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Wednesday, July 1, 2020

डरे-सहमें शिक्षक आज से खोलेंगे विद्यालयों के ताले, क्वारन्टीन सेंटर बने विद्यालय नहीं हुए अब तक सेनेटाइज

फतेहपुर : डरे-सहमें शिक्षक आज से खोलेंगे विद्यालयों के ताले, क्वारन्टीन सेंटर बने विद्यालय नहीं हुए अब तक सेनेटाइज


फतेहपुर : कोरोना संक्रमण को लेकर करीब तीन माह से बंद चल रहे बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को एक जुलाई से खोलने का फरमान जारी हो चुका है। संक्रमण को देखते हुए अभी भी परिषदीय शिक्षक स्कूल जाने में सहमें नजर आ रहे हैं। इनका कहना है कि करीब सभी विद्यालयों को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया था, जिसमें कई सेंटर से कोरोना पॉजिटिव केस भी निकले हैं। अभी तक विद्यालयों को सेनेटाइज तक नहीं कराया गया है।


 ऐसे में विद्यालय में संक्रमण फैलने की अशंका प्रबल हो रही है। करीब साढ़े तीन महीने की लंबी छुट्टी के बाद बुधवार से जिले भर के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के ताले स्टाफ के लिए खुल जाएंगे। सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं, अनुदेशक व शिक्षामित्रों को विद्यालय समय से आना होगा। यह शिक्षक स्कूल पहुंचकर विद्यालयों की रंगाई पुताई, कायाकल्प के तहत कार्य, यूनीफार्म, पुस्तक वितरण समेत अन्य कार्यों को निपटाएंगे। खोले जा रहे विद्यालयों को लेकर शिक्षकों के बीच कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षकों की मानें तो संक्रमण काल के दौरान बच्चों के न आने पर शिक्षण कार्य तो होगा नहीं, ऐसे में शिक्षकों को विद्यालय में बुलाना ठीक नहीं है। वहीं शिक्षक नेताओं ने शिक्षकों को स्कूल बुलाए जाने का विरोध किया है और कहा है कि इसका कोई औचित्य नहीं नहीं है।

विविंग टाइम पर रहती है नजर :  विभाग दीक्षा ऐप के डाउनलोड एवं विविंग टाइम(देखा जाने वाला समय) के आंकड़ों की लगातार समीक्षा करता है। विभाग ने प्रत्येक शिक्षक व स्मार्टफोन धारक अभिभावक के मोबाइल फोन में दीक्षा ऐप डाउनलोड सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक विषय के हर पाठ में मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने पर दीक्षा एप का लिंक खुल जाता है। वहां उस पाठ से सम्बन्धित विषय सामग्री मौजूद रहती है। पुस्तक वितरण के बाद बच्चों के लिए इस दौर में पढ़ना आसान होगा। हालांकि ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क, स्मार्टफोन की उपलब्धता जैसी व्यवहारिक समस्याएं भी हैं।


क्वारंटीन सेंटर बने विद्यालय नहीं हुए अब तक सेनेटाइज : जनपद के कई स्कूलों को क्वारंटीन सेंटर भी बनाया गया था। उस समय बाहर से आने वाले व्यक्तियों को 14-14 दिन के लिए यहां रोका गया। हालांकि बाद में नियम बदलकर 21 दिन के लिए होम क्वारंटीन हो गया है। जो स्कूल क्वारंटीन सेंटर या अस्थाई आश्रय स्थल बने, उनको सेनेटाइज भी नहीं कराया गया है। बीएसए ने बताया कि काफी पहले स्कूलों को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया था। 21 दिन से अधिक हो गए हैं। डीएम ने विद्यालयों को सेनेटाइज किए जाने को लेकर निर्देश जारी किए हैं।


गैर जिलों से भी आएंगे शिक्षक :  परिषदीय स्कूलों में अधिकांश शिक्षक गैर जिलों से भी आते हैं। लॉकडाउन के दौरान अपने अपने घरों में पहुंचे शिक्षक स्कूल खुलने पर वापस आएंगे। तमाम ऐसे जिले हैं जहां अधिकांश स्थान हॉटस्पॉट घोषित हैं। जिले के परिषदीय विद्यालयों में करीब दस हजार से अधिक शिक्षक शिक्षिकाएं तैनात हैं। ऐसे में गैर जिलों से आने वाले शिक्षकों के सम्पर्क में तमाम लोग होंगे। जिसको लेकर शिक्षक सहमें नजर आ रहे हैं।

