चों को मिलेगा गर्म खाना: योगी


गर्मी-सर्दी की छुट्टियों में भी मिलेगा भोजन

दाल, सब्जी, तेल, मसाले एवं ईंधन की व्यवस्था बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग अपने संसाधनों से केंद्रों पर करेगा। पीएम पोषण योजना के तहत कार्य कर रहे रसोइयों को 0.50 रुपये प्रति बच्चा प्रति कार्य दिवस अतिरिक्त पारिश्रमिक दी जाएगी।


लखनऊ / अयोध्या । यूपी के आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों को पुष्टाहार की जगह गरम-गरम पका भोजन मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को सभी 75 जिलों के लिए हॉट कुक्ड मील योजना का शुभारंभ अयोध्या से किया।


इस योजना से प्रदेश के 1.89 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 80 लाख से अधिक बच्चों को सीधे लाभ मिलेगा। योजना के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों में प्रतिदिन प्रति लाभार्थी 70 ग्राम खाद्यान्न गरम पके भोजन के रूप में खिलाने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने अयोध्या पुलिस लाइन के कंपोजिट स्कूल में तीन वर्ष से छह वर्ष के बच्चों को खुद अपने हाथों से पौष्टिक भोजन परोस कर इसकी शुरुआत की।


बेसिक शिक्षा विभाग ने गाइडलाइन तय कर दी है। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के रसोइयों एवं को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकत्री व सहायिकाओं द्वारा संयुक्त रूप से मध्याह्न भोजन एवं हॉट कुक्ड फूड तैयार करने के निर्देश हैं।


खुद को यशोदा मैया की भूमिका में देखें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

मुख्यमंत्री ने अयोध्या से हॉट कुक्ड मील योजना का किया शुभारंभ, पोषण भी, पढ़ाई भी किट वितरित, 3,401 भवनों का शिलान्यास


अयोध्याः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी केंद्रों में हाट कुक्ड मील योजना (एचसीएम) का उद्घाटन किया। अयोध्या में शुक्रवार को कार्यक्रम में उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मां यशोदा की तरह कान्हा को पालने जैसा धर्म निभाने को कहा। 


उन्होंने कहा कि कोरोना काल से बंद प्रदेश में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष के बच्चों के लिए गर्म भोजन देने की शुरुआत भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या धाम से की है। योजना से प्रदेश के 80 लाख बच्चे लाभांवित होंगे।


मुख्यमंत्री ने पुलिस लाइन के कंपोजिट विद्यालय में बच्चों को गर्म भोजन परोसा। उन्होंने कहा कि भगवान राम अपने मंदिर में 22 जनवरी को प्रतिष्ठित हो रहे हैं, उससे पहले अयोध्या धाम से एचसीएम को प्रारंभ करना उनके लिए बड़े ही सौभाग्य की बात है।


 मुख्यमंत्री ने 'पोषण भी, पढ़ाई भी' किट एवं पोषण किट का वितरण करने के साथ ही 35 जिलों के लिए 403 करोड़ की लागत से 3,401 आंगनबाड़ी भवनों का शिलान्यास भी किया। पुलिस लाइन में निर्मित जी-12 के दो बहुमंजिला भवनों का लोकार्पण किया। 


इस अवसर पर महिला कल्याण, बाल विकास व पुष्टाहार विभाग की मंत्री बेबीरानी मौर्य, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह व महिला कल्याण, बाल विकास व पुष्टाहार की राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला आदि मौजूद रहे। इससे पहले योगी ने अयोध्या यात्रा की शुरुआत हनुमानगढ़ी दर्शन से की। उसके बाद वह रामलला का दर्शन-पूजन करने गए। उन्होंने मंदिर निर्माण से जुड़ी जानकारी भी ली।

Saturday, November 4, 2023

आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिलेगा गर्म भोजन, हॉट कुक्ड फूड के लिए मिड डे मील के मेन्यू को मंजूरी देने की तैयारी

आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिलेगा गर्म भोजन, हॉट कुक्ड फूड के लिए मिड डे मील के मेन्यू को मंजूरी देने की तैयारी

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लखनऊ। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ रहे तीन से छह साल के बच्चों को भी गर्म भोजन मिलेगा। प्रदेश सरकार इसके सुचारू संचालन के लिए मिड डे मील की तर्ज पर एक समान मेन्यू रखने की तैयारी कर रही है। यहां भी सप्ताह में बच्चों को वही भोजन परोसा जाएगा, जो मिड डे मील में बेसिक विद्यालयों के बच्चों को परोसा जाता है।

