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Saturday, February 28, 2026

सूबे में बनेंगे 76 हजार आंगबाड़ी केंद्र के नए भवन, सुविधाओं से होंगे लैस

सूबे में बनेंगे 76 हजार आंगबाड़ी केंद्र के नए भवन, सुविधाओं से होंगे लैस

सीएम ने दिए निर्देश- 1.89 लाख केंद्रों का हो रहा संचालन, 76 हजार केंद्रों के पास अपना भवन नहीं


लखनऊ। प्रदेश के हर एक आंगनबाड़ी केंद्र का स्वयं का भवन होगा। इसके लिए 76 हजार नये भवनों का निर्माण कराया जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं। जल्द से जल्द कार्य योजाना तैयार करने को कहा है। खुद के भवनों में आंगनबाडी केंद्रों का संचालन होने से तमाम सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी।


प्रदेश में 1.89 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनमें से लगभग 76 हजार केंद्र अभी अपने भवनों के बिना चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन से छह वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र प्री-प्राइमरी शिक्षा का आधार हैं, इसलिए सुरक्षित, आकर्षक और बाल-मित्र वातावरण सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है।

भवन निर्माण के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) से सहयोग लेने के निर्देश दिए गए हैं। अगर और जरूरत पड़ेगी तो राज्य सरकार द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रस्तावित भवनों में पेयजल, विद्युत व्यवस्था, बाल-मित्र शौचालय, किचन शेड, खेल क्षेत्र, लो-हाइट वॉश यूनिट, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण कक्ष, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और पोषण वाटिका जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी।


ये दिए सुझाव : मुख्यमंत्री ने कहा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल अपनाया जाए। एक मानक डिजाइन तैयार की जाए। जहां संभव हो, प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में ही आंगनबाड़ी भवन बनाया जाए। जिससे ताकि शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।

Saturday, August 23, 2025

राज्य सरकार ने अदालत में दी जानकारी, यूपी में 7630 स्कूल भवनों की हालत जर्जर

राज्य सरकार ने अदालत में दी जानकारी, यूपी में 7630 स्कूल भवनों की हालत जर्जर


लखनऊ। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर चल रहे एक मामले की सुनवायी के दौरान, हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि 1 अप्रैल 2024 से 31 जुलाई 2025 तक 7630 ऐसी स्कूली इमारतें मिली हैं जो जर्जर अवस्था में थीं तथा ऐसी इमारतों के जर्जर हिस्सों को ध्वस्त करा दिया गया है। 


न्यायालय ने इस मामले में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सुस्ती पर नाखुशी जताते हुए कहा कि इस मामले को देखने की जिम्मेदारी उसकी थी लेकिन वह अपना दायित्व गम्भीरता से नहीं निभा रही है। न्यायालय ने अगली सुनवायी के लिए 22 सितम्बर की तिथि नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर व न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने गोमती रिवर बैंक रेजीडेंट्स की ओर से वर्ष 2020 में दाखिल की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है। 


उक्त याचिका में शहर के आवासीय क्षेत्रों में चल रहे स्कूलों का मुद्दा खास तौर पर उठाया गया है। सुनवायी के दौरान न्यायालय ने अविनाश मेहरोत्रा मामले में शीर्ष अदालत द्वारा वर्ष 2009 में दिए गए दिशानिर्देशों को लागू करने पर जोर दिया है। न्यायालय के पूर्व के आदेश के अनुपालन में कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुयी, माध्यमिक शिक्षा की महानिदेशक ने बताया कि शिक्षा विभाग के तमाम अधिकारी स्कूलों में अपनाए गए सुरक्षा मानकों की जांच कर रहे हैं।

Wednesday, August 6, 2025

मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी के बाद हरकत में आया बेसिक शिक्षा विभाग, स्कूलों के जर्जर भवनों के विरुद्ध अभियान तेज

मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी के बाद हरकत में आया बेसिक शिक्षा विभाग,  स्कूलों के जर्जर भवनों के विरुद्ध अभियान तेज

किसी भवन के गिरने की सूचना पर संबंधित अफसर पर कार्रवाई की जाएगी

बच्चों की सुरक्षा पर दिया गया ध्यान


लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त चेतावनी के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय विद्यालयों के जर्जर भवनों का चिह्नांकन, सत्यापन, मूल्यांकन और ध्वस्तीकरण का अभियान तेज कर दिया है। बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए विभाग ने सभी जिलों को निर्देशित किया है कि वे जर्जर ढांचों को लेकर 'सुरक्षा, जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई पर ध्यान केन्द्रित करें।

इस संबंध में शासन ने भी स्पष्ट कर दिया गया है कि बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि किसी जर्जर भवन के गिरने या किसी प्रकार की दुर्घटना की सूचना मिलती है, तो संबंधित अधिकारी को सीधे उत्तरदायी मानते हुए उसके विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। 
विभिन्न जिलों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर जर्जर भवनों की स्थिति को देखते हुए प्रत्येक जिले में जर्जर ढाँचों का तत्काल चिह्नांकन कर तकनीकी समिति को सत्यापन एवं मूल्यांकन के लिए सूची सौंपी जाएगी। यह कार्य समयबद्धता के साथ सुनिश्चित कराना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी। पूर्व में चिह्नित ढांचों के भी आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।

लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी

बेसिक शिक्षा विभाग की निर्माण युनिट के विशेषज्ञ श्यामकिशोर तिवारी के अनुसारकई विद्यालय परिसरों में अब भी ऐसे ढांचे मौजूद हैं जो अत्यंत जर्जर हो चुके हैं। शासन के निर्देश का पालन करते हुए जर्जर ढांचे चिह्नित किए जाएं वरना सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छतों की सफाई, जल निकासी के निर्देश

विद्यालय भवनों की छतों पर जलजमाव, पत्तों और कचरे के कारण सीलन की समस्या उत्पन्न होती है, जिससे भवन क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे में पंचायत के माध्यम से छतों की नियमित साफ सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।



नए सिरे से सर्वे कर सरकार जर्जर परिषदीय स्कूल भवनों की करेगी पहचान

 लखनऊ: जर्जर स्कूल भवनों के कायाकल्प के बारे में महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने बताया कि बरसात के बाद संबंधित विद्यालयों की मरम्मत और नए सिरे से निर्माण के कार्य को तेजी से शुरू किया जाएगा ताकि सभी कार्य अगले वर्ष मार्च तक पूरे हो जाएं। नए सिरे से सर्वे कर और भी जर्जर स्कूल भवनों की पहचान की जा रही है ताकि कोई जीर्ण-शीर्ण भवन छूट न जाए। 


जिन भवनों को तकनीकी समिति द्वारा जर्जर घोषित कर दिया जाता है उसमें किसी भी तरह की शैक्षणिक गतिविधि नहीं हो सकती। बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक कक्ष, पंचायत भवन, ग्राम सचिवालय जैसे सुरक्षित स्थानों पर व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में लगभग 1.32 लाख परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। पिछले पांच वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग ने 8,128 विद्यालयों की मरम्मत और पुनर्निर्माण  कराया है।
 

बाढ़ से प्रति वर्ष ढह जाते हैं आठ से 10 स्कूल

प्रदेश के बाढ़ग्रस्त इलाकों में प्रति वर्ष आठ से 10 स्कूल ढह जाते हैं। इस बार भी बलिया जिले के कई विद्यालयों को नुकसान पहुंचा है। बारिश के मौसम में छतों पर पानी भरने, पत्ते जमने और जलनिकासी की कमी से भवनों में सीलन व क्षरण की समस्या बढ़ जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए नगर व ग्राम पंचायतों को स्कूलों में नियमित सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। जो भवन पूरी तरह से अनुपयोगी हैं, उन्हें 'निष्प्रयोज्य' घोषित कर सील करने के निर्देश दिए गए हैं।


बारिश ने रोकी स्कूलों के सर्वे की प्रक्रिया

प्रदेश में हो रही लगातार बारिश ने परिषदीय स्कूलों के पुनर्गठन की योजना पर रोक लगा दी है। कई जिलों में विद्यालयों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे खंड शिक्षा अधिकारी तय समय पर विद्यालयों का भौतिक सत्यापन नहीं करा पा रहे हैं। स्कूलों के विलय और विलग होने की प्रक्रिया इस वजह से बाधित हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने पूरे प्रदेश में 10,684 परिषदीय विद्यालयों का अन्य विद्यालयों में विलय किया है।





जिलाधिकारी व बीएसए जाकर देखें स्कूलों के हालात,  सीएम योगी ने कहा,  स्कूलों में न हो जर्जर भवन और गंदगी, बुनियादी सुविधाओं को करें पूरा


लखनऊ। प्रदेश में परिषदीय स्कूलों के भवनों और सुविधाओं की बदहाली पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्ती करते हुए सभी डीएम और बीएसए को स्कूलों के भवनों का भौतिक सत्यापन कर व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने दोनों अधिकारियों को मौके पर जाकर स्कूलों के हालात देखने को भी कहा है।


राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल का भवन गिरने से हुई बच्चों की मौत के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों को स्कूलों की सुरक्षा व सुविधाओं का ऑडिट करने का निर्देश दिया था। इसके मद्देनजर स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान चलाया था। मुख्यमंत्री ने सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक में डीएम और बीएसए को मौके पर जाकर स्कूलों के हालात देखने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के परिषदीय स्कूलों की स्थिति की सघन समीक्षा कराने के साथ ही विद्यालयों के जर्जर भवनों को तत्काल दुरुस्त कराने, सफाई और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।

Monday, March 17, 2025

यूपी में 9,448 आंगनबाड़ी केंद्रों का जल्द पूरा होगा निर्माण

यूपी में 9,448 आंगनबाड़ी केंद्रों का जल्द पूरा होगा निर्माण


लखनऊ : प्रदेश में 9,448 आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जा रहे हैं जिनका निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा। बच्चों को बेहतर पोषाहार उपलब्ध कराने के साथ गुणवत्तापरक शिक्षा देने के लिए हर ग्राम पंचायत में एक आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। बीते आठ वर्षों में राज्य सरकार 19 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कर चुकी है।


