DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Tuesday, August 22, 2119

अब तक की सभी खबरें एक साथ एक जगह : प्राइमरी का मास्टर ● इन के साथ सभी जनपद स्तरीय अपडेट्स पढ़ें


 📢 प्राइमरी का मास्टर PKM
      अधिकृत WhatsApp चैनल


व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।
  • प्राइमरी का मास्टर ● कॉम www.primarykamaster.com उत्तर प्रदेश
  • प्राइमरी का मास्टर करंट न्यूज़ टुडे
  • प्राइमरी का मास्टर करंट न्यूज़ इन हिंदी 
  • प्राइमरी का मास्टर कॉम
  • प्राइमरी का मास्टर लेटेस्ट न्यूज़ २०१८
  • प्राइमरी का मास्टर शिक्षा मित्र लेटेस्ट न्यूज़
  • प्राइमरी का मास्टर खबरें faizabad, uttar pradesh
  • प्राइमरी का मास्टर ● कॉम www.primarykamaster.com fatehpur, uttar pradesh
  • प्राइमरी का मास्टर ट्रांसफर
  • प्राइमरी का मास्टर करंट न्यूज़ इन हिंदी
  • प्राइमरी का मास्टर शिक्षा मित्र लेटेस्ट न्यूज़
  • प्राइमरी का मास्टर लेटेस्ट न्यूज़ २०१८
  • प्राइमरी का मास्टर ● कॉम www.primarykamaster.com उत्तर प्रदेश
  • प्राइमरी का मास्टर ट्रांसफर 2019
  • प्राइमरी का मास्टर अवकाश तालिका 2019
  • प्राइमरी का मास्टर शिक्षा मित्र लेटेस्ट न्यूज़ इन हिंदी लैंग्वेज
  • primary ka master 69000 
  • primary ka master district news 
  • primary ka master transfer 
  • primary ka master app 
  • primary ka master holiday list 2019 
  • primary ka master allahabad 
  • primary ka master 17140 
  • primary ka master latest news 2018 
  • primary ka master 69000 
  • news.primarykamaster.com 2019 
  • news.primarykamaster.com 2020   
  • primary ka master district news 
  • primary ka master transfer 
  • primary ka master app 
  • primary ka master holiday list 2019 
  • primary ka master allahabad 
  • primary ka master 17140 
  • primary ka master transfer news 2019 
  • primary ka master app 
  • primary ka master transfer news 2018-19 
  • primary ka master todays latest news regarding 69000 
  • primary ka master allahabad 
  • primary ka master mutual transfer 
  • up primary teacher transfer latest news 
  • primary teacher ka transfer



स्क्रॉल करते जाएं और पढ़ते जाएं सभी खबरें एक ही जगह। जिस खबर को आप पूरा पढ़ना चाहें उसे क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

    Monday, April 6, 2026

    सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर माध्यमिक शिक्षकों की रैली आज, लखनऊ के ईको गार्डन में जुटेंगे हजारों शिक्षक

    सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर माध्यमिक शिक्षकों की रैली आज, लखनऊ के ईको गार्डन में जुटेंगे हजारों शिक्षक

    लखनऊः अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक सेवा सुरक्षा और स्कूलों के राजकीयकरण की मांग को लेकर सोमवार को अपनी ताकत दिखाएंगे। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के बैनर तले लखनऊ के ईको गार्डन में आयोजित होने वाली राज्यस्तरीय रैली में वे अपनी मांगों को लेकर मुखर होंगे।


    संघ के नेताओं ने प्रदेश भर के शिक्षकों से अपील की है कि वे यहां पहुंचकर अपनी एकजुटता दिखाएं। प्रदेश में इस समय 4512 एडेड माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें करीब 67 हजार शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों की मुख्य मांग है कि उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और विद्यालयों का राजकीयकरण किया जाए। संघ का आरोप है कि सेवा सुरक्षा खत्म होने के कारण प्रबंधकों का दबाव बढ़ गया है।

    संगठन के नेताओं का कहना है कि इसी के चलते प्रदेश में अब तक करीब 180 शिक्षकों को निलंबित और 120 शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है। उनकी यह भी मांग है कि शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम में सेवा सुरक्षा से जुड़े स्पष्ट प्रविधान शामिल किए जाएं, ताकि भविष्य में शिक्षकों के साथ मनमानी न हो सके।

    टीईटी के विरोध में 13 को फिर हुंकार भरेंगे शिक्षक, जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस, दर्ज कराएंगे विरोध, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले दो दर्जन संगठन लामबंद

    टीईटी के विरोध में 13 को फिर हुंकार भरेंगे शिक्षक, जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस, दर्ज कराएंगे विरोध, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले दो दर्जन संगठन लामबंद


    लखनऊ। टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक फिर हुंकार भरेंगे। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले करीब दो दर्जन संगठन सड़क पर उतरेंगे। संगठन 13 अप्रैल को प्रदेश भर में - मशाल जुलूस निकालेंगे।

    महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि मशाल जुलूस निकालने के लिए हर - जिले में बैठक कर रणनीति बनाई जा रही है। गाजियाबाद, एटा, - लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा, प्रयागराज में तैयारियां जोरशोर से की जा रही हैं। जुलूस के लिए हर न्याय पंचायत पर एक सह प्रभारी, ब्लॉक स्तर प्रभारी व जिला स्तर पर एक जिला समन्वयक की नियुक्ति की गई है। 

    शिक्षक इस मुद्दे पर लगातार आंदोलन कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने के प्रति गंभीर नहीं है। इसी वजह से 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस के साथ शिक्षक सड़क पर उतरेंगे।

    सुप्रीम कोर्ट के टीईटी अनिवार्यता के आदेश से प्रदेश के 1 लाख 86 हजार शिक्षकों सहित देश के लगभग 18 लाख शिक्षक काफी आहत हैं। केंद्र सरकार इन्हें जल्द राहत दे। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु, टीएससीटी के संस्थापक अध्यक्ष विवेकानंद आर्य, एससीएसटी बेसिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश विद्रोही ने कहा जब तक सेवारत शिक्षकों पर से अव्यावहारिक टेट अनिवार्यता का नियम नहीं हटेगा शिक्षक पूरे जोर शोर से लगातार आंदोलन करता रहेगा। बता दें, टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर शनिवार को देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली में टीईटी के विरोध में रैली की थी।



    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों की दोहरी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की भी तैयारी, 13 अप्रैल को मशाल जुलूस की तैयारी

    23 संगठनों का महासंघ एकजुट, 

    लखनऊः शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के मुद्दे पर देशभर के शिक्षक अब सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं। कई शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले आंदोलन तेज कर दिया है। शिक्षक की पाती अभियान के बाद अब 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने की तैयारी चल रही है। इसी के साथ महासंघ के पदाधिकारी सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।

    महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडे ने बताया कि 23 शिक्षक संगठनों से बना यह महासंघ ब्लाक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चला रहा है। इसके साथ ही कानूनी लड़ाई को भी पूरी मजबूती से लड़ा जाएगा। इस मुद्दे पर दिल्ली में अधिवक्ताओं के साथ बैठक की गई है, जिसमें आगामी सुनवाई की रणनीति तय की गई। 

    दावा किया कि प्रदेश के करीब 1.86 लाख और देशभर के लगभग 18 लाख शिक्षकों के हित प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। वहीं, महासंघ की लीगल टीम के राष्ट्रीय प्रभारी विवेकानंद आर्य ने बताया कि शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई दो अप्रैल के बाद कभी भी हो सकती है, जिसे लेकर वकीलों से विस्तृत चर्चा की गई है।




    टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालेंगे शिक्षक

    प्रयागराज : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में प्रदेश भर के शिक्षक अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलुस निकालेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारियो को सौपकर अध्यादेश लाकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।


     महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने कहा है कि आरटीई एक्ट (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम-2009 लागू होने से पहले जिन महिला/पुरुष शिक्षकों ने निर्धारित योग्यता के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी, उन्हें 20 से 25 वर्ष की सेवा के बाद टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य किया जाना उचित नहीं है। अधिकांश ऐसे शिक्षकों की आयु 50 वर्ष के आसपास है और अब उन पर पारिवारिक व सामाजिक जिम्मेदारियां अधिक हैं। ऐसे में उन्हें अपने बच्चों की उम्र के अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा देने के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं है।


     उन्होंने कहा है कि इस अभियान को कई शिक्षक संगठनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, विशिष्ट बीटीसी संघ, उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, यूटा, एससी-एसटी शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ, अनुदेशक संघ, उर्दू शिक्षक कर्मचारी संघ, महिला मोर्चा तथा विशेष शिक्षक एसोसिएशन सहित अन्य संगठन शामिल हैं। सभी संगठन मिलकर मशाल जुलूस निकाल कर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग तेज करेंगे।

    अनधिकृत किताबों पर सख्ती, 15 अप्रैल तक चलेगा जांच अभियान, यूपी बोर्ड पुस्तक जागरुकता के लिए आयोजित करेगा शिविर

    अनधिकृत किताबों पर सख्ती, 15 अप्रैल तक चलेगा जांच अभियान,  यूपी बोर्ड पुस्तक जागरुकता के लिए आयोजित करेगा शिविर


