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Saturday, September 19, 2020

40 लाख देंगे तभी चेक होंगे प्रयागराज के 3732 शिक्षकों के प्रमाण पत्र, सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

40 लाख देंगे तभी चेक होंगे प्रयागराज के 3732 शिक्षकों के प्रमाण पत्र, सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

 
प्रयागराज : माध्यमिक शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच के लिए सिर्फ प्रयागराज में विभाग को करीब 40 लाख रुपये की जरूरत है। करीब दो महीने पहले भेजे गए 3732 शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र का सत्यापन संबंधित विश्वविद्यालयों से नहीं हो सका है। विश्वविद्यालयों ने प्रपत्रों की जांच के लिए शुल्क मांगा है।

‘अनामिका’ प्रकरण सामने आने के बाद सभी माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रपत्रों की जांच कर संबंधित विश्वविद्यालयों को भी सत्यापन के लिए भेजा गया है। डीआइओएस कार्यालय के पास सत्यापन शुल्क के नाम पर कोई भी बजट न होने से यह कार्य अभी अधर में है। डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि जनपद में 378 राजकीय विद्यालय के शिक्षक हैं, इनमें 250 महिला व 128 पुरुष हैं। वित्तपोषित कॉलेजों के कुल 3286 अध्यापक हैं, इनमें 809 महिला व 2477 शिक्षक हैं। 68 संस्कृत विद्यालयों के भी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने के लिए विश्वविद्यालयों के पास भेजा गया है।


सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एक डिग्री के सत्यापन के लिए 500 रुपये, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वद्यिालय में 500 रुपये, आइआइटी दिल्ली में 1000 रुपये, भारतीय खेल प्राधिकरण में दो हजार रुपये शुल्क देने पर ही डिग्री का सत्यापन संभव है।

Sunday, September 6, 2020

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

 
लखनऊ : प्रदेश में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू हो गई है। सरकार ने जांच के लिए बोर्ड को एक माह का समय दिया है ।बोर्ड ने जिलों में जांच के लिए प्रभारी अफसर नियुक्त कर दिए हैं। साथ हीबोर्ड के एक-एक कर्मचारी को भी हर जिले में लगाया गया है | जिलों से शिक्षकों की मार्कशीट वअभिलेख मदरसा बोर्ड मंगाए गए हैं।


मार्कशीट व अभिलेख फर्जी मिलने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने क्ताया कि यदि किसी अफसर ने जांच में लापरवाही बरती तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Wednesday, August 26, 2020

उच्च शिक्षा : सत्यापन के फरमान के खिलाफ शिक्षकों ने उठाई आवाज, शिक्षक संगठनों ने की उप मुख्यमंत्री से जांच स्थगित करने की मांग

उच्च शिक्षा : सत्यापन के फरमान के खिलाफ शिक्षकों ने उठाई आवाज।

महाविद्यालयों के पास नहीं है सत्यापन शुल्क का बजट




राज्य मुख्यालय : प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन कराने के फरमान के खिलाफ आवाज मुखर होने लगी है। शिक्षक संगठनों ने उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा से यह जांच स्थगित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पूर्व में जारी शासनादेश के विपरीत जाकर अब सत्यापन की कार्रवाई शुरू कराई जा रही है। यह कार्रवाई शिक्षकों के उत्पीड़न का जरिया बन रही है।





शिक्षक संगठनों का यह आक्रोश क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों के उस पत्र के बाद मुखर हुआ है, जिसमें विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों से अपने सभी शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का उसे निर्गत करने वाले बोर्ड या विश्वविद्यालय से सत्यापन कराने को कहा गया है। इससे पहले शासन के आदेश पर जिले स्तर पर गठित कमेटी ने शिक्षकों की जांच की थी। इसमें शैक्षिक अभिलेखों के साथ-साथ सेवा अभिलेखों की भी जांच की गई थी।




लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने उप मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर कहा है कि शासनादेश में कहीं भी शैक्षणिक अभिलेखों की जांच संबंधित संस्थान द्वारा कराने का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इस तरह क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों द्वारा शासनादेश का उल्लंघन किया जा रहा है। लुआक्टा ने यह तथ्य भी संज्ञान में लाया है कि अभिलेखों की जांच के लिए शुल्क की अदायगी करनी पड़ती है। महाविद्यालयों के पास किसी तरह का कोई कोष नहीं है जिससे अभिलेखों के सत्यापन के लिए शुल्क जमा कर सके। कतिपय महाविद्यालयों द्वारा शिक्षकों से शैक्षणिक अभिलेखों की जांच के नाम पर धनउगाही की जा रही है।


लुआक्टा ने ज्ञापन में कहा है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना की गई है और जांच के लिए निर्धारित 31 जुलाई 2020 की तिथि तक जांच कार्य पूर्ण नहीं की गई। इस कारण अब जांच कार्य स्थगित कर दिया जाना चाहिए और शासनादेश के विपरीत क्षेत्रीय कार्यालयों से जारी पत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाना चाहिए।


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Saturday, August 22, 2020

उच्च शिक्षा : शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का भी होगा सत्यापन, संबंधित बोर्ड को भेजे जाएंगे मामले

