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Tuesday, August 22, 2119

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    Monday, September 14, 2026

    स्पेशल TET में शामिल होने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों की दो याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर

    स्पेशल TET में शामिल होने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों की दो याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर


    प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों को 'स्पेशल TET' (विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा) में शामिल किए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। शिक्षामित्रों की इस पहल से परीक्षा में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों की नजरें अब अदालत के आगामी फैसलों पर टिक गई हैं।


    शिक्षामित्रों द्वारा दायर याचिकाओं और उनकी स्थिति का विवरण निम्न प्रकार है:


    Writ A 14346/2026 (प्रतीक मिश्रा व अन्य): इस याचिका पर 10 सितंबर 2026 को प्रारंभिक सुनवाई संपन्न हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने इसकी अगली सुनवाई की तिथि 16 सितंबर 2026 तय की है।

    Writ A 14495/2026 (कुमारी गुलाबी व अन्य): शिक्षामित्रों द्वारा राहत की मांग को लेकर दाखिल की गई इस दूसरी याचिका पर आज 14 सितंबर 2026 को उच्च न्यायालय की पीठ में सुनवाई होनी तय हुई है।

    इन दोनों ही याचिकाओं के माध्यम से शिक्षामित्रों ने माननीय न्यायालय से प्रार्थना (Prayer) की है कि उन्हें भी स्पेशल TET परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए। 14 और 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि अदालत शिक्षामित्रों को इस परीक्षा में बैठने की अनुमति देती है या नहीं।


    यूपीटीईटी पास 38.05 लाख, विज्ञापित पद सिर्फ 3.22 लाख, उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की तुलना में मात्र 8.46 प्रतिशत पद विज्ञापित

    यूपीटीईटी पास 38.05 लाख, विज्ञापित पद सिर्फ 3.22 लाख,  उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की तुलना में मात्र 8.46 प्रतिशत पद विज्ञापित

    वर्ष 2011 में पहली बार शुरू की गई शिक्षक पात्रता परीक्षा


    प्रयागराजप्रदेश के विभिन्न जिलों में शिक्षक भर्ती को लेकर आंदोलन चल रहे हैं। प्रयागराज में भी लंबे समय से धरना और ज्ञापन का सिलसिला चल रहा है। कभी शिक्षा सेवा चयन आयोग तो कभी सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी या सिविललाइंस के धरना स्थल पर प्रतियोगी छात्रों की मांगों की गूंज सुनाई देती है। उनका कहना है कि नौकरियों के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। अब तक पदों का विज्ञापन कितना सीमित रहा, इसी से अनुमान लगा सकते हैं कि वर्ष 2011 में पहली बार शिक्षक पात्रता परीक्षा कराई गई। इसमें 270806 अभ्यर्थी सफल हुए। यदि इस वर्ष तक की परीक्षा के आंकड़े को जोड़ दें तो प्रदेश में कुल 3805377 प्रतियोगी छात्र छात्राओं ने शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। 2011 से अब तक के पदों के विज्ञापन का कुल आंकड़ा देखें तो मात्र 321917 पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए।


    अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने वालों और पदों के विज्ञापन के आंकड़े को देखें तो मात्र 8.46 प्रतिशत पद विज्ञापित हुए। इनमें भी बहुत से पदों को लेकर न्यायालय में प्रकरण लंबित हैं। वर्ष 2013 में 102755 अभ्यर्थियों ने टीईटी पास की। इसमें 27882 प्राथमिक स्तर के, 74873 उच्च प्राथमिक के अभ्यर्थी रहे। 2014 में यह संख्या 184700 पहुंच गई। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक के क्रमशः 71331 व 123369 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। 2015 में उत्तीर्ण 146415 अभ्यर्थियों में प्राथमिक के 59062 व उच्च प्राथमिक के 87353 रहे। वर्ष 2016, 2017, 2018 और 2019 में क्रमशः 75364, 94311, 574783 और 354703 अभ्यर्थियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफता प्राप्त की। 2021 में यह आंकड़ा 660592 रहा। 


    इन सब के लिए शिक्षक बनने के अवसर पर नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2011 में प्राथमिक सतर पर बेसिक शिक्षा विभाग ने 72825 पदों का विज्ञापन जारी किया। 2012 में 9770 पद विज्ञापित हुए। 2013 में तीन बार पदों का विज्ञापन हुआ। एक बार 10800, दूसरी पर 10000 तीसी पर उर्दू के लिए 4280 पदों के विज्ञापन आए। 2015 में 15000, 2016 में उर्दू के 3500 पद और सामान्य शिक्षक भर्ती के 16448 और 12460 पदों का विज्ञापन जारी हुआ। 2018-19 में 69000 शिक्षक भर्ती का विज्ञापन आया। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान और गणित विषय की भर्ती का विज्ञापन भी 2013 में आया। उनकी संख्या 29334 रही।


     2018 के बाद से प्रतियोगी छात्र छात्राओं को भर्ती का इंतजार है। इसके लिए वे निरंतर आंदोलन कर रहे हैं। माना जा रहा है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती के करीब 60000 पद रिक्त हैं। उधर, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद सुरेन्द्र कुमार तिवारी का कहना है कि अभी नगर क्षेत्र के लिए 11500 शिक्षकों की भर्ती के लिए अधियान भेजा गया है, शेष के लिए प्रक्रिया चल रही है।

    यूपी सैनिक स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन शुरू, 25 अक्टूबर आवेदन की अंतिम तारीख

    यूपी सैनिक स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन शुरू, 25 अक्टूबर आवेदन की अंतिम तारीख 

    लखनऊ : देश के पहले सैनिक स्कूल में वर्ष 2027-28 के प्रवेश के लिए आनलाइन आवेदनbशुरू हो गए हैं। कैप्टन मनोज पांडेय यूपी सैनिक स्कूल में कक्षा छह में बालक और कक्षा नौ में बालक व बालिकाओं के प्रवेश होंगे। इसी के साथ सैनिक स्कूल गोरखपुर में भी समान नियमों के तहत प्रवेश होंगे।


    आनलाइन फार्म सैनिक स्कूल की वेबसाइट upsainikschool.org पर 25 अक्टूबर तक भरे जा सकेंगे। आनलाइन आवेदन की फीस एक हजार रुपये है। इसके बाद 26 से 31 अक्टूबर तक लेट फीस के साथ दो हजार रुपये जमा कर फार्म भरे जा सकेंगे। 

    आनलाइन फार्म भरने वाले बच्चों की प्रवेश परीक्षा लखनऊ, आगरा, अयोध्या, बरेली l, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, मेरठ, प्रयागराज और वाराणसी में होगी। अभ्यर्थी अधिकतम तीन शहरों का विकल्प दे सकते हैं। स्कूल प्रशासन उसमें से एक शहर का सेंटर आवंटित करेगा। 

    लिखित परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों का इंटरव्यू होगा। इंटरव्यू से पहले निर्धारित प्रारूप के तहत मेडिकल में सफल होना जरूरी है। लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और मेडिकल के आधार पर अंतिम चयन सूची तैयार होगी। लिखित परीक्षा का परिणाम परीक्षा के दस दिन के बाद स्कूल की वेबसाइट पर देखा जा सकेगा। आनलाइन अप्लीकेशन समय यदि कोई त्रुटि हो गई है तो उसे एडिट करने के लिए तीन से पांच नवंबर तक संशोधन विंडो खुली रहेगी।

    छात्राओं को जनवरी तक मिलेगी स्कूटी, 40 हजार स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जेम पोर्टल पर बिड की जारी

    छात्राओं को जनवरी तक मिलेगी स्कूटी, 40 हजार स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जेम पोर्टल पर बिड की जारी

    13 सितंबर 2026
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत 40 हजार मेधावी छात्राओं को जनवरी तक स्कूटी देने की तैयारी है। 40 हजार स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जेम पोर्टल पर बिड जारी की है। चयनित कंपनी को सिर्फ 100 दिनों में स्कूटी आपूर्ति करनी होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने सितंबर अंत तक खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी की है। उसके बाद 100 दिन सप्लाई में लगेगा। इस लिहाज से जनवरी तक छात्राओं को स्कूटी मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि स्कूटी की डिलीवरी प्रदेश के सभी 75 जिला/मंडल मुख्यालयों पर की जाएगी।

    प्रत्येक स्थान पर कितनी स्कूटी भेजी जाएंगी, इसकी जानकारी खरीद आदेश के समय देंगे। इस बीच छात्राओं की चयन सूची भी तैयार हो जाएगी। हालांकि अधिकारियों ने स्कूटी की संख्या 25 प्रतिशत तक बढ़ाने या घटाने का प्रावधान रखा है ताकि यदि लाभार्थियों की संख्या बढ़ती है तो अतिरिक्त वाहनों की सप्लाई में किसी तरह की कोई परेशानी न होने पाए। यही नहीं यह संख्या आवश्यकता पड़ने पर 25 फीसदी से भी अधिक बढ़ या घट सकती है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. मोनिका सिंह के अनुसार स्कूटी खरीद के लिए विक्रेताओं से 21 सितंबर को 12 बजे से ऑनलाइन बैठक होगी।

    स्कूटी के साथ कई एसेसरीज भी अनिवार्य

    हर स्कूटी के साथ एक आईएस 4151:2015 मानक का हेलमेट और चार लीटर पेट्रोल भी दिया जाएगा। स्कूटी के साथ कई एसेसरीज जैसे गार्ड किट, ग्रिप कवर, किक रबर, सीट कवर आदि भी अनिवार्य है। स्कूटी बीएस सिक्स, ऑटोमैटिक और ट्यूबलेस टायर वाला होगा।



    मेधावी के साथ निराश्रित-दिव्यांग छात्राओं को भी मिलेगी स्कूटी,  उच्च शिक्षा विभाग ने सभी राज्य व निजी विवि से मांगी जानकारी

    12 अगस्त 2026
    लखनऊ। प्रदेश में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को जल्द लागू करने की कवायद तेज हो गई है। योजना के तहत वर्ष 2025-26 में अंतिम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं के साथ निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं को भी स्कूटी दी जाएगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सभी राज्य व निजी विश्वविद्यालयों से पात्र छात्राओं का ब्योरा मांगा है।

