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Tuesday, August 22, 2119

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    Thursday, November 5, 2026

    सात सूत्रीय मांगों को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ का 18 नवंबर को बीएसए कार्यालय में होगा धरना


    सात सूत्रीय मांगों को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ का 18 नवंबर को बीएसए कार्यालय में होगा धरना



    राज्य अध्यापक और सीएम शिक्षक पुरस्कार के आवेदन 10 नवंबर से

    राज्य अध्यापक और सीएम शिक्षक पुरस्कार के आवेदन 10 नवंबर से


    लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और शिक्षक 10 से 30 नवंबर तक राज्य अध्यापक पुरस्कार और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने बुधवार को इसकी समयसारिणी जारी कर दी। चयन प्रक्रिया 24 जनवरी 2027 तक पूरी की जाएगी। 


    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) और संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों, प्रधानाचार्यों व प्रधानाध्यापकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं, वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों, प्रधानाचार्यों व प्रधानाध्यापकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए चुना जाएगा। आवेदन विभाग की वेबसाइट https://upmsp.edu.in पर भरे जाएंगे। 


    जिला स्तरीय समिति एक से 15 दिसंबर तक आवेदनों का परीक्षण और स्थलीय सत्यापन कर पात्र अभ्यर्थियों के प्रस्ताव मंडलीय समिति को भेजेगी। मंडलीय समिति 16 से 30 दिसंबर तक प्रस्ताव निदेशालय स्तरीय चयन समिति को भेजेगी। इसके बाद 31 दिसंबर से 14 जनवरी 2027 तक प्रस्ताव राज्य स्तरीय समिति को भेजे जाएंगे। राज्य स्तरीय समिति 15 से 24 जनवरी तक चयन प्रक्रिया पूरी करेगी। चयन वर्ष 2022 में निर्धारित मानकों के आधार पर होगा। 

    बिहार के सरकारी स्कूल में अब नहीं बना सकेंगे रील्स, शिक्षकों के लिए नए निर्देश जारी

    बिहार के सरकारी स्कूल में अब नहीं बना सकेंगे रील्स, शिक्षकों के लिए नए निर्देश जारी


    बिहार के सरकारी स्कूलों में रील्स और वीडियो बनाने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं. अब स्कूल परिसर में बिना लिखित अनुमति के सोशल मीडिया कंटेंट नहीं बनाया जा सकेगा. राजनीतिक, धार्मिक और जातिगत मुद्दों पर कैंपेन चलाने पर भी रोक लगाई गई है.

    बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के दौरान शिक्षक सोशल मीडिया के लिए रील्स नहीं बना सकेंगे. शिक्षा विभाग ने स्कूल परिसर में वीडियो और रील्स बनाने को लेकर सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को निर्देश भेजा है. इसमें बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के ऐसा करने पर रोक लगाई गई है.

    शिक्षा विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि विभाग के संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं, जिनमें सरकारी स्कूलों और कार्यालय परिसरों में शिक्षक या दूसरे कर्मचारी रील्स और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं.

    पत्र में इस पर आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि सरकारी परिसर का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर निजी पहचान बनाने या इन्फ्लुएंसर बनने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. विभाग ने इसे सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रावधानों के खिलाफ बताया है.

    राजनीतिक, धार्मिक और जातिगत कैंपेन पर भी रोक
    निर्देश में बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 का हवाला देते हुए कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी राजनीतिक मुद्दों पर सोशल मीडिया कैंपेन नहीं चला सकते. धर्म, जाति, उपजाति और समुदाय से जुड़े मुद्दों को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर भी रोक है. 

    विभाग ने बिहार सरकारी सेवक आचार (संशोधन) नियमावली, 2026 के नियम-9(3) का भी जिक्र किया है. इसके तहत सरकारी सेवकों के लिए सोशल मीडिया पर रील्स बनाकर प्रसारित करने को प्रतिबंधित बताया गया है.


    पढ़ाई के दौरान रील्स बनाने और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक

    विभाग ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की निजता और जीवन के अधिकार का भी उल्लेख किया है. निर्देश के मुताबिक, बच्चों को पढ़ाते समय रील्स बनाना उचित नहीं है. इसे पढ़ाई के काम में बाधा पहुंचाने वाला बताया गया है.

    स्कूलों में पढ़ाई के दौरान बाहरी लोगों के बिना अनुमति प्रवेश पर भी रोक लगाई गई है. साथ ही शिक्षकों को ऐसी सोशल मीडिया पोस्ट करने से मना किया गया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा या आंतरिक सुरक्षा के खिलाफ हों.


    इन तरह के वीडियो और रील्स भी नहीं बना सकेंगे

    निर्देश में सरकारी कर्मचारियों को अवैध, अश्लील, अपमानजनक, धमकी भरी या अभद्र सामग्री बनाने और पोस्ट करने से मना किया गया है. किसी दूसरे के बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन करने वाली रील्स बनाने पर भी रोक लगाई गई है.

    विभाग ने IT Act, 2000 की धारा 66E और 72 का भी उल्लेख किया है. पत्र में इन प्रावधानों को निजता और गोपनीयता से जुड़े मामलों के संदर्भ में रखा गया है.

    इन कार्यक्रमों में अनुमति लेकर बना सकेंगे रील्स

    शिक्षा विभाग ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय कुछ खास गतिविधियों के लिए अनुमति का प्रावधान रखा है. इसके लिए संबंधित नियंत्रण अधिकारी से पहले लिखित मंजूरी लेनी होगी.

    निर्देश के अनुसार, 15 अगस्त और 26 जनवरी के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रील बनाई जा सकती है. इसके अलावा पौधारोपण, रक्तदान, अन्नदान और स्वच्छता अभियान जैसे सामाजिक कामों में योगदान का रिकॉर्ड या रील तैयार करने की भी अनुमति दी जा सकती है. गणमान्य व्यक्तियों के औचक निरीक्षण से जुड़े कार्यक्रमों की रील बनाने के लिए भी लिखित पूर्व अनुमति जरूरी होगी.




    कानपुर नगर के बिधनू ब्लॉक में तैनात रहे निलंबित खंड शिक्षा अधिकारी बहाल, सीतापुर में मिली तैनाती, विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही रहेगी जारी

    कानपुर नगर के बिधनू ब्लॉक में तैनात रहे निलंबित खंड शिक्षा अधिकारी बहाल, सीतापुर में मिली तैनाती, विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही रहेगी जारी


    लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग ने कानपुर नगर के विकास खंड बिधनू में तैनात रहे खंड शिक्षा अधिकारी भारत कुमार वर्मा को निलंबन अवधि को दृष्टिगत रखते हुए सेवा में बहाल कर दिया है। अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) मनोज कुमार द्विवेदी की ओर से 2 नवंबर 2026 को जारी कार्यालय आदेश के अनुसार, बहाली के बाद उन्हें जनपद सीतापुर में रिक्त खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात किया गया है।

    भारत कुमार वर्मा को विभागीय कार्यों में लापरवाही, बैठकों में अनुपस्थिति एवं उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना सहित विभिन्न आरोपों के आधार पर 16 मार्च 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था। उनके विरुद्ध आरोपपत्र भी जारी किया गया था।

    आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सेवा में बहाली के बावजूद उनके विरुद्ध पूर्व में संस्थित विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही जारी रहेगी तथा जांच अधिकारी की आख्या के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।


    "संविदा के भरोसे चल रहे हैं विभाग : हाईकोर्ट", मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर के 75% से अधिक पद खाली

    "संविदा के भरोसे चल रहे हैं विभाग : हाईकोर्ट",  मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर के 75% से अधिक पद खाली

    हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग व राज्य सरकार से मांगा शपथपत्र

    अदालत ने कहा... रिक्तियां भरने के मुद्दे से आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर के स्वीकृत पदों पर नियमित भर्ती नहीं होने को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को मामले में पक्षकार बनाने की अनुमति देते हुए राज्य सरकार और आयोग से शपथपत्र मांगा है।


    न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने श्रीनिवासन गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख 25 नवंबर तय की है। सरकारी अधिवक्ता ने बताया कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर के 517 पद स्वीकृत हैं। इनमें 25 प्रतिशत सीधी भर्ती और 75 प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाने हैं।

    सीधी भर्ती के 108 पदों में से केवल 26 पर नियुक्तियां हुई हैं। यानी 75 फीसदी से अधिक पद खाली हैं। सरकार ने 35 पदों पर भर्ती के लिए आयोग को अधियाचन भेजा था, लेकिन विज्ञापन जारी नहीं हुआ। याचिका दाखिल होने के बाद 18 अगस्त 2026 को 44 पदों का विज्ञापन जारी किया गया, जिसकी चयन प्रक्रिया चल रही है।

    कोर्ट ने कहा कि नियमित पद खाली रखकर कृत्रिम आपात स्थिति पैदा की जा रही है। इसके आधार पर संविदा नियुक्तियां हो रही हैं। कई कॉलेजों में विभागाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद संविदा कर्मचारियों, असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसर के भरोसे हैं। कोर्ट ने इसे मेडिकल कॉलेजों के गिरते मानकों का एक कारण माना।

    कोर्ट ने कहा कि वैधानिक प्रावधानों के अनुसार रिक्तियां भरने के मुद्दे से आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि शपथपत्र दाखिल नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आदेश पारित किया जाएगा।

    SQAAF के जरिए बेसिक व माध्यमिक स्कूलों की गुणवत्ता परखेंगे, पढ़ाई के स्तर का होगा आंकलन

    SQAAF के जरिए बेसिक व माध्यमिक स्कूलों की गुणवत्ता परखेंगे, पढ़ाई के स्तर का होगा आंकलन

    मानकों के आधार पर भरी विद्यालय की रिपोर्ट के आधार पर मूल्यांकन कर होगी विद्यालयों की ग्रेडिंग

    यूपी के सरकारी स्कूलों का किया जाएगा मूल्यांकन, तैयार होगी रिपोर्ट

    लखनऊ । यूपी में सरकारी बेसिक व माध्यमिक स्कूलों का मूल्यांकन किया जाएगा। विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर व किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है, उसका आंकलन किया जाएगा। स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क (एसक्यूएएएफ) लागू किए जाने की तैयारी की जा रही है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो इसे आगे लागू कर गुणवत्तापरक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।

    एसक्यूएएएफ को लागू किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है और अभी इसे अंतिम रूप देने की तैयारी की जा रही है। एक्यूएएएफ की मदद से स्कूलों में गुणवत्तापरक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। जिसके माध्यम से प्रत्येक स्कूल का डिजिटल मूल्यांकन होगा। प्रधानाध्यापक मानकों के आधार पर अपने-अपने विद्यालय की रिपोर्ट इस पर भरेंगे और फिर उसके आधार पर मूल्यांकन कर ग्रेडिंग होगी। ऐसे स्कूल जो अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं उनके श्रेष्ठ नवाचारों को दूसरे स्कूलों में भी लागू किया जाएगा। जिन विद्यालयों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत ठीक नहीं होगा, वहां सुधार के लिए कदम उठाए जाएंगे। शिक्षा विभाग सुधार के लिए उपचारात्मक कदम उठाएगा।

    एसएसक्यूएफ का मकसद विद्यालयों में गुणवत्तापरक सुधार किया जाना है। ग्रेडिंग के बाद स्कूलों को पर्याप्त अवसर दिया जाएगा कि किस तरह अपने यहां सुधार करें। सुधार करने के लिए शिक्षा विभाग उनकी पूरी मदद करेगा और निगरानी भी की जाएगी। फिलहाल खराब ग्रेडिंग किसी स्कूल को चेतावनी इत्यादि देकर हतोत्साहित नहीं किया जाएगा बल्कि उनके समक्ष रिपोर्ट कार्ड पेश किया जाएगा। जिसके आधार पर वह आगे सुधार के लिए ठोस कदम उठा सकें। 




