DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label किताब. Show all posts
Showing posts with label किताब. Show all posts

Saturday, April 25, 2026

नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक

नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राज्यों के प्रदेश शिक्षा बोर्ड की नौंवी कक्षा के विद्यार्थी पहली बार इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कला विषय की पढ़ाई करेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इस कला पुस्तक को मधुरिमा नाम दिया है।


कला पुस्तक के माध्यम से छात्रों को चार कला विधाओं-दृश्य कला, संगीत, नृत्य व रंगमंच को सीखने का मौका मिलेगा। पुस्तक से छात्रों को भारतीय संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसमें भीमबेटका गुफा की चित्रकारी, सांची का स्तूप, नाट्यशास्त्र, कैलाश व उन्नाकोटीश्वर मंदिर, अजंता गुफाओं के भित्ति चित्र, चोल काल की कांस्य व होयसला काल की मूर्तिवां भी शामिल हैं।

एनसीईआरटी ने सीबीएसई समेत सभी राज्यों को यह पुस्तक भेज दी है। पुस्तक बाजार के अलावा ऑनलाइन भी उपलब्ध करा दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत पहली बार कक्षा तीसरी से 10वीं तक के छात्रों को कला विधाओं से रूबरू कराने के लिए इस पुस्तक को विभिन्न नामों से शामिल किया गया है। इसमें छात्रों को भक्ति काल और कला के इतिहास के महत्व के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पुस्तक के जरिये कई ऐसी परंपराओं को भी जानेंगे, जिन्हें किसी एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जैसे-वारली, कालीघाट चित्रकला, यक्षगान आदि। कवर पेज से ही भारतीय कला विधाओं की विविधता को दर्शाया गया है, जिसमें छात्र किसी



संगीत से संबंधित विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को समझाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर छात्र यह अनुभव कर सकेंगे कि वाद्य यंत्र बनाना हमें ध्वनि के मूल सिद्धांतों को समझने में कैसे मदद करता है। यह भी कि संगीत वाद्य यंत्र बनाने में भौतिकी की गहरी समझ भी शामिल होती है। गणित और ताल के बीच संबंध को एक रोचक गतिविधि के माध्यम से उजागर किया गया है।

कला विधा का अभ्यास और प्रदर्शन करते हुए दिखाई देंगे, जो अपनी कलाकृतियों के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करते हैं। इसमें शामिल कलाकृतियों से छात्र भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जानेंगे। 


नटराज मूर्ति पर शोध के लिए किया जाएगा प्रेरित : छात्र-छात्राएं जानेंगे कि कांस्य मूर्तिकला का लंबा इतिहास रहा है। उन्हें भारत मंडपम स्थित नटराज की मूर्ति पर शोध करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जिसे लॉस्ट-वैक्स प्रक्रिया का उपयोग करके बनाया गया था। इसी तकनीक का उपयोग सिंधु-सरस्वती सभ्यता में प्रसिद्ध नर्तकी की मूर्ति बनाने के लिए किया गया था। विद्यार्थियों को अपने प्रदेश और देश की कला शैलियों की विस्तृत श्रृंखला का अन्वेषण करने का मौका भी मिलेगा। हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत में राग, ताल और रचनाओं के अलावा वे क्षेत्रीय / लोक संगीत और नृत्य शैलियां भी सीखेंगे। वाद्य यंत्र और भौतिकी में गहरा नाता

Wednesday, April 15, 2026

स्कूल खुलने के 15 दिन बाद भी किताबों का इंतजार, व्यवस्था सुधारने के निर्देश, 25 जिलों में वितरण की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं

स्कूल खुलने के 15 दिन बाद भी किताबों का इंतजार, व्यवस्था सुधारने के निर्देश, 25 जिलों में वितरण की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं


लखनऊ। प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग का नया सत्र 2026-27 एक अप्रैल से शुरू हो गया है। जोर शोर से स्कूल चलो अभियान भी चलाया जा रहा है। पहले दिन से विद्यार्थियों को सभी किताबें उपलब्ध भी कराई जानी थीं। किंतु हालत यह है कि 15 दिन बाद भी विद्यालयों में किताबों का इंतजार हो रहा है। विभाग ने इस पर नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं। 


हाल ही में हुई विभागीय समीक्षा में बताया गया कि किताब वितरण की गति 25 जिलों में अपेक्षाकृत धीमी है। इसमें इटावा व हाथरस ने कोई रिपोर्ट ही नहीं दी है। जबकि बहराइच के 2834 में से 2002 विद्यालयों में किताबें नहीं वितरित हुई हैं। बता दें कि बहराइच में ही फरवरी की शुरुआत में कबाड़ में किताबें बेचने का मामला सामने आया था।

