
Wednesday, August 30, 2017

भर्ती के लिए दूसरे दिन भी चला धरना : 12460 सहायक अध्यापकों की भर्ती कराने की मांग तेज, सरकार से ग्रेडिंग समस्या के निपटारे की मांग
इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 12460 सहायक अध्यापकों की भर्ती कराने की मांग तेज हो गई है। अभ्यर्थियों ने मंगलवार को भी शिक्षा निदेशालय में धरना दिया। मांग है कि सरकार ग्रेडिंग समस्या के निपटारे को जल्द निर्णय ले।
अध्यापक सेवा नियमावली 1981 में आवश्यक संशोधन करते हुए भर्ती पूरी की जाए। इस भर्ती के लिए 15 दिसंबर 2016 को शासनादेश जारी हुआ था, लेकिन भाजपा सरकार ने मार्च 2017 में सभी भर्तियों पर रोक लगा दी थी। धरने में मृदुल पांडेय, राकेश विश्वकर्मा, अतुल द्विवेदी, शनी कुमार सिंह, अखिलानंद यादव, कबीर चौधरी मौजूद थे। उधर, सरकार प्राथमिक स्कूलों में 65 हजार अतिरिक्त शिक्षक मिलने के बाद कोई भर्ती फिलहाल कराने को तैयार नहीं है। यह धरना भर्ती का आदेश जारी होने तक चलते रहने का एलान किया गया है।

बीएड की 4000 मार्कशीट निरस्त करने हेतु एस0आई0टी0 ने की संस्तुति, जांच पड़ताल के बाद वि0वि0 को भेजी गयी सूची

अनिल भूषण चतुर्वेदी ने संभाला राज्य शिक्षा संस्थान के प्राचार्य का कार्यभार
★ अनिल भूषण चतुर्वेदी ने राज्य शिक्षा संस्थान उप्र इलाहाबाद के प्राचार्य का कार्यभार मंगलवार को संभाल लिया है। संस्थान के प्रभारी प्राचार्य आनंदकर पांडेय ने उन्हें कार्यभार सौंपा। चतुर्वेदी ने बताया कि संस्थान के कार्यो को गुणवत्ता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। संस्थान में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के शिक्षण के लिए पुस्तक लेखन सहित अन्य जरूरी कार्य होते हैं।
Tuesday, August 29, 2017

मां समूह की महिलाओं का विभाग नहीं जुटा पाया मोबाइल नंबर, शासन स्तर से नजर रखने के लिए मांगी गई थी जानकारी, कुछ तो है मजबूरी, जो मां बनाए विद्यालयों से दूरी
मां तो ऐसी नहीं होती है, उसे तो बच्चों की पढ़ाई और सेहत का पूरा ख्याल रहता है। बेसिक शिक्षा विभाग ने भी इसी का फायदा उठाने के लिए परिषदीय विद्यालयों में माताओं का हस्तक्षेप बढ़ाया था। मां समूह का गठन कराया गया और फिर उनसे सीधे संपर्क करने के लिए मोबाइल नंबर मांगे गए थे। मंशा थी कि शासन स्तर से सीधे उनसे बात कर विद्यालयों की जानकारी ले ली जाएगी, लेकिन कारण जो भी रहा हो, माताओं ने इसमें कोई रुचि नहीं ली और दूरी बनाए रखी।
हालत यह हुई कि 19 विकास खंड और नगर क्षेत्र में से मात्र कुछ ही विकास खंडों से मां समूह के मोबाइल नंबर जुटाए जा सके हैं।
परिषदीय विद्यालयों में सीधे अभिभावकों का हस्तक्षेप बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विद्यालय प्रबंध समितियों को पहले से ही कमान सौंपी जा चुकी है। वहीं पूर्व से ही व्यवस्था बनाई गई थी कि रोस्टर के अनुसार माताएं विद्यालयों में जाएं और फिर बच्चों का मिड-डे मील चखने के बाद अपने सामने वितरण कराएं। इस व्यवस्था को नया रूप देने के लिए विद्यालयों में मां समूह का गठन कराया गया था। जिसमें विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की छह जागरूक माताओं को शामिल किया गया था।
व्यवस्था बनाई गई थी कि माताएं शिक्षा से लेकर मिड-डे मील पर पूरी नजर रखें। हालांकि किसी तरह मां समूह का गठन तो कर लिया गया लेकिन फिर शासन स्तर से समूह में शामिल माताओं के मोबाइल नंबर और उनका विवरण भी मांगा गया था, जोकि पूरी तरह से फ्लाप हो गया। अधिकारियों का कहना है कि प्रधानाध्यापकों के माध्यम से मां समूह की महिलाओं के मोबाइल नंबर मांगे गए थे लेकिन उन लोगों ने देने से मना कर दिया।
अब बच्चों की पढ़ाई और खाने पर नजर रखने की व्यवस्था से माताएं क्यों दूर भाग रही हैं यह तो जिम्मेदार ही जानते होंगे लेकिन शासन की मंशा का पालन नहीं हो पाया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मसीहुज्जमा सिद्दीकी का कहना है खंड शिक्षा अधिकारियों से विवरण मांगा गया था। कहां का नहीं आया इसकी जानकारी लेकर उनसे भी विवरण तलब किया जाएगा।तो पोल खुलने के डर से बनाया जा रहा बहाना मां समूह की महिलाओं का मोबाइल नंबर के मामले में अधिकारियों का कहना है कि कोई मोबाइल नंबर दे ही नहीं रहा है लेकिन जानकार इसके पीछे कुछ और ही कहानी बता रहे हैं। उन लोगों का कहना है कि शासन स्तर से फरमान पर मां समूह का गठन तो कर लिया गया लेकिन अधिकांश स्थानों पर यह कागजों में हुआ है।
किसी तरह नाम भेज दिए गए हैं अब अगर उनका मोबाइल नंबर दे दिया गया तो पोल खुल जाएगी इसी लिए जानबूझ कर मोबाइल नंबर नहीं जुटाए जा रहे हैं और बहाना बनाया जा रहा है।

