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Monday, June 15, 2026

निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाओं को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) पाने का हक, दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाओं को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) पाने का हक, दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक faisala


दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि निजी स्कूलों में कार्यरत महिला शिक्षकों को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) का अधिकार है। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 21 और दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम-1973 के तहत शिक्षकों के समान अधिकारों को मान्यता देता है।


नई दिल्ली। कामकाजी महिलाओं के हक में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अब निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षकों को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव पाने की हकदार होंगी।


महिला शिक्षकों के चाइल्ड केयर लीव (बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश या सीसीएल) का रास्ता खोलते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ आदेश दिया है कि सरकारी ही नहीं, निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षक भी अपने बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश पाने के हकदार हैं। पीठ ने कहा कि सीसीएल एक खास तरह की छुट्टी है जो बच्चे के विकास के लिए दी जाती है।

एक शिक्षिका की अपील याचिका पर निर्णय सुनाते हुए हाई कोर्ट ने एकल पीठ के निर्णय को रद कर दिया। एकल पीठ ने निजी स्कूल की शिक्षिका को सीसीएल को उसका अधिकार मानने से इन्कार कर दिया था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 (मौलिक अधिकार) के तहत प्रत्येक कर्मी को अपने बच्चे की देखभाल के लिए विशेष श्रेणी में दिए जाने वाले इस अवकाश को प्राप्त करने का अधिकार है। इसे संस्थान खारिज नहीं कर सकता। खासतौर पर शिक्षण के क्षेत्र में यह अधिकार सरकारी स्कूलों के बराबर मान्यता रखता है।

पीठ ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम-1973 की धारा-10 के तहत सरकारी स्कूल के बराबर ही निजी स्कूल के कर्मचारी को परिभाषित किया गया है। इसके तहत वेतनमान, भत्ते, चिकित्सा सुविधाएं, पेंशन, प्रोविडेंट फंड आदि समान रूप से देने का प्रविधान है। ऐसे में सीसीएल भी पाना प्रत्येक कर्मचारी का अधिकार है।

याचिका में शिक्षिका ने 12वीं में पढ़ने वाले अपने बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए एक महीने की सीसीएल मांगी थी। शिक्षिका का कहना था कि उनका बेटा पिछले कुछ समय से दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में उसकी मदद के लिए उसे छूट्टी दी जाए, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने ऐसा कोई प्रविधान न होने का हवाला देते हुए मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिक्षिका ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और एकल पीठ से राहत न मिलने पर अपील याचिका दायर की थी।

Thursday, June 4, 2026

अध्यापिका को CCL दिए जाने के मामले में मनमानेपन और मानसिक शोषण किए जाने तथा विभाग की छवि धूमिल करने पर कन्नौज के खण्ड शिक्षा अधिकारी निलंबित, देखें आदेश

उत्पीड़न और भ्रष्टाचार की शिकायत पर कन्नौज के खंड शिक्षा अधिकारी निलंबित, प्रधानाध्यापक की शिकायत पर अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने की कार्रवाई

चार बार सीसीएल निरस्त करने का भी आरोप

कन्नौज। जिले में भ्रष्टाचार व उत्पीड़न के आरोप में मंगलवार को सौरिख ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ पाठक को अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामताराम पाल ने निलंबित कर दिया। इससे पहले तालग्राम के खंड शिक्षा अधिकारी रमेशचंद्र चौधरी को भी निलंबित किया जा चुका है। सौरिख क्षेत्र की एक प्रधानाध्यापक की शिकायत पर जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। उन्हें भी एडी बेसिक कानपुर कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।

