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Monday, May 13, 2024

झांसी : उच्च न्यायालय ने शिक्षक की प्रतिकूल प्रविष्टि का आदेश किया रद्द, साथ ही चिकित्सा के आधार पर दूसरे विद्यालय में अटैचमेंट पर निर्णय लेने का दिया आदेश


झाँसी : उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पीयूष अग्रवाल ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय घुघुवा के सहायक अध्यापक गौरव तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन बीएसए वेदराम द्वारा दी गयी प्रतिकूल प्रविष्ट को रद करने का आदेश दिया है।
       प्रतिकूल प्रविष्ट रद करने तथा चिकित्सा आधार पर किसी दूसरे उच्च प्राथमिक में अटैच करने की याचिका को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने 22 दिसम्बर 2021 को दिया गया आदेश रद कर दिया है। साथ ही चिकित्सा के आधार पर बड़ागाँव ब्लॉक के किसी पूर्व माध्यमिक विद्यालय में अटैच करने की माँग को स्वीकार करते हुए विभाग को नए सिरे से प्रस्ताव लेकर 2 माह में इस पर कार्यवाही करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि प्राथमिक विद्यालय घुघुवा में शिक्षकों के बीच आपसी विवाद के चलते दूसरे विद्यालय में अटैच करने तथा कार्यवाही की माँग के लिए 28 जुलाई से 1 अगस्त 22 तक गौरव तिवारी ने बीएसए कार्यालय में अनशन पर बैठे थे। इस पर बीएसए नीलम यादव ने जिले के अन्दर स्थानान्तरण नीति में वरीयता देने, अन्यत्र विद्यालय में स्थानान्तरण के लिए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को प्रस्ताव भेजने तथा प्रतिकूल प्रविष्टि की जाँच के लिए कमिटि गठित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं की गई।





Tuesday, June 7, 2022

अल्पसंख्यक संस्थानों की भर्ती में शक्तियां सीमित : हाइकोर्ट

अल्पसंख्यक संस्थानों की भर्ती में शक्तियां सीमित : हाइकोर्ट

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि वित्तीय सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थान में लिपिक भर्ती के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक के पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की नियुक्ति प्रक्रिया में राज्य सरकार हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।


यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने अलीगढ़ के अल्पसंख्यक संस्थान श्री उदय सिंह जैन कन्या इंटर कॉलेज में कार्यरत लिपिक मनोज कुमार जैन की याचिका पर दिया है। याचिका के अनुसार विद्यालय प्रबंध समिति ने याची की लिपिक संवर्ग में नियुक्ति जनवरी 2018 में की थी, जिस पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने से मना कर दिया था। याची ने डीआईओएस के आदेश के विरुद्ध याचिका की, जिसमें न्यायालय ने डीआईओएस के आदेश को निरस्त करते हुए पुन: आदेश करने का निर्देश दिया, लेकिन डीआईओएस ने फिर वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने में असहमति जताई।


अहम फैसला : अल्पसंख्यक संस्थानों को कर्मचारियों की नियुक्ति का है विशेषाधिकार


इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक अहम आदेश में कहा है कि सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के तहत विशेष अधिकार प्राप्त है।

इस अधिकार के तहत वह अपने यहां कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकते हैं, उसमें राज्य सरकार की ओर से हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने मनोज कुमार जैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में कहा गया कि विद्यालय प्रबंध समिति ने याची की लिपिक संवर्ग में नियुक्ति जनवरी 2018 में की थी, जिस पर जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) ने वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने से मना कर दिया था।

याची ने वर्ष 2018 में डीआईओएस के आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें कोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेश को निरस्त करते हुए पुन: आदेश जारी करने का निर्देश दिया था। किंतु जिला विद्यालय निरीक्षक ने दूसरी बार भी वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने में अपनी असहमति जताई थी।

शिक्षा विभाग ने विज्ञापन पर उठाए थे सवाल

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अपने प्रतिशपथ पत्र में बताया कि विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा लिपिक पद हेतु दिए गए विज्ञापन की न तो विभाग से अनुमति ली गई थी और न ही विज्ञापन में न्यूनतम आवश्यक योग्यता, आयु सीमा और वेतनमान का वर्णन किया गया था।

 विभाग का कहना था कि विद्यालय प्रबंधन ने चयन समिति में जिला अधिकारी द्वारा नामित सदस्य एवं आरक्षित वर्ग के सदस्य के स्थान पर विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं सहायक अध्यापक को सदस्य के रूप में शामिल किया गया, जो कि चयन समिति की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न करते हैं।

याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वित्त पोषित अल्पसंख्यक माध्यमिक विद्यालय में लिपिक संवर्ग में भर्ती हेतु जिला विद्यालय निरीक्षक की पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात कहा कि सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों में लिपिक भर्ती हेतु जिला विद्यालय निरीक्षक का पूर्व अनुमोदन आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों की नियुक्ति के मामले में चयन समिति में जिला अधिकारी द्वारा नामित एवं आरक्षित वर्ग के सदस्य को शामिल करना भी आवश्यक नहीं है ।अल्पसंख्यक संस्थानों की स्वायत्तता भंग नहीं कर सकती सरकारहाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार अल्पसंख्यक संस्थानों पर प्रशासनिक अधिकार के नियम थोपकर उनकी स्वायत्तता भंग नहीं कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति को बिना अर्हता पाए जाने पर ही अवैध ठहरा सकता है। कोर्ट ने कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था को संविधान द्वारा प्रदत्त विशेष अधिकारों की उपेक्षा कर दो बार आदेश दिया है।


