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Saturday, October 18, 2025

शिक्षक ने ले ली थी दवा की ओवरडोज, बच्चों का आधार न बनने से शिक्षक का बीईओ ने रोका था वेतन


शिक्षक ने ले ली थी दवा की ओवरडोज, बच्चों का आधार न बनने से शिक्षक का बीईओ ने रोका था वेतन

बीईओ कार्यालय की ओर से बच्चों का आधार कार्ड न बनने के चलते छह शिक्षकों का वेतन रोका गया था। बाद में अन्य शिक्षकों का वेतन बहाल हो गया, परंतु शौकिंद्र का वेतन दो माह से रुका रहा।

शौकिंद्र ने इस संबंध में बीएसए को पत्र भेजकर अपनी स्थिति बताई थी, जिस पर बीएसए ने वेतन भुगतान का निर्देश भी दिया, मगर इसके बाद बीईओ ने रोक जारी रखी कि जब तक सभी रजिस्टर आनलाइन नहीं होंगे, आख्या नहीं लगाई जाएगी। शिक्षक व बीईओ के बीच व्हाट्सएप चैटिंग भी हुई, बाद में इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो गई। 

शिक्षक ने दीपावली के पहले घर जाने की इच्छा जताई और कहा कि सभी का वेतन जारी कर दिया गया है, केवल उनका रोका गया है। यह भी लिखा कि वे मानसिक रूप से परेशान हैं, और यदि वेतन नहीं मिला तो उनके पास आत्महत्या के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचेगा। बुधवार की रात करीब आठ बजे शौकिंद्र ने कमरे में रखी दवाओं की ओवरडोज ले ली। 

लोगों ने उन्हें चिकित्सक के पास उपचार के बाद घर भेज दिया गया। गुरुवार की सुबह फिर स्थिति गंभीर देख उन्हें सीएचसी इटवा और मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। बड़ी संख्या में शिक्षक अस्पताल पहुंचे। 

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राधेरमण ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है। शिक्षक दो माह से वेतन के लिए दर-दर भटक रहा है। इससे वह मानसिक रूप से टूट गया। इस पर बीईओ पर मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला महामंत्री पंकज त्रिपाठी व ब्लाक अध्यक्ष मो. इमरान ने कहा कि यह प्रशासनिक असंवेदनशीलता का उदाहरण है। डीएम ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। इसमें एडीएम, मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्साधीक्षक व बीएसए को शामिल किया गया है। 



बीईओ पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर शिक्षक ने खाया जहर, बाधित वेतन बहाल करने की लगाई थी गुहार, सोशल मीडिया पर दी थी खुदकुशी की चेतावनी

सिद्धार्थनगर के खुनियांव ब्लॉक में तैनात हैं शोकेंद्र यादव


सिद्धार्थनगर। इटवा थाना क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय भदोखर भदोखरी में तैनात शिक्षक शोकेंद्र यादव ने बुधवार की देर शाम जहर खा लिया। मूलतः बागपत जिले के थाना सराय रसूलपुर संकुल पुठी पोआमी नगर, थाना सराय निवासी शोकेंद्र का आरोप है कि बीईओ इटवा के उत्पीड़न और बदसलूकी से तंग आकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।


उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। बीईओ ने आरोपों को गलत बताया है। वहीं, डीएम ने मामले की जांच के लिए एडीएम की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। इटवा ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय भदोखर भदोखरी में तैनात शोकेंद्र महादेव घूरहू निवासी जमील के मकान में किराये पर रह रहे हैं। शोकेंद्र का आरोप है कि बीईओ इटवा राजेश कुमार ने उनका वेतन बाधित कर दिया था। आरोप है कि कई बार अनुरोध के बाद भी बीईओ वेतन बहाल नहीं कर रहे थे। 

दीपावली नजदीक आने पर भी वेतन न मिल पाने से वह बहुत परेशान थे। उन्होंने बीईओ को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर दीपावली से पहले वेतन बहाल करने की सिफारिश की थी। बीईओ से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलने पर वह निराश हो गए थे।

बुधवार को बीईओ को व्हॉट्सएप पर भेजे मैसेज में उन्होंने वेतन न मिलने पर खुदकुशी की बात भी लिखी थी। इसके बाद आत्मघाती कदम उठा लिया। जानकारी होने पर लोग एक प्राइवेट अस्पताल में ले गए जहां रात में इलाज चला। बृहस्पतिवार की सुबह साथी शिक्षक सीएचसी इटवा ले आए। 




Thursday, April 10, 2025

पहले स्वीकृत करते थे अवकाश बाद में रुपये नहीं मिलने पर करते थे अनुपस्थित, भारी पड़ी बीईओ को मनमानी, अब हुए निलंबित

पहले स्वीकृत करते थे अवकाश बाद में रुपये नहीं मिलने पर करते थे अनुपस्थित, भारी पड़ी बीईओ को मनमानी, अब हुए निलंबित

• जांच में दोषी मिले थे बीईओ इटवा, डीएम ने कार्रवाई के लिए लिखा था पत्र


सिद्धार्थनगररुपये लेकर अवकाश स्वीकृत करना सहित तमाम कार्यों में मनमाना रवैया अपनाना खंड शिक्षाधिकाकरी (बीईओ) महेंद्र कुमार को भारी पड़ा। जिलाधिकारी के पत्र व जांच रिपोर्ट के आधार पर अपर शिक्षा निदेशक बेसिक कामता राम पाल ने मंगलवार को उन्हें निलंबित कर दिया।

बीईओ इटवा महेंद्र कुमार द्वारा अवकाश स्वीकृत करने के नाम पर मनमानी की जा रही है। वह पहले अवकाश स्वीकृत करते थे और उसके लिए रुपये नहीं मिलते तो बाद में निरीक्षण कर उसी शिक्षक को अनुपस्थित कर देते थे।  जिलाधिकारी डा.राजा गणपति आर ने संज्ञान लेकर शासन को पत्र लिखा था। अपर शिक्षा निदेशक बेसिक ने पत्र का संज्ञान लेकर बीईओ इटवा को निलंबित कर दिया। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी शैलेष कुमार का कहना है कि डीएम के आधार पर अपर निदेशक बेसिक ने बीईओ इटवा को निलंबित कर दिया है। जांच होने तक वह मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक गोरखपुर मंडल कार्यालय से संबद्ध रहेंगे।


यह था मामला : इटवा तहसील क्षेत्र के ग्राम सिसवा बुजुर्ग निवासी शैलेष कुमार ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बीइओ इटवा पर गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि बीईओ इटवा अवकाश स्वीकृत करने के नाम पर शिक्षकों से धन उगाही करते हैं, जहां रुपये नहीं मिलते उसके अवकाश को निरस्त करते हैं। जांच के नाम उनका उत्पीड़न करते हैं। डीमए ने मामले को गंभीरता से लेते हुए  तत्कालीन उप जिलाधिकारी इटवा को मामले की जांच करायी थी। जांच में बीईओ अधिकांश बिंदुओं में दोषी मिले थे। जांच में पता चला है कि इटवा ब्लाक संसाधन क्षेत्र के शिक्षक अजय मौर्या ने दो दिवसीय अवकाश के लिए आवेदन दिया था। बीइओ ने उनके अवकाश को स्वीकृत किया और बाद में उन्हें निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित कर दिया है। एसडीएम ने इसे मनमानीपूर्ण रवैया बताया था।

प्राथमिक विद्यालय इटवा प्रथम की सहायक अध्यापिका सरिता मौर्या ने बच्चे के देखभाल के के लिए अवकाश मांगा था। शैलेष ने आरोप लगाया है कि रिश्वत नहीं मिलने पर बीईओ ने उनके आवेदन को निरस्त कर दिया। एसडीएम की जांच में रुपये लेने का कोई साक्ष्य नहीं मिला है, लेकिन आवेदन निरस्त करने व बाद में स्वीकृत करने को एसडीएम ने बीइओ का मनमानी पूर्ण रवैया माना था।

बीईओ इटवा अवकाश स्वीकृत करने के मामले में दोषी मिले थे। उनकी जांच करायी गयी थी। उनके विरुद्ध शासन को पत्र लिखा गया था। पत्र का संज्ञान लेकर अपर निदेशक बेसिक ने उन्हें निलंबित कर दिया।डा. राजा गणपति आर, जिलाधिकारी



भ्रष्ट आचरण पर सिद्धार्थनगर के  BEO निलंबित, देखें आदेश 
 

Sunday, December 1, 2024

बीएसए की पहल पर कबाड़ी को किताबें बेचने के मामले में बीईओ की गिरफ्तारी को जिलाधिकारी ने बताया नियम विरुद्ध, सीओ और एसओ के खिलाफ कार्यवाही हेतु एसपी को लिखा पत्र

बीएसए की पहल पर कबाड़ी को किताबें बेचने के मामले में बीईओ की गिरफ्तारी को जिलाधिकारी ने बताया नियम विरुद्ध, सीओ और एसओ के खिलाफ कार्यवाही हेतु एसपी को लिखा पत्र


बांसी। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने परिषदीय विद्यालय की किताबें कबाड़ी को बेचने के मामले में शुक्रवार को हुई बीईओ बांसी की गिरफ्तारी को नियम विरुद्ध बताते हुए प्रभारी निरीक्षक और सीओ बांसी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए एसपी को पत्र लिखा है। इस मामले को संज्ञान में लाने के लिए बीएसए ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा था।


बीएसए ने डीएम लिखे पत्र में कहा था कि पुस्तकें कबाड़ी को बेचने के आरोप में बीईओ कार्यालय के अनुचर सहाबुद्दीन और रामजस के विरुद्ध पुलिस ने बिना विभागीय जांच प्राथमिकी दर्ज की थी। इस प्राथमिकी में बीईओ अखिलेश कुमार सिंह का नाम नहीं था। सिर्फ अनुचरों के बयान को आधार बनाकर अखिलेश कुमार सिंह के नाम को प्रकाश में लाकर गिरफ्तारी की गई है। उन्होंने मुख्य सचिव के शासनादेश का हवाला देते हुए कहा है कि यदि किसी अधिकारी और कर्मचारी द्वारा बरती अनियमितता प्रकाश में आती है तो उसके विरुद्ध जांच के बाद अनुशासनिक विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।


बीएसए ने कहा है कि विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई में यदि यह पाया जाता है कि उसकी कोई आपराधिक भूमिका है तो उसके विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराए जाने पर विचार किया जाता है। अन्यथा विभागीय कार्रवाई में जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर दंड दिए जाते हैं। बीएसए ने कहा है कि प्रभारी निरीक्षक और सीओ बांसी ने शासनादेश का पालन नहीं किया। उन्होंने डीएम से प्रभारी निरीक्षक और सीओ बांसी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की। बीएसए की शिकायत के आधार पर डीएम ने एसपी को पत्र लिखा है।


बीईओ की गिरफ्तारी के मामले में शासनादेश का उल्लंघन किया गया है। किसी आपराधिक मामले में विभागीय जांच में दोष साबित होने पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले में बांसी के सीओ और कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी को पत्र लिखा गया है। ~ डॉ0 राजा गणपति आर, जिलाधिकारी




BEO Arrested: कबाड़ी के यहां किताब की बिक्री मामले में बीईओ गिरफ्तार

30 नवंबर 2024
सिद्धार्थनगर। बांसी कोतवाली की पुलिस ने परिषदीय विद्यालय की पुस्तकों को कबाड़ी से बेचने के मामले शुक्रवार को पांचवें आरोपी खंड शिक्षा अधिकारी बांसी अखिलेश सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया है।


बताते चलें कि 15 अक्तूबर परिषदीय विद्यालय की पुस्तक बेचने के मामले में कोतवाली पुलिस ने दो कबाड़ी और दो खंड शिक्षा अधिकारी बांसी के कार्यालय सहायक कुल चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 


बच्चों को पढ़ने के लिए निशुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराई गई कक्षा एक से आठ तक की पुस्तक खंड शिक्षा अधिकारी बांसी के कार्यालय में पड़ी थी। जिसे विद्यालयों में न भेजकर अतिरिक्त आमदनी के लिए कबाड़ी के हाथ बेच दिया था। 15 अक्तूबर को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने एक पिकअप से कक्षा एक से आठ तक की 8 क्विंटल किताबों को ले जाते समय कबाड़ी को पकड़ा था।


पकड़े गए कबाड़ी कस्बे के शास्त्रीनगर वार्ड निवासी अंकित कसेरा व प्रतीक कसेरा उर्फ गोपाल और खंड शिक्षा अधिकारी बांसी कार्यालय सहायक शहाबुद्दीन पुत्र मो इस्लाम निवासी नेउरी थाना मिश्रौलिया व अनुचर रामजस निवासी प्रतापनगर कस्बा बांसी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 


इसमें पांचवें आरोपी के रूप में बीईओ थे। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगी थी। शुक्रवार को मौके पर पहुंचकर दबोच लिया। इस संबंध में कोतवाल बांसी राम कृपाल शुक्ल ने बताया कि पांचवें आरोपी खंड शिक्षा अधिकारी बांसी अखिलेश सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया गया है।

Sunday, October 6, 2024

हाईकोर्ट का बीएसए को निर्देश: सहायक अध्यापक नियुक्ति से पहले बतौर शिक्षामित्र के रूप में की गई सेवा भी जोड़ने पर करें विचार

हाईकोर्ट का बीएसए को निर्देश: सहायक अध्यापक नियुक्ति से पहले बतौर शिक्षामित्र के रूप में की गई सेवा भी जोड़ने पर करें विचार 


प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सिद्धार्थनगर जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को सहायक अध्यापक नियुक्ति से पहले की गई सेवा को वरिष्ठता निर्धारण में शामिल करने की मांग पर विचार करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने 48 सहायक अध्यापकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। याचिकाकर्ताओं ने सहायक अध्यापक बनने से पहले शिक्षामित्र के रूप में की गई सेवा को वरिष्ठता निर्धारण में जोड़ने की मांग की थी।


याचिकाकर्ताओं में रामराज चौधरी और 47 अन्य जूनियर बेसिक स्कूलों के सहायक अध्यापक शामिल हैं, जिन्होंने यह याचिका दायर की थी। उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षामित्र के रूप में उनके द्वारा दी गई सेवा को नियुक्ति के समय वरिष्ठता सूची में शामिल नहीं किया गया, जिससे उन्हें वरिष्ठता के लाभ से वंचित किया गया है। याचिका में कहा गया कि सहायक अध्यापक बनने से पहले उनकी की गई सेवा का मूल्यांकन किया जाना चाहिए और इसे उनकी वरिष्ठता में जोड़ा जाना चाहिए।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बेसिक शिक्षा अधिकारी को नियमानुसार इस मांग पर विचार करना चाहिए और इसे सुलझाने के लिए अगले दो माह के भीतर निर्णय लेना होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में नियमों और प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही की जानी चाहिए।

यह निर्णय 48 सहायक अध्यापकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपनी सेवा अवधि को वरिष्ठता में जोड़ने की उम्मीद कर रहे हैं। अगर बेसिक शिक्षा अधिकारी सहायक अध्यापक बनने से पहले की सेवा को वरिष्ठता निर्धारण में शामिल करने के पक्ष में निर्णय लेते हैं, तो इसका असर इन शिक्षकों की पदोन्नति और वेतनमान और पुरानी पेंशन पर भी पड़ सकता है।

Thursday, March 21, 2024

सिद्धार्थनगर में बीएसए-बीईओ व दो बाबुओं पर मुकदमा दर्ज, फर्जी तरीके से स्कूलों की मान्यता दिलाने, फर्जी नियुक्ति कर वेतन भुगतान करने और कर्मचारियों को संरक्षण देने का आरोप

सिद्धार्थनगर में बीएसए-बीईओ व दो बाबुओं पर मुकदमा दर्ज, फर्जी तरीके से स्कूलों की मान्यता दिलाने, फर्जी नियुक्ति कर वेतन भुगतान करने और कर्मचारियों को संरक्षण देने का आरोप

सिद्धार्थनगर : BSA और BEO समेत चार लोगों पर धोखाधड़ी और साजिश रचने के आरोप में मुकदमा दर्ज, जानिए क्या है मामला


सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थनगर जिले में फर्जी तरीके से स्कूलों को मान्यता दिलाने तथा कुछ अन्य आरोपों के सिलसिले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और खण्ड शिक्षा अधिकारी समेत शिक्षा विभाग के चार कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। 


पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने बताया कि संतकबीरनगर जिले के बेलवनिया गांव के विनोद प्रताप सिंह की शिकायत की पुलिस के विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने जांच की थी तथा जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर सदर कोतवाली क्षेत्र में बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेन्द्र कुमार पांडेय, खण्ड शिक्षा अधिकारी कुंवर विक्रम पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात लिपिक शिव सागर चौबे और मुकुल मिश्रा के खिलाफ रविवार शाम मुकदमा दर्ज किया गया। 

उन्होंने बताया कि इन अभियुक्तों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी हस्ताक्षर कर कई स्कूलों को मान्यता दी है, फर्जी उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति की है, गलत तरीके से वेतन निकाला है और उर्दू शिक्षक भर्ती की पत्रावलियों को कार्यालय से गायब किया है। 

सिंह ने बताया कि इस सिलसिले में रविवार शाम सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि संतकबीरनगर जिले के बेलवनिया गांव के विनोद प्रताप सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की एसटीएफ द्वारा जांच में पुष्टि होने पर यह मुकदमा पंजीकृत किया गया है। 

सूत्रों ने दर्ज रिपोर्ट के हवाले से बताया कि सिद्धार्थनगर जिले के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी राम सिंह ने 10 फरवरी 2021 और 30 नवंबर 2021 को जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने फर्जी हस्ताक्षर करके कुछ विद्यालयों को मान्यता दिलाये जाने और फर्जी तरीके से उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति कर वेतन भुगतान किये जाने का आरोप लगाते हुए उसकी जांच की मांग की थी। 