सौरिख ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया की प्रधानाध्यापक कल्पना पाल ने 24 अप्रैल को शपथ पत्र के साथ उच्चाधिकारियों से बीईओ विश्वनाथ पाठक की लिखित शिकायत की थी। उनका आरोप था कि दिसंबर 2025 में विद्यालय के मरम्मत कार्य के लिए 4,62,796 रुपये का बजट आया था। इस धनराशि को जारी करने और पास कराने के एवज में बीईओ उन पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 20 प्रतिशत कमीशन (सुविधा शुल्क) देने का दबाव बना रहे थे। उन्होंने रिश्वत देने से साफ मना कर दिया, तो बीईओ ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। 25 मार्च 2026 को बीईओ एक शिक्षामित्र को साथ लेकर स्कूल पहुंचे और उपस्थिति रजिस्टर सील कर दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा था कि जब तक रुपये नहीं दोगी, ऐसे ही परेशान किया जाएगा। काम चाहे जितना अच्छा कराओ, कमियां निकाली जाएंगी। उन्होंने इस 20 प्रतिशत कमीशन में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और डीसी का भी हिस्सा होने की बात कही थी। इसके बाद बीआरसी पर बुलाकर बीईओ ने धमकी दी कि आजकल पैसे से किसी भी अधिकारी को खरीदा जा सकता है। उसने (बीईओ) बहुत रुपया कमाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सात मई 2026 को बीईओ विश्वनाथ पाठक से स्पष्टीकरण मांगा था।


चार बार सीसीएल निरस्त करने का भी आरोप
प्रधानाध्यापक कल्पना पाल ने आरोप लगाया विश्वनाथ और बीएसए ने मिलकर सोची-समझी रणनीति के तहत उनकी बाल्य देखभाल अवकाश (सीसीएल) को चार बार आवेदन करने के बावजूद निरस्त किया। बीएसए कंट्रोल रूम से सुबह-सुबह स्कूल में फोन करवाकर पहले शिक्षिका को अनुपस्थित दर्शाया जाता था और फिर तकनीकी आधार पर रात को 9:50 बजे छुट्टी निरस्त कर दी जाती थी। 22 अप्रैल 2026 को स्कूल में पूरी टीम के साथ छापा मारकर शिक्षिका को निलंबित करने की धमकी भी दी गई थी। आरोप है कि नवंबर 2025 और फरवरी 2026 में जब प्रधानाध्यापिका छुट्टी या चिकित्सीय अवकाश पर थीं, और उसी दौरान सहायक अध्यापक ने भी आकस्मिक अवकाश लिया, तब बीईओ ने विद्यालय संचालन के लिए किसी अन्य शिक्षक की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की, जिससे स्कूल बिना देखरेख के चलता रहा।

तालग्राम के बाद अब सौरिख बीईओ पर गिरी गाज
तालग्राम विकास खंड में तैनात बीईओ रमेशचंद्र चौधरी पर बिना मान्यता संचालित राजकुमारी मेवाराम आदर्श विद्यालय को संरक्षण देने और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने का गंभीर आरोप थे। इसके अलावा अन्य आरोप लगाए गए थे। इन सभी आरोपों को देखते हुए आठ मई 2026 को निलंबित कर दिया गया था। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) कानपुर कार्यालय में संबद्ध किया गया था।




अध्यापिका को CCL दिए जाने के मामले में मनमानेपन और मानसिक शोषण किए जाने तथा विभाग की छवि धूमिल करने पर कन्नौज के खण्ड शिक्षा अधिकारी निलंबित, देखें आदेश 

Sunday, January 19, 2025

महिला प्रोफेसर बच्चे की देखभाल के लिए दो साल तक ले सकती हैं छुट्टी, यूजीसी रेग्यूलेशन 2025 शिक्षण संस्थान छुट्टी देने में नहीं कर सकेंगे आनाकानी

महिला प्रोफेसर बच्चे की देखभाल के लिए दो साल तक ले सकती हैं छुट्टी,  यूजीसी रेग्यूलेशन 2025 शिक्षण संस्थान छुट्टी देने में नहीं कर सकेंगे आनाकानी



नई दिल्ली। महिला प्रोफेसर अब बच्चे की देखभाल के लिए दो साल तक छुट्टी ले सकती हैं। उच्च शिक्षण संस्थान छुट्टी देने में आनाकानी नहीं कर सकेंगे।

