
Sunday, February 4, 2018

प्रतापगढ़ : उजागर हुआ शिक्षा विभाग का भ्रष्टाचार, गरीबी से तंग आकर शिक्षक ने दी जान
मंगरौरा क्षेत्र के शिक्षकों के अनुसार 29 जनवरी की रात आलोक त्रिपाठी ने आत्महत्या कर ली थी। बताया जा रहा है कि बिहार ब्लाक के ग्राम रामपुर कोटवा में उनका घर है। जहां से आते जाते समय दो बार उनका एक्सीडेंट भी हो चुका था। उन्होंने चिकित्सकीय अवकाश लिया था, जिसका मेडिकल बनवाकर उन्होंने विभाग में दाखिल भी कर दिया था, बावजूद इसके उनका वेतन निर्गत नहीं किया जा रहा था। शिक्षक तो यहां तक बताते हैं कि वेतन जारी कराने के लिए रिश्वत के तौर पर देने के लिए आलोक त्रिपाठी ने उधार भी ले लिया था। बावजूद इसके उन्हें वेतन नहीं मिला और उधर से लगातार उधारी की रकम भी मांगी जा रही थी। इन स्थितियों को लेकर वे बेहद परेशान थे। शिक्षक इसके लिए ग्राम प्रधान के अलावा खंड शिक्षा अधिकारी और बीएसए कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार को जिम्मेदार बता रहे हैं।मेडिकल पर जाने के कारण सितंबर माह से नहीं मिल रहा था अवकाश, लगाए आरोप
इलाज का खर्च और ऊपर से पांच महीने से एक पाई वेतन न मिलना। वेतन के लिए उधार लेकर जो रुपया खर्च किया, उसका भी रोज तगादा। इन हालात से तंग आकर जिले के एक सहायक अध्यापक ने आत्महत्या कर ली। घटना को पांच दिन बीत गए, लेकिन अब जानकारी मिलने से खफा शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जताई है। साथ ही विभाग पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
इस मामले में विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ ने प्रतापगढ़ शहर में और युनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) की बैठक मंगरौरा में हुई। मंगरौरा ब्लाक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय दरछुट में यूटा की बैठक में पूर्व माध्यमिक विद्यालय कल्याणी मंगरौरा में तैनात सहायक अध्यापक आलोक त्रिपाठी के आसामयिक निधन पर दुख व्यक्त जताया गया। जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार दूबे कहा कि आलोक को आठ माह से वेतन नहीं मिल रहा था। बिहार ब्लॉक से लगभग 60 किमी दूरी से मंगरौरा ब्लॉक के पूरब पट्टी ग्राम सभा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय कल्याणी में उन्हें तैनाती दी गई थी। जबकि पारिवारिक कारण से वे यहां ढाई साल से ट्रांसफर मांग रहे थे। शिक्षकों का आरोप है कि पूरब पट्टी ग्राम प्रधान उनको प्रतिदिन प्रताड़ित करते थे। जिससे वे डिप्रेशन में थे। इसी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया है। शिक्षकों ने इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही ऐसा न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। बैठक में जिला महामंत्री नीरज सिंह, देवी प्रसाद, मो जावेद, मकदूम, प्रवीण सिंह, गौरी शंकर तिवारी, वायु नंदन मिश्र, राजेश पांडेय आदि मौजूद रहे।
उधर, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ की बैठक में कहा गया कि मेडिकल देने के बावजूद उनको वेतन नहीं दिया जा रहा था। जबकि निलंबित कर्मचारी को भी उनके भरण पोषण के लिए आधा वेतन दिया जाता है। बैठक में जिलाध्यक्ष डॉ. विनोद त्रिपाठी, ललित मिश्र, अरुण मिश्र, आलोक पांडेय, आशुतोष सिंह, विजय गुप्ता, राकेश शर्मा, राहुल शुक्ला, नवीन प्रताप सिंह आदि अनेक शिक्षक मौजूद रहे

