
Thursday, October 29, 2015

लखनऊ : पढ़ाना छोडकर वोटर लिस्ट बनाएँगे शिक्षक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत प्रशासन के बीएलओ कार्य के फरमान ने स्कूलों की पढ़ाई ठप करने का किया इंतजाम
बेसिक शिक्षा विभाग में कोर्ट का आदेश ताक पर रखा गया पढ़ाना छोड़कर वोटर लिस्ट बनाएंगे शिक्षक शिक्षकों को तीन दिन बीएलओ का काम करने का फरमान बीएलओ की ड्यूटी लगने से स्कूलों की पढ़ाई ठप होती है। शिक्षकों के लिए एक साथ दो काम करना संभव नहीं होता है। वहीं, बीएलओ का काम करने पर शिक्षकों को स्कूल से गैरहाजिर रहना पड़ता है। -वीरेंद्र सिंह, महामंत्री, प्राथमिक शिक्षक संघ
शिक्षकों को यह नहीं कहा गया कि स्कूल में न पढ़ाएं। बीएलओ का काम पढ़ाई के बाद करें। रविवार को काम का निर्देश दिया गया है। अगर इससे ज्यादा काम करने का कोई निर्देश दिया गया है तो उसे संशोधित किया जाएगा। -राजेश पांडेय, एडीएम प्रशासन

इलाहाबाद : सह समन्वयक बढाएंगे शिक्षकों का ज्ञान, प्रति माह स्कूलों की शैक्षिक प्रगति आख्या रिपोर्ट बीएसए को होगी देनी
Wednesday, October 28, 2015

इलाहाबाद : आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारी तेज, बच्चों को पाठ्य पुस्तकें व यूनिफार्म उपलब्ध कराने की कवायद शुरू

50 हजार विद्यार्थियों ने छोड़ा स्कूल, परिषदीय स्कूलों से अभिभावकों का मोहभंग, साल दर साल घट रही बच्चों की संख्या
- सूरत-ए-हाल सरकारी स्कूलों का शैक्षिक सत्र : 2015-16
शैक्षिक सत्र 2015-16 में चार जनपदों में कक्षा एक से पांच तक पंजीकृत विद्यार्थियों की संख्या 8,49123 लाख है। शैक्षिक सत्र 2014-15 में 9,00054 विद्यार्थी पंजीकृत थे। इस तरह इस वर्ष 50,929 हजार बच्चे सरकारी स्कूल छोड़ चुके हैं। यह हाल तब है जबकि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शासन की ओर से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया जा रहा है। बच्चों को मुफ्त किताबें और भोजन देने की योजना भी चलाई जा रही है। बावजूद, साल दर साल परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या घट रही है। शैक्षिक संवर्धन के ढेरों प्रयास नकाफी साबित हो रहे हैं। ट्रेड शिक्षक होने के बाद भी परिषदीय स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। इस संबंध में एडी बेसिक रमेश कुमार तिवारी का कहना है कि परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए अधीनस्थों को निर्देश दिए गए हैं। शैक्षिक गुणवत्ता संवर्धन पर जोर दिया जा रहा है। आगामी शिक्षण सत्र में निश्चित ही बच्चों की बच्चों की संख्या में बढोत्तरी होगी।
Tuesday, October 27, 2015

