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Friday, September 4, 2026

नदियों के नाम पर होंगे एनसीईआरटी की भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम

नदियों के नाम पर होंगे एनसीईआरटी की भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम

 छठी और नौवीं की भारतीय भाषाओं की सभी पाठ्यपुस्तकों के नाम स्थानीय नदियों के नाम पर रखे

हिंदी की पाठ्यपुस्तक का नाम अलकनंदा और रेवा, तो पंजाबी भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम सतलुज और रावी रखा


नई दिल्ली: देश की नई पीढ़ी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के त्रिभाषा फार्मूले के जरिये भारतीय भाषाओं से जोड़ने की पहल में छात्र सिर्फ भाषा नहीं सीखेंगे, बल्कि देश की नदियों के नाम से भी रूबरू होंगे। एनसीईआरटी सभी भारतीय भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम देश की नदियों के नाम पर रख रही है। अब तक छठी और नौंवी कक्षा के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम क्षेत्र या राज्यों की भाषाओं के आधार पर वहां की स्थानीय नदियों के नाम पर रखा गया है।


पंजाबी भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम सतलुज और रावी रखा गया है, जबकि तमिल भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम भवानी और वैगई (तमिलनाडु की प्रमुख नदियां) के नाम पर रखा गया है। हिंदी की पाठ्यपुस्तकों का नाम अलकनंदा व रेवा रखा गया है। बांग्ला भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम भागीरथी और कालिंदी है। वहीं, मैथिली भाषा की पुस्तक का नाम कमला और कौशिकी (स्थानीय नदियां) रखा गया है। 


इसी तरह अन्य भाषाओं की पुस्तकों के नाम भी देश की प्रमुख भाषाओं के नाम पर रखे गए हैं। एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग भाषाओं की इन पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने का काम त्रिभाषा फार्मूले के तहत किया जा रहा है। छठी से दसवीं तक छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, इनमें दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। इन पाठ्यपुस्तकों का नाम नदियों के नाम पर रखने का फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि नई पीढ़ी भाषाओं की तरह देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी नदियों के नाम भी जान सकेगी।

किन प्रमुख नदियों के नाम पर है किताबेंः अलकनंदा, सतलुज, भवानी, कृष्णा, नेपाली तीस्ता, गोदावरी, साबरमती, भागीरथी, लोकतक, मांडवी, कमला, झेलम, बैतरणी, देविका, गोमती, सिंधु, रेवा, नर्मदा, पंचगंगा, कालिंदी, रावी, महानदी, तुंगभद्रा, पंबा, कपिला, कौशिकी, तवा, चिनाब, लुनी, वैगई आदि।

Wednesday, August 19, 2026

यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की किताबें उपलब्ध कराने में रहा फेल, टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से हवाहवाई रहा दावा

यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की किताबें उपलब्ध कराने में रहा फेल, टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से हवाहवाई रहा दावा 

अपर सचिव ने कहा, MOU न होने से अब अगले सत्र में ही किताबें उपलब्ध होने की उम्मीद


प्रयागराज। यूपी बोर्ड के अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्रों को इस वर्ष अपनी निर्धारित पाठ्य पुस्तकें नहीं मिल पाएंगी। उन्हें वर्ष 2027-2028 शैक्षिक सत्र में ही ये किताबें उपलब्ध हो सकेंगी। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अंग्रेजी माध्यम की अलग किताबें प्रकाशित करने का दावा किया था लेकिन टेंडर प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।


उम्मीद हैं कि आगामी शैक्षिक सत्र 2027-28 से हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के अनुबंध किए जाएंगे। वर्तमान में कक्षा नौ से 12 तक के अंग्रेजी माध्यम के छात्र एनसीईआरटी की महंगी किताबों पर निर्भर हैं। बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने के लिए अपनी सस्ती पाठ्य पुस्तकें प्रकाशित करने की योजना बनाई थी।

इस योजना को शासन से अनुमति भी मिल गई थी। करीब एक लाख अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को सस्ती किताबें मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, प्रकाशन के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से यह संभावना कमजोर पड़ गई है। अपर सचिव स्कन्द शुक्ला ने बताया कि अभी एमओयू नहीं हो सका है। उन्होंने आगामी सत्र 2027 से अंग्रेजी माध्यम की किताबें मुहैया कराने की उम्मीद जताई।

शासनादेश और प्रक्रिया : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण और वितरण के लिए जून 2026 में एक शासनादेश जारी हुआ था। शासन के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्ता ने यह शासनादेश जारी किया था। इसमें एनसीईआरटी नई दिल्ली से कॉपीराइट अनुबंध करने की बात कही गई थी। निविदा की कार्रवाई सात अप्रैल 2022 को गठित निविदा समिति के माध्यम से होनी थी।

