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Tuesday, August 22, 2119

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    Sunday, August 30, 2026

    नवसृजित जनपदों के शिक्षकों/कर्मचारियों के GPF की धनराशि के हस्तान्तरण में विलम्ब के संबंध में

    नवसृजित जनपदों के शिक्षकों/कर्मचारियों के GPF की धनराशि के हस्तान्तरण में विलम्ब के संबंध में।


    अशासकीय संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत के अंशदायी पेंशन योजनान्तर्गत शिक्षकों/ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के एनपीएस प्रणाली के समन्वय (Coordination) के संबंध में आयोजित प्रशिक्षण/कार्यशाला के संबंध में।

    अशासकीय संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत के अंशदायी पेंशन योजनान्तर्गत शिक्षकों/ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के एनपीएस  प्रणाली के समन्वय (Coordination) के संबंध में आयोजित प्रशिक्षण/कार्यशाला के संबंध में।



    26 राजकीय बेसिक विद्यालय बंद, संचालित 42 स्कूलों में 39 शिक्षक, राजकीय बेसिक विद्यालयों में शिक्षक नियुक्त नहीं होने से व्यवस्था बेपटरी

    26 राजकीय बेसिक विद्यालय बंद,  संचालित 42 स्कूलों में 39 शिक्षक, राजकीय बेसिक विद्यालयों में शिक्षक नियुक्त नहीं होने से व्यवस्था बेपटरी

    प्रदेश के कुल 68 विद्यालयों में 44 शिक्षक विहीन, शिक्षक युक्त विद्यालयों की संख्या 24

    प्रयागराज : पठन-पाठन बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में राजकीय बेसिक विद्यालय स्थापित तो किए गए, लेकिन आज स्कूल से लेकर शिक्षक व विद्यार्थियों तक को ढूंढ़ना पड़ेगा। स्थिति यह है कि कुल स्थापित 68 विद्यालयों में 26 बंद हो गए हैं। जो 42 संचालित हैं, उनमें विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए 39 शिक्षक हैं। 1990 के बाद शिक्षकों की नियुक्ति इस संवर्ग के विद्यालयों में नहीं होने से स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती गई, जिसका परिणाम यह है कि इनके अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लग गया है कि ये संचालित ही क्यों हैं? सोमवार को अपर मुख्य सचिव माध्यमिक/बेसिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा की विभागीय समीक्षा बैठक में राजकीय बेसिक विद्यालयों की बदहाली का विषय भी उठ सकता है।


    बालिका वर्ग, 23 सह शिक्षा प्रदेश में स्थापित कुल 68 विद्यालयों में तीन बालक वर्ग, 41 विद्यालय तथा एक विद्यालय कंपोजिट था। पिछले वर्ष इन विद्यालयों की स्थिति का आकलन शिक्षा निदेशालय ने कराया तो चिंताजनक तस्वीर सामने आई। इनमें कोई बालक विद्यालय संचालित नहीं मिला। यानी तीनों बंद हैं। इसके अलावा बालिका वर्ग के 21 तथा सह शिक्षा के 21 विद्यालय संचालित मिले। इस तरह कुल 44 विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं, जबकि 24 विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती है। संचालित विद्यालयों में 243 छात्राएं व 1017 बालक पंजीकृत हैं।

    जिन विद्यालयों में विद्यार्थी पंजीकृत हैं, वहां शिक्षकों को संबद्ध करके काम चलाया जा रहा है। स्थिति यह है कि मऊ जिले में स्थित राजकीय बालिका सीनियर बेसिक विद्यालय में 32 छात्राएं पंजीकृत हैं, लेकिन कोई शिक्षक नहीं हैं। राजकीय कन्या सीनियर बेसिक विद्यालय नगर क्षेत्र बांदा में भी ऐसा ही है। यहां 13 बालक व आठ बालिका तो पंजीकृत हैं, लेकिन शिक्षक नियुक्त नहीं हैं। आगरा के राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल बाह में तीन बालक और तीन बालिका को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक नियुक्त हैं। ऐसे ही मेरठ के राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल रोहटा में पंजीकृत पांच बालिकाओं के लिए एक शिक्षक की तैनाती है।

    चुनावी साल में आंगनबाड़ी और सहायिकाओं का 50 फीसदी मानदेय बढ़ाने की तैयारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 से बढ़ाकर 12 हजार तो सहायिकाओं का 4 से बढ़ाकर 6 हजार करने का है प्रस्ताव

    चुनावी साल में आंगनबाड़ी और सहायिकाओं का 50 फीसदी मानदेय बढ़ाने की तैयारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 से बढ़ाकर 12 हजार तो सहायिकाओं का 4 से बढ़ाकर 6 हजार करने का है प्रस्ताव

    लखनऊ। चुनावी साल में आधी आबादी को साधने के लिए सरकार एक और बड़ा फैसला लेने जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में दोगुना वृद्धि करने की तैयारी है। बाल विकास सेवा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय 8 से बढ़ाकर 12 हजार तो सहायिकाओं के मानदेय को 4 हजार से बढ़ाकर 6 हजार करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसे अगली कैबिनेट में मंजूरी दी जा सकती है। इस फैसले से प्रदेश की 1.89 लाख आंगनबाड़ी और 1.67 लाख सहायिकाओं को लाभ मिलेगा।


    दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते अप्रैल महीने में ही आंगनबाड़ी और सहायिकाओं के मानदेय में सम्मानजन वृद्धि करने की घोषणा की थी। इसी कड़ी में विभाग ने मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को वित्त, कार्मिक और न्याय विभाग के स्तर पर सहमति मिल चुकी है। मानदेय बढ़ान से प्रदेश सरकार के खजाने पर 3000 करोड़ से अधिक का वित्तीय भार आएगा। खास बात यह है कि योगी सरकार ने मानदेय में यह बढ़ोत्तरी अपने दम करने की हिम्मत दिखाई है। इस बढ़ोत्तरी में केंद्र सरकार से कोई वित्तीय मदद नहीं मिलेगी।

    बता दें कि मौजूदा मानदेय में केंद्र सरकार से भी धनराशि मिलती है, लेकिन इस बार की बढ़ोत्तरी से बढ़ने वाले वित्तीय भार को योगी सरकार अकेले वहन करेगी। मौजूदा समय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 8000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जिसमें 4500 रुपए केंद्र सरकार देती है और शेष 3500 रुपए राज्य सरकार देती है। अब प्रदेश सरकार अपनी 3500 की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 5500 कर देगी। इसे मिलाकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कुल 12000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। इसी प्रकार सहायिकाओं के मानदेय में भी राज्य सरकार अपनी हिस्सेदारी में 2000 रुपए और बढ़ाने जा रही है। इस प्रकार इन्हे अब 6000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।


    लंबे सम समय से मानदेय बढ़ाने की मांग

    सरकार के इस संभावित फैसले को महज मानदेय वृद्धि के तौर पर नहीं, बल्कि चुनावी साल में महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रदेश में आंगनबाड़ी व्यवस्था से बड़ी संख्या में महिलाएं सीधे जुड़ी हैं। कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का नेटवर्क गांव-गांव और शहरों के मोहल्लों तक फैला हुआ है। ऐसे में मानदेय बढ़ाने का फैसला एक बड़े महिला वर्ग को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ राजनीतिक संदेश देने वाला कदम साबित हो सकता है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे इस वर्ग के लिए यह वृद्धि आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


    महिला मतदाताओं पर बढ़ा फोकस

    राजनीतिक नजरिये से देखें तो विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं पर सभी दलों का फोकस बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में सरकार की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में प्रस्तावित बढ़ोतरी को महिला सशक्तीकरण और कल्याणकारी राजनीति के साथ जोड़कर पेश किया जा सकता है। इससे सरकार को अपने महिला-केंद्रित कामकाज को रेखांकित करने का मौका मिलेगा।