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने स्कूलों में अनधिकृत किताबों और गाइड के प्रचलन पर सख्त रुख अपनाया है। परिषद के ने निर्देश पर प्रदेश भर के स्कूलों में 515 अप्रैल तक विशेष चेकिंग न अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान न किताबों की उपलब्धता, गुणवत्ता और निर्धारित प्रकाशकों की पुस्तकों । की बिक्री की जांच की जाएगी।

    परिषद के सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई स्कूल संचालक या प्रधानाचार्य छात्रों को अनधिकृत पुस्तकें या गाइड खरीदने छात्रों को अनधिकृत पुस्तकें या गाइड खरीदने के लिए बाध्य किया तो होगी कार्रवाई के लिए बाध्य करता है तो उसके खिलाफ इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के विनियम-18 के तहत कड़ी कार्रवाई करें।

    शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 36 विषयों की एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त एवं स्ववित्त पोषित विद्यालयों में लागू किया गया है। कक्षा नौ से 12 तक हिंदी, संस्कृत और उर्दू की चयनित 12 पुस्तकों को भी सस्ते दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

    सचिव ने अभिभावकों को जागरूक करने और छात्रों को आसानी से पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए 15 अप्रैल तक सभी जिलों में पुस्तक जागरूकता एवं सुलभता शिविर/पुस्तक मेला आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इन मेलों में अधिकृत मुद्रकों पायनियर प्रिंटर्स (आगरा), पीतांबरा बुक्स (झांसी) और सिंघल एजेंसीज (लखनऊ) की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।


    नकली किताब बेचने वालों पर होगी कार्रवाई

    परिषद ने स्पष्ट किया है कि पाठ्यपुस्तकों का कॉपीराइट उसके पास है। ऐसे में पायरेसी या डुप्लीकेसी कर नकली किताबें बेचने वाले अनधिकृत मुद्रकों और दुकानदारों के खिलाफ पुलिस, वाणिज्य कर, आयकर और प्रशासन के साथ समन्वय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एनसीईआरटी की कॉपीराइट शर्तों के उल्लंघन पर कॉपीराइट एक्ट के तहत भी कार्रवाई होगी।

    ऐसे करें असली किताब की पहचान

    इस वर्ष पाठ्य पुस्तकों के आवरण पर सात अंकों का अल्ट्रा वॉयलेट फ्लोरोसेंट लाल रंग का सीरियल नंबर मुद्रित किया गया है। जिन पुस्तकों पर यह नंबर नहीं होगा, उन्हें अनधिकृत माना जाएगा।


    Sunday, April 5, 2026

    शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी तो नियुक्ति शुरू से शून्यः हाईकोर्ट

    शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी तो नियुक्ति शुरू से शून्यः हाईकोर्ट

    धोखाधड़ी से मिली नियुक्ति को लंबे समय की सेवा भी वैध नहीं बना सकतीः हाईकोर्ट

    मेरठ की शिक्षिका ने नियुक्ति को अवैध घोषित करने और वेतन रोकने के खिलाफ दायर की थी याचिका

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने जालसाजी या धोखाधड़ी से सार्वजनिक रोजगार प्राप्त किया है तो दशकों तक की उसकी सेवा भी नियुक्ति को वैधता प्रदान नहीं सकती। धोखाधड़ी और न्याय कभी एक साथ नहीं रह सकते और कर जालसाजी पर टिकी कोई भी नींव कानून की नजर में शुरुआत से ही शून्य मानी जाती है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने मेरठ की शिक्षिका वीणा मेनन की याचिका खारिज करते हुए दिया है।


    याची की नियुक्ति वर्ष 1989 में मेरठ के एक स्कूल में सहायक शिक्षक के पद पर हुई थी। विवाद तब शुरू हुआ जब मानव संपदा पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया के दौरान याची ने वर्ष 1984 की अपनी हाईस्कूल की मूल मार्कशीट और प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवेदन किया, जो लंबे समय से फर्जी टीसी के आधार पर बोर्ड ने रोके गए रिजल्ट की श्रेणी में डाल दिया था।

    जांच में सामने आया कि याची ने हाईस्कूल परीक्षा में बैठने के लिए कक्षा-आठ का जो स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) लगाया था, वह फर्जी था। इस आधार पर याची की नियुक्ति को अवैध घोषित करते हुए वेतन रोक दिया गया। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।


    याची के अधिवक्ता ने रखा तर्क 35 वर्ष तक बिना विवाद सेवा दी

    याची अधिवक्ता ने दलील दी कि शिक्षिका ने 35 वर्षों तक बिना किसी विवाद के सेवा दी है। उसकी नियुक्ति के समय दस्तावेज के सत्यापन में अधिकारियों ने चूक की है। अधिकारियों की चूक के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब नियुक्ति का आधार ही धोखाधड़ी हो तो सेवा की अवधि का कोई महत्व नहीं रह जाता।


    कोर्ट ने कहा, अधिकारियों की कथित चूक का लाभ नहीं दिया जा सकता

    अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों की ओर से सत्यापन में हुई कथित देरी या चूक का लाभ उठाकर किसी भी जालसाजी को जायज नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने इस मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से याची का वेतन रोकने और उसके दस्तावेजों को रद्द करने की कार्यवाही को पूरी तरह वैध करार दिया।

    NCERT अब डीम्ड यूनिवर्सिटी, स्नातक से पीएचडी तक की मिलेगी डिग्री

    एनसीईआरटी अब खुद देगा अपनी डिग्रियां

    डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद एनसीईआरटी अब खुद अपनी डिग्री दे सकेगा। साथ ही देश भर में उसके जो छह क्षेत्रीय संस्थान है, वह भी अपनी डिग्री दे सकेंगे। अभी तक एनसीईआरटी के क्षेत्रीय संस्थानों को डिग्री देने के लिए स्थानीय राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्धता लेनी पड़ती थी। इन संस्थानों में अभी शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े कोर्स संचालित किए जा रहे है। हालांकि इस दर्ज के बाद अब जल्द ही वह कुछ और नए कोर्स भी शुरू कर सकता है।


    NCERT अब डीम्ड यूनिवर्सिटी, स्नातक से पीएचडी तक की मिलेगी डिग्री

    शिक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दी, एनसीईआरटी के छह संस्थान भी होंगे शामिल

    04 अप्रैल 2026
    नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) किताबें बनाने के साथ-साथ अब डिग्री, डिप्लोमा व पीएचडी की पढ़ाई भी कराएगी। केंद्र सरकार ने एनसीईआरटी को डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी (मानद विश्वविद्यालय) का दर्जा दे दिया है। इसी हफ्ते इसकी अधिसूचना जारी होगी।

    एनसीईआरटी के साथ उसके छह संस्थानों को भी इसमें शामिल किया गया है। इनमें राजस्थान के अजमेर, ओडिशा के भुवनेश्वर, कर्नाटक के मैसूर, मेघालय के शिलांग और मध्य प्रदेश के भोपाल का पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान है।

    एनसीईआरटी अब तक सीबीएसई बोर्ड समेत राज्यों के लिए स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करती थी। नई व्यवस्था के बाद आगामी शैक्षणिक सत्र से अन्य विश्वविद्यालयों की तर्ज पर डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करवा सकेगी। परिषद को कुछ सख्त शर्तों के साथ यह दर्जा मिला है, जिसमें संस्थान अपनी संपत्ति या फंड बिना सरकार और यूजीसी की अनुमति के ट्रांसफर नहीं कर सकता।

    एनसीईआरटी ने 2025 में सरकार को दी थी रिपोर्ट

    यूजीसी ने 2023 में कुछ शर्तों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया था, जिसमें एनसीईआरटी को तीन साल में सभी शर्तों को पूरा करना था। एनसीईआरटी ने सरकार को 2025 में रिपोर्ट दी थी। इसके बाद, विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर यूजीसी ने प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

    शोध पर होगा काम 
    विश्वविद्यालय के रूप में एनसीईआरटी शोध पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करेगी। नए कोर्स, ऑफ कैंपस सेंटर या विदेशी कैंपस भी तय नियमों के तहत ही शुरू किए जा सकेंगे। विद्यार्थियों के दाखिले, सीटों की संख्या और फीस से जुड़े नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।





    NCERT को इस महीने के अंत तक डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल जाएगा, स्कूलों से जुड़ी पाठ्य पुस्तकें तैयार करने के साथ ही शोध विश्वविद्यालय के रूप में करेगा काम

    यूजीसी ने इसे लेकर जमीनी तैयारियों को किया पूरा, बोर्ड की मंजूरी मिलते ही जारी हो जाएगा नोटिफिकेशन


    10 जनवरी 2026
    नई दिल्ली: स्कूली बच्चों के लिए शोधपरक व सस्ती पाठ्य पुस्तकें तैयार करने वाला राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अब जल्द ही एक शोध विश्वविद्यालय के रूप में काम करते हुए दिखेगा। जहां छात्रों को रिसर्च आधारित कुछ नए डिग्री कोर्स पढ़ने को मिल सकते हैं। इनमें बीए व बीएससी विद रिसर्च जैसे कोर्स शामिल हैं। 


    शिक्षा मंत्रालय की सहमति के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर अपनी सारी तैयारी पूरी कर ली है। जो संकेत मिल रहे हैं, उनमें इस महीने के अंत तक होने वाली यूजीसी बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। साथ ही नोटिफिकेशन भी जारी हो जाएगा।