आजमगढ़ के 2955 में से 1921 विद्यालयों में, संभल के 1289 में से 803 विद्यालयों में, बांदा के 1797 में से 630 विद्यालयों में, चित्रकूट के 1262 में से 377 विद्यालयों में किताबें नहीं पहुंची हैं। इसी क्रम में अयोध्या में 335, गोरखपुर में 247, सीतापुर में 52, अमेठी में 50, लखनऊ के 33 विद्यालयों में अभी तक सभी किताबें नहीं पहुंची हैं। इसका असर यहां के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। 

Tuesday, April 7, 2026

अनधिकृत किताबों पर सख्ती, 15 अप्रैल तक चलेगा जांच अभियान, यूपी बोर्ड पुस्तक जागरुकता के लिए आयोजित करेगा शिविर

अधिकृत-सस्ती किताबों के लिए हर जिले में लगाएंगे पुस्तक मेला, सचिव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को दिया निर्देश

15 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से लगाएं शिविर

प्रयागराज। यूपी बोर्ड के 29 हजार से अधिक स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा नौ से 12 तक के एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को अधिकृत और सस्ती किताबें उपलब्ध कराने के लिए हर जिले में पुस्तक जागरुकता और सुलभता शिविर (पुस्तक मेला) लगेगा। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों, उप शिक्षा निदेशकों और संयुक्त शिक्षा निदेशकों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। सचिव ने अभिभावकों को जागरूक करने और छात्रों के लिए पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आगरा एवं सहारनपुर मंडलों की तरह प्रत्येक जिले के राजकीय एवं सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में 15 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से पुस्तक मेला आयोजित कराने को कहा है।

अधिकृत मुद्रकों (पायनियर प्रिंटर्स आगरा, पीताम्बरा बुक्स झांसी एवं सिंघल एजेंसीज-लखनऊ) की सहभागिता से लगने वाले मेले के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी जिला स्तर के किसी शिक्षाधिकारी को देने और उसकी ग्रुप फोटो यूपी बोर्ड की वेबसाइट और व्हाट्सएप ग्रुप पर भी अनिवार्य रूप से भेजने को कहा है। एनसीईआरटी नई दिल्ली की 70 पाठ्यपुस्तकों एवं कक्षा नौ से 12 तक की हिन्दी, संस्कृत एवं उर्दू विषयों की चयनित 12 पाठ्यपुस्तकें छपवाई गई है।

स्कूलों में न चलने दें 149 से 361 प्रतिशत तक महंगी किताबेंः सचिव के अनुसार, पता चला है कि विद्यालयों में अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें अनुचित रूप से प्रचलित की रही हैं। कुछ संस्थाओं और पुस्तक विक्रेताओं ने साठगांठ करके निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए अनधिकृत निजी प्रकाशकों की पाठ्यपुस्तकें/गाइड बुक जो यूपी बोर्ड की किताबों से 149 प्रतिशत से 361 प्रतिशत तक महंगी हैं। लिहाजा 15 अप्रैल तक अभियान चला कर स्कूलों का निरीक्षण करें ताकि विद्यार्थियों एवं अभिभावकों पर अनावश्यक बोझ न पड़े। अनधिकृत पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य करने वाले प्रधानाचार्य, प्रबंधक या शिक्षक के खिलाफ नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी की जाए। ध्यान दें इस साल छपी पाठ्यपुस्तकों की असली नकली पहचान के लिए कवर पेज पर सात अंकों का अल्ट्रा वॉयलेट फ्लोरोसेंट लाल रंग में सीरियल नंबर मुद्रित है।




अनधिकृत किताबों पर सख्ती, 15 अप्रैल तक चलेगा जांच अभियान, 
 यूपी बोर्ड पुस्तक जागरुकता के लिए आयोजित करेगा शिविर

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने स्कूलों में अनधिकृत किताबों और गाइड के प्रचलन पर सख्त रुख अपनाया है। परिषद के ने निर्देश पर प्रदेश भर के स्कूलों में 515 अप्रैल तक विशेष चेकिंग न अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान न किताबों की उपलब्धता, गुणवत्ता और निर्धारित प्रकाशकों की पुस्तकों । की बिक्री की जांच की जाएगी।