Sunday, June 21, 2026

यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम में भी उपलब्ध एनसीईआरटी की पुस्तकें कराएगा, हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के 36 विषयों की पुस्तकें हिंदी के साथ अंग्रेजी माध्यम में भी होंगी मुद्रित

यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम में भी उपलब्ध एनसीईआरटी की पुस्तकें कराएगा, हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के 36 विषयों की पुस्तकें हिंदी के साथ अंग्रेजी माध्यम में भी होंगी मुद्रित

21 जून 2026
प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने शैक्षिक सत्र 2027-28 से विद्यार्थियों को बड़ी सुविधा देने का निर्णय लिया है। अब हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के विभिन्न विषयों की एनसीईआरटी व परिषद की तरफ से विकसित पुस्तकें हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी माध्यम में भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

सचिव भगवती सिंह ने जारी आदेश में कहा है कि हाईस्कूल (कक्षा नौ व 10) के अंग्रेजी, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान व इंटरमीडिएट (कक्षा 11 व 12) के अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान और गृहविज्ञान समेत कुल 36 विषयों की 70 एनसीईआरटी आधारित और 12 परिषद विकसित पुस्तकों को प्रदेश के विद्यालयों में उपलब्ध कराया जाएगा।

अब तक परिषद की पुस्तकें मुख्य रूप से हिंदी माध्यम में ही मुद्रित होती थीं। इस वजह से अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को अध्ययन सामग्री के लिए बाजार से महंगी पुस्तकें खरीदनी पड़ती थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों को भी सस्ती दरों पर पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी।

परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगामी शैक्षिक सत्र के लिए पुस्तक विक्रेताओं व संस्थाओं को निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत डीलरशिप प्रदान की जाएगी, जिससे पुस्तकों की उपलब्धता प्रदेशभर में सुनिश्चित की जा सके।




अब अंग्रेजी में भी मिलेंगी यूपी बोर्ड की एनसीईआरटी की किताबें, प्रदेश के लगभग ढाई लाख विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

21 मई 2026
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत देने की तैयारी की है। लंबे समय बाद यूपी बोर्ड अब अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के लिए एनसीईआरटी आधारित पाठ्य पुस्तकों का प्रकाशन अंग्रेजी भाषा में कराने जा रहा है। इस फैसले से प्रदेश के करीब ढाई लाख विद्यार्थियों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।


अब तक यूपी बोर्ड में अंग्रेजी माध्यम से अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के दौरान सबसे बड़ी समस्या अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकों की उपलब्धता को लेकर होती थी। विद्यालयों में पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से होती थी, लेकिन किताबें प्रायः हिंदी माध्यम में ही उपलब्ध कराई जाती थीं। ऐसे में विद्यार्थियों को बाजार से महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदनी पड़ती थीं।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यार्थियों को कम कीमत पर अंग्रेजी माध्यम की एनसीईआरटी पुस्तकें आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। हर वर्ष 50 से 52 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकरण कराते हैं। इनमें एक लाख से अधिक विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करते हैं। परिषद ने इन्हीं छात्रों की जरूरत को देखते हुए शैक्षिक सत्र 2026-27 से अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकों के प्रकाशन की तैयारी शुरू की है।

परिषद के अनुसार कक्षा नौ, 10, 11 और 12 के विभिन्न विषयों की एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। खास बात यह है कि ये पुस्तकें बाजार में उपलब्ध निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की तुलना में काफी सस्ती होंगी।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा। अभी तक सीबीएसई पैटर्न की अंग्रेजी माध्यम की किताबें निजी बाजार में महंगे दामों पर मिलती थीं, जिसके कारण कई छात्र पूरी पुस्तकें खरीदने में सक्षम नहीं हो पाते थे। यूपी बोर्ड की ओर से कम कीमत पर पुस्तकें उपलब्ध कराए जाने से छात्रों का आर्थिक बोझ कम होगा।


अभी तक हिंदी माध्यम की पुस्तकों का ही प्रकाशन कराया जाता था, लेकिन अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की समस्याओं को देखते हुए अब अंग्रेजी भाषा में भी एनसीईआरटी पुस्तकों का प्रकाशन कराया जाएगा। इससे छात्रों को अध्ययन सामग्री प्राप्त करने में काफी सुविधा होगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। -भगवती सिंह, सचिव, उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद

Monday, June 8, 2026

कक्षा छह से आठ तक मनमर्जी से नहीं चुन निजी स्कूल सकते किताबें – हाईकोर्ट

कक्षा छह से आठ तक मनमर्जी से नहीं चुन निजी स्कूल सकते किताबें – हाईकोर्ट 

हाईकोर्ट ने किताबें तय करने का का जम्मू और कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन का अधिकार बरकरार रखा

केवल बोर्ड की प्रकाशित किताबों को अपनाने का दिया गया था निर्देश

कुछ स्कूलों के खिलाफ अन्य प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर करने की थीं शिकायतें