    अब स्कूल खुद बताएंगे अपनी कमजोरी, बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों का डिजिटल माध्यम से मूल्यांकन होगा

    लखनऊ। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्यों को खुद यह बताना होगा कि उनके विद्यालय में पढ़ाई का स्तर कैसा है और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। इसके लिए स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क किया (एसक्यूएएएफ) लागू जाएगा। इसके तहत बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों का डिजिटल माध्यम से मूल्यांकन होगा।


     स्कूल पहले अपना आकलन करेंगे। इसमें सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए सुधार की कार्ययोजना भी बनानी होगी। एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार ने बताया कि स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथारिटी की स्थापना के तहत यह फ्रेमवर्क तैयार है। इसे जल्द लागू किया जाएगा।

    विशेष टीईटी से शिक्षामित्रों को बाहर रखना भेदभाव नहीं : हाईकोर्ट, सरकार व आयोग को निर्देश- अगस्त 2028 तक कराएं कम से कम छह परीक्षाएं

    विशेष टीईटी से शिक्षामित्रों को बाहर रखना भेदभाव नहीं : हाईकोर्ट,  सरकार व आयोग को निर्देश- अगस्त 2028 तक कराएं कम से कम छह परीक्षाएं

    5 नवंबर 2026
    प्रयागराज । इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शिक्षामित्रों को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में शामिल करने की मांग अस्वीकार कर दी है। कोर्ट ने कहा कि नियमित पदों पर नियुक्त सहायक अध्यापकों और शिक्षामित्रों की सेवा स्थिति अलग-अलग है। ऐसे में विशेष टीईटी से शिक्षामित्रों को बाहर रखना भेदभाव नहीं है। हालांकि उन्हें टीईटी पास करने के पर्याप्त अवसर देने के लिए राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को 31 अगस्त 2028 तक कम से कम छह नियमित टीईटी परीक्षाएं कराने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वसीम अहमद की विशेष अपील पर पारित किया है।

    अपील में दो सितंबर 2026 के शासनादेश और तीन सितंबर को जारी विज्ञापन को चुनौती दी गई थी। इनके तहत विशेष टीईटी में केवल कार्यरत शिक्षकों और संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को शामिल करने की व्यवस्था थी। अपीलकर्ताओं ने कहा कि वे 20 वर्षों से अधिक समय से शिक्षामित्र के रूप में काम कर रहे हैं। संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया, जबकि शिक्षामित्रों को इससे बाहर रखा गया। उनका कहना था कि सभी पात्र अभ्यर्थियों को टीईटी पास करने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।

    आयोग ने बताया कि तीन नवंबर से शुरू हुई विशेष टीईटी में करीब 86 हजार नियमित सहायक अध्यापकों और विशेष शिक्षकों को अवसर दिया गया है। शिक्षामित्रों की संख्या करीब डेढ़ लाख है। वे नियमित पदों पर नियुक्त नहीं हैं, बल्कि मानदेय पर कार्यरत हैं। विशेष शिक्षकों को अलग श्रेणी में रखने का आधार दिव्यांग बच्चों और विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को शिक्षा देना है।

    आयोग के अनुसार अगली नियमित टीईटी परीक्षा 26 और 27 फरवरी 2027 को होगी। इसके बाद जून-जुलाई और दिसंबर-जनवरी में भी परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। आयोग ने 2028 में परीक्षा कराने का भी भरोसा दिया। खंडपीठ ने कहा कि शिक्षामित्रों को 2026, 2027 और 2028 में टीईटी पास करने के लिए हर वर्ष दो अवसर मिलने चाहिए। निर्धारित अवसर पूरे करने के लिए 2028 में 31 अगस्त से पहले एक और नियमित टीईटी परीक्षा कराई जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तारीख के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत कोई अतिरिक्त अवसर नहीं मिलेगा। इन्हीं निर्देशों के साथ विशेष अपील निस्तारित कर दी गई।



    शिक्षामित्रों की स्पेशल टीईटी में शामिल होने की मांग को लेकर झटका

    आज की बहस के बाद फिलहाल शिक्षामित्रों को स्पेशल टीईटी परीक्षा में शामिल होने पर नहीं मिली हाईकोर्ट से अंतरिम राहत

    03 नवंबर 2026
    इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच (जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की पीठ) में शिक्षामित्रों को 'स्पेशल टीईटी-2026' परीक्षा में शामिल करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से भविष्य में होने वाली आगामी टीईटी परीक्षाओं का पूरा शेड्यूल हलफनामे के माध्यम से तलब किया है।

    • मामले की पृष्ठभूमि: 1 अक्टूबर को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच (न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान) ने वसीम अहमद और अन्य 220 शिक्षामित्रों की याचिका को खारिज कर दिया था। सिंगल बेंच का कहना था कि शिक्षामित्रों की कानूनी स्थिति नियमित सरकारी शिक्षकों से अलग है, इसलिए वे केवल इस आधार पर स्पेशल टीईटी में शामिल होने का दावा नहीं कर सकते कि वे सामान्य टीईटी में बैठने योग्य हैं। 

    • डबल बेंच में अपील: सिंगल बेंच के इस झटके के बाद उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष वसीम अहमद व अन्य याचिकाकर्ताओं ने इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच में विशेष अपील (स्पेशल अपील संख्या 1221) के जरिए चुनौती दी। 

    • शिक्षामित्रों का पक्ष: लगभग 73,000 नॉन-टीईटी शिक्षामित्रों की ओर से दलील दी गई कि जब एडेड स्कूलों के शिक्षकों और अन्य संविदा कर्मियों (जैसे स्पेशल एजुकेटर) को इस विशेष परीक्षा का मौका दिया जा रहा है, तो 25 वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षामित्रों को इससे वंचित रखना न्यायोचित नहीं है। 

    • कोर्ट की वर्तमान स्थिति: डबल बेंच ने दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद फिलहाल शिक्षामित्रों को परीक्षा में शामिल करने का कोई अंतिम आदेश या अंतरिम राहत नहीं दी है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग से आगामी परीक्षाओं के कार्यक्रम और नॉन-टीईटी शिक्षकों के पूरे विवरण पर जवाब मांगा है।

    इस मामले की अगली सुनवाई में आयोग द्वारा दाखिल किए जाने वाले हलफनामे पर विचार किया जाएगा। 



    विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल करने की मांग पर आयोग से परीक्षा कार्यक्रम तलब, मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को

    हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से आगामी परीक्षाओं का मांगा ब्योरा

    31 अक्टूबर 2026
    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल करने की मांग से जुड़ी विशेष अपील पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से आगामी सामान्य टीईटी परीक्षाओं का प्रस्तावित कार्यक्रम हलफनामे पर मांगा है।

    न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वसीम अहमद सहित 221 शिक्षामित्रों की ओर से दाखिल विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को होगी।


    याचिकाकर्ताओं ने दो सितंबर 2026 के शासनादेश और तीन सितंबर को जारी विज्ञापन को चुनौती देते हुए विशेष टीईटी में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि वे निर्धारित शैक्षिक और प्रशिक्षण योग्यताएं रखते हैं। संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर देना और शिक्षामित्रों को इससे बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।

    इससे पहले न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने एक अक्तूबर को उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ विशेष अपील दाखिल की गई है। अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि टीईटी केवल पात्रता परीक्षा है। इसे पास करने से स्वतः नियुक्ति का अधिकार नहीं मिलता, इसलिए शिक्षामित्रों को इससे वंचित रखने का औचित्य नहीं है।

    वहीं, आयोग की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार प्रत्येक वर्ष कम से कम एक और प्राथमिकता से दो टीईटी परीक्षाएं कराई जानी हैं। इस पर खंडपीठ ने वर्ष 2026 की दूसरी सामान्य टीईटी और अगले दो वर्षों की परीक्षाओं का कार्यक्रम मांगा है।

    Wednesday, November 4, 2026

    25 साल पढ़ाया, अब खुद देनी पड़ी पात्रता की परीक्षा, नियुक्ति के समय तय योग्यता और अनुभव की अनदेखी पर नाराजगी के साथ शिक्षकों ने दी स्पेशल टीईटी

    25 साल पढ़ाया, अब खुद देनी पड़ी पात्रता की परीक्षा, नियुक्ति के समय तय योग्यता और अनुभव की अनदेखी पर नाराजगी के साथ शिक्षकों ने दी स्पेशल टीईटी

    पेपर के कठिन स्तर ने बढ़ाई शिक्षकों की परेशानी, गणित, अंग्रेजी, पर्यावरण और बाल मनोविज्ञान के सवालों में उलझे परीक्षार्थी; परीक्षा की कठिनाई और पात्रता के औचित्य पर उठे सवाल


    लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में वर्ष 2010 और उससे पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए मंगलवार को आयोजित विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (स्पेशल टीईटी)-2026 अब अपने कठिन प्रश्नपत्र को लेकर चर्चा में है। लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हजारों शिक्षकों को परीक्षा में गणित, अंग्रेजी, पर्यावरण अध्ययन और बाल मनोविज्ञान के सवालों ने खासा उलझाया। कई परीक्षार्थियों ने प्रश्नपत्र के स्तर को अपेक्षा से अधिक कठिन बताते हुए असंतोष जताया। परीक्षा केंद्रों से बाहर निकले शिक्षकों के बीच प्रश्नपत्र की कठिनाई और परीक्षा की प्रासंगिकता को लेकर चर्चा होती रही।


    प्रदेश में परीक्षा के लिए 131 केंद्र बनाए गए थे। प्रयागराज में 22 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित हुई। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेशभर में परीक्षा के लिए करीब 1.06 लाख शिक्षकों ने आवेदन किया था। परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों की संख्या भी 2,616 बताई गई है।

    25 वर्ष की सेवा के बाद पात्रता पर सवाल

    परीक्षा में शामिल शिक्षकों की प्रमुख नाराजगी इस बात को लेकर रही कि नियुक्ति के समय निर्धारित शैक्षिक योग्यता और चयन प्रक्रिया के आधार पर वर्षों तक शिक्षण कार्य करने के बाद अब उन्हें दोबारा पात्रता साबित करने की परीक्षा देनी पड़ रही है। इनमें 50 से 55 वर्ष तक की आयु के शिक्षक भी शामिल रहे। शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय लागू नियमों, अर्जित अनुभव और लंबी सेवा अवधि को भी इस पूरी व्यवस्था में उचित महत्व मिलना चाहिए।

    प्रश्नपत्र की समीक्षा की मांग

    शिक्षक संगठनों ने भी विशेष टीईटी के प्रश्नपत्र के स्तर पर सवाल उठाते हुए शासन स्तर पर इसकी समीक्षा कराने की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि अन्य विभागीय परीक्षाओं में कर्मचारियों की सेवा अवधि, परिस्थितियों और कार्य अनुभव को ध्यान में रखकर प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं, इसलिए विशेष टीईटी में भी ऐसा दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए था। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए परीक्षा का स्तर उनकी परिस्थितियों के अनुरूप निर्धारित करने की बात कही गई है।

    गणित और बाल मनोविज्ञान के सवालों ने उलझाया

    परीक्षार्थियों के अनुभवों के अनुसार गणित, पर्यावरण अध्ययन, बाल मनोविज्ञान और अंग्रेजी के कई प्रश्न चुनौतीपूर्ण रहे। कुछ केंद्रों पर हिंदी के व्याकरण संबंधी सवालों को लेकर भी अभ्यर्थियों में चर्चा रही। शिक्षकों का कहना था कि परीक्षा में विषयों की गहराई और प्रश्नों की जटिलता ने समय प्रबंधन को भी प्रभावित किया।

