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Monday, February 16, 2026

लाखों खर्च कर मिली बीएड डिग्री बनी बेरोजगारी का प्रतीक, भर्ती ठप होने से युवाओं में निराशा

लाखों खर्च कर मिली बीएड डिग्री बनी बेरोजगारी का प्रतीक, भर्ती ठप होने से युवाओं में निराशा


लखनऊ। शिक्षक बनने का सपना दिखाने वाली बैचलर ऑफ एजुकेशन (बीएड) की डिग्री उत्तर प्रदेश में हजारों युवाओं के लिए उम्मीद से ज्यादा चिंता का कारण बनती जा रही है। प्रदेश भर में वर्षों से शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं में ठहराव, परीक्षाओं का टलना और नियुक्तियों में देरी ने बीएड धारकों के सामने गंभीर भविष्य संकट खड़ा कर दिया है।


बीते वर्षों में बड़ी संख्या में युवाओं ने बीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया। फीस, कोचिंग, हॉस्टल और अन्य शैक्षिक खर्च मिलाकर एक अभ्यर्थी को भारी आर्थिक निवेश करना पड़ता है। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में स्थायी शिक्षक पदों पर नियुक्तियां समय पर न होने से बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवा बेरोजगार हैं। कई अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया की अनिश्चितता ने उनके मनोबल को प्रभावित किया है।

राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में लंबे समय से नियमित भर्ती न होने की शिकायतें उठती रही हैं। टीजीटी और पीजीटी जैसी प्रमुख शिक्षक भर्तियों के विज्ञापन जारी होने के बाद भी प्रक्रिया पूरी होने में लंबा समय लगना, परीक्षाओं का स्थगित होना या परिणाम में विलंब जैसे कारण युवाओं में असंतोष को बढ़ा रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी बनी रहती है और दूसरी ओर प्रशिक्षित अभ्यर्थी रोजगार के इंतजार में भटकते हैं, तो इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में पद रिक्त रहने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

बीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने सरकारी शिक्षक बनने की उम्मीद में समय और संसाधन दोनों लगाए, लेकिन वर्षों तक भर्ती न होने से उनका करियर अनिश्चितता में फंसा हुआ है। कई युवा ओवरएज होने की दहलीज पर पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ निजी संस्थानों में कम वेतन पर कार्य करने को मजबूर हैं।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि शिक्षक भर्ती की नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि प्रशिक्षित युवाओं का विश्वास बना रहे और विद्यालयों को योग्य शिक्षक मिल सकें। शिक्षा व्यवस्था की मजबूती केवल नीतियों से नहीं, बल्कि समयबद्ध नियुक्तियों और स्पष्ट रोडमैप से ही संभव है।

प्रदेश स्तर पर उठ रहा यह मुद्दा अब केवल रोजगार का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा की गुणवत्ता, युवाओं के भविष्य और सरकारी नीतियों की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है। बीएड डिग्री धारकों की बढ़ती संख्या और सीमित अवसरों के बीच संतुलन कैसे स्थापित होगा, यह आने वाले समय में राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।

Sunday, July 20, 2025

इंटर पास छात्रों के कौशल विकास के लिए यूपी बोर्ड व राजर्षि टंडन मुक्त विवि में करार, रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करने के साथ विषय चयन में होगी काउंसिलिंग

इंटर पास छात्रों के कौशल विकास के लिए यूपी बोर्ड व राजर्षि टंडन मुक्त विवि में करार, रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करने के साथ विषय चयन में होगी काउंसिलिंग 

छात्रों की जरूरतों के हिसाब से पाठ्यक्रम तैयार करेगा विश्वविद्यालय, विषय चयन में काउंसिलिंग भी

यूपी बोर्ड के सचिव और मुक्त विवि के कुलसचिव ने समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर


प्रयागराज। यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट उत्तीर्ण छात्रों के कौशल विकास के लिए शुक्रवार को यूपी बोर्ड व उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत मुक्त विवि छात्रों की जरूरतों के हिसाब से रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करने के साथ विषय चयन में उनकी काउंसिलिंग भी करेगा।

समझौता ज्ञापन के उपरांत दोनों संस्थानों के बीच शैक्षिक सहयोग बढ़ेगा जिससे छात्रों को बेहतर शिक्षा और प्रशिक्षण मिलेगा। इस समझौता ज्ञापन के तहत मुक्त विश्वविद्यालय ऐसे पाठ्यक्रम विकसित करेगा जो प्रतिवर्ष माध्यमिक शिक्षा परिषद से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले लाखों छात्रों की जरूरतों को पूरा करेंगे।


कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने बताया कि इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद छात्रों को रोजगार के क्षेत्र में मुक्त विश्वविद्यालय नई दिशा प्रदान करेगा। मुक्त विवि इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण कर आने वाले छात्रों को विषय के चयन और कौशल विकास के क्षेत्र में भी पारंगत करेगा। यह कार्य मुक्त विवि अपने सभी 12 क्षेत्रीय केंद्रों और प्रदेश में स्थापित समस्त अध्ययन केंद्रों के सहयोग से करेगा।

सभी क्षेत्रीय केंद्रों में यूपी बोर्ड से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों की उनकी रुचि के अनुसार विषयों के चयन में काउंसलिंग की जाएगी जिससे वे अपने कॅरिअर का उन्नयन कर सकेंगे और रोजगार की संभावनाएं तलाशने में दिग्भ्रमित नहीं होंगे। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने कहा कि दोनों संस्थाओं के बीच एमओयू का उद्देश्य छात्रों के बीच शैक्षिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

सचिव ने कहा कि इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों की विस्तृत जानकारी मुक्त विश्वविद्यालय के साथ साझा की जाएगी जिससे नए विषयों, नए कार्यक्रमों, कॅरिअर में उन्नति और प्रवेश पूर्व परामर्श कार्यक्रम की जानकारी ईमेल एवं एसएमएस आदि के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाई जा सके और वे इससे लाभान्वित हो सकें।

कुलपति प्रो. सत्यकाम की उपस्थिति में विश्वविद्यालय के कुलसचिव कर्नल विनय कुमार और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने समझौता ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर किए। 

Sunday, February 6, 2022

उच्च शिक्षा का हर कोर्स दिखाएगा रोजगार की राह, UGC ने नया क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट किया तैयार

उच्च शिक्षा का हर कोर्स दिखाएगा रोजगार की राह, UGC ने नया क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट किया तैयार


यूजीसी अब उच्च शिक्षा से जुड़े सभी कोर्सों को कुछ ऐसा डिजाइन कर रहा है जिसमें डिग्री के साथ साथ कौशल का भी प्रशिक्षण मिलेगा। यह प्रशिक्षण उसी कोर्स या क्षेत्र से संबंधित होगा जिसमें युवा पढ़ाई कर रहे हैं।


नई दिल्ली । हर-पढ़े लिखे और युवा को रोजगार मुहैया कराने की राह थोड़ी आसान हो सकती है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( यूजीसी) अब उच्च शिक्षा से जुड़े सभी कोर्सों को कुछ इस तरह डिजाइन कर रहा है, जिनमें डिग्री के साथ-साथ कौशल का प्रशिक्षण भी मिलेगा। यह उसी कोर्स या क्षेत्र से संबंधित होगा, जिसमें छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट जैसे सभी स्तर के कोर्स शामिल हैं।


सभी कोर्सों की पढ़ाई होगी शुरू
माना जा रहा है कि नए शैक्षणिक सत्र यानी वर्ष 2022-23 से इन मानकों के अनुरूप स्नातक से लेकर परास्नातक स्तर के सभी कोर्सों की पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। यूजीसी ने इस बीच नेशनल हायर एजुकेशन क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएचईक्यूएफ) में बदलाव से जुड़ा एक ड्राफ्ट (मसौदा) तैयार किया है।


