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Tuesday, August 29, 2023

बेसिक शिक्षा मंत्री के उत्तर से बेसिक शिक्षक भर्ती पर प्रश्न, शिक्षामित्र और अनुदेशकों को जोड़कर बताया था छात्र शिक्षक अनुपात मानक के अनुसार

बेसिक शिक्षा मंत्री के उत्तर से बेसिक शिक्षक भर्ती पर प्रश्न, शिक्षामित्र और अनुदेशकों को जोड़कर बताया था छात्र शिक्षक अनुपात मानक के अनुसार


प्रयागराज :  बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षक भर्ती आने की प्रतीक्षा कर रहे प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को सदन में दिए गए बेसिक शिक्षा मंत्री के जवाब से झटका लग सकता है। अतारांकित प्रश्न पर मंत्री ने जवाब दिया है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक व छात्रों का अनुपात मानक के अनुसार पूर्ण है। उन्होंने जवाब में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त पदों की जानकारी भी दी है।


बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में वर्ष 2018 के बाद से शिक्षक भर्ती नहीं आई। प्रशिक्षित अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती की लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक मांग पूरी नहीं हुई। इधर, बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के स्वीकृत और रिक्त पदों तथा रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी करने को लेकर पिछले दिनों सदन में प्रश्न लगाया गया। इस पर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जवाब दिया है कि प्राथमिक विद्यालयों में स्वीकृत पद 4,17,886 के सापेक्ष प्रधानाध्यापक एवं सहायक अध्यापक के 85,152 पद रिक्त हैं।


इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्वीकृत पद 1,62,198 के सापेक्ष प्रधानाध्यापक एवं सहायक अध्यापक के 41,338 पद रिक्त हैं। इस तरह प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत 3,32,734 शिक्षक तथा 1,47,766 शिक्षामित्र की संख्या सम्मिलित करते हुए छात्र शिक्षक अनुपात 30:1 मानक के अनुसार पूर्ण है। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय 27,555 अनुदेशक की संख्या को में कार्यरत 1,20,860 शिक्षक एवं सम्मिलित करते हुए छात्र शिक्षक अनुपात 35:1 मानक के अनुसार पूर्ण है।


इस पर युवा मंच के अध्यक्ष अनिल सिंह ने खत्म किए गए शिक्षकों के पदों को बहाल करने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है। कि सुप्रीम कोर्ट के पारित आदेश के बाद शिक्षामित्र और अनुदेशक को बतौर सहायक अध्यापक नहीं माना जा सकता। इस कारण रिक्त पदों पर शिक्षक भर्ती की मांग की है।

Saturday, June 17, 2023

यूपी : सात वर्षों में छात्र घटे पर छात्र-शिक्षक अनुपात लगातार बेहतर

यूपी : सात वर्षों में छात्र घटे पर छात्र-शिक्षक अनुपात लगातार बेहतर



यूपी में प्री-प्राइमरी से हायर सेकेंड्री तक के छात्रों को लेकर बड़ा चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। वर्ष 2015-16 के शैक्षणिक सत्र में प्रदेश में इन कक्षाओं के पंजीकृत कुल छात्रों की संख्या 4 करोड़ 84 लाख 82 हजार 681 थी। वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा 4 करोड़ 71 लाख 81 हजार 438 था यानि बच्चों की संख्या 13 लाख से अधिक घट गई। हालांकि कई साल गिरावट के बाद अब यह आंकड़ा ऊपर चढ़ रहा है। वहीं प्रदेश का छात्र-शिक्षक अनुपात लगातार बेहतर हो रहा है।


यूडाइस प्लस (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफारमेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) के डैशबोर्ड पर अंकित आंकड़े इसकी गवाही देते हैं। स्कूली शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए होने वाले बेतहाशा खर्च को भी आंकड़े मुंह चिढ़ाते हैं। 2015-16 के बाद लगातार तीन सालों तक प्रदेश की कुल छात्र संख्या में गिरावट दर्ज होती रही। 


सबसे ज्यादा 18 लाख छात्र की गिरावट वर्ष 2016-17 के शैक्षणिक सत्र में दर्ज की गई। वर्ष 2019-20 से फिर छात्र संख्या में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई लेकिन अभी तक प्रदेश में प्री-प्राइमरी से हायर सेकेंड्री के बच्चों का आंकड़ा 2015-16 के बराबर नहीं पहुंच सका है। वर्ष 2015-16 के शैक्षणिक सत्र की बात करें तो 10 लाख 84 हजार 249 शिक्षक थे। वहीं 2021-22 में 15 लाख 7 हजार 828 शिक्षक थे यानी पहले यूपी में 44.7 बच्चों पर एक शिक्षक था। वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा 31.3 बच्चों पर एक शिक्षक का हो गया।


डाटा से बजट आवंटन
केंद्र सरकार से पैसा भी इसी डाटा के आधार पर मिलता है। पूरे प्रदेश के जिलों में यू-डाइस का डाटा अपडेट करने का काम बीएसए के पास है। बेसिक के साथ ही माध्यमिक का डाटा भी बीएसए दफ्तर ही अपडेट करता है। जो हो नहीं पा रहा है।


सरकारी में बढ़ी संख्या
प्रदेश में सरकारी स्कूलों के स्तर और शिक्षा में बीते सालों में बदलाव आया है। वर्ष 2015-16 में कुल स्कूलों में से 63.5 फीसदी सरकारी थे। इनमें 35.3 फीसदी बच्चे पढ़ रहे थे। वहीं 2021-22 में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का आंकड़ा 40.4 फीसदी हो गया।


Wednesday, June 30, 2021

परिवर्तन : छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) में हुआ बड़ा सुधार

परिवर्तन : छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) में हुआ बड़ा सुधार



नई दिल्ली : स्कूली शिक्षा में सुधार को लेकर उठाए गए कदमों का असर दिखने लगा है। इसमें बड़ा सुधार छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) में देखने को मिला है, जहां स्कूलों में औसतन 22 छात्रों को पढ़ाने के लिए अब एक शिक्षक है। वर्ष 2012-13 में यह आंकड़ा औसतन 32 था।


हायर सेकेंडरी स्तर पर सुधार सबसे ज्यादा दिखा है, जहां पहले औसतन 40 छात्रों पर एक शिक्षक थे, पर अब 26 छात्रों पर एक शिक्षक है। स्कूलों में इसके साथ छात्रों के सकल नामांकन अनुपात और इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी सुधार हुआ है। यह जानकारी यू-डीआइएसई प्लस (एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली) की वर्ष 2019-20 की रिपोर्ट से सामने आई है। शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मंगलवार को इस रिपोर्ट को जारी किया।