    योजना के तहत ऐसी छात्राओं को भी लाभ दिया जाएगा, जिनके माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु हो गई हो और परिवार में भरण-पोषण करने वाला कोई अन्य सदस्य न हो। वहीं, मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी, स्ट्रोक, सेरेब्रल पाल्सी, हीमोफिलिया आदि से ग्रस्त दिव्यांग छात्राओं को भी योजना में शामिल किया जाएगा। इसके लिए उनकी दृष्टि व मानसिक स्थिति ठीक होना जरूरी है। साथ ही कमर के ऊपर का हिस्सा स्वस्थ होने के कारण वे मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल चलाने में सक्षम हों और मुख्य चिकित्साधिकारी ने उनकी दिव्यांगता 80 फीसदी या उससे अधिक प्रमाणित की हो। ऐसी छात्राओं को दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की नियमावली के अनुसार स्कूटी दी जाएगी।

    उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव सर्वेश कुमार सिंह ने सभी राज्य व निजी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक और उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा है। इसमें वर्ष 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं की संख्या समेत अन्य जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    50 हजार छात्राओं को देंगे स्कूटी: रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए सरकार ने 400 करोड़ का बजट आवंटित किया है। इससे 50 हजार से अधिक छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी की खरीद जिला स्तर पर होगी।



    कम विद्यार्थियों वाले पाठ्यक्रमों में राहत, टॉप पांच प्रतिशत मेधावियों का होगा चयन पाठ्यक्रम में विद्यार्थी कम हुए तो भी एक मेधावी छात्रा को मिलेगी स्कूटी

    400 करोड़ रुपये का बजट उच्च शिक्षा विभाग के पास है, 50 हजार छात्राओं को पहले चरण में ही मिल सकती है स्कूटी

    कुछ पाठ्यक्रमों में टॉप फाइव प्रतिशत निकालने में आ रही है समस्या

    11 अगस्त 2026
    लखनऊ। यूपी में विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में ऐसे पाठ्यक्रम जिसमें बहुत कम विद्यार्थी हैं, उसमें भी न्यूनतम एक मेधावी छात्रा को स्कूटी दी जाएगी। विभिन्न पाठ्यक्रमों में टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी मिलेगी। कुछ पाठ्यक्रमों में टॉप पांच प्रतिशत निकालने पर एक से कम संख्या आ रही है। ऐसे में कम से कम एक छात्रा को स्कूटी मिलेगी।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों से मेधावी छात्राओं के संबंध में जानकारी मांगी गई है। शैक्षिक सत्र 2025-26 में 80 प्रतिशत से अधिक अंक पाकर स्नातक पास करने वाली मेधावी छात्राओं के परीक्षा परिणाम सहित जानकारी, शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक द्वितीय वर्ष पास करने वाली वह छात्राएं, जिनके 80 प्रतिशत से अधिक अंक हैं या आठ से अधिक सीजीपीए (क्यूमेलेटिव ग्रेड प्वाइंट  ऐवरेज) है। 

    वहीं 2025-26 में स्नातक द्वितीय वर्ष 85 प्रतिशत अंक या फिर 8.5 सीजीपीए व इससे अधिक पाने वाली मेधावी छात्राओं और इससे भी अधिक अंक प्रतिशत पाने वाली मेधावी छात्राओं के बारे में जानकारी मांगी गई है। पोर्टल पर रिजल्ट को अपलोड कर उसकी टेस्टिंग का काम भी शुरू हो गया है और सभी संस्थानों से डाटा लेकर उसका सत्यापन भी किया जाएगा। 

    बैचलर आफ वोकेशनल व फाइन आर्ट्स सहित कई कोर्स ऐसे हैं, जिसमें टॉप पांच मेधावी छात्राओं की संख्या एक से कम आ रही है। ऐसे में अब कम से कम एक मेधावी छात्रा को स्कूटी मिलेगी। ऐसे कोर्स जिसमें 80 प्रतिशत तक अंक पाने वाली टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं की संख्या एक से कम आ रही है तो भी उसमें किसी न किसी एक सर्वाधिक अंक पाने वाली छात्रा को स्कूटी देने की तैयारी है।


    विश्वविद्यालय-कॉलेजों से मंगवाए जा रहे आंकड़े

    फिलहाल उच्च शिक्षा विभाग विश्वविद्यालय व कॉलेजों से आंकड़े मंगवाने के साथ-साथ कम छात्र संख्या वाले कोर्स व मानक के अनुसार अंक प्रतिशत न होने पर उस कोर्स की मेधावी छात्रा को राहत देने पर मंथन कर रहा है। जिससे उन्हें भी मुफ्त स्कूटी मिल सके। फिलहाल मेधावी छात्राओं को जल्द इसका तोहफा देने की तैयारी है।

    स्कूटी के लिए जरूरत पर बजट बढ़ाया जाएगा

    विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं को स्कूटी मिलेगी। न्यूनतम 80 प्रतिशत तक अंक पाने वाली छात्राओं को इसमें शामिल किया गया है। करीब 400 करोड़ रुपये का बजट उच्च शिक्षा विभाग के पास है। ऐसे में पहले चरण में ही 50 हजार छात्राओं को स्कूटी मिल सकती है। आगे और मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने के लिए जरूरत के अनुसार बजट बढ़ाया जाएगा।




    स्नातक पास 50 हजार बेटियों को स्कूटी, टॉप पांच फीसदी मेधावी छात्राओं को मिलेगा इनाम, यूपी कैबिनेट की मंजूरी

    22 जुलाई 2026
    लखनऊ। उच्च शिक्षा के प्रति छात्राओं का रुझान बढ़ाने और उनकी पढ़ाई की राह आसान करने के लिए प्रदेश सरकार स्नातक पास 50 हजार छात्राओं को स्कूटी देगी। योजना का लाभ सत्र 2025-26 में स्नातक पास करने वाली टॉप 5 प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मेरिट के आधार पर मिलेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग की रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना की नियमावली को हरी झंडी दी गई। इस पर इस वित्तीय वर्ष में 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    योजना का लाभ उन्हीं छात्राओं को मिलेगा जिनके परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से कम हो। उत्तर प्रदेश की मूल निवासी हो और राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों तथा राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त व स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी मिलेगी। स्कूटी के साथ ही पंजीकरण शुल्क, व्यापक वाहन बीमा, हेलमेट, 5 लीटर पेट्रोल तथा सभी आवश्यक एक्सेसरीज भी मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य छात्राओं की ड्रॉपआउट दर कम करना, उच्च शिक्षा में उपस्थिति बढ़ाना, उच्च शिक्षण संस्थानों तक उनका आवागमन सुविधाजनक करना और सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि करना है। स्कूटी मिलने से विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंचने में आसानी होगी। स्कूटी की खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल से की जाएगी।

    शहीद परिवार दिव्यांग, निराश्रितों को मेरिट में छूट
    योजना में दिव्यांग, निराश्रित (जिनके माता-पिता नहीं हैं) और शहीद परिवार की बेटियों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। उन्हें मेरिट में छूट दी जाएगी। उनके लिए केवल स्नातक उत्तीर्ण होना ही अनिवार्य होगा।

    राज्यपाल की नाराजगी के बाद संशोधित हुए नियम
    उच्च शिक्षा विभाग ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नाराजगी के बाद नियमों में संशोधन किया है। राज्यपाल ने अलीगढ़ में दीक्षांत समारोह के दौरान उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्कूटी देने के लिए 90 से 80 फीसदी अंक पाने की शर्त पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि शहरी क्षेत्र में तो छात्राएं इतने अंक पा सकेंगी लेकिन क्या ग्रामीण क्षेत्र की छात्राएं इसमें शामिल हो पाएंगी। विभाग को अपने नियम की समीक्षा करनी चाहिए। इसके बाद विभाग ने नियमों में संशोधन करते हुए स्नातक की टॉप पांच फीसदी छात्राओं को स्कूटी देने का निर्णय लिया है।

    ऐसे मिलेगा लाभ... विश्वविद्यालय तैयार करेंगे सूची, पोर्टल पर होगी अपलोड
    लखनऊ। रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के लिए उच्च शिक्षा विभाग जल्द पोर्टल तैयार करेगा। राज्य विश्वविद्यालयों व उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में पंजीकृत छात्राओं की पात्रता सूची विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की जाएगी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर से सूची प्रमाणित व सत्यापित की जाएगी। इस सूची को विश्वविद्यालयों द्वारा संबंधित डीएम, निदेशक उच्च शिक्षा को विभाग की ओर से तैयार पोर्टल पर भेजी जाएगी। पोर्टल पर जिलावार सूची दिखाई जाएगी। इसका सत्यापन डीएम द्वारा कराया जाएगा। सत्यापन के बाद पोर्टल पर ही चयनित वेंडर के माध्यम से छात्राओं को स्कूटी का आवंटन भी डीएम द्वारा कराया जाएगा। हर जिले में समारोह आयोजित कर मेधावी छात्राओं को स्कूटी वितरित की जाएगी। हर जिले में एक सर्विस सेंटर भी बनाया जाएगा और एक शिकायत निवारण पोर्टल भी होगा।



    राज्यपाल की नाराजगी के बाद मेधावी व जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी मिले, इसके लिए स्कूटी योजना के लिए प्रस्ताव में होगा संशोधन

    17 जुलाई 2026
    लखनऊ। प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में मेधावी व जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी मिले, इसके लिए कुछ संशोधन किए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 80 से 90 प्रतिशत अंक पाने वाली छात्राओं को स्कूटी देने का जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, अब उसमें संशोधन किया जा रहा है। परिवार की वार्षिक आय की सीमा को भी कम किया जाएगा।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, उस पर बीते दिनों अलीगढ़ में एक दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि गांव व कस्बों की जरूरतमंद छात्राओं को स्कूटी मिले इस तरह नियम तैयार किए जाएं। ऐसे में 80 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक और गरीब परिवार की छात्राओं को स्कूटी मिले, इसके हिसाब से नियम तैयार किए जा रहे हैं। 



    मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की नियमावली तैयार, 85% से अधिक अंक पाने वाली छात्राओं को मिलेगा लाभ

    6 जुलाई 2026
    लखनऊ। राज्य विवि व महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा की पढ़ाई कर रही मेधावी छात्राओं को रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी वितरण की तैयारी तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इसकी नियमावली तैयार कर ली गई है। जल्द ही इसको कैबिनेट से मंजूरी दिलाई जाएगी। 

    विभाग स्नातक अंतिम वर्ष की मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी में है। 85% से अधिक अंक पाने वाली छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। विभाग एनआईसी के सहयोग से इसके लिए सॉफ्टवेयर भी तैयार करा रहा है। जिसकी मदद से विवि व कॉलेजों के रिजल्ट के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी। 10 से 12 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवार की मेधावी छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। 

