DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label रसोईया. Show all posts
Showing posts with label रसोईया. Show all posts

Monday, September 16, 2024

आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील रसोईया को सम्मानजनक मानदेय के लिए संगठनों ने बनाई रणनीति, मांग को लेकर 26 नवंबर को रैली

आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील रसोईया को सम्मानजनक मानदेय के लिए संगठनों ने बनाई रणनीति, मांग को लेकर 26 नवंबर को रैली 


लखनऊ। आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील सहित सभी स्कीम वर्कर्स को सम्मानजनक मानदेय देने, 5000 पेंशन व ग्रेच्युटी, रसोइयों को न्यूनतम वेतन देने और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ग्रेच्युटी देने के हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने करने की मांग की गई है।


मांग को लेकर 26 नवंबर को रैली निकाली जाएगी। श्रम विभाग के हॉल में आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील कर्मियों की यूनियनों की रविवार को हुई संयुक्त बैठक में यह निर्णय लिया गया। 


एटक की उषा शर्मा ने कहा कि सरकार का तर्क है कि आंगनबाड़ी, आशा, रसोइया, शिक्षामित्र और रोजगार सेवक जैसी स्कीम वर्करों को सम्मानजनक मानदेय देने के लिए संसाधन नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कॉरपोरेट घरानों की संपत्ति पर समुचित टैक्स लगाए तो सम्मानजनक मानदेय व पेंशन दी जा सकती है। संवाद

Wednesday, July 31, 2024

उत्तर प्रदेश विधानसभा में शिक्षामित्रों और रसोइयों आदि के मानदेय बढ़ाने की मांग पर सरकार का जवाब - मानदेय बढ़ाने पर नहीं हो रहा है विचार

उत्तर प्रदेश विधानसभा में शिक्षामित्रों और रसोइयों आदि के मानदेय बढ़ाने की मांग पर सरकार का जवाब - मानदेय बढ़ाने पर नहीं हो रहा है विचार

यूपी : शिक्षामित्रों की तुलना पशुओं से करने पर हंगामा, सरकार ने दिया जवाब- मानदेय बढ़ाने पर नहीं हो रहा है विचार

सीएम योगी बोले: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोइया, सहायिका की आय पर फोकस, बेसिक शिक्षा मंत्री बोले- नहीं बढ़ेगा रसोइयों का मानदेय

मदरसा शिक्षकों का समायोजन करने पर सरकार नहीं कर रही विचार

परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की डिजिटल अटेंडेंस, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने और मदरसा शिक्षकों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया

Shikshamitras in UP: विधानसभा में मंगलवार को शिक्षामित्रों के मानदेय का मुद्दा उठा। इन्हीं बातों के बीच शिक्षामित्रों की तुलना पशुओं से करने पर हंगामा हो गया। 
 

सपा सदस्य समरपाल सिंह विधानसभा में शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने को लेकर पूछे गए सवाल के दौरान एक मंत्री के घर का किस्सा सुनाने लगे। उन्होंने कहा कि एक मंत्री के घर पर गया तो नौकर कुत्ते को सहला रहा था। मैंने पूछा कि इस पर कितना खर्च आता है तो उसने 20 हजार रुपये महीना बताया। सरकार शिक्षामित्रों को केवल 10 हजार रुपये दे रही है। इससे उनका भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी। 


इसके जवाब में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि सपा सदस्य ने शिक्षामित्रों की तुलना पशुओं से की, जिसकी मैं निंदा करता हूं। इनकी सरकार में शिक्षा मित्रों को महज 3500 रुपये मिलते थे। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें शिक्षक नहीं माना तो शिक्षामित्रों के रूप में समायोजित किया गया। हमने मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया। फिलहाल मानदेय बढ़ाने पर कोई विचार नहीं हो रहा है।