क्या बोले शिक्षक नेता : शासन प्रशासन के आदेश का पालन तो किया जाएगा, लेकिन कोरोना संक्रमण के बचाव को लेकर कोई ठोस कदम न उठाया जाना दुखद है। मांग के बाद भी अभी तक विद्यालयों को सेनेटाइज नहीं कराया गया है। यदि किसी भी शिक्षक को संक्रमण होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। विभाग द्वारा जल्दबाजी में विद्यालय खोले जा रहे हैं। जो कतई ठीक नहीं है। - विजय त्रिपाठी महामंत्री प्राशिसं


शासन के निर्देशों का पालन कराया जा रहा है। बुधवार से विद्यालय खोले जाएंगे। डीएम के आदेश में कई ब्लाकों के विद्यालयों को सेनेटाइज भी किया गया है। सभी विद्यालय सेनेटाइज होंगे। संक्रमण बचाओ को लेकर विभाग गंभीर है।- शिवेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए


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Tuesday, June 30, 2020

संक्रमण के खतरे के कारण स्कूल खुलने को लेकर घबरा रही अध्यापिकाएं

फर्रुखाबाद : संक्रमण के खतरे के कारण स्कूल खुलने को लेकर घबरा रही अध्यापिकाएं


 

Friday, June 26, 2020

अक्टूबर से पहले स्कूलों का खुलना मुश्किल, एमएचआरडी मंत्रालय ने दिए संकेत

अक्टूबर से पहले स्कूलों का खुलना मुश्किल, एमएचआरडी मंत्रालय ने दिए संकेत


केंद्रीय विद्यालयों में हर दिन दो से तीन घंटे लग रही आनलाइन क्लास उपस्थिति जरूरी। आनलाइन पढ़ाई के लिए तेज की मुहिम।...



 नई दिल्ली। आने-वाले महीनों में भी कोरोना संक्रमण की रफ्तार की आशंकाओं के बीच स्कूलों का फिलहाल अक्टूबर से पहले खुलना मुश्किल है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ चर्चा के बाद इसके संकेत दिए है। ऐसे में मंत्रालय ने आनलाइन पढ़ाई की भी मुहिम को और तेज किया है। स्कूलों से आनलाइन क्लास लगाने और छात्रों को उससे जोड़ने के निर्देश दिए है। साथ ही स्कूलों के लिए प्रस्तावित 12 नए टीवी चैनलों को लांच करने की योजना पर भी काम तेज किया गया है।


नए शैक्षणिक सत्र को लेकर होगी समीक्षा

मंत्रालय ने इससे पहले स्कूलों के अगस्त तक खुलने की उम्मीद जताई थी। लेकिन हाल ही में दिल्ली सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में कोरोना संक्रमण की रफ्तार बहुत तेज हो गई है। मंत्रालय ने हाल ही में यूजीसी को भी परीक्षाओं और नए शैक्षणिक सत्र को लेकर जारी गाइड लाइन की नए सिरे से समीक्षा करने को कहा है।


केंद्रीय विद्यालयों में आनलाइन पढ़ाई शुरु

इस बीच मंत्रालय के निर्देश पर केंद्रीय विद्यालयों में आनलाइन पढ़ाई शुरु हो गई है। छात्रों को हर दिन दो से तीन घंटे आनलाइन पढ़ाया जा रहा है। इस दौरान नोट्स आदि भी तैयार कराने का काम शुरु कर दिया है। हालांकि अभी हर दिन सभी विषय नहीं पढ़ाए जाते है। बल्कि इन्हें तीन से चार दिन ही पढ़ाया जा रहा है। इस बीच छात्रों की उपस्थिति भी जरूरी की गई है। हाल में शुरु हुई आनलाइन क्लास में जो बच्चे नहीं शामिल हो रहे है, उन्हें लेकर स्कूलों ने अभिभावकों को मैसेज किए है। साथ ही कहा है कि वह बच्चे को आनलाइन क्लास से अनिवार्य रूप से जोड़े। संगठन से जुड़े अधिकारियों की मानें तो मौजूदा समय में जो परिस्थितियां बनी हुई है, उनमें फिलहाल आनलाइन ही पढ़ना होगा। इसके जरिए कब तक पढ़ना होगा, यह कहना मुश्किल है।

