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Tuesday, August 22, 2119

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    Sunday, January 11, 2026

    अधिकृत पुस्तकों के अलावा पढ़ाया तो पांच लाख जुर्माना या मान्यता रद्द, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए अनधिकृत पुस्तकों पर लगाई रोक

    अनधिकृत पुस्तकों पर यूपी बोर्ड हुआ सख्त, विद्यालयों में जांचेगा बस्ते, जुर्माना और सजा के प्रावधान सहित विद्यालय की मान्यता तक वापस लेने की कार्यवाही की तैयारी

    कक्षा नौ से 12 तक की पुस्तकें छापने के लिए अधिकृत हैं तीन मुद्रक

    फरवरी में बाजार में उपलब्ध हो जाएंगी अप्रैल से शुरू हो रहे शैक्षिक सत्र की पुस्तकें

    प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने अप्रैल से शुरू होने वाले शैक्षिक सत्र के लिए कक्षा नौ से 12 तक की पाठ्यपुस्तकें फरवरी में बाजार में उपलब्ध कराने की योजना सुनिश्चित की है। पुस्तकें समय से पहले उपलब्ध कराने के साथ बोर्ड यह भी सुनिश्चित कराएगा कि विद्यार्थियों के बस्ते में अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें न पहुंचें। अप्रैल से विद्यालय खुलने पर हर जिले में कुछ विद्यालयों में छात्र छात्राओं के बस्ते की रेंडम जांच जिला विद्यालय निरीक्षकों की टीम से इस उद्देश्य से कराई जाएगी कि विद्यालयों में अनधिकृत पुस्तकें तो नहीं थोपी गई हैं। अनधिकृत पाठ्यपुस्तक मिलने पर संलिप्त लोगों पर जुर्माना और सजा का प्रविधान है तथा संबंधित विद्यालय की मान्यता तक वापस ली जा सकती है।

    बीते वर्षों में शैक्षिक सत्र शुरू होने के दो से तीन महीने बाद बोर्ड की अधिकृत पुस्तकें बाजार में उपलब्ध हो पाती थीं। इस देरी का फायदा उठाकर अनधिकृत विक्रेता एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर आधारित डुप्लीकेट और महंगी पुस्तकें बाजार में बेचते थे, जिन्हें कई विद्यालयों में छात्रों को खरीदने के लिए मजबूर भी किया जाता था। समय पर किताबें उपलब्ध न होने के कारण बोर्ड भी इस पर प्रभावी रोक नहीं लगा पाता था, लेकिन इस बार अनधिकृत पुस्तकों की बिक्री पर नियंत्रण के लिए बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने ठोस तैयारी की है। 

    इसी कारण हर जिले में पुस्तक विक्रेताओं की दुकान का नाम, पता व मोबाइल फोन नंबर अभी से जारी कर दिया गया है, जहां अधिकृत मुद्रक पाठ्यपुस्तकों को फरवरी के प्रथम सप्ताह में उपलब्ध कराएंगे। ऐसे में यह तर्क पहले ही खत्म कर दिया गया है कि अधिकृत पुस्तकें नहीं मिल रही हैं। फरवरी में ही पुस्तकें उपलब्ध हो जाने पर विद्यार्थियों/अभिभावकों को सत्र शुरू होने के पहले ही पाठ्यपुस्तकें खरीदने का अवसर मिल जाएगा। 

    इस तरह शैक्षिक सत्र 2026-2027 में जब विद्यालय खुलेंगे तो छात्र-छात्राएं बस्तों में अधिकृत पुस्तकों के साथ आएंगे। ऐसे में बस्तों की रेंडम जांच कराकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनके पास केवल अधिकृत पाठ्यपुस्तकें हैं। बोर्ड सचिव का मानना है कि इससे जहां अनधिकृत पुस्तकों की बिक्री पर रोक लगेगी, वहीं पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और एकरूपता भी बनी रहेगी। अभिभावकों को आर्थिक शोषण से भी मुक्ति मिलेगी।



    यूपी बोर्ड ने अधिकृत की एनसीईआरटी व अपनी पाठ्यपुस्तकें, डुप्लीकेसी पर जेल, माध्यमिक शिक्षा परिषद के पास रहेगा पाठ्यपुस्तकों का कॉपीराइट 

    अधिकृत पुस्तकों के अलावा पढ़ाया तो पांच लाख जुर्माना या मान्यता रद्द, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए अनधिकृत पुस्तकों पर लगाई रोक

    मुद्रकों और विक्रेताओं की जिलेवार जारी की गई सूची


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर पर अनधिकृत और महंगी पाठ्य पुस्तकों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। परिषद ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी विद्यालय द्वारा छात्रों को अनधिकृत या अधिक मूल्य वाली पुस्तकों को खरीदने अथवा पढ़ने के लिए बाध्य किया गया तो उस संस्था पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही मान्यता निलंबन या पूरी तरह समाप्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

    माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा कक्षा नौ से 12 तक कुल 34 विषयों के अंतर्गत 70 एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकों को सस्ते दर पर प्रचलन में लाया गया था। इन पुस्तकों के मुद्रण और वितरण के लिए परिषद ने तीन मुद्रक-वितरकों को अधिकृत किया है। 

    परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि हाईस्कूल स्तर पर अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान एवं इंटरमीडिएट स्तर पर अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान, गृह विज्ञान सहित कुल 36 विषयों  की 70 एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों के लिए अनिवार्य की गई है।

    इसके अलावा परिषद द्वारा विकसित कक्षा नौ से 12 तक हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की 12 पाठ्य पुस्तकों को भी सस्ते दर पर छात्रों के अध्ययन हेतु लागू किया गया है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट विद्यालयों में केवल माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा अधिकृत प्रकाशकों से मुद्रित पाठ्य पुस्तकों को ही पढ़ाया जाएगा। इसके अतिरिक्त किसी अन्य पाठ्य पुस्तक को प्रचलन में लाने की अनुमति नहीं होगी।

    सचिव भगवती सिंह ने कहा कि निर्देशों का उल्लंघन इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर संस्था पर पांच लाख रुपये का जुर्माना, निर्धारित अवधि के लिए मान्यता निलंबन अथवा पूरी तरह से समाप्त की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाठ्य पुस्तकों की डुप्लीकेसी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए तीन वितरकों को अधिकृत किया गया है। इनमें आगरा, झांसी और लखनऊ के वितरक शामिल हैं।





    यूपी बोर्ड ने अधिकृत की एनसीईआरटी व अपनी पाठ्यपुस्तकें

    प्रयागराजः उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की पाठ्यपुस्तकें फरवरी के प्रथम सप्ताह तक बाजार में उपलब्ध कराने की तैयारी कर ली है। पिछले कुछ वर्षों में यह पहली बार होगा कि अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षिक सत्र के लिए पाठ्यपुस्तकें फरवरी में ही उपलब्ध हो जाने पर अनधिकृत और महंगी पुस्तकों का विक्रय कर छात्र छात्राओं/अभिभावकों की जेब काटने का खेल बंद हो जाएगा। इसके लिए बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में केवल परिषद द्वारा अधिकृत एनसीईआरटी एवं परिषद की पाठ्यपुस्तकें ही पढ़ाई जाएंगी। डुप्लीकेसी पाए जाने पर जेल और जुर्माना होगा।

    बोर्ड सचिव के अनुसार, सभी पाठ्यपुस्तकों का कापीराइट परिषद के पास रहेगा। पुस्तकों की पाइरेसी डुप्लीकेसी पाए जाने पर संबंधित मुद्रक, विक्रेता अथवा व्यक्ति के खिलाफ कापीराइट अधिनियम-1957 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें छह माह से तीन वर्ष तक की सजा और 50 हजार से दो लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। हाईस्कूल के कक्षा नौ व 10 की अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान तथा इंटरमीडिएट के कक्षा 11 व 12 की अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान और गृहविज्ञान विषय सहित कुल 36 विषयों की 70 पाठ्यपुस्तकें एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर आधारित होने के साथ सस्ते मूल्य पर उपलब्ध होंगी। 

    इसके अतिरिक्त परिषद द्वारा विकसित की गई हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की कक्षा नौ से 12 तक की 12 पाठ्यपुस्तकें भी लागू होंगी। सचिव ने यह भी स्पष्ट किया है कि मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स आगरा को कक्षा नौ व 12, मेसर्स पीतांबरा बुक्स प्रा.लि. बिजौली, झांसी को कक्षा 10 तथा व मेसर्स सिंघल एजेंसीज लखनऊ को कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तकों के लिए अधिकृत किया गया है। इन तीन वे मुद्रकों के अलावा किसी अन्य की वे पुस्तकें मान्य नहीं होंगी। सूची भी जारी की गई है कि किस जिले में किस पुस्तक विक्रेता के यहां अधिकृत न पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी। डीआओएस व इसी अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित व कराएंगे। 

    सचिव ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विद्यालय अधिक मूल्य व की किताबें, अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें, गाइड बुक या अन्य सामग्री खरीदने के लिए छात्र-छात्राओं को बाध्य करेगा तो नियमों के उल्लंघन पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना, मान्यता का निलंबन अथवा मान्यता वापसी तक की कार्रवाई संभव है। 

    प्रभारी उच्च शिक्षा निदेशक की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती, तैनाती में वरिष्ठता को दरकिनार करने का आरोप, सरकार और मंत्री को बनाया पार्टी

    प्रभारी उच्च शिक्षा निदेशक की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती, तैनाती में वरिष्ठता को दरकिनार करने का आरोप, सरकार और मंत्री को बनाया पार्टी

    हाईकोर्ट ने जनहित के बजाय नियमित याचिका के रूप में दाखिल करने की सलाह दी


    प्रयागराज। 31 दिसंबर को प्रभारी उच्च शिक्षा निदेशक बनाए गए डॉ. बीएल शर्मा की तैनाती को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। बाघम्बरी गद्दी के रहने वाले बृजेन्द्र कुमार मिश्र ने मनमानी तैनाती के खिलाफ जनहित याचिका की थी। हालांकि नौ जनवरी को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस अरुण कुमार ने इसे जनहित याचिका के स्थान पर नियमित याचिका के रूप में दाखिल करने की सलाह दी है।