प्रत्येक कोर्स के नए मानक भी तय
यही नहीं यूजीसी ने प्रत्येक कोर्स के नए मानक भी तय किए गए हैं। फिलहाल इस ड्राफ्ट पर यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से 13 फरवरी तक सुझाव मांगे हैं। कोर्सो में बदलाव और उसे 21वीं सदी की जरूरत को देखते हुए रोजगारपरक बनाने की सिफारिश नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में की गई थी जिसे अब अमल में लाया जा रहा है।


सभी कोर्स एक क्रेडिट से लिंक
माना जा रहा है कि इन कोर्सों को पढ़कर निकलने वाले छात्रों को इस तरह से तैयार किया जाएगा कि उनके पास पढ़ाई पूरी करने के बाद संबंधित क्षेत्र में जाने का विकल्प मौजूद रहे। जिन अहम बदलावों को ड्राफ्ट में शामिल किया है, उनमें सभी कोर्सों को एक क्रेडिट से लिंक किया गया है।


कभी भी पढ़ाई शुरू करने का मिलेगा मौका
जिसमें अंडर-ग्रेजुएट सर्टिफिकेट कोर्स का क्रेडिट स्कोर 40 होगा जबकि अंडर-ग्रेजुएट डिग्री कोर्स का क्रेडिट स्कोर 80 होगा। बैचलर डिग्री कोर्स का क्रेडिट स्कोर 120 होगा। इस क्रेडिट स्कोर से छात्रों को बीच में कभी भी पढ़ाई छोड़ने और फिर से शुरू करने का मौका मिलेगा।


सीधे पीएचडी में मिलेगा दाखिला
इस व्यवस्था में क्रेडिट स्कोर एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट (एबीसी) में जमा रहेंगे। जिन छात्रों की शुरुआत से ही शोध के क्षेत्र में रुचि है, उनके लिए चार साल का बैचलर डिग्री (रिसर्च) नाम से अलग कोर्स होगा। इसके बाद वे सीधे पीएचडी में दाखिल ले सकेंगे।


सात सीजीपीए लाना जरूरी
हालांकि पीएचडी में दाखिला के लिए सामान्य बैचलर डिग्री कोर्स के तीसरे वर्ष में कम से कम सात सीजीपीए (क्यूमूलेटिव ग्रेड प्वाइंट एवरेज) लाना जरूरी होगा। इन सभी कोर्सो में उस क्षेत्र से जुड़ी जरूरत के मुताबिक कौशल प्रशिक्षण भी मिलेगा जो प्रत्येक सेमेस्टर में न्यूनतम 15 घंटे का होगा।


कोर्सों को कौशल के साथ जोड़
इसके साथ ही प्रत्येक सेमेस्टर में कम से कम 30 घंटे की इंटर्नशिप या फिर सोशल एक्टिविटी जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। यूजीसी ने उच्च शिक्षा के प्रस्तावित इस नए ड्राफ्ट में उच्च शिक्षा के कोर्सों को कौशल व व्यवसायिक शिक्षा के साथ जोड़ दिया है। अभी सामान्य स्नातक कोर्सों में इस तरह का प्रशिक्षण या इंटर्नशिप शामिल नहीं है।

Friday, November 5, 2021

रोजगार का संकट : यूपीटीईटी (UPTET) आजीवन मान्य - फिर भी 13 लाख बेरोजगार।

रोजगार का संकट : यूपीटीईटी (UPTET) आजीवन मान्य - फिर भी 13 लाख बेरोजगार।


■ रोजगार का संकट

● 2018 में 11.70 और 2019 में 10.83 लाख ने भरा था फॉर्म
● आजीवन मान्य होने के बाद संख्या घटने का था अनुमान


उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) के प्रमाणपत्र आजीवन मान्य होने के बावजूद 2021 की यूपी-टीईटी के लिए मिले रिकॉर्ड आवेदन सूबे में डीएलएड (पूर्व में बीटीसी) और बीएड योग्यताधारी बेरोजगारों की कहानी खुद बयां कर रहे हैं।



28 नवंबर को प्रस्तावित यूपी-टीईटी के लिए 13.52 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। 8,10,201 अभ्यर्थियों ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों स्तर के लिए फॉर्म भरा है जबकि 13,52,086 अभ्यर्थी सिर्फ प्राथमिक स्तर की परीक्षा में सम्मिलित होंगे। इस प्रकार दोनों स्तर की परीक्षा में कुल 21,62,287 अभ्यर्थी शामिल होंगे।


इतनी बड़ी संख्या में मिले आवेदन इसलिए भी चौंकाने वाले हैं क्योंकि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के निर्णय के बाद प्रदेश सरकार ने प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य यूपी-टीईटी को बैक-डेट से आजीवन मान्य कर लिया है। यानि पिछले दस सालों में जितनी बार भी टीईटी हुआ है उसमें सफल अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में शामिल होने की आवश्यकता नहीं है। यही नहीं केंद्रीय शिक्षा पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) भी यूपी की भर्ती में मान्य है।


चूंकि आजीवन मान्य करने का निर्णय 2021 परीक्षा के ऑनलाइन आवेदन शुरू होने से पहले हो गया था, ऐसे में माना जा रहा था कि इस साल यूपी-टीईटी के लिए बहुत अधिक आवेदन नहीं आएंगे।


वैसे भी सरकार ने अब तक शिक्षक भर्ती की कोई घोषणा भी नहीं की है। लेकिन इसके बावजूद इस बार पिछले दस सालों का रिकॉर्ड टूट गया है। इससे पहले कभी भी इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने फॉर्म नहीं भरा था। 2019 की यूपी-टीईटी के लिए 1083016 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था जिनमें से 573322 ने दोनों स्तर की परीक्षा दी थी।


2018 की यूपी-टीईटी के लिए 1170786 बेरोजगारों ने आवेदन किया था। 2018 में कक्षा एक से आठ तक की शिक्षक भर्ती में बीएड मान्य होने के बाद से भी यूपी-टीईटी में आवेदकों की संख्या बढ़ी है।


Wednesday, September 22, 2021

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों से अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री कार्यक्रमों को अपने पाठ्यक्रमों में बढावा देने को कहा

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों से अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री कार्यक्रमों को अपने पाठ्यक्रमों में बढावा देने को कहा

यूजीसी की बड़ी पहल : स्नातक के आखिरी सेमेस्टर में रोजगार की ट्रेनिंग अनिवार्य


इस संबंध में यूजीसी की तरफ से एक नोटिस भी जारी किया गया है. इस नोटिस में कहा गया है, "जैसा कि आप जानते हैं केंद्र सरकार की बजट 2020-21 घोषणा को ध्यान में रखते हुए नए स्नातकों को रोजगार संबंधी जरूरी ज्ञान के साथ तैयार किया जा सके. इससे छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना और कार्य के प्रति नजरिया पैदा हो. इसी को देखते हुए विश्वविद्यालयों को अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए."



नई दिल्ली. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक बड़ी पहल करते हुए विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों से अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री कार्यक्रमों को अपने पाठ्यक्रमों में बढावा देने की गुजारिश की है. आयोग ने उच्च शिक्षण संस्थानों से कहा है कि सामान्य सामान्य डिग्री कार्यक्रमों के साथ अप्रेंटिस/इंटर्नशिप भी जोड़ें यानी अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए.