मदरसा शिक्षकों का समायोजन करने पर सरकार नहीं कर रही विचार
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओपी राजभर ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार 21 हजार मदरसा शिक्षकों को समायोजित करने पर विचार नहीं कर रही है। ऐसी कोई भी योजना प्रस्तावित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार में जब मदरसा आधुनिकीकरण योजना बंद हुई थी, तब आपने चिंता नहीं की। अल्पसंख्यकों के वोट तो चाहिए, लेकिन क्या उनके लिए कोई विश्वविद्यालय खोला था। उन्होंने सदन को बताया कि यह योजना वर्ष 2021-22 तक ही अनुमोदित थी। केंद्र सरकार ने जब अपना 60 फीसद अंश देना बंद कर दिया तो बजट के अभाव में राज्य सरकार को भी योजना को बंद करना पड़ा।


सपा ने उठाया शिक्षकों, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों का मामला
 विधान परिषद में मंगलवार को कार्य स्थगन प्रस्ताव के तहत सपा सदस्यों ने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की डिजिटल अटेंडेंस, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने और मदरसा शिक्षकों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया। सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने कहा कि बेसिक के शिक्षकों से पढ़ाई से इतर दर्जनों काम लिए जाते हैं। उनकी डिजिटल अटेंडेंस भी लेने का आदेश दिया गया है। इसे समाप्त करना जरूरी है। विभाग में कई एप लागू हैं जिनसे काफी कमीशन आता है। उन्होंने शिक्षकों को 15 सीएल, 15 हाफ सीएल, 30 ईएल, राज्य कर्मचारी का दर्जा व मेडिकल सुविधा देने की मांग की।

आशुतोष ने कहा कि शिक्षामित्र 10 हजार और अनुदेशक 9000 रुपये में अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेंगे। सपा एमएलसी डॉ. मानसिंह यादव ने कहा कि शिक्षामित्र अयोग्य हैं तो उनसे काम क्यों लिया जा रहा है। उन्हें समान कार्य का समान वेतन दिया जाए। 69000 शिक्षक भर्ती में ओबीसी, एससी-एसटी के हक पर डाका डाला गया है। 

नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने मदरसा शिक्षकों की खराब स्थिति, तदर्थ शिक्षकों को बर्खास्त करने, माध्यमिक में मान्यता एक सेक्शन की और प्रवेश 900 छात्रों का, चार विषय में फेल छात्रों को यूपी बोर्ड में ग्रेस देकर पास करने का मुद्दा उठाया। शिक्षा के गिरते स्तर पर उनके सवाल पर माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि इस पर विचार किया जाएगा।




 
सीएम योगी बोले: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोइया, सहायिका की आय पर फोकस, बेसिक शिक्षा मंत्री बोले- नहीं बढ़ेगा रसोइयों का मानदेय

लखनऊ । सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 तक सपा सरकार थी। तब रसोइयों का मानदेय 500 रुपए से भी कम था। आपने दूसरा अन्याय ये किया कि जिनके बच्चे नहीं पढ़ेंगे, उनको सेवा से हटा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोइयों और सहायिका की अन्य आय को बढ़ाने पर फोकस कर रही है। सपा सदस्य राजेंद्र प्रसाद चौधरी द्वारा इस बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में इससे पहले बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि इनका मानदेय बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई विचार नहीं हो रहा है। वर्तमान में दिया जाने वाला भुगतान मानदेय आधारित है और न्यूनतम मजदूरी भुगतान के नियमों के दायरे में नहीं आता है।

योगी ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 तक सपा सरकार थी। तब रसोइयों का मानदेय 500 रुपए से भी कम था। आपने दूसरा अन्याय ये किया कि जिनके बच्चे नहीं पढ़ेंगे, उनको सेवा से हटा दिया जाएगा। उनके चयन में भी भेदभाव करते थे। हमारी सरकार ने 2022 में उनके मानदेय को न्यूनतम 2 हजार रुपए किया। इन सभी ने कोरोना काल में अपनी सेवाओं के माध्यम से शासन की योजनाओं को प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने में अभिनंदनीय काम किया है। 

हमने इनके मानदेय में वृद्धि भी की है और इन्हें टैबलेट से आच्छादित करने के साथ साथ अतिरिक्त आय का प्रावधान भी किया है। हमने प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत सचिवालय का निर्माण किया है। इसका उद्देश्य ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गांव को ही स्वावलंबी बनाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार किया जा सके। वहां पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में पंचायत सहायक रखा गया है। बीसी सखी रखी गई है, जो गांव के अंदर बैंकिंग लेनदेन का कार्य करती है।


