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Monday, December 2, 2019

नए आयोग के इंतजार में फंसीं भर्तियां, प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक नई भर्तियों का इंतजार, तीन भर्ती संस्थानों के विलय का तैयार हो चुका है मसौदा

नए आयोग के इंतजार में फंसीं भर्तियां, प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक नई भर्तियों का इंतजार, तीन भर्ती संस्थानों के विलय का तैयार हो चुका है मसौदा।






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Saturday, August 31, 2019

महराजगंज : एक सितम्बर को समस्त परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को खोले जाने के सम्बन्ध में बीएसए ने दिया निर्देश, आदेश देखें

महराजगंज : एक सितम्बर को समस्त परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को खोले जाने के सम्बन्ध में बीएसए ने दिया निर्देश, आदेश देखें-

Monday, September 24, 2018

अंग्रेजी माध्यम के छात्र पढ़ रहे हिंदी पाठ्यक्रम, माध्यमिक स्कूलों में भी शुरू होने जा रही अर्धवार्षिक परीक्षाएं, किताबें नहीं

दिक्कत

जागरण संवाददाता, लखनऊ : माध्यमिक स्कूलों की अर्धवार्षिक परीक्षाएं 24 सितंबर से शुरू होने को हैं। वहीं छात्र दुकानों की खाक छान रहे हैं। बावजूद, उन्हें एनसीईआरटी की पुस्तकें नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में वह निजी पब्लिशर्स की महंगी पुस्तकें व गाइड खरीदने का मजबूर हैं।

सरकार ने माध्यमिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में एक समान पाठ्यक्रम लागू किया है। इसके लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पुस्तकें मुहैया की जानी थीं। अफसरों ने शुरुआत में कुछ स्कूलों में स्टॉल लगवाकर पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने की पहल की। मगर छात्रों की संख्या के लिहाज से व्यवस्था ध्वस्त हो गई। ऐसे में नवीं व 11वीं कक्षा के तमाम छात्र-छात्रओं को अभी तक संपूर्ण पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं हो सका है। ऐसे में परेशान छात्र रविवार को अमीनाबाद, आलमबाग में एनसीईआरटी की पुस्तकें तलाशते नजर आए।

इतिहास, विज्ञान सब गायब : पुस्तक विक्रेता रमेश चंद्र वर्मा के मुताबिक 11वीं की इतिहास, जीवविज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र व नागरिक शास्त्र की एनसीईआरटी की पुस्तकें ढाई माह से नहीं हैं। यही हाल कक्षा नौ की विज्ञान की पुस्तक का भी है। कई बार पब्लिशर्स से संपर्क किया गया, मगर आपूर्ति नहीं की गईं। वहीं छात्र निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें खरीदने को मजबूर हैं।

अंग्रेजी माध्यम के छात्र पढ़ रहे हंिदूी पाठ्यक्रम : उधर, बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में समाप्त होने वाली हैं। राजधानी के आठ ब्लॉकों में 45 अंग्रेजी माध्यम के प्राथमिक स्कूल हैं। यहां 17 सितंबर से सत्र परीक्षाएं चल रही हैं। मगर कक्षा चार व पांच के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। ऐसे में शिक्षकों ने उन्हें हंिदूी पाठ्यक्रम की पुस्तकें थमा दी हैं। यही पुस्तकें पढ़कर बच्चे परीक्षा दे रहे हैं। यह हाल शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों तक है। अंग्रेजी मीडियम के निरालानगर प्राथमिक स्कूल में कक्षा चार व पांच के बच्चों को अंग्रेजी की सिर्फ रैनबो पुस्तक तीन दिन पहले ही मिली है। वहीं गणित की गिनतारा, सामाजिक विज्ञान की हमारा परिवेश व अन्य किताबें हंिदूी पाठ्यक्रम की दी गई हैं।

उर्दू की नहीं पहुंची किताबें : विभाग अभी उर्दू की पुस्तकें भी नहीं छपवा सकता है। ऐसे में मान्यता प्राप्त मदरसा व अन्य प्राथमिक विद्यालयों में बच्चे परेशान हैं।’

