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Thursday, April 17, 2025

विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने पर 11 हजार करोड़ का निवेश, ऑपरेशन कायाकल्प से प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदलने का दावा

विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने पर 11 हजार करोड़ का निवेश, ऑपरेशन कायाकल्प से प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदलने का दावा 

मिल रही विद्युतीकरण, ब्लैकबोर्ड, टॉयलेट, पेयजल आपूर्ति बाउंड्रीवाल की सुविधा


लखनऊ। प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण मूलभूत शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने में ऑपरेशन कायाकल्प महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर 2018 में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शुरू किया यह अभियान अब अपना सकारात्मक रूप दिखा रहा है। 19 आधारभूत सुविधाओं व पैरामीटर पर हो रहे काम से प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है।


अब तक विभिन्न विभागों के साथ मिलकर मूलभूत सुविधाओं पर 11 हजार करोड़ का निवेश हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार 18 पैरामीटर में 80 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। साफ पेयजल आपूर्ति, शौचालय, ब्लैकबोर्ड व विद्युतीकरण जैसे 9 पैमानों पर 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया है। 

वहीं स्कूल फर्नीचर की आपूर्ति मेंb2018 में 19 प्रतिशत के मुकाबले अब तक 65 प्रतिशत कार्य पूरा किया गया है। ब्वॉयज व गर्ल्स टॉयलेट, मल्टी हैंड वॉशिंग यूनिट, ब्लैक-ग्रीन व व्हाइट बोर्ड, स्कूल परिसर की पुताई, रैंप व रेलिंग निर्माण तथा परिसर के विद्युतीकरण के लक्ष्य को 100 प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। 

टाइल्स युक्त शौचालय निर्माण में 2018 में 21 प्रतिशत की अपेक्षा मार्च 2025 तक 91 प्रतिशत कार्यों को पूरा किया गया है। विद्यालयों में गेट युक्त बाउंड्रीवॉल व रसोईघर नवीनीकरण में क्रमशः 98 व 94 प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया जा चुका है।

Sunday, July 7, 2024

सरकारी टैबलेट की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल, अफसरों के फरमान पर बेसिक शिक्षकों में गुस्से का माहौल

सरकारी टैबलेट की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल, अफसरों के फरमान पर बेसिक शिक्षकों में गुस्से का माहौल


परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों को विभाग की ओर से टैबलेट मुहैया कराए गए हैं ताकि उनके आने-जाने के समय पर राज्य स्तर तक निगरानी रखी जा सके। इस महीने से ऑनलाइन सेल्फी के साथ उपस्थिति प्रक्रिया लागू कर दी गई।


सूबे के ज्यादातर स्कूलों में हालांकि अभी यह प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। जिन स्कूलों में शुरू हुई है वहां से टैबलेट हैंग होने और ऑन  न होने की बहुत शिकायतें सामने आ रही हैं। इसको लेकर शिक्षकों में रोष का माहौल है। उन्होंने विभाग पर परेशान करने का आरोप लगाया है।

शिक्षकों का कहना है कि विभाग की ओर से दिया गया टैबलेट बहुत ही घटिया गुणवत्ता का एवं 4 जी पर आधारित है। सेल्फी के लिए 2 मेगा पिक्सल का फ्रंट कैमरा, 3 जीबी रैम और 32 जीबी रोम दी गई है। इसमें जरूरी एप के अलावा ऑनलाइन कार्यों के लिए विभाग की ओर से 24 से भी अधिक एप डाउनलोड कराए गए हैं। 


शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी खामी के चलते उपस्थिति के लिए प्रेरणा पोर्टल ज्यादातर खुलता ही नहीं। यदि खुलता भी है तो फोटो अपलोड  करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों से इस समस्या के बारे में बताने पर वे शिक्षकों पर अपने मोबाइल से फोटो अपलोड करने का दबाव बना रहे हैं।

Wednesday, June 22, 2022

शिक्षकों की कमी से बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल

शिक्षकों की कमी से बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल



सीतापुर। प्राइमरी शिक्षा को पटरी पर लाने की पुरजोर कोशिश हो रही है लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी रोड़ा बनी हुई है। निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार जिले में मानक के अनुसार शिक्षक नहीं है। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुसार करीब 9107 शिक्षकों की कमी है। इससे प्राथमिक व उच्च प्राथमिक दोनों विद्यालयों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।


निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार प्राथमिक विद्यालय में 30 बच्चों पर एक शिक्षक का मानक तय किया गया है। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय में 35 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। अगर इस मानक के अनुसार शिक्षकों की विद्यालय में पोस्टिंग देखी जाए तो काफी कम है। 30 अप्रैल 2022 की छात्र संख्या के अनुसार कक्षा एक से पांच तक के प्राथमिक विद्यालयों में चार लाख 10 हजार 839 नौनिहाल अध्ययनरत है। इनके लिए 797 प्रधानाध्यापक व 12867 शिक्षकों की जरूरत है।


इस समय 496 प्रधानाध्यापक कार्यरत है। 5753 शिक्षक पढ़ाई करा रहे है। इस तरह 298 प्रधानाध्यापक व 7114 सहायक अध्यापकों की कमी है। कक्षा छह से आठ तक के उच्च प्राथमिक विद्यालयों की बात की जाए तो एक लाख 53 हजार 765 नौनिहाल अध्ययनरत है। इनके लिए 800 प्रधानाध्यापक व 4767 सहायक अध्यापकों की जरूरत है। इस समय 184 प्रधानाध्यापक कार्यरत है। 2774 सहायक अध्यापक नौनिहालों का भविष्य संवार रहे है।इस तरह 653 प्रधानाध्यापकों की कमी बनी हुई है। 1993 शिक्षकों की अतिरिक्त रूप से जरूरत पड़ रही है। 



मानक के अनुसार विद्यालयों में शिक्षक न होने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। बेसिक शिक्षा विभाग मौजूद शिक्षकों से ही काम चला रहा है। इससे विद्यालय तो खुल रहे है, लेकिन जरूरत के मुताबिक शिक्षक न होने से उनको गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है।नगर क्षेत्र में शिक्षकों की बड़ी कमीबेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की पोस्टिंग ग्रामीण व नगर क्षेत्र में अलग-अलग तरीके से की जाती है। सीतापुर में 19 विकासखंड व चार नगर क्षेत्र (सीतापुर, बिसवां, मिश्रिख व खैराबाद) शामिल है। प्राथमिक विद्यालयों की बात की जाए तो नगर क्षेत्र में प्रधानाध्यापक के आठ व सहायक अध्यापक के 194 सहायक अध्यापकों की जरूरत है। जिसमें इस समय 18 प्रधानाध्यापक व 21 सहायक अध्यापक ही कार्यरत है। इस तरह 10 प्रधानाध्यापक व 173 सहायक अध्यापकों की कमी बनी हुई है।


उच्च प्राथमिक विद्यालयों की बात की जाए तो प्रधानाध्यापक के छह व सहायक अध्यापक के 37 पदों की जरूरत है। मौजूदा समय में यहां पर एक भी प्रधानाध्यापक नहीं है। महज आठ सहायक अध्यापकों के सहारे ही काम चलाया जा रहा है। इस तरह छह प्रधानाध्यापक व 29 सहायक अध्यापकों की कमी बनी हुई है।एक शिक्षक के पास कई विद्यालयों की जिम्मेदारीग्रामीण से लेकर नगर क्षेत्र में प्रधानाध्यापक पद पर कई वर्षों से पदोन्नति नहीं हुई है। इसकी वजह से अधिकांश विद्यालयों में इंचार्ज के सहारे ही काम चलाया जा रहा है।


 नगर क्षेत्र में तो एक शिक्षक के पास दो से तीन विद्यालयों का प्रभार है। विभाग की मजबूरी है कि वह ग्रामीण इलाके के शिक्षकों को नगर क्षेत्र में तैनाती नहीं दे सकते है। इससे दिन प्रतिदिन नगर क्षेत्र की स्थिति खराब ही होती जा रही है।



शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इसकी सूचना शासन को भेजी गई है। मौजूदा शिक्षकों से बेहतर तरीके से पढ़ाई करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
अजीत कुमार, बीएसए

Saturday, February 19, 2022

अब प्रत्येक स्कूल को स्कूली शिक्षा के एक मानक को करना होगा पूरा, राज्यों में गठित होने वाली स्टेट स्कूल स्टैंड‌र्ड्स अथारिटी (ट्रिपल SA) इस पर नजर रखेगी

अब प्रत्येक स्कूल को स्कूली शिक्षा के एक मानक को करना होगा पूरा, राज्यों में गठित होने वाली स्टेट स्कूल स्टैंड‌र्ड्स अथारिटी (ट्रिपल SA) इस पर नजर रखेगी