    Saturday, August 29, 2026

    यूपी में शिक्षकों, स्कूलों और ग्राम पंचायतों को मिलेगा बड़ा सम्मान, ₹3 लाख तक पुरस्कार जीतने का मौका, सीखो सिखाओ एवॉर्डस 2026 हेतु प्रोत्साहित किये जाने का निर्देश

    यूपी में शिक्षकों, स्कूलों और ग्राम पंचायतों को मिलेगा बड़ा सम्मान, ₹3 लाख तक पुरस्कार जीतने का मौका, सीखो सिखाओ एवॉर्डस 2026 हेतु प्रोत्साहित किये जाने का निर्देश 


    लखनऊ, 28 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों, विद्यालयों, ग्राम पंचायतों और ब्लॉक संसाधन केंद्रों (BRC) को प्रोत्साहित करने के लिए ‘सीखो सिखाओ अवॉर्ड्स 2026’ की शुरुआत की गई है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव की ओर से 27 अगस्त 2026 को प्रदेश के सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है।

    पांच श्रेणियों में दिए जाएंगे पुरस्कार
    ‘सीखो सिखाओ अवॉर्ड्स 2026’ के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वालों को पांच प्रमुख श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा—

    🔴 शिक्षक पुरस्कार – परिषदीय विद्यालयों के कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षक।
    🔴 विद्यालय पुरस्कार – परिषदीय विद्यालय कक्षा 1 से 8।
    🔴 ग्राम पंचायत पुरस्कार – शैक्षिक क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान देने वाली ग्राम पंचायतें।
    🔴 BRC पुरस्कार – शैक्षिक सहयोग के लिए योगदान देने वाले ब्लॉक संसाधन केंद्र।
    🔴 बालिका शिक्षा पुरस्कार – परिषदीय/माध्यमिक/KGBV विद्यालयों के कक्षा 6 से 12 तक के शिक्षक।


    विजेताओं को मिलेगा ₹3 लाख तक का पुरस्कार
    योजना के तहत विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं और उप-विजेताओं को आर्थिक पुरस्कार दिया जाएगा। शिक्षक पुरस्कार में प्रत्येक विजेता को ₹1 लाख और उप-विजेता को ₹50 हजार मिलेंगे। वहीं विद्यालय, ग्राम पंचायत और BRC पुरस्कार की प्रत्येक श्रेणी में विजेता को ₹3 लाख तथा उप-विजेता को ₹1 लाख की पुरस्कार राशि दी जाएगी। बालिका शिक्षा पुरस्कार के राज्य स्तरीय विजेता को ₹3 लाख का पुरस्कार मिलेगा।

    16 विजेता और 16 उप-विजेता
    विद्यालय, शिक्षक, ग्राम पंचायत और BRC की प्रत्येक श्रेणी में प्रदेश को पश्चिमी यूपी, केंद्रीय यूपी, पूर्वांचल और बुंदेलखंड के चार क्षेत्रों में बांटकर चयन किया जाएगा। प्रत्येक क्षेत्र से एक विजेता और एक उप-विजेता चुना जाएगा। इस प्रकार इन चार श्रेणियों में कुल 16 विजेता और 16 उप-विजेता होंगे। इसके अतिरिक्त बालिका शिक्षा श्रेणी में प्रदेश स्तर पर एक विजेता का चयन किया जाएगा।

    20 सितंबर तक आवेदन का मौका
    जारी सूचना के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और आवेदन की अंतिम तिथि 20 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।

    आवेदन एवं विस्तृत जानकारी के लिए सीखो सिखाओ फाउंडेशन की वेबसाइट का उल्लेख किया गया है। विभाग ने अधिकारियों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के शिक्षकों, विद्यालयों, ग्राम पंचायतों और BRC को इस पहल की जानकारी दें, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोग इसमें भाग ले सकें।


    सीखो सिखाओ एवॉर्डस 2026 हेतु प्रोत्साहित किये जाने के संबंध में।



    अमान्य विद्यालयों और निजी कोचिंग पर सख्ती के लिए यूपी में चलेगा विशेष अभियान

    अमान्य विद्यालयों और निजी कोचिंग पर सख्ती के लिए यूपी में चलेगा विशेष अभियान

    मान्यता/अमान्य विद्यालयों पर कार्रवाई के लिए यूपी बोर्ड ने फिर जारी किए सख्त निर्देश

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने जनपदों में अनधिकृत/अमान्य विद्यालयों के संचालन तथा नियम विरुद्ध निजी कोचिंग की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। परिषद ने 24 अगस्त 2026 को जारी स्मरण पत्र में जिला विद्यालय निरीक्षकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पूर्व में जारी निर्देशों के अनुपालन की स्थिति से अवगत कराने को कहा है।

    पत्र में शासनादेश दिनांक 09 जून 2025 के अनुपालन में गठित समिति के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अधीनस्थ क्षेत्रों में सघन निरीक्षण अभियान चलाकर अमान्य विद्यालयों को चिह्नित किया जाए तथा उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। कार्रवाई की सूचना निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने के निर्देश पहले भी दिए गए थे, लेकिन पत्र के अनुसार सूचना अद्यतन उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    परिषद को अमान्य विद्यालयों के संचालन की सूचनाएं लगातार प्राप्त हो रही हैं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों से पूर्व में भेजे गए 05 अप्रैल 2026 के पत्र में निर्धारित प्रारूप पर कार्रवाई की अद्यतन सूचना यथाशीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है।



    Friday, August 28, 2026

    बालवाटिका से 12वीं तक की पढ़ाई अब यूट्यूब पर भी, पीएम ई-विद्या के पांच डीटीएच चैनल अब यूट्यूब पर भी उपलब्ध

    बालवाटिका से 12वीं तक की पढ़ाई अब यूट्यूब पर भी, पीएम ई-विद्या के पांच डीटीएच चैनल अब यूट्यूब पर भी उपलब्ध

    लखनऊ। प्रदेश में बेसिक और माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए डिजिटल शिक्षा को अधिक सुलभबनाने की दिशा में पीएम ई-विद्या का दायरा बढ़ाया गया है। उत्तर प्रदेश के डीटीएच चैनल अब यूट्यूब पर भी उपलब्ध करा दिए गए हैं। इससे बालवाटिका से कक्षा 12 तक के छात्र घर बैठे अपनी सुविधा के अनुसार शैक्षिक सामग्री देख सकेंगे और जरूरत के अनुसार पाठ दोहरा सकेंगे।


    राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के माध्यम से इन चैनलों पर कक्षावार शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। यूट्यूब पर सामग्री उपलब्ध होने से छात्र, शिक्षक और अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार इन डिजिटल संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। शैक्षिक वीडियो कभी भी देखे जा सकेंगे और पढ़ाए गए विषयों को दोहराने का अवसर मिलेगा। चैनलों को निशुल्क सब्सक्राइब करने की सुविधा भी है।

    एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने बताया कि चैनल 173 पर बालवाटिका से कक्षा 2, 174 पर कक्षा 3 से 5, 175 पर कक्षा 6 से 8, 176 पर कक्षा 9 से 10 और 177 पर कक्षा 11 से 12 तक की शैक्षिक सामग्री उपलब्ध है। 

    सरकार ने तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। पीएम ई-विद्या के कक्षावार चैनलों को यूट्यूब पर उपलब्ध कराने से छात्रों को घर बैठे सीखने और पाठ दोहराने का सहज अवसर मिलेगा। - संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

    छात्रों की जन्मतिथि संशोधन को लेकर यूपी बोर्ड गंभीर, प्रमाणपत्र में जन्मतिथि संशोधन के लिए मान्य अभिलेख जरूरी

    छात्रों की जन्मतिथि संशोधन को लेकर यूपी बोर्ड गंभीर, प्रमाणपत्र में जन्मतिथि संशोधन के लिए मान्य अभिलेख जरूरी

    माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी किए निर्देश, सत्यापित टीसी में सावधानी बरतने की हिदायत


