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Wednesday, May 6, 2026

आदेश को भ्रामक बताने पर संभल DIOS पर हाईकोर्ट ने किया एक लाख हर्जाना, शिक्षकों की नियुक्ति व तदर्थ प्रधानाचार्य के कार्यभार का मामला, निजी वेतन से करना होगा भुगतान

आदेश को भ्रामक बताने पर संभल DIOS पर हाईकोर्ट ने किया एक लाख हर्जाना, शिक्षकों की नियुक्ति व तदर्थ प्रधानाचार्य के कार्यभार का मामला, निजी वेतन से करना होगा भुगतान


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व में पारित आदेश को भ्रामक बता ने याचियों का दावा अस्वीकार करने पर संभल के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। उन्हें हर्जाने की रकम निजी वेतन से या एक हफ्ते में जिला विधिक सेवा त प्राधिकरण में जमा करने का आदेश दिया गया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभश्याम शमशेरी की अदालत ने - राष्ट्रीय कन्या इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची को अधिकारी की हठधर्मिता और आदेश की गलत व्याख्या के कारण  दोबारा हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी, जिसके लिए हर्जाना लगाया जाना जरूरी है। कोर्ट ने प्रबंध समिति के खिलाफ पारित डीआईओएस के आदेश को रद्द कर नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया है।


मामले के मुताबिक, 19 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर डीआईओएस को निर्देश दिया था कि वह डॉ. दीपक भाटिया व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में पारित पूर्व फैसलों के आलोक में शिक्षकों की नियुक्ति और तदर्थ प्रधानाचार्य के कार्यभार पर नया निर्णय लें। इस दौरान चयनित शिक्षक को तदर्थ प्रधानाचार्य के रूप में कार्य करने की अनुमति भी दी थी, लेकिन डीआईओएस ने कोर्ट के आदेश का पालन करने के बजाय अपने आदेश में यह लिख दिया कि 19 जनवरी का आदेश न्यायालय को गुमराह करके प्राप्त किया गया है।

इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब राज्य सरकार ने उस आदेश को चुनौती नहीं दी थी तो डीआईओएस को ऐसी टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं था। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी ने न केवल आदेश कीगलत व्याख्या की, बल्कि याचिकाकर्ता को दोबारा अदालत आने पर मजबूर किया जो कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

हर्जाना लगाने के साथ कोर्ट ने डीआईओएस को अंतिम अवसर देते हुए नए सिरे से आदेश पारित करने के लिए मामले को इस निर्देश के साथ दोबारा उनके पास भेजा दिया कि डीआईओएस 19 जनवरी के आदेश का अक्षरशः पालन करें। यह भी सुनिश्चित करें कि स्व-वित्तपोषित योजना के तहत नियुक्तियां नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।


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