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Wednesday, April 5, 2017

मिड-डे-मील में उपस्थिति के आधार पर 69 प्रतिशत बच्चों के लिए की गई थी मांग, 55 हजार से ज्यादा बच्चों को नहीं मिला थाली-गिलास



  बजट दिया गया सिर्फ 47 प्रतिशत के लिए

लखनऊ । सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को मिड-डे-मील खाने के लिए थाली-गिलास देने की योजना अधर में फंस गई। राजधानी में उपस्थिति के आधार पर करीब एक लाख 63 हजार 300 बच्चों के लिए माध्यान्ह भोजन प्राधिकरण से थाली-गिलास की मांग की गई थी। जिसमें सिर्फ एक लाख आठ हजार बच्चों के लिए ही बर्तन की व्यवस्था की गई। शेष 55,500 बच्चों के लिए अब तक थाली-गिलास का बजट ही नहीं दिया गया। लिहाजा बच्चे मिड-डे-मील खाने के लिए अपनी बारी कर इंतजार करने को मजबूर हैं।




परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों के साथ राजकीय, सहायता प्राप्त एवं मदरसा आदि में कक्षा एक आठ तक बच्चों को मिड-डे-मील दिए जाने की व्यवस्था है। राजधानी के 2029 विद्यालयों में पढ़ने वाले आठवीं तक के बच्चों को यह सुविधा दी जा रही है। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गरमागरम मिड-डे-मील व दूध दिए जाने की सुविधा को सुव्यवस्थित करने के लिए प्रत्येक छात्र-छात्राओं को एक अच्छी गुणवत्ता की स्टेनलेस स्टील की थाली व गिलास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। बीते 20 अक्टूबर को इस संबंध में सचिव बेसिक शिक्षा अजय कुमार सिंह ने डीएम व बीएसए को निर्देश जारी कर इसका वितरण सुनिश्चित कराने के लिए कहा था।



राजधानी में दो लाख 37 हजार बच्चों में से एक लाख आठ हजार बच्चों के लिए ही थाली-गिलास का बजट आया था। शेष बजट के लिए प्रस्ताव माध्यान्ह भोजन प्राधिकरण को भेजा गया था। लेकिन वहां से बजट नहीं आया है।  - प्रवीण मणि त्रिपाठी, बीएसए लखनऊ




प्रत्येक थाली-गिलास के लिए 113.30 रुपए के आधार पर बजट दिया गया। मिड-डे-मील कार्यालय के मुताबिक राजधानी में इसके वितरण की जिम्मेदारी दीवान एंड सन्स को दी गई। विभागीय जानकारी के मुताबिक लखनऊ के राजकीय, सहायता प्राप्त, परिषदीय एवं मदरसा आदि में दो लाख 37 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। लेकिन रोजाना उपस्थिति 69 प्रतिशत (एक लाख 63,000) ही रहती है। इसी आधार पर माध्यान्ह भोजन प्राधिकरण ने थाली-गिलास का प्रस्ताव मांगा था। इनमें से एक लाख आठ हजार छात्र-छात्राओं को थाली-गिलास दे दिया गया। लेकिन उपस्थिति के आधार पर शेष 55 हजार 500 बच्चे अब तक इसका इंतजार कर रहे।




नहीं दी गई बजट की दूसरी किश्त : बच्चों को थाली-गिलास मुहैया कराने के लिए पहले चरण का बजट दे दिया गया। लेकिन बजट की दूसरी किश्त आज तक नहीं जारी नहीं की गई। मिड-डे-मील के जिला समन्वयक आनंद गौढ़ के मुताबिकबच्चों की रोजना उपस्थिति 69 प्रतिशत रहती है। इसी आधार पर 1,63,300 बच्चों को थाली-गिलास उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। इनमें से एक लाख आठ हजार के लिए ही बजट आया था। जानकारों का कहना है चूंकि यह पूर्व सरकार की योजना थी, ऐसे में अब बजट मिलना मुश्किल है।

Wednesday, January 18, 2017

बच्चों की थाली व गिलास पर नहीं लगेगी सरकार की मुहर, मुख्य वित्त व लेखाधिकारी ने तीनों संस्थाओं को फरमान किया जारी, सभी बीएसए को भेजी गई सूचना