    एनसीईआरटी के शिक्षा व शोध क्षेत्र से जुड़े लंबे अनुभव को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2023 में ही इसको विश्वविद्यालय के रूप में तब्दील करने का एलान किया था। तभी से इसके विश्वविद्यालय बनाने की पहल शुरू हुई थी। सूत्रों की मानें तो इसके स्वरूप व कामकाज के दायरे को लेकर चले लंबे मंथन के बाद आखिरकार इसको पूर्व की जिम्मेदारियों के साथ इसके अनुभव से नई पीढ़ी को जोड़ने को लेकर सहमति दी गई। जिसमें वह शोध आधारित नए डिग्री व पीएचडी जैसे कोर्सों को शुरू कर सकता है। एनसीईआरटी का गठन 1961 में किया गया था। तब से वह स्कूली पाठ्य पुस्तकों को तैयार करने व प्रशिक्षण का काम कर रहा है।


    इस दर्जे के बाद एनसीईआरटी का पहले की तरह केंद्रीय संस्थान का स्वरूप बरकरार रहेगा। साथ ही उन्हें शिक्षा मंत्रालय से मिलने वाली वित्तीय मदद भी जारी रहेगी। वहीं विश्वविद्यालय का दर्जा मिलते ही उसकी स्वायत्तता बढ़ जाएगी। शिक्षा मंत्रालय की इस पहल को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की उस पहल से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों को स्वायत्तता देने की सिफारिश की गई है। एनसीईआरटी अभी शिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े कई डिप्लोमा कोर्सों को संचालित कर रहा है।

    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन कर दिखाया दम, केंद्र सरकार से पुराने कार्यरत शिक्षकों से टीईटी परीक्षा न लेने के साथ कानून बनाने की मांग की

    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन कर दिखाया दम, केंद्र सरकार से पुराने कार्यरत शिक्षकों से टीईटी परीक्षा न लेने के साथ कानून बनाने की मांग की

    05 अप्रैल 2026
    नई दिल्ली: देशभर के शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया। टीचर फेडरेशन आफ इंडिया (टीएफआइ) के नेतृत्व में आयोजित रैली में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों शिक्षक शामिल हुए। रैली में टीएफआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि यह फैसला देशभर के करीब 20 लाख शिक्षकों की आजीविका पर संकट खड़ा कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रभाव को खत्म करने के लिए कानून बनाया जाए और पहले से नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए।

    रैली में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी शिक्षकों का समर्थन किया और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को केंद्र सरकार व प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। दरअसल, शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून लागू होने के बाद वर्ष 2010 से शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी अनिवार्य किया गया था।

    हालांकि, हाल में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी दो वर्षों के अंदर टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद केंद्र सरकार के विद्यालयों में 23 अगस्त, 2010 तथा विभिन्न राज्यों में वर्ष 2011 से शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी की अर्हता अनिवार्य की गई है। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों को भी दो साल के अंदर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षक केंद्र सरकार से कानून बनाकर अनिवार्यता से राहत दिलाने की मांग कर रहे हैं। शनिवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन में फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चन्द्र शर्मा आदि ने सरकार से शिक्षकों के हित में निर्णय लेने की मांग की।


    शिक्षकों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के लागू होने से पहले के शिक्षकों से भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के आदेश के खिलाफ सैकड़ों शिक्षकों ने शनिवार को रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया।

    विरोध प्रदर्शन भारतीय शिक्षक संघ के तत्वाधान में किया गया। भारतीय शिक्षक संघ के शिक्षकों ने कहा कि हमारी मांग है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त किया जाए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को आदेश दिया था कि आरटीआई 2009 अधिनियम लागू होने से पहले कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। इसके खिलाफ बीते छह महीने से अधिक समय के दौरान शिक्षकों ने कई सांसद व केंद्रीय शिक्षा मंत्री व अन्यों से मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर शिक्षकों के समर्थन में कानून बनाने की मांग की। इस संबंध में भारतीय शिक्षक संघ ने प्रधानमंत्री को शनिवार को पत्र भी लिखा।

    उत्तर प्रदेश के एक लाख 87 हजार शिक्षक प्रभावित : उत्तर प्रदेश के कई शहरों से आए शिक्षकों ने कहा कि कोर्ट का फैसला व्यावहारिक नहीं है। इस फैसले से उत्तर प्रदेश के एक लाख 87 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया है। शिक्षकों ने इस फैसले को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि जिन शिक्षकों की उम्र अब 50 से 55 साल के बीच है और जिन्होंने 30-35 साल तक सेवा दी है। उनसे दोबारा इस तरह की परीक्षा देने की अपेक्षा करना गलत है। जैसे किसी पुलिस अधिकारी या जज से 20-30 साल बाद फिर से परीक्षा या शारीरिक परीक्षण नहीं लिया जाता, वैसे ही शिक्षकों के साथ भी ऐसा नहीं होना चाहिए।


    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

    नई दिल्ली। राजधानी के रामलीला मैदान में शनिवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ देशभर के 13 से अधिक राज्यों से पहुंचे हजारों शिक्षकों का आक्रोश फूट पड़ा। इस बड़े प्रदर्शन में शिक्षकों ने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर पुराने शिक्षकों को राहत देने की मांग की।

    प्रदर्शन करने आए शिक्षक "टीईटी अनिवार्यता वापस लो", "शिक्षकों के साथ अन्याय बंद करो" और "शिक्षक बचाओ, शिक्षा बचाओ" जैसे नारे लगाते नजर आए। प्रदर्शनकारी शिक्षका सुनीता सिंह ने बताया कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक टीईटी पास करने का आदेश देना अनुचित है। ऐसा आदेश शिक्षकों के अनुभव और मेहनत का अपमान है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यह आंदोलन उनके सम्मान, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है, जो मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी।

    सुबह से ही रामलीला मैदान के आसपास शिक्षकों की भारी भीड़ जुटने लगी थी, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े। देशभर से आए शिक्षक संगठनों ने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली का प्रदर्शन नहीं, बल्कि देशभर के शिक्षकों की आवाज है। शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज कर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।


    टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली में गरजे

    प्रयागराज। आठवीं तक के सरकारी स्कूलों में 2011 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ रामलीला मैदान नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित देशव्यापी प्रदर्शन में प्रयागराज से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने मुख्य

    अतिथि सांसद जगदंबिका पाल के साथ मंच साझा किया और कहा कि लाखों शिक्षकों के सामने संकट आया है। इस संकट से लड़ने का काम टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ही करेगा। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के विनोद कुमार पांडेय आदि ने प्रदर्शन में भाग लिया।



    यूपी के शिक्षकों ने दिल्ली में विरोध कर दिखाई ताकत

    लखनऊ। देशभर के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के विरोध में नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विरोध-प्रदर्शन किया। यूपी से भी बड़ी संख्या में शिक्षक पहुंचे और केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को कानून बनाकर रोकने की मांग की।

    टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के आह्वान पर देशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक रामलीला मैदान पहुंचे। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि वर्ष 2011 के पूर्व भर्ती हुए शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया जाना उचित नहीं है। तमाम शिक्षक रिटायर होने की कगार पर हैं और अब वह टीईटी पास करें तो उनकी नौकरी बचे। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को केंद्र सरकार कानून बनाकर रोके, जिससे देश भर के 20 लाख और यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों के जीविकोपार्जन पर संकट न आए। उन्होंने कहा कि शिक्षक इसके विरोध में लगातार आंदोलन करते रहेंगे। शिक्षकों की रैली में सांसद जगदंबिका पाल भी मौजूद रहे और उन्होंने कहा कि वह शिक्षकों के साथ हैं।




    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में ताकत दिखाएंगे देश भर के शिक्षक, केंद्र सरकार से राहत के लिए कानून बनाने की करेंगे मांग

    03 अप्रैल 2026
    लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता किए जाने के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में देशभर के शिक्षक एकत्र हो रहे हैं। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के बैनर तले रामलीला मैदान में देशभर से लाखों शिक्षक एकजुट होकर अपनी ताकत का एहसास कराएंगे।

    उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी करने की अनिवार्यता अन्यायपूर्ण है। जब यूपी में 27 जुलाई 2011 को टीईटी लागू किया गया है तो उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता लागू करने से शिक्षकों में काफी आक्रोश है। प्रदेश से एक लाख से अधिक शिक्षक रामलीला मैदान दिल्ली में पहुंच रहे हैं।

    इस क्रम में गोरखपुर, कुशीनगर, उन्नाव समेत कई जिलों के शिक्षक आज बृहस्पतिवार को ही दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने निर्णय को पूर्व के प्रभाव से लागू करना, सही नहीं है। इससे देश भर के लाखों शिक्षकों की जीविका पर संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार इससे राहत देने के लिए कानून बनाए। 



    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में दिल्ली के रामलीला मैदान में चार अप्रैल को देश भर के शिक्षकों की महारैली

    11 मार्च 2026
    लखनऊ। देश भर के बेसिक शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में शिक्षकों की दिल्ली के रामलीला मैदान में चार अप्रैल को महारैली होगी। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) ने मंगलवार को दिल्ली में बैठक कर इसकी घोषणा की।


    टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। डॉ. शर्मा ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ हुई वार्ता में उन्होंने आश्वासन दिया था कि सभी शिक्षकों के सेवा में बने रहने के लिए टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए कानून बनाया जाएगा। किंतु अभी तक केंद्र सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इससे देश भर के शिक्षकों में काफी नाराजगी है।

    इसके लिए वे चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। इस क्रम में दिल्ली में महारैली की जाएगी। बैठक में राममूर्ति ठाकुर, संजय सिंह, योगेश त्यागी, शिवशंकर पांडेय, विपिन प्रकाश शर्मा, राधेरमण त्रिपाठी, देवेंद्र श्रीवास्तव, केदार जैन, मनीष मिश्रा, वेद प्रकाश मिश्रा, रविंद्र राठौर, कल्पना राजौरिया आदि उपस्थित थे।

    धीरे-धीरे निजीकरण की राह पर यूपी की उच्च शिक्षा, सूबे में सरकारी से दोगुने निजी विवि व 14 गुना महाविद्यालय

    धीरे-धीरे निजीकरण की राह पर यूपी की उच्च शिक्षा, सूबे में सरकारी से दोगुने निजी विवि व 14 गुना महाविद्यालय

    प्रदेश में 216 राजकीय और 330 सहायता प्राप्त महाविद्यालय

    वर्तमान में 7526 निजी महाविद्यालय व 52 विश्वविद्यालय


    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा धीरे-धीरे निजीकरण की राह पर बढ़ती जा रही है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलेगा कि राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों की तुलना में निजी महाविद्यालयों की संख्या तकरीबन 14 गुना हो गई है। वहीं राज्य विश्वविद्यालयों की तुलना में दोगुने महाविद्यालय संचालित हैं। 2018-19 सत्र से तुलना करें तो निजी महाविद्यालयों की संख्या में लगभग एक हजार का इजाफा हुआ है।


    2018-19 में यूपी में 6531 निजी महाविद्यालय थे जो अब 7526 हो गए हैं। वहीं निजी विश्वविद्यालय 27 से बढ़कर 52 हो गए हैं। उच्च शिक्षा विभाग के अफसर सकल नामांकन में वृद्धि को लेकर चिंतित हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन प्रतिशत लगभग 27 है जिसे 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। जनसंख्या के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य में सरकारी संस्थाओंके भरोसे सभी युवाओं को उच्च शिक्षा दिलाना संभव नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ उच्च शिक्षा में गैर सरकारी संस्थाओं की संख्या बढ़ी है। 

    प्रदेश सरकार ने पिछले सत्र में एकसाथ 46 राजकीय महाविद्यालय खोले हैं लेकिन इसके बावजूद कुल राजकीय महाविद्यालयों की संख्या 216 ही हो सकी है। पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज के अनुसार सरकार शिक्षा में कमी नहीं होने देना चाहती। निजी महाविद्यालय और विश्वविद्यालय खुलने से शिक्षा की पूर्ति हो रही है और इसका फायदा छात्र-छात्राओं को हो रहा है।


    आंकड़ों पर एक नजर

    24 राज्य विश्वविद्यालय
    01 मुक्त विश्वविद्यालय
    01 डीम्ड विश्वविद्यालय
    52 निजी विश्वविद्यालय
    216 राजकीय महाविद्यालय
    330 सहायता प्राप्त महाविद्यालय
    7526 निजी महाविद्यालय

    UGC का निर्देश: उच्च शिक्षण संस्थान अब गोद लेंगे 5 से 6 आंगनबाड़ी केंद्र, छात्रों को इंटर्नशिप और शोध का मिलेगा मौका

    UGC का निर्देश: उच्च शिक्षण संस्थान अब गोद लेंगे 5 से 6 आंगनबाड़ी केंद्र, छात्रों को इंटर्नशिप और शोध का मिलेगा मौका


    नई दिल्ली। अब देश के प्रतिष्ठित संस्थान जैसे आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी और विश्वविद्यालय अपने आसपास के पांच से छह आंगनबाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी उठाएंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत 3-6 वर्ष के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा को मजबूत करने के लिए यह योजना तैयार की गई है।

    दिल्ली में फरवरी में हुए मुख्य सचिवों के सम्मेलन में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी थी। अब यूजीसी ने सभी राज्यों और संस्थानों को इसके लिए पत्र लिखा है। इस पहल के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों को समाज कार्य, पोषण, जन स्वास्थ्य, बाल विकास और मनोविज्ञान जैसे विषयों में इंटर्नशिप, अकादमिक फील्डवर्क और शोध का अवसर मिलेगा।

    इससे न केवल आंगनबाड़ी केंद्रों को दीर्घकालिक मार्गदर्शन मिलेगा, बल्कि छात्रों में सामाजिक जिम्मेदारी और व्यावसायिक अनुभव की भावना भी विकसित होगी। आगामी शैक्षणिक सत्र से इस योजना पर काम शुरू हो जाएगा



    UGC का निर्देश: विश्वविद्यालय अपनाएं आंगनवाड़ी केंद्र, सुधारें बच्चों की शिक्षा

    यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने आसपास के 5-6 आंगनवाड़ी केंद्रों को अपनाने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी में बच्चों की बेहतर देखभाल और शिक्षा सुनिश्चित करना है।


    नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश भर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से शैक्षणिक गतिविधियों के साथ अपने सामाजिक दायित्व को निभाने का भी सुझाव दिया है। इस दौरान प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेजों से अपने आसपास के कम से कम पांच से छह आंगनवाड़ी केंद्रों को अपनाने व उन्हें जरूरी सहयोग देने को कहा है।

    देश में करीब 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हो रहे है, इनमें अधिकांश में बच्चों की बेहतर देखभाल और उन्हें पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षक नहीं है। यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों को यह निर्देश तब दिए हैं, जब हाल ही में नीति आयोग की अगुवाई में हुए मुख्य सचिवों के सम्मेलन में आंगनवाड़ी की स्थिति को लेकर चिंता जताई।

    साथ ही कहा गया कि एनईपी के तहत अभी इनमें तीन से छह वर्ष की उम्र तक के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, जबकि अधिकांश आंगनवाड़ी केंद्रों में योग्य व प्रशिक्षित शिक्षक नहीं है। ऐसे में बच्चों को शुरूआत में ही अच्छी शिक्षा नहीं मिल पा रही है। इसके बाद ही उच्च शिक्षण संस्थानों को सामाजिक दायित्व के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों से जोड़ने पर सहमति बनी थी।

    इस दौरान यूजीसी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से आंगनवाड़ी केंद्रों को अपनाने के साथ ही अपने छात्रों के जरिए इन केंद्रों से जुड़ी शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने, इंटर्नशिप प्रोग्राम से इन्हें जोड़ने व सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाने जैसे पहल करने को कहा है। गौरतलब है कि देश में मौजूदा समय में एक हजार से अधिक विश्वविद्यालय व 45 हजार से अधिक कॉलेज है।

    शिक्षामित्रों को 18 और अनुदेशकों को 17 हजार इसी महीने से : सीएम योगी, पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी होगी उपलब्ध

    शिक्षामित्रों को 18 और अनुदेशकों को 17 हजार इसी महीने से : सीएम योगी, पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी होगी उपलब्ध 


    वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों को 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय इसी महीने से दिए जाने की घोषणा की। सीएम ने ये घोषणा वाराणसी के शिवपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय से स्कूल चलो अभियान के शुभारंभ के मौके पर की। उन्होंने कहा, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, रसोइयों और अनुदेशकों को पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।


    1.68 लाख शिक्षामित्रों-अनुदेशकों का बढ़ेगा मानदेय

    लखनऊः सरकार द्वारा बढ़ाए गए मानदेय का लाभ प्रदेश के 1.68 लाख से अधिक शिक्षामित्रों व अंशकालिक अनुदेशकों को मिलेगा। बढ़ाए गए मानदेय का भुगतान करने के लिए सरकार हर वर्ष 1480 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च करेगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये और अंशकालिक अनुदेशकों को 17,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। दोनों को हर शैक्षिक सत्र में 11 माह के लिए मानदेय का भुगतान किया जाता है। प्रदेश में वर्तमान में 1,43,450 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। वर्तमान में उन्हें 10,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है। शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ने पर 1,262.36 करोड़ रुपये अतिरिक्त वार्षिक व्यय होगा। वहीं 24,781 अंशकालिक अनुदेशकों को अभी 9,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। उनके मानदेय की राशि बढ़ने पर 218.07 करोड़ रुपये 1,480 करोड़ रुपये सालाना अतिरिक्त खर्च करेगी सरकार सरक बढे मानदेय पर अतिरिक्त वार्षिक व्यय होगा।

    Saturday, April 4, 2026

    CBSE : नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए गणित, विज्ञान के दो स्तर अगले सत्र से होंगे लागू, छठी कक्षा से तीसरी भाषा अनिवार्य,

    छठी कक्षा से तीसरी भाषा को सीबीएसई ने किया अनिवार्य, नए नियम के तहत तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषा होना जरूरी

    कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू


    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यामक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भाषा शिक्षा को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा (आर3) को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। यह कदम नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के तहत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है। साथ ही इसी सत्र से कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू किया जा रहा है।