हमने 6 महीने के लिए उन्हें एक निश्चित मानदेय के साथ जोड़ा, लेकिन जब बैंक से उनका कमीशन बन गया तो वह अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। सुल्तानपुर की एक बीसी सखी अब तक 15.50 लाख रुपए से अधिक का कमीशन प्राप्त कर चुकी है। पंचायत सहायक को भी हम 6 हजार रुपए प्रतिमाह देते हैं। साथ ही जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, खतौनी की नकल और अन्य सभी योजनाओं को जिनकी वह ऑनलाइन सर्विस उपलब्ध करा रहा है, उससे भी अतिरिक्त आय हो रही है।

वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को प्रबंध तंत्र अपने स्त्रोत से ही देगा मानदेय
प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को प्रोत्साहन मानदेय दिए जाने के सवाल पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं है। नियमानुसार इन शिक्षकों को मानदेय प्रबंध तंत्र को अपने स्त्रोत से ही देना होगा।विधान परिषद में एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल व राज बहादुर चंदेल ने संयुक्त रूप से यह मामला उठाया। 

उन्होंने कहा कि यहां के शिक्षकों के लिए 2017 के बाद से सरकार ने कोई अतिरिक्त आर्थिक सहायता नहीं की है। जबकि पूर्व में 200 करोड़ दिया गया था। आज यहां के शिक्षक बंधुवा मजदूरों की तरह जीवनयापन कर रहे हैं। कोविड काल में इनको राहत पैकेज देने की मांग की गई लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ।

2019 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री व माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने इनको 15 हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान करने की घोषणा की थी लेकिन यह आज तक लागू नहीं हुआ। वहीं एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने वित्तविहीन मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली बनाने व समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए। 

इस पर माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि अंशकालिक शिक्षकों को प्रबंध तंत्र अपने स्त्रोत से भुगतान करेगा। इनको मानदेय देने या मानदेय वृद्धि की सरकार की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। दूसरी तरफ एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन की पारश्रमिक सीबीएसई बोर्ड के अनुरूप करने की मांग की।

Thursday, December 1, 2022

MDM रसोईया मानदेय में खेल : कौशांबी जिले के मिड-डे-मील जिला समन्वयक समेत सात की संविदा समाप्त, FIR दर्ज, 6 BEO के खिलाफ कार्यवाही हेतु संस्तुति

MDM रसोईया मानदेय में खेल : कौशांबी जिले के  मिड-डे-मील जिला समन्वयक समेत सात की संविदा समाप्त, FIR दर्ज, 6 BEO के खिलाफ कार्यवाही हेतु संस्तुति 

लाखो रुपए गबन के आरोप में 5 शिक्षा कर्मचारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के निर्देश

छह खण्ड शिक्षा अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही करने के लिए महानिदेशक को भेजा पत्र

लाखो रुपए के शिक्षा विभाग में गबन के आरोप में सात संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त


कौशाम्बी : जिले के विभिन्न विकास खण्ड के विद्यालयों में रसोइयां के रूप कार्यरत न होने के बावजूद सुनियोजित तरीके से स्वयं तथा अपने सगे सम्बन्धियों जान पहचान के व्यक्तियों के खाते में प्रथमद्ष्ट्या लाखो रुपए मानदेय के प्रेषण करके शासकीय धनराशि के व्यपहरण का मामला प्रकाश में आया है।


मामले की जांच जिलाधिकारी ने कराई थी जॉंच में दोषी पाये गये पंकज कुमार, जिला समन्वयक-एम0डी0एम0 विनय कुमार गुप्ता, तत्कालीन कम्प्यूटर ऑपरेटर एम0डी0एम0 पटल प्रभारी सिराथू सम्प्रति कम्प्यूटर ऑपरेटर विकास खण्ड सरसवां राजकुमार चौरसिया, तत्कालीन कम्प्यूटर ऑपरेटर एम0डी0एम0 पटल प्रभारी-मूरतगंज सम्प्रति कम्प्यूटर ऑपरेटर विकास खण्ड-कड़ा मो0 नाशिद, अनुदेशक उच्च प्राथमिक विद्यालय पिण्डरा/एम0डी0एम0 पटल प्रभारी विकास खण्ड मंझनपुर नीरज जायसवाल, कम्प्यूटर ऑपरेटर एम0डी0एम0 के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश जिला अधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को दिये है।