सरकार की तरफ से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को दिए जाने वाले थाली और गिलास के वितरण पर आचार संहिता के चलते रोक लगाई जा चुकी है। अब सरकार की मुहर पर भी रोक लगा दी गई है। मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी ने थाली और गिलास पर लगाई जा रही मुहर को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। प्रदेश के अलग अलग जिलों में बर्तन आपूर्ति करने वाली संस्थाओं को पत्र जारी किया गया है।

मध्याह्न् भोजन योजना में परिषदीय विद्यालयों के बच्चे जुगाड़ से खाना खाते थे। उनकी समस्या को देखते हुए सरकार की तरफ से उन्हें एक थाली और गिलास बर्तन का सेट उपलब्ध कराने की योजना चलाई गई। 113 रुपये 30 पैसे के सेट को वितरित करने के लिए शासन स्तर से मेसर्स पावरटेक इलेक्ट्रोइंफा प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ, मेसर्स अभिलाषा कामर्शियल प्राइवेट लिमिटेड नोएडा, मेसर्स दीवान एंड संस मुरादाबाद को अलग-अलग जिलों में बर्तन वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हरदोई में देखें तो तीन लाख 97 हजार 445 बच्चों को बर्तन सेट दिए जाने हैं। संस्थाओं की तरफ से समाजवादी योजना और मुख्यमंत्री का नाम की स्टैंप लगा कर जिलों को बर्तन भेजे जा रहे थे। आचार संहिता लगने के बाद बर्तनों के वितरण पर रोक तो लगा दी गई, लेकिन शासन स्तर से पूर्व में ही मिल चुकी हरी झंडी को देखते हुए संस्थाओं की तरफ से बर्तन तैयार किए जा रहे हैं। जिसमें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम लिखे स्टैंप लगाई जा रही है। प्रदेश में चल रहे चुनाव को देखते हुए इस स्टैंप को भी रोक दिया गया है। मुख्य वित्त व लेखाधिकारी अमित कुमार श्रीवास्तव ने तीनों संस्थाओं को फरमान जारी किया है। इसकी सूचना जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भी दी गई है।

Tuesday, January 10, 2017

बरेली : थाली पर सीएम तो कैसे खिलाएं खाना, नये बर्तन बांटे जाने पर भी आचार संहिता का उल्लंघन : बीएसए

बेसिक स्कूलों में मिड डे मील खाने को पिछले दिनों मुख्यमंत्री के फोटो लगे बर्तन बांटे गए थे। आचार संहिता की डर से अब शिक्षक इन बर्तनों में खाना खिलवाने से डर रहे हैं। बेसिक स्कूलों में दूध व फल वितरण शुरू होने के बाद बर्तन बंटवाए गए थे। सभी शिक्षकों को निर्देश दिया गया था कि बच्चे रोजाना इन बर्तनों में खाना खाएंगे। बर्तनों पर एक स्टिकर चिपका हुआ था। उस पर मुख्यमंत्री का फोटो व संदेश लिखा हुआ है। बच्चों से दूसरे बर्तन लाने को कहा जा रहा है। इस बारे में बात करने पर बीएसए चंदना राम इकबाल यादव ने कहा कि अधिकांश बर्तनों से तो स्टिकर छूट भी गये हैं। वैसे नये बर्तन बांटे जाने पर भी आचार संहिता का उल्लंघन होगा।

Monday, January 9, 2017

एटा : आचार संहिता में लटका स्कूलों में बर्तन वितरण, बीएसए ने सभी बीईओ को किया निर्देशित

आचार संहिता में लटका स्कूलों में बर्तन वितरण, बीएसए ने सभी बीईओ को किया निर्देशित

 

Saturday, December 31, 2016

बरेली : आपूर्तित बर्तनों (थाली-गिलास) के सम्बन्ध में बीएसए ने जारी किए निर्देश, निर्देश देखें

आपूर्तित बर्तनों (थाली-गिलास) के सम्बन्ध में बीएसए ने जारी किए निर्देश, निर्देश देखें

बरेली : बीएसए ने परिषदीय विद्यालयों में आपूर्तित बर्तनों को स्टॉक रजिस्टर में दर्ज कर विद्यालय में ही रखने एवं सेंपल टेस्टिंग आदि के सम्बन्ध में सभी बीईओ को दिए आवश्यक निर्देश, आदेश देखें

बरेली : बीएसए ने परिषदीय विद्यालयों में आपूर्तित बर्तनों को स्टॉक रजिस्टर में दर्ज कर विद्यालय में ही रखने एवं सेंपल टेस्टिंग आदि के सम्बन्ध में सभी बीईओ को दिए आवश्यक निर्देश, आदेश देखें