    प्रयागराज । यूपी बोर्ड छात्राओं की जन्म तिथि संशोधन को लेकर मिलने वाले आवेदन पर खासा गंभीर है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह का कहना है कि क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से मुख्यालय पर छात्र-छात्राओं की जन्मतिथि संशोधन सम्बन्धी प्रकरण प्राप्त होते रहते हैं। सही जन्मतिथि के साक्ष्य के रूप में प्राथमिक या उच्च प्राथमिक कक्षाओं की सत्यापित टीसी संलग्न की जाती है। बहुत से प्रकरणों में यह देखा जाता है कि बच्चे की आयु प्रवेश के समय आरटीई में निर्धारित आयु से कम होती है।

     यह भी देखा जाता है कि जन्मतिथि के अंकन में प्रधानाध्यापक उस अभिलेख का उल्लेख नहीं करते जिसके आधार पर बच्चों के प्रवेश के समय उनकी जन्मतिथि का अंकन किया जाता है। इससे अभिलेखों के प्रति संदेह पैदा होता है। लिहाजा जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध न होने पर अस्पताल या सहायक नर्स एवं मिडवाइफ पंजीकरण अभिलेख, आंगनबाड़ी का अभिलेख, जन्म एवं मृत्यु सम्बन्धी ग्राम पंजीकरण या फिर माता-पिता या अभिभावक द्वारा बालक की आयु की शपथ-पत्र के माध्यम से घोषणा ही मान्य होगी।


    Thursday, August 27, 2026

    एडेड माध्यमिक विद्यालयों में खत्म होगा प्राधिकारी नियंत्रक का खेल, शासन ने 36 एडेड विद्यालयों के मामले में किया जवाब-तलब

    एडेड माध्यमिक विद्यालयों में खत्म होगा प्राधिकारी नियंत्रक का खेल, शासन ने 36 एडेड विद्यालयों के मामले में किया जवाब-तलब


    लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में प्रबंध समिति का चुनाव लटकाकर प्राधिकारी नियंत्रक बने रहने की व्यवस्था पर शासन ने सख्ती शुरू कर दी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने प्रबंध समिति के विवाद से जुड़े 36 विद्यालयों के मामलों में माध्यमिक शिक्षा निदेशक से जवाब-तलब किया है। साथ ही, इन विद्यालयों में प्रबंध समिति के चुनाव और गठन की अपडेट जानकारी भी मांगी गई है।


    माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव संदीप परमार की अध्यक्षता में जुलाई में हुई बैठक में संबंधित विद्यालयों में जल्द प्रबंध समिति गठित करने के निर्देश दिए गए थे। अब शासन ने बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की स्थिति मांगी है। प्रबंध समिति में विवाद होने पर मामला रजिस्ट्रार, सोसाइटी, चिट्स एंड फंड के समक्ष जाता है। वहां निर्णय लंबित रहने पर संयुक्त शिक्षा निदेशक या जिला विद्यालय निरीक्षक किसी समूह ख के अधिकारी को प्राधिकारी नियंत्रक नामित कर सकते हैं। कई मामलों में सह जिला विद्यालय निरीक्षक या राजकीय कॉलेज के प्रबंध समिति के चुनाव व गठन की मांगी अपडेट जानकारी भी मांगी है प्राचार्य को भी यह जिम्मेदारी दी जाती है।

    प्राधिकारी नियंत्रक विद्यालय के प्रबंधक के रूप में शिक्षकों की प्रोन्नति, भवन निर्माण, अवकाश और वेतन समेत महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय लेते हैं। शासन को आशंका है कि कुछ मामलों में प्रबंध समिति का चुनाव अनावश्यक रूप से लंबित रखा जा रहा है। ऐसे में विवादों का जल्द निस्तारण कर नई समितियों के गठन के निर्देश दिए गए हैं।


    कई स्कूल हैं शामिल

    इन 36 विद्यालयों में लखनऊ के क्वींस एंग्लो संस्कृत इंटर कॉलेज और श्री योगेश्वर ऋषिकुल इंटर कॉलेज, रायबरेली का गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज तथा अयोध्या का लाला राम कुमार इंटर कॉलेज समेत उन्नाव के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज और आदर्श इंटर कॉलेज शामिल हैं।

    CBSE और CISCE स्कूल भी RTE के दायरे में, हाईकोर्ट ने मांगा प्रवेश का पांच साल का स्कूलवार ब्योरा

    CBSE और CISCE स्कूल भी RTE के दायरे में, हाईकोर्ट ने मांगा प्रवेश का पांच साल का स्कूलवार ब्योरा

    भदोही के एक स्कूल की याचिका पर दिया आदेश, अब 15 सितंबर को होगी सुनवाई


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सीबीएसई और सीआईएससीई से संबद्ध निजी स्कूल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई)-2009 के प्रावधानों से मुक्त नहीं हैं। किसी विद्यालय का राज्य बोर्ड के बजाय दूसरे बोर्ड से संबद्ध होना उसे आरटीई के तहत लागू दायित्वों से छूट नहीं देता।

    कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश का पिछले पांच शैक्षणिक सत्रों का स्कूलवार ब्योरा पेश करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने भदोही के वफनौटी स्थित सेंट जॉन्स स्कूल की याचिका पर दिया है।


    याची स्कूल ने दावा किया है कि आरटीई के प्रावधान अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू नहीं होते हैं। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से आरटीई अधिनियम की उपयोगिता, ईडब्ल्यूएस और वंचित समूहों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की नीति पर विस्तृत हलफनामा मांगा है।

    कोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा एक में कमजोर वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को प्रवेश देकर उन्हें प्राथमिक शिक्षा पूरी होने तक मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने के दायित्व की स्थिति स्पष्ट की जाए। इसमें दिव्यांग बच्चों को भी शामिल किया गया है।

    कोर्ट ने राज्य सरकार को सभी निजी प्राथमिक विद्यालयों की जिलेवार सूची देने के साथ जूनियर बेसिक, जूनियर हाईस्कूल, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर पर छात्र संख्या भी बतानी होगी। पिछले पांच शैक्षणिक सत्रों में आरटीई के तहत वास्तविक प्रवेश, आवंटित, प्रवेश न पाने वाले बच्चों की संख्या, कारण, निर्धारित नीति के विपरीत शुल्क वसूली संबंधी शिकायतों और उन पर कार्रवाई का विवरण भी देना होगा। कोर्ट ने सीबीएसई, सीआईएससीई और अन्य बोडों से संबद्ध स्कूलों को भी बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक को जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग करने का आदेश दिया है।

    Wednesday, August 26, 2026

    विशेष UPTET के लिए शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शासन को भेजी कार्ययोजना

    विशेष UPTET के लिए शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शासन को भेजी कार्ययोजना

    कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी कराने का सरकार ने लिया है निर्णय, आदेश के बाद आयोग शुरू कर देगा प्रक्रिया

    प्रयागराज : प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण नियुक्त शिक्षकों के लिए इसे सुप्रीम कोर्ट से अनिवार्य किए जाने के बाद प्रदेश सरकार के निर्णय के क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग विशेष टीईटी का आयोजन को तैयार है। शासन के निर्देश पर आयोग ने इस संबंध में कार्ययोजना भेज दी है।


    सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 के एक निर्णय में विद्यालयों में नियुक्त उन सभी शिक्षकों को दो वर्ष में टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया था, जिनकी सेवा पांच वर्ष से अधिक शेष थी। फिर इस वर्ष मई के अपने निर्णय में टीईटी उत्तीर्ण होने की अवधि एक वर्ष बढ़ा दी थी। यानी 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।

     इस अवधि में उत्तीर्ण नहीं हो पाते, उनकी सेवा समाप्त हो जाएगी। इस आदेश के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग जुलाई के प्रथम सप्ताह में सभी के शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन किया, जिसका परिणाम आना शेष है। इसमें बिना टीईटी उत्तीर्ण हुए नियुक्त 1.80 लाख से ज्यादा शिक्षक भी सम्मिलित हुए। 

    इधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी के आयोजन का निर्णय लिया था, जिसके क्रम में शासन ने आयोग से इस संबंध में कार्ययोजना मांगी थी। आयोग ने कार्ययोजना भेज दी है। जल्द निर्णय होने की संभावना है।

    Tuesday, August 25, 2026

    एडेड स्कूलों में मानदेय शिक्षक नहीं, न्यूनतम वेतनमान पर हों अस्थायी नियुक्तियां। हाईकोर्ट ने 25 व 30 हजार रुपये मानदेय वाली शिक्षक नीति के शासनादेश निरस्त किए

    एडेड स्कूलों में मानदेय शिक्षक नहीं, न्यूनतम वेतनमान पर हों अस्थायी नियुक्तियां। हाईकोर्ट ने 25 व 30 हजार रुपये मानदेय वाली शिक्षक नीति के शासनादेश निरस्त किए 

    नियमित शिक्षक मिलने तक आयोग की संस्तुति से नियुक्ति, स्वीकृत पद का न्यूनतम वेतनमान व भत्ते देने का निर्देश

    लखनऊइलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सहायता प्राप्त माध्यमिक (एडेड) विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर मानदेय के आधार पर नियुक्ति को अनुचित माना है। कोर्ट ने कहा कि स्वीकृत पद रिक्त होने पर नियमित चयनित शिक्षक के उपलब्ध होने तक अस्थायी नियुक्ति की नई नीति बनाई जाए। नियुक्त शिक्षक को संबंधित स्वीकृत पद के न्यूनतम वेतनमान के साथ अनुमन्य भत्ते दिए जाएं। नियुक्ति संबंधित प्राधिकारी की ओर से आयोग की संस्तुति पर की जाए। न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने मनोज कुमार सिंह समेत करीब 190 याचिकाओं का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। 


    कोर्ट ने नौ नवंबर 2023 और आठ जुलाई 2024 के राज्य सरकार के दोनों शासनादेश निरस्त कर दिए। पहले शासनादेश के तहत लंबे समय से कार्यरत तदर्थ शिक्षकों को हटाया गया था, जबकि दूसरे में शिक्षकों की कमी के कारण उन्हें दोबारा 25 हजार और 30 हजार रुपये के मानदेय पर रखने की नीति बनाई गई थी। कोर्ट ने कहा कि दोनों शासनादेश एक-दूसरे के विपरीत हैं। एक में तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की गईं और दूसरे में उन्हीं में से शिक्षकों को मानदेय पर रखने की अनुमति दी गई। यह 'अपरोबेट एंड रीप्रोबेट' के सिद्धांत के विपरीत है।

    याची ऐसे शिक्षक थे, जिन्हें स्वीकृत पदों पर तदर्थ नियुक्ति मिली थी और वे लंबे समय तक नियमित पद का वेतनमान प्राप्त करते रहे। सुप्रीम कोर्ट के 26 अगस्त 2020 के निर्देश पर उन्हें नियमित चयन परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिला। कुछ सफल नहीं हुए और कुछ परीक्षा में शामिल नहीं हुए। इसके बाद 30 दिसंबर 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को हटाने का निर्णय हुआ।

    कोर्ट ने कहा कि बाद में सरकार ने सहायता प्राप्त विद्यालयों में हजारों पद रिक्त होने और इससे पढ़ाई प्रभावित होने की बात स्वीकार की। इसी आधार पर मानदेय शिक्षक नीति लाई गई। हाईस्कूल शिक्षक को 25 हजार और इंटरमीडिएट शिक्षक को 30 हजार रुपये देने का प्रविधान किया गया था। कोर्ट ने कहा कि संबंधित पदों का वेतनमान क्रमशः 44,900 से 1,42,400 रुपये और 47,600 से 1,51,100 रुपये है। ऐसे में मानदेय बेहद कम है। पीठ ने रिक्तियों की सूचना समय पर नहीं भेजने पर अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया।

    हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय : स्कूल में स्कार्फ या हिजाब पहनने की अनुमति नहीं, पंथनिरेपक्षता मजबूत करती है यूनिफार्म

    हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय : स्कूल में स्कार्फ या हिजाब पहनने की अनुमति नहीं, पंथनिरेपक्षता मजबूत करती है यूनिफार्म

    कहा-हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं, छात्रा की याचिका खारिज की

    स्कूल का ड्रेस कोड तय करना पूरी तरह उचित है और इसमे बदलाव की माग करने वालों की सोच में बदलाव होना चाहिए न कि ड्रेस कोड में। अगर छात्रों को अपनी मर्जी से बदलाव की छूट दी जाने लगे तो इससे यूनिफार्म की अवधारणा ही खत्म हो जाएगी। – इलाहाबाद हाईकोर्ट


    प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि स्कूल में स्कार्फ अथवा हिजब पहनने की अनुमति नहीं है। स्कूल यूनिफार्म अनुशासन, बच्चों के बीच समानता, संस्थागत पहचान और धर्मनिरपेक्ष माहौल को बढ़ावा देती है, क्योंकि यह सभी धर्मों के छात्रों पर समान रूप से लागू है। प्रयागराज में टैगोर पब्लिक स्कूल की नाबालिग छात्र सुकैना रिजवी की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति जेजे मुनीर व न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की है। छात्रा ने स्कूल के तय ड्रेस कोड के साथ अतिरिक्त रूप से स्कार्फ वानी हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने की अनुमति मांगी। 


    याची छात्रा ने इसी स्कूल से हाईस्कूल उत्तीर्ण की थी और कक्षा 11 में प्रवेश लेना चाहती थी। उसका कहना था कि वह कक्षा छह से ही स्कार्फ पहनकर आती रही है और इस पर कभी कोई आपत्ति नहीं जताई गई। कक्षा 11 में दाखिले के समय स्कूल प्रबंधन ने कहा कि स्कार्फ पहनकर आना ड्रेस कोड का उल्लंघन है, इसलिए उसे प्रवेश नहीं दिया जा सकता। छात्र ने इसके खिलाफ जिलाधिकारी को दो शिकायती पत्र दिए। जिलाधिकारी की और रिपोर्ट मांगे जाने पर सहायक डीआइओएस ने दोनों पक्षों को सुना। प्रधानाचार्या ने स्पष्ट किया कि स्कूल सह शिक्षा संस्था है, जहां सभी समुदायों के बच्चे पढ़ते हैं और सभी के लिए समान ड्रेस कोड लागू है। किसी एक छात्रा को त्रिशेष छूट देने से व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। 

    छात्रा के वकील ने तर्क दिया कि स्कार्फ पहनना संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। यह उसकी गरिमा व शारीरिक स्वायत्तता से भी जुड़ा है। स्कार्फ पहनना उसके धार्मिक आचरण का हिस्सा है। इससे रोकना अनुच्छेद 14 व 19 (1) (ए) के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। 

    राज्य सरकार तथा सीबीएसई की ओर से पेश वकील ने कहा कि स्कूल निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्था है, जो राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण के अधीन नहीं आता। यूनिफार्म तय करना स्कूल प्रशासन की नीति का विषय है, इसका मकसद छात्रों में एकरूपता बनाए रखना है। हाई कोर्ट ने कहा कि पहले आपत्ति न जताया जाना ढिलाई, लापरवाही, इच्छाशक्ति की कमी या शालीनता के कारण भी हो सकता है। फातिमा धरनीम बनाम केरल राज्य मामले में केरल हाई कोर्ट की यह टिप्पणी भी अदालत ने उल्लेखित की कि छात्रा का ड्रेस चुनने का अधिकार व संस्था का प्रबंधन करने का अधिकार दोनों मौलिक हैं, लेकिन जब टकराव हो तो संस्था के व्यापक हित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