इलाहाबाद : छह सौ से अधिक ने कराई काउंसिलिंग सही फार्म तक नहीं भर पाए भावी मास्साब
जिलों में शुरू हो गई 15 हजार शिक्षकों की नियुक्ति के लिए काउंसिलिंग
इलाहाबाद : एक से बढ़कर एक डिग्रियां हासिल करने वाले भावी मास्साब काउंसिलिंग की परीक्षा में फेल नजर आए। सोमवार को शिक्षा विभाग के अफसरों ने जब युवाओं को वह फार्म मुहैया कराया जिसमें उन्हें अपनी ही पूरी जानकारी भरना था, तो उसे भरने में भी उन्हें बगले झांकनी पड़ी, और तो और तमाम कालम भरने से पहले वह अफसरों से परामर्श लेते दिखे। यह जरूर है कि एक ही दिन काउंसिलिंग होने के कारण जिलों बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंचे और कुछ जगहों पर तो देर शाम तक प्रक्रिया जारी रही।
बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 15 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती की प्रक्रिया सोमवार से प्रदेश भर में शुरू हो गई है, हालांकि अभ्यर्थियों को इसके लिए करीब एक बरस तक इंतजार करना पड़ा। इस भर्ती का शासनादेश 9 दिसंबर 2014 को ही जारी हुआ था और तीन बार अभ्यर्थियों से आवेदन लिए गए। शासन के फरमान पर सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा ने 26 अक्टूबर से काउंसिलिंग शुरू कराने का निर्देश जारी किया था। दो चरणों में होने वाली काउंसिलिंग के पहले दिन ही जिलों में बड़ी तादाद में अभ्यर्थी पहुंचे। उन्हें अपने मूल प्रमाणपत्र दिखाने के साथ ही एक फार्म को भरकर देना था।
इस फार्म में उन्हें अपनी पूरी जानकारी देनी थी। मसलन, नाम, पिता का नाम, पता, जन्मतिथि, शैक्षिक योग्यता आदि-आदि। इसी को भरने में अभ्यर्थी हलकान रहे। कुछ कालम को भरने से पहले अभ्यर्थी साथियों से सलाह लेते दिखे तो कुछ अफसरों से पूछकर इसे भर रहे थे। वैसे काउंसिलिंग कराने वाले अधिकांश अभ्यर्थियों की प्रोफाइल काफी अच्छी थी यानी वह तमाम प्रकार की डिग्रियां हासिल किए थे, फिर भी मूलभूत जानकारियों का अभाव होने पर उनकी योग्यता पर सवाल जरूर उठे। इलाहाबाद समेत कई जिलों में में इतने अधिक अभ्यर्थी काउंसिलिंग में पहुंचे कि देर शाम तक प्रक्रिया जारी रही।
लखनऊ : बीटीसी प्रशिक्षुओं की भारी भीड़ के कारण बीएसए कार्यालय में काउंसिलिंग के दौरान हंगामा
एक पद पर 107 दावेदार होने से छूटे पसीने
लखनऊ : राजधानी में प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापकों के दस पदों के सापेक्ष सोमवार को काउंसिलिंग करवाने 1079 अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंच गए। एक-एक पद पर करीब 107 दावेदार होने के कारण काउंसिलिंग करने में ही बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के पसीने छूट गए। बीटीसी प्रशिक्षण पूरा करने वाले अभ्यर्थियों के भारी संख्या में सहायक अध्यापक पद पर नौकरी के लिए काउंसिलिंग में पहुंचने से अफरा-तफरी और हंगामे के बीच किसी तरह दस पदों पर करीब बीस अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग की गई और उनके डॉक्युमेंट जमा हुए। भारी संख्या में पहुंचे अभ्यर्थियों ने जब अपने-अपने डॉक्युमेंट जमा करने की मांग की तो काउंसिलिंग करवा रहे कर्मचारियों से उनकी तीखी बहस भी हुई मगर शांति व्यवस्था बनी रहे इसलिए अभ्यर्थियों की उपस्थिति हस्ताक्षर करवाकर दर्ज करवा ली गई।
शिक्षा भवन में स्थित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सोमवार को सुबह ग्यारह बजे भारी संख्या में अभ्यर्थियों के काउंसिलिंग में पहुंचने से स्थिति को संभालना ही मुश्किल हो गया। बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी ने मुख्य द्वार पर की काउंसिलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने की व्यवस्था कर रखी थी। यहां दस सीटों के मुकाबले दोगुने अभ्यर्थियों की ही काउंसिलिंग होनी थी लेकिन बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के पहुंचने से यहां पर व्यवस्था धराशायी हो गई। बीटीसी का प्रशिक्षण पूरा करने वाले अभ्यर्थियों से कई बार लाइन में ही रहने की गुजारिश की गई लेकिन बार- बार लाइन टूटने के कारण यहां पर हंगामा होता रहा।
पूरे प्रदेश में बीटीसी प्रशिक्षण पूरा करने वाले अभ्यर्थियों को करीब 15 हजार शिक्षकों के पदों पर भर्ती किया जाना है। राजधानी में मात्र दस पद ही सहायक अध्यापकों के हैं और यहां पर जो कटऑफ तय हुआ उसमें करीब 1079 अभ्यर्थी काउंसिलिंग के लिए अर्ह हो गए। यहां पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों का कटऑफ 77 प्रतिशत, ओबीसी का 75 प्रतिशत व एससी कैटेगरी का 74 प्रतिशत गया है। फिलहाल काउंसिलिंग में दस सीटों के मुकाबले दोगुने अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है।

