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Thursday, January 11, 2024

उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश के बाद 22 जनवरी को राम मन्दिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर माध्यमिक विद्यालयों हेतु आदेश जारी

उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश के बाद 22 जनवरी को राम मन्दिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर माध्यमिक विद्यालयों हेतु आदेश जारी


🔴 22 जनवरी को रहेगा अवकाश

🔴 14 से 21 जनवरी के मध्य शिक्षण संस्थान की साफ सफाई 

🔴 22 से 26 जनवरी के मध्य विद्यालय भवनों को प्रकाशित करने का निर्देश



Thursday, August 24, 2023

इतने तामझाम के बाद भी परिषदीय स्कूलों की सफाई व्यवस्था पर अब भी सवाल

इतने तामझाम के बाद भी परिषदीय स्कूलों की सफाई व्यवस्था पर अब भी सवाल



चाहे शासन हो या विभाग, स्कूल से सम्बन्धित अनेक आदेशों में सफाई व्यवस्था पर खासा जोर दिया जाता है लेकिन धरातल पर क्या हो रहा है, इसकी सुध नहीं ली जाती है। शौचालयों, परिसर व कक्षा कक्षों की सफाई कौन और किस तरह कर रहा है, कभी इसकी जांच नहीं कराई गई। शिक्षकों का यह दर्द रह रहकर उभरता है लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है।


नाम न छापने की शर्त पर  तमाम बेसिक शिक्षक बताते हैं कि परिषदीय स्कूलों की सफाई व्यवस्था रामभरोसे है। अनेक स्कूलों में सफाईकर्मी स्कूल ही नहीं जाते हैं। ग्राम प्रधानों से संपर्क पर बताया कि जाता है कि तैनाती ही नहीं है। जहां तैनाती है, वहां सफाईकर्मी नियमित रूप से स्कूल नहीं जाते हैं। 


छोटे परिसर व कक्षा कक्षों की सफाई किसी तरह रसोइयों से करा ली जाती है लेकिन बड़े परिसर व अधिक कक्षा कक्षों की सफाई से रसोईयां भी तौबा कर लेती हैं। इन हालातों में आखिर स्कूलों की सफाई कौन करेगा, इसका जवाब अब तक जिम्मेदारों ने नहीं दिया है। इन दिनों बारिश के मौसम में घासफूस तेजी से बढ़ी है लेकिन नियमित सफाई नहीं की जा रही है।


प्रॉक्सी सफाईकर्मियों की करते हैं तैनाती !: 
सूत्र बताते हैं कि ऐसे कई सफाईकर्मी हैं जो तैनाती स्थल पर जाने की बजाए अपनी जगह गांव के ही किसी गरीब को कुछ पैसों पर रख देते हैं। प्रॉक्सी सफाईकर्मी न तो स्कूल जाता है और न ही गांव की गलियों की सफाई करता है।


शौचालयों की सफाई | सबसे बड़ी परेशानी

सबसे बड़ी परेशानी शौचालयों की सफाई को लेकर है। यह ऐसी जगह है जहां नियमित सफाई की आवश्यकता है। छोटे बच्चे इसे एक दिन में ही गंदा कर देते हैं। सफाईकर्मी विहीन स्कूलों में इनकी सफाई हमेशा बड़ा मुद्दा रहती है। शिक्षक इसे लेकर आवाज उठाते हैं लेकिन सुनता कोई नहीं है। प्राइवेट कर्मी शौचालय सफाई के लिए अक्सर तैयार नहीं होते हैं।

Tuesday, March 8, 2022

रसोइयों परिषदीय स्कूलों में झाडू लगाने के लिए विवश, सफाईकर्मियों की लापरवाही पड़ रही भारी, जिम्मेदारी के हिसाब से नहीं मिलता मानदेय

रसोइयों परिषदीय स्कूलों में झाडू लगाने के लिए विवश, सफाईकर्मियों की लापरवाही पड़ रही भारी, जिम्मेदारी के हिसाब से नहीं मिलता मानदेय



परिषदीय विद्यालयों में मध्याहन भोजन बनाने वाली रसोइयों को भोजन बनाने के साथ ही विद्यालयों में सफाई भी करनी पड़ती है। 


विद्यालयों में झाडू लगाने के दौरान रसोइयों के कपड़े भी गंदे हो जाते हैं। अब ऐसे में किस तरह भोजन में सफाई की उम्मीद की जा सकती है। विद्यालयों पर सफाईकमी नियमित दिखते नहीं हैं तो उनसे विद्यालय में सफाई से कोई मतलब ही नहीं।


रसोइयों में झाडू आदि लगवाए जाने के बाबत पूछे जाने पर अध्यापक और अध्यापिकाओं ने पल्ला झाड़ लिया। अधिकारी भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। रसाइयों को मानदेय के नाम पर मनरेगा श्रमिकों से भी कम मजदूरी दी जाती है। मनरेगा अमिको को जहां 204 रुपया मजदूरी दी जाती है वहीं रसोइयों को महज 50 रुपया प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। 


विद्यालय में जिम्मेदारी के हिसाब से मानदेय नहीं दिया जा रहा है। पहले मात्र एक हजार रुपये महिने दिए जाते थे। अब 1500 रुपये कर दिए गए है। इतने कम पैसे से परिवार का गुजर असर नहीं हो पा रहा है।  - फुलमनी देवी


विद्यालय में सफाईकमी तैनात है लेकिन उनसे विद्यालय की साफ-सफाई नहीं कराई जाती है। न चाहते हुए भी यह जिम्मेदारी विद्यालय की ओर से न कराया जाता है - पनपत्ति देवी 


मनरेगा की मजदूरी 204 है। जबकि हम सब को एक माह का मानदेय 1500 सी रुपया मिलता है. यह भी मिलने में तीन से चार का समय लग जाता है।- शैला देवी 


एक वर्ष में 10 माह ही काम मिलता है। जब कि सुबह से विद्यालय में पांच घंटे से भी अधिक कार्य करना पड़ता है। उसके हिसाब से ऐसा नहीं मिलता है ऊपर से काम के लिए जी हजूरी करनी पड़ती है।- अनिता देवी 


  सुबह विद्यालय पहुंचकर लगाने और भोजन बनाने व बर्तन साफ करने में 3 बज जाता है। जिससे अन्य कोई दूसरा कार्य नही कर पाती ऐसे में 50 रुपया प्रतिदिन मिलने वाले मानदेय से परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है। - अमरावती देवी


बच्चों के लिए भोजन बनाना जिम्मेदारी वाला कार्य है। भोजन बनाने और साफ सफाई के हिसाब से काफी कम मजदूरी मिल रही है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।