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Sunday, August 30, 2026

चुनावी साल में आंगनबाड़ी और सहायिकाओं का 50 फीसदी मानदेय बढ़ाने की तैयारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 से बढ़ाकर 12 हजार तो सहायिकाओं का 4 से बढ़ाकर 6 हजार करने का है प्रस्ताव

चुनावी साल में आंगनबाड़ी और सहायिकाओं का 50 फीसदी मानदेय बढ़ाने की तैयारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 से बढ़ाकर 12 हजार तो सहायिकाओं का 4 से बढ़ाकर 6 हजार करने का है प्रस्ताव

लखनऊ। चुनावी साल में आधी आबादी को साधने के लिए सरकार एक और बड़ा फैसला लेने जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में दोगुना वृद्धि करने की तैयारी है। बाल विकास सेवा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय 8 से बढ़ाकर 12 हजार तो सहायिकाओं के मानदेय को 4 हजार से बढ़ाकर 6 हजार करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसे अगली कैबिनेट में मंजूरी दी जा सकती है। इस फैसले से प्रदेश की 1.89 लाख आंगनबाड़ी और 1.67 लाख सहायिकाओं को लाभ मिलेगा।


दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते अप्रैल महीने में ही आंगनबाड़ी और सहायिकाओं के मानदेय में सम्मानजन वृद्धि करने की घोषणा की थी। इसी कड़ी में विभाग ने मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को वित्त, कार्मिक और न्याय विभाग के स्तर पर सहमति मिल चुकी है। मानदेय बढ़ान से प्रदेश सरकार के खजाने पर 3000 करोड़ से अधिक का वित्तीय भार आएगा। खास बात यह है कि योगी सरकार ने मानदेय में यह बढ़ोत्तरी अपने दम करने की हिम्मत दिखाई है। इस बढ़ोत्तरी में केंद्र सरकार से कोई वित्तीय मदद नहीं मिलेगी।

बता दें कि मौजूदा मानदेय में केंद्र सरकार से भी धनराशि मिलती है, लेकिन इस बार की बढ़ोत्तरी से बढ़ने वाले वित्तीय भार को योगी सरकार अकेले वहन करेगी। मौजूदा समय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 8000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जिसमें 4500 रुपए केंद्र सरकार देती है और शेष 3500 रुपए राज्य सरकार देती है। अब प्रदेश सरकार अपनी 3500 की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 5500 कर देगी। इसे मिलाकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कुल 12000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। इसी प्रकार सहायिकाओं के मानदेय में भी राज्य सरकार अपनी हिस्सेदारी में 2000 रुपए और बढ़ाने जा रही है। इस प्रकार इन्हे अब 6000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।


लंबे सम समय से मानदेय बढ़ाने की मांग

सरकार के इस संभावित फैसले को महज मानदेय वृद्धि के तौर पर नहीं, बल्कि चुनावी साल में महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रदेश में आंगनबाड़ी व्यवस्था से बड़ी संख्या में महिलाएं सीधे जुड़ी हैं। कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का नेटवर्क गांव-गांव और शहरों के मोहल्लों तक फैला हुआ है। ऐसे में मानदेय बढ़ाने का फैसला एक बड़े महिला वर्ग को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ राजनीतिक संदेश देने वाला कदम साबित हो सकता है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे इस वर्ग के लिए यह वृद्धि आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


महिला मतदाताओं पर बढ़ा फोकस

राजनीतिक नजरिये से देखें तो विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं पर सभी दलों का फोकस बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में सरकार की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में प्रस्तावित बढ़ोतरी को महिला सशक्तीकरण और कल्याणकारी राजनीति के साथ जोड़कर पेश किया जा सकता है। इससे सरकार को अपने महिला-केंद्रित कामकाज को रेखांकित करने का मौका मिलेगा।

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