रामपुर : कठपुतली के ज़रिये दी जा रही शिक्षा से पढ़ाई के साथ बच्चों का हो रहा मनोरंजन, डायट पर शिक्षकों को दी गयी है ट्रेनिंग

माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के एक और सदस्य का इस्तीफा, प्रतियोगी मोर्चा द्वारा बोर्ड के पुनर्गठन हेतु इस्तीफे की मांग पर लिया फैसला
राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र के एक और सदस्य नरेंद्र सिंह ने भी सोमवार को इस्तीफा दे दिया है। उनकी नियुक्ति पिछले साल 26 अप्रैल 2016 को सदस्य के रूप में हुई थी। चयन बोर्ड के प्रतियोगी मोर्चा ने सदस्यों के इस्तीफा न देने के विरोध में सोमवार सुबह से ही कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। उसके कुछ घंटे बाद त्यागपत्र सौंपा गया है। अब केवल डा. आशालता सिंह ही चयन बोर्ड में एकमात्र सदस्य रह गई हैं। माना जा रहा है कि वह भी जल्द ही पद छोड़ देंगी। 1चयन बोर्ड प्रतियोगी मोर्चा के सैकड़ों अभ्यर्थियों ने सोमवार सुबह से कार्यालय का घेराव करके प्रदर्शन शुरू किया। उनका कहना था कि सदस्यों के इस्तीफा न देने से चयन बोर्ड का पुनर्गठन नहीं हो पा रहा है इसलिए सभी सदस्य पद छोड़े। मोर्चा के अभिषेक सिंह व विक्की खान ने उप सचिव नवल किशोर को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा है। इसमें कहा गया है कि प्रतियोगियों के भविष्य को देखते हुए चयन बोर्ड का दस दिनों के अंदर पुनर्गठन करें, वरना सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन होगा। युवाओं ने सदस्य डा. आशालता सिंह को भी 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि वह इस्तीफा सौंप दें, वरना उनके खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे।

महराजगंज : बीएसए ने जलजमाव वाले विद्यालयों के पेयजल में क्लोरीन और प्रांगण में ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग करने का दिया निर्देश

महराजगंज : आज शाम पांच बजे तक जमा होगी परिषदीय शिक्षकों के जिले के अन्दर स्थानांतरण की आनलाइन आवेदन सम्बन्धी पत्रावली
Monday, August 28, 2017

महराजगंज : उत्तर प्रदेशीय प्रा० शिक्षक संघ के जनपदीय पदाधिकारियों ने वित्त एवं लेखाधिकारी तथा उनके कार्यालय पटल सहायक के विरुद्ध शिक्षकों के वेतन भुगतान में जानबूझकर विलंब करने का लगाया आरोप

