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Monday, February 23, 2026

परिषदीय स्कूलों में जर्जर शौचालयों पर उठी आवाज, अलग बजट और जवाबदेही के साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था करने की PSPSA ने रखी मांग

परिषदीय स्कूलों में जर्जर शौचालयों पर उठी आवाज, अलग बजट और जवाबदेही के साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था करने की PSPSA ने रखी मांग


प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन,PSPSA (उत्तर प्रदेश) ने परिषदीय विद्यालयों में जर्जर और अपर्याप्त शौचालयों की समस्या को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ उच्च न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन ने पत्र के माध्यम से कहा है कि प्रदेश के अनेक परिषदीय विद्यालयों में आज भी छात्र-छात्राएं और शिक्षक जर्जर शौचालयों का उपयोग करने को मजबूर हैं, जबकि कई स्थानों पर बच्चों को खुले में जाने की स्थिति बनी हुई है, जो गंभीर स्वास्थ्य और सुरक्षा चिंता का विषय है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि विभागीय स्तर पर कागजों में अधिकांश विद्यालयों को शौचालययुक्त और सुरक्षित दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है। संगठन का आरोप है कि जिला स्तर पर शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों पर दबाव बनाकर जर्जर शौचालयों को कागजी रूप से सुरक्षित दर्शाया जा रहा है, जिससे भविष्य में किसी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि अधिकारियों द्वारा शौचालय निर्माण के लिए अलग बजट देने के बजाय कंपोजिट ग्रांट की सीमित राशि (लगभग 25 हजार रुपये) से निर्माण कराने का निर्देश दिया जा रहा है। संगठन का तर्क है कि इतनी कम राशि में शौचालय निर्माण संभव नहीं है और यदि विद्यालय यह राशि निर्माण में खर्च करते हैं तो रंगाई-पुताई, मरम्मत, शिक्षण सामग्री, परीक्षा व्यवस्था जैसे अन्य आवश्यक कार्य प्रभावित हो जाएंगे।

पत्र में यह भी चिंता जताई गई है कि आजादी के दशकों बाद भी कई विद्यालयों में शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है। विशेष रूप से महिला शिक्षिकाओं की कार्य परिस्थितियों को लेकर इसे संवेदनशील मुद्दा बताया गया है और कहा गया है कि यह केवल सुविधा नहीं बल्कि गरिमा और मानवाधिकार से जुड़ा विषय है।

संगठन ने मांग की है कि परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग सुरक्षित शौचालयों के निर्माण हेतु अलग से पर्याप्त बजट जारी किया जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों द्वारा बिना भौतिक सत्यापन के विद्यालयों को सुरक्षित घोषित किया जा रहा है, उनके स्तर पर भी जवाबदेही तय की जाए। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना या स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है।

संगठन ने सरकार और प्रशासन से इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की अपील करते हुए कहा है कि स्वच्छ और सुरक्षित विद्यालय वातावरण ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बुनियादी शर्त है।



Sunday, November 3, 2024

98% स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय होने का केंद्र सरकार का दावा, सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

98% स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय होने का केंद्र सरकार का दावा, सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी 


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देशभर के 97.5 फीसदी से अधिक स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था है। इनमें सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व निजी स्कूल शामिल हैं।

 केंद्र ने कांग्रेस नेता व सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर की लंबित जनहित याचिका में हलफनामा दायर किया है। जया ठाकुर ने केंद्र व राज्यों को कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने और सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और आवासीय स्कूलों में महिलाओं के लिए अलग शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की है।


 केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया है कि दिल्ली, गोवा व पुद्दुचेरी जैसे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने 100 फीसदी लक्ष्य हासिल करते हुए अदालत के पहले के आदेशों का पालन किया है। 

केंद्र ने यह भी बताया है कि 10 लाख से अधिक सरकारी स्कूलों में लड़कों के लिए 16 लाख व लड़कियों के लिए 17.5 लाख शौचालय बनाए गए हैं। सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लड़कों के लिए 2.5 लाख और लड़कियों के लिए 2.9 लाख शौचालय उपलब्ध कराए गए हैं।

Tuesday, November 7, 2023

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में शौचालय उपलब्ध कराने का राष्ट्रीय मॉडल सुनिश्चित करने को कहा, सैनेटरी नैपकिन बांटने की समग्र नीति तैयार करने का भी निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में शौचालय उपलब्ध कराने का राष्ट्रीय मॉडल सुनिश्चित करने को कहा, सैनेटरी नैपकिन बांटने की समग्र नीति तैयार करने का भी निर्देश 


कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने याचिका दाखिल कर लड़कियों के लिए अलग शौचालय की मांग की है

नई दिल्ली सरकारी : स्कूलों में सैनेटरी नैपकिन बांटने और उसके निस्तारण के बारे में राष्ट्रीय नीति का मसौदा तैयार हो चुका है। इस बात की जानकारी सोमवार को केंद्र सरकार की और से सुप्रीम कोर्ट में दी गई।