बरेली : पुरुष शिक्षक मांग रहे करवाचौथ की छुट्टी, जूनियर संघ ने लिखी बीएसए को चिट्ठी और की नई डिमांड
जूनियर हाई स्कूल टीचर्स असोसिएशन ने बीएसए को लिखा लेटर, पुरुष शिक्षक मांग रहे करवा चौथ की छुट्टी
जूनियर हाई स्कूल टीचर्स असोसिएशन ने बरेली में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को लेटर लिखकर करवा चौथ के दिन यानी 30 अक्टूबर को मेल टीचर्स के लिए छुट्टी की मांग की है। इसके पीछे असोसिएशन का तर्क है कि करवा चौथ केवल महिलाओं का त्योहार नहीं है। इसमें पुरुष भी शामिल होते हैं। छुट्टी न मिलने की वजह से काफी दिक्कत होती है।
पुरुष शिक्षकों ने बताया कि करवा चौथ के दिन केवल महिला टीचर्स को ही छुट्टी लेने की इजाजत है। लेकिन कुछ पुरुष भी पत्नियों की लंबी आयु के लिए व्रत रखते हैं। वे मेल टीचर्स जो व्रत नहीं रखते उनका कहना है कि यह उनकी पत्नियों के लिए महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन घर के कामों में अपनी पत्नियों का हाथ बंटाना चाहते हैं इसलिए उन्हें इस मौके पर छुट्टी चाहिए। यह लेटर शनिवार को लिखा गया था। इसकी कॉपी हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के पास है। शिक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि टीचर्स की मांग को बेसिक शिक्षा परिषद के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के यहां भेजा जा रहा है ताकि वह इस पर विचार कर सकें।
राज्य सरकार ने जब से करवा चौथ के दिन महिला टीचर्स के लिए छुट्टी की घोषणा की है यह पहली बार है कि मेल टीचर्स ने छुट्टी की मांग की हो।
यूनियर हाई स्कूल टीचर्स असोसिएशन के तहत बरेली जिले में 2000 टीचर्स हैं इनमें से 900 महिला टीचर्स हैं। यूनियर हाई स्कूल टीचर्स असोसिएशन के जिला अध्यक्ष राकेश मिश्रा ने बताया कि ज्यादातर टीचर्स अपनी पत्नी के साथ इस दिन व्रत रखते हैं इसलिए वे छुट्टी चाहते हैं। यह तो एक तरह का भेदभाव है कि करवा चौथ के दिन केवल महिला टीचर्स को छुट्टी मिल सकती है। इस दिन महिला टीचर्स के ना आने से मेल टीचर्स पर वर्क प्रेशर बढ़ जाता है। इस वजह से महिला टीचर के साथ ही पुरुष टीचरों को भी छुट्टी दी जानी चाहिए। जिससे वे भी इसमें शामिल हो सकें। मेल टीचरों का कहना है कि करवा चौथ के दिन छुट्टी मिलने पर वे काम में अपनी पत्नी का सहयोग कर सकते हैं।
लखनऊ : जब तक शिक्षक के तौर पर वेतन नहीं दिया रहा तब तक शिक्षामित्र के तौर पर मानदेय दिये जाने की मांग
लखनऊ: शिक्षामित्रों ने मानदेय दिए जाने की मांग की है। शिक्षामित्र संघ लखनऊ के अध्यक्ष सुशील कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में उन्होंने कहा कि उन्हें शिक्षक बनाए जाने के बाद मानदेय बंद कर दिया गया। वेतन मिलना शुरू हुआ लेकिन वह भी हाई कोर्ट के आदेश के बाद से बंद है। ऐसे में शिक्षामित्र महीनों से बिना मानदेय और वेतन के पढ़ा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि जब तक शिक्षक के तौर पर वेतन नहीं दिया रहा तब तक शिक्षामित्र के तौर पर मानदेय दिया जाए। बैठक में गोसाईगंज और मलिहाबाद इकाई भंग करने का भी निर्णय लिया गया।