    परीक्षा से पीछे नहीं, सम्मान और न्यायसंगत मूल्यांकन की मांग

    शिक्षकों के बीच एक व्यापक भावना यह भी सामने आई कि वे परीक्षा या अपनी योग्यता के मूल्यांकन से पीछे नहीं हट रहे हैं, लेकिन परीक्षा के नाम पर उनके भविष्य, सम्मान और वर्षों की सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सामान्य टीईटी के अनुभवों का हवाला देते हुए कुछ शिक्षकों ने सफलता की उम्मीद भी जताई है। वहीं, परीक्षा की कठिनाई को देखते हुए परिणाम को लेकर अभी से कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

    विशेष टीईटी को लेकर अब दो सवाल प्रमुखता से सामने हैं—क्या वर्षों की सेवा और नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यता का समुचित मूल्यांकन किया गया है और क्या परीक्षा का प्रश्नपत्र संबंधित शिक्षकों की सेवा परिस्थितियों के अनुरूप था? शिक्षक संगठनों की समीक्षा की मांग ने इन सवालों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    पांच IIT टॉप 100 यूनिवर्सिटी में बरकरार, क्यूएस एशिया रैंकिंग में सभी प्रतिष्ठित संस्थानों की रैंकिंग में पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज

    पांच IIT टॉप 100 यूनिवर्सिटी में बरकरार, क्यूएस एशिया रैंकिंग में सभी प्रतिष्ठित संस्थानों की रैंकिंग में पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज 

    दिल्ली विश्वविद्यालय टाप 100 से बाहर, 95 से खिसककर 106वें स्थान पर आ गया


    नई दिल्ली ।  नवीनतम क्यूएस एशिया रैंकिंग में भारत के लिए गर्व और आत्ममंथन दोनों करने जैसी स्थिति सामने आई है। एक ओर जहां इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस (आइआइएससी), बेंगलुरु और पांच प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) ने एशिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में अपनी जगह बरकरार रखी है, वहीं दूसरी ओर प्रतियोगिता के इस दौर में इन सभी प्रतिष्ठित संस्थानों की रैंकिंग में पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है।

    लंदन स्थित क्वाक्वेरली साइमंड्स (क्यूएस) द्वारा मंगलवार को जारी रैंकिंग के अनुसार, आइआइटी दिल्ली पिछले साल 59वें स्थान से फिसलकर इस बार 66वें नंबर पर आ गया है। इसके अलावा आइआइएससी बेंगलुरु (64 से 79), आइआइटी बांबे (71 से 83), आइआइटी मद्रास (70 से 85), आइआइटी खड़गपुर (77 से 90), और आइआइटी कानपुर (77 से 97) तक सभी शीर्ष संस्थानों को पायदानों का नुकसान उठाना पड़ा है। यहां तक कि दिल्ली विश्वविद्यालय भी शीर्ष 100 से बाहर होकर 106वें स्थान पर पहुंच गया है। यह गिरावट न केवल शिक्षाविदों बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए चिंतित हर भारतीय को सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर एशियाई स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा में हमारे संस्थान क्यों पिछड़ रहे हैं।

    इस निराशाजनक तस्वीर के बीच एक बेहद सुखद और गौरवान्वित करने वाला पहलू यह भी है कि उच्च शिक्षा प्रणाली के मामले में भारत, चीन के बाद एशिया में दूसरा सबसे अधिक प्रतिनिधित्व करने वाला देश बना हुआ है, जिसमें 325 रैंक वाले विश्वविद्यालय शामिल हैं। क्यूएस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बेन सोव्टर ने सराहना करते हुए कहा कि भारत ने अनुसंधान क्षमता के मामले में उल्लेखनीय प्रगति की है। 'प्रति संकाय शोध पत्र' के मामले में भारत के संस्थान एशिया में शीर्ष 10 में सबसे आगे हैं, और 15 भारतीय विश्वविद्यालयों में पीएचडी धारक कर्मचारियों की संख्या साझा रूप से पहले स्थान पर है।

    इसके साथ ही, नियोक्ता प्रतिष्ठा के मामले में आइआइटी बांबे और आइआइटी दिल्ली ने एशिया के शीर्ष 10 में क्रमशः सातवां और दसवां स्थान हासिल कर एक नया मील का पत्थर छुआ है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस मजबूत अकादमिक और शोध नींव को अब अधिक निरंतरता के साथ वैश्विक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय पहचान में बदलने की आवश्यकता है। यदि हम अनुसंधान की गुणवत्ता, वैश्विक साझेदारियों और अंतरराष्ट्रीय दृश्यता में निरंतर निवेश बढ़ाएं, तो हमारे संस्थान वैश्विक पटल पर और अधिक गौरवशाली स्थान प्राप्त कर सकते हैं।

    स्पेशल टीईटी में 87.92 प्रतिशत अभ्यर्थी हुए शामिल, AI कैमरों और इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से हुई निगरानी, दोनों पालियों में 93,681 शिक्षकों ने दी परीक्षा

    स्पेशल टीईटी में 87.92 प्रतिशत अभ्यर्थी हुए शामिल, लखनऊ में दूसरे की जगह परीक्षा देता फर्जी अभ्यर्थी पकड़ा गया

    03 नवंबर 2026
    AI कैमरों और इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से हुई निगरानी, दोनों पालियों में 93,681 अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से 3 नवंबर को आयोजित विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (Special TET)-2026 प्रदेश के छह मंडल मुख्यालयों में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। आयोग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, परीक्षा की दोनों पालियों में कुल पंजीकृत 1,06,547 अभ्यर्थियों में से 93,681 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। इस प्रकार कुल उपस्थिति 87.92 प्रतिशत रही।

    परीक्षा के दौरान AI आधारित निगरानी व्यवस्था के माध्यम से लखनऊ के बप्पा श्री नारायण वोकेशनल इंटर कॉलेज, स्टेशन रोड स्थित केंद्र पर एक फर्जी परीक्षार्थी पकड़ा गया। वह किसी अन्य अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा दे रहा था। उसे अग्रिम विधिक कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।

    दोनों पालियों में उपस्थिति का विवरण

    🔴 प्रथम पाली (कक्षा 1 से 5): 58,353 पंजीकृत, 50,666 उपस्थित (86.80%)।

    🔴 द्वितीय पाली (कक्षा 6 से 8): 48,194 पंजीकृत, 43,015 उपस्थित (89.25%)।

    🔴 कुल उपस्थिति: 93,681 (87.92%)।


    आयोग के अनुसार, परीक्षा प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और आगरा मंडल मुख्यालयों में आयोजित की गई। परीक्षा केंद्रों की AI कैमरों के माध्यम से सघन निगरानी की गई। आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार सहित सदस्य, सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं उपसचिव ने AI इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से परीक्षा की निगरानी की।

    आयोग ने परीक्षा को पारदर्शी, नकलविहीन एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के सहयोग को सराहनीय बताया है।


    आज विशेष विभागीय टीईटी परीक्षा,  शिक्षक साथी घर से निकलने से पहले देख लें ये 10 जरूरी बातें

    03 नवंबर 2026
    विशेष विभागीय टीईटी में शामिल होने वाले शिक्षक परीक्षा के लिए रवाना होने से पहले आवश्यक दस्तावेज और परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देश एक बार जरूर देख लें। परीक्षा में 50 बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे तथा गलत उत्तर पर निगेटिव मार्किंग नहीं होगी।

    परीक्षा से पहले इन जरूरी बातों का रखें ध्यान 

    1. प्रवेश पत्र की प्रिंट कॉपी और मूल फोटो पहचान पत्र साथ रखें।
    2. तीन पासपोर्ट साइज फोटो लेकर जाएं।
    3. काली स्याही वाला बॉल प्वाइंट पेन और सादा क्लिपबोर्ड रखें।
    4. प्रथम पाली के लिए सुबह 8:45 बजे तथा द्वितीय पाली के लिए दोपहर 1:45 बजे प्रवेश बंद हो जाएगा।
    5. मोबाइल, स्मार्ट वॉच, घड़ी, कैलकुलेटर, ब्लूटूथ एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित हैं।
    6. ओएमआर शीट में प्रत्येक प्रश्न के लिए केवल एक विकल्प का गोला पूरी तरह भरें।
    7. व्हाइटनर, रबर एवं ब्लेड का प्रयोग न करें।
    8. परीक्षा अवधि 2 घंटे 30 मिनट है। बायोमेट्रिक एवं अन्य औपचारिकताओं के लिए निर्धारित 5 अतिरिक्त मिनट प्रश्न हल करने का समय नहीं हैं।
    9. ई-केवाईसी अपेक्षित होने पर मूल आधार कार्ड अवश्य रखें।
    10. परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचें और प्रवेश पत्र पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।



    विशेष विभागीय टीईटी : परीक्षा में जाने से पहले जान लें जरूरी निर्देश

    विशेष विभागीय टीईटी में शामिल होने वाले शिक्षक परीक्षा केंद्र पर प्रवेश, आवश्यक दस्तावेज और ओएमआर शीट भरने संबंधी निर्देशों का विशेष ध्यान रखें। परीक्षा में 150 बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे। परीक्षा अवधि 2 घंटे 30 मिनट निर्धारित है। गलत उत्तर पर निगेटिव मार्किंग नहीं होगी।


    परीक्षा के प्रमुख निर्देश एवं जरूरी बातें

    1. परीक्षा केंद्र पर प्रवेश

    • प्रथम पाली : प्रवेश सुबह 8:45 बजे तक।
    • द्वितीय पाली : प्रवेश दोपहर 1:45 बजे तक।
    • निर्धारित समय के बाद प्रवेश नहीं मिलेगा।
    • बायोमेट्रिक एवं अन्य औपचारिकताओं के लिए 5 मिनट अतिरिक्त निर्धारित हैं।


    2. साथ लेकर जाने वाले जरूरी दस्तावेज

    • प्रवेश पत्र की प्रिंट कॉपी।
    • तीन पासपोर्ट साइज फोटो।
    • मूल फोटो पहचान पत्र एवं छायाप्रति।
    • काली स्याही वाला बॉल प्वाइंट पेन।
    • सादा क्लिपबोर्ड/हार्डबोर्ड।
    • पारदर्शी पानी की बोतल।
    • ई-केवाईसी अपेक्षित होने पर मूल आधार कार्ड।


    3. ओएमआर शीट भरते समय सावधानी

    • रोल नंबर एवं प्रश्न पुस्तिका क्रमांक सावधानी से भरें।
    • प्रत्येक प्रश्न में केवल एक गोला पूरी तरह काला करें।
    • एक से अधिक विकल्प भरने पर उत्तर गलत माना जाएगा।
    • व्हाइटनर, रबर एवं ब्लेड का प्रयोग प्रतिबंधित है।
    • परीक्षा समाप्ति पर ओएमआर की सभी निर्धारित प्रतियां निरीक्षक को सौंपें।


    4. प्रतिबंधित सामग्री मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, घड़ी, कैलकुलेटर, ब्लूटूथ, ईयरफोन, टैबलेट, पेन ड्राइव एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र में ले जाना प्रतिबंधित है।


    5. दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए पात्र दिव्यांग अभ्यर्थियों को नियमानुसार श्रुतलेखक की सुविधा एवं प्रतिपूरक समय मिलेगा। इसके लिए संबंधित प्रमाणपत्र एवं आवश्यक दस्तावेज साथ रखें।