जम्मू। जम्मू-कश्मीर में कक्षा छह से आठ तक के निजी स्कूल अब मनमर्जी या पसंद से किताबें नहीं चुन सकेंगे। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों के लिए किताबें तय करने का जम्मू और कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (जेकेबोस) अधिकार बरकरार रखा है। हाईकोर्ट का का फैसला स्कूली बच्चों और अभिभावकों पर सीधा असर डालेगा।


कुछ निजी स्कूलों में जेकेबोस की किताबों के बदले या अन्य प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर करने की शिकायतें आई थीं। इसके बाद जेकेबोस ने एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें पूरे प्रदेश के निजी स्कूलों को कक्षा छह से आठ तक के लिए केवल बोर्ड की ओर से प्रकाशित किताबों को अपनाने और पढ़ाने का निर्देश दिया गया था।

जम्मू-कश्मीर प्राइवेट स्कूल्स यूनाइटेड फ्रंट इसे लेकर हाईकोर्ट में लेटर्स अपील दायर की थी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान स्कूली शिक्षा बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों में कक्षा छह से आठ के लिए बोर्ड की ओर से प्रकाशित पुस्तिकाओं को आवश्यक किए जाने संबंधी निर्देश दिए गए थे।

हाईकोर्ट के निर्देशों को चुनौती देते हुए लेटर्स पेटेंट अपील दायर की। इसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने अपील को खारिज कर दिया है और सिंगल जज के उस फैसले को ठहराया। डिवीजन बेंच ने कहा कि बोर्ड की ओर से पाठ्यक्रम और किताबों संबंधी बाध्यता का मकसद शैक्षिक मानकों को बनाए रखना और प्रदेश में शैक्षिक सामग्री में एकरूपता सुनिश्चित करना है।

कोर्ट का दखल तभी सही है जब उसकी नीति मनमानी, गलत या कानून के खिलाफ हो। माना जा रहा है कि कोर्ट के इस फैसले से एक सिस्टम बनेगा और छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों पर बिना मंजूरी वाली किताबों का बोझ कम होगा। जेएनएफ


इस आधार पर दी गई चुनौती

अपील करने वाले ने इन निर्देशों को चुनौती दी थी। इसमें आधार बनाया गया कि बोर्ड पाठ्यक्रम और किताबें तय कर सकता है लेकिन वह निजी स्कूलों को सिर्फ बोर्ड की ओर से प्रकाशित किताबों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। तर्क दिया गया कि इससे विद्यार्थी बेहतर शैक्षणिक गुणवत्ता की किताबें अपनाने के विकल्प से वंचित हो जाएंगे।

निजी स्कूलों की दलील को खारिज करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि एक बार जब कोई शैक्षिक संस्थान अपनी मर्जी से बोर्ड से संबद्धता लेता है तो उसकी शर्तों से जुड़ जाता है। इनमें जेकेबोस की ओर से तय पाठ्यक्रम और किताबें अपनाना भी शामिल है।




Thursday, May 21, 2026

यूपी बोर्ड : अब घर बैठे ऑनलाइन पुस्तकें मंगा सकते हैं विद्यार्थी, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने विकसित किया छात्र अनुकूल ऑनलाइन पोर्टल

यूपी बोर्ड : अब घर बैठे ऑनलाइन पुस्तकें मंगा सकते हैं विद्यार्थी, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने विकसित किया छात्र अनुकूल ऑनलाइन पोर्टल

एनसीईआरटी पुस्तकों की ऑनलाइन उपलब्धता, अमेजन वेबसाइट और पोर्टल के जरिए बिक्री

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि यूपी बोर्ड ने विद्यार्थियों की पाठ्य पुस्तकों की खोज और ऑर्डर प्रक्रिया को सरल व सहज बनाने के लिए छात्र अनुकूल ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया है। इसके माध्यम से छात्र कक्षानुसार पुस्तक सेट का चयन कर सीधे संबंधित वेबसाइट के विक्रय पृष्ठ पर जाकर ऑनलाइन ऑर्डर कर सकेंगे और घर बैठे पुस्तकें प्राप्त कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौ, 10, 11 और 12 के विभिन्न विषयों की 70 एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त एवं वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए सस्ती दर पर उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान एवं गृह विज्ञान जैसे विषय शामिल हैं।

इसके अलावा परिषद की ओर से विकसित हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की 12 पाठ्य पुस्तकें भी कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए प्रचलन में लाई गई हैं। सचिव ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को पुस्तकों की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने और घर बैठे पुस्तक प्राप्ति की सुविधा देने के उद्देश्य से अधिकृत प्रकाशकों के सहयोग से यह व्यवस्था शुरू की गई है।



