DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label पदोन्नति. Show all posts
Showing posts with label पदोन्नति. Show all posts

Sunday, October 4, 2026

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का इंतजार खत्म होगा, चार हजार एलटी ग्रेड शिक्षक प्रवक्ता बनेंगे, पदोन्नति जल्द

शीघ्र होगी एलटी ग्रेट के शिक्षकों की पदोन्नति

प्रयागराज : पदोन्नति का इंतजार कर रहे राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के एलटी ग्रेट के शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है। पुरुष संवर्ग के करीब 2100 और महिला संवर्ग के 1800 शिक्षकों की सूची तैयार हो रही है। शिक्षा निदेशालय की ओर से उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग को विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक के लिए पत्र भेजा जाएगा।

इससे पहले महिला संवर्ग के दो विषयों की 59 शिक्षकों की दिसंबर 2022 में प्रोन्नति हो चुकी है जबकि पुरुष संवर्ग के शिक्षक इंतजार कर रहे हैं। 2019-20 से 2023-24 सत्र के बीच रिक्त पदों पर पदोन्नति के प्रस्ताव पर आयोग की ओर से आपत्ति के कारण प्रक्रिया को रोक दिया गया था। आयोग ने रिक्तियों के कारण और तिथि के विवरण के साथ ज्येष्ठता सूची निर्विवादित होने का प्रमाणपत्र देने के लिए कहा था। 

अध्यापकों के क्रमांक क्रमवार न होने, सूची में दिव्यांगों के लिए आरक्षण चिह्नित न होने पर भी आपत्ति थी। अब अपर शिक्षा निदेशक अजय द्विवेदी का कहना है कि प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर ली जाएगी।


राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का इंतजार खत्म होगा, चार हजार एलटी ग्रेड शिक्षक प्रवक्ता बनेंगे, पदोन्नति जल्द

प्रयागराज। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत एलटी ग्रेड के तकरीबन चार हजार शिक्षक-शिक्षिकाओं को जल्द प्रवक्ता पद पर पदोन्नति मिलेगी। शासन के निर्देश पर एलटी ग्रेड पुरुष संवर्ग में 2100 से अधिक, जबकि महिला संवर्ग में 1800 से अधिक पदोन्नति की सूची तैयार की जा रही है। वैसे तो शासन ने 30 सितंबर तक ही पदोन्नति की कार्यवाही पूरी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन वरिष्ठता सूची बनाने में समय लग गया है। अब शिक्षा निदेशालय की ओर से जल्द उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक के लिए पत्र भेजा जाएगा। डीपीसी में ही पदोन्नति पर मुहर लगेगी।

नियमानुसार पांच साल की सेवा पूरी कर चुके शिक्षक-शिक्षिकाओं की हर साल रिक्त पदों के सापेक्ष पदोन्नति होनी चाहिए, लेकिन राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों को सालों इंतजार करना पड़ता है। इससे पहले महिला शाखा के दो विषयों की 59 शिक्षिकाओं का दिसंबर 2022 में प्रवक्ता पद पर प्रमोशन हुआ था, जबकि पुरुष वर्ग की पदोन्नति कई सालों से नहीं हुई है। पदोन्नति के लिए माध्यमिक शिक्षाविभाग की ओर से यूपीपीएससी को डीपीसी की बैठक कराने के लिए दो साल पहले ही अनुरोध किया गया था। हालांकि 2019-20 से 2023-24 सत्र के बीच रिक्त पदों पर पदोन्नति के प्रस्ताव पर आयोग की ओर से आपत्ति होने के बाद से प्रक्रिया टल गई थी।

आयोग ने रिक्तियों के घटित होने का कारण व तिथि के विवरण के साथ ही ज्येष्ठता सूची निर्विवादित होने संबंधित प्रमाणपत्र देने को कहा था। सूची में शिक्षिकाओं का क्रमांक क्रमवार नहीं होने समेत चयन वर्षवार अधियाचित पदों के सापेक्ष दिव्यांगों के लिए आरक्षण चिह्नित नहीं होने पर भी आपत्ति हुई थी। वहीं एलटी ग्रेड पुरुष वर्ग के शिक्षकों की पदोन्नति वरिष्ठता विवाद के कारण रुकी हुई थी। अपर शिक्षा निदेशक अजय द्विवेदी का कहना है कि कार्यवाही जल्द पूरी की जाएगी।