 उपरोक्त पॉंचोें कर्मचारियों एवं 02 अन्य कम्प्यूटर ऑपरेटर प्रदीप सिंह, सरसवां एवं आलेप कुमार, सिराथू कुल 07 संविदा कर्मचारियों की सेवायें तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश जिला बेसिक शिक्षाधिकारी कौशाम्बी को दिये गये


पर्यवेक्षणीय कार्यों में शिथिलता बरतने के लिए दोषी बताये गये खण्ड शिक्षाधिकारियों राजेश कुमार, तत्कालीन खण्ड शिक्षाधिकारी सिराथू सम्प्रति खण्ड शिक्षाधिकारी जनपद चित्रकूट जवाहर लाल यादव, तत्कालीन खण्ड शिक्षाधिकारी सिराथू सम्प्रति खण्ड शिक्षाधिकारी मुख्यालय कौशाम्बी चन्द्रमोहन सिंह, खण्ड शिक्षाधिकारी मंझनपुर श्रीमती किरन पाण्डेय, तत्कालीन खण्ड शिक्षाधिकारी मूरतगंज सम्प्रति खण्ड शिक्षाधिकारी कड़ा मुकेश नारायण मिश्र तत्कालीन खण्ड शिक्षाधिकारी मूरतगंज सम्प्रति निलम्बित खण्ड शिक्षाधिकारी सम्बद्ध जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान मंझनपुर मिथिलेश कुमार, तत्कालीन खण्ड शिक्षाधिकारी सरसवां सम्प्रति खण्ड शिक्षाधिकारी जनपद चित्रकूट के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही करने के लिए महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक, उत्तर प्रदेश लखनऊ को जिलाधिकारी द्वारा रिपोर्ट प्रेषित की गयी है



कौशांबी : मिड-डे-मील योजना में एक बड़े फर्जीबाड़े का खुलासा हुआ है। बीएसए कार्यालय में तैनात एमडीएम के जिला समन्वयक समेत सात कर्मचारी फर्जी रसोइयां बन खुद व रिश्तेदारों के खाते में मानदेय का 7.42 लाख रुपया भेजकर खा गए। जांच में खुलासा होने के बाद डीएम सुजीत कुमार ने सातों कर्मचारियों की संविदा समाप्त करने के साथ ही पांच के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। इसके अलावा पर्यवेक्षण में लापरवाही बरतने वाले छह खंड शिक्षाधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए महानिदेशक स्कूल शिक्षा को संस्तुति कर दी गई। एकमुश्त इतनी बड़ी कार्रवाई से बेसिक शिक्षा विभाग में खलबली है।


पिछले दिनों रसोइयों को मानदेय मुहैया कराने के लिए शासन से बजट आवंटित हुआ तो बीएसए ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। खंड शिक्षाधिकारी सिराथू सुरेंद्र पटेल ने हाजिरी सत्यापन कराने के लिए रसोइयों की सूची व्हाट्सएप ग्रुप पर डालकर स्कूलों के प्रधानाचार्यों से जानकारी मांगी। इस दौरान कुछ विद्यालयों से जानकारी मिली कि सूची में दर्ज रसोइयां उनके यहां नियुक्ति ही नहीं हैं।


बीएसए की जांच में हुआ खुलासा

एबीएसए ने इसकी जानकारी बीएसए प्रकाश सिंह को दी। मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आया तो उन्होंने बीएसए के साथ ही वित्त एवं लेखाधिकारी विनय प्रजापति की दो सदस्यीय टीम गठित कर प्रकरण की जांच करने का निर्देश दिया। अफसरों ने अभिलेखों को खंगाला तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।


बीएसए ने बताया कि वर्ष 2019 से 22 के बीच 45 फर्जी रसोइयों के नाम से कार्यालय में तैनात जिला समन्वयक एमडीएम पंकज जायसवाल समेत पांच कर्मचारी अपने व अपने रिश्तेदारों के खाते में मानदेय भेज रहे थे।