    6. अनुचित साधनों पर कार्रवाई नकल, प्रतिरूपण, प्रश्नपत्र लीक अथवा अनुचित साधनों के प्रयोग पर उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत कठोर दंड का प्रावधान है।


    परीक्षा से पहले इन बातों की करें तैयारी

    • प्रवेश पत्र एवं पहचान पत्र तैयार रखें।
    • परीक्षा केंद्र का पता और रास्ता पहले देख लें।
    • ओएमआर शीट भरने का अभ्यास कर लें।
    • बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र, हिंदी, अंग्रेजी, गणित तथा संबंधित विषयों के महत्वपूर्ण तथ्यों का पुनरावलोकन करें।
    • समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचें।

    विशेष सलाह: परीक्षा में जल्दबाजी न करें। प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और ओएमआर शीट भरते समय विशेष सतर्कता बरतें।









    विशेष विभागीय टीईटी परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी, 

    तीन नवंबर को छह मंडल मुख्यालयों में 131 केंद्रों पर होगी परीक्षा, डायरेक्ट लिंक से करें डाउनलोड 👇





    केवल 6 मंडलों में विशेष टीईटी के परीक्षा केंद्र बनाए जाने से वरिष्ठ शिक्षकों को करनी पड़ेगी लंबी यात्रा , शिक्षकों ने मांगा विशेष अवकाश

    29 अक्टूबर 2026
    प्रयागराजः उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग तीन नवंबर को बेसिक स्कूलों के शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने जा रहा है। सभी 18 मंडलों के शिक्षकों ने इसमें आवेदन किया है, बावजूद इसके परीक्षा के लिए छह मंडलों प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और आगरा में परीक्षा केंद्र बनाए हैं।

    इस परीक्षा में बड़ी संख्या में उम्रदराज शिक्षक शामिल होंगे। वे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में अपनी सेवा को संरक्षित करने के लिए स्पेशल टेट दे रहे हैं। न्यायालय ने शिक्षकों के लिए टेट उत्तीर्ण करने की समय सीमा 31 अगस्त, 2028 तक निर्धारित की है। ऐसे में इन शिक्षकों के पास टेट में शामिल होने के लिए सीमित विकल्प हैं। प्रत्येक मंडल व जनपद में परीक्षा केंद्र न बनाए जाने से परीक्षार्थियों को करीब 200 से 300 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ सकती है। बहुत से अभ्यर्थी परीक्षा से वंचित हो सकते हैं। 

    उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ और जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि परीक्षा के दिन अर्थात तीन नवंबर को स्पेशल टेट देने वाले शिक्षकों के लिए अवकाश स्वीकृत किया जाए।


    स्पेशल टीईटी की लिखित परीक्षा तीन नवंबर को प्रदेश के छ प्रमुख मंडल मुख्यालयों में होगी,  31 अक्टूबर से डाउनलोड कर सकेंगे प्रवेश पत्र 

    25 अक्टूबर 2026

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शुक्रवार देर रात 'विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा' (विशेष टीईटी) की परीक्षा तिथि और दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि स्पेशल टीईटी की लिखित परीक्षा आगामी तीन नवंबर को प्रदेश के 6 प्रमुख मंडल मुख्यालयों में होगी।


    परीक्षा प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और आगरा के निर्धारित केंद्रों पर दो पालियों में संपन्न होगी। प्रथम पाली सुबह 09:30 से 12 बजे तक और द्वितीय पाली दोपहर 02:30 से पांच बजे तक आयोजित होगी। आयोग की ओर से परीक्षा के लिए आधिकारिक विज्ञापन पांच सितंबर को प्रकाशित किया गया था।

    आयोग के उपसचिव संजय कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा और समयबद्ध यात्रा प्रबंधन के दृष्टिगत आवंटित परीक्षा जनपद का विवरण आयोग की अधिकृत वेबसाइट http://upessc.up.gov.in/ पर प्रदर्शित कर दिया गया है।


    Tuesday, November 3, 2026

    वर्ष 2027 की यूपी बोर्ड हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले छात्र/छात्राओं के शैक्षिक विवरणों में संशोधन के सम्बन्ध में

    शैक्षिक विवरण में 12 नवंबर तक संशोधन करने का यूपी बोर्ड ने दिया मौका

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की वर्ष-2027 की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा पांच फरवरी से शुरू होकर 24 फरवरी तक आयोजित होगी। परीक्षार्थियों को शैक्षिक विवरण में त्रुटियां सुधारने का मौका दिया गया है। इसके लिए दो नवंबर से 12 नवंबर की मध्यरात्रि 12 बजे तक परिषद की वेबसाइट पर ऑनलाइन संशोधन की प्रक्रिया चलेगी।

    परीक्षार्थी माता-पिता व अपने नाम की वर्तनी, विषय, वर्ग, जेंडर, जाति, माध्यम (हिंदी या अंग्रेजी), फोटो और कक्षा-11 के पंजीकरण में दर्ज हाईस्कूल के अनुक्रमांक में त्रुटियों को ठीक करा सकेंगे।

    इसके लिए संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य पोर्टल पर लॉगइन कर निर्धारित समय में संशोधन और अपडेट की प्रक्रिया पूरी करेंगे। वहीं, जन्मतिथि में संशोधन, छात्र व माता-पिता के पूरे नाम में बदलाव के लिए ऑफलाइन आवेदन करना होगा। 


     वर्ष 2027 की यूपी बोर्ड हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले छात्र/छात्राओं के शैक्षिक विवरणों में संशोधन के सम्बन्ध में


    अब स्कूलों में पढ़ाकर शिक्षक बनने की बारीकियां सीखेंगे बीटीसी-बीएड प्रशिक्षु, इंटर्नशिप को प्रभावी ढंग से लागू कराने पर जोर देने की तैयारी

    इंटर्नशिप को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए बीएड प्रशिक्षुओं को राजकीय और सहायताप्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में इंटर्नशिप की गई अनिवार्य 

    अब स्कूलों में पढ़ाकर शिक्षक बनने की बारीकियां सीखेंगे बीटीसी-बीएड प्रशिक्षु, इंटर्नशिप को प्रभावी ढंग से लागू कराने पर जोर देने की तैयारी

    लखनऊः शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे बीटीसी और बीएड प्रशिक्षु अब केवल प्रशिक्षण संस्थानों में पढ़ाई और अभ्यास तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्कूलों में बच्चों को पढ़ाकर शिक्षण की बारीकियां भी सीखेंगे। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से उनकी इंटर्नशिप को प्रभावी ढंग से लागू कराने पर जोर है। बीटीसी प्रशिक्षुओं के लिए परिषदीय और सहायताप्राप्त विद्यालयों में, जबकि बीएड प्रशिक्षुओं को राजकीय और सहायताप्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में इंटर्नशिप अनिवार्य की गई है।


    अभी तक इंटर्नशिप की व्यवस्था होने के बावजूद इसके क्रियान्वयन को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखती थी। अब बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्तर पर इसे व्यवस्थित ढंग से संचालित कराने के लिए कहा गया है। अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को इसके लिए निर्देश दिए हैं। जिलों में भी इसकी नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।

    इंटर्नशिप के दौरान प्रशिक्षुओं को पाठ योजना तैयार करने, कक्षा में पढ़ाने, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता का आकलन करने और कक्षा प्रबंधन जैसे कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा। इससे उन्हें यह समझने का अवसर मिलेगा कि अलग-अलग क्षमता वाले बच्चों को किस तरह पढ़ाया जाए, कक्षा में अनुशासन कैसे बनाए रखा जाए और पढ़ाई को रुचिकर कैसे बनाया जा सकता है। प्रशिक्षण संस्थानों में सीखी गई शिक्षण विधियों को विद्यालयों में आजमाने का अवसर भी मिलेगा। इससे भविष्य में शिक्षक के रूप में उनकी कार्यक्षमता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

    Monday, November 2, 2026

    स्कूटी वितरण हेतु प्रमाण पत्रों का सत्यापन दस नवंबर तक, अपर मुख्य सचिव ने सभी डीएम और कमिश्नर को दिए निर्देश

    स्कूटी वितरण हेतु प्रमाण पत्रों का सत्यापन दस नवंबर तक, अपर मुख्य सचिव ने सभी डीएम और कमिश्नर को दिए निर्देश

    02 नवंबर 2026
    प्रयागराज। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना' के लिए जिलों को आवंटित लाभार्थी छात्राओं का निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, दिव्यांग छात्राओं का दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, शहीद परिवार की आश्रित छात्राओं के प्रमाण पत्रों तथा निराश्रित परिवार की छात्राओं के लिए माता-पिता के मृत्यु प्रमाण-पत्र का सत्यापन संबंधित जिलाधिकारियों के स्तर से दस नवंबर तक होना है। अपर मुख्य सचिव (उच्च शिक्षा) अमित कुमार घोष ने इस संबंध में सभी डीएम और कमिश्नर को निर्देश दिए हैं।

    योजना के क्रियान्वयन के लिए एनआईसी की ओर से पोर्टल तैयार किया गया है तथा प्रदेश के सभी राज्य/निजी विश्वविद्यालयों ने लाभान्वित छात्राओं का डाटा पोर्टल पर दर्ज कर आधार से सत्यापित भी कर लिया है। अब जिले के मुख्य विकास अधिकारी/अपर जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए स्कूटी वितरण कार्यक्रम के प्रभावी अनुश्रवण के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा।

    पोर्टल के डीएम लॉगिन पर लाभार्थी छात्राओं का निवास प्रमाण पत्र व आय प्रमाण पत्र ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल से सत्यापित किया जाएगा। स्कूटी आवंटन के संबंध में सभी कार्यवाही उसी जिले के जिलाधिकारी करेंगे, जिस जिले के महाविद्यालय अथवा विश्वविद्यालय परिसर से छात्रा ने अध्ययन के बाद स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की है। छात्राओं के सत्यापन के बाद सत्यापित डेटा डीएम के माध्यम से वेन्डर को उपलब्ध कराया जाएगा।



    छात्राओं को नवंबर से दो चरणों में मिलेगी स्कूटी, 25-25 हजार करके दो बार में होगा वितरण 

    13 अक्टूबर 2026
    लखनऊ। प्रदेश सरकार के घोषणापत्र में किए गए वादे के क्रम में प्रदेश में अगले महीने यानी नवंबर में स्नातक की छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। पहले इसका वितरण दिसंबर में करने की तैयारी थी किंतु हाल ही में सीएम द्वारा नवंबर में वितरण की घोषणा के बाद विभाग तैयारी में लग गया है। विभाग की यह कवायद है कि 25-25 हजार करके दो बार में स्कूटी का वितरण कराया जाए।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी बांटने के लिए औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं। 40 हजार तक स्कूटी खरीदने का विभाग ने टेंडर भी कर दिया है। फिलहाल एक साथ इतनी बड़ी संख्या में स्कूटी की उपलब्धता कराने में कंपनी को कठिनाई न हो इसके लिए इसे दो चरणों में बांटा जाएगा। पहले चरण में 20 हजार से 25 हजार तक मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी की जा रही है।

    बाकी मेधावी छात्राओं को अगले चरण में स्कूटी दी जाएगी। विभाग की ओर से नवंबर से स्कूटी वितरण की शुरुआत कर दी जाएगी। कंपनी जैसे-जैसे डिलिवरी देगी उसके वितरण का काम भी तेजी से किया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि स्कूटी वितरण से विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में छात्राओं का नामांकन बढ़ाया जाए। साथ ही उन्हें उच्च शिक्षा के प्रति आकर्षित भी किया जाएगा। योजना के तहत मेधावी छात्राओं का विश्वविद्यालय व कॉलेजों से लेकर सत्यापन कराया गया है। विभाग ने इसके लिए 320 करोड़ का बजट भी जारी कर दिया है। 