    बाम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी भी दोहराई जिसमें कहा गया है कि सिर ढंकना इस्लाम धर्म का अनिवार्य हिस्सा साबित नहीं होता। कर्नाटक हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ के चर्चित रेशम बनाम कर्नाटक राज्य (हिजाब मामला 2022) के फैसले का भी विस्तार से उल्लेख किया गया, जिसमें कहा गया था कि हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है और यूनिफार्म तय करने का अधिकार संस्था के पास है। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी और वहां दो जजों की पीठ ने बंटा हुआ फैसला दिया था। इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का कोई अंतिम और सर्वमान्य निर्णय अब तक नहीं आया है।

    राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026: उच्च शिक्षा और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षक सम्मानित होंगे

    राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026: उच्च शिक्षा और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षक सम्मानित होंगे


    नई दिल्ली, 25 अगस्त। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षकों/फैकल्टी सदस्यों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 प्रदान करेंगी।

    शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार इस वर्ष चयनित 21 शिक्षकों में केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों से 12, राज्य विश्वविद्यालयों से 5 तथा पॉलिटेक्निक संस्थानों से 4 शिक्षक शामिल हैं। चयन प्रक्रिया में शिक्षण-अधिगम की प्रभावशीलता, आउटरीच गतिविधियां, शोध एवं नवाचार तथा प्रायोजित शोध, फैकल्टी विकास कार्यक्रम और कंसल्टेंसी जैसे विभिन्न मानकों को आधार बनाया गया।


    राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए इस वर्ष ऑनलाइन नामांकन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से आमंत्रित किए गए थे। इसमें स्व-नामांकन के साथ संस्थागत और सहकर्मी नामांकन की व्यवस्था भी थी। प्रारंभिक स्तर पर स्क्रीनिंग के बाद ज्यूरी की समिति द्वारा अंतिम चयन किया गया।

    उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक के शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के दायरे में वर्ष 2023 में शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में उत्कृष्टता की संस्कृति को प्रोत्साहित करना है।


    पुरस्कार पाने वाले 21 शिक्षक एवं उनके संस्थान

    • प्रो. अवलोकिता अग्रवाल — IIT Roorkee, Uttarakhand
    • प्रो. कीर्ति चंद्र साहू — IIT Hyderabad, Telangana
    • प्रो. विनय चमौला — BITS Pilani, Rajasthan
    • डॉ. श्रीकांत गोल्लापुडी — IIT Bhubaneswar, Odisha
    • प्रो. मिथुन राधाकृष्ण — IIT Gandhinagar, Gujarat
    • प्रो. सौरव दत्ता — IISER Bhopal, Madhya Pradesh
    • प्रो. विक्रम विशाल — IIT Bombay, Maharashtra
    • प्रो. सरवैया जयराजसिंह इंद्रजीतसिंह — National Forensic Sciences University, Gandhinagar, Gujarat
    • प्रो. शंकर प्रसाद रथ — IIT Kanpur, Uttar Pradesh
    • डॉ. मनीषा निगम — Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University, Srinagar, Uttarakhand
    • डॉ. अमर मोहनराव ताकसांडे — Jawaharlal Nehru Medical College (JNMC), Wardha, Maharashtra
    • डॉ. अरुण बाबू — All India Institute of Medical Sciences (AIIMS), Mangalagiri, Andhra Pradesh
    • डॉ. पुख्रम्बम लिलाबती देवी — Manipur University, Imphal, Manipur
    • प्रो. डॉ. आशुतोष मोहन — Institute of Management Studies, Banaras Hindu University (BHU), Varanasi
    • प्रो. अंकुरन दत्ता — Gauhati University, Guwahati, Assam
    • सुश्री शिवानी वी. — Karnataka Sanskrit University, Bengaluru
    • प्रो. राजीव चौधरी — Pt. Ravishankar Shukla University, Raipur, Chhattisgarh
    • डॉ. विश्वनाथ एच. एस. — M.E.I. Polytechnic, Bengaluru, Karnataka
    • डॉ. शशिकला एस. — PSG Polytechnic College, Coimbatore, Tamil Nadu
    • डॉ. कन्नन रथिनम — Sakthi Polytechnic College (Govt. Aided), Erode, Tamil Nadu
    • डॉ. संदीपन्न प्रल्हाद नारोटे — Government Polytechnic, Solapur, Maharashtra


    Sunday, August 23, 2026

    देशभर के सभी स्कूलों में बनेंगे चुनावी साक्षरता क्लब, चुनावी प्रक्रिया को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए चुनाव आयोग की मुहिम

    देशभर के सभी स्कूलों में बनेंगे चुनावी साक्षरता क्लब, चुनावी प्रक्रिया को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए चुनाव आयोग की मुहिम

    दिसंबर तक हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 10 ऐसे क्लबों को सक्रिय करने का लक्ष्य


    नई दिल्ली ।  इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) सहित देश की चुनावी प्रक्रिया को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने अब नई पीढ़ी को इन चुनावी प्रक्रियाओं से जोड़ने और समझाने की एक मुहिम शुरू की है। इसके तहत देशभर के प्रत्येक स्कूल, कालेज व विश्वविद्यालय में अब एक चुनावी साक्षरता क्लब (ईएलसी) स्थापित होगा। जहां छात्रों को ईवीएम के कामकाज सहित मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया, मतगणना की प्रक्रिया आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी। जल्द ही आयोग इसके लिए एक पाठ्यक्रम भी जारी करेगा। इसकी तैयारी जोरों पर है।


    इस मुहिम के तहत  देश के 14.71 लाख स्कूलों, करीब 70 हजार उच्च शिक्षण संस्थानों और 1420 निजी व सरकारी विश्वविद्यालयों तक चुनावी साक्षरता क्लब खोलने की योजना बनाई है। इस साल के अंत यानी दिसंबर तक देश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 10 सक्रिय क्लब शुरू करने की योजना है। देश में मौजूदा समय में 4,123 विधानसभा क्षेत्र हैं। ऐसे में 41 हजार से अधिक क्लब इस साल के अंत तक सक्रिय हो जाएंगे। प्रत्येक क्लब में सदस्यों की संख्या करीब 25 होगी। ऐसे में इस मुहिम के जरिए इस साल 10 लाख से अधिक छात्रों को जोड़ने की योजना है। आयोग इस मुहिम को राज्यों के साथ मिलकर तेजी से आगे बढ़ाने में जुटा है।

    इस पूरी मुहिम की कमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने खुद ही संभाली है। उन्होंने इसे लेकर राज्यों का दौरा भी शुरू कर दिया है। दिसंबर तक उनकी सभी 36 राज्यों तक पहुंचने की तैयारी है। इस कड़ी में सोमवार को वह उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। उसके बाद वह तमिलनाडु, गोवा व गुजरात जाएंगे। इन दौरों के दौरान वह राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, कालेजों व स्कूलों के प्राचार्यों के साथ करीब छह-सात सौ छात्रों की एक कांफ्रेंस में हिस्सा लेते हैं।

    स्कूल के क्लब में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के बच्चे शामिल होंगे। प्रत्येक कक्षा के प्रत्येक सेक्शन से दो-दो बच्चे (एक छात्र व एक छात्रा) चयनित होंगे। इसका चयन क्लास टीचर करेंगे। क्लब के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चयन चयनित छात्रों के बीच चुनाव के जरिए होगा। कालेज व विश्वविद्यालय स्तर पर क्लब में भी प्रत्येक स्ट्रीम में एक सेक्शन से दो-दो छात्र चयनित होंगे। इन सभी का चयन एक शैक्षणिक सत्र के लिए होगा। यह क्लब चुनावी साक्षरता के अपने तय पाठ्यक्रम के मुताबिक हफ्ते में एक दिन करीब एक घंटे के लिए एक्टिविटी आयोजित करेगा।