    बता दें, इसके लिए सरकार ने 400 करोड़ रुपये का प्रावधान पहले ही कर चुकी है। इससे लगभग 50 हजार मेधावी छात्राओं को पहले चरण में स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी वितरण से जुड़ी तैयारियां आखिरी चरण में है। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद इसकी बाकी औपचारिकता पूरी की जाएगी। 



    परिवार की आय 12 लाख रुपये से कम होने पर ही मिलेगी स्कूटी, रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को लेकर उच्च शिक्षा विभाग की तैयारी तेज

    उच्च शिक्षा मंत्री बोले- छात्राओं को दी जाएगी पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी

    16 जून 2026
    लखनऊ। प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ने वाली लगभग 50 हजार छात्राओं को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी देने की कवायद तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है कि जिन छात्राओं के परिवार की सालाना आय 10 से 12 लाख रुपये से कम होगी, उनको स्कूटी दी जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने स्कूटी देने की कवायद तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों से 80, 85 व 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली पहले वर्ष की छात्राओं का डाटा लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि स्कूटी वितरण के लिए नियमावली तैयार हो रही है।

    स्नातक प्रथम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक नंबर लाने वाली छात्राओं को इसमें शामिल किया जाएगा। इसमें सालाना आय सीमा का भी प्रावधान किया जा रहा है। इसके लिए सालाना 10 से 12 लाख रुपये की आय सीमा तय की जा रही है। उन्होंने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी दी जाएगी।



    उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत यूपी की 70 हजार छात्राओं को मिलेगी इलेक्ट्रिक स्कूटी

    15 मई 2026
    प्रयागराज। उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत छात्राओं को स्कूटी देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को विधानसभा चुनाव से पहले धरातल की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से घोषित रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए पात्र छात्राओं की सूची बनाई जा रही है।


    खास बात यह है कि छात्राओं को ईंधन पर खर्च खत्म करने और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी वितरित की जाएगी। एक स्कूटी लगभग 55 हजार रुपये की पड़ रही है।

    इस लिहाज से 400 करोड़ में 72,727 स्कूटी पड़ रही है। कुछ बजट आयोजन वगैरह पर भी पड़ेगा। इसलिए 70 हजार से अधिक छात्राओं को वाहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि अभी लाभार्थियों की संख्या का निर्धारण नहीं हो सका है। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुति भी दे दी है। माना जा रहा है कि छह महीने के अंदर स्कूटी का वितरण हो जाएगा।

     मुख्यमंत्री ने भी महिला दिवस (आठ मार्च) को जल्द स्कूटी वितरित करने की बात कही थी। सरकार ने 20 फरवरी 2025 को इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया के साथ ही स्कूटी की विशिष्टताएं निर्धारित करने के लिए 11 मार्च 2025 को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गई थी। 

    हालांकि पिछले साल कोई ठोस पहल नहीं हो सकी थी। शिक्षा निदेशालय के अफसरों ने विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थाओं से पिछले साल स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष पास करने वाली छात्राओं की सूची मांगी है। स्कूटी वितरण में सभी वर्ग का भी ध्यान रखा जाएगा। जिस प्रकार नौकरी में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिलता है उसी प्रकार स्कूटी वितरण में भी सभी वर्ग की छात्राओं को लाभ दिया जाएगा।

    योजना से ग्रामीण इलाके की छात्राओं को लाभ
     इस महत्वाकांक्षी योजना का सर्वाधिक लाभ ग्रामीण इलाके की छात्राओं को होगा। अमूमन छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर कॉलेज जाना पड़ता है, विशेषकर ग्रामीण इलाके की छात्राओं को रोजाना कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्कूटी की सहायता से छात्राओं को घर से कॉलेज आने-जाने में आसानी होगी और समय भी बचेगा, जिससे वह अन्य कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी।

    शिक्षामित्रों को भी मिले टीईटी में शामिल होने का अवसर, प्रदेश में करीब 70 हजार शिक्षामित्र नहीं पास हैं टीईटी, आंदोलन करने की तैयारी

    विशेष टीईटी से शिक्षामित्रों को बाहर रखने पर पनप रहा आक्रोश

    प्रयागराज। विशेष टीईटी के शासनादेश में शिक्षामित्रों को शामिल नहीं किए जाने के विरोध में प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। रविवार को चंद्रशेखर आजाद पार्क में आयोजित संघ की बैठक में विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल करने के साथ ही टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को उनके शिक्षण अनुभव का लाभ देते हुए सुपर टेट में छूट प्रदान कर नियमित किए जाने की मांग उठाई गई।

    वक्ताओं ने कहा कि शिक्षामित्र कोई नए अभ्यर्थी नहीं हैं, बल्कि वे लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी योग्यता, सेवाकाल और अनुभव को नजरअंदाज कर विशेष टीईटी से बाहर रखना उचित नहीं है।

     प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने कहा कि शिक्षामित्रों ने वर्षों तक ग्रामीण और दूरदराज के विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि जिस शिक्षामित्र ने वर्षों तक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाया है, उसके अनुभव को किसी भी चयन प्रक्रिया में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को शिक्षामित्रों की वास्तविक स्थिति को समझते हुए विशेष टीईटी में उन्हें शामिल करना चाहिए। अनदेखी किए जाने पर आवाज बुलंद की जाएगी।



    शिक्षामित्रों को भी मिले टीईटी में शामिल होने का अवसर, प्रदेश में करीब 70 हजार शिक्षामित्र नहीं पास हैं टीईटी,  आंदोलन करने की तैयारी

    प्रयागराज। शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी आयोजित कराए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस परीक्षा में शिक्षामित्रों को नहीं शामिल किया गया है। इससे शिक्षामित्रों में नाराजगी है। प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की ओर से मांग की गई है कि इस पर सरकार को विचार करने की जरूरत है।


    शिक्षामित्र भी लंबे समय से विद्यालयों में कार्यरत हैं और बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों ने सेवा के दौरान बीटीसी प्रशिक्षण पूरा किया है। इसके बावजूद उन्हें विभागीय टीईटी का अवसर न दिया जाना गलत है। करीब 1.43 लाख में करीब 70 हजार शिक्षामित्र हैं जो टीईटी पास नहीं हैं।

    प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष वसीम अहमद ने कहा, "सरकार जब सेवारत अध्यापकों को विभागीय टीईटी के माध्यम से अपनी पात्रता पूरी करने का अवसर दे सकती है तो 26 वर्षों से विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षामित्रों के लिए ऐसा अवसर क्यों नहीं? यदि शिक्षामित्रों शिक्षामित्रा को नजरअंदाज किया गया तो प्रयागराज से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू होगा।"

    संघ के जिला महामंत्री सुनील तिवारी ने कहा, "एक तरफ सेवारत अध्यापकों के लिए विशेष टीईटी की व्यवस्था की जा रही है और दूसरी तरफ शिक्षामित्रों को उस अवसर से वंचित किया जा रहा है।

    पुरानी पेंशन बहाली के लिए 25 को होगी रैली, अटेवा पेंशन बचाओ मंच ने की तैयारियां तेज

    पुरानी पेंशन बहाली के लिए 25 को होगी रैली, अटेवा पेंशन बचाओ मंच ने की तैयारियां तेज

    अटेवा की अगुवाई में हुई बैठक में बनी रणनीति

    लखनऊ। अटेवा पेंशन बचाओ मंच ने 25 सितंबर को लखनऊ में होने वाली रैली की तैयारियों के सिलसिले में रविवार को स्व. डॉ. रामाशीष स्मृति भवन पारा में बैठक की। इसमें रैली की सफलता के लिए पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।


    अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण की समाप्ति और टीईटी की अनिवार्यता की समाप्ति के लिए होने वाली इस रैली से प्रदेश के शिक्षकों, कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण की समाप्ति और टेट की अनिवार्यता का रास्ता साफ होगा। प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरजपति त्रिपाठी ने सभी शिक्षक, कर्मचारी संगठनों का आह्वान किया कि पुरानी पेंशन बहाली की लड़ाई हम सब की लड़ाई है। इसलिए 25 सितंबर को सभी संघ इस लड़ाई में अटेवा का साथ दें। 

    प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि पुरानी पेंशन राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश में बहाल हो चुकी है, अब उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली का समय आ गया है। बैठक को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महासंघ के अशोक कुमार, अटेवा के प्रदेशीय उपाध्यक्ष चंद्रहास सिंह, राकेश रमन, ओमप्रकाश कन्नौजिया और जनार्दन शुक्ला ने भी संबोधित किया।

    अब यूपी प्रमाण पोर्टल से होगी शैक्षिक गुणवत्ता की निगरानी, तीन विशेष सचिव व एक संयुक्त सचिव को बनाया नोडल अधिकारी

    अब यूपी प्रमाण पोर्टल से होगी शैक्षिक गुणवत्ता की निगरानी, तीन विशेष सचिव व एक संयुक्त सचिव को बनाया नोडल अधिकारी


    लखनऊ। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षिक गुणवत्ता की निगरानी के लिए नई व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में प्रवेश, पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम की नियमित निगरानी की जाएगी। विभाग ने परफॉरमेंस, रैंकिंग, इवैलुएशन एंड मॉनिटरिंग ऑफ यूपी हायर एजुकेशन एकेडमिक नेटवर्क (यूपी प्रमाण) पोर्टल लॉन्च किया है।

    प्रदेश को चार भागों में बांटकर तीन विशेष सचिव और एक संयुक्त सचिव को नोडल अधिकारी बनाया गया है। विभाग हर साल शैक्षिक कैलेंडर जारी करता है, पर राज्य विश्वविद्यालय इसका अनुपालन नहीं करते। शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के लिए नियमित मॉनिटरिंग का निर्णय लिया गया है। विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली के पर्यवेक्षण के लिए केपीआई आधारित डैशबोर्ड समीक्षा व्यवस्था लागू हुई है। इससे प्रवेश प्रक्रिया, शिक्षण, शैक्षणिक कैलेंडर, परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम का पर्यवेक्षण होगा। छात्र व शिक्षक उपस्थिति और गुणवत्ता सुधार भी इसमें शामिल हैं। सभी राज्य, राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त व स्ववित्तपोषित महाविद्यालय इसके दायरे में आएंगे।