    याची के अधिवक्ता की सहमति पर पीआईएल को नियमित याचिका के रूप में दर्ज करने के निर्देश देने के साथ हाईकोर्ट ने उपयुक्त बेंच के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। उच्च शिक्षा निदेशक के पद पर तैनाती में वरिष्ठता को दरकिनार करने के मामले में प्रदेश सरकार के साथ ही उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, डॉ. बीएल शर्मा के साथ ही उच्च शिक्षा के विशेष सचिव और संयुक्त सचिव को भी पार्टी बनाया गया है।


    प्रवक्ता को दे दिया पीजी प्राचार्य का पद

    प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशक का पद राजकीय पीजी कॉलेज के प्राचार्य के समकक्ष होता है। जबकि डॉ. बीएल शर्मा पीजी तो दूर स्नातक (यूजी) कॉलेज के भी प्राचार्य नहीं हैं। वह वर्तमान में प्रवक्ता के वेतनमान पर कार्यरत हैं। 31 दिसंबर को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज की सेवानिवृत्ति के दिन वरिष्ठता सूची के अनुसार क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी मेरठ के पद पर कार्यरत डॉ. मोनिका सिंह की तैनाती तय मानी जा रही थी। डॉ. बीएल शर्मा को निदेशक का प्रभार देने का फरमान आ गया। 

    डॉ. बीएल शर्मा उच्च शिक्षा निदेशालय में सहायक निदेशक पर 25 मई 2018 से कार्यरत हैं। उनसे वरिष्ठ डॉ. शशि कपूर संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात हैं लेकिन उनको भी प्रभार नहीं मिला। सूत्रों के अनुसार शिक्षा निदेशालय से निदेशक पद पर तैनाती के लिए जिन पांच नामों की संस्तुति भेजी गई थी उनमें डॉ. बीएल शर्मा का नाम नहीं था क्योंकि वरिष्ठता सूची में दर्जनों शिक्षक ऊपर हैं। चर्चा है कि मंत्री का करीबी होने के कारण ही वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए डॉ. बीएल शर्मा को इतनी अहम जिम्मेदारी दी गई है।

    Saturday, January 10, 2026

    सुप्रीम कोर्ट के TET संबंधी निर्णय सहित शिक्षा से जुड़े कई मामलों पर अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ की पहल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर समुचित कार्यवाही की मांग

    सुप्रीम कोर्ट के TET संबंधी निर्णय सहित  शिक्षा से जुड़े कई मामलों पर अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ की पहल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर समुचित कार्यवाही की मांग


    अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 01.09.2025 के निर्णय (सिविल अपील संख्या 1385/2015) के संदर्भ में एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया। 

    प्रतिनिधिमंडल ने नियुक्ति तिथि की परवाह किए बिना सभी सेवारत शिक्षकों पर TET अनिवार्य किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इस निर्णय को पूर्वव्यापी रूप से लागू किया गया, तो इससे देशभर के लगभग 12 लाख शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा, वरिष्ठता, पदोन्नति तथा आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

    प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री का ध्यान इस तथ्य की ओर आकृष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की दिनांक 23.08.2010 की अधिसूचना में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख है कि कक्षा I से VIII तक के शिक्षकों हेतु न्यूनतम योग्यताएँ अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होंगी तथा इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट रहेगी। महासंघ ने यह भी निवेदन किया कि उस समय प्रचलित वैध शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताओं के अंतर्गत नियुक्त होकर वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर इस निर्णय को पूर्वव्यापी रूप से लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा।

    शैक्षिक महासंघ ने शिक्षा मंत्री से यह अनुरोध किया कि वे इस विषय में हस्तक्षेप कर निर्णय को केवल भावी रूप से लागू किए जाने, अधिसूचना से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की वरिष्ठता, गरिमा एवं वैध अपेक्षाओं की रक्षा किए जाने तथा शिक्षकों को संभावित सेवा-समाप्ति एवं पदोन्नति से वंचित किए जाने से बचाने हेतु आवश्यक विधिक एवं प्रशासनिक कदम उठाए जाने की दिशा में पहल करें।

    इस अवसर पर महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक का स्वागत करते हुए उसके उद्देश्यों की सराहना की तथा विधेयक को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं व्यवहारिक बनाने हेतु कुछ महत्वपूर्ण सुधारात्मक सुझाव भी मंत्रीजी को प्रस्तुत किए। इसके साथ ही उच्च शिक्षा तथा विद्यालय शिक्षा से संबंधित विभिन्न दीर्घकाल से लंबित समस्याओं के समाधान हेतु एक विस्तृत मांग-पत्र भी माननीय मंत्री को सौंपा गया।

    शिक्षा मंत्री ने शिक्षक पात्रता परीक्षा के संबंध में संगठन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों एवं तथ्यों को गंभीरता से समझते हुए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एवं संबंधित अधिकारियों को इस विषय में समुचित एवं आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ शिक्षकों एवं शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े विषयों पर संतुलित एवं सकारात्मक दृष्टिकोण से विचार किए जाने का आश्वासन दिया।

    इस प्रतिनिधिमंडल में ABRSM के अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता, महासचिव प्रो. गीता भट्ट, संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, सह संगठन मंत्री जी. लक्ष्मण, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार, विद्यालय शिक्षा प्रभारी शिवानंद सिंदनकेरा, एनआईटी शिक्षक फोरम के संयोजक प्रो. महेंद्र श्रीमाली, ABRSM तेलंगाना इकाई (TPUS) के अध्यक्ष हनुमंत राव तथा महासंघ की तमिलनाडु इकाई देसीय अस्ररियार संगम के महासचिव कंदसामी सम्मिलित थे। 

    स्कूलों के संचालन का पूरा जिम्मा समाज को सौंपेगी भारत सरकार, सरकार सिर्फ वेतन और व्यवस्था देगी, बड़े बदलाव की तैयारी के संकेत

    स्कूलों के संचालन का पूरा जिम्मा समाज को सौंपेगी भारत सरकार, सरकार सिर्फ वेतन और व्यवस्था देगी, बड़े बदलाव की तैयारी के संकेत 

    सम्मग्र शिक्षा अभियान के एक नए चरण की होगी शुरुआत

    नई दिल्ली: स्कूली शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए शुरू किए गए समग्र शिक्षा अभियान के जल्द ही एक नए चरण की शुरुआत होगी। इसमें 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्यों को पूरा करने सहित स्कूलों के संचालन की व्यवस्था को लेकर भी बड़े बदलाव की तैयारी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को इसे लेकर एक खाका पेश किया और राज्यों से सुझाव भी मांगे। नई व्यवस्था के तहत स्कूलों के संचालन का पूरा जिम्मा समाज के पास होगा, जबकि सरकार सिर्फ वेतन और व्यवस्था देगी।


    केंद्र ने यह पहल तब की है, जब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को पांच साल पूरा हो गया है। समग्र शिक्षा अभियान का मौजूदा चरण भी 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रहा है। इस अभियान के चलते पिछले कुछ वर्षों में स्कूली शिक्षा में इंफ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्ता दोनों स्तर पर काफी सुधार हुआ है। बावजूद इसके लर्निंग आउटकम बढ़ाने, परीक्षा के बोझ को कम करने, बारहवीं तक शत-प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात करने जैसे ऐसे कदम हैं, जिसे सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाए बगैर हासिल नहीं किया जा सकता। 


    मंत्रालय ने इसी सोच के साथ अब स्कूलों के संचालन की पूरी व्यवस्था में बदलाव का फैसला लिया है। इसे लेकर एक मसौदा तैयार किया गया है, जिसमें स्कूलों के संचालन के लिए समाज के प्रबुद्ध वर्गों की समिति गठित की जा सकती है। 

    NCERT को इस महीने के अंत तक डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल जाएगा, स्कूलों से जुड़ी पाठ्य पुस्तकें तैयार करने के साथ ही शोध विश्वविद्यालय के रूप में करेगा काम

    NCERT को इस महीने के अंत तक डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल जाएगा, स्कूलों से जुड़ी पाठ्य पुस्तकें तैयार करने के साथ ही शोध विश्वविद्यालय के रूप में करेगा काम

    यूजीसी ने इसे लेकर जमीनी तैयारियों को किया पूरा, बोर्ड की मंजूरी मिलते ही जारी हो जाएगा नोटिफिकेशन



    नई दिल्ली: स्कूली बच्चों के लिए शोधपरक व सस्ती पाठ्य पुस्तकें तैयार करने वाला राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अब जल्द ही एक शोध विश्वविद्यालय के रूप में काम करते हुए दिखेगा। जहां छात्रों को रिसर्च आधारित कुछ नए डिग्री कोर्स पढ़ने को मिल सकते हैं। इनमें बीए व बीएससी विद रिसर्च जैसे कोर्स शामिल हैं। 


    शिक्षा मंत्रालय की सहमति के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर अपनी सारी तैयारी पूरी कर ली है। जो संकेत मिल रहे हैं, उनमें इस महीने के अंत तक होने वाली यूजीसी बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। साथ ही नोटिफिकेशन भी जारी हो जाएगा।


    एनसीईआरटी के शिक्षा व शोध क्षेत्र से जुड़े लंबे अनुभव को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2023 में ही इसको विश्वविद्यालय के रूप में तब्दील करने का एलान किया था। तभी से इसके विश्वविद्यालय बनाने की पहल शुरू हुई थी। सूत्रों की मानें तो इसके स्वरूप व कामकाज के दायरे को लेकर चले लंबे मंथन के बाद आखिरकार इसको पूर्व की जिम्मेदारियों के साथ इसके अनुभव से नई पीढ़ी को जोड़ने को लेकर सहमति दी गई। जिसमें वह शोध आधारित नए डिग्री व पीएचडी जैसे कोर्सों को शुरू कर सकता है। एनसीईआरटी का गठन 1961 में किया गया था। तब से वह स्कूली पाठ्य पुस्तकों को तैयार करने व प्रशिक्षण का काम कर रहा है।


    इस दर्जे के बाद एनसीईआरटी का पहले की तरह केंद्रीय संस्थान का स्वरूप बरकरार रहेगा। साथ ही उन्हें शिक्षा मंत्रालय से मिलने वाली वित्तीय मदद भी जारी रहेगी। वहीं विश्वविद्यालय का दर्जा मिलते ही उसकी स्वायत्तता बढ़ जाएगी। शिक्षा मंत्रालय की इस पहल को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की उस पहल से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों को स्वायत्तता देने की सिफारिश की गई है। एनसीईआरटी अभी शिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े कई डिप्लोमा कोर्सों को संचालित कर रहा है।

    Friday, January 9, 2026

    अब अटल विद्यालयों में भी समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्यप्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन ने जारी किया शासनादेश