परिषद के सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई स्कूल संचालक या प्रधानाचार्य छात्रों को अनधिकृत पुस्तकें या गाइड खरीदने छात्रों को अनधिकृत पुस्तकें या गाइड खरीदने के लिए बाध्य किया तो होगी कार्रवाई के लिए बाध्य करता है तो उसके खिलाफ इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के विनियम-18 के तहत कड़ी कार्रवाई करें।

शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 36 विषयों की एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त एवं स्ववित्त पोषित विद्यालयों में लागू किया गया है। कक्षा नौ से 12 तक हिंदी, संस्कृत और उर्दू की चयनित 12 पुस्तकों को भी सस्ते दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

सचिव ने अभिभावकों को जागरूक करने और छात्रों को आसानी से पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए 15 अप्रैल तक सभी जिलों में पुस्तक जागरूकता एवं सुलभता शिविर/पुस्तक मेला आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इन मेलों में अधिकृत मुद्रकों पायनियर प्रिंटर्स (आगरा), पीतांबरा बुक्स (झांसी) और सिंघल एजेंसीज (लखनऊ) की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।


नकली किताब बेचने वालों पर होगी कार्रवाई

परिषद ने स्पष्ट किया है कि पाठ्यपुस्तकों का कॉपीराइट उसके पास है। ऐसे में पायरेसी या डुप्लीकेसी कर नकली किताबें बेचने वाले अनधिकृत मुद्रकों और दुकानदारों के खिलाफ पुलिस, वाणिज्य कर, आयकर और प्रशासन के साथ समन्वय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एनसीईआरटी की कॉपीराइट शर्तों के उल्लंघन पर कॉपीराइट एक्ट के तहत भी कार्रवाई होगी।

ऐसे करें असली किताब की पहचान

इस वर्ष पाठ्य पुस्तकों के आवरण पर सात अंकों का अल्ट्रा वॉयलेट फ्लोरोसेंट लाल रंग का सीरियल नंबर मुद्रित किया गया है। जिन पुस्तकों पर यह नंबर नहीं होगा, उन्हें अनधिकृत माना जाएगा।


Friday, April 3, 2026

शैक्षिक सत्र 2026-27 की एनसीईआरटी एवं माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा विकसित पाठ्यपुस्तकों के मूल्य एवं अधिकृत मुद्रकों / वितरकों के नाम की सूची देखें

शैक्षिक सत्र 2026-27 की एनसीईआरटी एवं माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा विकसित पाठ्यपुस्तकों के मूल्य एवं अधिकृत मुद्रकों / वितरकों के नाम की सूची देखें


Thursday, March 26, 2026

एनसीईआरटी की नई किताबों का फिर इंतजार, 9वीं के छात्र बदले सिलेबस का कर रहे इंतजार लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें बाजार में नहीं पहुंच पाई

एनसीईआरटी की नई किताबों का फिर इंतजार, 9वीं के छात्र बदले सिलेबस का कर रहे इंतजार लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें बाजार में नहीं पहुंच पाई


 लखनऊ : नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही एक बार फिर एनसीईआरटी की किताबों की कमी ने सीबीएसई स्कूलों की पढ़ाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कक्षा 9वीं के छात्र नई शिक्षा नीति के तहत बदले सिलेबस का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें बाजार में नहीं पहुंच पाई हैं। पिछले वर्ष कक्षा आठ के छात्रों को सितंबर तक किताबों के लिए इंतजार करना पड़ा था और अब वही स्थिति दोहराने की आशंका गहराने लगी है। इससे छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच असमंजस का माहौल बन गया है।


प्रदेश में 11 हजार से अधिक सीबीएसई स्कूल और 122 केंद्रीय विद्यालय संचालित हैं, जहां एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई होती है। ऐसे में इस देरी का असर बड़ी संख्या में छात्रों पर पड़ना तय माना जा रहा है। इस बीच एनसीईआरटी ने एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया है कि नई शिक्षा नीति के तहत किताबें और सिलेबस चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। कक्षा एक से आठवीं तक की किताबें तैयार कर ली गई हैं और प्रिंट व डिजिटल दोनों रूपों में उपलब्ध हैं, जबकि कक्षा नौवीं की किताबें तैयार की जा रही हैं और इन्हें सत्र 2026-27 में लागू किया जाएगा। इसके लिए ड्राफ्ट सिलेबस जारी कर सुझाव भी मांगे गए हैं। 