इतने दिनों बाद भी एनसीईआरटी की पुस्तकें बाजार से नदारद विज्ञान व कला वर्ग की नहीं मिल पा रही किताबें, तनाव में छात्रसभी कक्षाओं की पुस्तकें छप गई हैं। स्टोर से रिसीव भी करा दी गई हैं। बच्चों को अभी तक क्यों नहीं मिलीं, इसकी जानकारी लेंगे। हां, उर्दू की किताबों में थोड़ी समस्या है। वह भी जल्द भेज दी जाएंगी। डॉ. अमरकांत, बीएसए

Sunday, September 2, 2018

फतेहपुर : बच्चों को ‘खींच’ रही ज्ञान की ‘रोशनी’, शिक्षकों के प्रयास से बदली अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर की तस्वीर

फतेहपुर :  बच्चों को ‘खींच’ रही ज्ञान की ‘रोशनी’,  शिक्षकों के प्रयास से बदली अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर की तस्वीर।

फतेहपुर : ये स्कूल भी चार माह पहले अन्य परिषदीय विद्यालयों जैसा था। न तो बच्चों की संख्या पर्याप्त थी और न ही पढ़ाई का माहौल था। इसी बीच स्कूल को अंग्रेजी माध्यम का बनाया गया तो शिक्षकों की नियुक्ति की गई। बस, देखते ही देखते इस स्कूल की तस्वीर बदल गई। हम बात कर रहे हैं ऐरायां विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर की, जहां प्रधानाध्यापक अंबिका प्रसाद और सहायक अध्यापक आनंद मिश्र ने ज्ञान की ऐसी ज्योति जलाई कि बच्चे 4-5 किमी की दूरी पैदल नापकर यहां पढ़ने के लिए पहुंचते हैं।



शिक्षकों के समर्पण से अभिभावक भी प्रभावित हैं। यही वजह है कि 67 बच्चों से शुरू हुआ विद्यालय का सफर मौजूदा समय में 106 तक पहुंच चुका है। इस स्कूल में रहीमपुर धरमंगदपुर, खजुरिहापुर, देवराजपुर, मलकनपुर तथा ऐरायां सादात गावों के बच्चे रोजाना कांवेंट स्कूल की तरह टाई, बेल्ट, आइकार्ड व जूते मोजे पहनकर पढ़ने आते हैं। किताबों का अभाव भी यहां के बच्चों की पढ़ाई में रोड़ा नहीं बन पाई। शिक्षकों द्वारा कराए जाने वाले नियमित अभ्यास और सरलता से समझाने के कारण ही बच्चे अंग्रेजी भाषा में बेसिक चीजों को आत्मसात करने लगे हैं।



दोनों शिक्षक निजी प्रयास से ब्लैक बोर्ड, लर्निग कार्नर के साथ टीएलएम बनाकर बच्चों को अंग्रेजी भाषा में पारंगत कर रहे हैं। यही नहीं स्कूल सफाई में भी नजीर बना हुआ है। स्कूल की दीवारों में पेंट से जागरूकता संदेश व चित्रों के जरिये बच्चों को सामाजिक सरोकारों के प्रति भी उनका कर्तव्य सिखाया जाता है।


  मिल चुका है प्रशस्ति पत्र : मलूकपुर विद्यालय के शिक्षक आनंद मिश्र को उनके निजी प्रयासों के लिए पूर्व एसडीएम, बीईओ तथा मौजूदा ग्राम प्रधान मैनाज बेगम ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। बीईओ वीरेंद्र पांडेय ने बताया कि दूसरे विद्यालय के शिक्षकों को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।



■ पूर्व तैनाती वाले स्कूलों से आए बच्चे : प्रधानाध्यापक अंबिका प्रसाद पूर्व सत्र तक रहीमपुर धरमंगदपुर गांव के परिषदीय स्कूल में पढ़ाते थे, जबकि आनंद मिश्र बहेरा सादात में तैनात थे। दोनों शिक्षकों का शिक्षा के प्रति लगाव देखकर विभाग ने मलूकपुर अंग्रेजी स्कूल में तबादला किया। उनके पीछे इन गांवों के बच्चे भी दूर होने के बावजूद यहां पढ़ने आने लगे।