एडेड माध्यमिक : नियुक्ति देने वालों पर लटकी कार्रवाई की तलवार


एडेड माध्यमिक : नियुक्ति देने वालों पर लटकी कार्रवाई की तलवार


प्रयागराज : एडेड माध्यमिक कालेजों की शिक्षक नियुक्ति में हेराफेरी करने वाले अब निशाने पर हैं। शासन के निर्देश पर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को आख्या के साथ तलब किया जा चुका है। सभी से पूछा गया है कि शिक्षक पद का अधियाचन यदि चयन बोर्ड नहीं भेजा गया तो दोषी अधिकारी का नाम क्या है? और उसकी वर्तमान में तैनाती कहां है? इस सवाल से साफ है कि नियुक्ति में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। बस जांच पूरा होने का इंतजार है।



असल में, सुप्रीम कोर्ट ने संजय सिंह व अन्य बनाम उप्र व अन्य सहित सिविल अपीलों पर 28 फरवरी 2020 को आदेश दिया है। शासन अशासकीय सहायताप्राप्त कालेजों में नियुक्ति पाने वालों की चयन प्रक्रिया जांच रहा है कि वह सही है या नहीं। शासन स्तर पर तय हुआ कि उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड सचिव पिछले वर्षो में मिले अधियाचन की रिपोर्ट देंगी। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक जिलों से भेजें अधियाचन व चयन प्रक्रिया की जांच करेंगे।


प्रयागराज के शिक्षा निदेशालय में अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक व डीआइओएस को तलब करके जांच शुरू कर दी है।


इस तरह की मांगी आख्या : जिले का नाम, शिक्षक का नाम व पदनाम, विद्यालय, कब से संबद्ध, रिक्त पद किस विषय का था पूर्व में कार्यरत शिक्षक का नाम, भेजे अधियाचन का पत्रंक व दिनांक, यदि अधियाचन नहीं भेजा दोषी अधिकारी का नाम व वर्तमान तैनाती स्थान, अधियाचन की प्रति चयनित अभ्यर्थी को मिली या नहीं, नियुक्ति की तारीख।


नियुक्ति प्रक्रिया : दो बहुप्रसारित समाचार पत्र में विज्ञापन, चयन समिति का गठन, अर्हता, गुणांक निर्धारण। संस्था ने डीआइओएस को प्रकरण कब संदíभत किया था, वेतन भुगतान व अन्य विवरण

Tuesday, June 23, 2020

परीक्षाओं को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में पहुंची गेंद, CBSE ने शीर्ष अदालत को भेजा जवाब


परीक्षाओं को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में पहुंची गेंद, CBSE ने शीर्ष अदालत को भेजा जवाब



सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की लंबित परीक्षाओं को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाल दी है। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई होनी है। ...


नई दिल्ली । सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की लंबित परीक्षाओं को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाल दी है... जहां मंगलवार को इसे लेकर सुनवाई होनी है। हालांकि, मंत्रालय के रूख से साफ है कि वह कोरोना संक्रमण की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए परीक्षाएं कराने के बिल्कुल पक्ष में नहीं है। बावजूद इसके वह परीक्षाओं को लेकर की गई तैयारियों से भी कोर्ट को अवगत कराना चाहता है। यही वजह है कि कोर्ट को भेजे जवाब में परीक्षाएं स्थगित करने सहित उसे कराने से जुड़ी तैयारियों का पूरा ब्यौरा भी शीर्ष अदालत को दिया है।