    मेधावी बालिकाओं को जल्द मिलेगी स्कूटी, 320 करोड़ रुपये की लागत से 40 हजार स्कूटर खरीदने के लिए जेम पोर्टल पर बिड जारी

     22 सितंबर 2026
    लखनऊ : रानी लक्ष्मीबाई स्कूटर योजना के तहत 40 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटर देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने 320 करोड़ रुपये की लागत से 40 हजार स्कूटर खरीदने के लिए जेम पोर्टल पर बिड जारी कर दी है। कंपनियां 26 सितंबर तक आवेदन कर सकेंगी। निविदा 27 सितंबर को खोली जाएगी।

    योजना में वर्ष 2025-26 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाली उच्च शिक्षण संस्थानों की शीर्ष पांच प्रतिशत छात्राओं को मेरिट के आधार पर स्कूटर देने का प्रविधान है। दिव्यांग छात्राओं, बलिदानी सैनिकों के परिवार की बेटियों और निराश्रित बालिकाओं को निर्धारित मेरिट में 10 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। छात्राओं को स्कूटर के साथ पंजीकरण, बीमा और हेलमेट भी दिया जाएगा। शुरुआती ईंधन देने की व्यवस्था की गई है। 

    लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्टूबर-नवंबर में 50 हजार छात्राओं को स्कूटर देने की घोषणा की थी। इसके बाद विभाग ने पहले चरण में 40 हजार स्कूटर की खरीद की प्रक्रिया शुरू की है। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटर योजना भाजपा के संकल्प पत्र में किए गए वादों में शामिल है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा में छात्राओं को प्रोत्साहित करना है।

     इसी बीच सोमवार को हुए प्रशासनिक फेरबदल में उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का दायित्व अमित कुमार घोष को दिया गया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी एमपी अग्रवाल के पास थी। ऐसे में विभाग के नेतृत्व में बदलाव के बीच इस महत्वाकांक्षी योजना की खरीद प्रक्रिया का आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है।



    40 हजार छात्राओं को स्कूटी के लिए निविदा जारी

    उच्च शिक्षा निदेशालय 21 सितंबर को करेगा ऑनलाइन प्री बिड बैठक, राज्य विवि स्नातक की टॉप पांच फीसदी छात्राओं से ले रहे दस्तावेज

    16 सितंबर 2026
    लखनऊ। विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की स्नातक छात्राओं को स्कूटी देने की योजना पर उच्च शिक्षा विभाग ने काम तेज कर दिया है। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत 40 हजार स्कूटी खरीदने के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने टेंडर जारी किया है। इनकी अनुमानित लागत 320 करोड़ रुपये है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र छात्राओं को स्कूटी वितरित की जाएगी। इसके लिए 21 सितंबर कोbऑनलाइन प्री-बिड बैठक होगी।

    योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण उत्तर प्रदेश की मूल निवासी छात्राओं को लाभ मिलेगा। इसके लिए छात्राओं ने राज्य विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय अथवा राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त या स्ववित्तपोषित महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की हो। परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये तक होना अनिवार्य है।

    विवि अपने और संबद्ध महाविद्यालयों का डाटा जुटाकर स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं में मेरिट के आधार पर टॉप पांच प्रतिशत की सूची तैयार कर रहे हैं। चयनित छात्राओं से आधार, निवास व आय प्रमाणपत्र लेकर पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं। इसके बाद उच्च शिक्षा निदेशालय जिला प्रशासन के सहयोग से दस्तावेजों का सत्यापन कराएगा। लखनऊ विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों से करीब दो हजार छात्राओं का डाटा अपलोड किया जा चुका है।


    आवश्यकता के अनुसार बढ़ सकती है संख्या 

    पूर्व में विभाग ने 400 करोड़ रुपये के बजट से करीब 50 हजार छात्राओं को स्कूटी देने की घोषणा की थी। फिलहाल 40 हजार स्कूटी खरीदने के लिए टेंडर हुआ है। उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एमपी अग्रवाल ने बताया कि टेंडर में आवश्यकता के अनुसार संख्या घटाने-बढ़ाने का प्रावधान है। विश्वविद्यालयों से प्राप्त डाटा और सत्यापन के बाद पात्र छात्राओं की वास्तविक संख्या स्पष्ट होगी।



    छात्राओं को जनवरी तक मिलेगी स्कूटी, 40 हजार स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जेम पोर्टल पर बिड की जारी

    13 सितंबर 2026
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत 40 हजार मेधावी छात्राओं को जनवरी तक स्कूटी देने की तैयारी है। 40 हजार स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जेम पोर्टल पर बिड जारी की है। चयनित कंपनी को सिर्फ 100 दिनों में स्कूटी आपूर्ति करनी होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने सितंबर अंत तक खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी की है। उसके बाद 100 दिन सप्लाई में लगेगा। इस लिहाज से जनवरी तक छात्राओं को स्कूटी मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि स्कूटी की डिलीवरी प्रदेश के सभी 75 जिला/मंडल मुख्यालयों पर की जाएगी।

    प्रत्येक स्थान पर कितनी स्कूटी भेजी जाएंगी, इसकी जानकारी खरीद आदेश के समय देंगे। इस बीच छात्राओं की चयन सूची भी तैयार हो जाएगी। हालांकि अधिकारियों ने स्कूटी की संख्या 25 प्रतिशत तक बढ़ाने या घटाने का प्रावधान रखा है ताकि यदि लाभार्थियों की संख्या बढ़ती है तो अतिरिक्त वाहनों की सप्लाई में किसी तरह की कोई परेशानी न होने पाए। यही नहीं यह संख्या आवश्यकता पड़ने पर 25 फीसदी से भी अधिक बढ़ या घट सकती है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. मोनिका सिंह के अनुसार स्कूटी खरीद के लिए विक्रेताओं से 21 सितंबर को 12 बजे से ऑनलाइन बैठक होगी।

    स्कूटी के साथ कई एसेसरीज भी अनिवार्य

    हर स्कूटी के साथ एक आईएस 4151:2015 मानक का हेलमेट और चार लीटर पेट्रोल भी दिया जाएगा। स्कूटी के साथ कई एसेसरीज जैसे गार्ड किट, ग्रिप कवर, किक रबर, सीट कवर आदि भी अनिवार्य है। स्कूटी बीएस सिक्स, ऑटोमैटिक और ट्यूबलेस टायर वाला होगा।



    मेधावी के साथ निराश्रित-दिव्यांग छात्राओं को भी मिलेगी स्कूटी,  उच्च शिक्षा विभाग ने सभी राज्य व निजी विवि से मांगी जानकारी

    12 अगस्त 2026
    लखनऊ। प्रदेश में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को जल्द लागू करने की कवायद तेज हो गई है। योजना के तहत वर्ष 2025-26 में अंतिम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं के साथ निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं को भी स्कूटी दी जाएगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सभी राज्य व निजी विश्वविद्यालयों से पात्र छात्राओं का ब्योरा मांगा है।

    योजना के तहत ऐसी छात्राओं को भी लाभ दिया जाएगा, जिनके माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु हो गई हो और परिवार में भरण-पोषण करने वाला कोई अन्य सदस्य न हो। वहीं, मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी, स्ट्रोक, सेरेब्रल पाल्सी, हीमोफिलिया आदि से ग्रस्त दिव्यांग छात्राओं को भी योजना में शामिल किया जाएगा। इसके लिए उनकी दृष्टि व मानसिक स्थिति ठीक होना जरूरी है। साथ ही कमर के ऊपर का हिस्सा स्वस्थ होने के कारण वे मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल चलाने में सक्षम हों और मुख्य चिकित्साधिकारी ने उनकी दिव्यांगता 80 फीसदी या उससे अधिक प्रमाणित की हो। ऐसी छात्राओं को दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की नियमावली के अनुसार स्कूटी दी जाएगी।

    उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव सर्वेश कुमार सिंह ने सभी राज्य व निजी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक और उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा है। इसमें वर्ष 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं की संख्या समेत अन्य जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    50 हजार छात्राओं को देंगे स्कूटी: रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए सरकार ने 400 करोड़ का बजट आवंटित किया है। इससे 50 हजार से अधिक छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी की खरीद जिला स्तर पर होगी।



    कम विद्यार्थियों वाले पाठ्यक्रमों में राहत, टॉप पांच प्रतिशत मेधावियों का होगा चयन पाठ्यक्रम में विद्यार्थी कम हुए तो भी एक मेधावी छात्रा को मिलेगी स्कूटी

    400 करोड़ रुपये का बजट उच्च शिक्षा विभाग के पास है, 50 हजार छात्राओं को पहले चरण में ही मिल सकती है स्कूटी

    कुछ पाठ्यक्रमों में टॉप फाइव प्रतिशत निकालने में आ रही है समस्या

    11 अगस्त 2026
    लखनऊ। यूपी में विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में ऐसे पाठ्यक्रम जिसमें बहुत कम विद्यार्थी हैं, उसमें भी न्यूनतम एक मेधावी छात्रा को स्कूटी दी जाएगी। विभिन्न पाठ्यक्रमों में टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी मिलेगी। कुछ पाठ्यक्रमों में टॉप पांच प्रतिशत निकालने पर एक से कम संख्या आ रही है। ऐसे में कम से कम एक छात्रा को स्कूटी मिलेगी।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों से मेधावी छात्राओं के संबंध में जानकारी मांगी गई है। शैक्षिक सत्र 2025-26 में 80 प्रतिशत से अधिक अंक पाकर स्नातक पास करने वाली मेधावी छात्राओं के परीक्षा परिणाम सहित जानकारी, शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक द्वितीय वर्ष पास करने वाली वह छात्राएं, जिनके 80 प्रतिशत से अधिक अंक हैं या आठ से अधिक सीजीपीए (क्यूमेलेटिव ग्रेड प्वाइंट  ऐवरेज) है। 

    वहीं 2025-26 में स्नातक द्वितीय वर्ष 85 प्रतिशत अंक या फिर 8.5 सीजीपीए व इससे अधिक पाने वाली मेधावी छात्राओं और इससे भी अधिक अंक प्रतिशत पाने वाली मेधावी छात्राओं के बारे में जानकारी मांगी गई है। पोर्टल पर रिजल्ट को अपलोड कर उसकी टेस्टिंग का काम भी शुरू हो गया है और सभी संस्थानों से डाटा लेकर उसका सत्यापन भी किया जाएगा। 

    बैचलर आफ वोकेशनल व फाइन आर्ट्स सहित कई कोर्स ऐसे हैं, जिसमें टॉप पांच मेधावी छात्राओं की संख्या एक से कम आ रही है। ऐसे में अब कम से कम एक मेधावी छात्रा को स्कूटी मिलेगी। ऐसे कोर्स जिसमें 80 प्रतिशत तक अंक पाने वाली टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं की संख्या एक से कम आ रही है तो भी उसमें किसी न किसी एक सर्वाधिक अंक पाने वाली छात्रा को स्कूटी देने की तैयारी है।


    विश्वविद्यालय-कॉलेजों से मंगवाए जा रहे आंकड़े

    फिलहाल उच्च शिक्षा विभाग विश्वविद्यालय व कॉलेजों से आंकड़े मंगवाने के साथ-साथ कम छात्र संख्या वाले कोर्स व मानक के अनुसार अंक प्रतिशत न होने पर उस कोर्स की मेधावी छात्रा को राहत देने पर मंथन कर रहा है। जिससे उन्हें भी मुफ्त स्कूटी मिल सके। फिलहाल मेधावी छात्राओं को जल्द इसका तोहफा देने की तैयारी है।