    अब अटल विद्यालयों में भी समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्यप्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन ने जारी किया शासनादेश

    कक्षा शुरू होने से पहले छात्र पढ़कर सुनाएंगे समाचार, जूनियर बनाएंगे स्क्रैपबुक

    लखनऊछात्रों को मोबाइल से दूर करने, उनमें पढ़ने के प्रति दिलचस्पी जगाने एवं तर्क शक्ति बढ़ाने के प्रयासों को लेकर शासन ने बड़ा कदम उठाते हुए स्कूलों एवं कालेजों में समाचार पत्र का नियमित पाठन अनिवार्य किया है। पिछले दिनों पहले बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इस संबंध में आदेश जारी किया था। इसी लीक पर चलते हुए अब श्रम एवं सेवायोजन विभाग के प्रमुख सचिव ने अटल आवासीय विद्यालयों के लिए समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्य कर दिया है।


    मंडल में संचालित अटल आवासीय विद्यालयों में नियमित रूप से हिंदी व अंग्रेजी समाचार पत्र दिए जाएंगे। छात्रों को प्रतिदिन समाचार पढ़ने, नए शब्द सीखने और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विद्यार्थियों की भाषा क्षमता, सामान्य ज्ञान और सोचने-समझने की शक्ति बेहतर होगी। 

    उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष व प्रमुख सचिव श्रमयोजन डा. एमके शन्मुगा सुंदरम ने आठ जनवरी को जारी आदेश में कहा है कि विद्यालयों के पुस्तकालय में हिंदी और अंग्रेजी भाषा के समाचार पत्र अनिवार्य रूप से आएंगे। समाचार पत्रों में सामान्य ज्ञान के अतिरिक्त विज्ञान, अर्थव्यवस्था, नवीन विकास एवं खेल समाचारों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। 

    कक्षा प्रारंभ होने से पहले का दस मिनट का समय समाचार पत्र के लिए रिजर्व किया जाएगा। विद्यालय के डिस्प्ले बोर्ड पर आज का विचार लिखना होगा। कक्षा 11 और 12 के छात्रों के लिए सप्ताह में एक बार संपादकीय लेख पर आधारित समाचार लेखन या ग्रुप डिस्कशन आयोजित करना होगा। विद्यार्थियों के संपादन में स्कूल की पत्रिका निकालने का निर्देश दिया गया है।

    जूनियर स्तर के छात्रों के लिए विज्ञान, पर्यावरण एवं खेल जैसे विषयों पर स्क्रैपबुक तैयार करने के लिए कहा गया है। छात्रों के मानसिक विकास के लिए समाचार पत्रों में प्रकाशित सुडोकू, शब्द पहेली व क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

    1044 माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित होगी ICT लैब

    1044 माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित होगी ICT लैब


    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) लैब का दायरा बढ़ाया जाएगा। पहले चरण में 778 विद्यालयों में लैब स्थापित करने के बाद, दूसरे चरण में 1044 विद्यालयों में लैब की स्थापना की जाएगी। 


    इसका उद्देश्य छात्रों को अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से पठन-पाठन में बेहतर अवसर प्रदान करना है। आईसीटी लैब की स्थापना से छात्रों को कंप्यूटर शिक्षा का अवसर मिलेगा। साथ ही, विद्यालयों में कंप्यूटर उपलब्ध होने से वे तकनीकी कौशल सीख सकेंगे, कोडिंग, इंटरनेट का प्रयोग कर सकेंगे और डिजिटल सामग्री के माध्यम से अध्ययन कर सकेंगे। 


    चयनित विद्यालयों में प्रत्येक लैब में 7 कंप्यूटर डेस्कटॉप, इंटरैक्टिव पैनल, वेब कैमरा, मल्टीफंक्शनल प्रिंटर, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम और वाई-फाई राउटर जैसी सुविधाएं मिलेंगी। उपलब्ध कराई जाएंगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने सभी डीआईओएस को निर्देश दिए हैं कि आईसीटी लैब के लिए विद्यालय में अलग कमरे का प्रबंध किया जाए। 

    तकनीकी आधार पर निरस्त नहीं कर सकते स्थानांतरण आवेदन, शिक्षक का अंतरजनपदीय स्थानांतरण रद्द करने पर सचिव बेसिक शिक्षा तलब

    तकनीकी आधार पर निरस्त नहीं कर सकते स्थानांतरण आवेदन, शिक्षक का अंतर जनपदीय स्थानांतरण रद्द करने पर सचिव बेसिक शिक्षा तलब


    प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि अंतरजनपदीय स्थानांतरण का आवेदन तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है, यदि आवेदक की ओर से आवेदन करने में कोई गलती नहीं की गई है। कोर्ट ने प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर के अंतरजनपदीय स्थानांतरण के आवेदन को तकनीकी खामी के आधार पर खारिज किए जाने पर यह टिप्पणी की है। अगली सुनवाई को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को इस मामले में तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने असद उल्ला खान की याचिका पर दिया है।


    याची फर्रुखाबाद के नवाबगंज ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय नगला मुकुट में हेड मास्टर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था। उनके इस दावे को 13 नवंबर 2025 को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि याची फर्रुखाबाद के नवाबगंज ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय नगला मुकुट में हेडमास्टर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था। उनके इस दावे को 13 नवंबर 2025 को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि कुछ तकनीकी त्रुटि के कारण समय पर विचार नहीं किया जा सका और अब ऑफलाइन विचार करना कानूनन मान्य नहीं है।

    अटल आवासीय विद्यालय में कक्षा 6 और 9 में प्रवेश के लिए आवेदन शुरू, आवेदन की अंतिम तिथि 31 जनवरी और 22 फरवरी को होगी प्रवेश परीक्षा

    अटल आवासीय विद्यालय में कक्षा 6 और 9 में प्रवेश के लिए आवेदन शुरू, आवेदन की अंतिम तिथि 31 जनवरी और 22 फरवरी को होगी प्रवेश परीक्षा


    लखनऊ। अटल आवासीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के कक्षा छह व नौ में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हर ब्लाक के अधिक से अधिक बच्चों को प्रवेश मिल सके इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनो मोड में पूरी की जाएगी।

    अंतिम तिथि 31 जनवरी है। जो ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते हैं वह ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस विद्यालय में निर्माण श्रमिक, अनाथ श्रेणी, कोविड से अनाथ और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जुड़े बच्चे आवेदन के पात्र होंगे। उन्हें निशुल्क शिक्षा दी जाती है। 

    इस तरह से करें आवेदन
    ऑनलाइन के लिए pbocw.in पर जाएं ऑफलाइन के लिए श्रम कार्यालय से फॉर्म प्राप्त करें।

    ये है उम्र सीमा
    कक्षा छह में प्रवेश के लिए जन्मतिथि 1 मई 2014 से 31 अगस्त 2016 दोनों के बीच होनी चाहिए। कक्षा नौ में प्रवेश के लिए जन्मतिथि 1 मई 2011 से 31 अगस्त 2013 के बीच होनी चाहिए।


    ये शैक्षिक अभिलेख जरूरी

    कक्षा छह में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी सत्र 2025-26 में कक्षा पांच में पास होना चाहिए।

    कक्षा नौ में प्रवेश के लिए सत्र 2025-26 में कक्षा आठ पास होना चाहिए


    इन बातों का रखें ध्यान

    एक परिवार से दो बच्चे ही कर सकेंगे आवेदन। सभी वर्गों को आरक्षण नियमानुसार मिलेगा।

    आवेदन के लिए ये भी जरूरी
    निर्माण श्रमिक कार्ड।
    अनाथ होने की दशा में माता पिता का मृत्यु प्रमाणपत्र। कमजोर वर्ग के लिए ईडब्लूएस प्रमाणपत्र।
    जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड।
    आवेदक का पैन नंबर।
    जाति प्रमाणपत्र।
    पासपोर्ट साइज के फोटो।




    अटल आवासीय विद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन शुरू, 31 जनवरी तक जमा किए जाएंगे फॉर्म, 22 फरवरी को होगी प्रवेश परीक्षा




    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से संचालित अटल आवासीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए ऑफलाइन व ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया  शुरू हो गई है।

    आवेदन पत्र पूर्ण रूप से भरकर जमा करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी (शाम पांच बजे तक) और प्रवेश पत्र प्राप्त करने की अंतिम तिथि सात फरवरी है। प्रवेश परीक्षा 22 फरवरी 2026 को आयोजित की जाएगी। परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन upbocw.in के माध्यम से या समिति कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर किया जा सकता है।

    ऑफलाइन आवेदन पत्रों का वितरण जिलों के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, खंड विकास अधिकारी कार्यालय, बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय और जनपदीय श्रम कार्यालय व जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय के द्वारा किया जा रहा है। सुबह 10 से शाम पांच बजे तक इन कार्यालयों से फॉर्म प्राप्त करके वहीं जमा किए जा सकते हैं। छात्र व छात्राओं को 50-50 फीसदी सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। 



    शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 में बच्चों का प्रवेश लिये जाने हेतु मानक संचालन प्रकिया (SOP) के संबंध में



    कृपया उपर्युक्त विषयक उ०प्र० शासन, श्रम अनुभाग-02 के पत्र संख्या-1/1186369/2025-1703264 दिनांक 24.12.2025 का सन्दर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें, जिसके माध्यम से आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 में बच्चों का प्रवेश लिये जाने हेतु मानक संचालन प्रकिया (S.O.P) पर अनुमोदन प्रदान किया गया है।


    उपर्युक्त के क्रम में मा० मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार अटल आवासीय विद्यालयों में प्रवेश परीक्षा "मण्डल स्तरीय अनुश्रवण समिति" के माध्यम से कराये जाने के क्रम में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 की प्रवेश परीक्षा की मानक संचालन प्रकिया (S.O.P) पत्र के साथ संलग्न कर इस अनुरोध के साथ प्रेषित है कि कृपया प्रवेश परीक्षा के सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही कराने का कष्ट करें। 


    Thursday, January 8, 2026

    NIPI (National Iron Plus Initiative)/WIFS (Weekly Iron Folic Supplementation) के सफल क्रियान्वयन के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश जारी

    NIPI (National Iron Plus Initiative)/WIFS (Weekly Iron Folic Supplementation) के सफल क्रियान्वयन के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश जारी


    अनियमितताओं को लेकर समायोजन प्रक्रिया को निरस्त करते हुए पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए समायोजन करने की मांग को लेकर संगठन और एमएलसी हुए मुखर