    हर महीने विभाग को देंगे अपनी रिपोर्ट

    उच्च शिक्षा विभाग के उप सचिव राम जन्म चौहान ने कुलसचिवों को पत्र भेजा है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों को यूपी प्रमाण पोर्टल पर सक्रिय रहने को कहा। निर्धारित सूचना समय से अपलोड करने और सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं। नोडल अधिकारी अपने जोन की मासिक रिपोर्ट तैयार करेंगे। यह रिपोर्ट सचिव उच्च शिक्षा को सौंपी जाएगी। सचिव उच्च शिक्षा इस रिपोर्ट को उच्च शिक्षा मंत्री के सामने प्रस्तुत करेंगे। रिपोर्ट में पोर्टल के बिंदुओं और 26 केपीआई के आधार पर आकलन होगा। नोडल अधिकारी अपने जोन के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण भी करेंगे। वे आवश्यक सुधार सुनिश्चित कराने का काम भी देखेंगे।


    इन अधिकारियों को दी गई जिम्मेदारी

    निधि श्रीवास्तव, विशेष सचिव : लखनऊ, अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर और बस्ती मंडल।

    बीएन सिंह, विशेष सचिव : अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ और सहारनपुर मंडल।

    सर्वेश कुमार सिंह, विशेष सचिव : वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज और चित्रकूट मंडल।

    शकील अहमद सिद्दीकी, संयुक्त सचिव : कानपुर, झांसी, आगरा और आजमगढ़ मंडल।


    Sunday, September 13, 2026

    शिक्षामित्रों की स्थायी पद, समायोजन व समान वेतनमान की मांग पर शिक्षा निदेशक (बेसिक) 16 सितंबर को करेंगे सुनवाई

    शिक्षामित्रों की स्थायी पद, समायोजन व समान वेतनमान की मांग पर शिक्षा निदेशक (बेसिक) 16 सितंबर को करेंगे सुनवाई


    लखनऊ/वाराणसी। उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने 16 सितंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित की है। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका संख्या 4242/2026, विवेकानन्द व 269 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 05 अन्य से संबंधित है।

    प्रकरण में वाराणसी निवासी विवेकानन्द की ओर से 14 अप्रैल 2026 को दिए गए प्रत्यावेदन में शिक्षामित्र कैडर के अनुरूप स्थायी पदों का सृजन कर शिक्षामित्रों को समायोजित करने, सहायक अध्यापक के समान वेतनमान देने तथा नियमितीकरण किए जाने की मांग की गई है। उपलब्ध पूर्ववर्ती रिपोर्ट में भी इस प्रकरण को शिक्षामित्रों के समायोजन, नियमितीकरण और समान वेतनमान की मांग से जुड़ा बताया गया है। 

    शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी की ओर से जारी पत्र के अनुसार हाईकोर्ट के 28 मार्च 2026 के आदेश के अनुपालन में प्रकरण के निस्तारण के लिए 16 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश, लखनऊ के कार्यालय कक्ष में सुनवाई होगी।

    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, वाराणसी को निर्देश दिया गया है कि वह संबंधित अभिलेखों एवं स्पष्ट आख्या के साथ स्वयं सुनवाई में उपस्थित हों तथा याचिकाकर्ताओं को भी निर्धारित तिथि एवं समय पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए लिखित सूचना उपलब्ध कराएं।

    हालांकि, इस पत्र से शिक्षामित्रों के समायोजन, नियमितीकरण अथवा समान वेतनमान का कोई अंतिम निर्णय होने की पुष्टि नहीं होती है। यह पत्र केवल हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में विभागीय स्तर पर सुनवाई की प्रक्रिया निर्धारित किए जाने से संबंधित है।


    यूपी बोर्ड : कक्षा दसवीं और बारहवीं की परीक्षा के आवेदन की तिथि बढ़ी, 28 सितंबर तक आवेदन, नौवीं और 11वीं के पंजीकरण की तारीख भी बढ़ी

    यूपी बोर्ड विद्यार्थियों के पंजीकरण की तिथि बढ़ी, 30 सितंबर तक मौका, हाईस्कूल और इंटर के परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि हुई 28 सितंबर

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कक्षा नौवीं और 11वीं के पंजीकरण तिथि को बढ़ा दिया है। अब 30 सितंबर तक पंजीकरण फॉर्म भरे जा सकेंगे। हाईस्कूल और इंटर के परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि को भी माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बढ़ा दिया है।

    हाईस्कूल और इंटर का परीक्षा शुल्क चालान के माध्यम से कोषागार में 28 सितंबर तक जमा किया जा सकेगा। विद्यार्थियों के शैक्षिक विवरण को वेबसाइट पर अपलोड करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर तक है।  प्रधानाचार्य एक से चार अक्तूबर तक विद्यार्थी का नाम, अभिभावक का नाम, जन्मतिथि, विषय, फोटो समेत अन्य विवरणों की जांच करेंगे।

    पांच से आठ अक्तूबर तक संशोधन का अवसर विद्यालयों को दिया जाएगा। इसके बाद हाईस्कूल-इंटर के विवरणों की चेकलिस्ट की जांच अक्तूबर माह में ही की जाएगी। पंजीकृत विद्यार्थियों की फोटोयुक्त नामावली 15 अक्तूबर तक डीआईओएस कार्यालय जमा करनी होगी। 


    यूपी बोर्ड : कक्षा दसवीं और बारहवीं की परीक्षा के आवेदन की तिथि बढ़ी, 28 सितंबर तक आवेदन, नौवीं और 11वीं के पंजीकरण की तारीख भी बढ़ी

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड ने कक्षा नौ और 11वीं के पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। साथ ही, बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए भी आवेदन की अंतिम तिथि में वृद्धि की गई है। 

    कक्षा नौ और 11वीं के पंजीकरण की अंतिम तिथि अब 30 सितंबर निर्धारित की गई है। इन कक्षाओं के छात्र-छात्राओं के लिए अग्रिम पंजीकरण शुल्क 50 रुपये प्रति छात्र है। यह शुल्क चालान के माध्यम से कोषागार में 30 सितंबर की रात 12 बजे तक ऑनलाइन अपलोड किया जा सकेगा। वहीं, कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्र छात्राएं 28 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। संस्थान के प्रधानों को 30 सितंबर तक परीक्षा शुल्क की सूचना और छात्रों के शैक्षिक विवरण परिषद की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड करने होंगे।

    कक्षा 9 व 11 के लिए प्रक्रिया

    कक्षा नौ और 11वीं के आवेदनों की जांच 1 अक्तूबर से 4 अक्तूबर तक होगी। ऑनलाइन अपलोड किए गए छात्रों के विवरणों में संशोधन 5 से 8 अक्तूबर तक किया जाएगा। पंजीकृत अभ्यर्थियों की फोटोयुक्त नामावली 15 अक्तूबर तक डीआईओएस कार्यालय में जमा करनी होगी। अग्रिम पंजीकरण शुल्क 50 रुपये प्रति छात्र है, जिसे 30 सितंबर तक कोषागार में ऑनलाइन अपलोड करना है।


    कक्षा 10 व 12 के लिए प्रक्रिया

    कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्र-छात्राएं 28 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। संस्थान के प्रधानों को 30 सितंबर तक परीक्षा शुल्क और शैक्षिक विवरण परिषद की वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे। इन छात्रों के विवरणों में संशोधन 1 से 6 अक्तूबर की मध्य रात्रि तक संभव होगा। पंजीकृत अभ्यर्थियों की फोटोयुक्त नामावली और कोष पत्र 15 अक्तूबर को क्षेत्रीय कार्यालयों में भेजे जाएंगे।


    400 छात्रों ने कॉपी में रखा नोट, यूपी बोर्ड ने रोका परिणाम, कंप्यूटर फर्म ने जिन कॉपियों में नोट मिला उसकी सूचना बोर्ड को दी थी

    हाईस्कूल कम्पार्टमेंट/ इम्प्रूवमेंट तथा इंटर कम्पार्टमेंट परीक्षा का मामला,  पहली बार यूपी बोर्ड ने ऑनलाइन करवाया था मूल्यांकन

    400 छात्रों ने कॉपी में रखा नोट, यूपी बोर्ड ने रोका परिणाम,  कंप्यूटर फर्म ने जिन कॉपियों में नोट मिला उसकी सूचना बोर्ड को दी थी


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल कम्पार्टमेंट/इम्प्रूवमेंट तथा इंटर कम्पार्टमेंट परीक्षा के दौरान कॉपियों में नोट रखने वाले 400 से अधिक परीक्षार्थियों का परिणाम रोक दिया गया है। यह पहला मौका है जब उत्तरपुस्तिकाओं में नोट रखने पर इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों का परिणाम रोका गया है। बोर्ड की ओर से संबंधित डीआईओएस के माध्यम से इन परीक्षार्थियों को नोटिस जारी करके सुनवाई की जा रही है। उसके बाद परिणाम को लेकर परीक्षा समिति में निर्णय लिया जाएगा।


    चूंकि बोर्ड ने इसी साल से उत्तरपुस्तिकाओं में नोट रखने के मामलों को अनुचित साधन प्रयोग माना था इसलिए ऐसे सभी 400 से अधिक परीक्षार्थियों के परिणाम रोके गए हैं। इस कार्रवाई से बोर्ड ने आगामी परीक्षाओं के लिए भी कड़ा संदेश देने का काम किया है। 

    28 जुलाई को आयोजित कम्पार्टमेंट/इम्प्रूवमेंट परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन पहली बार यूपी बोर्ड ने ऑनलाइन माध्यम से कराया था। प्रयागराज के राजकीय इंटर कॉलेज में प्रदेशभर की कॉपियों की पहले कंप्यूटर पर स्कैनिंग की गई और उसके बाद परीक्षकों ने कंप्यूटर, लैपटॉप पर मूल्यांकन करते हुए ऑनलाइन अंक चढ़ाए। 

    स्कैनिंग के दौरान निजी कंप्यूटर फर्म के लोगों ने जिन कॉपियों में नोट निकले थे उनकी सूचना यूपी बोर्ड को दे दी। सूत्रों के अनुसार कम्पार्टमेंट/इम्प्रूवमेंट परीक्षा की कॉपियों से 20 हजार रुपये से अधिक की राशि मिली है जिसे राजकोष में जमा करवा दिया गया है।

    यूपी डीएलएड : खोजे नहीं मिल रहे छात्र, 25 से ज्यादा कॉलेज मान्यता छोड़ने को तैयार, कई प्राइवेट कॉलेज ऐसे जहां शून्य प्रवेश, एक लाख से अधिक सीटें खाली रहने का अनुमान

