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Saturday, September 12, 2020

यूपी के शिक्षक एनसीईआरटी के लिए हिन्दी में बनाएंगे वीडियो

यूपी के शिक्षक एनसीईआरटी के लिए हिन्दी में बनाएंगे वीडियो

 
अब माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक एनसीईआरटी के लिए भी वीडियो बनाएंगे। इसके लिए एनसीईआरटी विषय और पाठ के नाम बताएगा और उसके मुताबिक विभाग शिक्षकों को चयनित कर वीडियो बना कर भेजेगा। इसे पीएम ई-विद्या चैनल पर चलाया जाएगा। अभी तक यूपी के शिक्षकों के वीडियो यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए ही प्रसारित किए जा रहे हैं। 



हिन्दी में वीडियो बनाने के लिए यूपी से साधा संपर्कएनसीईआरटी लॉकडाउन में हर कक्षा के लिए ई-विद्या चैनल शुरू किया है और इस पर कक्षावार वीडियो का प्रसारण होता है। ये चैनल निशुल्क हैं और पूरे देश में प्रसारित किए जा रहे हैं। हिन्दी पट्टी के प्रदेशों के लिए पाठों के वीडियो हिन्दी में बनवाने के लिए एनसीईआरटी ने यूपी से संपर्क साधा है। दरअसल, ये ख्याल उन्हें यूपी के वीडियो देख कर आया है। 


लॉकडाउन के दौरान यूपी बोर्ड ने दूरदर्शन व स्वयंप्रभा (अब पीएम ई विद्या) चैनल पर स्लॉट लेकर प्रसार शुरू किया। इस चैनल पर वीडियो चलाने के लिए एनसीईआरटी का अनुमोदन लेना पड़ता है। इन वीडियो को देखने के बाद ही एनसीईआरटी ने यूपी से संपर्क से साधा।860 वीडियो एनसीईआरटी ने पास किएयूपी ने लॉकडाउन के दौरान ही वीडियो बनवाने की शुरुआत की और हजारों की संख्या में शिक्षकों ने वीडियो भेजे। इनमें से 860 वीडियो एनसीईआरटी ने प्रसारण के लिए पास कर दिए। 


निदेशालय स्तर पर एक टीम का गठन किया गया है जो वीडियो का परीक्षण कर एनसीईआरटी भेजती है या रिजेक्ट करती है। वीडियो बनाने वाले 134 शिक्षकों को शिक्षक दिवस के मौके पर ई प्रमाणपत्र भी दिए गए। 

Friday, September 11, 2020

उच्च शिक्षा : डिजिटल लाइब्रेरी से घर बैठे मिलेगा हर विषय का ई-कंटेंट, 10 शिक्षक होंगे पुरस्कृत

ऑनलाइन पढ़ाई में नहीं होगा खिलवाड़, ई-कंटेंट पोर्टल पर 30 सितंबर तक अपलोड होगा कंटेंट

उच्च शिक्षा : डिजिटल लाइब्रेरी से घर बैठे मिलेगा हर विषय का ई-कंटेंट, 10 शिक्षक होंगे पुरस्कृत

 
लखनऊ : कोरोना महामारी के कारण बंद चल रहे शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को घर बैठे बेहतर ई-कंटेंट उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने डिजिटल लाइब्रेरी तैयार की है। ई-कंटेंट पोर्टल के माध्यम से विद्यार्थियों को घर बैठे हर विषय की पाठ्य सामग्री उपलब्ध होनी शुरू भी हो गई है।


उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा के निर्देश पर सितंबर और अक्टूबर महीने में विद्यादान माह मनाया जाएगा। इन दो महीनों में शिक्षकों को विशेष तौर पर अधिक से अधिक ई-कंटेंट उपलब्ध करवने के लिए प्रेरित किया जाएगा। ज्यादा ई-कंटेंट उपलब्ध कराने वाले 10 शिक्षकों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग के मुताबिक बीती पांच सितंबर से ई-कंटेंट पोर्टल पर पाठ्य सामग्री उपलब्ध होने लगी है।


विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों के स्नातक व परास्नातक के विद्यार्थी पोर्टल पर क्लिक कर आसानी से किसी भी विषय का ई-कंटेंट हासिल कर सकेंगे। अब तक करीब 13 हजार ई-कंटेंट तैयार किए जा चुके हैं और अब इसे तेजी से अपलोड किया जा रहा है।


लखनऊ : यूपी के राज्य विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई में अब खिलवाड़ नहीं हो पाएगा। कोरोना संक्रमण के चलते बीते मार्च में लॉकडाउन लगने के बाद शुरू की गई ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आईं थीं। कई शिक्षकों ने ई-कंटेंट के मैटीरियल के तौर विषय की किताब स्कैन कर डाल दी थी, लेकिन अब ई-कंटेंट पोर्टल तैयार किया गया है और स्क्रीनिंग के बाद ही इस पर ई-कंटेंट अपलोड किया जा रहा है। बौद्धिक संपदा अधिकार व कॉपीराइट अधिनियम का पालन करने के लिए शिक्षकों से एक प्रपत्र भी भरवाया जा रहा है। विश्वविद्यालय व कॉलेज स्तर से लेकर उच्च शिक्षा विभाग तक इसकी निगरानी की जा रही है।


उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए ई-कंटेंट पोर्टल  पर स्नातक व परास्नातक कक्षाओं के विषयवार कंटेंट अपलोड करने का काम शुरू हो गया है। अब तक करीब 13 हजार ई-कंटेंट तैयार भी किए जा चुके हैं। स्क्रीनिंग के बाद इन्हें ऑनलाइन किया जा रहा है। 30 सितंबर तक सभी विषयों के ई-कंटेंट को अपलोड करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है। उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा के निर्देश पर साइंस, कॉमर्स व आर्ट्स के अलग-अलग विषयों के ई-कंटेंट तैयार करने के लिए राज्य विश्वविद्यालयों को नोडल विश्वविद्यालय के रूप में चयनित किया गया है। 


विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आगरा के डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ व लखनऊ विश्वविद्यालय को ई-कंटेंट तैयार करने का जिम्मा दिया गया है। इसी तरह कॉमर्स का ई-कंटेंट लखनऊ विश्वविद्यालय व आगरा के डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय को और मैनेजमेंट के ई-कंटेंट का जिम्मा झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय व बरेली के रुहेलखंड विश्वविद्यालय को सौंपा गया है।

ऑनलाइन शिक्षा: जागरूकता के अभाव में नहीं हो रहा प्रभाव, न अभिभावक ले रहे रुचि न बच्चे

ऑनलाइन शिक्षा: जागरूकता के अभाव में नहीं हो रहा प्रभाव, न अभिभावक ले रहे रुचि न बच्चे


 
प्रयागराज : कोरोना संक्रमण फैलने के साथ ही स्कूली शिक्षा ऑनलाइन कर दी गई। तमाम विद्यार्थियों के पास संसाधन की कमी आड़े आ रही है तो कुछ के पास संसाधन हैं भी तो वे उदासीन हैं। अभिभावक भी सजग नहीं हैं। वाट्सएप ग्रुप पर शिक्षक जब सवाल पूछते हैं तो उन्हें पखवारे बाद भी उत्तर नहीं मिलता है। इससे बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है।



प्राथमिक विद्यालय गड़रा के इंचार्ज प्रधानाध्यापक शिवभान सिंह ने बताया कि स्कूल में कुल 136 विद्यार्थी हैं जब कि वाट्सएप ग्रुप पर 20 विद्यार्थी जुड़े हैं। नियमित रूप से विषयवार वीडियो बनाकर ग्रुप में भेज रहे हैं। कई बार टेक्स मैसेज व वाइस मैसेज भी भेजते हैं लेकिन न तो अभिभावक रुचि लेते हैं और न बच्चे। 


प्राथमिक विद्यालय गौहानी की इंचार्ज प्रधानाध्यापक सुचिता सिंह ने बताया कि 73 विद्यार्थी स्कूल में हैं, सिर्फ 10 वाट्सएप ग्रुप पर हैं। शुरू में तो तीन-चार बच्चों ने रिस्पांस दिया लेकिन अब कोई भी रिप्लाई नहीं करता। यहां तक कि ग्रुप में भेजे गए संदेश भी नहीं देखते। 


प्राथमिक विद्यालय बघोलवा आदिवासी बस्ती के प्रधानाध्यापक डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 60 बच्चे विद्यालय में है। वाट्सएप से 18 विद्यार्थी जुड़े हैं लेकिन एक भी पठन पाठन को लेकर सक्रिय नहीं हैं। जितनी भी पाठ्य सामग्री भेजी जाती है उसे कभी न तो अभिभावक देखते हैं और न बच्चे। हां कुछ बच्चों के घर जाकर गृह कार्य दे आते हैं तो वे उसे कर लेते हैं। इस संबंध में अभिभावक भी जागरूक नहीं हो रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा देने में शिक्षकों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

Tuesday, September 8, 2020

फतेहपुर : अब एंड्राएड फोन चलाना सीख रहे मास्साब, शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण

फतेहपुर : अब एंड्राएड फोन चलाना सीख रहे मास्साब, शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण।

फतेहपुर : कोरोना संक्रमण काल में भले ही बच्चों के लिए विद्यालय बंद चल रहे हों लेकिन शिक्षकों के लिए काम बढ़ता ही जा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों में इनदिनों सबकुछ आनलाइन कार्य सम्पादित करने में जोर दिया जा रहा है। जिससे खासकर बुजुर्ग शिक्षकों की परेशानी बढ़ रही है। इस उम्र में शिक्षक स्मार्ट एंड्रायड मोबाइल फोन चलाना सीखरहे हैं।