    Saturday, August 22, 2026

    परीक्षा वर्ष 2027 की कक्षा 10 एवं 12 की परीक्षाओं के परीक्षा आवेदन पत्रों को भरे जाने की तिथियों में वृद्धि किये जाने के सम्बन्ध में।

    परीक्षा वर्ष 2027 की कक्षा 10 एवं 12 की परीक्षाओं के परीक्षा आवेदन पत्रों को भरे जाने की तिथियों में वृद्धि किये जाने के सम्बन्ध में।


    माध्यमिक शिक्षा विभाग में नागरिक घोषणा-पत्र का पालन अनिवार्य, प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

    माध्यमिक शिक्षा विभाग में नागरिक घोषणा-पत्र का पालन अनिवार्य, प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

    लखनऊ, 22 अगस्त। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी, प्रधानाचार्य/प्रधानाचार्या तथा संबंधित शिक्षा परिषदों से जुड़े प्रकरणों के त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण को लेकर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) ने निर्देश जारी किए हैं।

    19 अगस्त 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश जनहित गारंटी अधिनियम, 2011 के अंतर्गत विभिन्न सेवाओं के निस्तारण के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाए। पत्र में 5 मार्च 2025 को जारी निर्देशों का हवाला देते हुए नागरिक घोषणा-पत्र में निर्धारित समयावधि में विभिन्न प्रकरणों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं।

    इसके तहत माध्यमिक शिक्षा विभाग से संबंधित विभिन्न प्रकरणों के निस्तारण की दैनिक निगरानी एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही नागरिक घोषणा-पत्र में उल्लिखित राजकीय/अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, प्रधानाचार्यों/प्रधानाचार्याओं तथा संबंधित शिक्षा परिषदों से जुड़े प्रकरणों के निस्तारण की स्थिति की समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं।

    पत्र में यह भी निर्देशित किया गया है कि प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं द्वितीय अपीलीय अधिकारी के समक्ष लंबित प्रकरणों का विवरण 15 दिवस के भीतर संबंधित कार्यालय के मुख्य द्वार/प्रवेश द्वार के निकट बड़े अक्षरों में प्रदर्शित किया जाए। इसके लिए सूचना-पट्ट का प्रारूप नागरिक घोषणा-पत्र में अंकित कराए जाने को कहा गया है।

    विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जनसामान्य के प्रकरणों सहित माध्यमिक शिक्षा विभाग से संबंधित विभिन्न मामलों का नियमों के अनुरूप समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करते हुए कार्यालय में नागरिक घोषणा-पत्र सूचना-पट्ट स्थापित कराया जाए। साथ ही इसकी स्थिति से विभाग को ई-मेल के माध्यम से अवगत कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।



    यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र निर्धारण की संशोधित समय सारिणी जारी, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने किया संशोधन

    यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र निर्धारण की संशोधित समय सारिणी जारी, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने किया संशोधन

    प्रयागराज । माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वर्ष 2027 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं के लिए केंद्र निर्धारण की संशोधित समय सारिणी जारी की है। इसका उद्देश्य गुणवत्ता, पारदर्शिता और नकलविहीन परीक्षा सुनिश्चित करना है।  पूरी वेब आधारित प्रक्रिया 24 अगस्त से शुरू होकर 29 अक्तूबर तक चलेगी।

    संशोधित कार्यक्रम के तहत, सभी विद्यालयों को 24 अगस्त तक अपनी भौतिक अवस्थापना की जानकारी देनी होगी। उन्हें सुविधाओं से संबंधित सूचना भी परिषद की वेबसाइट upmsp.edu.in पर प्रविष्ट करनी होगी। जिलाधिकारी द्वारा गठित तहसील स्तरीय समिति तीन सितंबर तक इन सूचनाओं का भौतिक सत्यापन करेगी।

    सत्यापन रिपोर्ट को जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से 12 सितंबर तक बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। स्वचालित प्रणाली से चयनित परीक्षा केंद्रों की सूची, छात्र आवंटन सहित, 21 सितंबर को सार्वजनिक की जाएगी। प्रतिबंधित या अयोग्य विद्यालयों की सूची 23 सितंबर को डीआईओएस पोर्टल पर प्रदर्शित होगी। इन सूचियों पर किसी भी प्रकार की आपत्ति या शिकायत 28 सितंबर तक परिषद के वेब मंच पर दी जा सकेगी।

    जिला विद्यालय निरीक्षक आठ अक्तूबर तक प्राप्त आपत्तियों का परीक्षण कर उनका निस्तारण करेंगे। तर्कसंगत पाए जाने पर जनपदीय समिति से अनुमोदित आख्या वेब मंच पर अग्रसारित की जाएगी।

    जनपदीय समिति द्वारा अनुमोदित विद्यालय-वार छात्र आवंटन सहित परीक्षा केंद्रों की सूची 17 अक्तूबर को वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। अंत में, छात्र आवंटन सहित परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची 29 अक्तूबर को परिषद की वेबसाइट पर प्रविष्ट कर दी जाएगी। 

    माध्यमिक शिक्षा परिषद, उ०प्र० प्रयागराज द्वारा आयोजित होने वाली वर्ष 2027 की हाईस्कूल/इण्टरमीडिएट परीक्षाओं हेतु परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण ऑनलाइन प्रक्रिया से कराये जाने हेतु शासनादेश में निर्धारित समय सारिणी में आंशिक संशोधन के सम्बन्ध में।


    शैक्षिक सत्र 2026-2027 (परीक्षा वर्ष 2028) के कक्षा 09 एवं 11 के छात्र/छात्राओं के अग्रिम पंजीकरण किये जाने सम्बन्धी तिथियों में वृद्धि किये जाने के सम्बन्ध में।

    शैक्षिक सत्र 2026-2027 (परीक्षा वर्ष 2028) के कक्षा 09 एवं 11 के छात्र/छात्राओं के अग्रिम पंजीकरण किये जाने सम्बन्धी तिथियों में वृद्धि किये जाने के सम्बन्ध में।



    कक्षा-9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक वीडियो निर्माण हेतु अध्यापकों का आनलाइन पंजीकरण कराने के सम्बन्ध में।

    कक्षा-9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक वीडियो निर्माण हेतु अध्यापकों का आनलाइन पंजीकरण कराने के सम्बन्ध में।


    Friday, August 21, 2026

    सेमेस्टर और परीक्षा में देरी पर बताना होगा कारण, UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों को लिखा पत्र, सेमेस्टर, परीक्षा तय शेड्यूल के अनुसार करें

    सेमेस्टर और परीक्षा में देरी पर बताना होगा कारण, UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों को लिखा पत्र, सेमेस्टर, परीक्षा तय शेड्यूल के अनुसार करें


    नई दिल्ली। सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को अपना अकादमिक सत्र तय शेड्यूल के अनुसार चलाना होगा। शैक्षणिक सत्र 2026-27 को शुरू करने, सेमेस्टर और परीक्षा में देरी पर कारण बताना होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को अकादमिक कैलेंडर के तहत अपना सत्र चलाने को कहा है।


    यूजीसी का मानना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों के मनमाने रवैये से छात्रों को दिक्कत होती है। इसलिए अकादमिक सत्र में बदलाव होने पर संस्थानों को अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर उसकी जानकारी देनी होगी। यूजीसी ने छात्रों की शिकायत के बाद इस संबंध में सभी राज्यों और उच्च शिक्षण संस्थानों को पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि अगस्त का आधा महीना बीत चुका है।

    लेकिन कई उच्च शिक्षण संस्थानों में अभी तक दाखिला प्रक्रिया चल रही है। इसके कारण कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में सितंबर तक नियमित कक्षाएं शुरू नहीं हो पाएंगी। इससे सेमेस्टर सिस्टम भी प्रभावित होने से उसे आगे बढ़ा दिया जा रहा है। सेमेस्टर शुरू और समाप्त होने में देरी का असर परीक्षाओं में भी देखने को मिल रहा है।