हाल ही में मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की अध्यक्षता में हॉट कुक्ड मील (गर्म पका हुआ भोजन) संबंधी राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा गया है। टास्क फोर्स इस पर निर्णय लेगी, जिस पर सीएम का अनुमोदन लिया जाएगा। प्रदेश में लगभग 65 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्र प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में (को-लोकेटेड) स्थित हैं। ऐसे में इन्हीं विद्यालयों की रसोई में भोजन पकाया जाना है। इसलिए पीएम पोषण योजना (मिड डे मील) के समान ही मेन्यू रखने का प्रस्ताव है।

प्रस्ताव के अनुसार मेन्यू में सोमवार को रोटी, सोयाबीन की बड़ी युक्त मौसमी सब्जी व ताजा मौसमी फल होंगे। मंगलवार को चावल व सब्जी युक्त दाल, बुधवार को मौसमी सब्जी व सोयाबीन की बड़ी युक्त तहरी, बृहस्पतिवार को रोटी व सब्जी के साथ दाल, शुक्रवार को मौसमी सब्जी व सोयाबीन की बड़ी युक्त तहरी और शनिवार को चावल व सब्जी के साथ दाल दी जाएगी। इसमें श्री अन्न को प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में निर्देश दिए गए कि आंगनबाड़ी केंद्रों को 200 मीटर की परिधि में स्थित प्राथमिक विद्यालय से संबद्ध किया जाए। आंगनबाड़ी केंद्र तक तैयार भोजन पहुंचाने और बच्चों में वितरित करने का दायित्व आंगनबाड़ी सहायिकाओं को दिया जाए। 200 मीटर की परिधि में दो विद्यालय होने पर पास के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाए। जानकारी के अनुसार इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए बजट भी आवंटित किया जाएगा।



अब 15 नवंबर के बाद आंगनबाडी केंद्रों में बच्चों को मिलेगा गर्म भोजन


• नवरात्र से गर्म भोजन देने के मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पूरा नहीं कर सका विभाग

• सात वर्ष वाद आंगनवाडी केंद्रों में शुरू होने जा रही हाट एंड कुक्ड मील योजना


लखनऊ : आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों को पका हुआ गर्म भोजन मिलने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। नवरात्र से बच्चों को गर्म भोजन परोसने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश को बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग पूरा नहीं कर सका है। अब 15 नवंबर के आस-पास ही यह योजना शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।


सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले तीन से छह वर्ष के बच्चों को बेसिक स्कूलों की तर्ज पर गर्म खाना परोसने का निर्णय लिया है। वर्ष 2016 से बंद चल रही इस योजना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिर से शुरू करवाया है। सरकार ने को- लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों तथा नान को - लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनाई है। को- लोकेटेड आंगनबाड़ी, ऐसे केंद्र हैं, जो ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रांगण में या फिर उनसे 200 मीटर की दूरी पर हैं। प्रदेश में ऐसे आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या 1.21 लाख है।


नान लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं, जो प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित नहीं हो रहे हैं। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में इन आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या लगभग 67,148 है। को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए प्राथमिक विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग किया जाएगा। पीएम पोषण (एमडीएम) की तरह ही आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भी भोजन बनेगा। नान को लोकेटेड  आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन परोसने तथा बच्चों के खाना खाने के लिए बर्तनों की व्यवस्था संबंधित ग्राम सभा या नगरीय निकाय करेंगे।


बच्चों के पोषण से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना को मुख्यमंत्री नवरात्र से ही शुरू करना चाहते थे, यही कारण है कि 10 अक्टूबर को कैबिनेट मीटिंग से इस योजना को पास कराने के बाद उसी दिन शाम को योजना की तैयारियों की बैठक की थी। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विभाग इसे नवरात्र बीतने के बाद भी अभी तक शुरू नहीं कर सका है।


बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की निदेशक सरनीत कौर ब्रोका कहती हैं कि इस योजना को शुरू करने के लिए कई दूसरे विभागों की भी मदद ली जा रही है, इसलिए इसमें समय लग रहा | नवंबर में यह योजना शुरू हो जाएगी, तारीख मुख्यमंत्री से समय मिलने के बाद तय होगी।