Wednesday, September 2, 2026

राजकीय व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की पदोन्नति फाइल नहीं लटकेगी, फाइल पर निदेशक को अधिकतम 30 दिन में लेना होगा निर्णय, समर्थ पोर्टल पर यह प्रक्रिया 90 दिन में होगी पूरी

राजकीय व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की पदोन्नति फाइल नहीं लटकेगी, फाइल पर निदेशक को अधिकतम 30 दिन में लेना होगा निर्णय, समर्थ पोर्टल पर यह प्रक्रिया 90 दिन में होगी पूरी


लखनऊ। राजकीय व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की पदोन्नति की फाइल अब बेवजह लटकाई नहीं जा सकेगी। उच्च शिक्षा निदेशक को शिक्षक के प्रोन्नति की फाइल पर अधिकतम 30 दिनों में निर्णय लेना होगा। 


अभी तक निदेशालय में लंबे समय तक फाइलें लटकाने के चलते शिक्षकों को दौड़ भाग करनी पड़ती थी। अब उन्हें बड़ी राहत मिल गई है। अभी तक राजकीय व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की समर्थ पोर्टल पर करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत शिक्षक पदोन्नति के लिए आवेदन करता है तो पहले कॉलेज की इंटरनल क्वॉलिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) के पास आवेदन जाता है। वह उसकी जांच कर आगे प्राचार्य को ऑनलाइन ही पोर्टल पर रिपोर्ट बढ़ा देती है। 

फिर प्राचार्य कमेटी का गठन कर प्रोन्नति की प्रक्रिया को पूरा करता है। यह प्रक्रिया 60 दिनों में पूरी होती है। फिर यहां से निदेशालय को शिक्षक की प्रोन्नति के लिए प्रस्ताव भेज दिया जाता है। अब निदेशक के पास शिक्षकों की पदोन्नति की फाइल जाने पर उन्हें 30 दिनों में निर्णय लेना होगा। 

निदेशक को अब अधिकतम 30 दिनों में इस पर निर्णय लेना होगा। समर्थ पोर्टल पर शिक्षक प्रोन्नति की पूरी प्रक्रिया 90 दिनों में पूरी हो जाएगी। फिलहाल, इस निर्णय से 212 राजकीय डिग्री कॉलेजों व 331 एडेड डिग्री कॉलेजों के करीब 16 हजार शिक्षकों को बड़ी राहत मिल गई है।

Thursday, July 9, 2026

सर्वोदय विद्यालयों में नियम विरुद्ध प्रमोशन पर रिव्यू डीपीसी की तैयारी, प्रवक्ताओं को 4800 से सीधे 7600 रुपये ग्रेड पे देने का मामला

सर्वोदय विद्यालयों में नियम विरुद्ध प्रमोशन पर रिव्यू डीपीसी की तैयारी, प्रवक्ताओं को 4800 से सीधे 7600 रुपये ग्रेड पे देने का मामला

 100 प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य के पद पर दी गई थी पदोन्नति

नजीर बन जाने से अन्य विभागों में भी पैदा होंगी दिक्कतें

8 जुलाई 2026
लखनऊ। जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में 100 प्रवक्ताओं को नियम विरुद्ध ढंग से प्रधानाचार्य के पद पर दी गई पदोन्नतियों पर रिव्यू (समीक्षा) डीपीसी की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि इसमें विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) अपने वर्ष 2024 में लिए गए फैसले की समीक्षा करते हुए उसे पलट देगी। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए शासन स्तर पर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

प्रदेश में समाज कल्याण विभाग 101 सर्वोदय विद्यालयों (आश्रम पद्धति) को संचालित कर रहा है। वर्ष 2024 में इन विद्यालयों में कार्यरत 100 प्रवक्ताओं को 4800 रुपये ग्रेड पे से सीधे 7600 रुपये ग्रेड पे प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति दे दी गई जबकि 24 नवंबर 2023 को अपर मुख्य सचिव, वित्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय हो चुका था कि प्रवक्ता एवं प्रधानाचार्य (इंटर अनुभाग) के मध्य उप प्रधानाचार्य का पद सृजित कराकर पदोन्नतियां की जाएं। 4800 रुपये और 7600 रुपये ग्रेड पे के बीच दो ग्रेड पे (5400 और 6600 रुपये) और होते हैं। इसके बाद भी नियम विरुद्ध पदोन्नति का प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया है।


