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Tuesday, August 22, 2119

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    Monday, June 8, 2026

    अब राजकीय और एडेड स्कूलों से ही इंटर्नशिप कर सकेंगे बीएड विद्यार्थी, एनसीटीई के नियमों को सख्ती से लागू करने को लेकर शिक्षा विभाग की पहल

    अब राजकीय और एडेड स्कूलों से ही इंटर्नशिप कर सकेंगे बीएड विद्यार्थी, एनसीटीई के नियमों को सख्ती से लागू करने को लेकर शिक्षा विभाग की पहल
     
    बीएड पाठ्यक्रम के तहत इंटर्नशिप कार्यक्रम होगा लागू 

    एनसीटीई की व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर

    08 जून 2026
    प्रयागराज। बीएड पाठ्यक्रम करने वाले छात्र-छात्राओं को राजकीय या सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों से प्रशिक्षुता (इंटर्नशिप) करनी होगी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नियमों को सख्ती से लागू करने को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने पहल की है। दो साल के बीएड पाठ्यक्रम में पढ़ने वाले छात्रों के लिए 20 हफ्ते की इंटर्नशिप जरूरी होगी।

    पहले साल चार सप्ताह और दूसरे में 16 सप्ताह की इंटर्नशिप अनिवार्य होगी। इसका रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना होगा। अब तक तमाम संस्थान फर्जी इंटर्नशिप प्रमाणपत्र लगा देते थे। इससे गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण नहीं हो पा रहा था।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को पांच जून को पत्र लिखा है कि एनसीटीई रेगुलेशन 2014 में दी गई व्यवस्था के अनुसार प्रदेश के सभी बीएड कॉलेजों (सरकारी अथवा निजी) में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कराया जाए।



    बीएड में 20 सप्ताह की इंटर्नशिप अनिवार्य


    9 मई 2026
    लखनऊ। बीएड के दो वर्षीय पाठ्यक्रम में 20 सप्ताह की इंटर्नशिप जरूरी होगी। प्रशिक्षुओं को पहले वर्ष चार, दूसरे वर्ष 16 हफ्ते की इंटर्नशिप करनी होगी। 


    इन्हें राजकीय माध्यमिक स्कूलों पढ़ाने भेजा जाएगा। कहीं राजकीय स्कूल नहीं है तो निजी में भेजा जाएगा। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के नियम सख्ती से लागू होंगे। 

    उच्च शिक्षा संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने जिलों को निर्देश भेज दिए हैं। कॉलेज इंटर्नशिप के लिए छात्र सूची डीआईओएस को भेजेंगे।

    कक्षा छह से आठ तक मनमर्जी से नहीं चुन निजी स्कूल सकते किताबें – हाईकोर्ट

    कक्षा छह से आठ तक मनमर्जी से नहीं चुन निजी स्कूल सकते किताबें – हाईकोर्ट 

    हाईकोर्ट ने किताबें तय करने का का जम्मू और कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन का अधिकार बरकरार रखा

    केवल बोर्ड की प्रकाशित किताबों को अपनाने का दिया गया था निर्देश

    कुछ स्कूलों के खिलाफ अन्य प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर करने की थीं शिकायतें


    जम्मू। जम्मू-कश्मीर में कक्षा छह से आठ तक के निजी स्कूल अब मनमर्जी या पसंद से किताबें नहीं चुन सकेंगे। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों के लिए किताबें तय करने का जम्मू और कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (जेकेबोस) अधिकार बरकरार रखा है। हाईकोर्ट का का फैसला स्कूली बच्चों और अभिभावकों पर सीधा असर डालेगा।


    कुछ निजी स्कूलों में जेकेबोस की किताबों के बदले या अन्य प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर करने की शिकायतें आई थीं। इसके बाद जेकेबोस ने एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें पूरे प्रदेश के निजी स्कूलों को कक्षा छह से आठ तक के लिए केवल बोर्ड की ओर से प्रकाशित किताबों को अपनाने और पढ़ाने का निर्देश दिया गया था।

    जम्मू-कश्मीर प्राइवेट स्कूल्स यूनाइटेड फ्रंट इसे लेकर हाईकोर्ट में लेटर्स अपील दायर की थी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान स्कूली शिक्षा बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों में कक्षा छह से आठ के लिए बोर्ड की ओर से प्रकाशित पुस्तिकाओं को आवश्यक किए जाने संबंधी निर्देश दिए गए थे।

