10 साल में नहीं बढ़ी ₹4 की फल मद, बढ़ती महंगाई के बीच स्कूलों में पोषण व्यवस्था पर उठे सवाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को सप्ताह में एक दिन ताजा एवं मौसमी फल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2016 में जारी शासनादेश के अनुसार प्रति छात्र ₹4 की अनुमानित लागत निर्धारित की गई थी। शासनादेश में स्पष्ट किया गया था कि प्रत्येक सोमवार को विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसमी फल मॉर्निंग स्नैक के रूप में वितरित किए जाएंगे, जिससे उन्हें अतिरिक्त पोषण मिल सके।
दिलचस्प तथ्य यह है कि वर्ष 2016 से लेकर आज तक फल वितरण के लिए निर्धारित इस ₹4 प्रति छात्र की राशि में किसी संशोधन का उल्लेख नहीं मिलता। जबकि इसी अवधि में फलों सहित लगभग सभी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में शिक्षकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्तमान बाजार दरों में ₹4 में गुणवत्तापूर्ण मौसमी फल उपलब्ध कराना बेहद कठिन हो गया है।
वर्ष 2016 में शुरू की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना था और इसके लिए राज्य सरकार ने अलग से बजटीय प्रावधान भी किया था। अब दस वर्ष बाद सवाल यह उठ रहा है कि जब महंगाई लगातार बढ़ी है, तब फल वितरण की प्रति छात्र लागत का पुनर्निर्धारण क्यों नहीं हुआ। शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का मूल उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराना है, तो वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप फल मद की राशि की समीक्षा और संशोधन किया जाना समय की आवश्यकता है।
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