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Thursday, September 10, 2026

वित्तविहीन शिक्षक बनेंगे प्रधानाचार्य, सरकारी बाहर, भर्ती से हजारों एलटी प्रशिक्षित शिक्षकों को बाहर करने से नाराजगी, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने पैदा की अजीब स्थिति

वित्तविहीन शिक्षक बनेंगे प्रधानाचार्य, सरकारी बाहर, भर्ती से हजारों एलटी प्रशिक्षित शिक्षकों को बाहर करने से नाराजगी, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने पैदा की अजीब स्थिति

केवल बीएड अभ्यर्थियों को मान्य किए जाने का विरोध कर रहे कार्यरत शिक्षक

तीन सितंबर को जारी आदेश में बीएड अनिवार्य और पीजी में 50% का प्रावधान


प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने अजीब स्थिति पैदा कर दी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने एक तरफ वित्तविहीन स्कूल के शिक्षकों को इन पदों पर भर्ती के लिए मान्य कर लिया है तो वहीं एडेड कॉलेजों में सालों से पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। 2013 के बाद प्रधानाध्यापक के 1172 और प्रधानाचार्य के 1475 पदों पर अब शुरू होने जा रही भर्ती में तीन सितंबर के शासनादेश के जरिए बीएड अनिवार्य किए जाने के कारण गैर-बीएड वाले शिक्षकों को अयोग्य कर दिया है।


इससे एलटी प्रशिक्षित, कला, व्यायाम और संगीत आदि विषयों के शिक्षक आवेदन नहीं कर सकेंगे। पूर्व में विभागीय कायदे-कानून के तहत इनकी नियुक्ति हुई थी, लेकिन अब इन्हें एक झटके में बाहर कर दिया गया है। इसे लेकर इन शिक्षकों में खासी नाराजगी है। इसके अलावा परास्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता का भी विरोध हो रहा है। 


शिक्षकों का तर्क है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 12 नवंबर 2014 की अधिसूचना में पूर्वप्राथमिक, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन के लिए शिक्षकों के विभिन्न स्तर की अहर्ताओं में प्रतिशत (45% या 50%) की अनिवार्यता का निर्देश दिया गया है। हालांकि संस्था प्रधान (प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापकों) के पदों के अर्हता में स्नातकोत्तर में 50% अंक के अनिवार्यता का कोई निर्देश नहीं है।


 देश और प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों का पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के मानक स्तर में भिन्नता है तथा इन विश्वविद्यालयों में पिछले 25 से 30 वर्षों के समयांतराल में पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के मानक स्तर में भी परिवर्तन हो गया है, जिसके कारण इस प्रकार की शर्त उचित नहीं है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग संस्था प्रधान भर्ती का विज्ञापन जल्द जारी करने जा रहा है।


प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक भर्ती में शिक्षा स्नातक तक (बीएड) के साथ एलटी प्रशिक्षण को भी समकक्ष अर्हता के रूप में शामिल करना चाहिए। साथ ही स्नात्तकोत्तर में 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता समाप्त होनी चाहिए। ये विसंगतियां दूर नहीं हुईं तो उच्च न्यायालय में याचिकाएं होने की आशंका है, जिसके कारण संस्था प्रधान की चयन प्रक्रिया अनावश्यक रूप से बाधित हो सकती है। - लालमणि द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट।

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