    सीबीएसई के अनुसार अब छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कम से कम एक और भाषा पढ़नी होगी। नए नियम के तहत तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा। इस नीति के लागू होने के बाद कक्षा छठी से शुरू होने वाला तीसरी भाषा का अध्ययन कक्षा दसवीं तक जारी रहेगा। वर्तमान में हिंदी और अंग्रेजी समेत कुल 44 भाषाएं पढ़ाई जा रही हैं। जिनमें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाएं, अन्य क्षेत्रीय भारतीय भाषाएं और कुछ विदेशी भाषाएं भी शामिल हैं।

    छात्रों का होगा समग्र विकास : भाषा पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि छात्रों की सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमता का समग्र विकास हो सके। इसमें आर 1, आर2 और आर3 के रूप में तीन-भाषा ढांचा तय किया है। एनसीएफएसई-2023 की सिफारिशों के अनुसार इन तीन भाषाओं में से दो भाषाएं भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड द्वारा बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी जाएगी।

     सभी कक्षा में भाषा होगी अनिवार्य
    बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा की पढ़ाई शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठीं में अनिवार्य रूप से शुरू होगी। इसके बाद हर वर्ष इसे एक-एक कक्षा में बढ़ाया जाएगा ताकि छात्रों पर अचानक अतिरिक्त बोझ न पड़े और वह क्रमिक रूप से नई भाषा सीख सकें। जारी कार्यक्रम के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में केवल कक्षा छठीं के छात्रों के लिए आर3 अनिवार्य होगा। जबकि सत्र 2027-28 में यह कक्षा छठी और सातवी, सत्र 2028-29 में कक्षा छठी से आठवी, सत्र 2029-30 में कक्षा छठी से नौवीं और सत्र 2030-31 तक कक्षा छठी से दसवीं तक के सभी छात्रों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य हो जाएगी।

    सांस्कृतिक विविधता की समझ होगी मजबूत : इस नीति के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। सीबीएसई का मानना है कि इस पहल से छात्रों की भाषाई क्षमता के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विविधता की समझ भी मजबूत होगी। इस चरणवद्ध शुरुआत से पाठ्यक्रम का सुचारू रूप से परिवर्तन सुनिश्चित और माध्यमिक स्तर के मूल्यांकन सुधारों के साथ सामंजस्य स्थापित होगा।

    अधिकांश किताब 10 से 15 अप्रैल तक होंगी उपलब्ध : वहीं सीबीएसई द्वारा कक्षा नौवीं और दसवीं पाठ्यक्रम जारी करने को लेकर आयोजित वेबिनार में एनसीईआरटी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश सकलानी ने अनुसार नौवीं की किताबें तैयार हैं। प्रिंटिंग में हैं। इसमें अधिकांश किताबें 10 से 15 अप्रैल के बीच आ जाएंगी। एक से दो किताबें आने में देरी हो सकती है।



    सीबीएसई : नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए गणित, विज्ञान के दो स्तर अगले सत्र से होंगे लागू, 

    मानक और उन्नत प्रणाली पर आधारित 10वीं की पहली परीक्षा 2028 में होगी

    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए अपना नया शैक्षिक कार्यक्रम लागू कर दिया। इसके तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली होगी। गणित और विज्ञान के लिए दो स्तरीय प्रणाली (मानक और उन्नत) पर आधारित कक्षा 10 की पहली बोर्ड परीक्षा 2028 में होगी।

    सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि 2026 से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत अनिवार्य तीन भाषा फार्मूला कक्षा 6 के लिए लागू किया जाएगा, जबकि कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान में अनिवार्य मानक एवं वैकल्पिक उन्नत पाठ्यक्रमों की दो-स्तरीय प्रणाली शुरू की जाएगी। कक्षा 9 के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली शुरू होने से दोनों विषयों में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

    अधिकारी ने कहा, नए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे (एनसीएफ) की सिफारिशों के अनुसार, इन तीन भाषाओं में से दो भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए । भाषाओं को तीन चरणों-आर 1, आर 2 और आर3-में एक सुव्यवस्थित तीन-भाषा ढांचे के तहत व्यवस्थित किया गया है। बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन के बोर्ड के प्रयासों को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से तीसरी भाषा को अनिवार्य किए जाने से यह सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक छात्र कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करे। हालांकि, एक समान भाषा योजना को अपनाना वांछनीय है, लेकिन अगर कोई छात्र विदेश के किसी स्कूल से पढ़कर आया है और उसने वहां 8वीं या 9वीं तक जो तीसरी भाषा पढ़ी थी, वह स्कूलों में उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे खास मामलों में निर्धारित मानदंडों के अनुसार छूट दी जा सकती है। 


    मानक परीक्षा अनिवार्य, उन्नत वैकल्पिक

    गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली पर अधिकारी ने कहा, सभी छात्र मानक पाठ्यक्रम का अध्ययन करेंगे और तीन घंटे की 80 अंकों की एक समान परीक्षा में शामिल होंगे। उच्च दक्षता का विकल्प चुनने वाले छात्र दोनों विषयों में किसी एक या दोनों में एक अतिरिक्त उन्नत स्तर का चयन कर सकते हैं। इस स्तर में एक घंटे का 25 अंकों का एक अन्य प्रश्नपत्र हल करना होगा, जिसे उच्च-स्तरीय बौद्धिक कौशल और गहन वैचारिक समझ आंकने के लिए तैयार किया गया है। अधिकारी ने कहा, छात्रों के लिए मानक परीक्षा देना अनिवार्य होगा, जबकि उन्नत परीक्षा वैकल्पिक रहेगी। अहम बात यह है कि उन्नत परीक्षा में हासिल अंकों को कुल अंकों में नहीं जोड़ा जाएगा; इसके बजाय 50 फीसदी या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मार्कशीट में उन्नत स्तर की योग्यता अलग से दिखाई जाएगी।

    Friday, April 3, 2026

    परिषदीय स्कूलों के बच्चे 'बांसुरी' में देखेंगे कला के विविध रंग, बेसिक शिक्षा में कक्षा तीन व चार के लिए पहली बार कला की पुस्तक

    परिषदीय स्कूलों के बच्चे 'बांसुरी' में देखेंगे कला के विविध रंग, बेसिक शिक्षा में कक्षा तीन व चार के लिए पहली बार कला की पुस्तक

    कला शिक्षण के लिए सुनिश्चित है न्यूनतम 100 घंटे का शिक्षण सत्र

    प्रयागराज । परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा तीन और चार के विद्यार्थियों को पहली बार कला की पुस्तक 'बांसुरी' पढ़ने को मिलेगी। अब तक शिक्षक बिना पुस्तक कला/संगीत पढ़ाते थे और परीक्षा लेते थे। नए सत्र से बच्चों को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (एनसीईआरटी) की पुस्तक बांसुरी पढ़ने के लिए मिलेगी। एनसीएफएसई (स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा संबंधी मार्गदर्शिका) की अनुशंसा के अनुसार कला शिक्षण के लिए न्यूनतम 100 घंटे का शिक्षण सत्र सुनिश्चित किया गया है। इसमें कला के चारों घटक दृश्य कला, संगीत, नृत्य और अंग संचालन संबंधी जानकारी है।


    कक्षा तीन की पुस्तक में 20 पाठ हैं। प्रत्येक अध्याय में क्यूआर कोड है, उसे स्कैन करके अतिरिक्त विषय सामग्री तक पहुंच सकते हैं। वर्तमान सत्र में बच्चों को कलात्मकता से परिचित कराने के लिए विशेषज्ञ भी आमंत्रित किए जाएंगे। शिक्षण के दौरान बच्चों से कलाकृतियां बनवाई जाएंगी। उनका प्रदर्शन स्कूल परिसर या अन्य स्थानों पर किया जाएगा।

    राज्य शिक्षा संस्थान उत्तर प्रदेश के प्राचार्य राजेंद्र प्रताप ने बताया कि बांसुरी में सुझाई गई गतिविधियों को कराने से अभिव्यक्ति कौशल, सामुदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय विरासत के संरक्षण के लिए सचेत रहने की चेतना जागृत होगी। इससे छात्र छात्राओं में व्यक्तिगत स्तर तथा समूह में कार्य करने, आलोचनात्मक दृष्टिकोण का विकास, पढ़ने के साथ लिखने का अभ्यास में मदद मिलेगी।


    दृश्यकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच से होगा जुड़ाव

    पुस्तक के दृश्य कला भाग में रेखांकन, चित्रकला, काटना, चिपकाना जैसी गतिविधि शामिल है। मिट्टी, रंग, प्रकृति की समझ बच्चों में आएगी। संगीत की ओर छात्रों का ध्यान खींचते हुए विभिन्न भाषाओं के गीत, वाद्ययंत्रों व थिरकने, धुनों और गीतों पर शारीरिक गतिविधां कराने के साथ नाटक पाठ्यक्रम का हिस्सा है। विदूषक बच्चों को अभिनय, मंच, सहायक सामग्री आदि से परिचित कराएंगे। राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डा. रीना मिश्रा कहती है कि यह पुस्तक सुगम और रोचक है। पुस्तक बताती है कि मिट्टी के घड़े का प्रयोग वाद्ययंत्र की तरह होता है, इसे घटम कहते हैं। कंदील, दीपक, मुखौटा, कागजों से आभूषण बनाना सीखने के साथ संगीत में ताली, चुटकी, लयबद्ध पैरों की धाप आदि को समझाने का प्रयास है।