नजीर बन जाने से अन्य विभागों में भी पैदा होंगी दिक्कतें
इस मामले में शासन ने समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक जे राम के खिलाफ पहले ही नियम-7 के तहत जांच बैठा दी है। साथ ही सभी प्रमोशन भी रद्द कर दिए। शासन के इस फैसले से प्रभावित पक्ष कोर्ट गया और वहां से 7600 रुपये ग्रेड पे दिए जाने के मामले में उनके पक्ष में फैसला आया। यहां बता दें कि इससे पहले वित्त, कार्मिक और न्याय विभाग परामर्श दे चुके हैं कि 4800 रुपये ग्रेड पे से सीधे 7600 रुपये ग्रेड पे नहीं दिया जा सकता। अब शासन की चिंता का सबब यह है कि इन प्रवक्ताओं को एक बार में ही दो स्तर से ऊपर का ग्रेड पे दिया गया तो इससे अन्य विभागों के लिए गलत नजीर पेश होगी इसलिए उच्चस्तर पर रिव्यू डीपीसी कराने पर विचार किया जा रहा है।

क्या है पेच
नियमावली में प्रावधान है कि हायर सेकेंड्री स्कूल (कक्षा-10 तक) के प्रधानाचार्य को इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नत किया जा सकता है। कुछ साल पहले सरकार ने कक्षा-10 तक विद्यालयों की व्यवस्था खत्म करके इन्हें कक्षा 6-12 तक के लिए कर दिया। इससे हायर सेकेंड्री स्कूल के प्रधानाचार्य का पद ही खत्म हो गया। उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि इसके बाद एक आदेश जारी किया गया कि प्रवक्ता को हाईस्कूल के प्रधानाचार्य के समतुल्य माना जाए। अब शासन ने अपने इस आदेश को निरस्त कर दिया है। इस निरस्तीकरण आदेश को ही रिव्यू डीपीसी का आधार माना जा रहा है।






सर्वोदय विद्यालयों में नियम विरुद्ध 100 प्रवक्ताओं की पदोन्नतियों की जांच आगे बढ़ी, तत्कालीन प्रमुख सचिव, सचिव व विशेष सचिव से लिखित पक्ष लेगा नियुक्ति विभाग

14 अप्रैल 2026
लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में 100 प्रवक्ताओं को गलत ढंग से प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति किए जाने की जांच रफ्तार पकड़ रही है। नियुक्ति विभाग उच्चस्तर से सहमति प्राप्त होने के बाद अब इस मामले में समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, सचिव समीर वर्मा और विशेष सचिव रजनीश चंद्रा का लिखित में पक्ष लेगा। इसके अलावा सचिवालय प्रशासन विभाग के चार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया गया है।

समाज कल्याण विभाग प्रदेश में 101 सर्वोदय विद्यालयों (आश्रम पद्धति) को संचालित कर रहा है। 2024 में इन विद्यालयों में कार्यरत 100 प्रवक्ताओं को 4800 रुपये ग्रेड पे से सीधे 7600 रुपये ग्रेड पे

सचिवालय प्रशासन विभाग के चार अधिकारियों के खिलाफ भी भेजा गया पत्र

और प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति दे दी गई। जबकि, 24 नवंबर 2023 को अपर मुख्य सचिव, वित्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय हो चुका था कि प्रवक्ता एवं प्रधानाचार्य (इंटर अनुभाग) के मध्य उप प्रधानाचार्य का पद सृजित कराकर पदोन्नतियां की जाएं। यहां बता दें कि 4800 रुपये और 7600 रुपये ग्रेड पे के बीच दो ग्रेड पे (5400 और 6600 रुपये) और होते हैं। इसके बाद भी प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य के पद पर नियम विरुद्ध पदोन्नतियां दे दी गईं।

सूत्रों के मुताबिक, ये पदोन्नतियां दिए जाने के बाद समाज कल्याण विभाग में तैनाती पाने वाले एक समीक्षा अधिकारी ने यह मामला पकड़ा और पूरे प्रकरण पर फाइल

चला दी। इसके बाद शासन स्तर से सभी पदोन्नतियां रद्द कर दी गईं। साथ ही समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक व योजना प्रभारी जे राम के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। शासन ने समीक्षा अधिकारी धर्मेंद्र, अनुभाग अधिकारी अरविंद प्रकाश, उप सचिव रजनीकांत पांडेय और विशेष सचिव शशिकांत कनौजिया की जिम्मेदारी तय करने के लिए सचिवालय प्रशासन विभाग को पत्र भेज दिया है।