नई दिल्ली : अब प्रत्येक स्कूल को स्कूली शिक्षा के एक मानक को पूरा करना होगा। सभी राज्यों में गठित होने वाली स्टेट स्कूल स्टैंड‌र्ड्स अथारिटी (ट्रिपल एसए) इस पर नजर रखेगी। साथ ही स्कूलों की हर साल राज्य और जिला स्तरीय रैंकिंग भी तैयार करेगी। माना जा रहा है कि इस नई पहल से स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती मिलेगी और स्कूलों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।


शिक्षा मंत्रालय ने राज्‍यों को दिया टास्‍क

अभी तक इस तरह की रैंकिंग सिर्फ उच्च शिक्षण संस्थानों में ही तैयार की जाती है, जिनमें ज्यादातर विश्वविद्यालय और कालेज शामिल हैं। शिक्षा मंत्रालय ने फिलहाल सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ट्रिपल एसए के गठन का टास्क दे दिया है। इसके तहत सभी राज्यों को इस साल के अंत तक इसका गठन करना है। मंत्रालय की योजना वर्ष 2023 से इसे देश के सभी राज्यों में प्रभावी तरीके से लागू करना है।


कोविड के चलते हुई देरी

खास बात यह है कि इस अथारिटी के दायरे में राज्यों के शिक्षा बोर्ड के जुड़े निजी और सरकारी दोनों तरह के स्कूल शामिल होंगे। मंत्रालय के मुताबिक, इस पर वैसे तो काम काफी पहले ही शुरू हो जाना था, लेकिन कोविड के चलते इसके अमल में देरी हुई है। फिलहाल राज्यों में यह अथारिटी एक स्वतंत्र संस्था के रूप में काम करेगी। हालांकि राज्यों में स्थित केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय इसके दायरे में शामिल नहीं होंगे।


ये हैं मापदंड

शिक्षा मंत्रालय ने इसके अमल की तैयारियों के साथ स्कूलों के स्टैंडर्ड के लिए प्रारंभिक तौर पर जो मापदंड तय किए हैं, उनमें सुरक्षा, मूलभूल ढांचा, सभी विषयों के कक्षावार शिक्षकों की संख्या, वित्तीय स्थिति, इनोवेशन व प्रैक्टिस क्लास रूम की संख्या, बच्चों के सीखने की क्षमता में सुधार की स्थिति और प्रशासनिक क्षमता आदि को शामिल किया है।


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर फोकस

इन सभी जानकारियों को स्कूलों की ओर से ट्रिपल एसए की ओर से तैयार होने वाले डिजिटल प्लेटफार्म पर हर साल अपलोड करना होगा। गौरतलब है कि देशभर में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को एक जैसा बनाने और स्कूलों का एक स्टैंडर्ड कायम रखने के लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में की गई सिफारिशों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्रालय का इस समय फोकस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल पर है।

Wednesday, December 22, 2021

राज्यपाल आनंदीबेन की खरी खरी - एक भी डिग्री फर्जी गयी तो अनियमितता की होगी सजा

राज्यपाल आनंदीबेन की खरी खरी  - एक भी डिग्री फर्जी गयी तो अनियमितता की होगी सजा


पांच हजार डिग्री। सभी फर्जी। केस चला हाई कोर्ट में। क्या हम जिम्मेदार नहीं हैं। अब प्रण लीजिए एक भी डिग्री फर्जी नहीं होनी चाहिए। सालों से डिग्री नहीं दे रहे हैं। नैक से लेकर एनआईआरएफ से पीछे हट रहे हैं। समीक्षा बैठक में जो बातें सामने आयी। उसके बाद मुझे लगा कि ऐसे विश्वविद्यालय क्यों चलने चाहिए। यह बातें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीक्षांत समारोह में कहीं। उन्होंने दीक्षांत भाषण से अलग हटते हुए कहा कि पारदर्शिता से काम करें, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी।



कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सालों से लाखों डिग्रियां लंबित थी। विश्वविद्यालयों की समीक्षा में सवाल पूछा सालों से डिग्रियां लंबित क्यों पड़ी हैं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद आदेश किया कि डिग्री लेने के लिए एक पैसा नहीं लेना है। अब विश्वविद्यालय डिग्री बांट रहे हैं। एकाउंट मैटेंन नहीं करते थे। जब कहा गया तो अब मेटेंन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले सालों में 300 फाइल देखकर थक गयी हूं। अनियमिता है नियम के विरूद्ध काम हुए हैं। शिक्षकों की पदोन्नति में करने में किसी को भी दे दो। 