    20 घंटे दृश्यकला तो 20 घंटे संगीत की होगी पढ़ाई

    पुस्तक में निहित दृश्यकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच के लिए कुल 20-20 घंटे की पढ़ाई निर्धारित है। 20 घंटे अनुभवात्मक कार्य कराए जाएंगे। कला शिक्षक को सप्ताह में चार कक्षाएं और शनिवार को एक कक्षा आवंटित करने प्रविधान है। बच्चों के दक्षता स्तर को मापने के लिए चार श्रेणी ए, बी, सी, डी, ई का सुझाव है। इनका अर्थ क्रमशः उत्कृष्ट, कुशल, होनहार, विकासशील और आरंभिक है।


    शिक्षक और कक्षा की उपलब्धता के आधार पर नामांकन की तैयारी में यूपी बोर्ड, प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ हुए मंथन के बाद इसे अंतिम रूप दिए जाने की संभावना

    शिक्षक और कक्षा की उपलब्धता के आधार पर नामांकन की तैयारी में यूपी बोर्ड, प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ हुए मंथन के बाद इसे अंतिम रूप दिए जाने की संभावना


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के स्कूलों में अब शिक्षकों और कक्षाओं की उपलब्धता के आधार पर ही छात्रों के नामांकन की तैयारी चल रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन हाल ही में प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ हुए मंथन के बाद इसे जल्द ही अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।


    प्रदेश में लगभग 30 हजार मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे स्कूलों की है जहां न तो पर्याप्त भवन हैं और न ही पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं, फिर भी हर साल बड़ी संख्या में छात्रों का नामांकन लिया जा रहा है। पढ़ाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

    नियम के अनुसार, एक कक्षा में अधिकतम 60 विद्यार्थियों के बैठने का प्रावधान है, लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते कई स्कूलों में 100 से 110 छात्रों को एक ही कक्षा में बैठा दिया जाता है। इससे छात्रों को समुचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है और उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।

    लंबे समय से मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। यही वजह है कि छात्र संख्या वित्तविहीन विद्यालयों की ओर बढ़ रही है, जबकि मान्यता प्राप्त स्कूलों में नामांकन घटता जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के अपर सचिव सत्येंद्र कुमार ने बताया कि शिक्षकों और कक्षाओं की उपलब्धता के अनुसार ही नामांकन और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा रही है।

    इस पर अंतिम निर्णय प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ बैठक कर आपसी सहमति से लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रति कक्षा 60 छात्रों का मानक निर्धारित है और इसी के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जल्द ही इस मुद्दे पर विस्तृत बैठक कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    शैक्षिक सत्र 2026-27 की एनसीईआरटी एवं माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा विकसित पाठ्यपुस्तकों के मूल्य एवं अधिकृत मुद्रकों / वितरकों के नाम की सूची देखें

    शैक्षिक सत्र 2026-27 की एनसीईआरटी एवं माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा विकसित पाठ्यपुस्तकों के मूल्य एवं अधिकृत मुद्रकों / वितरकों के नाम की सूची देखें


    राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत प्रवक्‍ताओं को विनियमितीकरण के पूर्व संविदा प्रवक्‍ता के रूप में की गयी अस्‍थाई सेवा की गणना करते हुए कैरियर एडवांसमेन्‍ट योजना (सी0ए0एस0) का लाभ अनुमन्‍य किये जाने के संबंध में दिशा-निर्देश

    संविदा प्रवक्ताओं को प्रमोशन में राहत लेकिन आर्थिक लाभ नहीं, व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई


     लखनऊ: राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत ऐसे प्रवक्ता जो पहले संविदा पर कार्यरत थे और बाद में नियमित हुए, उनकी पुरानी संविदा सेवा को करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत प्रमोशन में जोड़ा जाएगा। हालांकि यह लाभसिर्फ कागजी (नोशनल) होगा और इससे कोई आर्थिक लाभनहीं मिलेगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता उच्च शिक्षा निदेशक करेंगे। समिति 15 दिन में रिपोर्ट देगी।

    यह व्यवस्था उन प्रवक्ताओं पर लागू होगी, जो वर्ष 2005-06, 2006-07 और 2008-09 में संविदा पर नियुक्त हुए थे और बाद में 26 दिसंबर 2016 के शासनादेश के तहत नियमित किए गए। उनकी सेवाएं पहले ही बिना अंतराल के निरंतर मानी जा चुकी हैं। यह निर्णय यूजीसी 2010 और 2018 के नियमों के आधार पर लिया गया है। 

    इन नियमों में शर्तों के साथ संविदा या अस्थायी सेवा को प्रमोशन में जोड़ने का प्राविधान है। यह भी स्पष्ट है कि सेवा सरकारी, निजी या स्थानीय संस्थान में की गई हो, उसमें भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, इस निर्णय के तहत संविदा सेवा को केवल रिकार्ड में जोड़ा जाएगा। इससे न तो वरिष्ठता तय होगी, न पेंशन में लाभ मिलेगा और न ही कोई एरियर या अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। प्रमोशन के बाद वेतन केवल वास्तविक प्रमोशन की तारीख से ही लागू होगा। 

    यह निर्णय डा. रजत गंगवार समेत कई सहायक आचार्यों द्वारा पांच जुलाई 2025 को किए गए अनुरोध के बाद लिया गया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व अध्यक्ष डा. दीनानाथ सिंह और पूर्व संयुक्त महामंत्री डा. जगदीश सिंह दीक्षित ने कहा कि यह मांग लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों को भी यही लाभ दिया जाए।



     राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत प्रवक्‍ताओं को विनियमितीकरण के पूर्व संविदा प्रवक्‍ता के रूप में की गयी अस्‍थाई सेवा की गणना करते हुए कैरियर एडवांसमेन्‍ट योजना (सी0ए0एस0) का लाभ अनुमन्‍य किये जाने के संबंध में दिशा-निर्देश


    एडेड माध्यमिक के विषय विशेषज्ञों को भी पुरानी पेंशन, शासनादेश जारी


    अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में आमेलित विषय  विशेषज्ञों को पुरानी पेंशन देने को मांगी सूचना

    प्रयागराज। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में आमेलित विषय विशेषज्ञों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना में विकल्प के चयन की अनुमति प्रदान करने के लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से सूचना मांगी गई है। वित्त विभाग के 28 जून 2024 के शासनादेश एवं उसके बाद समय-समय पर जारी शासनादेशों के आधार पर विषय विशेषज्ञों को भी पुरानी पेंशन का विकल्प देने के आदेश प्रदान किए गए हैं।

    अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने एक अप्रैल को सभी डीआईओएस को भेजे पत्र में निर्देशित किया है कि संबंधित शिक्षक/शिक्षिकाओं का विकल्प पत्र प्राप्त करते हुए साक्ष्यों की प्रमाणित प्रति के साथ अपनी रिपोर्ट विशेष वाहक के माध्यम से सहायक शिक्षा निदेशक (अर्थ/बीमा), शिक्षा पेंशन 2 अनुभाग, शिक्षा निदेशालय प्रयागराज को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।








    एडेड माध्यमिक के विषय विशेषज्ञों को भी पुरानी पेंशन, शासनादेश जारी 

    लखनऊ। प्रदेश के एडेड माध्यमिक स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को भी पुरानी पेंशन की सुविधा मिलेगी। शासन ने इससे संबंधित एक आदेश शुक्रवार को जारी कर दिया। इससे प्रदेश भर में कार्यरत करीब 2200 विषय विशेषज्ञों को इसका लाभ मिलेगा।

    शुक्रवार को माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव उमेश चन्द्र ने इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया। आदेश में कहा गया है कि प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को भी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के स्थान पर पुरानी पेंशन के विकल्प में सम्मिलित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया गया है। 

    आदेश का माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री राजीव यादव ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी का आभार व्यक्त किया है। विषय विशेषज्ञों को पुरानी पेंशन का लाभ दिए जाने का मुद्दा विधान परिषद में भी शिक्षक नेताओं ने कई बार उठाया था।


    उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा के निर्देश, पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा का मिलेगा लाभ

    उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा के निर्देश, पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा का मिलेगा लाभ


    लखनऊ। प्रदेश में उच्च शिक्षण संस्थानों में - पढ़ा रहे 1.35 लाख शिक्षकों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए शासनादेश जारी कर दिया गया। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए बताया गया है कि इसके अंतर्गत पांच लाख तक की चिकित्सा सुविधा मिलेगी। जल्द ही इसकी औपचारिकता पूरी की जाएगी।


    उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव गिरिजेश त्यागी की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि योजना के तहत अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के नियमित व स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों और राज्य विश्वविद्यालयों के नियमित व स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा।

    सभी राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार व निदेशक उच्च शिक्षा को भेजे निर्देश में उन्होंने कहा है कि अभी इन शिक्षकों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति की कोई सुविधा नहीं मिल रही है। इसकी वजह से उनके द्वारा चिकित्सा की समुचित व्यवस्था कर पाना संभव नहीं होता है। योजना के तहत अब शिक्षक सरकारी के साथ निजी चिकित्सालयों में भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा ले सकेंगे।