    हाईकोर्ट के निर्देशों को चुनौती देते हुए लेटर्स पेटेंट अपील दायर की। इसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने अपील को खारिज कर दिया है और सिंगल जज के उस फैसले को ठहराया। डिवीजन बेंच ने कहा कि बोर्ड की ओर से पाठ्यक्रम और किताबों संबंधी बाध्यता का मकसद शैक्षिक मानकों को बनाए रखना और प्रदेश में शैक्षिक सामग्री में एकरूपता सुनिश्चित करना है।

    कोर्ट का दखल तभी सही है जब उसकी नीति मनमानी, गलत या कानून के खिलाफ हो। माना जा रहा है कि कोर्ट के इस फैसले से एक सिस्टम बनेगा और छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों पर बिना मंजूरी वाली किताबों का बोझ कम होगा। जेएनएफ


    इस आधार पर दी गई चुनौती

    अपील करने वाले ने इन निर्देशों को चुनौती दी थी। इसमें आधार बनाया गया कि बोर्ड पाठ्यक्रम और किताबें तय कर सकता है लेकिन वह निजी स्कूलों को सिर्फ बोर्ड की ओर से प्रकाशित किताबों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। तर्क दिया गया कि इससे विद्यार्थी बेहतर शैक्षणिक गुणवत्ता की किताबें अपनाने के विकल्प से वंचित हो जाएंगे।

    निजी स्कूलों की दलील को खारिज करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि एक बार जब कोई शैक्षिक संस्थान अपनी मर्जी से बोर्ड से संबद्धता लेता है तो उसकी शर्तों से जुड़ जाता है। इनमें जेकेबोस की ओर से तय पाठ्यक्रम और किताबें अपनाना भी शामिल है।




    पीएम मोदी की अध्यक्षता में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सुधारों पर होगा मंथन, 11 जून को होगी नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक

    पीएम मोदी की अध्यक्षता में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सुधारों पर होगा मंथन, 11 जून को होगी नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक

    राज्यों की आर्थिक प्रगति की रफ्तार कैसे बढ़े, इस पर भी विमर्श

    नई दिल्ली: देश में पेपर लीक की घटनाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यह बैठक 11 जून को नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की होगी और इसमें शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लिए आवश्यक मानव संसाधन विकास, बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, सेकेंडरी स्तर की शिक्षा व्यवस्था, और बच्चों की एक्स्ट्रा कैरीकुलर गतिविधियों यानी खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और लीडरशिप कार्यक्रम आदि को लेकर किस तरह की नीति बनाई जाए, इस पर चर्चा होगी। साथ ही इस पर भी विमर्श होगा कि किस तरह से राज्यों में नियमों व व्यवस्थाओं को ज्यादा से ज्यादा उदारवादी बनाकर आर्थिक प्रगति की रफ्तार तेज की जाए।


    बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के भाग लेने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में पेपर लीक से संबंधित मुद्दे सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे, लेकिन कुछ मुख्यमंत्रियों द्वारा इस विषय को उठाए जाने की संभावना है। 

    सभी राज्यों को पहले ही यह संदेश दिया गया है कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी, ताकि मुख्यमंत्री अपने सुझाव प्रस्तुत कर सकें। मुख्य रूप से, विकसित भारत के लक्ष्यों के अनुसार मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और केंद्र तथा राज्यों के बीच सामंजस्य पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। 

    कांग्रेस शासित राज्यों के नए मुख्यमंत्रियों जैसे कि केरल और कर्नाटक द्वारा पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सरकार को असहज करने का प्रयास किया जा सकता है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद हो रही इस बैठक में बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पहली बार भाग ले सकते हैं।

    सूत्रों का कहना है कि इस बैठक को मई, 2026 में पीएम मोदी की उनके मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ हुई अलग-अलग बैठकों के संदर्भ में भी देखना चाहिए। उक्त बैठकों में मोदी ने पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न चुनौतियों को दूर करने के लिए रिफार्म एक्सप्रेस व विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्यों के स्तर पर कारोबार करने की राह की अड़चनों को दूर करने को प्राथमिकता के तौर पर लेने की बात कही थी।

