तीसरी भाषा में लिखने-पढ़ने से अधिक अंक बोलने-सुनने पर मिलेंगे, तय किए 9वीं में तीसरी भाषा के मूल्यांकन के मानक, वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई तीसरी भाषा की अध्ययन सामग्री
सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा नौ की तीसरी भाषा (आर-3) के मूल्यांकन के मानक तय कर दिए । विद्यार्थियों को तीसरी भाषा में लखने-पढ़ने के बजाय बोलने नौर सुनने में सर्वाधिक अंक चलेंगे। नई व्यवस्था के तहत भाषा को पढ़ने व लिखने के बजाय सुनने बोलने की क्षमता विकसित करने पर अधिक जोर दिया जाएगा। सीबीएसई ने संबद्ध स्कूलों के ाचार्यों को नए मूल्यांकन ढांचे को लागू करने के निर्देश दिए हैं। तीसरी भाषा के लिए तैयार अध्ययन सामग्री एनसीईआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई है।
बोर्ड ने 'ओरल-फर्स्ट पेडागाजी' मौखिक-प्रथम शिक्षण पद्धति) को नपनाते हुए 100 अंकों के स्कूल नाधारित मूल्यांकन में सर्वाधिक ० अंक लिसनिंग और स्पीकिंग स्कल्स के लिए निर्धारित किए । इसके मुकाबले रीडिंग के नए 20, रचनात्मक लेखन के लिए 15, पाठ्यपुस्तक आधारित लेखन के लिए 10 और प्रोजेक्ट वर्क के लिए 15 अंक तय किए गए हैं। सीबीएसई के अनुसार यह पाठ्यक्रम एनसीईआरटी ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य छात्रों में भाषा को पहले सुनकर समझने और बोलने का आत्मविश्वास विकसित करना है ताकि वे स्वाभाविक रूप से भाषा का प्रयोग कर सकें। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया स्कूल स्तर पर ही संचालित होगी।
नई व्यवस्था में सुनने और बोलने का मूल्यांकन परीक्षा के बजाय पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान विभिन्न कक्षा गतिविधियों के माध्यम से किया जाएगा। शिक्षकों को निर्धारित सूची में से किसी भी आठ गतिविधियों का मूल्यांकन करना होगा और प्रत्येक गतिविधि के लिए पांच अंक निर्धारित होंगे।
इस प्रकार कुल 40 अंक सुनने और बोलने के होंगे। इन गतिविधियों में सुनकर प्रश्नों के उत्तर देना, चित्र या घटना का वर्णन करना, समूह चर्चा, स्वयं एवं परिवार का परिचय देना, रोल प्ले, वाद-विवाद, दैनिक जीवन से जुड़े संवाद और अन्य मौखिक गतिविधियां शामिल हैं। बोर्ड ने स्कूलों को छात्रों की रुचि के अनुसार गतिविधियों का चयन करने के लिए भी प्रोत्साहित किया है।
रीडिंग स्किल के लिए 20 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसमें अध्ययन सामग्री से लगभग 100-100 शब्दों के दो पठित गद्यांश दिए जाएंगे, जिन पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न, सही-गलत, रिक्त स्थान पूर्ति और अति लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे। रचनात्मक लेखन (क्रिएटिव राइटिंग) के लिए 15 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसमें 30-40 शब्दों का अनौपचारिक निमंत्रण या संदेश, चित्र वर्णन, 100 शब्दों तक की सरल कहानी और दैनिक जीवन की परिस्थितियों पर आधारित संवाद लेखन शामिल होगा। इसके अतिरिक्त पाठ्य सामग्री पर आधारित लेखन कौशल के लिए 10 अंक निर्धारित किए गए जिनमें लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे। हैं,
बोर्ड ने 15 अंकों का प्रोजेक्ट वर्क भी अनिवार्य किया है। इसके लिए स्थानीय रीति-रिवाज, त्योहार, लोक कला, तकनीकी नवाचार, स्थानीय साहित्यकार या क्षेत्रीय संस्कृति जैसे विषय सुझाए गए हैं। सीबीएसई ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रोजेक्ट का मूल्यांकन उसकी सजावट के आधार पर नहीं, बल्कि छात्र की मौलिकता, शोध, समझ और विषयवस्तु की गुणवत्ता के आधार पर किया जाएगा। प्रोजेक्ट के साथ पांच अंकों का मौखिक परीक्षण (वाइवा) भी होगा।
सातवीं से नौवीं तक तीसरी भाषा में नहीं देनी होगी परीक्षा, विस्तृत दिशा-निर्देश जारी CBSE ने बताया कि तीन भाषा पढ़ाए जाने की नई व्यवस्था पूरी तरह से कक्षा छह में लागू होगी
नई दिल्लीः राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत लागू की जा रही तीन-भाषा नीति को लेकर विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्कूलों में चल रही तमाम उलझनों पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार को विराम लगा दिया। बोर्ड ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर साफ किया है कि तीन भाषा पढ़ाए जाने की नई व्यवस्था पूरी तरह से कक्षा छह में लागू की जाएगी। कक्षा नौवीं और 10वीं के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। कक्षा सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा पढ़नी तो होगी, लेकिन 10वीं की बोर्ड में उन्हें तीसरी भाषा का पेपर नहीं देना होगा।
बोर्ड के अनुसार, तीन-भाषा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं से जोड़ना बहुभाषी बनाना है। इसी कारण मौजूदा बैचों को राहत दी गई है, नई व्यवस्था को पूरी तरह वर्तमान कक्षा छह से लागू किया जाएगा।
इन छात्रों को मिलेगी छूटः दिव्यांग छात्रों को तीसरी भाषा की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। विदेशों में स्थित सीबीएसई स्कूलों और विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को भी भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा। यदि छात्र के माता-पिता का दूसरे राज्य में तबादला होता है, तो छात्र चुने गए भाषा संयोजन को जारी रख सकेगा।
सीबीएसई: किस कक्षा के लिए क्या है नियम
कक्षा 10: इस बैच के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। छात्र पहले की तरह दो भाषाओं के साथ ही बोर्ड परीक्षा देंगे। तीसरी भाषा न पढ़नी होगी और न उसकी बोर्ड परीक्षा होगी।
कक्षा नौः इस बैच के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। हालांकि, जब ये छात्र अगले वर्ष कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा से होगा।
कक्षा सात व आठः इन छात्रों के लिए भी यही व्यवस्था रहेगी। तीसरी भाषा पढ़नी होगी, लेकिन 10वीं की बोर्ड में उसकी परीक्षा नहीं होगी। मूल्यांकन स्कूल करेगा।
कक्षा छहः यही पहला बैच होगा, जिस पर तीन-भाषा नीति पूरी तरह लागू होगी। इन छात्रों को कक्षा छह से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी और जब ये कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा (आर-3) की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी।
उदाहरण से समझें: यदि कोई छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएं, जैसे हिंदी और संस्कृत, या हिंदी और तमिल पढ़ रहा है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में एक और भारतीय भाषा या अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश जैसी विदेशी भाषा चुन सकता है। यदि छात्र एक भारतीय भाषा और एक विदेशी भाषा, जैसे हिंदी और अंग्रेजी पढ़ रहा है, तो उसे तीसरी भाषा के रूप में एक भारतीय भाषा ही लेनी होगी, ताकि तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल रहें।
वहीं, जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं, जैसे अंग्रेजी और फ्रेंच या अंग्रेजी और जर्मन चुनी हुई हैं, उन्हें भी राहत दी गई है। वर्तमान में सातवीं, आठवीं और नौवीं के ऐसे छात्र अपनी दोनों विदेशी भाषाएं जारी रख सकेंगे, लेकिन उनके साथ एक भारतीय भाषा भी जोड़नी होगी।
सीबीएसई : 10वीं तक नहीं बदलनी होगी विदेशी भाषा, तीन भाषाओं वाली नीति में विद्यार्थियों को बड़ी राहत
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों में तीन भाषाओं वाली नीति (त्रि-भाषा फॉर्मूला) को लेकर भ्रम को दूर किया है, जिससे लाखों छात्रों को बड़ी राहत मिली है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ने वाले जिन विद्यार्थियों ने त्रि-भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाओं को चुना है, उन्हें मौजूदा भाषाएं बदलने की जरूरत नहीं है। ये विद्यार्थी कक्षा 10 तक अपनी चुनी भाषाओं के साथ पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नई भाषा नीति के तहत कम के कम दो भारतीय भाषाओं को पढ़ने की अनिवार्यता को आगामी सत्र से केवल कक्षा 6 से लागू किया जाएगा। इसे कक्षा 7 से 9 में पहले से पढ़ रहे विद्यार्थियों पर नहीं थोपा जाएगा। सीबीएसई ने मई में जारी सर्कुलर में कहा था कि 1 जुलाई से कक्षा 9 में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड के इस नियम के खिलाफ विद्यार्थियों और अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था और कई विद्यार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था।
पहले अनिवार्य की थीं तीन भाषाएं
बोर्ड ने 15 मई को सर्कुलर में कहा था कि जब तक तीसरी भाषा की नई पुस्तकें नहीं आ जाती हैं, तब तक कक्षा 9 के विद्यार्थी चुनी भाषा के लिए कक्षा 6 की किताबों का इस्तेमाल करेंगे। अप्रैल में, सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से त्रि-भाषा नीति लागू करने और कक्षा 9 के लिए गणित व विज्ञान के लिए दो-स्तरीय प्रणाली शुरू करने की घोषणा की थी।