    इसके बाद रिजल्ट देरी से जारी किया जा रहा है। अगर कोई शिक्षण संस्थान अपने अकादमिक कैलेंडर में देरी के कारण बदलाव करता है तो फिर उसकी जानकारी संबंधित संस्थान की अधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाए, ताकि छात्रों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। अगर कोई संस्थान अकादमिक सत्र में बदलाव करता है तो उसके कारण की रिपोर्ट यूजीसी को भी भेजी जाए।


    दाखिले में देरी, पढ़ाई भी प्रभावित

    दरअसल, छात्रों ने अपनी समस्या में लिखा है कि अकादमिक सत्र में देरी का असर उनके अगले दाखिले पर भी पड़ रहा है। इसके अलावा यूजी और पीजी डिग्री प्रोग्राम के साथ वे अन्य कोर्स साथ में करते हैं, उसकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है।

    Thursday, August 20, 2026

    शैक्षिक सत्र 2026-27 में छात्र/छात्राओं, शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की ऑनलाइन दैनिक उपस्थिति के संबंध में।

    शैक्षिक सत्र 2026-27 में छात्र/छात्राओं, शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की ऑनलाइन दैनिक उपस्थिति के संबंध में।


    यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट में 20 नंबर की प्रयोगात्मक परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन, 80 नंबर की होगी लिखित परीक्षा

    यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट में 20 नंबर की प्रयोगात्मक परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन, 80 नंबर की होगी लिखित परीक्षा

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट लिखित परीक्षा अब 80 नंबर की होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ)-2023 एवं राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र (परख) की सिफारिशों के आधार पर राज्य शिक्षा संस्थान समेत अन्य संस्थानों ने 11वीं और 12वीं के लिए 80 नंबर का प्रश्नपत्र तैयार किया है।



    वर्तमान में यूपी बोर्ड की ओर से इंटरमीडिएट में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गृहविज्ञान जैसे विषयों में 70-70 नंबर की लिखित और 30-30 नंबर की प्रयोगात्मक परीक्षा होती है।

    वहीं हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, अर्थशास्त्र जैसे गैर-प्रयोगात्मक विषयों में 100-100 नंबर की लिखित परीक्षा होती है। अब गैर-प्रयोगात्मक विषयों में भी 20-20 नंबर का आंतरिक मूल्यांकन और 80-80 नंबर की लिखित परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है। अगले शैक्षिक सत्र से यह बदलाव कक्षा 11 से लागू करने की तैयारी है।

    100 नंबर की परीक्षा अभी प्रयोगात्मक विषयों को छोड़कर

    अगले शैक्षिक सत्र से बदलाव कक्षा 11 से लागू की तैयारी।

    सर्वाधिक 35% अनुप्रयोग आधारित प्रश्न होंगे

    राज्य शिक्षा संस्थान के विशेषज्ञों ने कक्षा 11 व 12 के लिए इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र एवं नागरिक शास्त्र के प्रतिदर्श प्रश्नपत्रों का निर्माण किया है। इनमें परख के अनुसार सर्वाधिक 35 प्रतिशत अंकों के प्रश्न अनुप्रयोग आधारित होंगे।

    पहले यूपी बोर्ड के प्रश्नपत्र में चार बिन्दुओं ज्ञान (20%), बोध (30%), अनुप्रयोग (30%) और कौशल (20%) का मूल्यांकन होता था। अब नए प्रश्नपत्र के जरिए छह बिन्दुओं ज्ञान (17.5%), बोध (17.5%), अनुप्रयोग (35%), विश्लेषण (22%), मूल्यांकन (4%) और सृजन (4%) के आधार पर विद्यार्थियों को परखा जाएगा।


    प्रत्येक यूनिट से प्रश्न पूछना अनिवार्य

    नए सिरे से तैयार प्रश्नपत्र में प्रत्येक यूनिट से प्रश्न पूछना अनिवार्य किया गया है तथा प्रत्येक यूनिट का अधिभार निश्चित किया गया है। बाह्य विकल्प के प्रश्न नहीं रखे गए हैं, जिसके कारण छात्रों को प्रत्येक यूनिट पढ़ना अनिवार्य होगा।

    विषयात्मक प्रश्नों की संख्या में कमी की गई है। प्रत्येक यूनिट के वस्तुनिष्ठ स्तरीय प्रश्नों में आंतरिक विकल्प के रूप में प्रश्न दिए गए हैं, जो उसी यूनिट, उसी उद्देश्य व उसी कठिनाई स्तर के होंगे। प्रश्नपत्रों में इस प्रकार के प्रश्न भी हैं, जिससे बच्चों में मूल्यांकन करने की क्षमता, विश्लेषण एवं सृजनात्मक शक्ति का विकास हो।

    राजेंद्र प्रताप, प्राचार्य राज्य शिक्षा संस्थान के अनुसार, एक संतुलित प्रश्नपत्र तैयार किया गया है, जिसमें प्रश्न के उद्देश्य, प्रकार, कठिनाई स्तर तथा प्रकरणों पर विशेष बल दिया गया है। प्रश्नपत्र में प्रश्नों का समावेश इस प्रकार किया गया है कि छात्र उत्तर रटकर देने के बजाय समझकर व दैनिक जीवन में अनुप्रयोग के आधार पर दे सकें। इससे विद्यार्थियों में चिंतन, आलोचनात्मक सोच व समस्या समाधान कौशल विकसित किया जा सकेगा।

    यूपी में कार्यरत 3.53 लाख रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी की तैयारी

    यूपी में कार्यरत 3.53 लाख रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी की तैयारी


    लखनऊः प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में बच्च मिड-डे मील तैयार करने वाले 3.53 लाख रसोइयों के मानदेय बढ़ोतरी हो सकती है। इनके मासिक मानदेय में करीब 1000 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। विधान सभा चुनाव से पहले सरकार इस संबंध में घोषणा कर सकती है। हालांकि अभी मिड-डे मील प्राधिकरण की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। 


    प्रदेश के 1.32 लाख लाख परिषदीय विद्यालयों में करीब 1.46 करोड़ विद्यार्थियों को मिड-डे मील दिया जाता है। इसे तैयार करने की जिम्मेदारी रसोइयों की होती है। इन्हें पहले 1000 रुपये मासिक मानदेय मिलता था। वर्ष 2019 में इसे बढ़ाकर 1500 रुपये और वर्ष 2022 में 2000 रुपये किया गया था।

    Wednesday, August 19, 2026

    यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की किताबें उपलब्ध कराने में रहा फेल, टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से हवाहवाई रहा दावा

    यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की किताबें उपलब्ध कराने में रहा फेल, टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से हवाहवाई रहा दावा 

    अपर सचिव ने कहा, MOU न होने से अब अगले सत्र में ही किताबें उपलब्ध होने की उम्मीद


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड के अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्रों को इस वर्ष अपनी निर्धारित पाठ्य पुस्तकें नहीं मिल पाएंगी। उन्हें वर्ष 2027-2028 शैक्षिक सत्र में ही ये किताबें उपलब्ध हो सकेंगी। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अंग्रेजी माध्यम की अलग किताबें प्रकाशित करने का दावा किया था लेकिन टेंडर प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।


    उम्मीद हैं कि आगामी शैक्षिक सत्र 2027-28 से हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के अनुबंध किए जाएंगे। वर्तमान में कक्षा नौ से 12 तक के अंग्रेजी माध्यम के छात्र एनसीईआरटी की महंगी किताबों पर निर्भर हैं। बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने के लिए अपनी सस्ती पाठ्य पुस्तकें प्रकाशित करने की योजना बनाई थी।

    इस योजना को शासन से अनुमति भी मिल गई थी। करीब एक लाख अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को सस्ती किताबें मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, प्रकाशन के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से यह संभावना कमजोर पड़ गई है। अपर सचिव स्कन्द शुक्ला ने बताया कि अभी एमओयू नहीं हो सका है। उन्होंने आगामी सत्र 2027 से अंग्रेजी माध्यम की किताबें मुहैया कराने की उम्मीद जताई।