शासन के सूत्रों के मुताबिक, पूरे प्रकरण में तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, सचिव समीर वर्मा और विशेष सचिव रजनीश चंद्रा का पक्ष मिलने के बाद जांच की आगे की दिशा तय हो सकेगी। इसके लिए इन अधिकारियों को शासन से पत्र जारी किया जा रहा है।



सर्वोदय विद्यालय के 100 प्रवक्ताओं को नियमविरुद्ध पदोन्नति, प्रमुख सचिव तक पहुंची जांच की आंच

दो साल पहले समाज कल्याण विभाग में 100 प्रवक्ताओं को दी गई थी गलत पदोन्नति

06 अप्रैल 2026
लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में 100 प्रवक्ताओं को गलत ढंग से प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति मामले में जांच की आंच तत्कालीन प्रमुख सचिव और विशेष सचिव तक पहुंच गई है। प्राथमिक जांच में निदेशालय के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ साथ शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी जिम्मेदार ठहराए गए हैं। उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इसी सप्ताह इन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आगे की जांच शुरू हो सकती है।

समाज कल्याण विभाग 101 सर्वोदय विद्यालयों (आश्रम पद्धति) को संचालित कर रहा है। वर्ष 2024 में इन विद्यालयों में कार्यरत 100 प्रवक्ताओं को 4800 रुपये ग्रेड पे से सीधे 7600 रुपये ग्रेड पे प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति दे दी गई। जबकि, 24 नवंबर 2023 को अपर मुख्य सचिव, वित्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय हो चुका था कि प्रवक्ता एवं प्रधानाचार्य (इंटर अनुभाग) के मध्य उप प्रधानाचार्य का पद सृजित कराकर पदोन्नतियां की जाएं। 4800 रुपये और 7600 रुपये ग्रेड पे के बीच दो ग्रेड पे (5400 और 6600 रुपये) और होते हैं। इसके बाद भी नियमविरुद्ध पदोन्नति का प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया है।



सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के 93 पदों का सृजन, गलत ढंग से दी गई पदोन्नति रद्द करने के बाद शासन का फैसला

अब प्रवक्ता के पद पर 10 वर्ष की सेवा के बाद उप प्रधानाचार्य के पद पर मिलेगी प्रोन्नति


20 मार्च 2026
लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के 93 पदों का सृजन किया गया है। प्रवक्ता से सीधे प्रधानाचार्य पद पर गलत ढंग से की गई प्रोन्नति को निरस्त किए जाने के बाद यह निर्णय गया है। अब प्रवक्ता के पद पर 10 वर्ष की सेवा के बाद उप प्रधानाचार्य के पद पर प्रोन्नति मिलेगी। प्रवक्ता के 22 साल की सेवा पूरी होने पर उसे प्रधानाचार्य के पद पर प्रोन्नति दी जाएगी।

इन विद्यालयों में उप्र समाज कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली का उल्लंघन कर 4800 रुपये पे ग्रेड पर कार्यरत प्रवक्ताओं को सीधे 7600 रुपये पे ग्रेड पर पदोन्नति दी गई थी। अब संशोधन कर उप प्रधानाचार्य 2 का पद सृजित किया गया है। मामले में उप निदेशक जे.राम पर विभागीयम कार्रवाई की जाएगी।

नए आदेशों के तहत यूपी में 93 सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के एक-एक पद का सृजन किया गया है। पुनरीक्षित पे मैट्रिक्स लेवल 10 पर 56100-177500 रुपये वेतनमान निर्धारित किया गया है। समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव राजेन्द्र सिंह की ओर से पद सृजन का आदेश जारी कर दिया गया है।




प्रधानाचार्य बनाए गए 100 प्रवक्ताओं की पदोन्नति रद्द, समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय स्कूलों का मामला

19 मार्च 2026
लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय स्कूलों में 100 प्रवक्ताओं की गलत ढंग से प्रधानाचार्य के पद पर हुई प्रोन्नति को रद कर दिया गया है।


नियम विपरीत प्रवक्ता पद से सीधे प्रधानाचार्य पर प्रोन्नति किए जाने पर शासन ने सख्त नाराजगी जताई है समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक जे. राम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। समाज कल्याण विभाग यूपी में 101 जयप्रकाशनारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित कर रहा है। 

यहां कार्यरत करीब 100 प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पर दो वर्ष पूर्व प्रोन्नति दी गई। प्रवक्ताओं को 4800 रुपये पे ग्रेड से सीधे 7600 रुपये पे ग्रेड के प्रधानाचार्य पर प्रोन्नति दी गई। इसका प्रस्ताव 11 जनवरी 2024 को भेजा गया और उस समय इस पद पर प्रोन्नति के लिए पोषक संवर्ग भी उपलब्ध नहीं था। नियम के अनुसार, इन्हें पहले उप प्रधानाचार्य बनाना चाहिए था, फिर प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति किया जाना चाहिए था।