उच्च शिक्षा : शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का भी होगा सत्यापन, संबंधित बोर्ड को भेजे जाएंगे मामले।


उच्च शिक्षा : उत्तर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का संबंधित परीक्षा बोर्ड व विश्वविद्यालय से सत्यापन कराया जाएगा। शासन ने सत्यापन कराने की जिम्मेदारी उन शिक्षण संस्थाओं पर ही डाल दी है, जहां शिक्षक कार्यरत हैं।



शासन के आदेश पर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों और राजकीय व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों को इसके लिए पत्र लिखा है। उनसे कहा गया है कि वे अपने यहां कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन उन बोर्डों या विश्वविद्यालयों से करा लें, जहां वे जारी किए गए हैं।

इससे पहले शासन के आदेश पर सभी जिलों में गठित जांच कमेटी ने शिक्षकों का भौतिक सत्यापन करने के साथ-साथ उनके सेवा संबंधी अभिलेखों एवं शैक्षिक अभिलेखों की जांच की थी। इसके तहत सभी अभिलेखों की मूल प्रतियों का मिलान किया गया था। अभी तक विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षकों के अकपंत्रों या प्रमाणपत्रों का सत्यापन, उन्हें जारी करने वाले बोर्ड या विश्वविद्यालय से नहीं कराया जाता था।


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Friday, August 14, 2020

17 अगस्त तक तैयार होगी राज्य विवि व एडेड डिग्री कालेज के संदिग्ध शिक्षकों की अंतिम रिपोर्ट

17 अगस्त तक तैयार होगी राज्य विवि व एडेड डिग्री कालेज के संदिग्ध शिक्षकों की अंतिम रिपोर्ट

 
प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत 27 शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी सामने आयी है। इन शिक्षकों के शैक्षिक अंक पत्र व प्रमाण पत्र संदिग्ध मिले हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय के निर्देश पर क्षेत्रीय अधिकारी मामले की गहन पड़ताल में जुटे हैं।


क्षेत्रीय. अधिकारियों को 17 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट निदेशालय को भेजनी है। निदेशालय रिपोर्ट की पड़ताल करके उसे शासन को भेजेगा। इसमें जिनके दस्तावेज गड़बड़ होंगे उन्हें निलंबित करके कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शासन ने शिक्षकों की नियुक्ति में होने वाली गड़बड़ी को रोकने व सारी प्रक्रिया पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया है। इसके तहत समस्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कराई गई है। 


बीते 30 जुलाई तक 11,412 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हुई। इसमें 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले थे। इसमें सबसे अधिक मेरठ परिक्षेत्र के 22 शिक्षक हैं। इनकी मार्कशीट में नाम बदलने, जन्म तारीख में बदलाव, फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा ने बताया कि जिन शिक्षकों के दस्तावेजों में खामियां मिली हैं, उनकी जांच अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। क्षेत्रीय अधिकारियों की रिपोर्ट मिलने पर शिक्षकों का पक्ष सुना जाएगा, फिर अंतिम कार्रवाई की जाएगी।

Thursday, August 13, 2020

फर्रुखाबाद : शिक्षकों के सत्यापन का कार्य जल्द पूर्ण कराने का निर्देश, फर्जी नियुक्तियों पर नकेल कसने के लिए हो रही कार्रवाई

5758 शिक्षको के सत्यापन का कार्य पूर्ण करने के निर्देश

फर्रुखाबाद : शासन के निर्देश के बावजूद परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत शिक्षामित्रों और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात अंशकालिक अनुदेशकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों और आधार के सत्यापन का काम सुस्त गति से चल रहा है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया है कि सत्यापन 31 अगस्त तक पूरा कर लिया जाए।




प्राथमिक स्कूलों में 2596 शिक्षको और 1668 शिक्षा मित्र व पूर्व माध्यमिक स्कूलों के 1230 शिक्षकों, 264 अनुदेशकों की तैनाती है। फर्जी नियुक्तियों पर नकेल कसने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग इनके सेवा विवरण को मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करा रहा है। साथ ही, उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों और आधार का सत्यापन भी करा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग ने 27 जून को शासनादेश जारी कर शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का सेवा विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करने के साथ उनके डाटा और अभिलेखों का सत्यापन कराने का निर्देश दिया था। इसके क्रम में सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय ने विगत तीन जुलाई को शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का आधार सत्यापन और फिंगर प्रिंट स्कैनर खरीदने के बारे में निर्देश जारी किए थे।


हाल ही में सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से की गई समीक्षा में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के प्रमाणपत्रों और आधार सत्यापन की स्थिति को असंतोषजनक पाया गया। इस पर माहानिदेशक ने नाराजगी व्यक्त की है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने 31 अगस्त की मियाद तय करते हुए बीएसए और डायट प्राचार्य को इसकी निगरानी करने का निर्देश दिया है। बीएसए लालजी यादव ने बताया कि सभी खण्ड शिक्षा अधिकारियों को 31 अगस्त तक सत्यापन कार्य पूर्ण करने के निर्देश दे दिए गए है।

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