अब तक इन लोगों ने 7.42 लाख रुपये की धनराशि का गबन किया है। इस कार्यालय में दो अन्य कर्मचारी भी सहयोग करते थे। इसके अलावा संबंधित खंड शिक्षाधिकारियों ने भी पर्यवेक्षण में लापरवाही की। 


जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बुधवार को सभी सातों कर्मचारियों की संविदा समाप्त करते हुए जिन पांच कर्मचारियों के खाते में धनराशि जा रही थी उनके खिलाफ एफआईआर कराने का निर्देश दिया। इंस्पेक्टर विनोद सिंह ने बताया कि देर रात सभी पांचों कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।


इनकी हुई संविदा समाप्त

पंकज कुमार जायसवाल-जिला समन्वयक एमडीएम

विनय कुमार गुप्ता, तत्कालीन कम्प्यूटर ऑपरेटर/एमडीएम पटल प्रभारी सिराथू (वर्तमान तैनाती कम्प्यूटर ऑपरेटर सरसवां ब्लॉक)

राजकुमार चौरसिया, तत्कालीन कम्प्यूटर ऑपरेटर/एमडीएम पटल प्रभारी मूरतगंज (वर्तनाम तैनाती कम्प्यूटर ऑपरेटर कड़ा ब्लॉक)

मो. नाशिद, अनुदेशक उच्च प्राथमिक विद्यालय पिंडरा/एमडीएमपटल प्रभारी मंझनपुर ब्लॉक

नीरज जायसवाल, कम्प्यूटर ऑपरेटर-एमडीएम

प्रदीप सिंह, कम्प्यूटर ऑपरेटर सरसवां

आलेप कुमार कंप्यूटर आपरेटर सिराथू

इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को भेजा गया पत्र

राजेश कुमार, तत्कालीन एबीएस सिराथू (वर्तमान तैनाती एबीएसए जनपद चित्रकूट)

जवाहर लाल यादव, तत्कालीन एबीएसए सिराथू (वर्तमान तैनाती एबीएसए मुख्यालय कौशाम्बी)

चंद्रमोहन सिंह, एबीएसए मंझनपुर

किरन पांडेय, तत्कालीन एबीएसए मूरतगंज (वर्तमान तैनाती एबीएसए कड़ा)

मुकेश नारायण मिश्र, तत्कालीन एबीएसए मूरतगंज (वर्तमान निलम्बित एबीएसए सम्बद्ध डायट मंझनपुर)

मिथिलेश कुमार, तत्कालीन एबीएसए सरसवां (वर्तमान तैनाती एबीएसए जनपद चित्रकूट)


फर्जी रसोइयों के नाम पर मानदेय आहरित करने के आरोप में सात कर्मचारियों की संविदा समाप्त करने के साथ ही एमडीएम समन्वयक समेत पांच के खिलाफ एफआई दर्ज करा दी गई है। साथ ही पर्यवेक्षण में लापरवाही बरतने वाले छह खंड शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए महानिदेशक को संस्तुति की गई है।
सुजीत कुमार, जिलाधिकारी कौशांबी

Tuesday, April 26, 2022

रसोइयों और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ेगा, साथ ही महिला रसोइयों को साड़ी और पुरुष रसोइयों को पैंट-शर्ट का मिलेगा पैसा

रसोइयों और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ेगा, साथ ही महिला रसोइयों को साड़ी और पुरुष रसोइयों को पैंट-शर्ट का  मिलेगा पैसा


लखनऊ : योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात 27,555 अंशकालिक अनुदेशकों और सरकारी, परिषदीय व सहायताप्राप्त प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में मिड-डे मील पकाने वाले 3,77,520 रसोइयों का मानदेय बढ़ाने का फैसला कर उनसे किया गया वादा निभाया है। 


अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में 2000 रुपये और रसोइयों के मानदेय में 500 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि की गई है। इसके साथ ही प्रत्येक शैक्षिक सत्र में महिला रसोइयों को ड्रेस के तौर पर साड़ी और पुरुष रसोइयों को पैंट-शर्ट के लिए उनके बैंक खातों में 500 रुपये की रकम भेजने का भी निर्णय हुआ है।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लाल बहादुर शास्त्री भवन में हुई कैबिनेट बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। कैबिनेट बैठक में नौ प्रस्ताव मंजूर हुए जबकि एक स्थगित कर दिया गया। बैठक के बाद बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों को अभी तक 7000 रुपये मानदेय मिलता था जिसे बढ़ाकर 9000 प्रतिमाह करने का फैसला किया गया है।


 वहीं रसोइयों का मानदेय 1500 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये करने का निर्णय हुआ है। सरकार ने रसोइयों की ओर से ड्रेस की मांग को स्वीकार करते हुए महिला रसोइयों को प्रत्येक शैक्षिक सत्र में साड़ी और पुरुष रसोइयों को पैंट-शर्ट उपलब्ध कराने के लिए 500 रुपये देने का भी निर्णय किया है। इस निर्णय से राज्य सरकार पर 268.26 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्ययभार आएगा।


गौरतलब है कि पिछले वर्ष 16 दिसंबर को विधान सभा में वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए पेश किये गए दूसरे अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने अंशकालिक अनुदेशकों और रसोइयों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा की थी।



यूपी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले : अंशकालिक अनुदेशको के मानदेय में 2000 और रसोइयों के मानदेय में 500 रुपए की बढ़ोत्तरी



यूपी कैबिनेट में सोमवार को कुल 10 प्रस्ताव आए, जिसमें से नौ प्रस्ताव पास हुए।


🔴  27505 अंशकालिक अनुदेशक का मानदेय 2000 रुपये बढ़ा। 7000 की जगह 9000 रुपये मिलेगा।


🔵  377520 रसाेईये का अनुदान बढ़ाकर 1500 की जगह 2000 रुपये किया गया है। साल में एक बार 500 रुपये साड़ी, या पैंट शर्ट के लिये दिए जाएंगे।




अभी तक चीन से एचपीसीएल आयात करते थे। यह एक प्रकार का एथनॉल है। अब 10 लाख लीटर खुद यूपी बनाएगा। यह लैब से जुड़े कार्य मे उपयोग होता है। 

विधानसभा सत्र में असरकारी प्रस्ताव पर समिति बनेगी। बेबीरानी, जयवीर और धर्मपाल सदस्य होंगे। सुरेश खन्ना अध्यक्ष होंगे। योगेंद्र उपाध्याय भी असरकारी समिति में शामिल हैं।

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए टोल प्लाजा, एम्बुलेंस आदि के लिए 222 करोड़ रुपये की निविदा हुई। छह एम्बुलेंस, 12 पेट्रोलिंग वाहन सहित अन्य सुविधाएं देंगे।

पीजीआई के सामने तीमारदारों के लिये भवन बनेगा। 5393 वर्गमीटर जमीन दी गई है। सिंचाई विभाग की जमीन थी।

एक मई से पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर टोल लगेगा। 

Thursday, March 17, 2022

रसोईया और अनुदेशकों की मानदेय बढ़ोत्तरी बनी पहेली, माह फ़रवरी का भी पुराने दर से मानदेय बजट जारी, नए सत्र से बढ़ोत्तरी लागू होने की उम्मीद

रसोईया और अनुदेशकों की मानदेय बढ़ोत्तरी बनी पहेली, माह फ़रवरी का भी पुराने दर से मानदेय बजट जारी, नए सत्र से बढ़ोत्तरी लागू होने की उम्मीद



🔵 रसोइयों को नए सत्र से बढ़ा मानदेय मिलने की उम्मीद
🔵 अनुदेशकों का मानदेय 7000 से 9000 रुपये किया गया था।
🔵 रसोइयों का मानदेय 1500 से बढ़कर 2000 रुपये हुआ
🔵 रसोइयों को साल में दो साड़ी यूनिफार्म की हुई थी घोषणा
🔵 रसोइयों को हेड कैप व एप्रन का पैसा सीधे खाते में
🔵 रसोइयों को पांच लाख का स्वास्थ्य बीमा कवर