    स्कूटी के लिए जरूरत पर बजट बढ़ाया जाएगा

    विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं को स्कूटी मिलेगी। न्यूनतम 80 प्रतिशत तक अंक पाने वाली छात्राओं को इसमें शामिल किया गया है। करीब 400 करोड़ रुपये का बजट उच्च शिक्षा विभाग के पास है। ऐसे में पहले चरण में ही 50 हजार छात्राओं को स्कूटी मिल सकती है। आगे और मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने के लिए जरूरत के अनुसार बजट बढ़ाया जाएगा।




    स्नातक पास 50 हजार बेटियों को स्कूटी, टॉप पांच फीसदी मेधावी छात्राओं को मिलेगा इनाम, यूपी कैबिनेट की मंजूरी

    22 जुलाई 2026
    लखनऊ। उच्च शिक्षा के प्रति छात्राओं का रुझान बढ़ाने और उनकी पढ़ाई की राह आसान करने के लिए प्रदेश सरकार स्नातक पास 50 हजार छात्राओं को स्कूटी देगी। योजना का लाभ सत्र 2025-26 में स्नातक पास करने वाली टॉप 5 प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मेरिट के आधार पर मिलेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग की रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना की नियमावली को हरी झंडी दी गई। इस पर इस वित्तीय वर्ष में 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    योजना का लाभ उन्हीं छात्राओं को मिलेगा जिनके परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से कम हो। उत्तर प्रदेश की मूल निवासी हो और राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों तथा राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त व स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी मिलेगी। स्कूटी के साथ ही पंजीकरण शुल्क, व्यापक वाहन बीमा, हेलमेट, 5 लीटर पेट्रोल तथा सभी आवश्यक एक्सेसरीज भी मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य छात्राओं की ड्रॉपआउट दर कम करना, उच्च शिक्षा में उपस्थिति बढ़ाना, उच्च शिक्षण संस्थानों तक उनका आवागमन सुविधाजनक करना और सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि करना है। स्कूटी मिलने से विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंचने में आसानी होगी। स्कूटी की खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल से की जाएगी।

    शहीद परिवार दिव्यांग, निराश्रितों को मेरिट में छूट
    योजना में दिव्यांग, निराश्रित (जिनके माता-पिता नहीं हैं) और शहीद परिवार की बेटियों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। उन्हें मेरिट में छूट दी जाएगी। उनके लिए केवल स्नातक उत्तीर्ण होना ही अनिवार्य होगा।

    राज्यपाल की नाराजगी के बाद संशोधित हुए नियम
    उच्च शिक्षा विभाग ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नाराजगी के बाद नियमों में संशोधन किया है। राज्यपाल ने अलीगढ़ में दीक्षांत समारोह के दौरान उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्कूटी देने के लिए 90 से 80 फीसदी अंक पाने की शर्त पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि शहरी क्षेत्र में तो छात्राएं इतने अंक पा सकेंगी लेकिन क्या ग्रामीण क्षेत्र की छात्राएं इसमें शामिल हो पाएंगी। विभाग को अपने नियम की समीक्षा करनी चाहिए। इसके बाद विभाग ने नियमों में संशोधन करते हुए स्नातक की टॉप पांच फीसदी छात्राओं को स्कूटी देने का निर्णय लिया है।

    ऐसे मिलेगा लाभ... विश्वविद्यालय तैयार करेंगे सूची, पोर्टल पर होगी अपलोड
    लखनऊ। रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के लिए उच्च शिक्षा विभाग जल्द पोर्टल तैयार करेगा। राज्य विश्वविद्यालयों व उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में पंजीकृत छात्राओं की पात्रता सूची विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की जाएगी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर से सूची प्रमाणित व सत्यापित की जाएगी। इस सूची को विश्वविद्यालयों द्वारा संबंधित डीएम, निदेशक उच्च शिक्षा को विभाग की ओर से तैयार पोर्टल पर भेजी जाएगी। पोर्टल पर जिलावार सूची दिखाई जाएगी। इसका सत्यापन डीएम द्वारा कराया जाएगा। सत्यापन के बाद पोर्टल पर ही चयनित वेंडर के माध्यम से छात्राओं को स्कूटी का आवंटन भी डीएम द्वारा कराया जाएगा। हर जिले में समारोह आयोजित कर मेधावी छात्राओं को स्कूटी वितरित की जाएगी। हर जिले में एक सर्विस सेंटर भी बनाया जाएगा और एक शिकायत निवारण पोर्टल भी होगा।



    राज्यपाल की नाराजगी के बाद मेधावी व जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी मिले, इसके लिए स्कूटी योजना के लिए प्रस्ताव में होगा संशोधन

    17 जुलाई 2026
    लखनऊ। प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में मेधावी व जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी मिले, इसके लिए कुछ संशोधन किए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 80 से 90 प्रतिशत अंक पाने वाली छात्राओं को स्कूटी देने का जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, अब उसमें संशोधन किया जा रहा है। परिवार की वार्षिक आय की सीमा को भी कम किया जाएगा।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, उस पर बीते दिनों अलीगढ़ में एक दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि गांव व कस्बों की जरूरतमंद छात्राओं को स्कूटी मिले इस तरह नियम तैयार किए जाएं। ऐसे में 80 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक और गरीब परिवार की छात्राओं को स्कूटी मिले, इसके हिसाब से नियम तैयार किए जा रहे हैं। 



    मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की नियमावली तैयार, 85% से अधिक अंक पाने वाली छात्राओं को मिलेगा लाभ

    6 जुलाई 2026
    लखनऊ। राज्य विवि व महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा की पढ़ाई कर रही मेधावी छात्राओं को रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी वितरण की तैयारी तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इसकी नियमावली तैयार कर ली गई है। जल्द ही इसको कैबिनेट से मंजूरी दिलाई जाएगी। 

    विभाग स्नातक अंतिम वर्ष की मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी में है। 85% से अधिक अंक पाने वाली छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। विभाग एनआईसी के सहयोग से इसके लिए सॉफ्टवेयर भी तैयार करा रहा है। जिसकी मदद से विवि व कॉलेजों के रिजल्ट के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी। 10 से 12 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवार की मेधावी छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। 

    बता दें, इसके लिए सरकार ने 400 करोड़ रुपये का प्रावधान पहले ही कर चुकी है। इससे लगभग 50 हजार मेधावी छात्राओं को पहले चरण में स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी वितरण से जुड़ी तैयारियां आखिरी चरण में है। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद इसकी बाकी औपचारिकता पूरी की जाएगी। 



    परिवार की आय 12 लाख रुपये से कम होने पर ही मिलेगी स्कूटी, रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को लेकर उच्च शिक्षा विभाग की तैयारी तेज

    उच्च शिक्षा मंत्री बोले- छात्राओं को दी जाएगी पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी

    16 जून 2026
    लखनऊ। प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ने वाली लगभग 50 हजार छात्राओं को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी देने की कवायद तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है कि जिन छात्राओं के परिवार की सालाना आय 10 से 12 लाख रुपये से कम होगी, उनको स्कूटी दी जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने स्कूटी देने की कवायद तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों से 80, 85 व 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली पहले वर्ष की छात्राओं का डाटा लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि स्कूटी वितरण के लिए नियमावली तैयार हो रही है।

    स्नातक प्रथम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक नंबर लाने वाली छात्राओं को इसमें शामिल किया जाएगा। इसमें सालाना आय सीमा का भी प्रावधान किया जा रहा है। इसके लिए सालाना 10 से 12 लाख रुपये की आय सीमा तय की जा रही है। उन्होंने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी दी जाएगी।



    उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत यूपी की 70 हजार छात्राओं को मिलेगी इलेक्ट्रिक स्कूटी

    15 मई 2026
    प्रयागराज। उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत छात्राओं को स्कूटी देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को विधानसभा चुनाव से पहले धरातल की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से घोषित रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए पात्र छात्राओं की सूची बनाई जा रही है।


    खास बात यह है कि छात्राओं को ईंधन पर खर्च खत्म करने और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी वितरित की जाएगी। एक स्कूटी लगभग 55 हजार रुपये की पड़ रही है।

    इस लिहाज से 400 करोड़ में 72,727 स्कूटी पड़ रही है। कुछ बजट आयोजन वगैरह पर भी पड़ेगा। इसलिए 70 हजार से अधिक छात्राओं को वाहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि अभी लाभार्थियों की संख्या का निर्धारण नहीं हो सका है। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुति भी दे दी है। माना जा रहा है कि छह महीने के अंदर स्कूटी का वितरण हो जाएगा।

     मुख्यमंत्री ने भी महिला दिवस (आठ मार्च) को जल्द स्कूटी वितरित करने की बात कही थी। सरकार ने 20 फरवरी 2025 को इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया के साथ ही स्कूटी की विशिष्टताएं निर्धारित करने के लिए 11 मार्च 2025 को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गई थी। 

    हालांकि पिछले साल कोई ठोस पहल नहीं हो सकी थी। शिक्षा निदेशालय के अफसरों ने विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थाओं से पिछले साल स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष पास करने वाली छात्राओं की सूची मांगी है। स्कूटी वितरण में सभी वर्ग का भी ध्यान रखा जाएगा। जिस प्रकार नौकरी में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिलता है उसी प्रकार स्कूटी वितरण में भी सभी वर्ग की छात्राओं को लाभ दिया जाएगा।

    योजना से ग्रामीण इलाके की छात्राओं को लाभ
     इस महत्वाकांक्षी योजना का सर्वाधिक लाभ ग्रामीण इलाके की छात्राओं को होगा। अमूमन छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर कॉलेज जाना पड़ता है, विशेषकर ग्रामीण इलाके की छात्राओं को रोजाना कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्कूटी की सहायता से छात्राओं को घर से कॉलेज आने-जाने में आसानी होगी और समय भी बचेगा, जिससे वह अन्य कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी।

    फरवरी में फिर यूपीटीईटी कराएगा शिक्षा सेवा चयन आयोग, आगामी वर्षों में हर साल जुलाई और जनवरी में दो बार टीईटी कराने का निर्णय

    फरवरी में फिर यूपीटीईटी कराएगा शिक्षा सेवा चयन आयोग, आगामी वर्षों में हर साल जुलाई और जनवरी में दो बार टीईटी कराने का निर्णय


    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग फरवरी 2027 के अंत में फिर से उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) कराने की तैयारी में है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वसीम अहमद की अपील पर सुनवाई करते हुए टीईटी का प्रस्तावित कार्यक्रम मांगा था। इस पर चयन आयोग ने प्रस्तावित कार्यक्रम की रूपरेखा तय कर ली है जिसे हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।


    फिलहाल तो चयन आयोग तीन नवंबर को छह मंडल मुख्यालयों आगरा, गोरखपुर, लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज व वाराणसी के 131 केंद्रों पर विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) कराने जा रहा है। इसमें 1.06 लाख सेवारत शिक्षक व स्पेशल एजुकेर्ट्स पंजीकृत हैं। इसके बाद चार महीने के अंदर दूसरी टीईटी कराई जाएगी जिसमें सभी अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे।