गोरखपुर : मझगांवा स्थित कस्तूरबा विद्यालय में पहुंचकर बीएसए ने की जांच, तीन दर्जन से अधिक छात्राएं चिकनपाक्स से पीड़ित, रसोइया को भी चिकनपाक्स, छह तक विद्यालय रहेगा बंद
गगहा क्षेत्र के मझगांवा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्रओं में चिकनपाक्स फैलने की सूचना पर बेसिक शिक्षा अधिकारी रामसागर पति त्रिपाठी शनिवार को विद्यालय पहुंचे और पीड़ित छात्रओं से मुलाकात कर वार्डेन से पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने छह फरवरी तक शैक्षणिक कार्य स्थगित कर छात्रओं को परिजनों के साथ घर भेजने का आदेश दिया।
शनिवार को दोपहर करीब डेढ़ बजे पहुंचे बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने विद्यालय के कक्षाओं सहित शयनकक्ष का निरीक्षण किया। इसी बीच रसोइया कुसुमावती को भी चिकनपाक्स की पुष्टि होने के बाद बाद उन्होंने विद्यालय को छह फरवरी तक बंद करने का निर्देश दिया। साथ ही विद्यालय में बची अन्य बालिकाओं को अपने वाहन से घर पहुंचाने का निर्देश दिया। विद्यालय में छुट्टी घोषित होने के बाद अभिभावक बच्चों को अपने-अपने घर लेकर चले गए। आवासीय बालिका विद्यालय में शुक्रवार को चिकनपाक्स फैलने से तीन दर्जन से अधिक बालिकाओं के पीड़ित होने की सूचना पर तमाम अभिभावकों ने विद्यालय पहुंच कर बालिकाओं को घर ले जाने की मांग की थी। इसके बाद वार्डेन ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से मिलकर विद्यालय में छुट्टी घोषित करने की मांग की थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गगहा के चिकित्सक बीके वर्नवाल के नेतृत्व में स्वास्थ्य टीम ने भी विद्यालय की छात्रओं व कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में रसोइया भी बीमारी की चपेट में पाई गयी। स्वास्थ्य टीम ने पीड़ित छात्रओं के बीच दवा का वितरण किया। पीड़ित बालिकाओं से अन्य छात्रओं के संपर्क में न आने की सलाह दी। निरीक्षण के दौरान स्वेता विश्वास, विनोद सिंह, शिवसागर, ऊषा किरन सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, सत्यनारायण, मीना मौर्या मौजूद रहीं।गगहा के मझगांवा स्थित कस्तूरबा विद्यालय में वार्डेन से बात करते बेसिक शिक्षा अधिकारी’ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टर ने विद्यालय में की छात्रओं की जांच

सीबीएसई ने कक्षा 6-8 में समान मूल्यांकन नीति भी ली वापस, सतत एवं समग्र मूल्यांकन की प्रणाली को भी किया जा चुका है खत्म
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की आपत्ति के बाद कक्षा छह से आठ तक के लिए समान मूल्यांकन नीति वापस ले ली है। आयोग ने समान मूल्यांकन नीति को शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून का उल्लंघन बताया था। सीबीएसई की ओर से जारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। इन कक्षाओं के लिए सतत एवं समग्र मूल्यांकन की प्रणाली को भी खत्म किया जा चुका है।

लखनऊ : बीईओ को थमाया नोटिस, पांच हजार शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिलने का मामला, वित्त एवं लेखाधिकारी ने बीईओ को ठहराया जिम्मेदार
लखनऊ : बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी (एसआरएओ) ने प्राथमिक शिक्षकों की सूची न भेजने पर खंड शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। उन्होंने बीईओ से कहा है कि कार्यरत व अवकाश पर रहे शिक्षकों की सूची शीघ्र मुहैया कराएं ताकि उनका वेतन जारी किया जा सके।
जिले में करीब पांच हजार शिक्षक बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात हैं। विभाग के अनुसार शिक्षकों का वेतन बीईओ द्वारा भेजी गई उपस्थिति सूची के आधार पर जारी किया जाता है। इसमें गुरुजनों के कार्य व अवकाश का विवरण दर्ज होता है। वित्त एवं लेखा विभाग उसके आधार पर सैलरी स्लिप तैयार करता है। वेतन हर माह की पहली तारीख को जारी करने का नियम है, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते इसका अनुपालन नहीं हो पा रहा है।
अब एसआरएओ सक्रिय हुए तो खंड शिक्षा अधिकारी हीलाहवाली कर रहे हैं। इस पर उन्हें नोटिस जारी किया गया है। वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी राम कृष्ण अवस्थी का कहना है कि हम समय पर वेतन जारी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन शिक्षकों की सूची न मिलने से प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। खंड शिक्षा अधिकारियों की उदासीनता के चलते पहले भी शिक्षकों को वेतन समय पर नहीं मिलता था।