पहल: यूपी बोर्ड की किताबें अब घर बैठे मिल सकेंगी

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बड़ा कदम उठाते हुए शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौ से 12वीं तक की एनसीईआरटी आधारित पुस्तकों की ऑनलाइन उपलब्धता और होम डिलीवरी व्यवस्था शुरू कर दी है। अब छात्र-छात्राओं को किताबें खरीदने के लिए बाजारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि वे घर बैठे ही ऑनलाइन माध्यम से पुस्तकें मंगा सकेंगे।

बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से मंगलवार को जारी सूचना के अनुसार, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र समेत कुल 36 विषयों की लगभग 70 एनसीईआरटी पैटर्न की पुस्तकें ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं। हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की पुस्तकें भी विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होंगी। पुस्तकों के मुद्रण और वितरण की जिम्मेदारी तीन प्रमुख प्रकाशकों को सौंपी गई है। कक्षा 9 से 12 तक की पुस्तकों के लिए मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिकेशर्स, आगरा को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं कक्षा 10 की पुस्तकों के लिए मेसर्स पीतांबरा बुक प्राइवेट लिमिटेड, झांसी तथा कक्षा 11 की पुस्तकों के लिए मेसर्स सिंघल एजेंसीज, लखनऊ को अधिकृत किया गया है।

बोर्ड ने इस संबंध में सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और क्षेत्रीय कार्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। विद्यार्थी अमेजन और pioneerbooks.in पोर्टल के माध्यम से किताबें ऑर्डर कर सकेंगे। खास बात यह है कि होम डिलीवरी के लिए विद्यार्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। बोर्ड की इस पहल से दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है।

Saturday, April 25, 2026

नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक

नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राज्यों के प्रदेश शिक्षा बोर्ड की नौंवी कक्षा के विद्यार्थी पहली बार इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कला विषय की पढ़ाई करेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इस कला पुस्तक को मधुरिमा नाम दिया है।


कला पुस्तक के माध्यम से छात्रों को चार कला विधाओं-दृश्य कला, संगीत, नृत्य व रंगमंच को सीखने का मौका मिलेगा। पुस्तक से छात्रों को भारतीय संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसमें भीमबेटका गुफा की चित्रकारी, सांची का स्तूप, नाट्यशास्त्र, कैलाश व उन्नाकोटीश्वर मंदिर, अजंता गुफाओं के भित्ति चित्र, चोल काल की कांस्य व होयसला काल की मूर्तिवां भी शामिल हैं।

एनसीईआरटी ने सीबीएसई समेत सभी राज्यों को यह पुस्तक भेज दी है। पुस्तक बाजार के अलावा ऑनलाइन भी उपलब्ध करा दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत पहली बार कक्षा तीसरी से 10वीं तक के छात्रों को कला विधाओं से रूबरू कराने के लिए इस पुस्तक को विभिन्न नामों से शामिल किया गया है। इसमें छात्रों को भक्ति काल और कला के इतिहास के महत्व के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पुस्तक के जरिये कई ऐसी परंपराओं को भी जानेंगे, जिन्हें किसी एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जैसे-वारली, कालीघाट चित्रकला, यक्षगान आदि। कवर पेज से ही भारतीय कला विधाओं की विविधता को दर्शाया गया है, जिसमें छात्र किसी



संगीत से संबंधित विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को समझाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर छात्र यह अनुभव कर सकेंगे कि वाद्य यंत्र बनाना हमें ध्वनि के मूल सिद्धांतों को समझने में कैसे मदद करता है। यह भी कि संगीत वाद्य यंत्र बनाने में भौतिकी की गहरी समझ भी शामिल होती है। गणित और ताल के बीच संबंध को एक रोचक गतिविधि के माध्यम से उजागर किया गया है।

कला विधा का अभ्यास और प्रदर्शन करते हुए दिखाई देंगे, जो अपनी कलाकृतियों के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करते हैं। इसमें शामिल कलाकृतियों से छात्र भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जानेंगे। 


नटराज मूर्ति पर शोध के लिए किया जाएगा प्रेरित : छात्र-छात्राएं जानेंगे कि कांस्य मूर्तिकला का लंबा इतिहास रहा है। उन्हें भारत मंडपम स्थित नटराज की मूर्ति पर शोध करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जिसे लॉस्ट-वैक्स प्रक्रिया का उपयोग करके बनाया गया था। इसी तकनीक का उपयोग सिंधु-सरस्वती सभ्यता में प्रसिद्ध नर्तकी की मूर्ति बनाने के लिए किया गया था। विद्यार्थियों को अपने प्रदेश और देश की कला शैलियों की विस्तृत श्रृंखला का अन्वेषण करने का मौका भी मिलेगा। हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत में राग, ताल और रचनाओं के अलावा वे क्षेत्रीय / लोक संगीत और नृत्य शैलियां भी सीखेंगे। वाद्य यंत्र और भौतिकी में गहरा नाता