बरेली : खुले में शौच से मुक्ति दिलाएगा निबन्ध, शिक्षक दिवस पर निबन्ध लिखवाने हेतु एडी बेसिक ने दिए निर्देश
बरेली : निबंध, एक ऐसा शब्द जिसे सुनकर सभी को बचपन याद आ जाता है। जिस विषय पर निबंध लिखाया जाता था, उसके बारे में सकारात्मक, नकारात्मक पहलुओं की जानकारी लेते और बेहतर तरीके से लिखते। अब निबंध को खुले में शौच से मुक्ति (ओडीएफ) का भी जरिया बनाया जाएगा। शिक्षक दिवस पर परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से घरों में शौचालय बनवाने के लिए निबंध लिखाया जाएगा। जोकि अभिभावकों को संबोधित होगा। निबंध में बच्चे लिखेंगे कि पापा, मम्मी हमारे स्कूल में शौचालय है तो घर में भी होना चाहिए। क्योंकि खुले में शौच जाना तो गलत है। इससे बीमारियां फैलती हैं और आबोहवा दूषित होती है। हमारे आसपास अधिकांश लोगों के घरों में शौचालय हैं। इस निबंध के बारे में उनके अभिभावकों को बताया जाएगा। एडी बेसिक, बरेली मंडल शशि देवी शर्मा ने बताया कि शिक्षक दिवस पर निबंध लिखवाने के लिए बीएसए को निर्देश दिए जा चुके हैं। इसकी तैयारियां भी जिला स्तर पर शुरू हो गई हैं। इससे गांवों और कस्बों को ओडीएफ करने में बड़ी मदद मिलेगी। 1बरेली : निबंध, एक ऐसा शब्द जिसे सुनकर सभी को बचपन याद आ जाता है। जिस विषय पर निबंध लिखाया जाता था, उसके बारे में सकारात्मक, नकारात्मक पहलुओं की जानकारी लेते और बेहतर तरीके से लिखते। अब निबंध को खुले में शौच से मुक्ति (ओडीएफ) का भी जरिया बनाया जाएगा। शिक्षक दिवस पर परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से घरों में शौचालय बनवाने के लिए निबंध लिखाया जाएगा। जोकि अभिभावकों को संबोधित होगा। निबंध में बच्चे लिखेंगे कि पापा, मम्मी हमारे स्कूल में शौचालय है तो घर में भी होना चाहिए। क्योंकि खुले में शौच जाना तो गलत है। इससे बीमारियां फैलती हैं और आबोहवा दूषित होती है। हमारे आसपास अधिकांश लोगों के घरों में शौचालय हैं। इस निबंध के बारे में उनके अभिभावकों को बताया जाएगा। एडी बेसिक, बरेली मंडल शशि देवी शर्मा ने बताया कि शिक्षक दिवस पर निबंध लिखवाने के लिए बीएसए को निर्देश दिए जा चुके हैं। इसकी तैयारियां भी जिला स्तर पर शुरू हो गई हैं। इससे गांवों और कस्बों को ओडीएफ करने में बड़ी मदद मिलेगी। 1

अमरोहा : अब कप्तान साहब पढ़ाएंगे क ख ग, एसपी ने प्राइमरी स्कूल लिया गोद, सप्ताह में लेंगे एक क्लास

बरेली : बीएलएड में लिए 17 से कम उम्र वालों के दाखिले, गलती पकड़ में आने के बाद अब एडमिशन किये निरस्त
गलती पकड़ में आने के बाद अब एडमिशन किया गया निरस्त
लापरवाही
ऑनलाइन आवेदन में भी नहीं पकड़ पाए गलती
बरेली प्रमुख संवाददाताबीएलएड की काउंसलिंग खत्म होने के बाद पकड़ में आई एक गलती ने विवि की मुसीबत बढ़ा दी है। ऐसे छात्रों के एडमिशन भी कर दिए गए जिनकी उम्र 17 साल से कम थी। विवि ने कॉलेजों को एडमिशन निरस्त करने और ली गई फीस वापस करने को कहा है। समस्या यह है कि रुहेलखंड विवि ने उम्र का ऐसा कोई निर्देश अपनी वेबसाइट पर नहीं जारी किया था और बिना जांच पड़ताल के आंख मूंद कर दाखिले कर दिए गए। बीस बीएलएड कॉलेजों की 1050 सीटों से 24 से 27 अगस्त तक काउंसलिंग हुई। इसमें करीब 700 सीटों पर दाखिले हो गए हैं। रविवार को काउंसलिंग खत्म होने के बाद रिकार्ड तैयार करने प्रक्रिया शुरू हुई तो पता चला कि कई कॉलेजों में ऐसे छात्रों के एउमिशन हो गए जो एक अक्तूबर 2017 तक 17 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर रहे थे। यह गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद ऐसे छात्रों की सूची तैयार की गई है। इसके बाद इन छात्रों का रिकार्ड एडमिशन लेने वाले कॉलेजों को भेज दिया गया। दरअसल इसमें विवि प्रशासन की बड़ी चूक सामने आई है। एडमिशन के दौरान वेरीफिकेशन नहीं किया गया और न ही प्रवेश नियमों को देखा गया। अब विवि ने कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले ऐसे छात्रों की सूची जारी की है। साथ ही कॉलेजों को 10 हजार रुपये फीस वापस करने को कहा गया है। उधर रविवार को काउंसलिंग के आखिरी दिन 901-1200 रैंक के अभ्यर्थी बुलाए गए थे। काउंसलिंग के बाद 700 सीटें भर गई हैं।
विवि ने बीएलएड के लिए ऑनलाइन आवेदन कराया था। इसमें इन छात्रों ने पंजीकरण भी करा दिया। विवि ने परीक्षा दिला दी और फिर एडमिशन भी कर दिया। कई स्तर पर हुई चूक की वजह से विवि को एक बार फिर संशोधन करना पड़ेगा। इसके बाद ही विवि प्रशासन सेकेंड मेरिट लिस्ट जारी कर सकेगा।
विवि में बीएलएड की काउसलिंग में छात्र छात्रओ की भीड़ रही। ’ फाइल फोटो





