लखनऊ : 11 कैंडिडेट्स को डायट में एडमिशन के बाद निकाला, रीशफलिंग के नाम पर भेजा प्राइवेट कॉलेज, रसूखदारों के लिए बाहर करने का आरोप
बीटीसी की सरकारी सीटों के दाखिले में शुरू से ही घपले के आरोप लगते रहे हैं। वहीं अब डायट में एडमिशन के बाद 11 अभ्यर्थियों को निकाल दिया गया। जबकि सितम्बर में ही काउंसलिंग के बाद अक्टूबर में फीस जमा कराई गई थी। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि अभ्यर्थियों को अंतरिम एडमिशन दिया गया था और रीशफलिंग में बाहर हो गए। जबकि, अभ्यर्थियों ने एडमिशन के समय इस संबंध में जानकारी न देने का आरोप लगाया है।
डायट में एडमिशन लेने वाले देवरिया के ब्रिजेश कुमार दुबे ने बताया कि नौ अक्टूबर को फीस जमा करने के बाद 16-20 अक्टूबर के बीच क्लास भी करी थी। इसके बाद छुट्टी हो गई। अब एडमिशन कैंसल करने का नोटिस थमा दिया गया। जबकि हॉस्टल के लिए फीस भी जमा कर चुके हैं। अब हमें बाघामऊ का यशराज इंस्टिट्यूट आवंटित कर दिया गया है।
अभ्यर्थियों को आसपास के प्राइवेट कॉलेजों मे ट्रांसफर कर दिया गया है। साथ ही एडमिशन के लिए 30 हजार 8 सौ रुपये भी जमा करने को कहा गया है। कारण, डायट की फीस 10 हजार 2सौ रुपये हैं, जबकि प्राइवेट कॉलेजों की फीस 41 हजार रुपये है। ऐसे में डिफरेंस जमा न करने पर एडमिशन से हाथ धोना पड़ेगा।
कम मेरिट वाले को एडमिशन
अभ्यर्थियों का आरोप है कि डायट में धांधली और मिलीभगत के चलते उन्हें निकाला गया है। पहुंच और पैसे वालों को एडमिशन देने के लिए हमें निकाला गया है। जबकि हमसे कम मेरिट वाले कई स्टूडेंट की अनदेखी कर दी गई।
अब तक हुए सभी एडमिशन अंतरिम तौर पर लिए गए थे। रीशफलिंग में 11 स्टूडेंट्स बाहर हो गए। भविष्य में मेरिट गिरने पर फिर से डायट में एडमिशन दिया जा सकता है। -ललिता प्रदीप, प्रिंसिपल-डायट
बाराबंकी : कर्ज में डूबे शिक्षामित्र की जान गई, दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल ले जाते समय हुई मौत
बाराबंकी । कर्ज चुकाने की चिंता में एक शिक्षामित्र रामपाल (40) की जान चली गई। रविवार रात शिक्षामित्र रामपाल को पत्नी से बात करने के दौरान दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। वह अपने पीछे पत्नी और आठ बच्चों का परिवार छोड़ गया। मोहम्मदपुर खाला क्षेत्र में ग्राम रिछली मजरे एंडौरा निवासी रामपाल (40) पुत्र बृजलाल गौतम को गत वर्ष सहायक अध्यापक पद पर समायोजन के बाद हैदरगढ़ क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय जमीन हुसैनाबाद में तैनाती मिली थी।




























