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Friday, February 20, 2026

अस्थाई शिक्षकों और कर्मियों की भर्ती में आरक्षण पर UGC की सख्ती, 45 दिन या अधिक समय के लिए अस्थाई पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों के पालन का ब्यौरा तलब

अस्थाई शिक्षकों और कर्मियों की भर्ती में आरक्षण पर UGC की सख्ती, 45 दिन या अधिक समय के लिए अस्थाई पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों के पालन का ब्यौरा तलब


लखनऊ । विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में अस्थाई पदों पर शिक्षकों व कर्मचारियों की हुई भर्ती में आरक्षण का हिसाब किताब लिया जाएगा। 45 दिन व उससे अधिक समय के लिए इन अस्थाई पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों से इसका ब्योरा तलब किया गया है। अब वर्ष 2023 से 2025 तक हुई भर्तियों की जांच होगी। 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह शिक्षकों और कर्मचारियों के अस्थाई पदों पर की जा रही भर्तियों में आरक्षण के नियमों का सख्ती से पालन करें। ओबीसी व एससी-एसटी श्रेणी के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दिया जाए। 45 दिन व उससे अधिक समय के लिए जितने भी अस्थाई पदों पर भर्ती हो रही है, उसमें आरक्षण के मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए।

Sunday, January 18, 2026

चार महीने में कालेजों-विश्वविद्यालयों में भरें टीचिंग और नान टीचिंग के सभी खाली पद – सुप्रीम कोर्ट

चार महीने में कालेजों-विश्वविद्यालयों में भरें टीचिंग और नान टीचिंग के सभी खाली पद – सुप्रीम कोर्ट

इसमें वंचित वर्ग, दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षित पदों को प्राथमिकता दी जाए

छात्र को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपरिहार्य प्रशासनिक विलंब के मामलों में भी उच्च शिक्षण संस्थानों को नीतिगत रूप से छात्रवृत्ति प्राप्तकर्ताओं को उनके पैसे के भुगतान या निपटान के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराना चाहिए। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि किसी भी छात्र को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाना चाहिए, छात्रावास से नहीं निकाला जाना चाहिए, कक्षाओं में भाग लेने से नहीं रोका जाना चाहिए या छात्रवृत्ति के वितरण में देरी के कारण उनकी मार्कशीट और डिग्री को रोककर नहीं रखा जाना चाहिए। ऐसी किसी भी संस्थागत नीति की सख्ती से जांच की जानी चाहिए।


नई दिल्ली: उच्च शिक्षण संस्थानों, कालेजों, विश्वविद्यालयों में खाली पड़े पदों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने तय समय में खाली पदों को भरने का आदेश देते हुए कहा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में खाली पड़े सभी शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक पदों को चार महीने में भरा जाए। 


साथ ही यह भी कहा कि कुलपति और रजिस्ट्रार जैसे प्रशासनिक पदों को रिक्त होने के एक महीने के भीतर भरा जाए। यह आदेश गुरुवार को न्यायमूर्ति जेबी पार्डीवाला और आर महादेवन की पीठ ने उच्च शिक्षण संस्थाओं के छात्रों द्वारा आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं से संबंधित मामले में दिए। कोर्ट ने कहा कि सरकारी और निजी विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि फैकल्टी (संकाय) के सभी रिक्त पदों (शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक दोनों) को चार महीने की अवधि में भरा जाए। इसमें वंचित वर्ग के लोगों और कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित पदों को प्राथमिकता दी जाए, जिसमें दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित पद भी शामिल हैं।


शीर्ष अदालत ने कहा कि फैकल्टी भर्ती के लिए विशेष भर्ती अभियान आयोजित किए जा सकते हैं जो केंद्र और राज्यों के नियमों के अनुसार विभिन्न प्रकार के आरक्षण के अंतर्गत आते हैं। कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य महत्वपूर्ण संस्थागत प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति और रिक्तियों को चार महीने के भीतर किया जाना चाहिए। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों में सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के लिए इन पदों को रिक्त होने की तिथि से एक महीने के भीतर भरा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि चूंकि सेवानिवृत्ति की तिथि पहले से पता होती है इसलिए, भर्ती प्रक्रिया काफी पहले शुरू हो जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ऐसे पद एक महीने से ज्यादा समय तक रिक्त न रहें। 


कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी उच्च शिक्षण संस्थान केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों को सालाना रिपोर्ट देंगे, जिसमें यह बताया जाएगा कि कितने आरक्षित पद रिक्त हैं, कितने भरे गए, न भरने के कारण और कितना समय लगा। कोर्ट ने छात्रवृत्तियों के भुगतान में देरी और कई बार छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोकने आदि की घटनाओं पर भी संज्ञान लिया है। आदेश दिया कि सभी लंबित छात्रवृत्तियों का बकाया भुगतान संबंधित केंद्रीय और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा चार माह के भीतर किया जाए। 

Friday, April 18, 2025

प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों एवं शिक्षा निदेशालय प्रयागराज / लखनऊ में आउटसोर्स कर्मियों की आवश्यकता अनुरूप मैनपावर उपलब्ध कराने के संबंध में


हाईस्कूलों के लिए एक चौकीदार और एक सफाई कर्मी सहित अधिकतम दो और इंटर कॉलेजों में एक चौकीदार / सफाई कर्मी सहित अधिकतम पांच आउटसोर्स पर्सन होंगे भर्ती 


GIC में आउटसोर्स पर भर्ती होंगे कार्मिक, 14,651₹ मानदेय, देखें जारी शासनादेश 


राजकीय हाईस्कूलों के लिए दो एवं इंटर कालेजों में पांच कर्मी अनुमन्य

अर्हता 10वीं पास, कार्मिक की तैनाती के लिए समिति तय करेगी एजेंसी


प्रयागराजः अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालयों के बाद अब राजकीय हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट कालेजों तथा शिक्षा निदेशालय प्रयागराज/लखनऊ में आउटसोर्स पर्सन/कार्मिक भर्ती किए जाएंगे। इसके लिए जेम पोर्टल के माध्यम से मंडलीय समिति सेवा प्रदाता (एजेंसी) का चयन करेगी। यह एजेंसी आउटसोर्स पर्सन/कार्मिकों का चयन करेगी। इनके लिए 14,651 रुपये महीना मानदेय निर्धारित किया गया है।

विशेष सचिव शासन उमेश चन्द्र द्वारा जारी पत्र के अनुसार प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों एवं शिक्षा निदेशालय प्रयागराज/लखनऊ में आउटसोर्स व्यक्ति (पर्सन) की आवश्यकता के दृष्टिगत कार्मिक उपलब्ध कराए जाने का अनुरोध किया गया था। इस संबंध में शासन ने निर्णय लिया है कि हाईस्कूल के लिए एक चौकीदार/सफाई कर्मी सहित अधिकतम दो आउटसोर्स पर्सन/कार्मिक तैनात किए जाएंगे। 

इंटरमीडिएट कालेजों के लिए एक चौकीदार सफाई कर्मी सहित अधिकतम पांच कार्मिक अनुमन्य किए गए हैं। इसके लिए अर्हता कक्षा 10 पास है। साइकिल चलाने का अनुभव रखने वाले को वरीयता मिलेगी। आयुसीमा न्यूनतम 18 वर्ष तथा अधिकतम 40 वर्ष तय की गई है। अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि चयन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।


मानदेय में ईपीएफ व शुल्क भी शामिल : मानदेय में प्रतिमाह 10,275 रुपये पारिश्रमिक, 1,335.75 रुपये ईपीएफ, 333.93 रुपये ईएसआइसी, जीएसटी 2246.79 रुपये, सेवा शुल्क 459.87 रुपये शामिल है। इस तरह प्रति आउटसोर्स पर्सन पर 14,651.34 रुपये प्रतिमाह खर्च होंगे।


आउटसोर्स पर्सन की आवश्यकता का निर्धारण

आउटसोर्स कार्मिक का निर्धारण जिला स्तर पर गठित जनपदीय समिति करेगी। इसमें जेडी अध्यक्ष, डीआइओएस सदस्य/सचिव, जनपदीय वित्त एवं लेखाधिकारी व जीआइसी/जीजीआइसी के वरिष्ठ प्रधानाचार्य सदस्य होंगे। आवश्यकतानुरूप प्रधानाचार्य कार्मिक की मांग कर सकेंगे। कार्मिक की  आवश्यकता तथा एजेंसी के चयन का अनुमोदन माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति करेगी। निदेशालय प्रयागराज में 44 तथा लखनऊ में 21 आउटसोर्स पर्सन की आवश्यकता है। 