    यूपी डीएलएड : खोजे नहीं मिल रहे छात्र, 25 से ज्यादा कॉलेज मान्यता छोड़ने को तैयार, कई प्राइवेट कॉलेज ऐसे जहां शून्य प्रवेश, एक लाख से अधिक सीटें खाली रहने का अनुमान


    प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य डीएलएड कोर्स के प्रति छात्र-छात्राओं की रुचि साल दर साल कम होती जा रही है। इस बार कई कॉलेजों को अभी तक एक भी विद्यार्थी नहीं मिला है। ऐसे में गौतमबुद्धनगर, आगरा, उन्नाव, कानपुर समेत अन्य जिलों के 25 से ज्यादा प्राइवेट कॉलेजों ने मान्यता खत्म करने के लिए आवेदन कर दिया है।


    इस वर्ष प्रदेश में एक लाख से ज्यादा सीटों के खाली रहने का अनुमान है। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में डीएलएड की कुल 2,39,500 सीटें हैं जिनमें महज 1,70,332 अभ्यर्थियों ने प्रवेश के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें भी 18130 अभ्यर्थियों ने फीस नहीं जमा की है। इससे अब 1,52,202 अभ्यर्थी ही बचे हैं। इस स्थिति में करीब एक लाख सीटों पर दाखिला नहीं हो पाएगा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि छात्रों को डीएलएड कोर्स नहीं भा रहा है।

    दरअसल, पहले बीटीसी करने के बाद प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनना आसान होता था। मौजूदा समय में प्रदेश भर में लाखों की संख्या में छात्र डीएलएड करने के बाद नौकरी की राह देख रहे हैं।


    पिछले वर्ष भी खाली रह गई थीं 1.43 लाख सीटें

    वर्ष 2025 में भी यही स्थिति रही। 2,39,500 सीटों के सापेक्ष 1,38, 860 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किए थे। इनमें 1.25 लाख अभ्यर्थियों ने फीस जमा की। लेकिन, 95,769 अभ्यर्थियों ने ही कॉलेज में प्रवेश लिया। ये सभी प्रवेश प्रदेश के कुल 3103 प्राइवेट, 66 डायट व राजकीय कॉलेज तथा 253 अल्पसंख्यक कॉलेजों में हुए थे

    पहले की अपेक्षा डीएलएड में कम छात्र प्रवेश ले रहे हैं। यही कारण है कि करीब 25 डीएलएड कॉलेज संचालकों ने आवेदन कर कॉलेज से इस कोर्स की मान्यता खत्म करने की बात कही है। - राजेंद्र प्रताप सचिव, उप्र परीक्षा नियामक प्राधिकारी, प्रयागराज

    Friday, September 11, 2026

    शैक्षिक भ्रमण में कक्षा 9 से 12 तक के छात्र संग्रहालय भी जाएंगे, सभी डीआईओएस को जारी किए गए निर्देश

    शैक्षिक भ्रमण में कक्षा 9 से 12 तक के छात्र संग्रहालय भी जाएंगे, सभी डीआईओएस को जारी किए गए निर्देश
     

    लखनऊ। प्रदेश के पीएमश्री माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों को अब शैक्षिक भ्रमण में संग्रहालय का भ्रमण भी कराया जाएगा। अब तक भ्रमण में संग्रहालय शामिल नहीं सचिव अमृत अभिजात ने इसके लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग को पत्र लिखा था। इस क्रम में माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में सभी डीआईओएस को निर्देश जारी किए गए हैं।


     इसके अनुसार आगामी भ्रमण की योजना बनाने को कहा गया है। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के शैक्षिक भ्रमण में अब इसे भी जोड़ा जाए। छात्रों को अपने जिले या फिर पड़ोस के जिले में स्थित राजकीय संग्रहालय का भ्रमण कराया जाएगा। जिससे वे कला, संस्कृति व समद्ध विरासत से सीधे जुड़ सकें। छात्र यहां प्रदर्शित पुरावशेष, मूर्तियां, सिक्के, चित्र व अन्य ऐतिहासिक साक्ष्यों को वह प्रत्यक्ष रूप से देखकर समझ सकेंगे। 

    Thursday, September 10, 2026

    यूपी टीईटी के संशोधित अंकपत्र 15 दिन में जारी करें: हाईकोर्ट, हाईकोर्ट ने विवादित प्रश्नों को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर संशोधित अंकपत्र जारी करने का अतिरिक्त समय दिया

    यूपी टीईटी के संशोधित अंकपत्र 15 दिन में जारी करें: हाईकोर्ट,  हाईकोर्ट ने विवादित प्रश्नों को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर संशोधित अंकपत्र जारी करने का अतिरिक्त समय दिया


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी 2019) के विवादित प्रश्नों को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर संशोधित अंकपत्र जारी करने का अतिरिक्त समय दिया है। वह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार ने अनुराधा एवं नौ अन्य की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर उनके अधिवक्ता संजय कुमार यादव व राजेश यादव को सुनकर दिया है।


    मूल याचिकाओं में यूपी टीईटी 2019 की परीक्षा के पांच प्रश्नों प्रश्न संख्या 35 (हिंदी), 83 (संस्कृत), 124, 139 व 144 (पर्यावरण अध्ययन) के उत्तरों को लेकर विवाद उठाया गया था। याचियों का कहना था कि कुछ प्रश्नों में सभी विकल्प गलत होने के बावजूद एक विकल्प को सही घोषित किया गया जबकि कुछ अन्य प्रश्नों में गलत विकल्पों को सही माना गया। हाईकोर्ट ने पांच फरवरी 2024 के आदेश में कहा था कि प्रश्न संख्या 83 व 144 पर याचियों की आपत्तियां विषय विशेषज्ञों द्वारा सही मानी जा चुकी थीं और इन पर एक-एक अंक पहले ही दिया जा चुका था। 


    कोर्ट ने निर्देश दिया था कि ये अंक सभी याचियों को नहीं मिले हैं तो दिए जाएं और नए सिरे से परिणाम घोषित किया जाए। वहीं प्रश्न संख्या 35, 124 व 139 के संदर्भ में कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति द्वारा जारी संशोधित उत्तरकुंजी में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था। अवमानना याचिका पर सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से गत तीन सितंबर के निर्देश प्रस्तुत किए गए, जिनके अनुसार याचियों के अंक बढ़ाए जा चुके हैं और संशोधित अंकपत्र 15 दिन के भीतर जारी किया जाएगा। याचियों के अधिवक्ताओं ने इन तथ्यों पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद कोर्ट ने अवमानना याचिका निस्तारित कर दी।

    वित्तविहीन शिक्षक बनेंगे प्रधानाचार्य, सरकारी बाहर, भर्ती से हजारों एलटी प्रशिक्षित शिक्षकों को बाहर करने से नाराजगी, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने पैदा की अजीब स्थिति

    वित्तविहीन शिक्षक बनेंगे प्रधानाचार्य, सरकारी बाहर, भर्ती से हजारों एलटी प्रशिक्षित शिक्षकों को बाहर करने से नाराजगी, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने पैदा की अजीब स्थिति

    केवल बीएड अभ्यर्थियों को मान्य किए जाने का विरोध कर रहे कार्यरत शिक्षक

    तीन सितंबर को जारी आदेश में बीएड अनिवार्य और पीजी में 50% का प्रावधान


    प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने अजीब स्थिति पैदा कर दी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने एक तरफ वित्तविहीन स्कूल के शिक्षकों को इन पदों पर भर्ती के लिए मान्य कर लिया है तो वहीं एडेड कॉलेजों में सालों से पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। 2013 के बाद प्रधानाध्यापक के 1172 और प्रधानाचार्य के 1475 पदों पर अब शुरू होने जा रही भर्ती में तीन सितंबर के शासनादेश के जरिए बीएड अनिवार्य किए जाने के कारण गैर-बीएड वाले शिक्षकों को अयोग्य कर दिया है।


    इससे एलटी प्रशिक्षित, कला, व्यायाम और संगीत आदि विषयों के शिक्षक आवेदन नहीं कर सकेंगे। पूर्व में विभागीय कायदे-कानून के तहत इनकी नियुक्ति हुई थी, लेकिन अब इन्हें एक झटके में बाहर कर दिया गया है। इसे लेकर इन शिक्षकों में खासी नाराजगी है। इसके अलावा परास्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता का भी विरोध हो रहा है। 


    शिक्षकों का तर्क है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 12 नवंबर 2014 की अधिसूचना में पूर्वप्राथमिक, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन के लिए शिक्षकों के विभिन्न स्तर की अहर्ताओं में प्रतिशत (45% या 50%) की अनिवार्यता का निर्देश दिया गया है। हालांकि संस्था प्रधान (प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापकों) के पदों के अर्हता में स्नातकोत्तर में 50% अंक के अनिवार्यता का कोई निर्देश नहीं है।


     देश और प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों का पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के मानक स्तर में भिन्नता है तथा इन विश्वविद्यालयों में पिछले 25 से 30 वर्षों के समयांतराल में पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के मानक स्तर में भी परिवर्तन हो गया है, जिसके कारण इस प्रकार की शर्त उचित नहीं है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग संस्था प्रधान भर्ती का विज्ञापन जल्द जारी करने जा रहा है।


    प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक भर्ती में शिक्षा स्नातक तक (बीएड) के साथ एलटी प्रशिक्षण को भी समकक्ष अर्हता के रूप में शामिल करना चाहिए। साथ ही स्नात्तकोत्तर में 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता समाप्त होनी चाहिए। ये विसंगतियां दूर नहीं हुईं तो उच्च न्यायालय में याचिकाएं होने की आशंका है, जिसके कारण संस्था प्रधान की चयन प्रक्रिया अनावश्यक रूप से बाधित हो सकती है। - लालमणि द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट।

    विज्ञान और गृह विज्ञान में प्रैक्टिकल लेगा यूपी बोर्ड, हाईस्कूल में आंतरिक मूल्यांकन की बजाय दो विषयों में नई व्यवस्था

    विज्ञान और गृह विज्ञान में प्रैक्टिकल लेगा यूपी बोर्ड,  हाईस्कूल में आंतरिक मूल्यांकन की बजाय दो विषयों में नई व्यवस्था