उच्च शिक्षण संस्थानों की मनमानी रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने चाइल्ड केयर के प्रावधान को यूजीसी रेग्यूलेशन 2025 में शामिल किया है। यदि कोई उच्च शिक्षण संस्थान नियम का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें डीबार का भी प्रावधान है।


वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, उच्च शिक्षण संस्थानों में अक्सर महिला प्रोफेसर को चाइल्ड केयर के लिए छुट्टी लेने में दिक्कत होती थीं। संस्थान इस तरह की छुटटी देने में आनाकानी करते थे। कई बार महिला प्रोफेसर इस मुद्दे पर शिकायत करती थीं, जबकि यह उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। इन्हीं दिक्कतों को देखते हुए यूजीसी ने इसे नए नियमों में शामिल किया है।

Thursday, May 14, 2020

पॉलीटेक्निक : महिला शिक्षकों व कर्मचारियों को फिर से मिलेगा प्रसूति व बाल्य देखभाल अवकाश

पॉलीटेक्निक : महिला शिक्षकों व कर्मचारियों को फिर से मिलेगा प्रसूति व बाल्य देखभाल अवकाश।


शिक्षकों को फिर से मिलेगा प्रसूति व बाल्य देखभाल अवकाश।

लखनऊ : सरकारी व सहायता प्राप्त पॉलिटेक्निक संस्थाओं में कार्यरत महिला शिक्षकों व कर्मचारियों को अब दोबारा प्रसूति व बाल्य देखभाल अवकाश मिलेगा। प्राविधिक शिक्षा विभाग की ओर से इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं। दरअसल तीन मई 2018 को आल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) द्वारा निर्धारित वेतनमान लागू किए जाने के कारण इन अवकाशों को रद कर दिया गया था, क्योंकि एआईसीटीई द्वारा इस तरह के अवकाश देने का कोई प्रावधान नहीं था। विरोध के चलते एआईसीटीई ने इसे राज्यों यह व्यवस्था दोबारा लागू करने की छूट दे दी। इसके बाद अब शासन ने इन अवकाशों को दोबारा मंजूरी दे दी है। प्रमुख सचिव एस राधा चौहान की ओर से बुधवार को यह आदेश जारी कर दिया गया। पालीटेक्निक संस्थाओं में पढ़ा रही महिला शिक्षकों व महिला कर्मचारियों को पूर्ण सेवाकाल में 180 दिनों का प्रसूति अवकाश मिलेगा। विशिष्ट परिस्थितियों में दो साल का बाल्य देखभाल अवकाश वह ले सकेंगी। एक साल में तीन बार से अधिक बाल्य देखभाल अवकाश नहीं मिलेगा। यह 15 दिन से कम के लिए नहीं दिया जाएगा। अगर किसी ने बच्चा गोद लिया है तो उसे दत्तक ग्रहण अवकाश 180 दिनों का दिया जाएगा।






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Monday, April 29, 2019

हाथरस : परिषदीय शिक्षक - शिक्षिकाओं के अवकाश सम्बन्धी आवेदन निर्धारित प्रारूप पर प्रेषित किये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी, प्रारूप सह आदेश देखें

हाथरस : परिषदीय शिक्षक - शिक्षिकाओं के अवकाश सम्बन्धी आवेदन निर्धारित प्रारूप पर प्रेषित किये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी, प्रारूप सह आदेश देखें






Saturday, April 20, 2019

गाजीपुर : बाल्य देखभाल अवकाश पर रहने वाली शिक्षिकाओं के चुनाव ड्यूटी हेतु चुनाव व प्रशिक्षण की तिथियों को अवकाश निरस्त किये जाने व उपस्थित होने का निर्देश, देखें

गाजीपुर : बाल्य देखभाल अवकाश पर रहने वाली शिक्षिकाओं के चुनाव ड्यूटी हेतु चुनाव व प्रशिक्षण की तिथियों को अवकाश निरस्त किये जाने व उक्त तिथियों को उपस्थित होने का निर्देश, देखें।