    अनियमितताओं को लेकर समायोजन प्रक्रिया को निरस्त करते हुए पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए समायोजन करने की मांग को लेकर संगठन और एमएलसी हुए मुखर







    बिना कार्यमुक्त, कार्यभार ग्रहण कराए यू-डायस पर बदल दिए विद्यालय, अनियमिताओं का आरोप लगाते हुए तीसरे चरण के समायोजन को रद्द करने की RSM की मांग

    महासंघ ने शिक्षकों के समायोजन में लगाया अनियमितता का आरोप, अफसरों को भेजा ज्ञापन 


    लखनऊ। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्राथमिक संवर्ग ने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के तीसरे चरण के समायोजन में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। साथ ही इन समायोजन को निरस्त करने की मांग की है।

    प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने बताया कि बेसिक के विद्यालयों में शिक्षकों के शैक्षिक सत्र 2025-26 में तीसरे चरण के समायोजन में शिक्षकविहीन व एकल विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों को समायोजित करने का आदेश शासन ने दिया था। इस क्रम में जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा समायोजन की कार्यवाही 30 दिसंबर तक की जानी थी। लेकिन, जिला स्तर पर समायोजन में काफी गड़बड़ी की गई हैं।

    उन्होंने कहा है कि जिला स्तर पर सरप्लस शिक्षकों का निर्धारण व विद्यालय आवंटन में एकरूपता न होकर अलग-अलग मानक अपनाए गए हैं। कई जिलों में वरिष्ठ तथा कई में कनिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस मानकर समायोजित कर दिया गया है। इसमें शिक्षामित्रों व अनुदेशकों की गणना शिक्षक के रूप में की गई है, जो पूर्व में जारी विभागीय आदेशों के विरुद्ध है। वहीं कुछ जिलों में सरप्लस शिक्षकों से विकल्प लेकर विद्यालय आवंटित किये गए हैं, तो कुछ में बिना विकल्प लिए ही शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में समायोजित कर दिया गया है।

    प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने बताया कि प्रदेश के कुछ जिलों में बंद विद्यालयों को खोलने के लिए दूसरे विद्यालय को एकल कर शिक्षक भेज दिया गया। जबकि अन्य विद्यालयों में संख्या पर्याप्त थी। वहां से शिक्षक नहीं लिया गया। समायोजित शिक्षकों को विद्यालय से कार्यमुक्त/कार्यभार ग्रहण कराये बिना ही यू-डायस पोर्टल पर उनके विद्यालय बदल दिये गए हैं।

    प्रदेशीय मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि संगठन ने जिला स्तर पर किये गए समायोजन को निरस्त करने और कमियों को दूर कराकर एक समान पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, बेसिक शिक्षा निदेशक व सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को ज्ञापन भेजा गया है। 




    अनियमितताओं के चलते जिला स्तर पर किए गए तीसरे चरण के समायोजन को निरस्त करने की RSM की मांग 

    राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश ने उच्चाधिकारियों को भेजा ज्ञापन


    लखनऊ । राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (प्राथमिक संवर्ग) ने शिक्षकों के तीसरे चरण के समायोजन में की गई अनियमितता उजागर करते हुए इसे निरस्त करने की मांग उठाई है। प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने बताया कि बेसिक शिक्षा के अध्यापकों के शैक्षिक सत्र 2025-26 में तीसरे चरण के समायोजन में शिक्षक विहीन व एकल विद्यालयों में सरप्लस अध्यापकों को समायोजित करने के आदेश शासन द्वारा दिये गए थे जिसके क्रम में जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा अन्तः जनपदीय स्थानान्तरण/समायोजन की कार्यवाही 30 दिसंबर तक सम्पन्न की जानी थी, परन्तु जनपद स्तर पर समायोजन में भारी अनितामितायें की गयी हैं। 

    जनपद स्तर पर सरप्लस शिक्षकों का निर्धारण एवं विद्यालय आवंटन में एकरूपता न होकर मनमाने तरीके से अलग-अलग मानक अपनाये गए हैं, जिससे कई जनपदों में वरिष्ठ शिक्षक तथा कई जनपदों में कनिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस मानकर समायोजित किया गया है। प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने बताया कि प्रदेश के कुछ जनपदों एक बंद विद्यालयों को खोलने के लिए दूसरे विद्यालय को एकल कर में शिक्षक भेज दिया गया, जबकि अन्य विद्यालयों में संख्या पर्याप्त थी, वहाँ से शिक्षक नहीं लिया गया। 

    समायोजित शिक्षकों को विद्यालय से कार्यमुक्त/कार्यभार ग्रहण कराये बिना ही यू-डायस पोर्टल पर उनके विद्यालय बदल दिये गए हैं, जो कि बेसिक शिक्षा परिषद में स्थापित विभागीय व्यवस्था के एकदम विपरीत है। प्रदेशीय मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि संगठन द्वारा जनपद स्तर पर किये गए नियमविरुद्ध समायोजन को निरस्त करने और त्रुटियों को दूर कराकर एक समान पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के उपरान्त ही समायोजन की कार्यवाही करने की मांग अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, बेसिक शिक्षा निदेशक व सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को ज्ञापन भेजकर की गई है।







    तीसरे समायोजन में हो रही व्यापक अनियमितताओं तथा SIR में लगे BLO को शीत अवकाश का प्रतिकर अवकाश दिए जाने के सम्बंध में की मांग 


    कॉलेजों में सहायक अध्यापक अब सहायक प्रवक्ता कहलाएंगे, शिक्षणेत्तर कर्मियों के पद नाम भी बदले जाएंगे

    कॉलेजों में सहायक अध्यापक अब सहायक प्रवक्ता कहलाएंगे, शिक्षणेत्तर कर्मियों के पद नाम भी बदले जाएंगे

    उच्च माध्यमिक व इंटर के शिक्षकों की मांग पूरी होगी शिक्षणेतर कर्मियों के पद नाम भी बदले जाएंगे

    लखनऊ। सरकार उच्च माध्यमिक एवं इंटर कालेजों के सहायक अध्यापकों के साथ-साथ बेसिक व माध्यमिक के शिक्षणेत्तर कर्मियों की एक पुरानी मांग जल्द पूरा करने जा रही है। आने वाले समय में उच्च माध्यमिक व इंटर कॉलेजों के सहायक अध्यापकों का पद नाम 'सहायक प्रवक्ता' हो जाएगा जबकि सचिवालय की तर्ज पर शिक्षणेतर कर्मियों के पद नाम भी बदले जाएंगे।


    सरकार ने पदनाम परिवर्तन के लिए सैद्धान्तिक रूप से सहमति दे दी है। वर्ष 2001-2007 के दौरान मायावती सरकार के कार्यकाल में शासन ने सचिवालय के ग्रुप 'सी' वर्ग के कर्मियों के पदनाम बदल दिए थे। ग्रुप 'सी' शीर्ष पद प्रवर वर्ग सहायक, जिसका पदनाम बदलकर समीक्षाधिकारी किया गया था को राजपत्रितबनादिया गया था। 


    उसी समय से बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के अलग-अलग पदों का भी नाम बदले जाने की मांग चल रही है। अब योगी सरकार उच्च माध्यमिक एवं इंटर कालेजों में अध्यापन कराने वाले राजकीय, सहायता प्राप्त तथा सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों में कार्यरत करीब 1.5 लाख सहायक अध्यापकों का पदनाम बदलकर सहायक प्रवक्ता करने पर सहमत हो गई है।

    राजकीय के बाद अब एडेड माध्यमिक विद्यालय के छात्रों को भी गणित और विज्ञान में दक्ष बनाएगी खान एकेडमी

    राजकीय के बाद अब एडेड माध्यमिक विद्यालय के छात्रों को भी गणित और विज्ञान में दक्ष बनाएगी खान एकेडमी


    लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) और स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को भी अब खान एकेडमी के माध्यम से गणित व विज्ञान में दक्ष बनाया जाएगा। इसके लिए स्टेम कार्यक्रम के अंतर्गत ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा।


     अभी तक यह सुविधा केवल राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों को ही मिल रही थी, जो सत्र 2023-24 से संचालित है। वर्तमान शैक्षिक सत्र 2025-26 से एडेड और स्ववित्तपोषित विद्यालयों को भी इस योजना में शामिल किया जा रहा है। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के नियमित उपयोग पर जोर दिया है। 

    मिशन कर्मयोगी में ऑनलाइन कोर्स करने में स्कूल शिक्षा विभाग अव्वल, प्रदेश में सर्वाधिक 28.17 लाख कोर्स बेसिक व माध्यमिक के शिक्षकों-अधिकारियों ने किए

    मिशन कर्मयोगी में ऑनलाइन कोर्स करने में स्कूल शिक्षा विभाग अव्वल, प्रदेश में सर्वाधिक 28.17 लाख कोर्स बेसिक व माध्यमिक के शिक्षकों-अधिकारियों ने किए

    आईगॉट प्लेटफार्म पर बेसिक के 4.46 लाख और माध्यमिक के 1.19 लाख शिक्षक पंजीकृत

    लखनऊ। प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग (आईगॉट) डिजिटल प्लेटफार्म पर ऑनलाइन कोर्स पूरा करने में स्कूल शिक्षा विभाग शीर्ष पर है। विभाग के शिक्षकों और अधिकारियों ने अब तक 28.17 लाख से अधिक ऑनलाइन कोर्स पूरे किए हैं। इस सूची में पुलिस विभाग 13.8 लाख कोर्स के साथ दूसरे स्थान पर है।

    हाल ही में शासन स्तर पर हुई समीक्षा में बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने 4.7 लाख, होमगार्ड्स ने 4.5 लाख, कृषि विभाग ने 2.4 लाख, बिजली विभाग ने 2.2 लाख, पंचायती राज विभाग ने 1.4 लाख, स्वास्थ्य शिक्षा ने 1.2 लाख, हाउसिंग एवं अर्बन प्लानिंग विभाग ने 72 हजार, नगरीय विकास विभाग ने 23 हजार तथा ग्रामीण विकास विभाग ने 11 हजार से अधिक ऑनलाइन कोर्स पूरे किए हैं।


    प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के 4.46 लाख से अधिक शिक्षकों ने आईगॉट प्लेटफार्म पर पंजीकरण कराया है, जिनमें से 3.02 लाख शिक्षक कोर्स पूरा कर चुके हैं। इनमें लगभग आधे शिक्षकों ने पांच या उससे अधिक कोर्स किए हैं। इसी तरह माध्यमिक शिक्षा विभाग में 1.19 लाख से अधिक शिक्षकों ने पंजीकरण कराया, जिनमें 62,204 शिक्षक कोर्स पूरा कर चुके हैं। यहां भी लगभग आधे शिक्षकों ने पांच या उससे अधिक कोर्स किए हैं।

    बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अधिक से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आईगॉट प्लेटफार्म पर पंजीकरण कराया जाए और कोर्स पूर्ण कराए जाएं। उन्होंने विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित पाठ्यक्रमों में सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया है।


    इन 10 कोर्सेज की रही सर्वाधिक मांग

    1. योगा ब्रेक इन वर्कप्लेस- 359955
    2. योगः प्राणायाम- 267821
    3. पंचकोष- सेल्फ कांसेप्ट का एक भारतीय दृष्टिकोण - 254246
    4. सामान्य योग अभ्यासक्रम- 213195
    5. मैनर्स एंड एटीक्वेट- 188365
    6. कोड ऑफ कंडक्ट फॉर गर्वनमेंट इम्प्लाई 186786
    7. टाइम मैनेजमेंट स्किल- 175321
    8. सेल्फ लीडरशिप- 147017
    9. कंप्लीट जर्नी टू स्ट्रेस मैनेजमेंट-126884
    10. कार्यस्थल पर साइवर सुरक्षा- 46013


    शिक्षकों के लिए प्रमुख पाठ्यक्रम

    स्कूल लीडरशिप फॉर लर्निंग
    नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 (इम्प्लीमेंटेशन गाइड)
    एकेडमिक एंड एडमिनिस्ट्रेटिव प्लानिंग
    मॉनीटरिंग एंड मेंटरिंग टीचर्स
    स्कूल में वित्तीय प्रबंधन
    इनक्लूसिव एंड इक्यूटेबल स्कूल इंप्रूवमेंट
    चाइल्ड प्रोटेक्शन एंड पाक्सो अवेयरनेस
    डिजिटल गर्वननेंस एंड ई-ऑफिस बेसिस
    21वीं शताब्दी में शैक्षिक कौशल
    क्लासरूम मैनेजमेंट तकनीकी
    इनक्लूसिव शिक्षा, शिक्षा में आईसीटी


    Wednesday, January 7, 2026

    शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को जल्द मिलेगा कैशलेश इलाज, मनचाहे विद्यालय में होगी तैनाती; बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा- नकारात्मकता को छोड़कर एकजुट रहें, कदम से कदम मिलाकर साथ चलें, हर दिक्कत का होगा समाधान

    शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को जल्द मिलेगा कैशलेश इलाज, मनचाहे विद्यालय में होगी तैनाती; बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा- नकारात्मकता को छोड़कर एकजुट रहें, कदम से कदम मिलाकर साथ चलें, हर दिक्कत का होगा समाधान



    शिक्षामित्रों को जल्द मिलेगा कैशलेस इलाजः बेसिक शिक्षामंत्री

    लखनऊ । बेसिक शिक्षामंत्री संदीप सिंह ने मंगलवार को प्राथमिक शिक्षामित्र संघ का प्रान्तीय सम्मेलन में कहा कि सरकार जल्द शिक्षामित्रों को कैशलेस इलाज और बढ़ा हुआ मानदेय देगी। शिक्षामंत्री ने शिक्षामित्रों की लंबित मांगों के निस्तारण का आश्वासन दिया। मंगलवार को लोक निर्माण विभाग के विश्वसरैया सभागार में आयोजित प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रान्तीय सम्मेलन में शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों ने बेसिक शिक्षा मंत्री का स्वागत किया। सभी ने प्रदेश सरकार के शिक्षामित्र एवं अनुदेशकों को कैसलेस चिकित्सा में शामिल करने एवं शिक्षामित्र को मूल विद्यालय वापसी की कार्रवाई शुरू किये जाने पर शिक्षामंत्री का स्वागत कर मुख्यमंत्री योगी को धन्यवाद ज्ञापित किया।



    शिक्षामित्रों की मनचाहे विद्यालय में होगी तैनाती

    लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने कहा है कि शिक्षामित्रों को जल्द ही उनके घर के पास, मनचाहे विद्यालयों में तैनाती दी जाएगी। राजधानी में मंगलवार को आयोजित उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रांतीय सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि इस दिशा में कार्य तेजी से चल रहा है और शीघ्र ही इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।

    राज्यमंत्री ने शिक्षामित्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार उनकी सभी आवश्यक मांगों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपील की कि शिक्षामित्र नकारात्मकता को छोड़कर एकजुट रहें और सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ें। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षामित्र किसी भी तरह से समस्या नहीं, बल्कि वे बेसिक शिक्षा के अभिन्न अंग हैं।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एमएलसी श्रीचंद्र शर्मा ने कहा कि शिक्षामित्रों की मांगों को मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया है और उचित समय पर इसकी औपचारिक घोषणा भी की जाएगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा में एडेड और वित्तविहीन विद्यालयों के सभी शिक्षकों को शामिल करने का निर्णय लिया है। इसी कारण इसमें कुछ समय लग रहा है।

    सम्मेलन में एमएलसी व विधायक श्रीचंद्र शर्मा, वीरेंद्र सिंह लोधी, देवेंद्र सिंह लोधी, देवेंद्र सिंह राजपूत, उमेश द्विवेदी, हरिओम वर्मा, अवनीश सिंह, मानवेंद्र सिंह सहित प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला, महामंत्री सुशील कुमार, संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह तथा अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र उपस्थित रहे। 


    सरकार विरोधी छवि सुधारनी होगी

    शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी ने कहा कि शिक्षामित्रों को अपनी सरकार विरोधी छवि सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार शिक्षामित्रों के साथ खड़ी है और हर स्तर पर सहयोग करेगी। एमएलसी मानवेंद्र सिंह ने शिक्षामित्रों को बेसिक शिक्षा की रीढ़ बताते हुए कहा कि सरकार किसी भी स्थिति में उनका नुकसान नहीं होने देगी। वहीं, एमएलसी अवनीश सिंह ने कहा कि शिक्षामित्र अपने कर्तव्यों का निष्ठा से निर्वहन करें, उनके अधिकारों की लड़ाई जनप्रतिनिधि पूरी मजबूती से लड़ते रहेंगे।


    Tuesday, January 6, 2026

    शिक्षा मंत्रालय के लीडरशिप प्रोग्राम "शिक्षोदय योजना" में यूपी की पांच डायट चयनित

    शिक्षा मंत्रालय के लीडरशिप प्रोग्राम "शिक्षोदय योजना" में यूपी की पांच डायट चयनित


    लखनऊ। शिक्षा मंत्रालय की ओर से देश भर के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) को न सिर्फ अपग्रेड किया जा रहा है बल्कि यहां के प्राचार्यों, शिक्षकों आदि को भी आईआईटी-आईआईएम में लीडरशिप का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में शिक्षा मंत्रालय की ओर से प्रदेश की पांच को विशेष लीडरशिप प्रोग्राम के लिए चुना गया है। 


    प्रदेश की आगरा, बाराबंकी, कानपुर देहात, कुशीनगर व प्रयागराज को इस विशेष लीडरशिप प्रोग्राम के लिए चुना गया है। यहां के प्राचार्यों को गुजरात इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट, गांधीनगर में सात से नौ जनवरी तक तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

    यह प्राचार्य आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीक जानकारी लेकर इसे अपने यहां भी स्कूलों में लागू करेंगे। शिक्षा मंत्रालय के उप सचिव अजय कुमार की ओर से जारी पत्र के अनुसार इस प्रशिक्षण में यूपी के साथ ही ओडिशा, उत्तराखंड व अंडमान निकोबार के डायट प्राचार्य भी शिरकत करेंगे। 

    इस शिक्षोदय योजना के तहत डायट प्राचार्यों को 21वीं शताब्दी की जरूरत की शिक्षा के लिए तैयार किया जाएगा। इसमें यह प्राचार्य न सिर्फ खुद में नेतृत्व क्षमता का विकास करेंगे बल्कि अपने संस्थान को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अपने सेंटर को भी एक्सीलेंस के रूप में बनाएंगे। 

    जिला परियोजना कार्यालय एवं ब्लॉक रिसोर्स सेंटर पर खाली पड़े पद बेसिक शिक्षकों के काम के अतिरिक्त बोझ को और बढ़ा रहे

    जिला परियोजना कार्यालय एवं  ब्लॉक रिसोर्स सेंटर पर खाली पड़े पद बेसिक शिक्षकों के काम के अतिरिक्त बोझ को और बढ़ा रहे

    04 हजार से अधिक पद डीपीओ और बीआरसी पर सृजित

    लखनऊ। डीपीओ (जिला परियोजना कार्यालय) एवं बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) के खाली पड़े पद प्राइमरी शिक्षकों के काम के अतिरिक्त बोझ को और बढ़ा रहा है। नतीजा, शिक्षक संगठन अब शिक्षकों के रिक्त पदों को भरे जाने के साथ-साथ डीपीओ एवं बीआरसी के भी रिक्त पदों को भरने की मांग करने लगे हैं। सबसे खराब स्थिति बहराइच जिले की है, जहां के डीपीओ में 13 पद सृजित है जबकि सभी बीआरसी को मिलाकर कुल 60 पद सृजित हैं।

    इस प्रकार से इस जिले की दोनों संस्थाओं में कुल 73 सृजित पदों में से मात्र 4 पद ही भरे हुए हैं, शेष सभी खाली हैं। यही स्थिति ज्यादातर जिलों की हैं।


    सृजित पदों में से आधे से अधिक रिक्त पड़े 

    प्रदेश में डीपीओ और बीआरसी पर कुल मिलाकर स्वीकृत पदों की संख्या 4,279 है, जिनमें से आधे से अधिक पद रिक्त हैं। बीते पांच वर्षों के दौरान प्राइमरी स्कूलों में जिस प्रकार से अलग अलग क्षेत्रों के ऑनलाइन कार्यों में बढ़ोत्तरी हुई है, उसमें सहयोग के लिए डीपीओ और बीआरसी की स्थापना की गईहै, जिसके लिए दोनों स्तरों पर पर्याप्त संख्या में पदों का सृजन किया गया है।

    कर्मचारियों के अभाव में यह कार्य शिक्षकों व प्रधानाचार्यों को करना पड़ता है। नतीजा, कार्यदिवसों में शिक्षकों का काफी समय शिक्षण कार्य की जगह डाटा फिडिंग में व्यतीत हो जाता है।


