निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाओं को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) पाने का हक, दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक faisala
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि निजी स्कूलों में कार्यरत महिला शिक्षकों को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) का अधिकार है। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 21 और दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम-1973 के तहत शिक्षकों के समान अधिकारों को मान्यता देता है।
नई दिल्ली। कामकाजी महिलाओं के हक में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अब निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षकों को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव पाने की हकदार होंगी।
महिला शिक्षकों के चाइल्ड केयर लीव (बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश या सीसीएल) का रास्ता खोलते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ आदेश दिया है कि सरकारी ही नहीं, निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षक भी अपने बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश पाने के हकदार हैं। पीठ ने कहा कि सीसीएल एक खास तरह की छुट्टी है जो बच्चे के विकास के लिए दी जाती है।
एक शिक्षिका की अपील याचिका पर निर्णय सुनाते हुए हाई कोर्ट ने एकल पीठ के निर्णय को रद कर दिया। एकल पीठ ने निजी स्कूल की शिक्षिका को सीसीएल को उसका अधिकार मानने से इन्कार कर दिया था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 (मौलिक अधिकार) के तहत प्रत्येक कर्मी को अपने बच्चे की देखभाल के लिए विशेष श्रेणी में दिए जाने वाले इस अवकाश को प्राप्त करने का अधिकार है। इसे संस्थान खारिज नहीं कर सकता। खासतौर पर शिक्षण के क्षेत्र में यह अधिकार सरकारी स्कूलों के बराबर मान्यता रखता है।
पीठ ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम-1973 की धारा-10 के तहत सरकारी स्कूल के बराबर ही निजी स्कूल के कर्मचारी को परिभाषित किया गया है। इसके तहत वेतनमान, भत्ते, चिकित्सा सुविधाएं, पेंशन, प्रोविडेंट फंड आदि समान रूप से देने का प्रविधान है। ऐसे में सीसीएल भी पाना प्रत्येक कर्मचारी का अधिकार है।
याचिका में शिक्षिका ने 12वीं में पढ़ने वाले अपने बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए एक महीने की सीसीएल मांगी थी। शिक्षिका का कहना था कि उनका बेटा पिछले कुछ समय से दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में उसकी मदद के लिए उसे छूट्टी दी जाए, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने ऐसा कोई प्रविधान न होने का हवाला देते हुए मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिक्षिका ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और एकल पीठ से राहत न मिलने पर अपील याचिका दायर की थी।
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