    यही नहीं चयन आयोग ने आगामी वर्षों में हर साल जुलाई और जनवरी में दो बार टीईटी कराने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की गाइडलाइन के अनुसार साल में दो बार टीईटी कराई जानी चाहिए लेकिन यूपी में 2011 से लेकर अब तक किसी भी साल दो बार टीईटी नहीं हो सकी है। इस साल दो से चार जुलाई तक टीईटी कराई जा चुकी है और तीन नवंबर को विशेष टीईटी हो रही है। हालांकि स्पेशल टीईटी में केवल सेवारत शिक्षकों एवं स्पेशल एजुकेटर्स को शामिल किया गया है और सामान्य अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिला है।

    Sunday, November 1, 2026

    वर्ष 2027 की बोर्ड परीक्षा के लिये समस्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कार्मिकों का डेटा पोर्टल पर अपलोड/अपडेट कराये जाने के सम्बन्ध में

    शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के बनेंगे पहचान पत्र, यूपी बोर्ड ने जारी किए निर्देश, 15 नवंबर तक डेटा अपलोड करना अनिवार्य

    यूपी बोर्ड ने बोर्ड परीक्षा के दृष्टिगत माध्यमिक शिक्षकों का पोर्टल पर मांगा मांगा डाटा

    प्रयागराज। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कार्मिकों का डाटा यूपी बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया वर्ष-2027 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में परीक्षकों की ड्यूटी के लिए कंप्यूटरीकृत पहचानपत्र बनाने के लिए शुरू की गई है। 

    सभी प्रधानाचार्यों को 15 नवंबर तक विवरण upmsp.edu.in पर अपलोड करना होगा। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा पांच फरवरी से शुरू हो रही है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह की ओर से प्रधानाचार्यों को विवरणों की गहनता से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

    किसी भी शिक्षक की गलत विषय में परीक्षक के रूप में नियुक्ति न हो, इसका ध्यान रखते हुए डाटा अपलोड करने को कहा गया है। यदि प्रधानाचार्यों की ओर से पोर्टल पर अपलोड की गई जानकारी गलत पाई जाती है, इसके लिए वे जिम्मेदार होंगे। 


    वर्ष 2027 की बोर्ड परीक्षा के लिये समस्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कार्मिकों का डेटा पोर्टल पर अपलोड/अपडेट कराये जाने के सम्बन्ध में



    Saturday, October 31, 2026

    वर्षों तक संविदा पर कम मानदेय में काम कराना जबरन श्रम के समान- हाईकोर्ट, सभी कस्तूरबा शिक्षकों को मिलेगा 17 हजार मासिक मानदेय का लाभ

    कस्तूरबा शिक्षकों को मिलेगा 17 हजार रुपये मासिक मानदेय, चार माह में नियमितीकरण पर करे विचार

    हाई कोर्ट ने चार माह में पद सृजित कर नियमित शिक्षकों के समान सेवा शर्ते लागू करने का दिया निर्देश

    वर्षों तक संविदा पर कम मानदेय में काम कराना जबरन श्रम के समान- हाईकोर्ट, सभी कस्तूरबा शिक्षकों को मिलेगा 17 हजार मासिक मानदेय का लाभ

    31 अक्टूबर 2026

    लखनऊ : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में कार्यरत शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने प्रदेश सरकार को चार माह के भीतर शिक्षकों के पद स्वीकृत अथवा सृजित करने और उनकी सेवा शर्तें नियमित शिक्षकों के समान बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने नियमितीकरण के दावों पर भी शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता और सेवा अवधि के आधार पर कानून के अनुसार विचार करने को कहा है। अर्चना बूध व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया कि जब तक सरकार आवश्यक कदम नहीं उठा लेती, तब तक सभी केजीबीवी शिक्षकों को निर्णय की तारीख से 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। उन्हें निश्शुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 24(2) के तहत सेवा संबंधी संरक्षण भी मिलेगा।

    न्यायमूर्ति ने कहा कि शिक्षकों को वर्षों तक संविदा पर रखकर, पद सृजित किए बिना और नियमित शिक्षकों के समान वेतनमान दिए बिना काम कराना संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत निषिद्ध जबरन श्रम के समान है। शिक्षकों को दिया जा रहा मानदेय अर्द्धकुशल श्रमिकों के निर्धारित पारिश्रमिक से भी कम है। अदालत ने इसे मानदेय कहना क्रूर मजाक करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की सेवा शर्तें इंटरमीडिएट स्तर तक के नियमित शिक्षकों के समान होनी चाहिए। यह व्यवस्था केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सभी केजीबीवी शिक्षकों पर लागू होगी। मानदेय और वेतन में समय-समय पर संशोधन कर उन्हें सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन एवं परिलब्धियों के अनुरूप लाने का भी निर्देश दिया गया है।

    अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार को सहमति के अनुसार खर्च में अपना हिस्सा देना होगा। हालांकि, केंद्र से धनराशि स्वीकृत नहीं होने का बहाना बनाकर राज्य सरकार आदेश के पालन से इन्कार नहीं कर सकती। राज्य सरकार पहले भुगतान कर बाद में केंद्र से उसका हिस्सा वसूल सकती है।

    न्यायालय ने कहा कि वंचित वर्गों की बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाली योजना में शिक्षकों को लंबे समय तक अपर्याप्त वेतन और असुरक्षित सेवा में रखना संवैधानिक प्रविधानों के अनुरूप नहीं है।


    कस्तूरबा  गांधी स्कूलों के संविदा शिक्षकों को मिलेगा  17000₹ मानदेय, हाईकोर्ट ने दिए जा रहे मानदेय को अर्धकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित पारिश्रमिक से भी कम बताया

    30 अक्टूबर 2026

    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) के संविदा शिक्षकों को 17000 रुपये मासिक मानदेय देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने चार महीने में शिक्षकों के नियमितिकरण पर विचार करने का आदेश भी दिया है। अदालत ने कहा कि वर्षों तक संविदा पर रखकर उचित वेतन और सेवा सुरक्षा से वंचित रखना जबरन श्रम कराने के समान है। शिक्षकों को दिया जा रहा मानदेय अर्धकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित पारिश्रमिक से भी कम है।


     न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने अर्चना बोध व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। यह व्यवस्था केवल याचियों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि प्रदेश के सभी केजीबीवी शिक्षकों पर लागू होगी।

    वित्तविहीन स्कूल संस्कृत बोर्ड परीक्षा में नहीं बनेंगे परीक्षा केंद्र, 100 से कम और 500 से अधिक परीक्षार्थी नहीं होंगे आवंटित

    वित्तविहीन स्कूल संस्कृत बोर्ड परीक्षा में नहीं बनेंगे परीक्षा केंद्र, 100 से कम और 500 से अधिक परीक्षार्थी नहीं होंगे आवंटित 

     लखनऊ : उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की वर्ष 2027 की परीक्षाओं में वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्र नहीं बनाया जाएगा। किसी भी केंद्र पर 100 से कम और 500 से अधिक परीक्षार्थी आवंटित नहीं किए जाएंगे। परीक्षा की शुचिता और नकल पर अंकुश लगाने के लिए परिषद ने केंद्र निर्धारण की नई नीति जारी की है। इसके तहत सरकारी और सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के साथ राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी।


    शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) एवं परिषद के अध्यक्ष प्रताप सिंह बघेल ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को केंद्र निर्धारण के निर्देश जारी किए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक या उनके अधीन राजपत्रित अधिकारियों की टीम विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं और संसाधनों का सत्यापन करेगी। सीसी कैमरे, वायस रिकार्डर, डीवीआर, राउटर, मानीटर और हाईस्पीड इंटरनेट का चालू होना अनिवार्य है। 

    माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए पहले से केंद्र बनाए गए विद्यालयों को संस्कृत बोर्ड की परीक्षा का केंद्र नहीं बनाया जाएगा। प्रश्नपत्र लीक होने, चोरी, गोपनीयता भंग होने या उत्तर पुस्तिकाएं केंद्र के बाहर लिखे जाने के मामले सामने आने वाले विद्यालयों को भी केंद्र नहीं बनाया जाएगा। परीक्षार्थियों को यथासंभव 12 किलोमीटर के दायरे में केंद्र आवंटित किया जाएगा। एक ही प्रबंधक के विद्यालयों के विद्यार्थियों को आपस में केंद्र नहीं दिया जाएगा। निर्धारित केंद्र के अलावा कहीं और परीक्षा देने पर परिणाम निरस्त होगा और संबंधित केंद्र को तीन वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया जाएगा।

    शिक्षक राजनीति पर दलों का कब्जा, संगठनों की साख पर उठ रहे सवाल, विधान परिषद चुनाव में शून्य पर सिमटे शिक्षक संगठन

    शिक्षक राजनीति पर दलों का कब्जा, संगठनों की साख पर उठ रहे सवाल, विधान परिषद चुनाव में शून्य पर सिमटे शिक्षक संगठन

    पूर्व एमएलसी बोले, बदल देना चाहिए चुनाव का नाम

    31 अक्टूबर 2026

    लखनऊः प्रदेश में शिक्षक राजनीति का परंपरागत समीकरण बदलता दिख रहा है। शिक्षक संगठनों की जगह राजनीतिक दलों का प्रभाव बढ़ने से शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व की प्रकृति पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विधान परिषद चुनाव में शिक्षक संगठनों के प्रत्याशियों की हार  को इसी बदलाव का संकेत है। पूर्व शिक्षक विधायकों को आशंका है कि राजनीतिक दलों के समर्थन से सदन में पहुंचे प्रतिनिधियों के सामने शिक्षकों की मांगों और दलगत प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। सवाल सिर्फ चुनाव जीतने का नहीं, बल्कि शिक्षकों की स्वतंत्र आवाज और उनके मुद्दों की धार बनाए रखने का भी है।

    विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में शिक्षक संगठन शून्य पर सिमट गए। छह सीटों में से चार भाजपा और दो सपा ने जीती हैं। चुनाव का दिलचस्प पहलू यह है कि शिक्षक राजनीति में सक्रिय रहे चेहरे अब राजनीतिक दलों के साथ हैं। आगरा शिक्षक सीट पर डा. आकाश अग्रवाल ने सपा के टिकट पर और गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने भाजपा के समर्थन से जीत दर्ज की, जबकि पिछली बार दोनों निर्दलीय जीते थे।

    साफ़ है कि शिक्षक मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए राजनीतिक अपने संगठन, चुनाव प्रबंधन और संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। शिक्षक भी राजनीतिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में शिक्षक संगठनों के सामने अपनी ताकत बनाए रखने की भी चुनौती है। पुरानी पेंशन, सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वित्तविहीन शिक्षकों का मानदेय, वेतन विसंगतियां आदि मुद्दे लंबे समय से शिक्षक राजनीति के केंद्र में रहे हैं। पूर्व शिक्षक विधायकों की चिंता है कि यदि शिक्षक संगठनों का स्वतंत्र राजनीतिक दबाव कमजोर होता है तो शिक्षकों की मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की क्षमता भी प्रभावित होगी।

    पूर्व शिक्षक विधायक जगवीर किशोर जैन राजनीतिक दलों का प्रभाव बढ़ने से मुद्दों के कमजोर पड़ने की आशंका जताते हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक दल, शिक्षक राजनीति पर हावी हैं। इस चुनाव में मुकाबला सीधे भाजपा और सपा में था, शिक्षकों के मुद्दे कहीं नहीं थे। ऐसे में अब इसे शिक्षक निर्वाचन कहना ही सही नहीं, इसका नाम बदल देना चाहिए। शिक्षक संगठनों के राजनीतिकरण और वित्तविहीन शिक्षकों के अपने मुद्दों के बजाय राजनीतिक प्रभाव में मतदान से यह स्थिति बनी है। जो लोग वित्तविहीन शिक्षकों के वोट से जीत रहे हैं, वो भी उनकी आवाज नहीं उठा रहे।