सरकार ने कोर्ट से चार सप्ताह का समय मांगते हुए कहा कि तैयार मसौदे पर सभी हित धारकों और आम जनता की राय आनी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह का समय देते हुए निर्देश दिया कि वह सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में लड़कियों के लिए उनकी संख्या के अनुपात में शौचालय का राष्ट्रीय माडल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करे। कोर्ट ने सैनेटरी  नैपकिन वितरण योजना पर केंद्र सरकार से कहा कि वह नीति को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न राज्य सरकारों की इस बारे में लागू योजनाओं को भी देखे और उसके बाद एक समग्र नीति बनाए। 


ये निर्देश प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कांग्रेस नेता जया ठाकुर की याचिका पर सुनवाई के दौरान सोमवार को दिए। जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मासिक धर्म स्वच्छता का मुद्दा उठाते हुए स्कूलों में छह से 12 कक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं को सैनेटरी नैपकिन बांटने और लड़कियों के लिए अलग शौचालय के निर्माण की मांग की है।


 याचिकाकर्ता का कहना है कि मासिक धर्म स्वच्छता की व्यवस्था न होना लड़कियों की शिक्षा में एक बड़ी बाधा है। बहुत सी लड़कियां मासिक धर्म की स्वच्छता के लिए सैनेटरी नैपकिन और अलग शौचालय नहीं होने के कारण स्कूल छोड़ देती हैं। सोमवार को जब मामला सुनवाई पर आया तो केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि स्कूलों में  सैनेटरी नैपकिन बांटने और उसके निस्तारण के बारे में राष्ट्रीय नीति का मसौदा तैयार हो गया है। 


वकील ने कोर्ट से चार सप्ताह का और समय मांगते हुए कहा कि उस पर सभी हित धारकों और आम जनता की राय आनी है। कोर्ट ने अनुरोध स्वीकारते हुए केंद्र को चार सप्ताह का समय दे दिया। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार नीति को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न राज्यों में सैनेटरी नैपकिन स्कूलों में बांटने की योजनाओं को भी देख ले ताकि एक समग्र राष्ट्रीय नीति तैयार हो जया ठाकुर द्वारा पेश वरिष्ठ वकील विभा दत्त मखीजा ने कोर्ट से स्कूलों में ढांचागत सुविधाएं और लड़कियों के अलग शौचालय का मुद्दा उठाया।

Saturday, August 22, 2020

स्कूल परिसर में नहीं बनेंगे सामुदायिक शौचालय

स्कूल परिसर में नहीं बनेंगे सामुदायिक शौचालय

 
प्रयागराज : ऑपरेशन कायाकल्प के तहत कई स्कूल परिसरों में शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। इन शौचालयों का प्रयोग स्कूल के विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी ही कर सकेंगे। किसी भी हाल में बाहर का व्यक्ति इनका प्रयोग नहीं करेगा। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की तरफ से सभी जिलाधिकारियों और बेसिक शिक्षाधिकारियों को लिखे पत्र में कहा गया है कि कई जनपदों में विद्यालय परिसर में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण की जानकारी मिली है। यह आपत्तिजनक है।


किसी भी विद्यालय परिसर में सिर्फ विद्यार्थियों, शिक्षकों और वहां के कर्मचारियों के लिए शौचालय का निर्माण कराया जा सकता है। पूरे गांव के प्रयोग के लिए बनने वाले सामुदायिक शौचालयों से विद्यार्थियों व शिक्षकों को असुविधा होगी। विद्यालय बंद होने के बाद गांव के लोग भी उसका प्रयोग नहीं कर सकेंगे। अत: किसी भी हाल में परिषदीय विद्यालय परिसर में उपलब्ध जमीन का प्रयोग सामुदायिक शौचालय के निर्माण के लिए न किया जाए। इस संबंध में बेसिक शिक्षाधिकारी संजय कुशवाहा ने बताया कि जिलाधिकारी की तरफ से नगर आयुक्त, जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र जारी कर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि शासन के आदेश का अनुपालन करते हुए किसी भी हालत में परिषदीय विद्यालयों में सार्वजनिक शौचालय न बनवाए जाएं।

Thursday, August 13, 2020

विद्यालय परिसर में सामुदायिक शौचालय बनवाने वाले ग्राम प्रधानों के खिलाफ की जाएगी कड़ी कार्यवाही, केवल विद्यार्थियों व शिक्षकों के उपयोग के लिए है स्कूल परिसर



 विद्यालय परिसर में सामुदायिक शौचालय बनवाने वाले ग्राम प्रधानों के खिलाफ की जाएगी कड़ी कार्यवाही, केवल विद्यार्थियों व शिक्षकों के उपयोग के लिए है स्कूल परिसर, बेसक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी ने किया स्पष्ट।


■ क्लिक करके देखें आदेश:








Tuesday, September 3, 2019

गोण्डा : 470 विद्यालयों में नहीं हैं बालिका शौचालय, जिले के ब्लॉकों में एबीआरसी अनुश्रवण की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

गोण्डा : 470 विद्यालयों में नहीं हैं बालिका शौचालय, जिले के ब्लॉकों में एबीआरसी अनुश्रवण की रिपोर्ट में हुआ खुलासा।





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