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Tuesday, August 22, 2119

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    Friday, April 3, 2026

    परिषदीय स्कूलों के बच्चे 'बांसुरी' में देखेंगे कला के विविध रंग, बेसिक शिक्षा में कक्षा तीन व चार के लिए पहली बार कला की पुस्तक

    परिषदीय स्कूलों के बच्चे 'बांसुरी' में देखेंगे कला के विविध रंग, बेसिक शिक्षा में कक्षा तीन व चार के लिए पहली बार कला की पुस्तक

    कला शिक्षण के लिए सुनिश्चित है न्यूनतम 100 घंटे का शिक्षण सत्र

    प्रयागराज । परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा तीन और चार के विद्यार्थियों को पहली बार कला की पुस्तक 'बांसुरी' पढ़ने को मिलेगी। अब तक शिक्षक बिना पुस्तक कला/संगीत पढ़ाते थे और परीक्षा लेते थे। नए सत्र से बच्चों को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (एनसीईआरटी) की पुस्तक बांसुरी पढ़ने के लिए मिलेगी। एनसीएफएसई (स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा संबंधी मार्गदर्शिका) की अनुशंसा के अनुसार कला शिक्षण के लिए न्यूनतम 100 घंटे का शिक्षण सत्र सुनिश्चित किया गया है। इसमें कला के चारों घटक दृश्य कला, संगीत, नृत्य और अंग संचालन संबंधी जानकारी है।


    कक्षा तीन की पुस्तक में 20 पाठ हैं। प्रत्येक अध्याय में क्यूआर कोड है, उसे स्कैन करके अतिरिक्त विषय सामग्री तक पहुंच सकते हैं। वर्तमान सत्र में बच्चों को कलात्मकता से परिचित कराने के लिए विशेषज्ञ भी आमंत्रित किए जाएंगे। शिक्षण के दौरान बच्चों से कलाकृतियां बनवाई जाएंगी। उनका प्रदर्शन स्कूल परिसर या अन्य स्थानों पर किया जाएगा।

    राज्य शिक्षा संस्थान उत्तर प्रदेश के प्राचार्य राजेंद्र प्रताप ने बताया कि बांसुरी में सुझाई गई गतिविधियों को कराने से अभिव्यक्ति कौशल, सामुदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय विरासत के संरक्षण के लिए सचेत रहने की चेतना जागृत होगी। इससे छात्र छात्राओं में व्यक्तिगत स्तर तथा समूह में कार्य करने, आलोचनात्मक दृष्टिकोण का विकास, पढ़ने के साथ लिखने का अभ्यास में मदद मिलेगी।


    दृश्यकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच से होगा जुड़ाव

    पुस्तक के दृश्य कला भाग में रेखांकन, चित्रकला, काटना, चिपकाना जैसी गतिविधि शामिल है। मिट्टी, रंग, प्रकृति की समझ बच्चों में आएगी। संगीत की ओर छात्रों का ध्यान खींचते हुए विभिन्न भाषाओं के गीत, वाद्ययंत्रों व थिरकने, धुनों और गीतों पर शारीरिक गतिविधां कराने के साथ नाटक पाठ्यक्रम का हिस्सा है। विदूषक बच्चों को अभिनय, मंच, सहायक सामग्री आदि से परिचित कराएंगे। राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डा. रीना मिश्रा कहती है कि यह पुस्तक सुगम और रोचक है। पुस्तक बताती है कि मिट्टी के घड़े का प्रयोग वाद्ययंत्र की तरह होता है, इसे घटम कहते हैं। कंदील, दीपक, मुखौटा, कागजों से आभूषण बनाना सीखने के साथ संगीत में ताली, चुटकी, लयबद्ध पैरों की धाप आदि को समझाने का प्रयास है।


    20 घंटे दृश्यकला तो 20 घंटे संगीत की होगी पढ़ाई

    पुस्तक में निहित दृश्यकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच के लिए कुल 20-20 घंटे की पढ़ाई निर्धारित है। 20 घंटे अनुभवात्मक कार्य कराए जाएंगे। कला शिक्षक को सप्ताह में चार कक्षाएं और शनिवार को एक कक्षा आवंटित करने प्रविधान है। बच्चों के दक्षता स्तर को मापने के लिए चार श्रेणी ए, बी, सी, डी, ई का सुझाव है। इनका अर्थ क्रमशः उत्कृष्ट, कुशल, होनहार, विकासशील और आरंभिक है।


    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में ताकत दिखाएंगे देश भर के शिक्षक, केंद्र सरकार से राहत के लिए कानून बनाने की करेंगे मांग


    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में ताकत दिखाएंगे देश भर के शिक्षक, केंद्र सरकार से राहत के लिए कानून बनाने की करेंगे मांग

    03 अप्रैल 2026
    लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता किए जाने के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में देशभर के शिक्षक एकत्र हो रहे हैं। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के बैनर तले रामलीला मैदान में देशभर से लाखों शिक्षक एकजुट होकर अपनी ताकत का एहसास कराएंगे।

    उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी करने की अनिवार्यता अन्यायपूर्ण है। जब यूपी में 27 जुलाई 2011 को टीईटी लागू किया गया है तो उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता लागू करने से शिक्षकों में काफी आक्रोश है। प्रदेश से एक लाख से अधिक शिक्षक रामलीला मैदान दिल्ली में पहुंच रहे हैं।

    इस क्रम में गोरखपुर, कुशीनगर, उन्नाव समेत कई जिलों के शिक्षक आज बृहस्पतिवार को ही दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने निर्णय को पूर्व के प्रभाव से लागू करना, सही नहीं है। इससे देश भर के लाखों शिक्षकों की जीविका पर संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार इससे राहत देने के लिए कानून बनाए। 



    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में दिल्ली के रामलीला मैदान में चार अप्रैल को देश भर के शिक्षकों की महारैली

    11 मार्च 2026
    लखनऊ। देश भर के बेसिक शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में शिक्षकों की दिल्ली के रामलीला मैदान में चार अप्रैल को महारैली होगी। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) ने मंगलवार को दिल्ली में बैठक कर इसकी घोषणा की।


    टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। डॉ. शर्मा ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ हुई वार्ता में उन्होंने आश्वासन दिया था कि सभी शिक्षकों के सेवा में बने रहने के लिए टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए कानून बनाया जाएगा। किंतु अभी तक केंद्र सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इससे देश भर के शिक्षकों में काफी नाराजगी है।

    इसके लिए वे चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। इस क्रम में दिल्ली में महारैली की जाएगी। बैठक में राममूर्ति ठाकुर, संजय सिंह, योगेश त्यागी, शिवशंकर पांडेय, विपिन प्रकाश शर्मा, राधेरमण त्रिपाठी, देवेंद्र श्रीवास्तव, केदार जैन, मनीष मिश्रा, वेद प्रकाश मिश्रा, रविंद्र राठौर, कल्पना राजौरिया आदि उपस्थित थे।

    शिक्षक और कक्षा की उपलब्धता के आधार पर नामांकन की तैयारी में यूपी बोर्ड, प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ हुए मंथन के बाद इसे अंतिम रूप दिए जाने की संभावना

    शिक्षक और कक्षा की उपलब्धता के आधार पर नामांकन की तैयारी में यूपी बोर्ड, प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ हुए मंथन के बाद इसे अंतिम रूप दिए जाने की संभावना


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के स्कूलों में अब शिक्षकों और कक्षाओं की उपलब्धता के आधार पर ही छात्रों के नामांकन की तैयारी चल रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन हाल ही में प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ हुए मंथन के बाद इसे जल्द ही अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।


    प्रदेश में लगभग 30 हजार मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे स्कूलों की है जहां न तो पर्याप्त भवन हैं और न ही पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं, फिर भी हर साल बड़ी संख्या में छात्रों का नामांकन लिया जा रहा है। पढ़ाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

    नियम के अनुसार, एक कक्षा में अधिकतम 60 विद्यार्थियों के बैठने का प्रावधान है, लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते कई स्कूलों में 100 से 110 छात्रों को एक ही कक्षा में बैठा दिया जाता है। इससे छात्रों को समुचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है और उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।

    लंबे समय से मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। यही वजह है कि छात्र संख्या वित्तविहीन विद्यालयों की ओर बढ़ रही है, जबकि मान्यता प्राप्त स्कूलों में नामांकन घटता जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के अपर सचिव सत्येंद्र कुमार ने बताया कि शिक्षकों और कक्षाओं की उपलब्धता के अनुसार ही नामांकन और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा रही है।

    इस पर अंतिम निर्णय प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ बैठक कर आपसी सहमति से लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रति कक्षा 60 छात्रों का मानक निर्धारित है और इसी के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जल्द ही इस मुद्दे पर विस्तृत बैठक कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    शैक्षिक सत्र 2026-27 की एनसीईआरटी एवं माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा विकसित पाठ्यपुस्तकों के मूल्य एवं अधिकृत मुद्रकों / वितरकों के नाम की सूची देखें

    शैक्षिक सत्र 2026-27 की एनसीईआरटी एवं माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा विकसित पाठ्यपुस्तकों के मूल्य एवं अधिकृत मुद्रकों / वितरकों के नाम की सूची देखें


    राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत प्रवक्‍ताओं को विनियमितीकरण के पूर्व संविदा प्रवक्‍ता के रूप में की गयी अस्‍थाई सेवा की गणना करते हुए कैरियर एडवांसमेन्‍ट योजना (सी0ए0एस0) का लाभ अनुमन्‍य किये जाने के संबंध में दिशा-निर्देश

    संविदा प्रवक्ताओं को प्रमोशन में राहत लेकिन आर्थिक लाभ नहीं, व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई


     लखनऊ: राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत ऐसे प्रवक्ता जो पहले संविदा पर कार्यरत थे और बाद में नियमित हुए, उनकी पुरानी संविदा सेवा को करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत प्रमोशन में जोड़ा जाएगा। हालांकि यह लाभसिर्फ कागजी (नोशनल) होगा और इससे कोई आर्थिक लाभनहीं मिलेगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता उच्च शिक्षा निदेशक करेंगे। समिति 15 दिन में रिपोर्ट देगी।