Friday, August 3, 2018

फतेहपुर : संडे की पाठशाला में ज्ञान की कसौटी, कान्वेंट छोड़ बच्चे आये प्राथमिक विद्यालय

संडे की पाठशाला में ज्ञान की कसौटी

फतेहपुर : ऐसी धारणा बन गई है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई व्यवस्था बदहाल है, लेकिन सब जगह ऐसे ही हालात हैं, यह कहना गलत होगा। कुछ जगहों पर शिक्षक के व्यक्तिगत प्रयास और बच्चों की लगन शिक्षण व्यवस्था को ऊंचाई पर ले जाकर आदर्श स्थापित कर रहे हैं। अमौली ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय बाबूपुर भी इन्हीं में से एक है।

खास बात कि यह विद्यालय रविवार को भी बंद नहीं होता। संडे की विशेष पाठशाला लगती है। अन्य शिक्षक छुट्टी मनाते हैं। केवल प्रधानाध्यापक सर्वेश कुमार अवस्थी की यह पाठशाला होती है। छह दिन हुई पढ़ाई को बच्चों ने कितना समझा, यह टेस्ट के जरिए परखा जाता है। सामान्य ज्ञान का अभ्यास होता है। यह एक मिशन है कि छात्रवृत्ति, नवोदय प्रवेश परीक्षा, विद्याज्ञान परीक्षा में अधिक से अधिक बच्चे उत्तीर्ण हों।

■ कान्वेंट छोड़ बच्चे आए पढ़ने
प्राथमिक विद्यालय बाबूपुर में पढ़ाई का स्तर देख वे अभिभावक भी आकर्षित हुए जो अपने बच्चे कान्वेंट स्कूल स्कूल में पढ़ा रहे हैं। कान्वेंट छोड़ नौ बच्चों ने इस विद्यालय में दाखिला लिया है। डेढ़ साल से लगातार मेहनत के चलते पूर्व की 31 छात्र संख्या 64 पहुंच गई है। प्रधानाध्यापक सर्वेश कुमार से प्रभावित होकर रिटायर्ड शिक्षक चंद्रपाल भी प्रतिदिन सेवाएं देने आते हैं।

■ अमूल्य संपत्ति की तरह विद्यालय की देखभाल करते ग्रामीण:
सकारात्मक सोच और सार्थक प्रयास को देख ग्रामीण भी इस विद्यालय की देखभाल अमूल्य संपत्ति की तरह करते हैं। सुबह साफ सफाई में हर किसी का सहयोग रहता है। प्रधानाध्यापक बताते हैं कि जहां अन्य गांवों में विद्यालय भवन की बेकद्री है, वहीं इस गांव में भरपूर सहयोग मिल रहा है। दीवारों में साल भर पूर्व लिखाई गई इबारत से लेकर विद्यालय के सभी सामान की गांव वाले देखभाल करते हैं।

■ ठेकदार ने दी सड़क की सौगात :
विद्यालय में बेहतर पढ़ाई के प्रयासों से निर्माण कार्य करा रहा ठेकेदार भी इतना प्रभावित हुआ कि अपने खर्चे से विद्यालय को 20 मीटर की सड़क सौगात रूप में दे दी। प्रधान शिवशरण का योगदान भी सराहनीय रहा है। उन्होंने बाउंड्रीवाल की सौगात दी है।

Monday, July 2, 2018

आजमगढ़ : एक ऐसी ग्राम पंचायत जहां नही है प्राथमिक विद्यालय , यहां के छात्र दो किमी दूर दूसरे ग्राम पंचायत में जाकर पढ़ने को हैं मजबूर , बोले बीएसए : मामला संज्ञान मे नहीं , कराएंगे जांच

आजमगढ़ : एक ऐसी ग्राम पंचायत जहां नही है प्राथमिक विद्यालय , यहां के छात्र दो किमी दूर दूसरे ग्राम पंचायत में जाकर पढ़ने को हैं मजबूर , बोले बीएसए : मामला संज्ञान मे नहीं , कराएंगे जांच