इस संबंध में यूजीसी की तरफ से एक नोटिस भी जारी किया गया है. इस नोटिस में कहा गया है, "जैसा कि आप जानते हैं केंद्र सरकार की बजट 2020-21 घोषणा को ध्यान में रखते हुए नए स्नातकों को रोजगार संबंधी जरूरी ज्ञान के साथ तैयार किया जा सके. इससे छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना और कार्य के प्रति नजरिया पैदा हो. इसी को देखते हुए विश्वविद्यालयों को अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए." 


आपको बता दें कि अप्रेंटिस/इंटर्नशिप युक्त डिग्री और डिप्लोमा कोर्सों के बारे में केंद्रीय बजट 2021-22 में ऐलान किया गया था, जिससे कि छात्रों को और अधिक रोजगार परक बनाया जा सके. पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने अगस्त में  अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री, डिप्लोमा से जुड़ी यूजीसी की गाइडलाइन्स भी जारी की थी. 

Tuesday, June 22, 2021

नौकरी देने में बेसिक शिक्षा विभाग सबसे अव्वल, उच्चतर सबसे सुस्त, एक रपट

नौकरी देने में बेसिक शिक्षा विभाग सबसे अव्वल, उच्चतर सबसे सुस्त, एक रपट


कोरोना का असर कम होने के साथ युवा भर्तियां शुरू करने का दबाव बना रहे हैं। कोरोना के कारण पिछले लगभग सवा साल से चयन संस्थाओं का कामकाज बहुत प्रभावित रहा। अब विधानसभा चुनाव में महज छह महीने बचे देख युवा जोरदार तरीके से मांग उठा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि सरकार ने 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में शेष तकरीबन छह हजार पदों पर नियुक्ति के लिए तीसरी काउंसिलिंग की समय सारिणी जारी कर दी। ऐसे में प्रस्तुत है पिछले दो-तीन वर्षों में विभिन्न संस्थाओं के चयन की रिपोर्ट:



बेसिक शिक्षा परिषद ने 1.08 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की

चयन के लिहाज से देखा जाए तो बेसिक शिक्षा परिषद ने पिछले तीन सालों में सर्वाधिक एक लाख से अधिक अभ्यार्थियों का सहायक अध्यापक पद पर चयन किया 68500 शिक्षकों की भर्ती के लिए 2018 की परीक्षा के आधार पर 45472 और 2019 में शुरू हुई 69000 भर्ती में अब तक 63 हजार को नियुक्ति दी जा चुकी है। शेष छह हजार पदों पर 30 जून को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा।


लोक सेवा आयोग ने दो साल में 22870 को दी नौकरी

कोरोना काल में भी लोक सेवा आयोग ने अच्छा काम किया। जुलाई 2019 से अप्रैल 2021 तक 21 महीने में 22870 चयन किया। 17 अप्रैल को पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार की विदाई के बाद से कोई खास परिणाम जारी नहीं हुआ।


चयन बोर्ड ने तीन वर्षों में 10671 को दी नौकरी

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने तीन साल से अधिक समय में 10761 को नौकरी दी। 9 अप्रैल 2019 को वर्तमान बोर्ड के गठन के बाद से प्रशिक्षित स्नातक के 8410, | प्रवक्ता के 1756 और पूर्व से लंबित प्रधानाचार्यों के 505 का चयन किया। हालांकि प्रधानाचार्य भर्ती 2011 के सात मंडल और 2013 भर्ती का साक्षात्कार अब तक नहीं हो सका है।


उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने 4 साल में बहुत कम नियुक्ति की

भर्ती के मामले में उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की गति सबसे सुस्त रही। अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में पिछले चार साल में गिनती की नियुक्तियां हुई। विज्ञापन संख्या 46 के अंतर्गत 45 विषयों में 1652 और विज्ञापन संख्या 47 के 35 विषयों में 1150 पदों पर चयन किया जा सका। काफी जद्दोजहद के बाद विज्ञापन संख्या 50 में 2003 पदों पर भर्ती शुरू हुई लेकिन उसकी परीक्षा तिथि तक तय नहीं हो सकी है।