एनसीईआरटी ने शिक्षकों को सलाह दी है कि नए सिलेबस से पहले छात्रों की बुनियादी समझ मजबूत की जाए, ताकि उन्हें बदलाव को समझने में आसानी हो। वहीं कक्षा 10 और 11 में फिलहाल पुराने सिलेबस से ही पढ़ाई जारी रहेगी और नई किताबें 2027-28 से लागू होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ साल शिक्षा व्यवस्था के लिए संक्रमण काल साबित होंगे, जहां पुरानी और नई व्यवस्था साथ-साथ चलेगी। इस दौरान किताबों की देरी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने और भ्रम की स्थिति बनने की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में स्कूलों और शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे बच्चों की पढ़ाई को बिना रुकावट आगे बढ़ाएं।

Friday, February 27, 2026

किताबों की ढुलाई का टेंडर जल्दी करके समय से स्कूलों तक पहुंचाने के निर्देश, ऑनलाइन बैठक में अपर मुख्य सचिव ने की योजनाओं की समीक्षा

किताबों की ढुलाई का टेंडर जल्दी करके समय से स्कूलों तक पहुंचाने के निर्देश, ऑनलाइन बैठक में अपर मुख्य सचिव ने की योजनाओं की समीक्षा 


लखनऊ। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलों में निशुल्क वितरण के लिए भेजी गई किताबों को समय से स्कूलों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक व बीएसए के साथ बृहस्पतिवार को हुई ऑनलाइन बैठक में उन्होंने किताबों की ढुलाई का टेंडर समय से करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में उन्होंने सभी विद्यालयों में आठ मार्च तक छात्राओं के लिए अलग शौचालय बनवाने, आरटीई के लिए जारी बजट का समय से प्रयोग करने के भी निर्देश दिए। पीएमश्री विद्यालयों में चल रहे कामकाज व सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालयों की दूसरी किस्त के उपभोग की समीक्षा में अपर मुख्य सचिव ने बजट के समय से सदुपयोग के निर्देश दिए। कहा, पैसा अगर लैप्स हुआ तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। 



किताबों की आपूर्ति, आरटीई में प्रवेश की प्रगति जांचेंगे अपर मुख्य सचिव

लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को नए सत्र 2026-27 में समय से किताबें वितरित कराने की कवायद तेज हो गई है। इसके तहत कई जिलों में 80 फीसदी तक किताबों की आपूर्ति हो गई है। अब जिले में इसका टेंडर कर मार्च में वितरण सुनिश्चित किया जाना है। इसी क्रम में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा 26 फरवरी को बैठक कर विभागीय कार्यों की प्रगति जांचेंगे। इसमें प्रमुख रूप से सत्र 2026-27 में पाठ्य पुस्तकों की समय से आपूर्ति, आरटीई में प्रवेश व जिलावार फीस प्रतिपूर्ति के लिए दी गई राशि के भुगतान की स्थिति शामिल है। 

इसके साथ ही अपर मुख्य सचिव पीएमश्री योजना में एसएनए स्पोर्ट के माध्यम से वित्तीय व्यय, पीएम पोषण योजना के अंतर्गत वित्तीय प्रगति की भी समीक्षा करेंगे। सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक व बीएसए की ऑनलाइन समीक्षा बैठक में वे नव भारत साक्षरता के व्यय, समग्र शिक्षा की विभिन्न योजनाओं, फर्नीचर खरीद व भुगतान, होली से पहले सभी कार्मिकों के वेतन भुगतान, आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लास व टैबलेट, सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय की दूसरी किश्त के उपभोग प्रमाण पत्र की स्थित की भी समीक्षा करेंगे। 




नए सत्र में समय पर किताबें देने की तैयारी तेज, 26 फरवरी की बैठक में होगी समीक्षा 

लखनऊ : नए शैक्षिक सत्र में बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को समय से किताबें मिलें, इसके लिए शिक्षा विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। इसी कड़ी में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने 26 फरवरी को बैठक बुलाई है। बैठक में किताबों की आपूर्ति से लेकर आरटीई के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति, सीएम माडल कंपोजिट विद्यालयों के निर्माण और स्कूलों की जमीनी स्थिति की समीक्षा होगी। 


शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए पाठ्य-पुस्तकों की समयबद्ध आपूर्ति करने के लिए ट्रांसपोर्ट टेंडर की स्थिति पर भी नजर रखी जाएगी। विद्यालयों में स्वच्छ व क्रियाशील बालिका शौचालयों की स्थिति, प्रेरणा पोर्टल पर फोटो अपलोड की प्रगति और यू-डायस पर रिपोर्ट अपडेट की स्थिति भी देखी जाएगी। पीएमश्री योजना, पीएम पोषण योजना और नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के खर्च की भी समीक्षा होगी।