    10 शीर्ष जिलों के डीपीओ एवं बीआरसी पर रिक्त पद


    (एक डीपीओ पर सृजित पदों की संख्या 13 है जबकि एक बीआरसी पर सृजित पदों की संख्या 4)

    यूपी बोर्ड इण्टरमीडिएट प्रयोगात्मक परीक्षा वर्ष-2026 के आयोजन के सम्बन्ध में।

    यूपी बोर्ड ने इंटरमीडिएट के प्रायोगिक परीक्षा के परीक्षकों को दिए निर्देश, पहली बार तय की समयसीमा, मांगने पर उपलब्ध कराना होगा एक साल सुरक्षित रखनी होगी प्रैक्टिकल की कॉपी 

    प्रयागराज । 24 जनवरी से नौ फरवरी तक प्रस्तावित यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट प्रायोगिक परीक्षा की कॉपियों को एक साल तक सुरक्षित रखना होगा। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने 31 दिसंबर को सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को प्रयोगात्मक परीक्षा के संबंध में निर्देश भेजे हैं। परीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि कॉपियों को अपने पास एक साल तक संरक्षित रखें जिसे मांगने पर उपलब्ध कराना होगा। इससे पहले सुरक्षित कॉपियां रखने की कोई समयसीमा नहीं थी।

    इंटरमीडिएट में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, कंप्यूटर, गृह विज्ञान आदि विषयों में अलग अलग दो प्रैक्टिकल करने होते हैं। छात्र-छात्राओं को किए गए प्रयोग की कॉपी भी लिखनी होती है। 

    परीक्षा की उत्तरपुस्तिका पर उपलब्ध टेबल पर, मौखिक और प्रोजेक्ट सत्र कार्य (आंतरिक व वाहा) का अलग अलग नंबर होता है। ये कॉपियां स्कूल वाले ही छपवाकर उपलब्ध कराते हैं और परीक्षक उसी पर प्रायोगिक परीक्षा लेते हैं। प्रत्येक जिले में प्रयोगात्मक परीक्षा आयोजित कराने वाले विद्यालयों के सापेक्ष रैंडम आधार पर लगभग दो प्रतिशत तक विद्यालयों का ऑडिट भी बोर्ड मुख्यालय की ओर से कराया जाएगा। शिवचरणदास कन्हैयालाल इंटर कॉलेज अतरसुइया के कंप्यूटर शिक्षक विश्वनाथ मिश्र ने बताया कि बोर्ड ने एक साल तक कॉपियां सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। 

    प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए एक दिन में अधिकतम दो बैच बनाए जाएंगे और प्रत्येक वैच में विद्यार्थियों की संख्या 40 से अधिक नहीं होगी। एक दिन में अधिकतम 80 विद्यार्थियों के प्राप्तांक ही ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे। प्रयोगात्मक परीक्षक को धमकी, लालच, बाधा या बल प्रयोग से प्रैक्टिकल प्रभावित करने या प्रयास करने वाले पर उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें इसमें आजीवन कारावास का प्रावधान है।

    नई व्यवस्था : स्क्रूटनी तक रखते हैं लिखित परीक्षा की कॉपियां
    प्रयोगात्मक प्रायोगिक परीक्षा की कॉपियां भले ही सालभर रखने के निर्देश परीक्षकों को दिए गए है लेकिन हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तरपुस्तिकाएं स्क्रूटनी तक ही सुरक्षित रखी जाती है। स्क्रूटनी का परिणाम घोषित होने के बाद लिखित परीक्षा की कॉपियां नष्ट कर दी जाती है।



    यूपी बोर्ड इण्टरमीडिएट प्रयोगात्मक परीक्षा वर्ष-2026 के आयोजन के सम्बन्ध में।


    यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए हेल्प डेस्क शुरु, समस्याओं का होगा समाधान, इन नंबरों के जरिये हेल्प डेस्क से करें संपर्क

    यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए हेल्प डेस्क शुरु, समस्याओं का होगा समाधान, इन नंबरों के जरिये हेल्प डेस्क से करें संपर्क


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सोमवार से हेल्प डेस्क सेवा शुरू कर दी है। यह व्यवस्था बोर्ड मुख्यालय प्रयागराज समेत प्रदेश के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में लागू की गई है ताकि छात्र-छात्राएं लिखित व प्रयोगात्मक परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं, विषयगत शंकाओं, परीक्षा भय, तनाव और जिज्ञासाओं का समय पर समाधान प्राप्त कर सकें।


    माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि हेल्प डेस्क के माध्यम से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों को प्रयोगात्मक परीक्षाओं के साथ लिखित परीक्षाओं से संबंधित हर प्रकार की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए मोबाइल नंबर और ई-मेल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

    उन्होंने बताया कि मेरठ, बरेली, वाराणसी, गोरखपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ-साथ यूपी बोर्ड निदेशालय में भी हेल्प डेस्क स्थापित की गई है जहां विशेषज्ञ छात्र-छात्राओं की समस्याओं का समाधान करेंगे।

    बोर्ड अधिकारियों ने परीक्षार्थियों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की शंका, समस्या या तनाव की स्थिति में हेल्प डेस्क से संपर्क कर समय रहते जानकारी प्राप्त करें ताकि परीक्षा की तैयारी बिना किसी दबाव के कर सकें।


    इन नंबरों के जरिये हेल्प डेस्क से करें संपर्क

    जनवरी माह में भी डीएलएड के चालू सत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई, पटरी से उतरा सत्र नहीं हो पा रहा नियमित, 2.40 लाख सीटों के सापेक्ष मात्र 1.60 लाख आवेदन

    जनवरी माह में भी डीएलएड के चालू सत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई, पटरी से उतरा सत्र नहीं हो पा रहा नियमित, 2.40 लाख सीटों के सापेक्ष मात्र 1.60 लाख आवेदन

    05 जनवरी 2026
    लखनऊ। प्रदेश में डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) में प्रवेश की पटरी से उतरी गाड़ी अब तक लाइन पर नहीं आ सकी है। हालात यह हैं कि जनवरी माह में भी चालू सत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है, जबकि सत्र समाप्त होने में कुछ ही महीने शेष हैं। विभाग अब भी छात्रों के लिए रजिस्ट्रेशन की तिथि बढ़ाने की तैयारी में जुटा है।

    प्रदेश के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में डीएलएड कोर्स में प्रवेश लिया जाता है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद अभ्यर्थी परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक पद पर भर्ती के लिए योग्य हो जाते हैं। बीते कुछ वर्षों से इस कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। साथ ही डीएलएड का शैक्षिक सत्र भी लंबे समय से अनियमित चल रहा है। पिछले वर्ष डीएलएड की अर्हता को लेकर इंटर और स्नातक के बीच काफी विवाद रहा। अंततः न्यायालय ने प्रवेश के लिए स्नातक को ही अर्हता बनाए रखने के निर्देश दिए। इसके चलते न केवल पिछले सत्र के प्रवेश फरवरी 2025 तक खिंच गए, बल्कि चालू सत्र की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई।

    इस वर्ष पहले अर्हता का मामला हाईकोर्ट में चला, जिसका निस्तारण अक्तूबर में हुआ। इसके बाद प्रवेश के लिए आवेदन लिए गए, जिनकी प्रक्रिया दिसंबर में समाप्त हुई। हालांकि अब तक न तो मेरिट सूची जारी हुई है और न ही प्रवेश की आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकी है। प्रदेश में डीएलएड की कुल 2.40 लाख सीटों के सापेक्ष मात्र 1.60 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। ये अभ्यर्थी भी डायट और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के चक्कर काटने को मजबूर हैं। प्रवेश में हो रही देरी का असर इस बार भी सीटें भरने पर पड़ने की आशंका है।


    डीएलएड की जगह बीएलएड की भी तैयारी

    शिक्षा मंत्रालय की ओर से देशभर के डायट संस्थानों को अपग्रेड करने की कवायद चल रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आने वाले कुछ वर्षों में डीएलएड की जगह बीएलएड कोर्स शुरू करने की तैयारी है। डीएलएड जहां दो वर्षीय कोर्स है और इसके लिए प्रवेश अर्हता स्नातक है, वहीं बीएलएड चार वर्षीय होगा और इसकी अर्हता इंटरमीडिएट निर्धारित की जाएगी। बीएलएड करने के बाद अभ्यर्थी बेसिक और माध्यमिक दोनों स्तरों की शिक्षक भर्ती के लिए योग्य होंगे।

    सीटों के सापेक्ष कम आवेदन आए हैं। कॉलेजों की भी मांग थी, इसे देखते हुए रजिस्ट्रेशन की तिथि बढ़ाने का प्रस्ताव शासन में भेजा गया है। वहां से होने वाले निर्णय पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सत्र अगली बार से नियमित करने का प्रयास भी किया जाएगा। - अनिल भूषण चतुर्वेदी परीक्षा नियामक प्राधिकारी




    बेसिक शिक्षा में शिक्षक भर्ती का पता नहीं, डीएलएड से मोह घटा, एक लाख से ज्यादा सीटें रिक्त रहना निश्चित

    52000 पद रिक्त होने के सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे से बीच के दो वर्षों में बढ़े थे प्रवेश

    अब शिक्षक छात्र समानुपात बताए जाने पर एक लाख से ज्यादा सीटें रिक्त रहना निश्चित

    20 दिसंबर 2025
    प्रयागराज । बेसिक शिक्षा में सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए अनिवार्य योग्यता डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षण तो हर साल प्रवेश लेकर कराया जा रहा है, लेकिन सात साल से कोई शिक्षक भर्ती नहीं आने से छात्र-छात्राओं का  रुझान इससे घट रहा है। सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से दिए गए हलफनामे में करीब 52,000 पद - रिक्त बताए जाने पर पिछले दो वर्ष में प्रवेश लेने वालों की संख्या बढ़ - गई थी, लेकिन अब विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात समान बताए - जाने पर प्रवेश को लेकर इस बार ग्राफ फिर गिर गया है। 


    सत्र 2025 में डीएलएड में प्रवेश के लिए उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने आनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्ण कराई। प्रदेश के कुल 3,371 डीएलएड संस्थानों की 2,39,500 सीटों के सापेक्ष केवल 1,38,857 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराए। इसके सापेक्ष शुल्क केवल 1,25,333 ने ही जमा किए। इस तरह एक लाख से ज्यादा सीटें रिक्त रहना तय है। 