    यह व्यवस्था उन प्रवक्ताओं पर लागू होगी, जो वर्ष 2005-06, 2006-07 और 2008-09 में संविदा पर नियुक्त हुए थे और बाद में 26 दिसंबर 2016 के शासनादेश के तहत नियमित किए गए। उनकी सेवाएं पहले ही बिना अंतराल के निरंतर मानी जा चुकी हैं। यह निर्णय यूजीसी 2010 और 2018 के नियमों के आधार पर लिया गया है। 

    इन नियमों में शर्तों के साथ संविदा या अस्थायी सेवा को प्रमोशन में जोड़ने का प्राविधान है। यह भी स्पष्ट है कि सेवा सरकारी, निजी या स्थानीय संस्थान में की गई हो, उसमें भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, इस निर्णय के तहत संविदा सेवा को केवल रिकार्ड में जोड़ा जाएगा। इससे न तो वरिष्ठता तय होगी, न पेंशन में लाभ मिलेगा और न ही कोई एरियर या अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। प्रमोशन के बाद वेतन केवल वास्तविक प्रमोशन की तारीख से ही लागू होगा। 

    यह निर्णय डा. रजत गंगवार समेत कई सहायक आचार्यों द्वारा पांच जुलाई 2025 को किए गए अनुरोध के बाद लिया गया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व अध्यक्ष डा. दीनानाथ सिंह और पूर्व संयुक्त महामंत्री डा. जगदीश सिंह दीक्षित ने कहा कि यह मांग लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों को भी यही लाभ दिया जाए।



     राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत प्रवक्‍ताओं को विनियमितीकरण के पूर्व संविदा प्रवक्‍ता के रूप में की गयी अस्‍थाई सेवा की गणना करते हुए कैरियर एडवांसमेन्‍ट योजना (सी0ए0एस0) का लाभ अनुमन्‍य किये जाने के संबंध में दिशा-निर्देश


    एडेड माध्यमिक के विषय विशेषज्ञों को भी पुरानी पेंशन, शासनादेश जारी


    अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में आमेलित विषय  विशेषज्ञों को पुरानी पेंशन देने को मांगी सूचना

    प्रयागराज। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में आमेलित विषय विशेषज्ञों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना में विकल्प के चयन की अनुमति प्रदान करने के लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से सूचना मांगी गई है। वित्त विभाग के 28 जून 2024 के शासनादेश एवं उसके बाद समय-समय पर जारी शासनादेशों के आधार पर विषय विशेषज्ञों को भी पुरानी पेंशन का विकल्प देने के आदेश प्रदान किए गए हैं।

    अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने एक अप्रैल को सभी डीआईओएस को भेजे पत्र में निर्देशित किया है कि संबंधित शिक्षक/शिक्षिकाओं का विकल्प पत्र प्राप्त करते हुए साक्ष्यों की प्रमाणित प्रति के साथ अपनी रिपोर्ट विशेष वाहक के माध्यम से सहायक शिक्षा निदेशक (अर्थ/बीमा), शिक्षा पेंशन 2 अनुभाग, शिक्षा निदेशालय प्रयागराज को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।








    एडेड माध्यमिक के विषय विशेषज्ञों को भी पुरानी पेंशन, शासनादेश जारी 

    लखनऊ। प्रदेश के एडेड माध्यमिक स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को भी पुरानी पेंशन की सुविधा मिलेगी। शासन ने इससे संबंधित एक आदेश शुक्रवार को जारी कर दिया। इससे प्रदेश भर में कार्यरत करीब 2200 विषय विशेषज्ञों को इसका लाभ मिलेगा।

    शुक्रवार को माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव उमेश चन्द्र ने इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया। आदेश में कहा गया है कि प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को भी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के स्थान पर पुरानी पेंशन के विकल्प में सम्मिलित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया गया है। 

    आदेश का माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री राजीव यादव ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी का आभार व्यक्त किया है। विषय विशेषज्ञों को पुरानी पेंशन का लाभ दिए जाने का मुद्दा विधान परिषद में भी शिक्षक नेताओं ने कई बार उठाया था।


    उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा के निर्देश, पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा का मिलेगा लाभ

    उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा के निर्देश, पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा का मिलेगा लाभ


    लखनऊ। प्रदेश में उच्च शिक्षण संस्थानों में - पढ़ा रहे 1.35 लाख शिक्षकों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए शासनादेश जारी कर दिया गया। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए बताया गया है कि इसके अंतर्गत पांच लाख तक की चिकित्सा सुविधा मिलेगी। जल्द ही इसकी औपचारिकता पूरी की जाएगी।


    उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव गिरिजेश त्यागी की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि योजना के तहत अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के नियमित व स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों और राज्य विश्वविद्यालयों के नियमित व स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा।

    सभी राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार व निदेशक उच्च शिक्षा को भेजे निर्देश में उन्होंने कहा है कि अभी इन शिक्षकों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति की कोई सुविधा नहीं मिल रही है। इसकी वजह से उनके द्वारा चिकित्सा की समुचित व्यवस्था कर पाना संभव नहीं होता है। योजना के तहत अब शिक्षक सरकारी के साथ निजी चिकित्सालयों में भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा ले सकेंगे।

    उन्होंने कहा है कि इस योजना का क्रियान्वयन साचीस के माध्यम से किया जाएगा। योजना के लाभार्थियों व उनके आश्रितों का पूरा विवरण विभाग द्वारा हर साल 30 जून तक साचीस को भेजा जाएगा।

    प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में कक्षा 11 और 12 के अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं का पंजीकरण कराने के सम्बन्ध में।

    प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में कक्षा 11 और 12 के अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं का पंजीकरण कराने के सम्बन्ध में।


    Thursday, April 2, 2026

    पुरानी पेंशन समाप्त करने के विरोध में मनाया काला दिवस, शिक्षकों-कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर किया विरोध

    पुरानी पेंशन समाप्त करने के विरोध में मनाया काला दिवस, शिक्षकों-कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर किया विरोध

    01 अप्रैल 2026
    लखनऊ। ऑल टीचर्स एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन (अटेवा) के आह्वान पर बुधवार को पूरे प्रदेश में बेसिक, माध्यमिक, डिग्री व विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर कर काला दिवस मनाया। साथ ही सरकार से पुरानी पेंशन बहाली की मांग की।

    राजधानी में अटेवा प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु व प्रदेश महामंत्री नीरजपति त्रिपाठी के नेतृत्व में शिक्षकों-कर्मचारियों ने काला फीता बांधकर विरोध दर्ज कराया। विजय बन्धु ने कहा कि आज ही के दिन प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त होने के कारण लाखों शिक्षकों व कर्मचारी का भविष्य अंधकारमय हो गया है।

    उन्होंने कहा कि एक दिन के सांसद व विधायक को ओपीएस मिल रही है। 30 से 40 साल सेवा करने वाले को नई पेंशन। यह न्यायपूर्ण व्यवस्था नहीं है। प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी पुरानी पेंशन का लाभ मिलना चाहिए।



    NPS के विरोध में एक अप्रैल को काला दिवस मनाएंगे शिक्षक-कर्मचारी

    28 मार्च 2026
    लखनऊ। शिक्षकों और कर्मचारियों ने नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) के विरोध में 1 अप्रैल को काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के नेतृत्व में पारा स्थित डॉ. रामाशीष स्मृति भवन में आयोजित बैठक में इसकी रणनीति बनाई गई। 


    उन्होंने एनपीएस को कर्मचारियों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि यह पेंशन नहीं, बल्कि शेयर बाजार पर आधारित असुरक्षित व्यवस्था है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव से कर्मचारियों का भारी नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई का कोई प्रावधान नहीं है। 

    उन्होंने बताया कि एनपीएस के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बहुत कम पेंशन मिल रही है, जिससे महंगाई में जीवनयापन कठिन है। इसलिए शिक्षक-कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे और पुरानी पेंशन बहाली की मांग करेंगे।

     बैठक में प्रदेश महामंत्री नीरज पति त्रिपाठी, प्रदेश कोषाध्यक्ष विक्रमादित्य मौर्य, विजय कुमार, नरेंद्र कुमार, सुनील कुमार वर्मा, रजत प्रकाश, राकेश कुमार, अशोक कुमार सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। ब्यूरो

    यूपी बोर्ड ने 29,208 मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची वेबसाइट पर डाली

    यूपी बोर्ड ने 29,208 मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची वेबसाइट पर डाली

    बड़ी संख्या में स्कूल नियमों की अनदेखी कर रहे


    प्रयागराज। प्रदेश में बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों पर अंकुश लगाने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बड़ा कदम उठाया है। परिषद ने बुधवार को करीब 30 हजार मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। इस पहल से जहां अभिभावकों को सही स्कूल चुनने में सुविधा मिलेगी, वहीं विभागीय अधिकारियों के लिए भी अवैध रूप से संचालित संस्थानों पर कार्रवाई करना आसान होगा।


    परिषद के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में हाईस्कूल स्तर (कक्षा 9-10) के 10,295 और इंटरमीडिएट स्तर (कक्षा 9-12) के 18,913 विद्यालय मान्यता प्राप्त हैं। इस प्रकार कुल 29,208 स्कूल आधिकारिक रूप से संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में स्कूल नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। कई ऐसे विद्यालय हैं, जिन्हें केवल हाईस्कूल तक की मान्यता मिली है, लेकिन वे इंटरमीडिएट तक कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ स्कूलों में सिर्फ विज्ञान वर्ग की मान्यता होने के बावजूद कला वर्ग की पढ़ाई भी कराई जा रही है। हाल ही में 262 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, जिनमें से 107 स्कूलों को मान्यता देने की संस्तुति शासन को भेजी गई है, जबकि 36 मामलों को पुनर्विचार के लिए अग्रसारित किया गया है।

    चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश भर में एक हजार से अधिक स्कूल बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। ऐसे ही मामलों में हाल में देवरिया जिले में दो स्कूलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिन्होंने बिना मान्यता के बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरवाए थे।


    नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत से पहले मान्यता प्राप्त सभी विद्यालयों की सूची पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है। अभिभावकों से अपील है कि नामांकन से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित विद्यालय को किस स्तर तक की मान्यता प्राप्त है। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाएगा। - भगवती सिंह, सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद

    शिक्षक भर्ती नहीं आने के कारण डीएलएड से यूपी वालों का मोहभंग, बाहरियों में क्रेज, पिछले साल की तुलना में इस बार आधी सीटों पर हुआ प्रवेश

    शिक्षक भर्ती नहीं आने के कारण डीएलएड से यूपी वालों का मोहभंग, बाहरियों में क्रेज, पिछले साल की तुलना में इस बार आधी सीटों पर हुआ प्रवेश

    2024 से पहली बार गैर राज्य के अभ्यर्थियों को मौका

    पहली बार 34124, दूसरी बार 37333 आवेदन


    प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों में 2018 के बाद से शिक्षक भर्ती नहीं आने का नतीजा सीधे तौर पर डीएलएड प्रवेश पर दिखने लगा है। आलम यह है कि डीएलएडके 2025 सत्र की कुल सीटों के सापेक्ष 40 प्रतिशत ही भरी जा सकी हैं। एक तरफ उत्तर प्रदेश के युवाओं का इस प्रशिक्षण से मोहभंग हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर गैर राज्यों (बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान आदि) के बेरोजगारों का रुझान बढ़ता दिखाई पड़ रहा है।


    डीएलएड 2025 सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया 28 मार्च को पूरी हुई है। प्रदेश के 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की 10600 व 3,304 निजी एवं अल्पसंख्यक कॉलेजों की 2,28,900 कुल 2,39,500 सीटों में से महज 95817 (10309 अल्पसंख्यक) सीटें ही भरी जा सकी हैं। इनमें भी लगभग 30 फीसदी या 29 हजार सीटों पर दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों ने प्रवेश लिया है। 


    इस साल डीएलएड प्रवेश के लिए कुल 124230 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था जिनमें से 37333 दूसरे राज्यों के थे। इसके उलट डीएलएड के पिछले सत्र 2024 में तकरीबन दोगुने 191162 (11118 अल्पसंख्यक) अभ्यर्थियों ने प्रवेश लिया था। पिछले साल जब पहली बार गैर राज्य के अभ्यर्थियों के लिए डीएलएड में प्रवेश के दरवाजे के खोले गए थे तब 34124 अभ्यर्थियों ने ही आवेदन किया था। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी के अनुसार डीएलएड की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस सत्र में 95817 प्रशिक्षुओं ने प्रवेश लिया है।

    परीक्षकों को 25 रुपये प्रतिदिन की दर से नाश्ते का करें भुगतान, यूपी बोर्ड सचिव ने शिकायतों के बाद दिया आदेश

    परीक्षकों को 25 रुपये प्रतिदिन की दर से नाश्ते का करें भुगतान, यूपी बोर्ड सचिव ने शिकायतों के बाद दिया आदेश 

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में परीक्षकों को जलपान की राशि नहीं दिए जाने का आरोप शिक्षक संघ के नेताओं ने लगाया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए सचिव भगवती सिंह ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर सचिव को मूल्यांकन कार्य की समाप्ति के बाद 25 रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान करने का निर्देश दिया है। 

    बता दें कि पूर्व विधान परिषद सदस्य व यूपी माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश त्रिपाठी, माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई जौनपुर के अध्यक्ष तेरस यादव, माध्यमिक वित्त विहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश महासचिव अजय सिंह आदि ने मूल्यांकन कार्य में लगे परीक्षकों को जलपान के लिए भत्ता देने की मांग करते हुए सचिव को पत्र सौंपा। सचिव भगवती सिंह ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर सचिव को बुधवार को पित्र लिख कर कहा कि जिन मूल्यांकन केंद्रों द्वारा भुगतान नहीं किया गया हैं, उनकी जांच कर उत्तर दायित्व निर्धारित करें और आख्या प्रस्तुत करें। अगर धनराशि की आवश्यकता हो तो परिषद को अवगत कराएं।


    Wednesday, April 1, 2026

    CTET फरवरी 2026 का परिणाम घोषित, कुल 25.68% अभ्यर्थी सफल

    CTET फरवरी 2026 का परिणाम घोषित, कुल 25.68% अभ्यर्थी सफल

    नई दिल्ली, 30 मार्च 2026।
    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) फरवरी 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने भाग लिया।

    जारी आंकड़ों के अनुसार, पेपर-1 में कुल 12,11,611 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 10,65,410 परीक्षार्थी उपस्थित हुए। इनमें से 3,58,937 अभ्यर्थी सफल रहे, जो कुल 33.69 प्रतिशत है। वहीं, पेपर-2 में 21,56,459 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 18,67,428 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए और 3,46,738 अभ्यर्थी सफल हुए, जिसकी सफलता दर 18.56 प्रतिशत रही।

    दोनों पेपरों को मिलाकर कुल 26,49,129 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 23,24,625 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें कुल 5,97,061 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए, जिससे कुल सफलता प्रतिशत 25.68 रहा।

    सीबीएसई ने बताया कि अभ्यर्थी अपना परिणाम आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर देख सकते हैं। साथ ही, मार्कशीट और पात्रता प्रमाण पत्र भी शीघ्र ही डिजिलॉकर पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे, जिन्हें अभ्यर्थी अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से डाउनलोड कर सकेंगे। 




    CBSE ने जारी किया CTET का रिजल्ट, जानिए!  कितने नंबर वाला होगा पास? इस लिंक से करें चेक


    🔴 इस लिंक से देखें अपना परिणाम 

    CBSE ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) पेपर-1 और पेपर-2 का रिज्लट जारी कर दिया है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोर चेक कर सकते हैं।


    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) 2026 का रिजल्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अपने लॉगिन डिटेल्स डालकर आसानी से अपना रिजल्ट डाउनलोड कर सकते हैं। लाखों छात्रों को इस परीक्षा के रिजल्ट का इंतजार था। 


    इस परीक्षा में देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 25 लाख उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। अब यह सभी उम्मीदवार सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। आप सीटीईटी पेपर-1 और पेपर-2 दोनों का रिजल्ट जारी कर सकते हैं क्योंकि सीबीएसई ने सीटीईटी पेपर-1 और पेपर-2 दोनों का रिजल्ट एक साथ जारी कर दिया है। 

     

    कैसे चेक करें रिजल्ट?

    सबसे पहले CTET की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाएं।

    लेटेस्ट न्यूज सेक्शन में 'CTET February Result 2026' का विकल्प दिखेगा।

    इस लिंक पर क्लिक करने से आप रिजल्ट लॉगिन पेज पर पहुंच जाएंगे।

    अपना रोल नंबर और पासवर्ड डालें।

    सबमिट करते ही आपका CTET रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा।

    इसके बाद आप अपना स्कोर कार्ड डाउनलोड कर लें। 


    कितने नंबर वाला होगा पास?
    CTET पास करने के लिए जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों को कम से कम 60 प्रतिशत नंबर लाने होते हैं। इसका मतलब है कि कुल 150 नंबरों में से कैंडिडेट्स को कम से कम 90 नंबर हासिल करने होते हैं। रिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट्स को CTET एग्जाम क्लियर करने के लिए 55 प्रतिशत स्कोर करना होता है। अगर आपका स्कोर इतना है तो आप इस परीक्षा में सफल हो गए हैं। इसके बाद आपका यह रिजल्ट लाइफ टाइम वैलिड रहेगा यानी इस रिजल्ट के आधार पर आप आगे परीक्षाएं दे सकते हैं। 


    पेपर-1 और पेपर-2 क्या है?
    सीबीएसई सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट के पेपर-1 और पेपर-2 आयोजित किया था। पेपर 1 पास करने वाले अभ्यर्थी कक्षा 1 से लेकर 5वीं तक और पेपर 2 एग्जाम क्वालीफाई करने पर उम्मीदवार कक्षा 6 से लेकर 8 तक पढ़ाने के लिए पात्र हो जाते हैं।

    माध्यमिक शिक्षा : शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रवेश, पंजीकरण एवं ऑनलाइन उपस्थिति के संबंध में निर्देश

    यूपी बोर्ड का नया सत्र आज से, ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य, परिषद ने दिए निर्देश- कक्षा नौवीं से 12वीं तक का संचालन एक अप्रैल से अनिवार्य रूप से किया जाए

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत बुधवार से हो जाएगी। इसके साथ ही प्रवेश, पंजीकरण और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू होगी।

    इस बार विशेष व्यवस्था के तहत सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति परिषद के पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। परिषद ने सभी विद्यालयों को निर्देशित किया है कि कक्षा नौवीं से 12वीं तक का संचालन एक अप्रैल से अनिवार्य रूप से किया जाए।

    बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने निर्देश दिए हैं कि ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के वार्षिक परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी, इसलिए इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

    सचिव ने बताया कि सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौवीं व 11वीं के विद्यार्थियों के अग्रिम पंजीकरण और परीक्षा वर्ष 2027 में कक्षा 10वीं व 12वीं के छात्रों के परीक्षा आवेदन से संबंधित समय सारिणी अलग से जारी की जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि नए सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों का पंजीकरण और पूरा विवरण उसी दिन परिषद के पोर्टल पर दर्ज किया जाए।

    ताकि ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली में उनका नाम प्रदर्शित हो सके और उपस्थिति अंकित की जा सके। साथ ही अभिभावकों और छात्रों से कहा गया है कि वे किसी के बहकावे में आकर अनधिकृत या महंगी किताबें न खरीदें। परिषद द्वारा अधिकृत प्रकाशकों की पुस्तकों की सूची और निर्धारित दरें वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।