ट्वीटर पर नो एक्जाम ने किया ट्रेंड

इस ब्‍यौरे में सुरक्षा मानकों के तहत सेल्फ सेंटर सहित ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाने जैसी तैयारियां शामिल हैं। इस बीच पूरे दिन भर ट्वीटर पर नो एक्जाम इन कोविड हैसटैग पहले नंबर पर ट्रेंड करता रहा जिसमें बड़ी संख्या में लोग परीक्षाओं को न कराने की मांग कर रहे थे। हालांकि इस बीच मंत्रालय ने साफ किया है कि जो भी फैसला होगा वह छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही होगा। वहीं मंत्रालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो परीक्षाएं अब नहीं होगी। सभी बच्चों को प्री-बोर्ड या फिर आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अंक देकर प्रमोट कर दिया जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाली गेंद

हालांकि जो छात्र परीक्षाओं के होने पर इससे ज्यादा नंबर लाने की उम्मीद में है उन्हें बाद में अंक सुधार के तहत परीक्षा का मौका दिया जाएगा जिनकी तारीखों का ऐलान संक्रमण की स्थिति के सामान्य होने के बाद किया जाएगा। हालांकि मंत्रालय या सीबीएसई इस पर अपनी ओर से कोई निर्णय लेने के बजाय इस फैसले का ऐलान सुप्रीम कोर्ट के हवाले के कराना चाहती है। ताकि बाद में विवाद की कोई स्थिति ना बननी पाए। मालूम हो कि सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बची परीक्षाएं एक से 15 जुलाई के बीच प्रस्तावित होनी है। इनमें 10वीं की परीक्षाएं केवल दिल्ली के इलाकों में होनी हैं।


नीट और जेईई मेंस जैसी परीक्षाओं को लेकर अभी इंतजार

दंगे के चलते दिल्‍ली के कुछ इलाकों में 10वीं की परीक्षाएं नहीं हो पायी थीं। मंत्रालय इस बीच नीट और जेईई मेंस जैसी परीक्षाओं को लेकर थोड़ा और इंतजार करने के पक्ष में है। यही वजह है कि परीक्षाओं को लेकर 30 जून के आसपास एक बार फिर से समीक्षा की जाएगी। जिसके बाद उस समय की स्थिति को देखते हुए निर्णय लिया जाएगा। वैसे भी जेईई मेंस की परीक्षाएं 18 से 23 जुलाई और नीट की परीक्षाएं 26 जुलाई को होनी है। ऐसे में इन परीक्षाओं को लेकर अभी समय है। 

Wednesday, June 17, 2020

वित्तविहीन विद्यालयों की फीस वसूली पर होगा अब सरकार का नियंत्रण, अब नहीं बढ़ा सकेंगे शुल्क

वित्तविहीन विद्यालयों की फीस बढ़ोतरी पर कसी नकेल, राज्यपाल ने दी अनुमति

वित्तविहीन विद्यालयों की फीस वसूली पर होगा अब सरकार का नियंत्रण

निजी विद्यालय अब नहीं बढ़ा सकेंगे शुल्क, राज्यपाल ने राज्य सरकार के अध्यादेश को दी मंजूरी


 वित्तविहीन विद्यालय अब मनमाने तरीके से शुल्क नहीं बढ़ा सकेंगे। फीस वसूली को नियंत्रित करने के लिए कैबिनेट ने यूपी स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) (संशोधन) अध्यादेश-2020 को मंजूरी दे दी है। इसमें अधिनियम-2018 की धारा 2,4,8,9 और 11 में संशोधन किया गया है। इसके तहत शुल्क को नियमित करने का अधिकार प्रदेश सरकार के पास होगा। 


राज्यपाल से मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा। इससे स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। सरकार ने कोरोना संकटकाल में अभिभावकों को राहत देने के लिए वित्तविहीन विद्यालयों को इस वर्ष फीस नहीं बढ़ाने, विद्यार्थियों से लॉकडाउन की अवधि का परिवहन शुल्क नहीं लेने और एकमुश्त फीस नहीं वसूलने का आदेश जारी किया था वित्तविहीन विद्यालयों ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।


मंडल स्तर पर अपील प्राधिकरण : मनमानी फीस वसूली के मामलों में जिला शुल्क नियामक समिति के निर्णयों के खिलाफ अपीलों के समय पर निस्तारण के लिए अब राज्य स्तर की जगह मंडल स्तर पर मंडलीय स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय अपील प्राधिकरण का भी गठन किया जाएगा। अभिभावक इसके निर्णय के खिलाफ मंडल स्तर पर ही अपील कर सकेंगे।