कार्य व कार्य के लिए अवधि संतोषजनक सेवा पर पुनः रखे जा सकेंगे

सेवा प्रदाता के माध्यम से तैनात आउटसोर्स पर्सन को अधिकतम 11 माह के लिए रखा जाएगा। प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक के निर्देशानुसार सभी कार्मिकों को चौकीदार, साफ-सफाई, कार्यालय अभिलेखों का रखरखाव, प्रयोगशालाओं का कार्य,पुस्तकालय, विद्यालय साज-सज्जा, सुरक्षा एवं अन्य विद्यालयीय गतिविधियों से संबंधित कार्य सौंपे जाएंगे। आवश्यकता तथा संतोषजनक सेवा पर पुनः आगामी शैक्षिक सत्र के लिए प्रधानाचार्य की सहमति से रखे जा सकेंगे।




प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों एवं शिक्षा निदेशालय प्रयागराज / लखनऊ में आउटसोर्स कर्मियों की आवश्यकता अनुरूप मैनपावर उपलब्ध कराने के संबंध में

Saturday, March 2, 2024

नई संविदा भर्ती में याची के लंबे अनुभव का ख्याल रखने की हिदायत के साथ हाईकोर्ट ने संविदा रद्द किए जाने के खिलाफ याचिका की खारिज, देखें कोर्ट ऑर्डर

नई संविदा भर्ती में याची के लंबे अनुभव का ख्याल रखने की हिदायत के साथ हाईकोर्ट ने संविदा रद्द किए जाने के खिलाफ याचिका की खारिज, देखें कोर्ट ऑर्डर 


नई संविदा भर्ती में याची के लंबे अनुभव का रखें ख्याल : हाईकोर्ट

जिला समन्वयक (बालिका शिक्षा) की संविदा रद्द करने का मामला


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी की संविदाकर्मी की संविदा रद्द किए जाने के खिलाफ दायर की गई याचिका निस्तारित करते हुए कहा है कि नई संविदा भर्ती में कानून के दायरे के तहत याची महिला के लंबे अनुभव का ध्यान रखा जाय। यह फैसला न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की कोर्ट ने  सुनाया। याची नाओ से रद्द करने का मामला अधिवक्ता योगेश मिश्र ने पक्ष रखा।

मामले में याची महिला दुर्गावती सिंह 23 वर्षों से कस्तूरबा गांधी विद्यालय, वाराणसी में संविदा पर जिला समन्वयक के पद पर कार्यरत थीं। इस दौरान याची महिला पर लगाए गए कई आरोपों की जांच के बाद बीएसए ने 4 अगस्त 2023 को पत्र जारी कर उनकी संविदा रद्द कर दी। इसके विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा कि याची नई संविदा भर्ती में शामिल होने के लिए स्वतंत्र है।


देखें कोर्ट ऑर्डर

Wednesday, September 27, 2023

पदों के घालमेल से घट रहे राजकीय पुरुष शिक्षकों के पद

पदों के घालमेल से घट रहे राजकीय पुरुष शिक्षकों के पद

प्रयागराज : सभी विभागों के रिक्त पदों को भरने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के पुरुष संवर्ग के शिक्षक पदों पर घालमेल से असमंजस है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में भर्ती व्यवस्था से लेकर पदोन्नति एवं निदेशालय में पटल निर्धारण पुरुष और महिला संवर्ग के लिए अलग-अलग है। इसके विपरीत पुरुष संवर्ग के विद्यालयों में महिलाओं की तैनाती किए जाने से स्वीकृत पद तो भरे दिखते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि वह पद पुरुष संवर्ग के हैं। ऐसे में पुरुष संवर्ग के विद्यालयों में पुरुष शिक्षकों की तैनाती की जाए, जिससे पद रिक्त दिखें और उन पर पुरुषों को नियुक्ति मिल सके। इसी तरह कुछ और समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर राजकीय शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।