राज्यपाल ने कहा कि मैंने तय किया है कि ऐसी अनियमित काम की फाइल मेरे पास आएगी और मैं जब पता करूंगी तो आपको सजा होगी। लास्ट में जो साइन करता है उसकी जिम्मेदारी है। क्यों फाइल नहीं देखी। यह जिम्मेदारी सिर्फ वीसी की नहीं है। सभी शिक्षक, कर्मचारियों की है। नियुक्ति में पारदर्शिता की व्यवस्था की है, जो होनहार हैं उनको नौकरी मिलेगी।


नैक से डर, एनआईआरएफ को आवेदन तक नहीं
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय से कॉलेज हजार संबंधित हैं, लेकिन एनआईआरएफ रैंकिंग नहीं है। क्यों? क्या विश्वविद्यालय की कोई जिम्मेदारी नहीं है। नैक में जाने से हिचकिचाहट होती है। क्योंकि काम नहीं कर रहे हैं। हौसला होना चाहिए कि मेरे विश्वविद्यालय की ए डबल प्लस क्यों ना आए। इतने बड़े भवन हैं आपके पास। क्या नहीं है आप बताएं। आज भी पांच भवनों का लोकार्पण किया है। क्या बिल्डिंग से रैंकिंग होगा या क्वालिटी से होगा। क्वालिटी से लिए आपके प्रयास क्या हैं।



30 साल से कर रहे हैं काम, विश्वविद्यालय से नहीं शिक्षकों को लगाव

कुलाधिपति ने कहा कि कई-कई शिक्षक ऐसे है। जिनका जन्म ही विश्वविद्यालय में हुआ। यानि कि उन्होंने अपनी पहली सर्विस ही विश्वविद्यालय से शुरू की। उसके बाद से 30-30 साल हो गए हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि आपका विश्वविद्यालय के साथ कुछ लगाव हुआ हो और जब तक लगाव नहीं होगा। तब तक विश्वविद्यालय में कोई बदलाव नहीं आएगा। सिर्फ लेक्चर लेना और घर चले जाना आपका काम नहीं है। ऑनलाइन पढ़ाना सीखें। पढ़ाई में आईटी का प्रयोग करें।

Saturday, December 18, 2021

बेसिक शिक्षा में तय होगा परिणाम से परिवर्तन का सफर, सीखने और सीखाने की गति को भी निखारेगी यह व्यवस्था। जानिए विस्तार से

देश का पहला निपुण भारत निगरानी केंद्र गोरखपुर में

बेसिक शिक्षा में तय होगा परिणाम से परिवर्तन का सफर, सीखने और सीखाने की गति को भी निखारेगी यह व्यवस्था। जानिए विस्तार से


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शिक्षा मंत्रालय द्वारा 5 जुलाई को लागू निपुण भारत योजना (नेशनल इनीशिएटिव फॉर प्रोफिशिएंसी इन रीडिंग विद अंडरस्टैंडिंग एंड न्यूमेरेसी) समेत बेसिक शिक्षा विभाग की सभी कक्षाओं के अनुपालन एवं उसके लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए विकास भवन में अत्याधुनिक कंट्रोल रूम का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को देश के इस पहले अत्याधुनिक कंट्रोल रूम का लोकार्पण करेंगे। इसकी कार्य प्रणाली को भी परखेंगे। बेसिक शिक्षा विभाग में इसकी मदद से परिणाम से परिवर्तन का सफर तय करने में आसानी होगी। सीखने और सीखाने की गति को भी यह निगरानी व्यवस्था निखारेगी।

डीएम विजय किरण आनंद की नवाचार एवं आधुनिकीकरण की सोच की उपज यह कंट्रोल रूम तकरीबन 88 लाख रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित किया जा रहा है। यह कंट्रोल रूम देश के इस तरह का पहला प्रयोग है जिससे गोरखपुर मण्डल के सभी परिषदीय विद्यालयों एवं कस्तुरबा गांधी विद्यालयों की निगरानी एवं जरूरी सहयोग मिलेगा। ताकि उन विद्यालय के शिक्षक अपने छात्रों की शिक्षण संबंधी समस्याओं का समाधान कर सके। स्वयं भी समस्याओं का त्वरित निदान प्राप्त कर सके। इस मायने में यह कंट्रोल रूम अत्याधुनिक कॉल सेंटर के रूप में भी सेवाएं प्रदान करेगा।


भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा लागू  की गई निपुण (नेशनल इनोशिएटिव फार प्रोफिशिएंसी इन रीडिंग विद अंडरस्टैंडिंग एंड न्यूमेरसी) भारत योजना के तहत देश का पहला निपुण भारत निगरानी कर (मानीटरिंग सेंटर) गोरखपुर में स्थापित किया जा रहा है। विकास भवन में बनाए जा रहे इस केंद्र से बेसिक शिक्षा में बड़ा बदलाव आएग। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे की नियमित रूप से वास्तविक समय में निगरानी हो सकेगी। बच्चे ने कितना सोखा, उसके सीखने की प्रगति कैसी है रोज स्कूल आता है या नहीं, स्कूल में मध्याहन भोजन की स्थिति क्या है कितने बच्चे स्कूल छोड़ दे रहे। है आदि बिन्दुओं पर भी समय से छटा उपलब्ध हो सकेगा और उसके आधार पर सुधार किया जाएगा। लक्ष्य है कि 2026-27 तक हर बच्चा तीसरी कक्षा के अंत तक पढ़ने लिखने एवं अंकगणित सीखने की क्षमता विकसित सके। 88 लाख रुपये की लागत से स्थापित किए जा रहे इस केंद्र का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को करेंगे। मुख्यमंत्री यहाँ निगरानी केंद्र को कार्यप्रणाली पर केंद्रित चार मिनट का वीडियो भी देखेंगे।



जिलाधिकारी विजय किरन आनंद की पहल पर विकास भवन में इस अत्याधुनिक की स्थापना हो रहा है। मुख्य विकास अधिकारी  इंद्रजीत सिंह को इसके संचालन की जिम्मेदारी दे गई है। इस केंद्र में एक नियंत्रण कक्ष को भी स्थापना की गई। है। इसमें 16 एकेडमिक रिसोर्स पर्सन  (एआरपी) एवं शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा। केंद्र में 16 कंप्यूटर लगाए गए हैं। इसे काल सेंटर के रूप में भी विकसित किया गया है।


केंद्र में हाई स्पीड इंटरनेट की सुविधा होगी। यहां एक बड़ी एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई है। नियंत्रण कक्ष सुबह नौ से शाम पांच बजे तक संचालित होगा जिले में 2493 परिषदीय विद्यालयों में 600 स्मार्ट क्लास हैं। मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए जिलाधिकारी ने शुक्रवार की शाम केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी इंजीत सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेंद्र प्रताप सिंह, विजय जायसवाल आदि उपस्थित रहे।


निपुण भारत योजना के तहत विकास भवन में निपुण भारत निगरानी केंद्र स्थापित किया गया है। गोरखपुर पहला जिला है, जहां ऐसा केंद्र स्थापित किया गया है। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे कितना सीख पा रहे हैं, इसकी रियल टाइम निगरानी हो सकेगी। यह केंद्र बेसिक शिक्षा में बड़े बदलाव लेकर आएगा
विजय किरन आनंद जिलाधिकारी


● ऐसे होगी निगरानी

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट के शिक्षकों द्वारा हर महीने प्रश्न पत्र तैयार किए जाएंगे। इन्हें स्कूलों पर भेजा जाएगा। बच्चों को इसे हल करने को दिया जाएगा और उसके बाद स्कूल के शिक्षक ओएमआर शीट पर बच्चों द्वारा दिए गए उत्तर भरेंगे।
एक ओएमआर शीट पर आठ बच्चों के उत्तर भरे जा क्षमता को बढ़ाया जाएगा। सभी स्कूली की जियो सकते हैं।
सरल एप के जरिए ओएमआर शीट स्कैन किया जाएगा। 


स्कैन करने पर यह ओएमआर आनलाइन निगरानी केंद्र पर आ जाएंगे। यहां बच्चों के सीखने की प्रगति का अध्ययन किया जाएगा और जहां कमिया होगी वहा एआरपी को भेजकर बच्चों की सीखने की टैगिंग भी होगी, जिसके जरिए उनकी निगरानी हो सकेंगी।

इसके अलावा मिशन प्रेरणा, आपरेशन कायाकला, मध्याहन भोजन योजना, समावेशी शिक्षा समेत विद्यालय स्तर पर संचालित सभी योजनाओं की निगरानी भी हो सकेगी।