    शासनादेश और प्रक्रिया : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण और वितरण के लिए जून 2026 में एक शासनादेश जारी हुआ था। शासन के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्ता ने यह शासनादेश जारी किया था। इसमें एनसीईआरटी नई दिल्ली से कॉपीराइट अनुबंध करने की बात कही गई थी। निविदा की कार्रवाई सात अप्रैल 2022 को गठित निविदा समिति के माध्यम से होनी थी।

    Tuesday, August 18, 2026

    राजस्थान के स्कूलों में बिना प्रिंसिपल की अनुमति के नहीं घुस सकेंगे बाहरी, फोटो-वीडियो पर सख्त पाबंदी

    राजस्थान के स्कूलों में बिना प्रिंसिपल की अनुमति के नहीं घुस सकेंगे बाहरी, फोटो-वीडियो पर सख्त पाबंदी

    सीजेपी के दौरे के एलान के बाद सरकार ने लिया बड़ा फैसला

    जयपुर। राजस्थान सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और बिना अनुमति फोटो व वीडियो बनाने पर रोक लगा दी है। यह फैसला कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के उस एलान के बाद आया है, जिसमें उसने राज्य के जर्जर स्कूलों में जाने की बात कही थी। हाल ही में राज्य के कई स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और शिक्षकों के भारी संकट को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने प्रदर्शन किए थे।


    सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वे जयपुर, अजमेर, जोधपुर समेत कई जिलों में खराब हालत वाले सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने जारी आदेश में कहा, यह कदम बच्चों की सुरक्षा, निजता और गरिमा की रक्षा के लिए उठाया गया है।

    नए नियमों के मुताबिक, बिना प्रिंसिपल की अनुमति के कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है। वहीं, दूसरी ओर इस आदेश के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा, सरकार अपनी कमियों और टूटी छतों को सुधारने के बजाय उन्हें दुनिया की नजरों से छिपाना चाहती है। कांग्रेस ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, अगर यह आदेश जल्द वापस नहीं लिया गया, तो पार्टी इसके खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करेगी। 

    Monday, August 17, 2026

    माध्यमिक विद्यालय में 'प्रोजेक्ट प्रवीण' का होगा विस्तार, प्रदेश के 4026 राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में शुरू होगी तैयारी

    माध्यमिक विद्यालय में 'प्रोजेक्ट प्रवीण' का होगा विस्तार, प्रदेश के 4026 राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में शुरू होगी तैयारी

    विद्यालयों में सुविधाओं का सर्वे कर प्रशिक्षण शुरू करेगा कौशल विकास मिशन

    लखनऊमाध्यमिक शिक्षा के स्तर पर भी विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने और रोजगारोन्मुख बनाने के प्रयासों के विस्तार के लिए प्रदेश सरकार प्रोजेक्ट प्रवीण का दायरा बढ़ाने जा रही है। प्रदेश के उन राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में भी अब कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी, जहां अभी तक किसी भी व्यावसायिक शिक्षा योजना का लाभ नहीं पहुंचा है। इन विद्यालयों में कक्षाएं, बिजली, उपकरण समेत आधारभूत सुविधाओं का सर्वे कर कौशल विकास मिशन के सहयोग से प्रशिक्षण शुरू कराया जाएगा। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआइओएस) को निर्देश जारी कर दिए हैं।




    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में 3208 अशासकीय सहायता प्राप्त और 818 राजकीय माध्यमिकविद्यालय ऐसे हैं, जो किसी भी व्यावसायिक शिक्षा योजना से आच्छादित नहीं हैं। इन विद्यालयों में आवश्यक संसाधनों और सुविधाओं का सर्वे होगा और उसकी रिपोर्ट के आधार पर चरणबद्ध तरीके से कौशल प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ रोजगारपरक शिक्षा भी मिल सके।

    योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक जिले के डीआइओएस और जिला समन्वयक को ऐसे विद्यालयों की सूची यू-डायस कोड और छात्र संख्या के साथ तैयार कर कौशल विकास मिशन के निदेशक को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद चयनित विद्यालयों में माध्यमिक शिक्षा विभाग और कौशल विकास मिशन द्वारा जारी संयुक्त दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

    अपर मुख्य सचिव ने निर्देशों में कहा है कि जिन विद्यालयों में अब तक कोई व्यावसायिक शिक्षा योजना लागू नहीं है, वहां समयबद्ध तरीके से सर्वे और प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाए।

    संसदीय समिति ने देश में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों की संख्या में तत्काल वृद्धि की जरूरत बताई

    12वीं तक आते-आते पढ़ाई छोड़ देते हैं 73% बच्चे, लोकसभा की प्राक्कलन समिति ने स्कूली बच्चों के बीच में पढ़ाई छोड़ने पर उठाए सवाल

    संसदीय समिति ने देश में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों की संख्या में तत्काल वृद्धि की जरूरत बताई 
     

    नई दिल्लीः नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) आने के बाद देश में शिक्षा से जुड़े सुधार की पहल तो तेज हुई, लेकिन स्कूली शिक्षा की हालत अभी भी काफी खराब है। लोकसभा की प्राक्कलन समिति ने देश की स्कूली शिक्षा की स्थिति को लेकर आईना दिखाया है। संसदीय समिति ने कहा है कि 12वीं तक आते-आते लगभग 73 प्रतिशत बच्चे सिर्फ इसलिए पढ़ाई छोड़ देते हैं, क्योंकि माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूल उनकी पहुंच से दूर है।


    वैसे भी देश में प्राथमिक स्कूलों की तुलना में उच्च माध्यमिक स्कूलों की संख्या सिर्फ दस प्रतिशत ही है। ऐसे में प्राथमिक स्कूलों से निकलने वाले सभी बच्चों को उच्च माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाया भी नहीं जा सकता है।

    लोकसभा की प्राक्कलन समिति ने स्कूली शिक्षा की इस विसंगति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और केंद्र व राज्य सरकारों से कहा है कि वह तत्काल माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूलों की संख्या में वृद्धि करें। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 12वीं तक आते-आते 73 प्रतिशत बच्चे इसलिए पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं, क्योंकि प्राथमिक स्कूलों से निकलने के बाद उनके आसपास कोई माध्यमिक व उच्च आसपास माध्यमिक स्कूल नहीं है, वहीं ज्यादा दूर रह कर पढ़ाई करना उनके लिए आर्थिक रूप से मुश्किल भी है। ऐसे में वह पढ़ाई छोड़ देते हैं।

    समिति ने आंकड़े देकर बताया है कि देश में प्राथमिक कक्षाओं में जहां 6.18 करोड़ छात्रों का नामांकन है, वहीं माध्यमिक कक्षाओं में कम होकर नामांकन 2.36 करोड़ और उच्च माध्यमिक कक्षाओं में नामांकन 1.64 करोड़ ही है। समिति ने बढ़ते शिक्षा स्तर के साथ छात्रों की संख्या में तीव्र गिरावट पर गंभीर चिंता जताई है। साथ ही इसे दूर करने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाने की सिफारिश की है।

    गौरतलब है कि मौजूदा समय में देश में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की कुल संख्या 10.85 लाख है। जिसमें प्राथमिक स्कूल 9.11 लाख, उच्च प्राथमिक 4.12 लाख, माध्यमिक स्कूल 1.61 लाख व उच्च माध्यमिक स्तर के 90 हजार स्कूल है। इनमें बड़ी संख्या में कंपोजिट स्कूल भी है, जहां पहली से 12वीं तक एक ही स्कूल है। इसमें कक्षा एक से 12 वीं के एक ही स्कूल को प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक यानी इन चारों श्रेणियों में अलग-अलग गिना जाता है। ऐसे में कुल स्कूली की संख्या व श्रेणियों में अंतर रहता है।