Thursday, June 25, 2026

माध्यमिक शिक्षकों को बड़ी राहत, हाईस्कूल सहायक अध्यापक से प्रवक्ता पदोन्नति का मार्ग साफ, शासन ने संशोधन को दी मंजूरी

माध्यमिक शिक्षकों को बड़ी राहत,  हाईस्कूल सहायक अध्यापक से प्रवक्ता पदोन्नति का मार्ग साफ,  शासन ने संशोधन को दी मंजूरी


प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शासन ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए हाईस्कूल सहायक अध्यापक से इंटरमीडिएट प्रवक्ता पद पर पदोन्नति से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही व्यावहारिक समस्याओं का समाधान कर दिया है। शासन ने माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए नियमों में आवश्यक संशोधन को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

9 सितंबर 2025 से पहले नियुक्त शिक्षकों को मिलेगा लाभ
शासनादेश संख्या 1163/15-7-2026-1(29)/2019, दिनांक 18 जून 2026 के अनुसार स्पष्ट किया गया है कि 09 सितंबर 2025 से पूर्व नियुक्त सहायक अध्यापक प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के लिए पूर्व व्यवस्था के अनुसार ही पूर्णतः पात्र (Eligible) माने जाएंगे। इस निर्णय से उन हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी जो नियमों में बदलाव के बाद पदोन्नति को लेकर असमंजस की स्थिति में थे।

NCTE मानकों के कारण उत्पन्न हुई थी समस्या
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि 09 सितंबर 2025 को जारी शासनादेश के तहत शिक्षकों की नियुक्ति हेतु अर्हताओं को NCTE (National Council for Teacher Education) के मानकों के अनुरूप संशोधित किया गया था। इसके बाद पहले से नियुक्त शिक्षकों की पदोन्नति संबंधी पात्रता को लेकर कई व्यावहारिक प्रश्न सामने आए थे।

चूंकि पूर्व में नियुक्त सहायक अध्यापकों की नियुक्ति उस समय प्रचलित अर्हताओं के आधार पर हुई थी, इसलिए उनकी पदोन्नति व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए वर्तमान संशोधन किया गया है।



प्रमुख बिंदु

हाईस्कूल सहायक अध्यापक से प्रवक्ता पदोन्नति का मार्ग साफ।

माध्यमिक शिक्षा परिषद के प्रस्ताव को शासन की मंजूरी।

09 सितंबर 2025 से पहले नियुक्त शिक्षक पूर्व नियमों के अनुसार पात्र होंगे।

NCTE मानकों के कारण उत्पन्न पदोन्नति संबंधी विवाद का समाधान।

हजारों शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ मिलने की संभावना।

Friday, May 8, 2026

भर्ती परीक्षाओं में फंसी 4461 राजकीय शिक्षकों की पदोन्नति, हर साल बिना पदोन्नति पाए शिक्षक सेवानिवृत्त होते जा रहे

भर्ती परीक्षाओं में फंसी 4461 राजकीय शिक्षकों की पदोन्नति, हर साल बिना पदोन्नति पाए शिक्षक सेवानिवृत्त होते जा रहे

 
प्रयागराज। प्रदेश के 2635 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 4461 सहायक अध्यापकों के प्रवक्ता पद पर पदोन्नति भर्ती परीक्षाओं और विभागीय लापरवाही के कारण फंसी हुई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने प्रवक्ता महिला शाखा के 1821 और पुरुष शाखा के 2640 पदों पर पदोन्नति के लिए अधियाचन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा है। ये अलग बात है कि विभाग खुद चार साल कोशिश के बावजूद अब तक पदोन्नति के लिए अर्ह सहायक अध्यापकों की सूची तैयार नहीं कर सका है। इस सबके बीच हर साल बिना पदोन्नति पाए शिक्षक सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं।