लखनऊ। दो महीने बीत चुके हैं लेकिन अभी तक अनुदेशकों और रसोइयों को बढ़ा हुआ मानदेय नहीं मिला है। दिसम्बर 2021 में मुख्यमंत्री ने संवाद कार्यक्रम में इसकी घोषणा की थी। अनुदेशकों का मानदेय 2000 रुपये और रसोइयों का मानदेय 500 रुपये बढ़ाया गया है। नए शैक्षिक सत्र से बढ़ा हुआ मानदेय मिलने की उम्मीद है।


मुख्यमंत्री ने रसोइयों को साल में दो साड़ी, एप्रन व हेड कैप का पैसा सीधे एकाउंट में और पांच हजार रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर देने का भी ऐलान किया था लेकिन अभी तक इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग ने शासनादेश भी जारी नहीं किया है। विभाग ने फरवरी के लिए सात हजार प्रति अनुदेशक की दर से मानदेय जारी कर दिया है।

Tuesday, March 8, 2022

रसोइयों परिषदीय स्कूलों में झाडू लगाने के लिए विवश, सफाईकर्मियों की लापरवाही पड़ रही भारी, जिम्मेदारी के हिसाब से नहीं मिलता मानदेय

रसोइयों परिषदीय स्कूलों में झाडू लगाने के लिए विवश, सफाईकर्मियों की लापरवाही पड़ रही भारी, जिम्मेदारी के हिसाब से नहीं मिलता मानदेय



परिषदीय विद्यालयों में मध्याहन भोजन बनाने वाली रसोइयों को भोजन बनाने के साथ ही विद्यालयों में सफाई भी करनी पड़ती है। 


विद्यालयों में झाडू लगाने के दौरान रसोइयों के कपड़े भी गंदे हो जाते हैं। अब ऐसे में किस तरह भोजन में सफाई की उम्मीद की जा सकती है। विद्यालयों पर सफाईकमी नियमित दिखते नहीं हैं तो उनसे विद्यालय में सफाई से कोई मतलब ही नहीं।


रसोइयों में झाडू आदि लगवाए जाने के बाबत पूछे जाने पर अध्यापक और अध्यापिकाओं ने पल्ला झाड़ लिया। अधिकारी भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। रसाइयों को मानदेय के नाम पर मनरेगा श्रमिकों से भी कम मजदूरी दी जाती है। मनरेगा अमिको को जहां 204 रुपया मजदूरी दी जाती है वहीं रसोइयों को महज 50 रुपया प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। 


विद्यालय में जिम्मेदारी के हिसाब से मानदेय नहीं दिया जा रहा है। पहले मात्र एक हजार रुपये महिने दिए जाते थे। अब 1500 रुपये कर दिए गए है। इतने कम पैसे से परिवार का गुजर असर नहीं हो पा रहा है।  - फुलमनी देवी


विद्यालय में सफाईकमी तैनात है लेकिन उनसे विद्यालय की साफ-सफाई नहीं कराई जाती है। न चाहते हुए भी यह जिम्मेदारी विद्यालय की ओर से न कराया जाता है - पनपत्ति देवी 


मनरेगा की मजदूरी 204 है। जबकि हम सब को एक माह का मानदेय 1500 सी रुपया मिलता है. यह भी मिलने में तीन से चार का समय लग जाता है।- शैला देवी 


एक वर्ष में 10 माह ही काम मिलता है। जब कि सुबह से विद्यालय में पांच घंटे से भी अधिक कार्य करना पड़ता है। उसके हिसाब से ऐसा नहीं मिलता है ऊपर से काम के लिए जी हजूरी करनी पड़ती है।- अनिता देवी 


  सुबह विद्यालय पहुंचकर लगाने और भोजन बनाने व बर्तन साफ करने में 3 बज जाता है। जिससे अन्य कोई दूसरा कार्य नही कर पाती ऐसे में 50 रुपया प्रतिदिन मिलने वाले मानदेय से परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है। - अमरावती देवी


बच्चों के लिए भोजन बनाना जिम्मेदारी वाला कार्य है। भोजन बनाने और साफ सफाई के हिसाब से काफी कम मजदूरी मिल रही है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।