    माध्यमिक शिक्षा : शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रवेश, पंजीकरण एवं ऑनलाइन उपस्थिति के संबंध में निर्देश


    भारत में भी बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर सख्ती की तैयारी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उम्र आधारित नियमों की सिफारिश

    भारत में भी बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर सख्ती की तैयारी,  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उम्र आधारित नियमों की सिफारिश


    नई दिल्ली। बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त नियम बनाने की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सुझाव दिया है कि बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार ही सोशल मीडिया तक पहुंच दी जाए और इसके लिए एक स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार किया जाए।


    आयोग के अनुसार, 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के स्वतंत्र उपयोग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। वहीं, 13 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य हो और 15 से 18 वर्ष के किशोरों को सीमित और निगरानी के साथ उपयोग की छूट दी जाए। आयोग का मानना है कि इससे बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की बेहतर रक्षा की जा सकेगी।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय अधिक जोखिम वाले फीचर्स पर नियंत्रण किया जाना चाहिए। साथ ही, बच्चों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि उनके अधिकार सुरक्षित रह सकें।

    आयोग ने उम्र सत्यापन प्रणाली को अनिवार्य बनाने की भी सिफारिश की है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे तय नियमों के अनुसार ही सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, एक केंद्रीय नियामक संस्था के गठन का सुझाव दिया गया है, जो इन नियमों के पालन की निगरानी करेगी।

    रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि वहां बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं, जहां नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के बढ़ते डिजिटल एक्सपोजर को देखते हुए इस तरह के नियम समय की मांग हैं। यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो यह बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

    संविदा प्रवक्ताओं को प्रमोशन में राहत लेकिन आर्थिक लाभ नहीं, व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई

    संविदा प्रवक्ताओं को प्रमोशन में राहत लेकिन आर्थिक लाभ नहीं, व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई


     लखनऊ: राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत ऐसे प्रवक्ता जो पहले संविदा पर कार्यरत थे और बाद में नियमित हुए, उनकी पुरानी संविदा सेवा को करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत प्रमोशन में जोड़ा जाएगा। हालांकि यह लाभसिर्फ कागजी (नोशनल) होगा और इससे कोई आर्थिक लाभनहीं मिलेगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता उच्च शिक्षा निदेशक करेंगे। समिति 15 दिन में रिपोर्ट देगी।


    यह व्यवस्था उन प्रवक्ताओं पर लागू होगी, जो वर्ष 2005-06, 2006-07 और 2008-09 में संविदा पर नियुक्त हुए थे और बाद में 26 दिसंबर 2016 के शासनादेश के तहत नियमित किए गए। उनकी सेवाएं पहले ही बिना अंतराल के निरंतर मानी जा चुकी हैं। यह निर्णय यूजीसी 2010 और 2018 के नियमों के आधार पर लिया गया है। 

    इन नियमों में शर्तों के साथ संविदा या अस्थायी सेवा को प्रमोशन में जोड़ने का प्राविधान है। यह भी स्पष्ट है कि सेवा सरकारी, निजी या स्थानीय संस्थान में की गई हो, उसमें भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, इस निर्णय के तहत संविदा सेवा को केवल रिकार्ड में जोड़ा जाएगा। इससे न तो वरिष्ठता तय होगी, न पेंशन में लाभ मिलेगा और न ही कोई एरियर या अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। प्रमोशन के बाद वेतन केवल वास्तविक प्रमोशन की तारीख से ही लागू होगा। 

    यह निर्णय डा. रजत गंगवार समेत कई सहायक आचार्यों द्वारा पांच जुलाई 2025 को किए गए अनुरोध के बाद लिया गया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व अध्यक्ष डा. दीनानाथ सिंह और पूर्व संयुक्त महामंत्री डा. जगदीश सिंह दीक्षित ने कहा कि यह मांग लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों को भी यही लाभ दिया जाए।

    अटल आवासीय विद्यालयों में भी लागू होगा प्रोजेक्ट प्रवीण, आईटी, हेल्थकेयर, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आधुनिक कोर्स से छात्र होंगे सशक्त

    अटल आवासीय विद्यालयों में भी लागू होगा प्रोजेक्ट प्रवीण, आईटी, हेल्थकेयर, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आधुनिक कोर्स से छात्र होंगे सशक्त

    सरकार की पहल से 18 विद्यालयों के 3447 विद्यार्थियों को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से अब प्रदेश के 18 अटल आवासीय विद्यालयों में प्रोजेक्ट प्रवीण लागू किया जाएगा। इसके तहत कक्षा 6 से 12 तक संचालित इन विद्यालयों के 3447 विद्यार्थियों को आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थियों को आईटी, आईटीईएस, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें सॉफ्ट स्किल्स और इंडस्ट्रियल विजिट भी शामिल हैं।


    एआई फॉर ऑल मॉड्यूल को भी जोड़ा गया है, जिससे विद्यार्थी तकनीकी रूप से सशक्त बन सकें। अब तक यह कार्यक्रम केवल सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में संचालित था।

    व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में मिशन निदेशक पुलकित खरे द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर विद्यालयों को चयनित किया गया है। आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, आजमगढ़, बस्ती, बांदा, गोंडा, झांसी, कानपुर नगर, लखनऊ, बुलंदशहर, मिर्जापुर, प्रयागराज, गोरखपुर, मुजफ्फरनगर, वाराणसी, बरेली और मुरादाबाद स्थित 18 अटल आवासीय विद्यालयों के कुल 3447 छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण के लिए पात्र पाया गया है। अटल आवासीय विद्यालय में श्रमिकों, प्रवासी कामगारों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभावान बच्चों को निशुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान की जाती है।

    यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों के मूल्यांकन की अवधि बढ़ी, परिणाम में हो सकती है देरी

    यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों के मूल्यांकन की अवधि बढ़ी, परिणाम में हो सकती है देरी

    31 मार्च 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं हो सकेगा। लगभग 50 लाख से अधिक छात्रों की कॉपियों की जांच एक अप्रैल तक पूरी होना संभव नहीं है। बोर्ड ने मूल्यांकन अवधि को तीन से चार दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे परीक्षा परिणाम घोषित होने में भी देरी की संभावना जताई जा रही है। 

    प्रदेश के 254 मूल्यांकन केंद्रों में से अब तक 117 केंद्रों पर मूल्यांकन का कार्य पूरा हो चुका है। करीब 80 प्रतिशत कॉपियों का मूल्यांकन संपन्न हो गया है, जबकि शेष कॉपियों की जांच चार अप्रैल तक पूरी होने की उम्मीद है। मंगलवार को 192 केंद्रों पर 47,804 परीक्षकों ने मूल्यांकन कार्य किया। इस दौरान हाईस्कूल की 5,80,800 और इंटरमीडिएट की 5,98,996 समेत कुल 11,79,796 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की गई।

    हाल के दिनों में मूल्यांकन कार्य में तेजी आई है। 30 मार्च को 17,56,851, 29 मार्च को 25,41,361 और 28 मार्च को 33,91,506 कॉपियों का मूल्यांकन किया गया। बुलंदशहर समेत कई जिलों में कॉपियों की जांच पूरी हो चुकी है। ईद और रामनवमी के अवकाश के कारण मूल्यांकन कार्य तीन दिन प्रभावित रहा। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि निर्धारित समय में कार्य पूरा नहीं हो सकेगा, इसलिए इसे तीन से चार दिन आगे बढ़ाया गया है। 






    यूपी बोर्ड मूल्यांकन में 2% गलती तो 3 साल के लिए डिबार, परीक्षक के मानदेय में से 85 प्रतिशत की कटौती की जाएगी

    यूपी बोर्ड के सचिव ने सभी केंद्रों के उपनियंत्रक को भेजे निर्देश

    अंकेक्षण के बावजूद गलती तो नकल अधिनियम में होगी कार्रवाई

    15 मार्च 2026
    प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू हो रहा है। कॉपियों के मूल्यांकन में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए, इसके लिए बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी 250 केंद्रों के उपनियंत्रकों (प्रधानाचार्यों) को सख्त निर्देश दिए हैं। मूल्यांकन के लिए भेजे निर्देश में लिखा है कि मूल्यांकन में दो प्रतिशत तक त्रुटि पाए जाने पर परीक्षक के मानदेय में से 85 प्रतिशत की कटौती की जाएगी तथा संबंधित परीक्षक को तीन वर्ष के लिए डिबार कर दिया जाएगा। एक प्रतिशत तक त्रुटि मिलने पर मानदेय में 50 प्रतिशत की कटौती होगी तथा दशमलव पांच प्रतिशत तक त्रुटि होने पर 25 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।

    अंकेक्षण (दोबारा जांच) के बाद भी यदि किसी उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन में त्रुटि पाई जाएगी तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अंकेक्षक की होगा। कॉपी जांचने या अंकेक्षण में लापरवाही पर बोर्ड के नियम /विनियम एवं उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के नियमानुसार संबंधित के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। अंकेक्षक की व्यवस्था का उद्देश्य है कि मूल्यांकन कार्य शुद्ध और त्रुटिविहीन हो तथा त्रुटि/लापरवाही के कारण छात्रों के साथ अन्याय न हो। अंक सावधानी पूर्वक चढ़ाए जाएं क्योंकि कटिंग होने पर कम्प्यूटर अंक स्वीकार नहीं करेगा और परीक्षार्थी का परीक्षाफल अपूर्ण रह जाएगा।