शिक्षा निदेशालय ने 11 व 20 जुलाई 2023, 16 मई व दस जून 2024, 30 सितम्बर और 12 दिसंबर 2025 को महिला शाखा में कार्यरत शिक्षिकाओं के प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशकों से गोपनीय आख्या मांगी थी लेकिन रिक्त 1821 पद के सापेक्ष अब तक तकरीबन 70 फीसदी शिक्षिकाओं की सूची ही तैयार हो सकी है। इसके चलते सात साल से शिक्षिकाओं की पदोन्नति नहीं हो सकी है। इसी प्रकार पुरुष शाखा के 297 पदों की सूचना तो पहले ही भेजी जा चुकी थी और 2343 पदों का अधियाचन शामिल करते हुए कुल 2640 पदों की रिक्तियां 27 फरवरी को आयोग को भेजी गई है।


हैरानी की बात है कि शिक्षा निदेशालय ने पुरुष शाखा के 2640 पदों पर पदोन्नति के लिए अर्ह सहायक अध्यापकों की सूची ही तैयार नहीं की है। इस बीच शिक्षा विभाग के अफसरों ने विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक कराने के लिए जब लोक सेवा आयोग से संपर्क किया तो जवाब मिला कि वर्तमान में कई भर्ती परीक्षाओं के कारण डीपीसी की तिथि तय नहीं हो पा रही है। आयोग से डीपीसी की तिथि मिलने पर जितने शिक्षकों की गोपनीय आख्या तैयार है उन्हें तो पदोन्नति मिल ही जाएगी।


पदोन्नति कोटा 

राजकीय विद्यालयों में पदोन्नति कोटा में प्रवक्ता महिला के 2343 और पुरुष के 3066 कुल 5409 पद स्वीकृत हैं। इनमें से महज 948 (18 फीसदी) पद ही भरे हुए हैं। 4461 (82 प्रतिशत) पद खाली हैं। यदि पदोन्नति होती है तो सहायक अध्यापकों के लगभग साढ़े चार हजार पद खाली होंगे जिससे बेरोजगारों को एक और बड़ी भर्ती में शामिल होने का मौका मिल जाएगा।

Friday, May 1, 2026

सूबे के राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों का टोटा, 216 में सिर्फ 16 ही नियमित

सूबे के राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों का टोटा, 216 में सिर्फ 16 ही नियमित

पढ़ाई की गुणवत्ता और छात्रों की संख्या पर पड़ रहा सीधा असर


प्रयागराज। प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में लंबे समय से नियमित प्राचार्यों की कमी अब शिक्षा व्यवस्था पर भारी पड़ने लगी है। 216 सरकारी कॉलेजों में मात्र 16 में ही पूर्णकालिक प्राचार्य तैनात हैं जबकि बाकी संस्थान कार्यवाहक व्यवस्था के सहारे चल रहे हैं। इसका असर न सिर्फ पठन-पाठन की गुणवत्ता पर पड़ रहा है बल्कि छात्रों की संख्या में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।


प्रयागराज मंडल के 13 महाविद्यालयों समेत प्रदेश भर के अधिकांश कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य का अभाव है। प्राचार्य पद पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया वर्षों से लंबित है। यूजी कॉलेजों में 2017 और पीजी कॉलेजों में 2019 के बाद से प्रमोशन नहीं हो सका है। दूसरी ओर कॉलेजों की संख्या भी बढ़ी है। पहले जहां प्रदेश में 171 राजकीय महाविद्यालय थे, वहीं वर्ष 2025 के दौरान करीब 71 नए कॉलेज खोले गए, जिनमें से 46 राजकीय कालेज को पठन-पाठन की जिम्मेदारी दी गई। नए संस्थानों के लिए भी नियमित प्राचार्य की व्यवस्था नहीं हो पाई।

नियमों के तहत वरिष्ठ प्रोफेसर को प्राचार्य का चार्ज दिया जाना चाहिए लेकिन कई जगहों पर नियमों को दरकिनार कर अन्य को भी प्रभार सौंपा जा रहा है। यहां तक कि निदेशक स्तर पर भी कार्यवाहक व्यवस्था लागू है जिससे प्रशासनिक अस्थिरता साफ नजर आती है। शिक्षकों का मानना है कि कार्यवाहक प्राचार्य प्रभावी निर्णय लेने से बचते हैं। उन्हें यह आशंका रहती है कि स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति के बाद उन्हें फिर से अपने ही सहकर्मियों के बीच सामान्य भूमिका में लौटना पड़ेगा। यही वजह है कि अनुशासन और शैक्षणिक गुणवत्ता पर अपेक्षित सख्ती नहीं हो पाती। वर्ष 2022 के बाद से राजकीय महाविद्यालयों में कोई नई भर्ती भी नहीं हुई है, जबकि हर माह दो से तीन प्राचार्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं।