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Tuesday, May 19, 2026

मुख्यमंत्री कंपोजिट मॉडल स्कूलों के निर्माण में करोड़ों रुपये के टेंडरों को लेकर बड़ा खेल, निर्माण में टेंडर की शर्तें अलग-अलग

मुख्यमंत्री कंपोजिट मॉडल स्कूलों के निर्माण में करोड़ों रुपये के टेंडरों को लेकर बड़ा खेल,  निर्माण में टेंडर की शर्तें अलग-अलग
 

लखनऊ। मुख्यमंत्री मॉडल स्कूलों के निर्माण में करोड़ों रुपये के टेंडरों को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। आरोप है कि यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन ने नियम-कानूनों को ताक पर रख दिया। प्रदेश में एक जैसे बनने वाले मॉडल स्कूलों के लिए अलग अलग टेंडर नियम बनाकर विभाग ने पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रदेश में करीब 80 मुख्यमंत्री मॉडल स्कूलों का निर्माण किया जा रहा है। इसमें से करीब 40 स्कूलों के निर्माण की जिम्मेदारी शासन ने यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन को दी है, लेकिन अब इन्हीं के निर्माण में अनियमितता और टेंडर हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के पत्र के बाद मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने मामले में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा से रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों का दावा है,जांच की आंच ऊपर तक पहुंचती देख मामले को दबाने की कोशिश शुरू हो गई।


जीएसटी जोड़कर बदले गए टेंडर के खेल: प्रदेश के लगभग सभी बड़े विभाग, पीडब्ल्यूडी, सीपीडब्ल्यूडी, एलडीए, नगर निगम, सिंचाई विभाग और आवास विकास परिषद खुद विकास कार्यों के टेंडर में जीएसटी अलग रखते हैं। इससे परियोजना की वास्तविक लागत और बिलो टेंडर की स्थिति स्पष्ट रहती है। लेकिन उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन ने कई टेंडरों में 18% जीएसटी जोड़कर लागत बढ़ा दी। 

यह खेल सिर्फ इसलिए हुआ ताकि कुछ विशेष श्रेणी के ठेकेदारों को पात्र बनाया जा सके। दरअसल, 20 करोड़ तक के कार्यों में ए श्रेणी के ठेकेदार हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन 20 करोड़ से ऊपर का टेंडर होने पर ए-1 प्लस श्रेणी के बड़े ठेकेदार पात्र हो जाते हैं। आरोप है कि विभाग ने जानबूझकर जीएसटी जोड़कर कई परियोजनाओं की लागत 20 करोड़ के पार पहुंचा दी।

टेंडर में जीएसटी की रकम नहीं जोड़ी जाती है। एलडीए में भी इसी तरह टेंडर होता है। यदि कोई विभाग कभी जीएसटी जोड़कर और कभी हटाकर टेंडर करता है तो सवाल उठेगा। -मानवेंद्र सिंह, मुख्य अभियंता, एलडीए



भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं है। अधिकारी जहां जरूरत समझते हैं वहां जीएसटी जोड़ देते हैं और जहां नहीं समझते हटाकर टेंडर कराते हैं। इसका कोई नियम नहीं है। -एके सिंह, सीजीएम, उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड

जहां चाहा जीएसटी हटाया, जहां चाहा जोड़ दिया

प्रोजेक्ट कारपोरेशन में टेंडर प्रक्रिया में दोहरे मानदंडों के उदाहरण भी सामने आए हैं। 3 मार्च 2023 को आगरा के बिरुनी में 18.47 करोड़ के मॉडल स्कूल का टेंडर बिना जीएसटी जोड़े निकाला गया। कई अन्य जिलों में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। दूसरी ओर 30 मई 2023 को मऊ के पितवल में मॉडल स्कूल निर्माण के लिए 20.15 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया, जिसमें जीएसटी जोड़ दी गई। बस्ती के रुधौली में 22.36 करोड़ के टेंडर में भी जीएसटी जोड़कर लागत बढ़ाई गई। आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के जरिए बिलो टेंडर की वास्तविक तस्वीर भी धुंधली कर दी गई।


टेंडर में एकरूपता होनी चाहिए। हम इस मामले को दिखवाएंगे। अलग अलग यूनिट के सीजीएम ने टेंडर कराए हैं। सुधारा जाएगा। सभी कामों के टेंडर एक ही शर्तों पर होंगे। संतोष कुमार सिंह, एमडी, उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन


Tuesday, November 19, 2024

यूपी की हर न्याय पंचायत में बनेगा एक अटल विद्यालय, शासन स्तर पर चल रही उच्च स्तरीय कवायद, डिजाइन से लेकर लागत तक का हो रहा है आंकलन

यूपी की हर न्याय पंचायत में बनेगा एक अटल विद्यालय, शासन स्तर पर चल रही उच्च स्तरीय कवायद, डिजाइन  से लेकर लागत तक का हो रहा है आंकलन 


खास बातें

■ दो से ढाई हजार बच्चों की क्षमता वाले बनाए जाएंगे नए स्कूल

■ मौजूदा सरकारी स्कूलों की जगह अटल स्कूल किए जा रहे प्रस्तावित

नए स्कूल बनाने पर खर्च करने होंगे तकरीबन आठ लाख करोड़

■ आवासीय नहीं मगर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त स्कूल बनाने की योजना


लखनऊ। यूपी के 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय खुल चुके हैं। मुख्यमंत्री हर जिले में ऐसे विद्यालय बनाने की घोषणा भी कर चुके हैं। मगर अब बात उससे भी आगे निकल कर हर न्याय पंचायत तक पहुंच गई है। सूबे की हर न्याय पंचायत में एक अटल विद्यालय बनाने की योजना है। हालांकि यह आवासीय नहीं होगा। इसे लेकर शासन स्तर पर उच्च स्तरीय कवायद चल रही है।


स्कूलों के डिजायन से लेकर उनकी लागत तक सबका आंकलन कराया जा रहा है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक यदि यह स्कूल बने तो इन पर करीब आठ लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा।अटल आवासीय विद्यालय योगी सरकार का एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इसमें प्रदेश के पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मजदूरों को मुफ्त पढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त आवासीय विद्यालय हर मंडल मुख्यालय में बनाया गया है।


अब इस परिकल्पना को नीचे तक यानि न्याय पंचायत स्तर तक ले जाने की योजना पर कवायद शुरू की गई है। फिलवक्त प्रदेश में अधिकांशत ग्राम पंचायत स्तर पर प्राथमिक स्कूल बने हैं। वहीं तीन से चार ग्राम पंचायतों को मिलाकर एक न्याय पंचायत गठित है। प्रदेश में इनकी संख्या तकरीबन आठ हजार से अधिक है।


क्या है योजना

न्याय पंचायत स्तर पर एक ऐसा स्कूल बनाने की है, जिसके बाद ग्राम पंचायतों में अलग-अलग स्कूलों की जरूरत ही न रहे यानि इस स्कूल की क्षमता दो से ढाई हजार बच्चों की हो सकती है। बच्चों को बसों के जरिए इस स्कूल तक लाया जाना प्रस्तावित है। इन स्कूलों को बनाने के पीछे तर्क यह है कि स्कूलों की संख्या घटने से प्रभावी मॉनीटरिंग की जा सकेगी। वहीं स्कूली भवनों पर रखरखाव का खर्च भी घटेगा।