    शिक्षक भर्ती की स्थिति यह है कि बेसिक शिक्षा में 2018 के बाद से भर्ती नहीं आई। कुछ माह पहले सदन में बेसिक शिक्षा मंत्री ने एक प्रश्न के जवाब में कहा था कि विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात समान है। इस तरह जल्दी भर्ती की उम्मीद भी नहीं है। यह भर्ती परीक्षा अब तक पीएनपी कराता रहा है, लेकिन यह दायित्व अब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को दे दिया है। इस तरह इस भर्ती को लेकर अभी नियमावली ही नहीं बनी है, इसलिए पद रिक्त होने पर भी भर्ती में देरी तय है।।





    स्कूलों को अनुदान देना नीतिगत मामला, हस्तक्षेप नहीं कर सकते, हाईकोर्ट ने कहा – वित्तीय सहायता प्राप्त करना मूल अधिकार नहीं

    स्कूलों को अनुदान देना नीतिगत मामला, हस्तक्षेप नहीं कर सकते, हाईकोर्ट ने कहा – वित्तीय सहायता प्राप्त करना मूल अधिकार नहीं

    एकल पीठ के निर्णय के खिलाफ दायर विशेष अपीलें स्वीकार, 35 याचियों को लगा झटका याचिकाएं खारिज


    प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि राज्य सरकार निजी प्राथमिक विद्यालयों को अनुदान देने के लिए बाध्य नहीं है भले ही वे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को शिक्षा प्रदान करते हों। अनुदान प्राप्त करना किसी संस्था का मूल अधिकार नहीं है। कोर्ट ने सरकार द्वारा विद्यालय को 2024 में अनुदान देने के फैसले पर हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया किंतु कहा कि अध्यापकों को वेतन भुगतान का आदेश नहीं दिया जा सकता। यह सरकार पर है कि वह अध्यापकों की योग्यता नियमानुसार नियुक्ति पाने की दशा में उचित निर्णय ले। यह फैसला न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील पर दिया है।


    राज्य सरकार का तर्क था कि उसने अपना वैधानिक दायित्व पूरा किया है और हर किलोमीटर पर एक प्राथमिक विद्यालय और प्रत्येक तीन किलोमीटर पर एक जूनियर हाई स्कूल स्थापित किया है। कोर्ट ने कहा कि निजी विद्यालयों को अनुदान देने का निर्णय राज्य सरकार का नीतिगत मामला है और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने राज्य सरकार व तीन अन्य की उन विशेष अपीलों को स्वीकार कर लिया है जिसमें एकलपीठ के दिसंबर 2022 के आदेश को चुनौती दी गई थी। इससे 35 याची लाभान्वित हए थे। उन्हें वेतन देने का आदेश दिया गया था।

     रमेश कुमार व 13 अन्य, श्री शिवमंगल चौधरी प्राइमरी विद्यालय, किरण यादव व तीन अन्य, छोटेलाल यादव व चार अन्य तथा घनश्याम व 10 अन्य के खिलाफ सरकार की तरफ से विशेष अपील दायर की गई थीं। विपक्षी की याचिकाओं में एकल पीठ ने सरकार को आगे निर्देश दिया कि वे उचित आदेश पारित करके याचिकाकर्ता संस्थान के शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों को वेतन भुगतान के लिए उचित आदेश पारित कर अनुदान को मंजूरी दे और जारी करें। विशेष अपीलें प्रमुख सचिव, समाज कल्याण विभाग, और अन्य के माध्यम से दायर की गई। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने कहा कि याचिकाएं हैं।

    सुनवाई योग्य नहीं थीं। समाज कल्याण विभाग द्वारा, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चों को शिक्षा देने के लिए प्रोत्साहन के रूप में, निजी प्रबंधन द्वारा चलाए जा रहे प्राइमरी स्कूलों को आवर्ती अनुदान प्रदान करने की पिछली नीति पांच अक्टूबर 2006 को वापस ले ली गई थी, इसलिए याचीगण का दावा पोषणीय नहीं है। 

    खंडपीठ ने कहा, राज्य सरकार ने स्कूलों को नियमित ग्रांट देने का कोई आश्वासन नहीं दिया था। शिक्षकों की सैलरी और दूसरे खर्च मैनेजमेंट को अपने फंड से पूरे करने थे। मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने की राज्य की जिम्मेदारी, जिसे अब मौलिक अधिकार बना दिया गया है, उसे ऐसे स्कूलों के जरिए लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा, महामना मालवीय अनुसूचित जाति प्राथमिक पाठशाला, जाकरीया, रसरा, बलिया को अनुदान देने का फैसला सरकार का है और इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। अन्य शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को वेतन देने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि उनके नियुक्ति और योग्यता के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सरकार केवल उन शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन दें, जो नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यता और प्रक्रिया का पालन करते हुए नियुक्त किए गए हैं।

    Monday, January 5, 2026

    यूपी बोर्ड के कैलेंडर में निर्देश आदर्शों भरे, हकीकत में पूछ नहीं, वर्षभर गैर शैक्षणिक के बोझ से शैक्षिक पंचांग का पीछे छूटना तय

    यूपी बोर्ड के कैलेंडर में निर्देश आदर्शों भरे, हकीकत में पूछ नहीं, वर्षभर गैर शैक्षणिक के बोझ से शैक्षिक पंचांग का पीछे छूटना तय


    प्रयागराज, यूपी बोर्ड से जुड़े कक्षा नौ से 12 तक के 29 हजार से अधिक स्कूलों के लिए हर साल जारी होने वाले शैक्षणिक कैलेंडर में निर्देश तो आदशों से भरे होते हैं लेकिन हकीकत में बहुत कम निर्देशों का अनुपालन ही होता है। 


    उदाहरण के तौर पर 2025-26 सत्र के लिए जारी कैलेंडर में विद्यार्थियों को करियर के प्रति जागरूक करने के लिए प्रत्येक स्कूल में महीने में दो बार स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर, बैंक के अधिकारी, सेवायोजन अधिकारी, न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारी, उद्यमियों एवं अन्य प्रतिष्ठित महानुभावों को सम्बोधित करने आमंत्रित करने की सलाह दी गई थी। ये अलग बात है कि पूरे प्रदेश में इक्का-दुक्का स्कूल ही होगा जहां करियर गाइडेंस संबंधित नियमित सत्र आयोजित किए गए हों। 


    इसी प्रकार यूपी बोर्ड के पूर्व सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने 'नए सत्र में नया सवेरा' कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके तहत अप्रैल के प्रत्येक सप्ताह में दो दिन शिक्षाधिकारियों को विद्यालयों की प्रातःकालीन सभाओं में विद्यार्थियों से जीवन मूल्यों, अनुशासन, करियर, नियमित दिनचर्या आदि प्रासंगिक विषयों पर प्रेरक संवाद करने को कहा गया था। इस कार्यक्रम में यथासंभव विद्यालयों के पुरा छात्रों एवं विभिन्न क्षेत्रों में सफल व्यक्तियों को भी आमंत्रित करने की बात कही गई थी। हालांकि यह निर्देश भी सिर्फ कैलेंडर तक सीमित रह गया। 

    हैंड्स ऑन एक्टीविटीज एवं एक्सपीरिएन्शियल लर्निंग विधा को गणित एवं विज्ञान विषय के शिक्षण में शामिल करने की बात हो या विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उनका स्वास्थ्य कार्ड बनवाना हो या फिर लैंगिक समानता पर विद्यार्थियों के बीच परिचर्चा, इन सभी निर्देशों की हकीकत में किसी स्कूल में पूछ नहीं है। 


    माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी कहते हैं कि वर्षभर सरकार और विभाग की ओर से प्रधानाचार्य और शिक्षकों को दूसरे इतने काम सौंपे जा रहे हैं कि शैक्षिक पंचांग को पीछे छूटना ही है। दूसरा अफसरों की ओर से बनाया जा रहा शैक्षिक पंचांग कई पहलुओं से अव्यावहारिक है। यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में क्षेत्रीय विविधता और स्वायत्तता को नष्ट कर रहा है।

    Sunday, January 4, 2026

    विवाहित पुत्री को पारिवारिक पेंशन देने का हाईकोर्ट का निर्देश

    विवाहित पुत्री को पारिवारिक पेंशन देने का हाईकोर्ट का निर्देश

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 वर्ष से अधिक आयु की विवाहित पुत्री को पारिवारिक पेंशन नहीं देने का बीएसए फर्रुखाबाद का आदेश रद्द कर दिया है। साथ ही याची को पारिवारिक पेंशन देने पर निर्णय लेने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने अनुराधा अहिरवार की याचिका पर दिया है। 


    उच्च प्राथमिक विद्यालय फ़र्रुखाबाद में प्रधानाध्यापिका पद पर कार्यरत याची की मां दुर्गा अहिरवार की मृत्यु वर्ष 2013 में हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद याची ने पारिवारिक पेंशन के लिए अनुरोध किया लेकिन बीएसए फ़र्रुखाबाद ने 1989 के शासनादेश को आधार मानते हुए याची के पारिवारिक पेंशन के दावे को अमान्य कर दिया।

     कहा गया कि याची 33 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी है और शासनादेश के अनुरूप पारिवारिक पेंशन अधिकतम 25 वर्ष आयु या विवाह होने तक मान्य है। याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने हसीना बी केस के निर्णय और 2008 एवं 2012 के शासनादेश को आधार मानते हुए बीएसए का आदेश निरस्त कर दिया। 

    उत्तर प्रदेश में संस्कृत का अध्ययन कर रहे कक्षा छह से परास्नातक के विद्यार्थी अब छात्रवृत्ति के लिए 10 जनवरी तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन

    उत्तर प्रदेश में संस्कृत का अध्ययन कर रहे कक्षा छह से परास्नातक के विद्यार्थी अब छात्रवृत्ति के लिए 10 जनवरी तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन 

    छह से परास्नातक तक के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अंतिम तिथि बढ़ाई


    प्रयागराज । उत्तर प्रदेश में संस्कृत का अध्ययन कर रहे कक्षा छह से परास्नातक के विद्यार्थी अब छात्रवृत्ति के लिए 10 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव ने पहले आवेदन करने और उसकी हार्ड कॉपी विद्यालय में जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर निर्धारित की थी जो अब बढ़ाकर 10 जनवरी कर दी गई है। 


    संबंधित प्रधानाचार्य 11 और 12 जनवरी को आवेदनों का सत्यापन और उसे अपलोड करेंगे। सत्यापन की हार्डकॉपी 13 जनवरी तक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा करनी होगी और डीआईओएस 15 जनवरी तक सत्यापन करेंगे।