    उन्होंने कहा है कि इस योजना का क्रियान्वयन साचीस के माध्यम से किया जाएगा। योजना के लाभार्थियों व उनके आश्रितों का पूरा विवरण विभाग द्वारा हर साल 30 जून तक साचीस को भेजा जाएगा।

    प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में कक्षा 11 और 12 के अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं का पंजीकरण कराने के सम्बन्ध में।

    प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में कक्षा 11 और 12 के अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं का पंजीकरण कराने के सम्बन्ध में।


    Thursday, April 2, 2026

    पुरानी पेंशन समाप्त करने के विरोध में मनाया काला दिवस, शिक्षकों-कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर किया विरोध

    पुरानी पेंशन समाप्त करने के विरोध में मनाया काला दिवस, शिक्षकों-कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर किया विरोध

    01 अप्रैल 2026
    लखनऊ। ऑल टीचर्स एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन (अटेवा) के आह्वान पर बुधवार को पूरे प्रदेश में बेसिक, माध्यमिक, डिग्री व विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर कर काला दिवस मनाया। साथ ही सरकार से पुरानी पेंशन बहाली की मांग की।

    राजधानी में अटेवा प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु व प्रदेश महामंत्री नीरजपति त्रिपाठी के नेतृत्व में शिक्षकों-कर्मचारियों ने काला फीता बांधकर विरोध दर्ज कराया। विजय बन्धु ने कहा कि आज ही के दिन प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त होने के कारण लाखों शिक्षकों व कर्मचारी का भविष्य अंधकारमय हो गया है।

    उन्होंने कहा कि एक दिन के सांसद व विधायक को ओपीएस मिल रही है। 30 से 40 साल सेवा करने वाले को नई पेंशन। यह न्यायपूर्ण व्यवस्था नहीं है। प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी पुरानी पेंशन का लाभ मिलना चाहिए।



    NPS के विरोध में एक अप्रैल को काला दिवस मनाएंगे शिक्षक-कर्मचारी

    28 मार्च 2026
    लखनऊ। शिक्षकों और कर्मचारियों ने नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) के विरोध में 1 अप्रैल को काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के नेतृत्व में पारा स्थित डॉ. रामाशीष स्मृति भवन में आयोजित बैठक में इसकी रणनीति बनाई गई। 


    उन्होंने एनपीएस को कर्मचारियों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि यह पेंशन नहीं, बल्कि शेयर बाजार पर आधारित असुरक्षित व्यवस्था है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव से कर्मचारियों का भारी नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई का कोई प्रावधान नहीं है। 

    उन्होंने बताया कि एनपीएस के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बहुत कम पेंशन मिल रही है, जिससे महंगाई में जीवनयापन कठिन है। इसलिए शिक्षक-कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे और पुरानी पेंशन बहाली की मांग करेंगे।

     बैठक में प्रदेश महामंत्री नीरज पति त्रिपाठी, प्रदेश कोषाध्यक्ष विक्रमादित्य मौर्य, विजय कुमार, नरेंद्र कुमार, सुनील कुमार वर्मा, रजत प्रकाश, राकेश कुमार, अशोक कुमार सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। ब्यूरो

    यूपी बोर्ड ने 29,208 मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची वेबसाइट पर डाली

    यूपी बोर्ड ने 29,208 मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची वेबसाइट पर डाली

    बड़ी संख्या में स्कूल नियमों की अनदेखी कर रहे


    प्रयागराज। प्रदेश में बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों पर अंकुश लगाने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बड़ा कदम उठाया है। परिषद ने बुधवार को करीब 30 हजार मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। इस पहल से जहां अभिभावकों को सही स्कूल चुनने में सुविधा मिलेगी, वहीं विभागीय अधिकारियों के लिए भी अवैध रूप से संचालित संस्थानों पर कार्रवाई करना आसान होगा।


    परिषद के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में हाईस्कूल स्तर (कक्षा 9-10) के 10,295 और इंटरमीडिएट स्तर (कक्षा 9-12) के 18,913 विद्यालय मान्यता प्राप्त हैं। इस प्रकार कुल 29,208 स्कूल आधिकारिक रूप से संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में स्कूल नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। कई ऐसे विद्यालय हैं, जिन्हें केवल हाईस्कूल तक की मान्यता मिली है, लेकिन वे इंटरमीडिएट तक कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ स्कूलों में सिर्फ विज्ञान वर्ग की मान्यता होने के बावजूद कला वर्ग की पढ़ाई भी कराई जा रही है। हाल ही में 262 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, जिनमें से 107 स्कूलों को मान्यता देने की संस्तुति शासन को भेजी गई है, जबकि 36 मामलों को पुनर्विचार के लिए अग्रसारित किया गया है।

    चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश भर में एक हजार से अधिक स्कूल बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। ऐसे ही मामलों में हाल में देवरिया जिले में दो स्कूलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिन्होंने बिना मान्यता के बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरवाए थे।


    नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत से पहले मान्यता प्राप्त सभी विद्यालयों की सूची पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है। अभिभावकों से अपील है कि नामांकन से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित विद्यालय को किस स्तर तक की मान्यता प्राप्त है। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाएगा। - भगवती सिंह, सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद

    शिक्षक भर्ती नहीं आने के कारण डीएलएड से यूपी वालों का मोहभंग, बाहरियों में क्रेज, पिछले साल की तुलना में इस बार आधी सीटों पर हुआ प्रवेश

    शिक्षक भर्ती नहीं आने के कारण डीएलएड से यूपी वालों का मोहभंग, बाहरियों में क्रेज, पिछले साल की तुलना में इस बार आधी सीटों पर हुआ प्रवेश

    2024 से पहली बार गैर राज्य के अभ्यर्थियों को मौका

    पहली बार 34124, दूसरी बार 37333 आवेदन


    प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों में 2018 के बाद से शिक्षक भर्ती नहीं आने का नतीजा सीधे तौर पर डीएलएड प्रवेश पर दिखने लगा है। आलम यह है कि डीएलएडके 2025 सत्र की कुल सीटों के सापेक्ष 40 प्रतिशत ही भरी जा सकी हैं। एक तरफ उत्तर प्रदेश के युवाओं का इस प्रशिक्षण से मोहभंग हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर गैर राज्यों (बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान आदि) के बेरोजगारों का रुझान बढ़ता दिखाई पड़ रहा है।


    डीएलएड 2025 सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया 28 मार्च को पूरी हुई है। प्रदेश के 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की 10600 व 3,304 निजी एवं अल्पसंख्यक कॉलेजों की 2,28,900 कुल 2,39,500 सीटों में से महज 95817 (10309 अल्पसंख्यक) सीटें ही भरी जा सकी हैं। इनमें भी लगभग 30 फीसदी या 29 हजार सीटों पर दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों ने प्रवेश लिया है। 


    इस साल डीएलएड प्रवेश के लिए कुल 124230 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था जिनमें से 37333 दूसरे राज्यों के थे। इसके उलट डीएलएड के पिछले सत्र 2024 में तकरीबन दोगुने 191162 (11118 अल्पसंख्यक) अभ्यर्थियों ने प्रवेश लिया था। पिछले साल जब पहली बार गैर राज्य के अभ्यर्थियों के लिए डीएलएड में प्रवेश के दरवाजे के खोले गए थे तब 34124 अभ्यर्थियों ने ही आवेदन किया था। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी के अनुसार डीएलएड की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस सत्र में 95817 प्रशिक्षुओं ने प्रवेश लिया है।

    परीक्षकों को 25 रुपये प्रतिदिन की दर से नाश्ते का करें भुगतान, यूपी बोर्ड सचिव ने शिकायतों के बाद दिया आदेश

    परीक्षकों को 25 रुपये प्रतिदिन की दर से नाश्ते का करें भुगतान, यूपी बोर्ड सचिव ने शिकायतों के बाद दिया आदेश 

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में परीक्षकों को जलपान की राशि नहीं दिए जाने का आरोप शिक्षक संघ के नेताओं ने लगाया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए सचिव भगवती सिंह ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर सचिव को मूल्यांकन कार्य की समाप्ति के बाद 25 रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान करने का निर्देश दिया है। 

    बता दें कि पूर्व विधान परिषद सदस्य व यूपी माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश त्रिपाठी, माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई जौनपुर के अध्यक्ष तेरस यादव, माध्यमिक वित्त विहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश महासचिव अजय सिंह आदि ने मूल्यांकन कार्य में लगे परीक्षकों को जलपान के लिए भत्ता देने की मांग करते हुए सचिव को पत्र सौंपा। सचिव भगवती सिंह ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर सचिव को बुधवार को पित्र लिख कर कहा कि जिन मूल्यांकन केंद्रों द्वारा भुगतान नहीं किया गया हैं, उनकी जांच कर उत्तर दायित्व निर्धारित करें और आख्या प्रस्तुत करें। अगर धनराशि की आवश्यकता हो तो परिषद को अवगत कराएं।


    Wednesday, April 1, 2026

    CTET फरवरी 2026 का परिणाम घोषित, कुल 25.68% अभ्यर्थी सफल

    CTET फरवरी 2026 का परिणाम घोषित, कुल 25.68% अभ्यर्थी सफल

    नई दिल्ली, 30 मार्च 2026।
    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) फरवरी 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने भाग लिया।

