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Friday, March 29, 2024

सेवा संबंधी मामलो में निजी स्कूल के ख़िलाफ़ रिट याचिका पोषणीय नहीं – हाईकोर्ट

सेवा संबंधी मामलो में निजी स्कूल के ख़िलाफ़ रिट याचिका पोषणीय नहीं – हाईकोर्ट 

सेवा मामले में रिट दाखिल नहीं कर सकते निजी संस्थान के कर्मचारी, निजी कॉलेज के शिक्षक की बर्खास्तगी के खिलाफ याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने कहा- संविदा पर निजी सेवा लोक कार्यों में नहीं मानी जाएगी


लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा कि किसी निजी संस्थान के कर्मचारी सेवा मामले में हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल नहीं कर सकते, जब तक इसके लिए कानूनी प्रावधान न हों। हो सकता है कि कोई शिक्षण संस्थान लोक कार्य कर रहा हो लेकिन सेवा का करार निजी प्रकृति का होने के नाते वह लोक कार्य नहीं माना जाएगा। ऐसे निजी संविदा कर्मी की सेवा मामले में दाखिल याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

इस महत्वपूर्ण विधिक व्यवस्था के साथ न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने अंबेडकरनगर के डीएवी कॉलेज और डीएवी पब्लिक स्कूल के शिक्षक सूर्य प्रकाश मिश्र को बर्खास्त करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।


याची को पिछले साल सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उसने इस आदेश को चुनौती देते हुए कोर्ट से इसे रद्द करने का आग्रह किया था। साथ ही देयों का भुगतान करने के निर्देश देने की भी गुजारिश की थी। याची का कहना था कि वह शिक्षण का कार्य करता है, जो लोक कार्य में आएगा। ऐसे में उसकी याचिका सुनवाई योग्य है।

सरकारी वकील ऋषभ त्रिपाठी ने याचिका का विरोध किया। कहा कि डीएवी कॉलेज व डीएवी पब्लिक स्कूल निजी संस्थान हैं। ऐसे में वहां से सेवा से हटाने के आदेश को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल कर चुनौती नहीं दी जा सकती। अपने तर्क के समर्थन में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सेंट मैरी एजुकेशन सोसाइटी के मामले में दिए गए फैसले का हवाला भी दिया।

कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला याची के मामले में लागू है, जिसमें याची ने कॉलेज के साथ हुए सेवा के करार को अमल में लाने के लिए याचिका दाखिल की। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल यह याचिका सुनवाई के लिए ग्रहण करने योग्य नहीं है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट के याचिका खारिज कर दी।

Tuesday, November 28, 2023

पदोन्नति में मानदेय सेवा का कार्यकाल जोड़ने की तैयारी, एडेड कॉलेजों के शिक्षकों के लिए शासन ने मांगी जानकारी

पदोन्नति में मानदेय सेवा का कार्यकाल जोड़ने की तैयारी, एडेड कॉलेजों के शिक्षकों के लिए शासन ने मांगी जानकारी

प्राचार्य से इस पर आने वाले व्ययभार की मांगी जानकारी




लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों के मानदेय सेवा से नियमित हुए शिक्षकों को शासन जल्द बड़ा तोहफा दे सकता है। शिक्षकों की मांग के अनुसार उनके मानदेय सेवा का कार्यकाल पदोन्नति में जोड़ने की तैयारी शुरू की गई है।


एडेड कॉलेजों में पूर्व में मानदेय के पद पर प्रवक्ताओं ने लंबी सेवा पूरी की। वर्ष 2017-18 में काफी शिक्षकों को नियमित किया गया। इसी क्रम में शिक्षक कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (कैश) के अंतर्गत पदोन्नति, सीनियर स्केल, सेलेक्शन ग्रेड देने के लिए अपनी मानदेय सेवाओं की गणना करने की मांग कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुफुक्टा) ने भी इसका समर्थन किया है।


अब शासन ने उच्च शिक्षा निदेशालय से इसकी जानकारी मांगी है। इसी क्रम में उच्च शिक्षा निदेशालय के संयुक्त सचिव डॉ. केसी वर्मा ने सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों से भी जानकारी मांगी है। उन्होंने कहा है कि एडेड कॉलेज के मानदेय प्रवक्ताओं को इसका लाभ देने के तहत वित्तीय व्ययभार की गणना कर संस्तुति के साथ शासन को आख्या उपलब्ध कराएं। इसी क्रम में अब क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों ने सभी प्राचार्यों को पत्र भेजकर यह जानकारी मांगी है।


फुफुक्टा के कार्यालय सचिव डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षक वरिष्ठता व एरियर की मांग शासन से नहीं कर रहे हैं। अगर उनकी पूर्व की सेवा जुड़ जाती है तो आगे उनको पदोन्नति व उच्च ग्रेड पाने में आसानी होगी। शासन को यह मांग जल्द पूरी करनी चाहिए।