विनोद प्रताप सिंह के अनुसार जब उन्हें इस कथित जालसाजी की जानकारी हुई तो उन्होंने भी उच्च अधिकारियों से इस प्रकरण की जांच की मांग की। उनके मुताबिक जब कोई निष्कर्ष नहीं निकला तो उन्होंने मौजूदा बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार पांडे की इस मामले में भूमिका को संदिग्ध मानते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की। 

विनोद प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने साथ ही, देवेंद्र कुमार पांडे द्वारा पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राम सिंह के पत्र पर जांच करने के बजाय संदेहास्पद भूमिका वाले दोनों लिपिकों को संरक्षण दिये जाने और जालसाजों के साथ मिलकर पत्रावलियों को गायब करने की आशंका व्यक्त करते हुए पुलिस के विशेष कार्यबल के अपर पुलिस महानिदेशक अमिताभ यश से भी इसकी शिकायत की थी। सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ ने इस मामले की जांच की और वादी विनोद प्रताप सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों को सही पाया। 


विभिन्न आरोपों के चलते BSA व अन्य के खिलाफ FIR दर्ज

Friday, January 12, 2024

फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी कर रहे 382 शिक्षक किए जाएंगे बर्खास्त, 48 जिलों के बीएसए को STF ने जांच के बाद लिखा पत्र

फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी कर रहे 382 शिक्षक किए जाएंगे बर्खास्त, 48 जिलों के बीएसए को STF ने जांच के बाद लिखा पत्र


लखनऊ : परिषदीय स्कूलों में फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी करने वाले 382 शिक्षकों को बर्खास्त करने की संस्तुति यूपी एसटीएफ की ओर से की गई है। सबसे ज्यादा 52 शिक्षक देवरिया के हैं। मथुरा के 43 और सिद्धार्थनगर के 29 फर्जी शिक्षक इसमें शामिल हैं। बीते करीब पांच वर्षों से एसटीएफ फर्जी मार्कशीट व प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी कर रहे शिक्षकों की जांच कर रही थी। बर्खास्तगी के बाद फर्जी शिक्षकों को दिए गए वेतन की वसूली भी की जाएगी।

परिषदीय स्कूलों में शिक्षक पद पर वर्ष 2006 से वर्ष 2016 तक भर्तियां हुई थीं। बीते दिनों देवरिया के 85 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। अब इस जिले में 52 और फर्जी शिक्षक सामने आ गए हैं। जिन 382 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त करने की सिफारिश की गई है वे 48 जिलों के हैं। इन जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दे दी गई है। शिक्षक भर्ती के पूरे डाटाबेस की गहन जांच की जा रही है।



एसटीएफ की जांच के फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी कर रहे 382 बेसिक शिक्षक होंगे बर्खास्त, सबसे ज्यादा देवरिया और मथुरा जिले के


फर्जी दस्तावेज लगाकर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले प्रदेश के 382 शिक्षकों को जल्द बर्खास्त किया जा सकता है। यूपी एसटीएफ ने जांच के बाद दोषी पाए गए शिक्षकों को बर्खास्त करने के लिए 48 जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा है। इन सभी की जांच बीते करीब साढ़े तीन वर्षों के दौरान की गयी है।




बता दें कि एसटीएफ बीते करीब पांच वर्ष से फर्जी दस्तावेज लगाकर शिक्षक की नौकरी हासिल करने के मामले की जांच कर रही है। एसटीएफ के अनुमान के मुताबिक प्रदेश में इस तरह के करीब 50 हजार शिक्षक हैं, जिन्होंने दूसरे की मार्कशीट लगाकर नौकरी हासिल की और सालों से काम कर रहे हैं। हाल ही में एसटीएफ ने ऐसे 382 शिक्षकों के खिलाफ जांच पूरी कर उनको बर्खास्त करने की संस्तुति की है। इनमें सर्वाधिक 52 शिक्षक देवरिया के हैं। इसके अलावा मथुरा के 43, सिद्धार्थनगर के 29 शिक्षक हैं। बाकी जिलों के शिक्षकों की सूची जल्द अपडेट हो जाएगी। 



2006 से 2016 तक हुए भर्ती

एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक ये भर्तियां वर्ष 2006 से 2016 के बीच हुई थी। एसटीएफ और जिला पुलिस की जांच के बाद देवरिया में बीते दिनों 85 शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। अब एसटीएफ मुख्यालय यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि किस तरह जालसाजों ने सरकारी सिस्टम को धता बताकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की थी। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग के डाटाबेस की गहनता से पड़ताल जारी है।