    जिला समिति के समक्ष अनुमोदन के लिए 16 जनवरी तक आवेदन प्रस्तुत किए जाएंगे और डीआईओएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से लाभार्थियों का विवरण 20 जनवरी तक भेजेंगे। पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन पत्रों की समीक्षा 21 जनवरी तक होगी और 28 जनवरी तक लाभार्थियों के खाते में छात्रवृत्ति की धनराशि भेजी जाएगी। 

    प्रदेश के 403 सहायता प्राप्त संस्कृत महाविद्यालय और 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में कक्षा छह से परास्नातक तक में अध्ययनरत लगभग सवा लाख विद्यार्थियों में से अब तक 28 हजार से अधिक ने ही आवेदन किया है।

    नियम न कानून और परिषदीय शिक्षकों का कर दिया मनमाना तबादला, समायोजन से पहले न तो शिक्षकों से विकल्प लिया गया न ही वरिष्ठ या कनिष्ठ शिक्षक का कोई तय मानक, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षक

    नियम न कानून और परिषदीय शिक्षकों का कर दिया मनमाना तबादला, समायोजन से पहले न तो शिक्षकों से विकल्प लिया गया न ही वरिष्ठ या कनिष्ठ शिक्षक का कोई तय मानक, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षक


    यू-डायस पोर्टल पर 31 दिसम्बर को ही स्थानान्तरित पर अभी तक सूची जारी नहीं हुई

    ● शिक्षकों से विकल्प लिए बगैर कर दिया मनमाना स्थानान्तरण 
    ● जिलों में बीएसए की मनमानी के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षक


    03 जनवरी 2026
    प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों के समायोजन में अफसरों पर मनमानी के आरोप लगे हैं। शिक्षकों का कहना है कि अफसरों ने मनमानी की सीमा पार कर दी है। यू-डायस पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर हुए समायोजन से पहले न तो शिक्षकों से विकल्प लिया गया न ही वरिष्ठ या कनिष्ठ शिक्षक को ही देखा गया। जहां जिस बेसिक शिक्षा अधिकारी को जो समझ में आया, तबादला आदेश जारी कर दिया। आक्रोशित शिक्षक हाईकोर्ट खुलने पर समायोजन आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

    जिन जिलों में कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन हुआ है उनमें अमेठी, मथुरा, रायबरेली, बदायूं, हरदोई, देवरिया, हाथरस, उन्नाव, बुलंदशहर, लखीमपुर खीरी, बागपत और पीलीभीत आदि शामिल हैं। वहीं, जिन जिलों में वरिष्ठ शिक्षकों का समायोजन हुआ है उनमें अमरोहा, हापुड़, वाराणसी, चित्रकूट, बरेली, रामपुर, आगरा, गोरखपुर, फर्रुखाबाद, कुशीनगर, संत कबीर नगर, फिरोजाबाद, फतेहपुर और सीतापुर आदि शामिल हैं।

    शिक्षक नेता निर्भय सिंह का कहना है कि कई जिलों जैसे बाराबंकी, लखनऊ आदि में यू-डायस पोर्टल पर शिक्षकों को 31 दिसम्बर को ही स्कूल से स्थानान्तरित कर दिया गया है। अभी तक सूची जारी नहीं हुई कि किसे किस स्कूल भेजा गया है। इसे लेकर शिक्षक परेशान हैं।

    प्रयागराज में समायोजन में मनमानी का आरोप
    आरोप है कि संदीप कुमार तिवारी का समायोजन मेजा के कंपोजिट विद्यालय नेवढ़िया से उच्च प्राथमिक विद्यालय महुलीकलां में हुआ जो कि 40 किलोमीटर दूर है जबकि दो किमी दूर बगल का स्कूल एकल था। संदीप कुमार जुलाई-अगस्त 2025 में समायोजन के दौरान प्रधानाध्यापक बिसाहिजन खुर्द से नेवढ़िया गए थे। आरोप है कि स्वेच्छा से समायोजन लेने के छह महीने के अंदर दोबारा जबरदस्ती समायोजन कर दिया गया। उनसे वरिष्ठ दो शिक्षक हैं जिनका समायोजन नहीं हुआ। उच्च प्राथमिक विद्यालय शृंग्वेरपुर से हिंदी की अकेली शिक्षक सुनीता चौरसिया का समायोजन मादूपुर कर दिया गया। जबकि उनके स्कूल में एक विषय में दो शिक्षिकाएं हैं, उनमें से किसी का समायोजन नहीं हुआ। कई स्कूल ऐसे हैं जिसमें वरिष्ठ और कनिष्ठ को छोड़कर अन्य शिक्षकों का समायोजन हो गया है।

    प्राइमरी हेड को जूनियर में किया समायोजित
    जौनपुर और कासगंज समेत कुछ जिलों में प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को उच्च प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित कर दिया गया है। जबकि इसे लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। सैकड़ों शिक्षकों ने प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में समायोजन या पदोन्नति में टीईटी लागू करने के लिए हाईकोर्ट में याचिकाएं कर रखी है।




    समायोजन में एक नीति न होने पर बेसिक शिक्षकों में बढ़ी नाराजगी, प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर बढ़ रही नाराजगी

    30 दिसम्बर 2025
    लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ ने कहा है कि शिक्षकों के समायोजन में कोई एक नीति नहीं है। कहीं वरिष्ठ तो कहीं जूनियर शिक्षकों का मनमाना तबादला किया जा रहा है। 

    संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा एक प्रयोगशाला बन गई है। कभी स्कूलों की पेयरिंग, कभी टीईटी अनिवार्यता तो कभी ऑनलाइन हाजिरी की वजह से शिक्षक परेशान रहे हैं। अब सरप्लस शिक्षकों के समायोजन में उनके सामने नई मुसीबत खड़ी है। जिन स्कूलों में मानक से अधिक शिक्षक हैं, उन्हें एकल व बंद स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया चल रही है।

    उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने बताया है कि जिले में सरप्लस की जो सूची बनाई जा रही है, उसमें कुछ जगह जूनियर का तबादला किया जा रहा है। वहीं, कुछ जिलों में वरिष्ठ के तबादले का विकल्प दे रहे हैं। कुछ जगह बिना विकल्प के ही जबरन समायोजन की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि हर जिले में अलग-अलग नीति से शिक्षकों में काफी नाराजगी है।



    कहीं सीनियर तो कहीं जूनियर शिक्षक का कर दिया जा रहा तबादला, परिषदीय शिक्षकों के अंत:जनपदीय तबादलों में मनमानी

    लखनऊ: हाथरस के बीएसए में खंड शिक्षाधिकारियों को आदेश दिया है कि शिक्षक विहीन और एकल विद्यालय में जूनियर शिक्षक कर तबादला समायोजन कर दिया जाए। आदेश में यह भी लिखा है कि शिक्षकों से बिना विकल्प लिए तबादला किया जाए। वहीं, हमीरपुर के बीएमए लिखते हैं कि विकल्प लेकर  शिक्षक का तबादला कर दिया जाए। कई तरह की ऐसी असमानताएं केवल  मामला इन दो जिलों का ही नहीं,  पूरे प्रदेश का पही हाल है।

    कुछ बीएसए सीनियर शिक्षक का तबादला कर रहे हैं तो कुछ जिलों में जूनियर का तबादला कर दे रहे। इतना ही नहीं, कुछ बीएसए ने विकल्प लेकर तबादला करने की बात लिखी है तो कुछ बिना विकल्प तबादले को कह रहे। वहीं कुछ जिले ऐसे भी है, जहां जूनियर का कोई निक ही नहीं किया गया है। ऐसे में किसी भी शिक्षक का तबादला किया जा सकता है। जिलों  में अलग-अलग नीति अपनाए जाने से शिक्षक परेशान हैं। उनका कहना है कि बिना किसी नियम के जिस शिक्षक को चाहेंगे, तबादला कर दिया जाएगा। कोई विकल्प नहीं भरता है, तो उसका तबादला जबरन करने की बात भी कई जिलों के बीएसए कर रहे हैं। 


    कहां कैसे हो रहे तबादले?

    शासनादेश में कह स्पष्ट नहीं किया गया कि तबादला जूनियर का होगा या सीनियर का। सीतापुर के बीएसए ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया कि किस शिक्षक का पहले तबादला होगा। कुशीनगर के बीएसए ने यह तो लिखा है कि पहले दिव्यांग सरप्लस, फिर महिला सरप्लस और फिर पुरुष सरप्लस का तबादला होगा। लेकिन उन्होंने यह नहीं स्पष्ट किया कि इनमें भी पहले जूनियर का किया जाएगा या फिर सीनियर का। हमीरपुर के बीएसए ने पहले दिव्यांग महिला, फिर दिव्यांग पुरुष, उसके बाद बरिष्ठ महिला और फिर वरिष्ठ पुरुष अध्यापक का तबादला करने के लिए लिखा है। 

    शासन और निदेशक स्तर से जारी आदेश 19 दिसंबर को जो पत्र लिखा है, उसके अनुसार दिव्यांग, महिला, पुरुष विषया और विधुर के साथ ही वरिष्ठता के आधार पा तबादला होगा। वहीं, 26 दिसंबर को बिना किसी विकल्प के जूनियर शिक्षक तबादला करने के लिए लिखा है। 


    बड़े अफसरों ने साधा मौन
    इस बारे में अपर मुख्य सचिन पार्थ सारथी सेन शर्मा, डीजी स्कूल शिक्षा मोनिका रानी, निदेशक बेसिक शिक्षा से बात करने के लिए फोन किया गया। उनका पक्ष जानने के लिए मेसेज भी किया। अपर मुख्य सचिव ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बाकी अधिकारियों ने भी कोई जवाब नहीं दिया।


    क्या है असल वजह?
    इसके पहले भी बेसिक शिक्षकों के तबादले होते रहे है। प्रदेश स्वर में ऑनलाइन चुनते थे। इस बार तबादला करने के लिए बीएसए पर छोड दिया गया है। वे अपने स्तर से अलग-अलग़ निर्णय ले रहे है। जानकारों के अनुसार इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि इसस पहले एक बार सीनियर और एक बार जूनियर का नियम था। तब भी कुछ शिवक कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने ना सिरे से नही बनाने के लिए कहा गया। यही वजह है कि जिला स्तर से कैसे भी तबादला प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा रही है। अभी कोर्ट बंद है। ऐसे में शिक्षक अभी कोर्ट भी नहीं सकते।