    विज्ञान-सोशल की कॉपियों का पैनल मूल्यांकन
    हाईस्कूल की सामाजिक विज्ञान एवं विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाओं का पैनल मूल्यांकन होगा। सामाजिक विज्ञान के प्रथम खंड को इतिहास एवं राजनीति शास्त्र के साथ स्नातक प्रशिक्षित तथा द्वितीय खंड अर्थशास्त्र एवं भूगोल के साथ स्नातक प्रशिक्षित योग्यताधारी परीक्षक मूल्यांकन करेंगे। विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाओं के प्रथम खंड को भौतिक विज्ञान के साथ बीएससी प्रशिक्षित स्नातक तथा द्वितीय एवं तृतीय खंड को रसायन विज्ञान तथा जीव विज्ञान विषयों के साथ बीएससी प्रशिक्षित परीक्षक मूल्यांकन करेंगे।




    किसी भी प्रश्न का न हो गलत मूल्यांकन : भगवती सिंह
    यूपी बोर्ड के सचिव ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर जारी किए निर्देश

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 में मूल्यांकन को लेकर सचिव भगवती सिंह ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा कि उप नियंत्रक और सभी मूल्यांकन केंद्र ध्यान रखें कि कोई भी उत्तर अमूल्यांकित न रह जाए और किसी भी उत्तर का गलत मूल्यांकन न हो। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पूरी सजगता और जिम्मेदारी के साथ किए जाएं। इसके लिए उप प्रधान परीक्षक और परीक्षक समुचित व्यवस्था कर लें। 

    बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन प्रयागराज सहित प्रदेश के 249 मूल्यांकन केंद्रों पर किया जाएगा। शिक्षक संगठनों के विरोध के बावजूद मूल्यांकन कार्य 18 मार्च से शुरू करने की तैयारी है। जो एक अप्रैल तक चलेगा। इसके लिए परीक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है।

    सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अगर कोई परीक्षक अनुपस्थित रहता है तो उप नियंत्रक स्वयं किसी की नियुक्ति नहीं करेंगे। परिषद की प्रतीक्षा सूची से ही विषयवार और केंद्रवार शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।


    भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच भाषा विषयों में ही की जाए

    हाईस्कूल में 70 अंकों की लिखित परीक्षा में से 20 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट पर दर्ज कराए गए हैं। जबकि शेष 50 अंकों की परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं पर हुई है। निर्देश दिया गया कि भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच केवल भाषा विषयों में ही की जाए। परिषद ने मूल्यांकन को निष्पक्ष और त्रुटिरहित बनाने के लिए कई जरूरी निर्देश दिए हैं।

    निर्देश में यह भी कहा गया है कि अगर परीक्षार्थियों ने गणित, विज्ञान या अन्य किसी विषय में उत्तर बाएं पृष्ठ पर भी लिखे हैं तो उनका भी समुचित मूल्यांकन किया जाए। गणित और विज्ञान विषय की उत्तर पुस्तिकाओं में स्टेप मार्किंग लागू की जाएगी।


    यूपी बोर्ड मूल्यांकन के संबंध में जारी निर्देश, मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो, बाएं पन्ने पर उत्तर हो तो उसे भी जांचें, गणित-विज्ञान में स्टेप मार्किंग, भाषा में ही जांचें शाब्दिक त्रुटि

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त होने के बाद 18 मार्च से उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होगा। मूल्यांकन के लिए पूरे प्रदेश में 249 केंद्र बनाए गए हैं। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने मूल्यांकन के संबंध में सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, डीआईओएस व मूल्यांकन केंद्र प्रभारियों को शनिवार को निर्देश भेजे हैं। सचिव ने परीक्षकों को सलाह दी है कि गणित एवं विज्ञान विषय की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में स्टेप मार्किंग की जाए।

    गणित, विज्ञान अथवा अन्य किसी भी विषय में यदि परीक्षार्थियों ने बाएं पृष्ठ पर भी उत्तर लिखे हों तो उनका भी समुचित मूल्यांकन किया जाए। भाषाई त्रुटि की जांच हिन्दी, अंग्रेजी जैसे भाषा के विषय में ही की जाए। अन्य विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में उदार दृष्टिकोण अपनाएं। हाईस्कूल में 70 अंकों की लिखित परीक्षा के तहत 20 अंकों की वस्तुनिष्ठ परीक्षा ओएमआर शीट पर हुई है। शेष 50 अंकों की परीक्षा लिखित उत्तरपुस्तिकाओं पर कराई गई है। जांची जा रही उत्तरपुस्तिका में निर्धारित पूर्णांक 50 से अधिक प्राप्तांक किसी भी दशा में न हो। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि कोई भी प्रश्नोत्तर न तो अमूल्यांकित रहे और न ही किसी प्रश्नोत्तर का गलत मूल्यांकन हो।

    मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो

    सचिव ने केवल पारिश्रमिक बढ़ाने के उद्देश्य से अत्यधिक कॉपियां जांचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के निर्देश दिए है। लिखा है कि मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो। विद्यालयों के शिक्षकों के लिए प्रति दिन उत्तरपुस्तिकाओं की न्यूनतम संख्या (जैसे हाईस्कूल में 50 और इंटरमीडिएट में 45) अनिवार्य रूप से निर्धारित की जाए। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उप प्रधान परीक्षक प्रतिदिन दस से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्वयं नहीं करेंगे। प्रत्येक केन्द्र पर मूल्यांकन कार्य सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हों एवं वेब कास्टिंग के माध्यम से राज्य एवं जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम पर लाइव फीड सुनिश्चित कराई जाए। उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की गोपनीयता भंग होने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय अधिनियम/विनियम और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की जाएगी।



    18 मार्च से शुरू होगा यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन, प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू होकर एक अप्रैल तक प्रदेश के 249 मूल्यांकन केंद्रों पर किया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।

    परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य होगा। किसी भी स्तर पर मौखिक, लिखित, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उत्तर पुस्तिका अथवा मूल्यांकन से संबंधित किसी भी सूचना को साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। गोपनीयता भंग होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    मूल्यांकन कार्य की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में एक पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। वहीं, प्रत्येक मूल्यांकन केंद्र पर जिलाधिकारी द्वारा स्टैटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की जाएगी। मूल्यांकन कार्य वॉयस रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कराया जाएगा। इसकी कनेक्टिविटी जनपद तथा राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम से होगी।

    मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों और कर्मचारियों को मोबाइल फोन या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मूल्यांकन कक्ष में ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

    मूल्यांकन केंद्रों की सुरक्षा के लिए अवांछनीय तत्वों पर नजर रखने हेतु एलआईयू और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की जाएगी। मूल्यांकन कार्य समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के बंडलों को परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक ट्रक के साथ दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।

    परिषद के अनुसार, 17 मार्च को सभी मूल्यांकन केंद्रों पर उप नियंत्रक द्वारा मूल्यांकन कार्य में लगाए गए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 



    हाईस्कूल की 700, इंटरमीडिएट की 600 से ज्यादा कापियां नहीं जांच सकेंगे यूपी बोर्ड परीक्षक

    प्रयागराजः हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं। अब शेष बचे विषयों की पांच दिवसों में परीक्षाएं संपन्न कराए जाने की तैयारी के बीच यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की रूपरेखा तय कर दी है। गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन के लिए पूरे मूल्यांकन अवधि में हाईस्कूल के परीक्षकों को अधिकतम 700 तथा इंटरमीडिएट के परीक्षकों को 600 से अधिक उत्तरपुस्तिकाएं आवंटित नहीं की जाएंगी। कला विषय के परीक्षक पूरी अवधि में अधिकतम 800 उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर सकेंगे। इस तरह एक परीक्षक एक दिन में हाईस्कूल की 50 तथा इंटरमीडिएट की 45 से ज्यादा कापियां नहीं जांच सकेंगे।

    18 फरवरी से आरंभ हुईं यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 12 मार्च को संपन्न होंगी। इसके बाद उत्तरपुस्तिकाओं को मूल्यांकन के लिए 249 केंद्रों पर भेजा जाएगा। परीक्षा संपन्न होने के एक सप्ताह में उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू कराया जाएगा। इस तरह 19 मार्च से मूल्यांकन शुरू कराया जा सकता है। उत्तरपुस्तिकाओं के जांचने क कार्य 15 दिन चलेगा। इसके लिए पिछले वर्ष की तरह करीब 1.48 लाख परीक्षक नियुक्त किए जाएंगे



    1.40 लाख से अधिक शिक्षक करेंगे बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन, यूपी बोर्ड ने तेज की तैयारी

    ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत चुने जाएंगे परीक्षक

    कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों की लगातार निगरानी की जाएगी

    10वीं की एक कॉपी पर 14 और 12वीं की कॉपी पर 15 रुपये मानदेय

    सचिव ने बताया कि मूल्यांकन कार्य में लगाए गए शिक्षकों को हाईस्कूल की एक कॉपी को जांचने के एवज में 14 रुपये और इंटर की कॉपी जांचने पर 15 रुपये मानदेय दिया जाएगा। एक परीक्षक 10वीं की रोजाना 50 और 12वीं की 45 कॉपियां जांच सकेगा।

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर बोर्ड ने तैयारी तेज कर दी है। प्रदेश भर के 1.40 लाख से ज्यादा शिक्षक कॉपियों का मूल्यांकन करेंगे। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा 12 मार्च को समाप्त होगी।

    बताया गया कि संकलन केंद्रों से मूल्यांकन केंद्रों तक उत्तर पुस्तिकाएं ट्रकों से भेजी जाएंगी। ट्रक के साथ ड्यूटी पर लगाए गए कर्मचारियों के लिए अलग से वाहन की व्यवस्था रहेगी। ट्रक में किसी भी कर्मचारी के बैठने की अनुमति नहीं होगी।

    उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिये परीक्षकों की नियुक्ति होगी। आवश्यकता पड़ने पर मूल्यांकन - केंद्रों के उप नियंत्रक परिषद के पोर्टल पर उपलब्ध प्रतीक्षा सूची से भी परीक्षकों की ऑनलाइन नियुक्ति की जा सकेगी। परीक्षा केंद्रों के स्ट्रॉन्ग रूम की तरह ही कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों की भी लगातार निगरानी की जाएगी।

    कॉपियों के हर पृष्ठ पर दर्ज हैं गोपनीय न्यूमेरिक नंबरः परिषद ने इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी किया है। पहली बार सभी विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं के प्रत्येक पृष्ठ पर केंद्रवार गोपनीय न्यूमेरिक नंबर दर्ज किए गए हैं। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि मूल्यांकन अवधि में कला वर्ग का एक परीक्षक अधिकतम 800 कॉपियां जांच सकेगा। वहीं, विज्ञान वर्ग के इंटरमीडिएट में 600 और हाईस्कूल में 700 कॉपियां जांचने की सीमा तय की गई है। परीक्षकों के मानदेय में वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि वर्ष 2019 और 2023 में पहले ही मानदेय बढ़ाया जा चुका है।



    यूपी बोर्ड : 18 मार्च से कॉपियों के मूल्यांकन शुरू होने के आसार, शासन को भेजा प्रस्ताव

    मंजूरी मिलने के बाद तिथि घोषित होगी, 249 केंद्रों पर मूल्यांकन शुरु होने की संभावना, 12 मार्च को समाप्त होंगी परीक्षाएं

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त हो जाएंगी। इसके बाद 18 मार्च से प्रदेश के 249 केंद्रों पर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होने की संभावना है। इस संबंध में बोर्ड के सचिव ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया की तिथि घोषित की जाएंगी।


    प्रदेश के 8033 केंद्रों पर हो रही अधिकांश मुख्य विषयों की परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं। होली के बाद नौ मार्च से परीक्षाएं फिर से शुरू होंगी। उस दिन प्रथम पाली में हाईस्कूल उर्दू तथा द्वितीय पाली में इंटरमीडिएट के मनोविज्ञान, शिक्षा शास्त्र और तर्कशास्त्र विषय की परीक्षाएं होंगी।

    बोर्ड का लक्ष्य है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा कर 15 अप्रैल तक परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाए। इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में 52 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, हालांकि इनमें से बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी है।

    पिछले वर्ष के आंकड़ों के अनुसार हाईस्कूल में 27,32,165 और इंटरमीडिएट में 27,05,009 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। वर्ष 2025 में बोर्ड परीक्षा 24 फरवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक मूल्यांकन प्रक्रिया चली थी। इसके बाद 25 अप्रैल को परीक्षा परिणाम घोषित किया गया था। उस वर्ष हाईस्कूल में 90.11 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 81.15 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए थे।

    Tuesday, March 31, 2026

    सीएम "योगी की पाती" से छात्रों को संदेश – नए सत्र में शिक्षा, संस्कार और खेल पर जोर

    सीएम "योगी की पाती" से छात्रों को संदेश – नए सत्र में शिक्षा, संस्कार और खेल पर जोर

    स्कूली वाहनों का पोर्टल पर दर्ज कराएं ब्योरा, अब होगी ऑनलाइन निगरानी, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्कूली वाहनों का फिटनेस दुरुस्त रखने के निर्देश दिए

    स्कूली वाहनों का पोर्टल पर दर्ज कराएं ब्योरा, अब होगी ऑनलाइन निगरानी, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्कूली वाहनों का फिटनेस दुरुस्त रखने के निर्देश दिए

    अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा ने जारी किए निर्देश

    लखनऊ। बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्कूली वाहनों का फिटनेस दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अपर मुख्य सचिव की ओर से सभी डीआईओएस और बीएसए को जारी निर्देश में कहा गया है कि स्कूल के वाहन हादसों का शिकार न होने पाए। वाहनों की निगरानी के लिए एक पोर्टल बनाया गया है। इससे परिवहन मुख्यालय से वाहनों की खामी का पता चल जाएगा और प्रत्येक वाहन की स्थिति पर नजर रहेगी।


    सभी डीआईओएस व बीएसए को जारी निर्देश में कहा गया है कि 15 अप्रैल तक अभियान चलाकर पोर्टल पर सभी स्कूलों का डाटा फीड कराएं। वाहन संबंधी डाटा में वाहन का पंजीकरण नंबर, वाहन का प्रकार, वाहन की आयु, वाहन मॉडल, इंजन संख्या, चेसिस संख्या, वाहन स्वामी का नाम, पता, मोबाइल नंबर, परमिट संख्या व उसकी वैधता तिथि, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा प्रमाण पत्र, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र, जीपीएस की स्थिति व सीसीटीवी कैमरों हैं या नहीं, सभी जानकारियां पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। इससे आसानी से जानकारी मिल जाएगी कि कौन सा वाहन कब अनफिट हो रहा है या फिर कोई अन्य कमी है तो संबंधित जिले के अधिकारियों व स्कूल प्रशासन से संपर्क कर उसको दुरुस्त किया जाएगा।

    वाहन के विवरण के साथ स्कूल वाहन चालकों का ब्योरा देना होगा। इसमें चालक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, डीएल की डिटेल, चालक का अनुभव प्रमाणपत्र, पुलिस सत्यापन रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट आदि भी देना होगा। इससे चालक की भी निगरानी की जा सकेगी। 

    इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को मुफ्त में कराया जाएगा एआई का कोर्स, 7 अप्रैल तक होगा पंजीकरण, सभी डीआईओएस को निर्देश जारी

    इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को मुफ्त में कराया जाएगा एआई का कोर्स, 7 अप्रैल तक होगा पंजीकरण, सभी डीआईओएस को निर्देश जारी

    लखनऊ। प्रदेश में 11वीं और 12वीं कक्षाओं के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का कोर्स मुफ्त में करने का बेहतरीन मौका मिलने जा रहा है। यह कार्यक्रम 15 अप्रैल से शुरू हो रहा है जो 60 दिनों तक चलेगा। यह पाठ्यक्रम छात्रों के भविष्य और रोजगारपरक शिक्षा के लिहाज से बेहद उपयोगी माना जा रहा है।


    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी डीआईओएस को इसमें अधिक से अधिक विद्यार्थियों का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। सभी विद्यालयों को 2 से 7 अप्रैल के बीच अधिकतम पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। 


    उन्होंने बताया यह पहल महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोरखपुर की ओर से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के सहयोग से की जा रही है। इस ऑनलाइन प्रोग्राम को पूरा करने वाले छात्रों को 2 क्रेडिट पॉइंट के साथ प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए संयुक्त निदेशक विवेक नौटियाल को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

    Monday, March 30, 2026

    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों की दोहरी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की भी तैयारी, 13 अप्रैल को मशाल जुलूस की तैयारी

    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों की दोहरी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की भी तैयारी, 13 अप्रैल को मशाल जुलूस की तैयारी

    23 संगठनों का महासंघ एकजुट, 

    लखनऊः शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के मुद्दे पर देशभर के शिक्षक अब सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं। कई शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले आंदोलन तेज कर दिया है। शिक्षक की पाती अभियान के बाद अब 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने की तैयारी चल रही है। इसी के साथ महासंघ के पदाधिकारी सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।

    महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडे ने बताया कि 23 शिक्षक संगठनों से बना यह महासंघ ब्लाक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चला रहा है। इसके साथ ही कानूनी लड़ाई को भी पूरी मजबूती से लड़ा जाएगा। इस मुद्दे पर दिल्ली में अधिवक्ताओं के साथ बैठक की गई है, जिसमें आगामी सुनवाई की रणनीति तय की गई। 

    दावा किया कि प्रदेश के करीब 1.86 लाख और देशभर के लगभग 18 लाख शिक्षकों के हित प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। वहीं, महासंघ की लीगल टीम के राष्ट्रीय प्रभारी विवेकानंद आर्य ने बताया कि शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई दो अप्रैल के बाद कभी भी हो सकती है, जिसे लेकर वकीलों से विस्तृत चर्चा की गई है।




    टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालेंगे शिक्षक

    प्रयागराज : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में प्रदेश भर के शिक्षक अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलुस निकालेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारियो को सौपकर अध्यादेश लाकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।


     महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने कहा है कि आरटीई एक्ट (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम-2009 लागू होने से पहले जिन महिला/पुरुष शिक्षकों ने निर्धारित योग्यता के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी, उन्हें 20 से 25 वर्ष की सेवा के बाद टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य किया जाना उचित नहीं है। अधिकांश ऐसे शिक्षकों की आयु 50 वर्ष के आसपास है और अब उन पर पारिवारिक व सामाजिक जिम्मेदारियां अधिक हैं। ऐसे में उन्हें अपने बच्चों की उम्र के अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा देने के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं है।


     उन्होंने कहा है कि इस अभियान को कई शिक्षक संगठनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, विशिष्ट बीटीसी संघ, उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, यूटा, एससी-एसटी शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ, अनुदेशक संघ, उर्दू शिक्षक कर्मचारी संघ, महिला मोर्चा तथा विशेष शिक्षक एसोसिएशन सहित अन्य संगठन शामिल हैं। सभी संगठन मिलकर मशाल जुलूस निकाल कर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग तेज करेंगे।

    Sunday, March 29, 2026

    उच्च शिक्षा में भी दाखिले के लिए विशेष अभियान, मंडल स्तर पर अप्रैल से सभी राज्य विवि आयोजित करेंगे प्रवेश उत्सव, उच्च शिक्षा में भी नामांकन बढ़ाने की कोशिश

    उच्च शिक्षा में भी दाखिले के लिए विशेष अभियान, मंडल स्तर पर अप्रैल से सभी राज्य विवि आयोजित करेंगे प्रवेश उत्सव, उच्च शिक्षा में भी नामांकन बढ़ाने की कोशिश

    50 प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य 2035 तक पाने की कवायद


    प्रयागराज। कक्षा छह से 12 साल के बच्चों के लिए स्कूल चलो अभियान की तर्ज पर अब उच्च शिक्षण संस्थानों में भी दाखिले को विशेष अभियान चलाया जाएगा। प्रदेश के सभी 24 राज्य विश्वविद्यालयों, 216 राजकीय और 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से पहली बार विशेष प्रवेश अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया है।


    सीबीएसई, सीआईएससीई समेत सभी बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं समाप्त होने के बाद अप्रैल से यह अभियान शुरू होगा। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा के अनुसार इसकी शुरुआत आगरा से होगी। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन लगभग 27 प्रतिशत है। 2035 तक सकल नामांकन 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। 

    मंडल मुख्यालय वाले जिलों में राज्य विश्वविद्यालयों की ओर से दाखिला उत्सव आयोजित किया जाएगा, जहां सभी महाविद्यालय अपने स्टाल लगाकर बच्चों को अपने यहां पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रमों, छात्रवृत्ति एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी देंगे।


    छात्रसंख्या घटने से चिंतित

    यूपी के महाविद्यालयों में 2025-26 सत्र में छात्रसंख्या घट गई है। प्रदेश के 216 राजकीय, 330 अशासकीय सहायता प्राप्त और 8072 वित्तविहीन महाविद्यालयों में 4895468 विद्यार्थियों ने परंपरागत पाठ्यक्रमों (बीए, बीएससी, बीकॉम आदि) में दाखिला लिया है। जबकि पिछले साल दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या 53,28,969 थी। 

    अभियान चलाकर उच्च प्राथमिक स्कूलों के छात्रों का दाखिला राजकीय व एडेड माध्यमिक स्कूलों में कराया जाएगा

    अभियान चलाकर उच्च प्राथमिक स्कूलों के छात्रों का दाखिला राजकीय व एडेड माध्यमिक स्कूलों में कराया जाएगा

    माध्यमिक स्कूल फीडर विद्यालय बनेंगे, छात्र संख्या बढ़ाने के लिए की जा रही पहल ब्लॉक में वरिष्ठतम प्रधानाचार्य बनेंगे नोडल

    लखनऊ। राजकीय व एडेड माध्यमिक स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए पहली बार अनूठी पहल की जा रही है। पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले उच्च प्राथमिक स्कूलों के कक्षा आठ के छात्रों का दाखिला राजकीय व एडेड माध्यमिक स्कूलों में कराया जाएगा। इनको उच्च प्राथमिक स्कूलों के फीडर विद्यालय बनाए जाएंगे। प्रत्येक ब्लॉक में वरिष्ठतम प्रधानाचार्य को प्रभारी व नोडल अधिकारी बनाया जाएगा।

    स्कूल चलो अभियान का प्रथम चरण एक से 15 अप्रैल तक चलेगा। सभी सरकारी व एडेड माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां कक्षा नौ व 11 में प्रवेश कराने के लिए तैयारियां शुरू करें। अपने विद्यालय के पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले सरकारी उच्च प्राथमिक स्कूलों से संपर्क करेंगे। सभी उच्च प्राथमिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने यहां पर एक रजिस्टर तैयार करेंगे, जिसमें कक्षा आठ के छात्रों का पूरा ब्योरा होगा और नौ में प्रवेश लेने की दशा में विद्यालय के नाम आदि का उल्लेख किया जाएगा।

    नोडल अधिकारी इसका ब्योरा जुटाएंगे और कोशिश की जाएगी कि ज्यादा से ज्यादा प्रवेश सरकारी व एडेड माध्यमिक स्कूलों में हो। कोई अभिभावक अगर किसी अन्य स्कूल में प्रवेश कराना चाहता है, तो उन्हें इसकी छूट होगी। ऐसे ही कक्षा 10 के छात्रों का कक्षा 11 में प्रवेश के लिए अभियान चलाएंगे। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि 30 अप्रैल तक स्कूल दाखिले का ब्योरा देंगे।

    शिक्षकों की टीम घर-घर जाएगी

    नोडल की जिम्मेदारी होगी कि कक्षा आठ के पास छात्रों की सूची प्राप्त करेंगे। प्रधानाध्यापक व शिक्षकों की टीम घर-घर संपर्क करके कक्षा नौ व कक्षा 11 में छात्रों का प्रवेश अपने स्कूलों में कराने का आग्रह करेगी।




    अब माध्यमिक विद्यालयों में भी चलेगा स्कूल चलो अभियान, कक्षा 8 के बाद ड्रॉप आउट हो रहे 21 फीसदी छात्रों पर नजर

    एक अप्रैल से बेसिक-माध्यमिक में शुरू किया जाएगा अभियान

    लखनऊ। प्रदेश में एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए सत्र 2026-27 को लेकर तैयारी तेज हो गई है। वहीं नए सत्र से बेसिक के साथ ही माध्यमिक विद्यालयों में भी छात्रों की संख्या बढ़ाने व ड्रॉप आउट को रोकने के लिए स्कूल चलो अभियान चलाया जाएगा। इसमें ड्रॉप आउट हो रहे 21 फीसदी छात्रों पर खास नजर होगी।


    प्रदेश के बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विद्यालयों में एक अप्रैल से नए सत्र की शुरुआत होती है। इसे देखते हुए विभाग की ओर से नए सत्र को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है। हर साल की तरह एक अप्रैल से ही इसे प्रभावी रूप से हर जिले में चलाया जाएगा। वहीं हाल ही में शासन स्तर पर हुई बैठक में निर्देश दिया गया है कि इस साल से माध्यमिक के विद्यालयों में भी इसे लागू किया जाएगा।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुसार कक्षा 8 पास करने के बाद कक्षा नौ में 79 फीसदी ही छात्र नामांकन करा रहे हैं। वर्तमान में कक्षा आठ में 37 लाख बच्चे हैं। इसके अनुसार लगभग 8.17 लाख छात्र ड्रॉप आउट होते हैं।

    इसमें 4.13 फीसदी छात्र व 4.03 फीसदी छात्राएं हैं। वहीं प्रदेश में कक्षा नौ से 12 में वर्तमान में 1.07 करोड़ छात्रों का नामांकन है। ऐसे में विभाग का लक्ष्य है कि स्कूल चलो अभियान के तहत कक्षा आठ में पढ़ने वाले ज्यादा से ज्यादा छात्रों का कक्षा नौ में नामांकन कराया जाए। इसके लिए उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां नामांकन दर कम है।

    अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक बच्चे की पहचान करें और उन्हें विद्यालय लाने के लिए प्रेरित करें। स्कूल चलो अभियान की सफलता के लिए सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया जाएगा।

    Saturday, March 28, 2026

    दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने कक्षा में रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाने पर लगाई रोक, शिक्षकों पर भी नियम लागू

    दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने कक्षा में रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाने पर लगाई रोक, शिक्षकों पर भी नियम लागू

    🔴 कक्षा के दौरान रील्स, शॉर्ट वीडियो बनाने पर रोक।

    🔴 पढ़ाई का माहौल बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश।

    🔴 शैक्षणिक सामग्री अनुमति से, आपत्तिजनक सामग्री प्रतिबंधित।

    दिल्ली  शिक्षा निदेशालय ने दिल्ली के स्कूलों में पढ़ाई के दौरान रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाने पर सख्त रोक लगा दी है। यह कदम पढ़ाई के माहौल को प्रभावित करने वाली शिकायतों के बाद उठाया गया है। निर्देश में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को कक्षा के घंटों में ऐसे वीडियो बनाने से मना किया गया है।


    नई दिल्ली। स्कूलों में पढ़ाई के दौरान रील्स और शार्ट वीडियो बनाने के बढ़ते चलन पर अब सख्ती शुरू हो गई है। शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि कक्षा के घंटों में विद्यार्थी, शिक्षक या कर्मचारी किसी भी तरह के रील्स या शार्ट वीडियो न बनाएं।


    निदेशालय ने कहा कि स्कूल परिसर में मनोरंजन के लिए वीडियो बनाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सभी स्कूल प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाएं।

    केवल शिक्षा पर फोकस दिलाना उद्देश्य
    निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि कोई भी गतिविधि जो पढ़ाई-लिखाई में बाधा डाले या विद्यार्थियों का ध्यान भटकाए, उसे पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। साथ ही स्कूलों की गरिमा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है और फोकस केवल शिक्षा पर होना चाहिए।

    हालांकि, विभाग ने यह भी कहा है कि शैक्षणिक, सांस्कृतिक या जागरूकता से जुड़े कंटेंट को अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए पहले संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी लेनी होगी और शिक्षक की निगरानी में ही ऐसी गतिविधि होनी चाहिए।

    नियम उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी
    साथ ही यह भी साफ किया गया है कि स्कूल परिसर में किसी भी तरह का आपत्तिजनक, गैर-शैक्षणिक या प्रमोशनल कंटेंट रिकार्ड नहीं किया जाएगा। सभी स्कूलों को यह निर्देश तुरंत लागू करने और विद्यार्थियों व कर्मचारियों तक जानकारी पहुंचाने को कहा गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा।

    यूपी बोर्ड ने 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए जारी किया शैक्षिक कैलेंडर, करें डाउनलोड

    नए सत्र में सुबह अखबार से होगी पढ़ाई की शुरुआत, विद्यार्थियों में स्क्रीन समय घटाने और भाषा सुधारने पर रहेगा जोर,  माध्यमिक शिक्षा परिषद के शैक्षणिक कैलेंडर में अखबार पढ़ना अनिवार्य

    लखनऊअप्रैल से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र में माध्यमिक विद्यालयों की प्रार्थना सभा में छात्र-छात्राएं अखबारों की सुर्खियां पढ़ेंगे, कठिन शब्दों का अर्थ समझेंगे और भाषा पर पकड़ मजबूत करेंगे। इसके साथ ही विद्यालयों में मोबाइल लाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की पढ़ने की आदत विकसित करने और बढ़ते स्क्रीन टाइम पर लगाम लगाने के लिए समाचार पढ़ने को अब शैक्षणिक कैलेंडर का हिस्सा बना दिया गया है। इससे पहले दिसंबर में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए समाचार पढ़ना अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था।

    विद्यार्थी प्रार्थना सभा में प्रमुख समाचार पढ़ेंगे। शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी कि वे समाचारों में आए कठिन शब्दों का सही उच्चारण कराएं और उनका अर्थ व वाक्य प्रयोग भी समझाएं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और मंडलीय शिक्षा अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि विद्यालयों में छात्रों के मोबाइल लाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। परिषद का मानना है कि किशोरावस्था में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास पर प्रतिकूल असर डालता है। उनकी आंखों की रोशनी कमजोर होती है, पढ़ाई में ध्यान की कमी और आनलाइन गेम्स की लत जैसी समस्याओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।



    नए सत्र में यूपी बोर्ड स्कूलों में क्विज, ओडीओपी और रचनात्मक प्रोजेक्ट होंगे अनिवार्य, सिर्फ किताबों तक सीमित न रहकर व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल हो ऐसा होगा प्रयास

     लखनऊ: प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब पढ़ाई को ज्यादा रोचक, व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। नए शैक्षणिक सत्र से माध्यमिक स्कूलों में सामान्य ज्ञान और स्थानीय उत्पादों की जानकारी पर जोर देने के साथ रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि छात्र सिर्फ किताबों तक सीमित न रहकर व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल कर सकें। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने सत्र 2026-27 के शैक्षिक पंचांग में इन गतिविधियों को शामिल करते हुए सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं।

    एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना को भी स्कूल स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा। विद्यालयों और छात्रों को दैनिक जीवन में स्थानीय उत्पादों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    जिला स्तर पर आयोजित होने वाले शिल्प मेले और ओडीओपी से जुड़ी प्रदर्शनियों का भ्रमण भी छात्रों को कराया जाएगा ताकि वे अपने क्षेत्र की पारंपरिक कला, शिल्प और उद्योगों को करीब से समझ सकें। वहीं कक्षा नौ और 11 के छात्रों के लिए नए सत्र शुरू होने से पहले रचनात्मक प्रोजेक्ट कार्य अनिवार्य कर दिया गया है। 

    यह प्रोजेक्ट छात्रों की रुचि के अनुसार होगा और इसमें भाषा, गणित, विज्ञान, कला, संगीत और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों को शामिल करते हुए बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। छात्रों को प्रोजेक्ट के तहत विभिन्न रचनात्मक कार्य करने का अवसर मिलेगा, जैसे पढ़ी गई पुस्तकों की तुलनात्मक समीक्षा लिखना, स्वयं कहानी, कविता या नाटक लिखना, भ्रमण किए गए स्थानों का सचित्र वर्णन करना, अपने बनाए चित्रों का संग्रह तैयार करना, कोई कार्यशील माडल बनाना या कोई कलाकृति तैयार करना।



    यूपी बोर्ड के स्कूलों में जंक फूड के नुकसान बताएंगे, टिफिन में पौष्टिक खाना लाने को करेंगे प्रेरित, जागरूकता कार्यक्रम भी कराए जाएंगे

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी नए एकेडमिक कैलेंडर में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, जागरूकता और व्यावहारिक ज्ञान को प्राथमिकता दी गई है। इस बार बोर्ड ने विशेष रूप से बच्चों में बढ़ती जंक फूड की आदत को नियंत्रित करने और उन्हें पौष्टिक आहार के प्रति प्रेरित करने पर जोर दिया है।

    निर्देशों के अनुसार, स्कूलों में शिक्षकों की ओर से जंक फूड के दुष्प्रभावों के बारे में विद्यार्थियों को बताया जाएगा। इसके लिए जानकारी पूर्ण वीडियो दिखाए जाएंगे और विज्ञान क्लब जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को यह समझाया जाएगा कि पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में कौन-कौन से हानिकारक रसायन मौजूद होते हैं। 

    बोर्ड ने स्कूलों को निर्देशित किया है कि वे पौष्टिक आहार की एक सूची तैयार करें और छात्रों को उसी के अनुरूप टिफिन लाने के लिए प्रेरित करें। इससे बच्चों में संतुलित आहार की आदत विकसित होगी और उनका शारीरिक व मानसिक विकास बेहतर होगा। इसके अलावा, किशोरावस्था शिक्षा से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।



    माध्यमिक स्कूलों में सप्ताह में एक दिन अब अंग्रेजी में होगी प्रार्थना, 
    यूपी बोर्ड ने 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए जारी किया कैलेंडर

    बच्चों से रोज पढ़वाई जाएंगी अखबार की प्रमुख खबरें, कठिन शब्दों का उच्चारण, अर्थ भी बताया जाएगा

    एक अप्रैल से कक्षा नौ के विद्यार्थियों का शुरू होगा पंजीकरण

    🔴 मुख्य बिंदु

    एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र प्रारंभ।

    कक्षा नौ से 12 तक प्रथम यूनिट टेस्ट जुलाई में (बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित)।

    अर्द्धवार्षिक प्रयोगात्मक परीक्षाएं सितंबर के चौथे सप्ताह में।

    अर्द्धवार्षिक लिखित परीक्षा अक्तूबर में।

    कक्षा 10 व 12 का पाठ्यक्रम 10 जनवरी 2027 तक पूर्ण करना होगा।

    कक्षा नौ व 11 का पाठ्यक्रम 25 जनवरी 2027 तक पूर्ण करना होगा।

    प्री-बोर्ड प्रयोगात्मक परीक्षा 11 जनवरी 2027 से।

    कक्षा नौ व 11 की वार्षिक परीक्षा 1 फरवरी 2027 से।

    बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं 27 जनवरी से 10 फरवरी 2027 तक।

    बोर्ड परीक्षा फरवरी 2027 में आयोजित होगी।

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड के 29 हजार से अधिक राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन विद्यालयों में सप्ताह में एक दिन अंग्रेजी में प्रार्थना सभा होगी। बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से सोमवार को जारी शैक्षिक सत्र 2026-27 के कैलेंडर में यह व्यवस्था दी गई है। यदि विद्यालय में कोई अन्य भाषा भी पढ़ाई जाती हो तो सप्ताह में एक दिन यथासम्भव प्रार्थना सभा उस भाषा में भी संचालित की जाएगी। खास बात यह है कि एक अप्रैल को सत्र शुरू होने के साथ ही यूपी बोर्ड का पोर्टल क्रियाशील रहेगा जिस पर कक्षा नौ के विद्यार्थियों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) किया जा सकता है।

    स्कूलों को विद्यार्थियों के प्रवेश के साथ-साथ पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू करते हुए उनके विवरण जैसे नाम, पिता का नाम, माता का नाम, जन्मतिथि आदि का मिलान विद्यालयी रिकॉर्ड से किया जाएगा। हाईस्कूल और इंटर के लिए परीक्षा आवेदन करने से पहले विद्यार्थियों के विवरण का विद्यालयी अभिलेखों से मिलान करते हुए अभिभावकों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के बाद ही आवेदन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वार्षिक परीक्षा के लिए सभी विद्यार्थियों की 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएगी। प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों से पढ़वाए जाने वाले समाचार में प्रयुक्त कुछ कठिन शब्दों का उच्चारण एवं अर्थ सहित वाक्य प्रयोग भी बताया जाएगा। विद्यालय परिसर में छात्र छात्राओं को मोबाइल लाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा तथा मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक विकास पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों जैसे आंखों की रोशनी, पढ़ाई में एकाग्रता में कमी, ऑनलाइन गेम्स की लत आदि के प्रति जागरूक किया जाएगा।

    छात्र-छात्राओं की सभी परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं एवं ग्रीष्मावकाश गृहकार्य को स्कूल में सुरक्षित रखा जाएगा और यूपी बोर्ड के निर्देश पर वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग एवं साइबर अपराधों के प्रति सजग करने के लिए स्कूलों में 'साइबर क्लब' का गठन होगा। अर्द्धवार्षिक परीक्षा मासिक शैक्षिक पंचांग के अनुसार सितंबर तक पढ़ाए गए लगभग 60 प्रतिशत पाठ्यक्रम से ली जाएगी।


    वार्षिक परीक्षा के बाद करना होगा प्रोजेक्ट कार्य

    प्रयागराज। कक्षा नौ एवं 11 के विद्यार्थियों को वार्षिक परीक्षा के बाद नया सत्र शुरू होने से पहले उनकी रुचि के अनुरूप भाषा, गणित, विज्ञान, कला, संगीत, सामाजिक विज्ञान आदि विषयों को समाहित करते हुए एक रचनात्मक प्रोजेक्ट कार्य अनिवार्य रूप से दिया जाएगा। प्रोजेक्ट कार्य का चयन पूरी तरह से विद्यार्थियों की रुचि के अनुरूप किया जाएगा और सत्र शुरू होने पर विद्यार्थी अपने प्रोजेक्ट कार्य को कक्षाध्यापक / विषय अध्यापक के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों के विद्यालय निरीक्षण के समय इन प्रोजेक्ट कार्यों को उनके समक्ष अवलोकन के लिए प्रस्तुत करना होगा।


    फरवरी में होगी हाईस्कूल-इंटर की बोर्ड परीक्षा

    प्रयागराज। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं फरवरी 2027 में कराई जाएगी। इनकी प्रायोगिक परीक्षाएं 27 जनवरी से दस फरवरी 2027 तक होगी। कक्षा नौ व 11 की वार्षिक परीक्षाएं एक से दस फरवरी तक और विद्यार्थियों के अंक वेबसाइट पर मार्च के तीसरे सप्ताह तक अपलोड करने होंगे। कक्षा 12 की प्री बोर्ड प्रयोगात्मक परीक्षाएं 11 जनवरी से और लिखित परीक्षा 18 जनवरी से शुरू होगी। 10वीं-12वीं का पाठ्यक्रम पूरी करने की अंतिम तिथि दस जनवरी और नौ व 11 का कोर्स पूरा करने की आखिरी तारीख 25 जनवरी है।


    यूपी बोर्ड ने 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए जारी किया शैक्षिक कैलेंडर, करें डाउनलोड