डीआईओएस का आदेश निरस्त, करना होगा वेतन का भुगतान

कोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा लिपिक को वित्तीय सहमति न प्रदान करने संबंधी आदेश को निरस्त करते हुए याची को वर्ष 2018 से वित्तीय सहमति प्रदान करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने याची को अगले तीन महीनों में वर्ष 2018 से अद्यतन अवधि तक का वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया, साथ ही अगले 3 महीनों में एरियर भुगतान न होने की स्थिति में याची को 12 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही राज्य को भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी से ब्याज की वसूली करने की छूट दी है।

Thursday, May 26, 2022

मान्यता और वित्त पोषित कॉलेजों का ब्योरा हाईकोर्ट ने किया तलब

मान्यता और वित्त पोषित कॉलेजों का ब्योरा हाईकोर्ट ने किया तलब
 
लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव को प्रदेश के सभी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की जनशक्ति निर्धारण, शिक्षकों के सृजित पद, प्राप्त अधियाचनों एवं वर्तमान समय में शिक्षकों के रिक्त पदों की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधनों की ओर से अधियाचन भेजने के बाद भी चयन बोर्ड से भेजे गए अभ्यर्थियों को नियुक्ति न देना अत्यंत संदेहास्पद है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने बस्ती के किसान इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति की याचिका पर दिया है।



प्रबंध समिति के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि विद्यालय में इतिहास विषय के प्रवक्ता के रूप में नितेश कुमार शुक्ल कार्यरत हैं, जिन्हें विद्यालय प्रबंधन ने वर्ष 2018 में नियुक्त किया था। उक्त प्रवक्ता न्यायालय के स्थगनादेश पर कार्य कर रहे हैं। फिर भी चयन बोर्ड ने नए अभ्यर्थी को भेज दिया। सरकारी वकील का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 में संजय सिंह केस में दिए गए निर्णय के उपरांत एडहॉक अध्यापक कार्य नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय चयन बोर्ड को अधियाचन प्रेषित कर देते हैं लेकिन चयनितोंको विद्यालय में ज्वाइन नहीं कराते।

Tuesday, May 24, 2022

हाईकोर्ट : सहायक अध्यापक की कोरोना से मौत पर दो नाबालिग बच्चों को मुआवजा देने का आदेश

हाईकोर्ट : सहायक अध्यापक की कोरोना से मौत पर दो नाबालिग बच्चों को मुआवजा देने का आदेश

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम ललितपुर को निर्देश दिया है कि चुनाव ड्यूटी में कोविड महामारी से मृत सहायक अध्यापक के दो नाबालिग बच्चों की अर्जी पर दो हफ्ते में सुनवाई करें और दो माह के भीतर एक जून 2021 के शासनादेश के तहत मुआवजे का भुगतान सुनिश्चित करें। हाईकोर्ट ने मुआवजा अर्जी अपलोड करने की तिथि 15 जून 2022 तक बढ़ा दी है और कहा है कि यह आदेश दिया है। विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है। इसका लाभ अन्य लोगों को नहीं मिलेगा।


हाईकोर्ट ने कहा है कि मुआवजा राशि दोनों नाबालिग बच्चों के नाम राष्ट्रीय बैंक में सावधि जमा की जाए और बालिग होने तक जिलाधिकारी उनके वैधानिक संरक्षक के जरिये निगरानी रखें। कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ललितपुर को भी उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही महानिबंधक को रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एआर मसूदी तथा न्यायमूर्ति वीडी चौहान की खंडपीठ ने कुमारी प्रियंका व अभिषेक की याचिका को स्वीकार करते हुए

याचीगण की ओर से कहा गया कि उनके पिता सहायक अध्यापक थे। चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना से उनकी मौत हो गई। शासनादेश के तहत उन्होंने बीएसए ललितपुर को अर्जी दी लेकिन जिलाधिकारी के जरिये समय रहते उसे पोर्टल पर अपलोड नहीं करा सके। भगवान सिंह ने कोर्ट से वैधानिक संरक्षक का आदेश लेकर मदद की सुनवाई न होने पर हाईकोर्ट की शरण ली जिस पर कोर्ट ने बड़ी राहत दी है।

Friday, November 13, 2020

राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों के स्थानांतरण पर हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी।

राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों के स्थानांतरण पर हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी।

राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों के स्थानांतरण पर हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी।

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में कार्यरत अध्यापकों के स्थानांतरण को लेकर दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से जानकारी मांगी है।


यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने राहुल मिश्र व कई अन्य की याचिकाओं पर अधिवक्ता सीमांत सिंह व अन्य को सुनकर दिया है। याचिका में कहा गया है कि कॉलेजों में नई नियुक्तियां होने के बाद भी स्थानांतरित हो चुके अध्यापकों को कार्यमुक्त करने में मनमानी की जा रही है। याचियों का स्थानांतरण 20 जून 2019 को कर दिया गया लेकिन उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया। इस बीच लोक सेवा आयोग ने प्रदेश में 3317 पदों पर अध्यापकों की नियुक्ति कर दी है। इसके बावजूद याचियों को कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है जबकि कई अन्य कॉलेजों में इसी स्थिति के बावजूद कार्यमुक्त किया जा रहा है।


अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना है कि राजकीय इंटर कॉलेजों के अध्यापकों की स्थानांतरण नीति में प्रावधान है कि जिन कॉलेजों में दो ही अध्यापक हैं वहां स्थानांतरण के बाद अध्यापक को तब तक कार्यमुक्त न किया जाए, जब तक उसकी जगह दूसरा अध्यापक कार्यभार ग्रहण न कर ले। याचिका में कहा गया है कि विभाग ने स्थानांतरण होने के बावजूद याचियों के कॉलेज में पद रिक्त नहीं दिखाए हैं जिससे नव नियुक्त अध्यापकों को वहां तैनाती नहीं दी जा रही है।