बोर्ड परीक्षा : नकल का ‘कलंक’ मिटाने को कसौटी पर होंगे नए इंतजाम, परीक्षा के दौरान सीसीटीवी कैमरे बंद होने या न चलने पर केंद्र व्यवस्थापक व अफसरों पर कार्रवाई
धरातल पर अब तक नहीं आ सके 1998 में बने कानून, नकलचियों पर अंकुश को इस बार किए जा रहे हैं कई प्रयोगयूपी बोर्ड परीक्षा83753 परीक्षार्थी पहले ही बाहर
यूपी बोर्ड ने परीक्षा शुरू होने से पहले ही आवेदन पत्रों की सघन जांच कराई इसमें 83753 परीक्षार्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। इसमें हाईस्कूल में 49384 व इंटर में 34369 परीक्षार्थी शामिल हैं। इन सभी के अभिलेख दुरुस्त नहीं थे। साथ ही बाहर हुए सभी व्यक्तिगत परीक्षार्थी हैं। 1अन्य खास बातें
’संवेदनशील व अति संवेदनशील केंद्रों की निगरानी को एसटीएफ की मदद, एलआइयू भी रहेगी सक्रिय। ’जिन केंद्रों पर छात्रएं अपने ही स्कूल में परीक्षा देंगी वहां पर दूसरे कालेज का केंद्र व्यवस्थापक। ’परीक्षा के दौरान सीसीटीवी कैमरे बंद होने या न चलने पर केंद्र व्यवस्थापक व अफसरों पर कार्रवाई।
’अति संवेदनशील केंद्रों पर स्टेटिक मजिस्टेट पूरे समय रहेगा, सचल दल के साथ पुलिस बल मौजूद होगा। ’परीक्षार्थियों से अभद्रता नहीं होगी, लेकिन नकल होने पर कक्ष निरीक्षक व केंद्र व्यवस्थापक पर कार्रवाई होगी। ’नकल होने पर जिलाधिकारी, डीआइओएस व जेडी सामूहिक रूप से जिम्मेदार होंगे।
परीक्षार्थियों की संख्या के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े यूपी बोर्ड की परीक्षा से नकल का ‘कलंक’ मिटाने में इस बार सरकार के नए इंतजाम कसौटी पर होंगे। पहली बार सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में परीक्षा होगी, इसके साथ ही एसटीएफ भी पहली बार ही लगाई गई है। नकल को लेकर मुख्यमंत्री की गंभीरता से भी इस बात के संकेत मिले हैं कि इस बार शायद 20 साल पहले बने नियम कानूनों को अमली जामा पहनाने में सफलता मिल जाए।
नकल रोकने के लिए नियम कानूनों को आखिरी बार 1998 में संशोधित किया गया था। तब से अब तक हर सरकार नकल रोकने के दावे करती रही है लेकिन, कभी भी सफलता नहीं मिल सकी। इस बार परीक्षा का तकनीकी पक्ष अधिक मजबूत है। 50 से अधिक जिलों में क्रमांकित कापियां भेजी गई हैं। इससे पहले केंद्रों का निर्धारण भी ऑनलाइन किया गया।
केंद्रों की संख्या भी पिछली बार के मुकाबले काफी कम है, इसलिए उनकी निगरानी आसान होगी। अब जबकि परीक्षा को महज दो दिन बाकी रह गए हैं, केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षकों का इंतजाम जिला स्तर पर पूरा कर लिया गया है। बोर्ड प्रशासन ने मंडल स्तर के पर्यवेक्षकों की सूची जारी करने के बाद उत्तरपुस्तिकाएं व प्रश्नपत्र भी सभी जिलों में पहुंचा दिया है। गौरतलब है कि हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाएं छह फरवरी से शुरू होंगी।
परीक्षकों के लिए आधार अनिवार्य : इस बार परीक्षकों को परिचय पत्र व आधार कार्ड लेकर जाना अनिवार्य किया गया। जो परीक्षक कालेजों में नहीं पहुंचे उन पर कार्रवाई भी करने की तैयारी है। हाईस्कूल के परीक्षार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा के अंक ऑनलाइन मंगाए गए हैं। इसके अलावा प्रवेश पत्र भी ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों तरह से दिया गया है। उस पर परीक्षार्थी की समय सारिणी भी दर्ज है। मुख्यालय पर बने परीक्षा केंद्र
यूपी बोर्ड ने पहली बार हाईस्कूल व इंटर के सभी जिलों के परीक्षा केंद्र बोर्ड मुख्यालय पर कंप्यूटर के जरिए बनाए हैं। इसमें सभी दावेदार कालेजों के संसाधन फीड किए गए और जिला समिति की रिपोर्ट के आधार पर उनका निर्धारण हुआ। ऐसे में करीब ढाई हजार अधिक केंद्र घटे हैं। ज्ञात हो कि पिछले वर्ष की परीक्षा में 11414 केंद्र बने थे, जबकि इस वर्ष महज 8549 केंद्र बनाए गए हैं।