भेजे पत्र में राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय एवं महामंत्री सत्यशंकर मिश्र ने संयुक्त रूप से बताया है कि प्रदेश के लगभग सभी जनपद मुख्यालयों के पुरुष संवर्ग के राजकीय विद्यालयों में काफी संख्या में महिला संवर्ग की शिक्षकाएं कार्यरत हैं, जबकि बालिका विद्यालयों में पद रिक्त पड़े हैं। पुरुष विद्यालयों में महिलाओं की तैनाती से पुरुषों के सृजित पद घट रहे हैं। इसे स्पष्ट कर लिखा है कि जब विभाग रिक्ति की सूचना सौंपता है तो पुरुष संवर्ग के विद्यालयों में महिलाओं के होने के कारण पद भरे दिखाए जाते हैं, जबकि वह पद पुरुषों के हैं और उसे रिक्त दिखाया जाना चाहिए। आरोप लगाया है कि यह स्थिति अधिकारियों के अदूरदर्शी निर्णय से उत्पन्न हुई है। इसके अलावा 10 विषयों में एलटी से प्रवक्ता की पदोन्नति करीब 14 वर्ष से नहीं हुई है। इसके विपरीत 21 मई को हुई डीपीसी में पदोन्नत शिक्षकों की पदस्थापना टुकड़ों - टुकड़ों में की जा रही है। उसमें भी शिक्षक जो विकल्प भर कर देते हैं, उसके विपरीत दूर जिले में मनमाने तरीके से विद्यालय आवंटन कर दिया जाता है। वरिष्ठता का निर्धारण भी समय से नहीं किया जा रहा। वर्ष 2000 से अद्यतन एलटी ग्रेड (स्नातक वेतनक्रम) के शिक्षकों की अंतिम ज्येष्ठता सूची जारी नहीं की गई है।

Saturday, April 8, 2023

स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद समयबद्ध तरीके से भरें, केंद्र सरकार ने दी राज्यों को सलाह

स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद समयबद्ध तरीके से भरें,  केंद्र सरकार ने दी राज्यों को सलाह 

देशभर में 9.8 लाख से अधिक पद खाली, केन्द्र सरकार की पद भरने की समझाइश


केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि स्कूलों में खाली पड़े शिक्षकों के पदों को समयबद्ध तरीके से भरा जाए। केंद्र सरकार चाहती है कि नई शिक्षा नीति के तहत राज्य छात्र-शिक्षक के 30 : 1 अनुपात के आधार पर नियुक्तियां करें। इस संबंध में केंद्र की ओर से राज्य सरकारों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।


समिति ने जारी की थी रिपोर्ट 
हाल ही में संसद की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट से पता चला था कि विभिन्न राज्यों में शिक्षकों के 62 लाख से अधिक स्वीकृत पदों में से 9.8 लाख से ज्यादा पद सरकारी स्कूलों में खाली हैं।


संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट से पता चला कि प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 8 तक) में 7.4 लाख से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं। जबकि, माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 और 10) में लगभग 1.6 लाख और उच्च माध्यमिक स्तर पर 92,000 से अधिक पद खाली हैं।


केवी के लिए स्थायी भवन उपलब्ध कराने की सलाह

केंद्र की ओर से राज्यों को सलाह दी गई है कि किराए की जगह पर चल रहे 258 केंद्रीय विद्यालयों (केवी) के लिए जल्द भूमि उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इन स्कूलों को स्थायी भवन उपलब्ध हो सके। कुछ राज्यों की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का हवाला देते हुए राज्य स्तर पर इस व्यवस्था को दुरुस्त करने का परामर्श भी दिया गया है।


पीएम श्री स्कूल योजना में शामिल न होने पर सवाल

इसके अलावा पीएम श्री स्कूल योजना में भागीदारी नहीं करने को लेकर कुछ राज्यों की भूमिका पर भी सवाल उठाया गया है। बिहार, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, ओडिशा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ने इस योजना को शुरू नहीं किया है। इस योजना के तहत कुल 27,360 करोड़ रुपए की लागत से 14,500 स्कूलों को पांच साल की अवधि में अपग्रेड किया जाएगा। यह योजना केंद्र और राज्य की भागीदारी पर आधारित है।


बिहार में 1.87 लाख, यूपी में एक लाख से ज्यादा पद रिक्त

वर्ष 2022 की स्थिति का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार में 1.87 लाख और उत्तर प्रदेश में एक लाख से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा झारखंड में करीब 77 हजार, पश्चिम बंगाल में 55,000, मध्य प्रदेश मे करीब 69,000 पद और छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के 38,692 पद रिक्त हैं। विभिन्न राज्य सरकारों ने सूचना दी है कि उनके यहां भर्तियां चरणबद्ध तरीके से चल रही हैं। सेवानिवृत्ति की वजह से भी पद रिक्त होते रहते हैं।