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Thursday, June 25, 2026

RTI में देरी और भ्रामक सूचना देने पर औरैया में BSA रहे तीन शिक्षाधिकारियों पर 25 हजार का जुर्माना

RTI में देरी और भ्रामक सूचना देने पर औरैया में BSA रहे तीन शिक्षाधिकारियों पर 25 हजार का जुर्माना

औरैया के दो पूर्व व वर्तमान बीएसए पर लगाया जुर्माना, वेतन से जुर्माना राशि काटने का आदेश


लखनऊ। राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी और भ्रामक सूचना देने के मामले में तीन बीएसए पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह कार्रवाई औरैया के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जुड़े एक प्रकरण में की है।


आयोग में कुलदीप कुमार चतुर्वेदी की शिकायत पर सुनवाई हुई। शिकायतकर्ता ने 24 जून 2022 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, औरैया कार्यालय में सूचना के लिए आवेदन दिया था। आयोग के अनुसार निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। करीब एक वर्ष की देरी के बाद 26 जुलाई 2023 को सूचना दी गई। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि सूचना देने में हुई देरी का अधिकारियों ने कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया। आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर कई अवसर दिए, लेकिन अधिकारियों की ओर से उचित जवाब नहीं मिला।


सूचना देने में बेवजह देरी और भ्रामक जानकारी देना अधिनियम की भावना के विपरीत

आयोग ने यह भी माना कि सूचना देने से इनकार करने के लिए आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) का अनुचित आधार लिया गया। राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने अपने आदेश में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। सूचना देने में बेवजह देरी और भ्रामक जानकारी देना अधिनियम की भावना के विपरीत है। आयोग ने तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जीएस राजपूत, तत्कालीन बीएसए अनिल कुमार और वर्तमान बीएसए संजीव कुमार पर संयुक्त रूप से 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह राशि तीनों अधिकारियों के वेतन से समान रूप से वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।

Wednesday, May 6, 2026

आदेश को भ्रामक बताने पर संभल DIOS पर हाईकोर्ट ने किया एक लाख हर्जाना, शिक्षकों की नियुक्ति व तदर्थ प्रधानाचार्य के कार्यभार का मामला, निजी वेतन से करना होगा भुगतान

आदेश को भ्रामक बताने पर संभल DIOS पर हाईकोर्ट ने किया एक लाख हर्जाना, शिक्षकों की नियुक्ति व तदर्थ प्रधानाचार्य के कार्यभार का मामला, निजी वेतन से करना होगा भुगतान


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व में पारित आदेश को भ्रामक बता ने याचियों का दावा अस्वीकार करने पर संभल के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। उन्हें हर्जाने की रकम निजी वेतन से या एक हफ्ते में जिला विधिक सेवा त प्राधिकरण में जमा करने का आदेश दिया गया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभश्याम शमशेरी की अदालत ने - राष्ट्रीय कन्या इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची को अधिकारी की हठधर्मिता और आदेश की गलत व्याख्या के कारण  दोबारा हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी, जिसके लिए हर्जाना लगाया जाना जरूरी है। कोर्ट ने प्रबंध समिति के खिलाफ पारित डीआईओएस के आदेश को रद्द कर नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया है।


मामले के मुताबिक, 19 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर डीआईओएस को निर्देश दिया था कि वह डॉ. दीपक भाटिया व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में पारित पूर्व फैसलों के आलोक में शिक्षकों की नियुक्ति और तदर्थ प्रधानाचार्य के कार्यभार पर नया निर्णय लें। इस दौरान चयनित शिक्षक को तदर्थ प्रधानाचार्य के रूप में कार्य करने की अनुमति भी दी थी, लेकिन डीआईओएस ने कोर्ट के आदेश का पालन करने के बजाय अपने आदेश में यह लिख दिया कि 19 जनवरी का आदेश न्यायालय को गुमराह करके प्राप्त किया गया है।

इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब राज्य सरकार ने उस आदेश को चुनौती नहीं दी थी तो डीआईओएस को ऐसी टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं था। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी ने न केवल आदेश कीगलत व्याख्या की, बल्कि याचिकाकर्ता को दोबारा अदालत आने पर मजबूर किया जो कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

हर्जाना लगाने के साथ कोर्ट ने डीआईओएस को अंतिम अवसर देते हुए नए सिरे से आदेश पारित करने के लिए मामले को इस निर्देश के साथ दोबारा उनके पास भेजा दिया कि डीआईओएस 19 जनवरी के आदेश का अक्षरशः पालन करें। यह भी सुनिश्चित करें कि स्व-वित्तपोषित योजना के तहत नियुक्तियां नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।


Monday, May 5, 2025

संभल में डीएम का बड़ा एक्शन, 33 निजी स्कूलों पर एक-एक लाख रुपए का ठोका जुर्माना, एनसीईआरटी की किताबों से नहीं हो रही थी पढ़ाई

संभल में डीएम का बड़ा एक्शन, 33 निजी स्कूलों पर एक-एक लाख रुपए का ठोका जुर्माना, एनसीईआरटी की किताबों से नहीं हो रही थी पढ़ाई

स्कूलों के खिलाफ जिलाधिकारी डा. राजेंद्र पैंसिया ने हंटर चलाया


Action of DM in Sambhal जिले के अधिकांश स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने पर ही जोर दिया जा रहा है। डीएम ने 12 अप्रैल को जिला स्तरीय अधिकारियों की जांच टीम गठित कर स्कूलों में जांच कराई। जिसमें पता चला अधिकांश स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों से पढ़ाई नहीं कराई जा रही है।


🔴 डीएम संभल ने निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने की जांच रिपोर्ट आने पर की सख्त कार्रवाई

🔴 सीबीएसई और आइसीएसई बोर्ड के स्कूलों में चल रहा खेल, यूनिफार्म के नाम पर भी शोषण

🔴 दोबारा पकड़े जाने पर रद हो सकती है स्कूल की मान्यता


संभल : Action of DM in Sambhal : मनमानी और शोषण करने वाले सीबीएसई और आइसीएसई बोर्ड से सम्बद्ध स्कूलों के खिलाफ जिलाधिकारी डा. राजेंद्र पैंसिया ने हंटर चलाया है। उनके इस कदम से छात्र-छात्राएं और अभिभावक काफी प्रसन्न हैं तो स्कूलों का प्रबंधन काफी सहम गया है।
एनसीईआरटी की पुस्तकों को लेकर आंख-मिचौली खेल रहे सीबीएसई और आइसीएसई स्कूलों पर सख्त रुख अपनाया गया है। 

डीएम डा. राजेंद्र पैंसिया ने 33 स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि एक सप्ताह में जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) कार्यालय में जमा करनी होगी। कार्रवाई 12 अप्रैल, 2025 को की गई जांच की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। रिपोर्ट में स्कूलों में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें पढ़ाने की जानकारी दी गई थी। स्कूल संचालक निर्धारित पुस्तक विक्रेताओं से ही पुस्तकें खरीदने को मजबूर कर रहे थे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में एनसीईआरटी की पुस्तकों से पढ़ाने पर जोर दिया गया है। जिला प्रशासन भी लगातार स्कूल संचालकों से इन्हीं पुस्तकों से पढ़ाई कराने को कह रहा है। इसके पीछे तर्क है कि एनसीईआरटी की पुस्तकें सस्ती होने के साथ ही शिक्षा नीति के पाठयक्रम के अनुकूल हैं। लेकिन, जिले के अधिकांश स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने पर ही जोर दिया जा रहा है।

डीएम ने 12 अप्रैल को जिला स्तरीय अधिकारियों की जांच टीम गठित कर स्कूलों में जांच कराई। जिसमें पता चला, अधिकांश स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों से पढ़ाई नहीं कराई जा रही है। अभिभावकों को निर्धारित दुकान पर जाने की सलाह दी जा रही थी। वहां महंगे दाम पर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें मिलती हैं।

