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Wednesday, April 29, 2026

प्रशस्त एप से स्कूलों में दिव्यांग बच्चों की पहचान होगी आसान, SCERT की ओर से एप के प्रयोग पर कार्यशाला का आयोजन

प्रशस्त एप से स्कूलों में दिव्यांग बच्चों की पहचान होगी आसान, SCERT की ओर से एप के प्रयोग पर कार्यशाला का आयोजन

लखनऊ। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने स्कूलों में दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिए प्रशस्त एप विकसित किया है। इसके जरिये 21 तरह की दिव्यांगता की जांच आसानी से की जा सकेगी। यह कवायद इन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेगी। यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय की उप सचिव इरा सिंघल ने दी। वह मंगलवार को एससीईआरटी की ओर से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में प्रशस्त एप के प्रयोग को लेकर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं।


सिंघल ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समय पर प्रारंभिक जांच, मूल्यांकन और पहचान होना जरूरी है। इसलिए सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों को सभी बच्चों की चरणबद्ध व व्यवस्थित जांच के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होंने कहा कि एनआईसी व डीओएसईएल द्वारा विकसित किया जा रहा नया प्रशस्त एप 2.0, यू-डायस के साथ एकीकरण में विद्यालय प्रमुखों, शिक्षकों, विशेष शिक्षाविदों व छात्रों को जोड़ने और विद्यालय स्तर की जांच करने की सुविधा देगा। एप को मई में लॉन्च होने की उम्मीद है। इसलिए अभी उपयोगकर्ता स्वीकृति परीक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे एप को प्रयोग में लाने से पूर्व उसकी कमियों को दूर किया जा सके।

उन्होंने बताया कि शिक्षकों को एप का प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के व्यापक लक्ष्यों का हिस्सा है। कार्यशाला में शिक्षा मंत्रालय के प्रभात मिश्रा, संयुक्त निदेशक डॉ. भारती कौशिक, प्रो. आनंद मेहता, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार आदि उपस्थित रहे। 

Tuesday, September 19, 2023

दिव्यांगता के आधार पर उच्च शिक्षण संस्थानों में कोर्स चुनने और क्रेडिट की सुविधा मिलेगी

दिव्यांगता के आधार पर उच्च शिक्षण संस्थानों में कोर्स चुनने और क्रेडिट की सुविधा मिलेगी



नई दिल्ली। अब छात्रों को दिव्यांगता के आधार पर उच्च शिक्षण संस्थानों में कोर्स चुनने और क्रेडिट की सुविधा मिलेगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत सामान्य छात्रों की तरह दिव्यांगों को सुविधा देने के लिए दिशानिर्देश तैयार किए हैं।


 इसका उद्देश्य ऐसे छात्रों को मुख्य, वैकल्पिक, कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के चयन में सहूलियत देने के साथ-साथ प्रौद्योगिकी की सहायता से पढ़ाई में मदद का मौका देना भी शामिल है। 


यूजीसी ने विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, आईआईटी, एनआईटी समेत अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को दिशानिर्देश भेज दिए हैं। इसके तहत दिव्यांगजनों को उनकी दिव्यांगता के आधार पर स्नातक व स्नातकोत्तर में कोर्स चुनने का मौका मिलेगा। 


अभी तक सभी दिव्यांगजनों के लिए पढ़ाई में एक जैसे दिशानिर्देश थे, जबकि दिव्यांगता अलग-अलग होती है। मसलन किसी को कम दिखाई देता है, किसी को लिखने में दिक्कत होती है तो कोई देरी से समझता है।