वर्ष 2024-25 में 3,020 ग्राम पंचायतों में इनका निर्माण कराया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के खेलने की सुविधाएं, शौचालय व शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्र को एक समग्र विकास केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।


Sunday, April 28, 2024

वर्षों बाद बदलेगी बेसिक शिक्षा परिषद के मुख्यालय की सूरत, रंगाई, पुताई और मरम्मत का कार्य शुरू

वर्षों बाद बदलेगी बेसिक शिक्षा परिषद के मुख्यालय की सूरत, रंगाई, पुताई और मरम्मत का कार्य शुरू


प्रयागराज। धूल, गंदगी और सीलनभरी दीवारों से बेसिक शिक्षा परिषद के मुख्यालय को अब मुक्ति मिलने वाली है। पिछले कई दिनों से परिषद भवन की रंगाई, पुताई और मरम्मत का कार्य चल रहा है। साथ ही सामने के पार्क का भी सौंदर्याकरण कराया जा रहा है।


प्रदेशभर के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों की व्यवस्था बेहतर करने के लिए 1972 में बेसिक शिक्षा परिषद का गठन किया गया था। शिक्षा निदेशालय प्रयागराज के परिसर में इसका भवन बनाया गया। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों से देखरेख के अभाव में भवन जर्जर हो गया था। दीवारों में सीलन और छत टपकती थी। 2006 के बाद पुताई और मरम्मत का कार्य नहीं हुआ था। 


2020 में प्रताप सिंह बघेल को सचिव बनाया गया। कार्यभार ग्रहण करने के बाद वह प्रयागराज के बजाय लखनऊ में बैठते थे। उनके यहां न बैठने से अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी नहीं बैठते थे।

इसलिए कार्यालय उपेक्षित था। पिछले महीने सचिव का अतिरिक्त कार्यभार अपर निदेशक माध्यमिक सुरेंद्र तिवारी को सौंपा गया। कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने परिषद भवन के रंगाई, पुताई और मरम्मत का कार्य शुरू कराया। उन्होंने बताया कि इसके लिए अतिरिक्त बजट नहीं लिया गया। भवन मरम्मत के लिए आने वाले वार्षिक बजट से यह कार्य कराया जा रहा है। अगले महीने मरम्मत का काम पूरा हो जाएगा।

Tuesday, August 8, 2023

75 साल से कम अवधि वाले स्कूलों को भी अब मिलेगा प्रोजेक्ट अलंकार के अंतर्गत मौका

75 साल से कम अवधि वाले स्कूलों को भी अब मिलेगा प्रोजेक्ट अलंकार के अंतर्गत मौका

प्रोजेक्ट अलंकार : जिला स्तरीय समिति कर सकती है ऐसे जर्जर स्कूलों की संस्तुति

लखनऊ। प्रोजेक्ट अलंकार को लेकर सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों की कम रुचि को देखते हुए शासन ने 75 साल की अवधि से कम वाले जर्जर स्कूलों को भी योजना में शामिल करने का फैसला किया है। गौरतलब है कि रजिस्ट्रेशन कराने वाले 1035 विद्यालयों में से 284 ने अपने आवेदन सब्मिट किए, जिसमें से मात्र 238 ने ही 25 फीसदी राशि देने पर सहमति दी है।


योजना के लिए शासन ने 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें 75 साल पुराने जर्जर एडेड विद्यालयों की मरम्मत, पुनरोद्धार, पुनर्निर्माण, अवस्थापना सुविधाओं के लिए आवेदन मांगे गए हैं। जिला स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद निर्माण आदि में आने वाले खर्च का 75 फीसदी पैसा शासन और 25 फीसदी प्रबंधन को देना होता है। चूंकि योजना में विद्यालयों के आवेदन की संख्या कम होने पर शासन ने इसका दायरा बढ़ा दिया है।


47 विद्यालय ही 75 साल या अधिक वाले

माध्यमिक शिक्षा विभाग को मिले अब तक के आवेदन में मात्र 47 विद्यालय ही 75 साल या उससे अधिक की अवधि वाले हैं। इन्होंने 25 फीसदी राशि देने की सहमति दी है। इसे देखते हुए विभाग ने पूर्व में आए आवेदनों के विधिवत परीक्षण कर जिला स्तरीय समिति की संस्तुति के साथ प्रस्ताव 10 अगस्त तक उपलब्ध कराने को कहा है।


माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने कहा कि आवेदन कम होने का एक कारण 75 साल की अवधि वाले विद्यालयों का ही चयन भी है। इसके लिए निधार्रित अंतिम तारीख 20 जुलाई को बढ़ाकर 14 अगस्त तक किया गया है। इसके साथ ही डीआईओएस से कहा गया है कि 75 साल से कम अवधि वाले जर्जर स्कूलों के चयन के निर्देश दिए गए हैं।