जिला शुल्क नियामक समिति के सामने 17 अप्रैल को रिपोर्ट रखी गई। समिति ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद डीएम को कार्रवाई के लिए सुझाव दिया। डीएम ने 33 स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। उनका कहना है कि स्कूल प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया है कि वे जुर्माने की राशि एक सप्ताह में डीआइओएस कार्यालय में जमा करें और उसकी रसीद प्रस्तुत करें। दोबारा पकड़े जाने पर स्कूल की मान्यता भी रद हो सकती है।



संभल जनपद में एनसीईआरटी की किताबें नहीं चलाने पर 33 स्कूलों पर लगाया एक-एक लाख रुपये का अर्थ दंड।

Friday, February 16, 2024

राज्य सूचना आयोग ने बीएसए पर लगाया 25-25 हजार का जुर्माना

राज्य सूचना आयोग ने बीएसए पर लगाया 25-25 हजार का जुर्माना


औरैया : सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत दो अलग-अलग मामलों में मांगी गई सूचना न देने पर राज्य सूचना आयोग ने बीएसए पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही कहा कि वेतन से अर्थदंड की कटौती नियमानुसार ही की जाए। 


कंपोजिट विद्यालय जैतपुर में सहायक अध्यापक कुलदीप कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उन्होंने 2020 में बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी), लेखा अधिकारी, बीआरसी (ब्लाक संसाधन केंद्र) कार्यालय के अधिकारियों व सभी कर्मचारियों का नाम, पता, संपर्क सूत्र व अधिकार समेत अन्य जानकारी मांगी थी।


 इसके बाद 2022 में विभाग ने उनका वेतन वृद्धि रोक दिया था। इसमें कहा गया था कि ग्रामीणों ने उनके खिलाफ स्कूल न आने की शिकायत की है। जबकि ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि कोई शिकायत नहीं की है। इस पर सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी किन-किन ग्रामीणों ने शिकायत के साथ शपथ पत्र दिया है। यह दोनों सूचनाएं बीएसए ने नहीं दीं।


 इस पर राज्य सूचना आयोग ने 18 दिसंबर 2023 को दोनों मामले में 25-25 हजार का जुर्माना लगाया है। बीएसए अनिल कुमार ने बताया कि यह मामला 2022 का है। सूचना दी गई है । खंड शिक्षा अधिकारी भी आयोग में मौजूद थे। अपील कर दी गई है।

Tuesday, October 24, 2023

भ्रामक दावे करने वाले 20 कोचिंग संस्थानों को नोटिस, पांच पर ठोका एक एक लाख का जुर्माना

भ्रामक दावे करने वाले 20 कोचिंग संस्थानों को नोटिस, पांच पर ठोका एक एक लाख का जुर्माना


नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक दावों और अनुचित कारोबारी प्रथाओं के लिए राव आईएएस, स्टडी सर्किल, इकरा आईएएस, चहल अकादमी और आईएएस बाबा पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सीसीपीए की जांच के दायरे में 20 आईएएस कोचिंग सेंटर हैं, जिन्हें नोटिस भेजे गए हैं।



सीसीपीए की अध्यक्ष निधि खरे ने सोमवार को बताया कि उम्मीदवारों को प्रभावित करने के लिए टॉपर और सफल उम्मीदवारों के नाम तथा तस्वीरों का उपयोग करने के भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित कारोबारी प्रथाओं के लिए 20 आईएएस कोचिंग सेंटरों के खिलाफ जांच चल रही है। 


उन्होंने कहा कि यूपीएससी 2022 के अंतिम परिणाम में 933 उम्मीदवारों का चयन हुआ लेकिन 20 कोचिंग संस्थानों ने 3,500 से अधिक पूर्व छात्रों का दावा किया है। खरे ने कहा, ये नोटिस पिछले डेढ़ साल में सफल छात्रों के बारे में जानबूझकर अहम जानकारी छिपाने के लिए जारी किए गए हैं। हमने चार केंद्रों पर जुर्माना लगाया है, जबकि अन्य मामलों की जांच चल रही है। नीट, जेईई परीक्षाओं की तैयारियां करा रहे संस्थानों पर भी ऐसी कार्रवाई की जा सकती है। 