परिषदीय स्कूलों में ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए दीक्षा एप और मानव सम्पदा पोर्टल को लिंक करने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ शिक्षक शिक्षकों ऐसे हैं जो एंड्रायड मोबाइल चलाने में सक्षम नहीं हैं। उन्हें प्रशिक्षण लेने में दिक्कत आ रही है। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को आनलाइन प्रशिक्षित करने का शासन का फरमान उनके गले की फांस बन गया है। पहले तो चुनिंदा शिक्षकों को शासन के बताए ऐप डाउनलोड कराने के निर्देश थे। जैसे तैसे उनको डाउनलोड कर ही पाए थे कि शासन ने दीक्षा ऐप और मानव सम्पदा को लिंक करने के निर्देश जारी हो गए। लिंक करने के आदेश आते ही मोबाइल चलाने में अक्षम शिक्षक शिक्षकों का सिर दर्द बढ़ गया है।

कोरोना के चलते एक जगह पर भीड़ इकट्ठा करने पर मनाही है। इसके चलते आनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जनपद में लगभग 25 से 30 फीसद शिक्षकों की उम्र पचास से पचपन वर्ष के आसपास है। यह शिक्षक न तो तकनीकी रूप से दक्ष हैं और न ही मोबाइल पर प्रशिक्षण में सक्षम हैं। खासकर अधिकतर महिला शिक्षक ऐसी हैं जिनके लिए प्रशिक्षण में शामिल होना चुनौती है। कुछ दिनों पहले ही शासन ने शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षित करने के लिए दीक्षा ऐप को मानव संपदा पोर्टल से लिंक का आदेश जारी कर दिया है। शिक्षकों को अब प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।



मोबाइल खरीदना आसान चलाना मुश्किल : बुजुर्ग शिक्षक

स्मार्ट फोन खरीदने में तो सक्षम हैं लेकिन उसे चलाने में उन्हें तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 50 से 55 वर्ष पेन कागज के तहत काम निपटाने वाले बुजुर्ग शिक्षकों के लिए ऑनलाइन व्यवस्थाएं सिर दर्द बन रही हैं। ऐसे में ये मास्साब घर के बच्चों या फिर विद्यालय के युवा शिक्षकों से मदद ले रहे हैं।



शिक्षक संकुलों का गठन : न्याय पंचायत स्तर पर शिक्षक संकुलों का गठन किया गया है। ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों को दीक्षा ऐप से मानव संपदा से लिंक करने समेत मोबाइल चलाने में आ रही दिक्कतों का निदान कर रहे हैं।विद्यालयों में जाकर शिक्षकों को बता रहे है।-राकेश सचान, बीईओ मुख्यालय


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Monday, September 7, 2020

दूरदर्शन उत्तर प्रदेश (DD UP) चैनल पर यूपी बोर्ड की कक्षा- 10 व 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण के तृतीय चरण की समय सारिणी


दूरदर्शन उत्तर प्रदेश (DD UP) चैनल पर यूपी बोर्ड की कक्षा- 10 व 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण के तृतीय चरण की समय सारिणी


फर्रुखाबाद : शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण

फर्रुखाबाद : शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण।

फर्रुखाबाद : परिषदीय स्कूलों में ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए दीक्षा एप और मानव सम्पदा पोर्टल का लिंक करने के निर्देश दिए है। कुछ शिक्षक-शिक्षिकाएं ऐसे हैं जो एंड्रइड मोबाइल चलाने में सक्षम नही हैं। उन्हें प्रशिक्षण लेने में दिक्कत आ रही है।






परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को आनलाइन प्रशिक्षित करने का शासन का फरमान उनके गले की फांस बन गया है। पहले तो चुनिंदा शिक्षकों को शासन के बताए एप डाउन लोड कराने के निर्देश थे। जैसे तैसे उनको डाउनलोड करही पाए थे कि शासन ने दीक्षा एप और मानव सम्पदा को लिंक करने के निर्देश जारी हो गए। लिंक करने के आदेश आते ही मोबाइल चलाने में अक्षम शिक्षक शिक्षकों का सिर दर्द बढ़ गया है। कोरोना के चलते एक जगह पर भीड़ इकट्ठा करने परमनाही है। इसके चलते आनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जनपद में लगभग 25 से 30 फीसद शिक्षकों की उम्र पचास से पचपन वर्ष के आसपास है। यह शिक्षक न तो तकनीकी रूप से दक्ष है और न ही मोबाइल पर प्रशिक्षण में सक्षम हैं। खासकर अधिकतर महिला शिक्षक ऐसी हैं जिनके लिए प्रशिक्षण में शामिल होना चुनौती है। कुछ दिनों पहले ही शासन ने शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षित करने के लिए दीक्षा एप को मानव संपदा पोर्टल से लिंक का आदेश जारी कर दिया है।

अनलाइन प्रशिक्षण के लिए  शिक्षकों को दीक्षा एप से मानव संपदा से लिक करना अनिवार्य। इसके लिए एआरपी एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) विद्यालयों में जाकर शिक्षकों को बता रहे हैं। यदि किसी को समस्या आ रही है तो उसका निदान किया जा रहा है। - लालजी यादव, बीएसए

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