    वहीं पूर्व शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी कहते हैं कि शिक्षकों के बहुत से संगठन बन गए हैं। इससे शिक्षकों की एकजुटता पहले जैसी नहीं रही। जो प्रतिनिधि राजनीतिक दलों से चुनकर जाएंगे, उनके सामने अपने दल की रीति-नीति के हिसाब से चलने की मजबूरी होगी। शिक्षक नेताओं का कहना है कि संगठनों को अपने मुद्दे और हितों की लड़ाई, आंदोलनों संघर्ष आदि से जारी रखनी होगी। इससे भी जरूरी, छोटे संगठनों में बंटने के बजाय एकजुटता के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे।


    विधान परिषद में अब शिक्षक संगठनों के एकमात्र प्रतिनिधि बचे, समस्याओं पर आवाज उठाने के लिए अब राजनीतिक दलों पर निर्भर होंगे शिक्षक


    निर्दल समूह के राज बहादुर चंदेल ही शिक्षक संघ से संबंधित

    इसके अलावा अन्य सदस्य किसी न किसी दल से जुड़े होंगे

    30 अक्टूबर 2026
    लखनऊ। प्रदेश के उच्च सदन विधान परिषद में अब शिक्षक - संगठनों के एकमात्र प्रतिनिधि ही बचे हैं। हाल में हुए एमएलसी चुनाव के बाद सदन में माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के संरक्षक राजबहादुर चंदेल ही शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि बचे हैं। कहने के लिए तो प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक खंड शिक्षक निर्वाचन की सीटें हैं, लेकिन शिक्षक संगठनों से ही वहां पर आवाज उठाने का काम अब राजनीतिक दलों पर निर्भर होगा।

    उच्च सदन में एक समय ऐसा भी था जब आधा दर्जन से अधिक प्रतिनिधि शिक्षक संगठनों के थे। दो खंड स्नातक की सीटों पर भी शिक्षक प्रतिनिधि हुआ करते थे। इसमें माध्यमिक शिक्षकों के शर्मा गुट का दबदबा होता था। राजबहादुर चंदेल 1992, 1998 व 2004 में शर्मा गुट से ही तीन बार कानपुर-उन्नाव खंड शिक्षक सीट से एमएलसी रहे हैं।

    शर्मा गुट से जब उनका टिकट काटा गया तो उन्होंने निर्दल समूह बनाते हुए 2010 में चुनाव लड़ा और जीते। वर्ष 2017 और 2023 में भी चुने गए। उनका कार्यकाल फरवरी 2029 तक है। उन्होंने माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) का नेतृत्व भी किया। वर्तमान में वे संगठन के संरक्षक हैं।

    बता दें कि वर्तमान सदन में उनके साथ ही सदस्य रहे ध्रुव कुमार त्रिपाठी व निर्दल समूह के डॉ. आकाश अग्रवाल भी शिक्षक संगठनों से ही जुड़े थे। दोनों इस चुनाव में सदस्य के रूप में तो सदन में वापस लौटे हैं, लेकिन वे भाजपा और सपा के बैनर से चुनकर पहुंचे हैं। ऐसे में सदन में अब राजबहादुर सिंह चंदेल ही सिर्फ शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित रहेंगे। अन्य सदस्य किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े होंगे।

    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. आरपी मिश्रा कहते हैं कि पहली बार ऐसा होगा कि हमारे संगठन का सदन में प्रतिनिधित्व नहीं होगा। प्रदेश में आठ खंड स्नातक और आठ खंड शिक्षक की सीटें इसीलिए बनाई गई थीं ताकि उनके हित की बात हो सके। पहले राजनीतिक दल इसमें शामिल नहीं होते थे, लेकिन 2020 से धीरे-धीरे इसमें राजनीतिक दल आना शुरू हुए। आज यह स्थिति हुई कि एकमात्र शिक्षक संगठन के प्रतिनिधि हैं। ऐसे में सदन में शिक्षकों की आवाज उठाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।

    शिक्षक-कर्मचारी प्रतिनिधि तीसरे नंबर पर
    खंड शिक्षक निर्वाचन के साथ ही प्रदेश में पांच सीटों पर खंड स्नातक सीटों पर भी चुनाव हुए। इसमें लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन में शिक्षक-कर्मचारियों के नेता व अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु भी मैदान में उतरे थे। वे चुनाव तो नहीं जीत सके, लेकिन 10832 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।



    शिक्षकों के चुनाव में शिक्षक संगठनों का ही डब्बा गोल, माध्यमिक शिक्षकों के चार संगठन मैदान में, एक भी सीट नहीं जीते

    सिर्फ गोरखपुर सीट पर लड़ाई में दिखे शिक्षकों के प्रतिनिधि

    29 अक्टूबर 2026
    लखनऊ। प्रदेश में शिक्षकों के चुनाव (एमएलसी) में ही शिक्षक संगठनों का डब्बा गोल हो गया है। प्रदेश में यूं तो शिक्षकों के नेतृत्व का दावा करने वाले कई शिक्षक संगठन अलग-अलग नामों से चल रहे हैं लेकिन खंड शिक्षक की आधा दर्जन सीटों पर हुए चुनाव में शिक्षक संगठनों का खाता भी नहीं खुल सका है। एक सीट को छोड़कर किसी भी सीट पर कोई शिक्षक संगठन प्रत्याशी नंबर दो की लड़ाई में भी नहीं रहा।

    प्रदेश में 11 सीटों पर हुए एमएलसी चुनाव में माध्यमिक शिक्षक संघ के चार बड़े गुट खंड शिक्षक की छह सीटों पर चुनाव मैदान में उतरे थे। माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के प्रदेश अध्यक्ष चेतनारायण सिंह वाराणसी खंड शिक्षक सीट से चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें महज 3,471 वोट मिले। लखनऊ सीट पर माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा को 1,940 मत ही मिले। इसी गुट के महामंत्री राजीव यादव ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर कुछ चरणों में बढ़त बनाई और अंत तक कांटे की टक्कर दी। उन्हें 14,580 वोट मिले, लेकिन जीत नहीं सके। आगरा सीट पर रणविजय सिंह मुकाबले से बाहर रहे।

    माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के प्रदेश अध्यक्ष जीतेंद्र कुमार पटेल वाराणसी सीट से लड़े और 1,088 वोटों पर सिमट गए। इस गुट ने लखनऊ और गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर भी प्रत्याशी उतारे, लेकिन कहीं प्रभाव नहीं छोड़ सका। चंदेल गुट ने भी छह सीटों पर किस्मत आजमाई, मगर सफलता नहीं मिली।


    शर्मा गुट का पांच दशक पुराना दबदबा खत्म

    शिक्षक राजनीति में इस बार सबसे बड़ा झटका शर्मा गुट को लगा। करीब पांच दशक तक सदन में प्रभाव रखने वाले इस संगठन का प्रतिनिधित्व करने वाले ध्रुव कुमार त्रिपाठी चुनाव से ठीक पहले भाजपा प्रत्याशी बन गए। गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर शर्मा गुट ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। संगठन के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा भी वाराणसी सीट से भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे, लेकिन 6,060 मत पाकर हार गए। शर्मा गुट ने मेरठ, बरेली-मुरादाबाद, आगरा और लखनऊ सीटों पर प्रत्याशी उतारे। मेरठ से डॉ. सुशील कुमार पुंडीर को 1,579 और लखनऊ से जगजीवन प्रसाद शुक्ला को 1,279 वोट मिले। अन्य दो सीटों पर भी संगठन का प्रदर्शन कमजोर रहा। इस तरह लगभग 48 साल तक एमएलसी रहे ओमप्रकाश शर्मा के नेतृत्व वाला शिक्षक संगठन सदन में शून्य हो गया।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपीटीईटी-2026 के दो विवादित प्रश्नों को मूल्यांकन से बाहर करने के लिए कहा, 148 प्रश्नों के आधार पर अंक निर्धारित कर परिणाम करें संशोधित, नए सिरे से जारी करें यूपीटीईटी का रिजल्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपीटीईटी-2026 के दो विवादित प्रश्नों को मूल्यांकन से बाहर करने के लिए कहा, 148 प्रश्नों के आधार पर अंक निर्धारित कर परिणाम करें संशोधित,  नए सिरे से जारी करें यूपीटीईटी का रिजल्ट


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी-2026) के मास्टर सेट के दो विवादित प्रश्नों (प्रश्न संख्या 36 व 37) को मूल्यांकन से बाहर करने और 148 प्रश्नों के आधार पर नए सिरे से अंक निर्धारित कर परिणाम संशोधित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने विजय सोनकर व तीन अन्य अभ्यर्थियों की याचिका का निस्तारण करते हुए दिया है।


    उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा गत तीन जुलाई को प्राथमिक स्तर की यूपीटीईटी-2026 परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद जारी अंतिम उत्तर कुंजी में आयोग ने मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 व 37 में दो-दो विकल्पों को सही मान लिया। आयोग ने मूल्यांकन के दौरान केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को अंक दिए, जिन्होंने उन दो मान्य विकल्पों में से किसी एक को चुना था। अन्य विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थियों को कोई अंक नहीं मिला। 

    गत 26 अगस्त को घोषित परिणाम में सामान्य/ओबीसी कट ऑफ (82 अंक) से मामूली अंतर (जैसे 80 से 81.39 अंक) से अनुत्तीर्ण रहने वाले अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचियों की ओर से दलील दी गई कि बहुविकल्पीय परीक्षा में किसी प्रश्न के दो उत्तर सही हैं तो वह प्रश्न त्रुटिपूर्ण माना जाना चाहिए और उसे पूरी तरह हटाया जाना चाहिए या सभी अभ्यर्थियों को समान लाभ मिलना चाहिए।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चार विकल्पों में से एक विकल्प चुनने वाली वस्तुनिष्ठ परीक्षा में यदि चयन संस्था स्वयं दो विकल्पों को सही मान लेती है तो वह प्रश्न अपनी मूल्यांकन क्षमता खो देता है। यह प्रश्न योग्य और अयोग्य अभ्यर्थी के बीच भेद करने में असमर्थ हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि चयन आयोग ने इसी प्रश्नपत्र के प्रश्न संख्या 38 को पहले ही मूल्यांकन से बाहर किया था। ऐसे में दो सही उत्तर वाले प्रश्नों के साथ अलग व्यवहार करने का कोई तार्किक आधार नहीं है। 

    कोर्ट ने माना कि केवल उन अभ्यर्थियों को अंक देना जिन्होंने बाद में मान्य किए गए दो विकल्पों में से किसी एक को चुना था, कानूनी रूप से सही नहीं है। प्रश्न को हटाने से सभी अभ्यर्थियों के साथ समान व्यव्हार सुनिश्चित होता है। कोर्ट ने कहा किमास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर किया जाए। इन दो प्रश्नों के हटने के बाद प्रश्नपत्र को 148 प्रश्नों का माना जाएगा और निर्धारित प्रतिशत के अनुसार ही अर्हता अंक की गणना की जाए।

     सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के आधार पर इस संशोधन का लाभ सभी समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों को निष्पक्ष रूप से दिया जाए। आयोग को निर्देश दिया गया है कियाचियों के अंकों की पुनः गणना करे और उनके परिणाम व स्कोरकार्ड को उसके अनुसार संशोधित करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश से प्राप्त पात्रता केवल यूपीटीईटी-2026 के संशोधित परिणाम और अहर्ता स्थिति तक सीमित रहेगी। यह स्वतः ही किसी भावी भर्ती प्रक्रिया में सीधे चयन या नियुक्ति का अधिकार नहीं देगी।