    जारी आंकड़ों के अनुसार, पेपर-1 में कुल 12,11,611 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 10,65,410 परीक्षार्थी उपस्थित हुए। इनमें से 3,58,937 अभ्यर्थी सफल रहे, जो कुल 33.69 प्रतिशत है। वहीं, पेपर-2 में 21,56,459 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 18,67,428 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए और 3,46,738 अभ्यर्थी सफल हुए, जिसकी सफलता दर 18.56 प्रतिशत रही।

    दोनों पेपरों को मिलाकर कुल 26,49,129 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 23,24,625 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें कुल 5,97,061 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए, जिससे कुल सफलता प्रतिशत 25.68 रहा।

    सीबीएसई ने बताया कि अभ्यर्थी अपना परिणाम आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर देख सकते हैं। साथ ही, मार्कशीट और पात्रता प्रमाण पत्र भी शीघ्र ही डिजिलॉकर पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे, जिन्हें अभ्यर्थी अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से डाउनलोड कर सकेंगे। 




    CBSE ने जारी किया CTET का रिजल्ट, जानिए!  कितने नंबर वाला होगा पास? इस लिंक से करें चेक


    🔴 इस लिंक से देखें अपना परिणाम 

    CBSE ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) पेपर-1 और पेपर-2 का रिज्लट जारी कर दिया है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोर चेक कर सकते हैं।


    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) 2026 का रिजल्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अपने लॉगिन डिटेल्स डालकर आसानी से अपना रिजल्ट डाउनलोड कर सकते हैं। लाखों छात्रों को इस परीक्षा के रिजल्ट का इंतजार था। 


    इस परीक्षा में देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 25 लाख उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। अब यह सभी उम्मीदवार सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। आप सीटीईटी पेपर-1 और पेपर-2 दोनों का रिजल्ट जारी कर सकते हैं क्योंकि सीबीएसई ने सीटीईटी पेपर-1 और पेपर-2 दोनों का रिजल्ट एक साथ जारी कर दिया है। 

     

    कैसे चेक करें रिजल्ट?

    सबसे पहले CTET की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाएं।

    लेटेस्ट न्यूज सेक्शन में 'CTET February Result 2026' का विकल्प दिखेगा।

    इस लिंक पर क्लिक करने से आप रिजल्ट लॉगिन पेज पर पहुंच जाएंगे।

    अपना रोल नंबर और पासवर्ड डालें।

    सबमिट करते ही आपका CTET रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा।

    इसके बाद आप अपना स्कोर कार्ड डाउनलोड कर लें। 


    कितने नंबर वाला होगा पास?
    CTET पास करने के लिए जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों को कम से कम 60 प्रतिशत नंबर लाने होते हैं। इसका मतलब है कि कुल 150 नंबरों में से कैंडिडेट्स को कम से कम 90 नंबर हासिल करने होते हैं। रिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट्स को CTET एग्जाम क्लियर करने के लिए 55 प्रतिशत स्कोर करना होता है। अगर आपका स्कोर इतना है तो आप इस परीक्षा में सफल हो गए हैं। इसके बाद आपका यह रिजल्ट लाइफ टाइम वैलिड रहेगा यानी इस रिजल्ट के आधार पर आप आगे परीक्षाएं दे सकते हैं। 


    पेपर-1 और पेपर-2 क्या है?
    सीबीएसई सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट के पेपर-1 और पेपर-2 आयोजित किया था। पेपर 1 पास करने वाले अभ्यर्थी कक्षा 1 से लेकर 5वीं तक और पेपर 2 एग्जाम क्वालीफाई करने पर उम्मीदवार कक्षा 6 से लेकर 8 तक पढ़ाने के लिए पात्र हो जाते हैं।

    माध्यमिक शिक्षा : शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रवेश, पंजीकरण एवं ऑनलाइन उपस्थिति के संबंध में निर्देश

    यूपी बोर्ड का नया सत्र आज से, ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य, परिषद ने दिए निर्देश- कक्षा नौवीं से 12वीं तक का संचालन एक अप्रैल से अनिवार्य रूप से किया जाए

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत बुधवार से हो जाएगी। इसके साथ ही प्रवेश, पंजीकरण और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू होगी।

    इस बार विशेष व्यवस्था के तहत सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति परिषद के पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। परिषद ने सभी विद्यालयों को निर्देशित किया है कि कक्षा नौवीं से 12वीं तक का संचालन एक अप्रैल से अनिवार्य रूप से किया जाए।

    बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने निर्देश दिए हैं कि ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के वार्षिक परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी, इसलिए इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

    सचिव ने बताया कि सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौवीं व 11वीं के विद्यार्थियों के अग्रिम पंजीकरण और परीक्षा वर्ष 2027 में कक्षा 10वीं व 12वीं के छात्रों के परीक्षा आवेदन से संबंधित समय सारिणी अलग से जारी की जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि नए सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों का पंजीकरण और पूरा विवरण उसी दिन परिषद के पोर्टल पर दर्ज किया जाए।

    ताकि ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली में उनका नाम प्रदर्शित हो सके और उपस्थिति अंकित की जा सके। साथ ही अभिभावकों और छात्रों से कहा गया है कि वे किसी के बहकावे में आकर अनधिकृत या महंगी किताबें न खरीदें। परिषद द्वारा अधिकृत प्रकाशकों की पुस्तकों की सूची और निर्धारित दरें वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।



    माध्यमिक शिक्षा : शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रवेश, पंजीकरण एवं ऑनलाइन उपस्थिति के संबंध में निर्देश


    भारत में भी बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर सख्ती की तैयारी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उम्र आधारित नियमों की सिफारिश

    भारत में भी बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर सख्ती की तैयारी,  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उम्र आधारित नियमों की सिफारिश


    नई दिल्ली। बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त नियम बनाने की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सुझाव दिया है कि बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार ही सोशल मीडिया तक पहुंच दी जाए और इसके लिए एक स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार किया जाए।


    आयोग के अनुसार, 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के स्वतंत्र उपयोग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। वहीं, 13 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य हो और 15 से 18 वर्ष के किशोरों को सीमित और निगरानी के साथ उपयोग की छूट दी जाए। आयोग का मानना है कि इससे बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की बेहतर रक्षा की जा सकेगी।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय अधिक जोखिम वाले फीचर्स पर नियंत्रण किया जाना चाहिए। साथ ही, बच्चों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि उनके अधिकार सुरक्षित रह सकें।

    आयोग ने उम्र सत्यापन प्रणाली को अनिवार्य बनाने की भी सिफारिश की है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे तय नियमों के अनुसार ही सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, एक केंद्रीय नियामक संस्था के गठन का सुझाव दिया गया है, जो इन नियमों के पालन की निगरानी करेगी।

    रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि वहां बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं, जहां नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के बढ़ते डिजिटल एक्सपोजर को देखते हुए इस तरह के नियम समय की मांग हैं। यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो यह बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

    संविदा प्रवक्ताओं को प्रमोशन में राहत लेकिन आर्थिक लाभ नहीं, व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई

    संविदा प्रवक्ताओं को प्रमोशन में राहत लेकिन आर्थिक लाभ नहीं, व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई


     लखनऊ: राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत ऐसे प्रवक्ता जो पहले संविदा पर कार्यरत थे और बाद में नियमित हुए, उनकी पुरानी संविदा सेवा को करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत प्रमोशन में जोड़ा जाएगा। हालांकि यह लाभसिर्फ कागजी (नोशनल) होगा और इससे कोई आर्थिक लाभनहीं मिलेगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता उच्च शिक्षा निदेशक करेंगे। समिति 15 दिन में रिपोर्ट देगी।


    यह व्यवस्था उन प्रवक्ताओं पर लागू होगी, जो वर्ष 2005-06, 2006-07 और 2008-09 में संविदा पर नियुक्त हुए थे और बाद में 26 दिसंबर 2016 के शासनादेश के तहत नियमित किए गए। उनकी सेवाएं पहले ही बिना अंतराल के निरंतर मानी जा चुकी हैं। यह निर्णय यूजीसी 2010 और 2018 के नियमों के आधार पर लिया गया है। 

    इन नियमों में शर्तों के साथ संविदा या अस्थायी सेवा को प्रमोशन में जोड़ने का प्राविधान है। यह भी स्पष्ट है कि सेवा सरकारी, निजी या स्थानीय संस्थान में की गई हो, उसमें भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, इस निर्णय के तहत संविदा सेवा को केवल रिकार्ड में जोड़ा जाएगा। इससे न तो वरिष्ठता तय होगी, न पेंशन में लाभ मिलेगा और न ही कोई एरियर या अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। प्रमोशन के बाद वेतन केवल वास्तविक प्रमोशन की तारीख से ही लागू होगा। 

    यह निर्णय डा. रजत गंगवार समेत कई सहायक आचार्यों द्वारा पांच जुलाई 2025 को किए गए अनुरोध के बाद लिया गया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व अध्यक्ष डा. दीनानाथ सिंह और पूर्व संयुक्त महामंत्री डा. जगदीश सिंह दीक्षित ने कहा कि यह मांग लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों को भी यही लाभ दिया जाए।