समान रैंकिंग का दावा सीसीपीए अध्यक्ष ने कहा, संघ लोक सेवा आयोग के परिणाम घोषित होते ही कोचिंग संस्थान विज्ञापनों की होड़ में लग जाते हैं। कई संस्थान अहम जानकारी छिपाकर अपने छात्रों के समान रैंक धारक होने का दावा करते हैं। वे यह नहीं बताते हैं कि सफल अभ्यर्थी ने उनके यहां किस विषय में दाखिला लिया था।


कोचिंग इंडस्ट्री 58,000 करोड़ की

सीसीपीए के अनुसार, कोचिंग उद्योग का मौजूदा बाजार राजस्व करीब 58,088 करोड़ रुपये है। कोचिंग के लिए 2 लाख छात्र सालाना राजस्थान के कोटा जाते हैं। वहीं, दिल्ली यूपीएससी- सीएसई कोचिंग का गढ़ मानी जाती है।


इन कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी 

वाजीराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट, चहल अकादमी, खान स्टडी ग्रुप आईएएस, एपीटीआई प्लस, एनालॉग आईएएस, शंकर आईएएस, नेक्स्ट आईएएस, दृष्टि आईएएस, इकरा आईएएस, विजन आईएएस, आईएएस बाबा, योजना आईएएस, प्लूटस आईएएस, एएलएस आईएएस, राव आईएएस स्टडी सर्किल।

Tuesday, January 31, 2023

जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गईं सूचनाएं न देने पर बीएसए समेत छह बीईओ पर 25-25 हजार जुर्माना, जानिए कहां का है मामला?

जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गईं सूचनाएं न देने पर बीएसए समेत छह बीईओ पर 25-25 हजार जुर्माना, जानिए कहां का है मामला? 


उन्नाव। जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गईं सूचनाएं न देने पर राज्य सूचना आयुक्त ने बीएसए सहित छह बीईओ पर 25-25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माने की कटौती उनके वेतन से की जाएगी।


सफीपुर कस्बा निवासी अरशद अली ने जन सूचना अधिकार के तहत साल 2019 में अलग-अलग तिथियों में परिषदीय स्कूल में उर्दू शिक्षकों की तैनाती, पंजीकृत उर्दू के छात्र और उन स्कूलों में किताबों की स्थिति की जानकारी बीएसए सहित छह बीईओ से मांगी थी।


नियमानुसार 30 दिन के अंदर सूचना दे देनी चाहिए थी। जब सूचना नहीं मिली तो अरशद ने राज्य सूचना आयोग लखनऊ में शिकायत की। वहां से फिर बीएसए और खंड शिक्षाधिकारियों को नोटिस भेजकर आयोग में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे।


आयोग के समक्ष देरी से सूचना देने का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए। इस पर राज्य सूचना आयुक्त हर्षवर्धन शाही ने सभी पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सूचना न देने वालों में बीएसए के साथ पूर्व बीईओ असोहा सुषमा सेंगर, सिकंदरपुर सरोसी आशीष चौहान, बांगरमऊ राजेश कटियार, हिलौली बीईओ अशोक सिंह, बीघापुर की नसरीन फारुकी और बीईओ हसनगंज शामिल हैं।


सूचना मांगने वाले अरशद अली ने बताया कि स्कूलों में उर्दू शिक्षक की तैनाती के बाद भी किताबें नहीं मंगवाई जा रही थीं। इसलिए सूचना नहीं दी गई। बीएसए संजय कुमार तिवारी ने बताया कि मामला पुराना है। राज्य सूचना आयोग ने जुर्माने की रकम वेतन से काटने का आदेश दिया है।