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड के 29 हजार से अधिक स्कूलों में अध्ययनरत हाईस्कूल के छात्र-छात्राओं की विज्ञान और गृह विज्ञान विषयों की प्रयोगात्मक परीक्षा बोर्ड के स्तर से कराई जाएगी। पहले अन्य विषयों की तरह विज्ञान और गृह विज्ञान में भी 30 अंकों का आंतरिक मूल्यांकन होता था और स्कूल के प्रधानाचार्य बच्चों के प्राप्तांक यूपी बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड करते थे। इसी अंक के आधार पर हाईस्कूल के अंकपत्र में ग्रेडिंग दी जाती थी।

    बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने बताया कि हाईस्कूल विज्ञान एवं गृह विज्ञान विषयों में आंतरिक मूल्यांकन के स्थान पर प्रयोगिक परीक्षाएं आयोजित कराए जाने के संबंध में परिषद विनियमों में संशोधन किया गया है। इस साल से यूपी बोर्डनेविज्ञान और गृहविज्ञानविषयों की पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है। अधिकांश स्कूलों में किस तरह आंतरिक मूल्यांकन रक मूल्याकन होता है और बच्चों को कैसे नंबर दिए जाते हैं, यह किसी से छिपा नहीं है।

    Wednesday, September 9, 2026

    ककहरा के साथ फलदार पेड़ों की पाठशाला, स्कूलों में बनेंगे खाद्य वन, 16 हजार प्राथमिक स्कूल पहले चरण में किए गए चिह्नित

    ककहरा के साथ फलदार पेड़ों की पाठशाला, स्कूलों में बनेंगे खाद्य वन, 16 हजार प्राथमिक स्कूल पहले चरण में किए गए चिह्नित

    पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को मिलेगा प्राकृतिक पोषण

    लखनऊ : प्रदेश के प्राथमिक स्कूल अब सिर्फ पढ़ाई के केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि बच्चों के पोषण और प्रकृति से जुड़ाव के नए ठिकाने भी बनेंगे। योगी सरकार प्राथमिक विद्यालयों में खाद्य वन (फ्रूट फारेस्ट) विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए स्कूल परिसर में उपलब्ध जमीन का उपयोग फलदार पौधे लगाने के लिए किया जाएगा। उद्देश्य बच्चों को स्कूल में ही ताजे फल और प्राकृतिक पोषण से जोड़ना है।


    खाद्य वन की अवधारणा के तहत स्कूल परिसर की खाली या उपलब्ध जमीन पर ऐसे फलदार पौधे लगाए जाएंगे, जो स्थानीय जलवायु के अनुकूल हों और जिनसे बच्चों को समय-समय पर फल मिल सकें। इससे विद्यालय परिसर में हरियाली बढ़ाने के साथ बच्चों के पोषण में भी प्रत्यक्ष योगदान की उम्मीद है।

    खास बात यह है कि बच्चे इन पौधों को केवल किताबों में नहीं पढ़ेंगे, बल्कि उन्हें उगते, फलते और विकसित होते हुए अपनी आंखों से देखेंगे। पहले चरण में 16 हजार विद्यालय इसके लिए चिह्नित किए गए हैं। खाद्य वन को स्कूलों में 'पोषण की जीवंत पाठशाला' के रूप में विकसित किया जाएगा। शिक्षक बच्चों को पौधों की देखभाल, फलदार वृक्षों के महत्व, पोषण और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ेंगे।

     इससे विज्ञान और पर्यावरण जैसे विषयों की पढ़ाई को भी व्यावहारिक आधार मिलेगा। बच्चों में पौधों के प्रति जिम्मेदारी और प्रकृति के संरक्षण की आदत विकसित करने में भी यह पहल मददगार हो सकती है। स्कूल में पैदा होने वाले फल को बच्चों को खाने के लिए दिए जाएंगे। इससे स्थानीय स्तर पर पोषण का एक अतिरिक्त स्त्रोत तैयार होगा। खाद्य वन की देखभाल में बच्चों की भागीदारी भी होगी।

    कक्षा और उम्र के अनुसार बच्चों को पौधों में पानी देने, उनकी वृद्धि दर्ज करने और उनके संरक्षण जैसी गतिविधियों से जोड़ने की योजना है। इससे 'एक पेड़ लगाने' के साथ ही 'एक पेड़ पालने' की संस्कृति विकसित करने का अवसर मिलेगा।

    सरकार की यह पहल जमीन के बेहतर इस्तेमाल के साथ स्कूलों में हरियाली, बच्चों के पोषण और पर्यावरण शिक्षा को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन सकती है। यदि इन खाद्य वनों का नियमित रखरखाव सुनिश्चित हुआ और स्थानीय फलदार प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई तो आने वाले वर्षों में ये विद्यालय परिसर बच्चों के लिए पोषण, प्रकृति और सीखने के एकीकृत केंद्र के रूप में विकसित हो सकते हैं।

    नई पेंशन योजना से आच्छादित दिवंगत शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के पारिवारिक पेंशन लिए जाने के बाद नोडल खाते में प्राप्त धनराशि के निस्तारण के सम्बन्ध में

    नई पेंशन योजना से आच्छादित दिवंगत शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के पारिवारिक पेंशन लिए जाने के बाद नोडल खाते में प्राप्त धनराशि के निस्तारण के सम्बन्ध में


    समग्र शिक्षा में सेवा प्रदाता के कार्मिकों के मानदेय में 25 प्रतिशत की हुई वृद्धि, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समग्र शिक्षा कार्यकारी समिति की बैठक

    समग्र शिक्षा में सेवा प्रदाता के कार्मिकों के मानदेय में 25 प्रतिशत की हुई वृद्धि, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समग्र शिक्षा कार्यकारी समिति की बैठक


    लखनऊ। प्रदेश में समग्र शिक्षा के तहत जिला परियोजना कार्यालयों में सेवा प्रदाता के माध्यम से कार्यरत कार्मिकों के मानदेय में 25 प्रतिशत वृद्धि को हरी झंडी मिल गई है। इनके मानदेय में साल 2020 से वृद्धि नहीं हुई थी। फैसले से करीब 500 कंप्यूटर ऑपरेटर, लेखाकार, अकाउंटेंट आदि के मानदेय में तीन से पांच हजार रुपये तक की वृद्धि होगी। यह अनुमोदन मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में समग्र शिक्षा कार्यकारी समिति की बैठक में हुआ। 


    बैठक में प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में शिक्षा गुणवत्ता में सुधार, उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी प्रयोग, छात्रों के सर्वांगीण विकास तथा समग्र शिक्षा के अंतर्गत स्वीकृत कार्ययोजना व बजट के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। 

    मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अभिभावकों को प्रेरित करें कि वे बच्चों को निर्धारित यूनिफॉर्म में ही विद्यालय भेजें। उन्होंने विद्यालयों में स्थापित स्मार्ट क्लास व आईसीटी लैब का नियमित अनुश्रवण करते हुए उनका प्रभावी प्रयोग करने के निर्देश दिए। 

    उन्होंने विद्यालयों में पढ़ाई के साथ खेलकूद व अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों पर ध्यान देने का निर्देश दिया। बैठक में साल 2026-27 के लिए समग्र शिक्षा में पीएबी द्वारा 11,902.85 करोड़ का बजट अनुमोदित किया गया है।


    विद्यालयों में लगेगी संसद पक्ष-विपक्ष की भूमिका में होंगे छात्र, कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे

    विद्यालयों में लगेगी संसद पक्ष-विपक्ष की भूमिका में होंगे छात्र, कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे


    लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब युवा संसद प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। वे सदन में अपना पक्ष रखने के साथ विपक्ष को भी घेरेंगे। 50 से 55 विद्यार्थियों वाले सदन में छात्रों को ही अध्यक्ष, मंत्री, विपक्ष के नेता और अन्य भूमिकाएं दी जाएंगी। उन्हें संसदीय कार्यवाही के संचालन, सवाल पूछने, जवाब देने, चर्चा करने और प्रस्ताव रखने का पूर्वाभ्यास कराया जाएगा।


    युवा संसद के जरिये विद्यार्थियों को संसद और संसदीय प्रक्रियाओं के साथ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। इससे उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, अनुशासन और दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर रहेगा। युवा संसद के लिए राज्य स्तर पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और जिला स्तर पर डीआईओएस को नोडल बनाया गया है। एससीईआरटी आयोजन के लिए मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराएगा।


    विवादरहित विषयों पर होगी चर्चा : युवा संसद में सामाजिक न्याय, सामाजिक सुधार, आर्थिक विकास, सांप्रदायिक सद्भाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, छात्र अनुशासन, कल्याणकारी योजनाएं, स्वच्छता, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण विकास जैसे विवादरहित विषयों पर चर्चा होगी। किसी राजनीतिक दल या वर्तमान अथवा पूर्व नेता पर टिप्पणी नहीं की जाएगी। कार्यक्रम में शिष्टाचार और अनुशासन का विशेष ध्यान होगा।


    डीआईओएस विद्यालयों को निर्देश देने के साथ आयोजन का पर्यवेक्षण करेंगे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने निर्देश दिए हैं कि युवा संसद विद्यालय या छात्रों की सुविधा वाले स्थल पर हो। आयोजन एक घंटे से अधिक का नहीं होगा। छात्रों को वास्तविक संसदीय कार्यप्रणाली का अनुभव कराने पर विशेष जोर रहेगा। कार्यक्रम में सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक या एमएलसी को मुख्य अतिथि बनाया जा सकता है। वे विद्यार्थियों को संसदीय कार्यप्रणाली की जानकारी देंगे। 

    एडेड माध्यमिक विद्यालयों के 811 तदर्थ शिक्षकों को मिलेगा वेतन, सरकार बनाएगी नीति विधान परिषद में सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति

    एडेड माध्यमिक विद्यालयों के 811 तदर्थ शिक्षकों को मिलेगा वेतन, सरकार बनाएगी नीति विधान परिषद में सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति


    लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में वर्षों से पढ़ा रहे वेतन न पाने वाले 811 तदर्थ शिक्षकों को भी जल्द वेतन दिया जाएगा। इसकी कानूनी अड़चनें दूर होंगी और सरकार इसके लिए नीति बनाएगी। कुल 1111 तदर्थ शिक्षकों में से अभी 300 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है। अब शेष शिक्षकों को भी मिलेगा।


    विधान परिषद में बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा से संबंधित मुद्दों को लेकर नेता सदन व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में मंगलवार को समिति की बैठक हुई। इसमें विधान परिषद सदस्य देवेन्द्र प्रताप सिंह व उमेश द्विवेदी ने यह मामला उठाया। शिक्षिका ईशा सिंह के प्रकरण पर कोर्ट के आदेश के बाद करीब 300 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है।

    एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एडहॉक व्यवस्था खत्म करने को लेकर दिए गए आदेश के बाद इन तदर्थ शिक्षकों को बाहर किया गया। पर्व में दिए गए आदेश में वर्ष 2021 तक नियमित शिक्षकों की व्यवस्था करनी थी। फिलहाल 300 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है और बाकी 811 शिक्षकों से काम लिए जाने के बावजूद वेतन नहीं दिया जा रहा। ऐसे में सरकार इन्हें लेकर नीति बनाए। बैठक में निर्देश दिए गए कि जल्द नीति बनाई जाए और बचे शिक्षकों को वेतन देने की तैयारी की जाए।

    वहीं साल 2024 में नियुक्त विशिष्ट बीटीसी शिक्षकों को पुरानी पेंशन देने, शिक्षामित्र से शिक्षक बनने वालों की पुरानी सेवा जोड़कर उन्हें भी पुरानी पेंशन का लाभ देने, 2000 के बाद नियमित शिक्षकों को पुरानी पेंशन देने पर भी चर्चा की गई। व्यावसायिक शिक्षकों व निजी स्कूलों के शिक्षकों के लिए जल्द सेवा नियमावली बनाने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव भी शामिल हए। 

    भर्ती की अंतिम तिथि तक निर्धारित योग्यता जरूरी- हाईकोर्ट, बैक पेपर से बाद में मिली बीटीसी योग्यता से नहीं मिल सकता शिक्षक पद, कोर्ट ने बलिया के चार शिक्षकों की याचिका खारिज की

    भर्ती की अंतिम तिथि तक निर्धारित योग्यता जरूरी- हाईकोर्ट,  बैक पेपर से बाद में मिली बीटीसी योग्यता से नहीं मिल सकता शिक्षक पद, कोर्ट ने बलिया के चार शिक्षकों की याचिका खारिज की
     

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में बाद में बैंक पेपर देकर बीटीसी उत्तीर्ण करने वाले चार शिक्षकों को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि भर्ती की अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास निर्धारित योग्यता होना अनिवार्य है। बाद में हासिल की गई योग्यता से पिछली तारीख से पात्रता पैदा नहीं हो सकती।


    बलिया के के चार सहायक अध्यापकों की न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने याचिका खारिज करते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी, बलिया के 30 अप्रैल 2025 और उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव के 29 मई 2026 के आदेश को बरकरार रखा।

    याचियों ने 2019 की सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में भाग लिया था। उनका कहना था कि आवेदन करते समय उन्होंने अपने अंकों की सही जानकारी दी थी और उनके आवेदन स्वीकार किए गए तथा प्रवेश पत्र भी जारी हुए। परीक्षा में सफल होने के बाद उन्हें बलिया में नियुक्ति मिली और उन्होंने लंबे समय तक सेवा भी की। उन्होंने बाद में बैक पेपर देकर बीटीसी परीक्षा उत्तीर्ण की और 7 अगस्त 2019 को प्रमाणपत्र जारी हुआ। 

    कोर्ट ने कहा कि आवेदन की अंतिम तिथि 22bदिसंबर 2018 थी, जबकि याचियों ने बीटीसी की आवश्यक योग्यता बैंक पेपर का परिणाम आने के बाद हासिल की। इसलिए उस तारीख को वे भर्ती के लिए पात्र नहीं थे। आवेदन स्वीकार होना, प्रवेश पत्र जारी होना, परीक्षा में सफल होना या बाद में नियुक्ति निल कर सकता। कोर्ट यह कहा किलंये जाना पात्रता को मूल कमी को दूर नहीं समय तक नौकरी करने और वेतन पाने के कारण सहानुभूति हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और निर्धारित योग्यता की अनिवार्यता से समझौता नहीं किया जा सकता। 

    दूसरे अभ्यर्थियों को समान आधार पर नौकरी मिलने का तर्क भी स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि किसी अन्य को मिली गलत राहत के आधार पर समान गलत लाभ का दावा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब नियुक्ति की बुनियाद ही निर्धारित योग्यता के अभाव मैं कानूनी रूप से दोषपूर्ण हो, तो सेवा समाप्त करने के लिए अलग से विभानीय अनुशासनात्पक जांच जरूरी नहीं है। इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी।

    Tuesday, September 8, 2026

    कर्नाटक में शिक्षक अब अपने नाम के आगे लगा सकेंगे 'Tr'

    कर्नाटक में शिक्षक अब अपने नाम के आगे लगा सकेंगे 'Tr'

    समाज के सच्चे शिल्पकारों को मिला डाक्टर व इंजीनियर जैसा व्यावसायिक गौरव और सम्मान, इस संबंध में आदेश भी जारी

    बेंगलुरु : शिक्षक समाज की रीढ़ होते हैं जो बिना किसी स्वार्थ के बच्चों का भविष्य गढ़कर राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देते हैं। इसी भावना को सम्मान देते हुए कर्नाटक सरकार ने शिक्षक दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक निर्णय लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने कैबिनेट की सहमति के बाद घोषणा की है कि अब कर्नाटक के लगभग साढ़े चार लाख शिक्षक अपने नाम के आगे 'टीआर' (टीचर) उपसर्ग का गर्व के साथ उपयोग कर सकेंगे।

     यह निर्णय शिक्षकों को डाक्टर, इंजीनियर और प्रोफेसर जैसे प्रतिष्ठित पेशेवरों के समकक्ष खड़ा करता है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा आधिकारिक सरकारी आदेश भी जारी कर दिया गया है।

     मुख्यमंत्री ने विजयनगर जिले के कुडलीगी में 'प्रजा सेवा अभियान' के दौरान स्पष्ट किया कि माता-पिता हमें जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक जीवन का सही मार्ग दिखाकर हमें इंसान बनाते हैं। 'टीआर' केवल दो अक्षर नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी समाज और बच्चों के भविष्य को समर्पित करने का एक जीवंत प्रतीक है।

    Sunday, September 6, 2026

    अब दूरदराज के उच्च शिक्षण संस्थान डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन करवा सकेंगे पढ़ाई, UGC ने जनवरी के लिए यूजी, पीजी पाठयक्रमों में पढ़ाई के लिए आवेदन विंडो ओपन का फैसला लिया

    अब दूरदराज के उच्च शिक्षण संस्थान डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन करवा सकेंगे पढ़ाई, UGC ने जनवरी के लिए यूजी, पीजी पाठयक्रमों में पढ़ाई के लिए आवेदन विंडो ओपन का फैसला लिया


    नई दिल्ली। दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के छात्रों को जनवरी सत्र से घर के आसपास के उच्च शिक्षण संस्थानों से ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम और डिस्टेंस लर्निंग मोड (ओडीएल) से पढ़ाई का मौका मिल सकता है। दरअसल, शैक्षणिक सत्र 2027 के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नियमों को पूरा करने वाले सभी शिक्षण संस्थानों के लिए खोलने का फैसला लिया है।

    यूजीसी ने इस संबंध में सभी राज्यों को पत्र लिखा है। इसके मुताबिक, ऐसे विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों से ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम और डिस्टेंस लर्निंग मोड (ओडीएल) से नियमों को पूरा करने वाले सभी शिक्षण संस्थान 15 सितंबर तक आवेदन पत्र भेज सकते हैं। योग्यता पात्रता नियम पूरा करने वाले उच्च शिक्षण संस्थान ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) मोड और ऑनलाइन मोड से डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करवा सकेंगे।

    इसके तहत जनवरी-फरवरी 2027 दाखिला सत्र में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठयक्रमों में दाखिला दे सकेंगे। इससे दूरदराज के छात्रों को घर के पास ऐसे उच्च शिक्षण संस्थानों से डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई का लाभ होगा।

    इससे पहले, चयनित संस्थानों को यूजीसी (ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम और ऑनलाइन प्रोग्राम) विनियम, 2020 और इसके संशोधनों के विनियम 3(ए) और विनियम 3 (बी) के आधार पर अनुमति मिलेगी। हालांकि उन्हीं संस्थानों को अनुमति मिलेगी, जोकि रैगुलर डिग्री प्रोग्राम में पहले से संबंधित विषय की पढ़ाई करवा रहे होंगे। 



    Saturday, September 5, 2026

    तदर्थ सेवाओं को पेंशन के लिए जोड़ने के मुद्दे को लेकर धारा 33(छ) के तहत विनियमित शिक्षकों की तदर्थ सेवा व पेंशन का मांगा गया ब्योरा

    तदर्थ सेवाओं को पेंशन के लिए जोड़ने के मुद्दे को लेकर धारा 33(छ) के तहत विनियमित शिक्षकों की तदर्थ सेवा व पेंशन का मांगा गया ब्योरा


    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में धारा 33(छ) के तहत विनियमित किए गए शिक्षकों की तदर्थ सेवाओं को जोड़कर पेंशन दिए जाने के संबंध में शासन स्तर पर प्रकरण की समीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है। इस संबंध में शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश द्वारा मंडलीय अधिकारियों से विस्तृत सूचनाएं मांगी गई हैं।

    शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार, विधान सभा के प्रथम सत्र 2026 में 13 फरवरी 2026 को विधान परिषद सदस्य श्री ध्रुव कुमार त्रिपाठी द्वारा नियम-105 के अंतर्गत 22 मार्च 2016 को जारी विनियमितीकरण आदेश के आधार पर धारा 33(छ) के अंतर्गत विनियमित शिक्षकों की तदर्थ सेवाओं को पेंशन के लिए जोड़ने का मुद्दा उठाया गया था।

    पत्र में बताया गया है कि अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा/बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा आगामी बैठक में इस प्रकरण की समीक्षा प्रस्तावित है। इसके लिए सभी मंडलों से निर्धारित प्रारूप पर सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    मंडलों से धारा 33(छ) के अंतर्गत विनियमितीकरण के लिए प्राप्त कुल प्रकरण, मान्य किए गए प्रकरण, अमान्य किए गए प्रकरण तथा अवशेष प्रकरणों की संख्या मांगी गई है। संबंधित सूचना निर्धारित प्रारूप में ई-मेल आईडी admadhyamik@gmail.com पर हार्ड एवं सॉफ्ट कॉपी में उपलब्ध कराने को कहा गया है। पत्र में प्रकरण को शीर्ष वरीयता एवं व्यक्तिगत ध्यान दिए जाने की अपेक्षा की गई है। 



    Friday, September 4, 2026

    नदियों के नाम पर होंगे एनसीईआरटी की भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम

    नदियों के नाम पर होंगे एनसीईआरटी की भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम

     छठी और नौवीं की भारतीय भाषाओं की सभी पाठ्यपुस्तकों के नाम स्थानीय नदियों के नाम पर रखे

    हिंदी की पाठ्यपुस्तक का नाम अलकनंदा और रेवा, तो पंजाबी भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम सतलुज और रावी रखा


    नई दिल्ली: देश की नई पीढ़ी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के त्रिभाषा फार्मूले के जरिये भारतीय भाषाओं से जोड़ने की पहल में छात्र सिर्फ भाषा नहीं सीखेंगे, बल्कि देश की नदियों के नाम से भी रूबरू होंगे। एनसीईआरटी सभी भारतीय भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम देश की नदियों के नाम पर रख रही है। अब तक छठी और नौंवी कक्षा के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम क्षेत्र या राज्यों की भाषाओं के आधार पर वहां की स्थानीय नदियों के नाम पर रखा गया है।


    पंजाबी भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम सतलुज और रावी रखा गया है, जबकि तमिल भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम भवानी और वैगई (तमिलनाडु की प्रमुख नदियां) के नाम पर रखा गया है। हिंदी की पाठ्यपुस्तकों का नाम अलकनंदा व रेवा रखा गया है। बांग्ला भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम भागीरथी और कालिंदी है। वहीं, मैथिली भाषा की पुस्तक का नाम कमला और कौशिकी (स्थानीय नदियां) रखा गया है। 


    इसी तरह अन्य भाषाओं की पुस्तकों के नाम भी देश की प्रमुख भाषाओं के नाम पर रखे गए हैं। एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग भाषाओं की इन पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने का काम त्रिभाषा फार्मूले के तहत किया जा रहा है। छठी से दसवीं तक छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, इनमें दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। इन पाठ्यपुस्तकों का नाम नदियों के नाम पर रखने का फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि नई पीढ़ी भाषाओं की तरह देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी नदियों के नाम भी जान सकेगी।

    किन प्रमुख नदियों के नाम पर है किताबेंः अलकनंदा, सतलुज, भवानी, कृष्णा, नेपाली तीस्ता, गोदावरी, साबरमती, भागीरथी, लोकतक, मांडवी, कमला, झेलम, बैतरणी, देविका, गोमती, सिंधु, रेवा, नर्मदा, पंचगंगा, कालिंदी, रावी, महानदी, तुंगभद्रा, पंबा, कपिला, कौशिकी, तवा, चिनाब, लुनी, वैगई आदि।

    बेसिक शिक्षा के राज्य शिक्षक पुरस्कार पर कई जिलों से उठे सवाल, जिला स्तर पर सबसे कम अंक वालों को प्रदेश स्तर पर चुने जाने का आरोप

    बेसिक शिक्षा के राज्य शिक्षक पुरस्कार पर कई जिलों से उठे सवाल, जिला स्तर पर सबसे कम अंक वालों को प्रदेश स्तर पर चुने जाने का आरोप 


    लखनऊ । पांच सितंबर को शिक्षक दिवस है। इस अवसर पर आयोजित समारोह में राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले ही राज्य पुरस्कार सवालों के घेरे में आ गए हैं। कई जिलों में शिक्षकों ने शिकायत की हैं चयन में कमियां बताई हैं। सबसे ज्यादा सवाल जिला स्तर पर दिए गए अंकों और प्रदेश स्तर पर किए गए चयन में बड़े अंतर को लेकर हैं। वहीं, हेडमास्टर के अग्रसारित किए बिना पुरस्कार देने और कई बार सस्पेंड शिक्षिका का नाम पुरस्कार लिस्ट में होने जैसी शिकायतें भी हैं।


    ये है प्रक्रिया : पुरस्कारों के चयन के लिए सबसे पहले जिला स्तरीय समिति शिक्षकों से जरूरी दस्तावेज लेकर तय प्रक्रिया के तहत अंक देती है। पुरस्कार के लिए जरूरी इन दस्तावेज के 80 अंक होते हैं। उसके बाद निदेशालय स्तर पर साक्षात्कार होता है और दस्तावेज की जांच होती है। निदेशालय स्तर से 20 अंक तय होते हैं। इस आधार पर 100 अंकों में जिसके अंक ज्यादा होंगे, उसे पुरस्कार के लिए चुना जाएगा।


    जिसके कम अंक, उसे पुरस्कारसबसे ज्यादा सवाल अंक देने की प्रक्रिया पर ही हैं। ललितपुर में शिक्षक नीरज द्विवेदी को जिला स्तर पर 80 में से 65 अंक मिले। अनिल कुमार को 50 और प्रीति गुप्ता को 36 अंक मिले। प्रदेश स्तर पर साक्षात्कार और समीक्षा के बाद चयन जिले में सबसे कम अंक वाली प्रीति गुप्ता का हुआ। इसी तरह महोबा में जिला स्तर पर ब्रज किशोर को 69 अंक मिले। वहीं, ओम प्रकाश तिवारी को 49 और विनोद कुमार पाठक को 39 अंक मिले। पुरस्कार की सूची आई तो उसमें 39 अंक पाने वाले विनोद कुमार पाठक का नाम आया। इस पर सवाल ये उठ रहे हैं कि जिसके जिला स्तर पर 69 और 65 अंक पाने वालों को साक्षात्कार में शून्य अंक भी दिया जाए और 39 और 36 अंक पाने वालों को पूरे 20-20 नंबर भी दे दिए जाएं तो भी कम रहेंगे।

    ऐसे में उनका चयन कैसे हो गया ?

    कई बार सस्पेंड शिक्षिका को पुरस्कार : बदायूं में प्राथमिक विद्यालय रिसौली की शिक्षका किरण देवी को पुरस्कार के लिए चुना गया है। उसी गांव की मेघा ने उनके बारे में अधिकारियों को शिकायत की है। कहा है कि किरण देवी तीन बार गंभीर आरोपों सस्पेंड हो चुकी हैं। ऐसे में उनको यह पुरस्कार कैसे दिया जा सकता है? बीएसए बदायूं का कहना है कि निलंबन कोई सजा नहीं होती है।


    हेडमास्टर ने ही की शिकायत

    लखनऊ में भी जिला स्तर पर 48 अंक पाने वाली विनीता का चयन पुरस्कार के लिए हुआ है। उससे ज्यादा अंक पाने वालो को नहीं चुना गया। इसके अलावा गोसाईगंज के प्राथमिक विद्यालय अमेठी की हेड टीचर संतोष राय ने इसकी शिकायत भी जनसुनवाई पोर्टल पर की है और एक विडियो बनाकर भी प्रसारित किया है। उनका कहना है कि उनसे हस्ताक्षर ही नहीं करवाए गए। उन्हें आशंका है कि उनकी शिक्षिका विनीता ने उनके फर्जी हस्ताक्षर किए। इस बारे में विनीता का कहना है कि हेड टीचर ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था। ऐसे में खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को अधिकार होता है और उन्होंने आवेदन अग्रसारित कर दिया।

    जिलों में तय मानकों के अनुसार अंक नहीं दिए गए थे। कई के पूरे दस्तावेज नहीं थे। ऐसे में निदेशालय स्तर पर समीक्षा की गई। उस आधार पर चयन किया गया है। यदि हेडमास्टर किसी व्यक्तिगत कारण से किसी का आवेदन अग्रसारित नहीं करता तो उससे बड़े सक्षम अधिकारी को यह अधिकार होता है। जिनका चयन नहीं हुए वे बेवजह जिले के अंकों के आधार पर सवाल उठा रहे हैं। - अनिल भूषण चतुर्वेदी, निदेशक-बेसिक शिक्षा

    सरकारी स्कूलों में वीडियोग्राफी व बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने की याचिका खारिज, CJP के School Theek Karo अभियान को झटका

    सरकारी स्कूलों में वीडियोग्राफी व बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने की याचिका खारिज, CJP के School Theek Karo अभियान को झटका 


    नई दिल्ली। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, पत्रकारों, यूट्यूबर व सिविल सोसाइटी के सदस्यों के प्रवेश व वीडियोग्राफी पर लगी रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इन प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इन्कार कर दिया है।

    जस्टिस पीएस नरसिम्हा व जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने बृहस्पतिवार को प्रिया मिश्रा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह इस पर पर विचार विचार के के लिए इच्छुक नहीं है। 

    राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने एक आदेश जारी कर सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य की अनुमति को जरूरी किया था। वहीं, यूपी में अयोध्या के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, यूट्यूबर और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के बिना अनुमति प्रवेश व वीडियोग्राफी पर रोक लगाई थी। याचिका में इन दोनों आदेशों को चुनौती दी गई थी।


    माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक की अर्हता में संशोधन, प्रधानाचार्य के लिए पीजी में 50% के साथ बीएड किया गया शामिल

    माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक की अर्हता में संशोधन, प्रधानाचार्य के लिए पीजी में 50% के साथ बीएड किया गया शामिल

    लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रधानाचार्य (इंटर स्तर) व प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल स्तर) की अर्हता में संशोधन किया गया है। इसमें जहां पीजी स्तर पर राहत देते हुए 50 फीसदी अंक तय किए गए हैं। वहीं बीएड को शामिल किया गया है। जबकि अनुभव का नियम पूर्व की भांति रहेगा।


    विशेष सचिव संदीप परमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार उप्र माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 के अध्याय 2 के विनियम-1 के परिशिष्ट क में संस्था प्रधान की अर्हता में संशोधन किया गया है। इसके तहत प्रधानाचार्य के लिए पीजी में 50 फीसदी अंक होने चाहिए। एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में बीएड होना चाहिए। साथ ही पूर्व की भांति राज्य सरकार की उच्चतर कक्षाओं (नौ से 12 में) प्रवक्ता व सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम चार साल का शिक्षण अनुभव, हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर कम से कम चार साल का अनुभव, 30 साल से कम आयु आयु नहीं होना चाहिए।

    इसी क्रम में प्रधानाध्यापक के लिए पीजी 50 फीसदी अंकों के साथ, एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में बीएड व बीपीएड होना होगा। साथ ही केंद्र-राज्य सरकार की मान्यता प्राप्त संस्थाओं में कक्षा नौ से 12 में प्रवक्ता, सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम चार साल का शिक्षक अनुभव, जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर कम से कम चार साल का अनुभव, 30 वर्ष से कम आयु नहीं होनी चाहिए। बता दें, अब तक दोनों पद के लिए लगभग एक जैसी अर्हता थी।