बोर्ड परीक्षा : प्रश्नपत्र लीक होने के एहतियात में उठाया कदम, बोर्ड ने बदले 13 जिलों के प्रश्नपत्र
हाईस्कूल के छह विषयों के नवीन प्रश्नपत्र जिलों में पहुंचाए गए
यूपी बोर्ड प्रशासन ने हरदोई जिले में प्रश्नपत्र गायब होने की घटना का संज्ञान लेकर 13 जिलों के प्रश्नपत्र बदल दिए हैं। अफसरों का मानना है कि प्रश्नपत्र गायब होने का असर परीक्षा पर पड़ता, ऐसे में हाईस्कूल परीक्षा के छह विषयों के प्रश्नपत्र बदल दिए गए हैं।
माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड की परीक्षाएं छह फरवरी से शुरू हो रही हैं। उसके पहले ही हरदाई में प्रश्नपत्र का बंडल गायब हुआ है। उसको ध्यान में रखकर बोर्ड प्रशासन ने प्रदेश के मथुरा, रामपुर, बुलंदशहर, मुज्जफरनगर, संभल, हमीरपुर, हरदोई, कानपुर नगर, इलाहाबाद, गोरखपुर, सुल्तानपुर, गाजीपुर और बस्ती जिले के प्रश्नपत्र बदल दिए हैं। पेपर बदलने की सूचना वहां के जिला विद्यालय निरीक्षकों को दे दी गई है। हाईस्कूल परीक्षा के जिन विषयों के प्रश्नपत्र बदले गए हैं उनमें हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, प्रारंभिक गणित और चित्रकला हैं। इन सभी जिलों को छह विषय के प्रश्नपत्र प्रेस से सीधे भिजवाए गए हैं। निर्देश में कहा गया है कि नए प्रश्नपत्रों को सभी केंद्र व्यवस्थापकों को भेजकर परीक्षा निर्विघ्न कराना सुनिश्चित करें। यह भी कहा है कि 13 जिलों में हाईस्कूल के छह विषयों की परीक्षा अब नए प्रश्नपत्रों से ही कराई जाए। वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक पुराने प्रश्नपत्रों को केंद्र व्यवस्थापकों से वापस लेकर अपनी सुरक्षा में रखेंगे। ज्ञात हो कि हरदोई के डीआइओएस को शासन निलंबित कर चुका है, साथ ही अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। बोर्ड प्रशासन का कहना है कि यह कदम आंतरिक व्यवस्था के तहत उठाया गया है। परीक्षा पूरी तरह से नकल विहीन होगी।

परिषदीय विद्यालयों में मौलिक नियुक्ति की मांग कर रहे प्रशिक्षु शिक्षकों का अनशन जारी, दिनों दिन बिगड़ रही अनशनकारियों की सेहत
परिषदीय विद्यालयों में मौलिक नियुक्ति की मांग कर रहे प्रशिक्षु शिक्षकों का अनशन जारी है। शिक्षा निदेशालय में कई दिनों से बैठे अनशनकारियों की सेहत दिन प्रतिदिन खराब हो रही है। इससे उनके अन्य साथियों में आक्रोश है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी पर भी नाराजगी है। उन्हें शनिवार को फिर बेली अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्रशिक्षु शिक्षक भोजराज सिंह व रामसजीवन विश्वकर्मा समेत कई अन्य बेमियादी अनशन कर रहे हैं। इन सभी का नेतृत्व कर रहे संदीप पांडेय ने बताया कि भोजराज और रामसजीवन की तबियत ज्यादा खराब हो चुकी है। लगातार चेतावनी का तो सरकार पर असर पड़ नहीं रहा है, दो साथियों की जान की भी किसी को परवाह नहीं रह गई है। अनशन पर बैठे अन्य प्रशिक्षु शिक्षकों ने कहा कि सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है। जब तक मौलिक नियुक्ति का आदेश नहीं होता तब तक वे वहीं बैठे रहेंगे।

बोर्ड परीक्षा : पुलिस अधिकारियों ने भी कस ली कमर, सामूहिक नकल पर प्रधानाचार्य और प्रबंधक जाएंगे जेल
यूपी बोर्ड परीक्षा में इस बार नकल रोकने के लिए पुलिस अधिकारियों ने भी कमर कस ली है। नोडल अफसर बनाए गए एसपी क्राइम बृजेश मिश्र ने नकल रोकने के लिए 22 क्यूआरटी बनाई है। यह टीमें सेंटरों पर निगरानी करेंगी। नोडल अधिकारी का कहना है कि सामूहिक नकल के मामले पकड़े गए तो प्रधानाचार्य और स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।
एसपी क्राइम के मुताबिक, परीक्षाओं के मद्देनजर शिक्षा माफिया की सूची तैयार कर पहले से कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस टीमों को सेंटरों के आसपास की फोटो स्टेट की दुकानों, साइबर कैफों में छापामारी के लिए लगाया गया है।

फतेहपुर : अंग्रेजी माध्यम के लिए चयनित परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों की सूची जारी : क्लिक करके देखें सभी विकास खण्डों के चयनित विद्यालयों के नाम
फतेहपुर : अंग्रेजी माध्यम के लिए चयनित परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों की सूची जारी : क्लिक करके देखें सभी विकास खण्डों के चयनित विद्यालयों के नाम।
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