     मुख्य सचिवों की बैठक में कई ऐसे फैसले किए गए थे जिनको लेकर अब मुख्यमंत्रियों के साथ विमर्श किया जाएगा। इसमें वामपंथी हिंसा से मुक्त कराये गए जिलों व क्षेत्रों के लिए विशेष कार्यक्रम व योजनाओं को लागू करना भी शामिल है।

    निजी विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर से डिग्री तक जांच दायरे में, उच्च शिक्षा परिषद की ओर से गठित 11 समितियां करेंगी जांच

    निजी विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर से डिग्री तक जांच दायरे में, उच्च शिक्षा परिषद की ओर से गठित 11 समितियां करेंगी जांच

    प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा कार्यक्रमों और नकल रोकने के उपायों की पडताल भी होगी

    खेल मैदान, खेल सुविधाएं, सेमिनार हाल और छात्र क्लबों का भौतिक सत्यापन होगा

    7 जून 2026
     लखनऊप्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता, परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज की व्यापक जांच होगी। इसके लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित समितियां विश्वविद्यालयों का निरीक्षण करेंगी। जांच उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की ओर से कराई जा रही है। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय राज्य सरकार के साझा (कामन) शैक्षणिक कैलेंडर का पालन कर रहे हैं या नहीं। सेमेस्टर और शैक्षणिक सत्र की शुरुआत और समाप्ति, परीक्षा कार्यक्रम और अवकाश की तिथियों का मिलान किया जाएगा। यह भी जांचा जाएगा कि शैक्षणिक कैलेंडर छात्रों और कर्मचारियों को समय पर उपलब्ध कराया गया था या नहीं।

    परिषद की ओर से गठित समितियां निजी विश्वविद्यालयों की वार्षिक और गतिविधि रिपोर्ट की भी समीक्षा करेंगी। वाद-विवाद प्रतियोगिता, क्विज, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों की जानकारी जुटाई जाएगी। एनएसएस और एनसीसी इकाइयों की स्थापना, छात्र नामांकन और उनके कार्यक्रमों की भी जांच होगी। निरीक्षण के दौरान खेल मैदान, खेल सुविधाएं, आडिटोरियम, सेमिनार हाल और छात्र क्लबों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

    छात्रों और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत कर यह भी जाना जाएगा कि उन्हें पर्याप्त सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं और उनकी गतिविधियों में भागीदारी कितनी है। परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए किए गए इंतजामों की भी समीक्षा होगी। सीसीटीवी निगरानी, शोध में नकल रोकने के लिए प्लेजरिज्म डिटेक्शन साफ्टवेयर और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। प्रवेश प्रक्रिया, प्रवेश तिथियों और परीक्षा कार्यक्रमों को भी राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप परखा जाएगा। समितियां विश्वविद्यालयों द्वारा जारी डिग्री और प्रमाणपत्रों के प्रारूप, सुरक्षा फीचर और नामकरण की भी जांच करेंगी। राज्य सरकार को भेजे जाने वाले वार्षिक प्रतिवेदन, छात्र संख्या, वित्तीय विवरण और अन्य सूचनाओं का सत्यापन किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि सभी जानकारी निर्धारित प्रारूप में भेजी गई है या नहीं।




    प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की जमीन और भवनों की होगी जांच, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा परिषद ने जांच समिति गठित की

    समिति देखेगी- विश्वविद्यालय तय मानकों के अनुसार संचालित हो रहे या नहीं?

    27 मई 2026
    लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की जमीन, भवन और वित्तीय व्यवस्था की गहन जांच होगी। 52 निजी विश्वविद्यालयों की पड़ताल के लिए उच्च शिक्षा परिषद की ओर से गठित समिति यह जांचेगी कि संस्थान तय मानकों के अनुसार चल रहे हैं या नहीं। जमीन की वैधता से लेकर भवन क्षेत्रफल, नक्शे, लोन और भू-उपयोग तक हर पहलू की बारीकी से जांच की जाएगी। कुछ निजी विश्वविद्यालयों के मानकों के विपरीत संचालित होने की शिकायतें हैं। पुष्टि होने पर संबंधित विश्वविद्यालय पर कार्रवाई भी होगी।


    सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी मामले में 20 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश के बाद यह कार्रवाई शुरू की जा रही है। इसमें सबसे पहले विश्वविद्यालयों की जमीन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल होगी। टाइटल डीड, म्यूटेशन रिकार्ड, भूमि उपयोग प्रमाणपत्र और साइट प्लान की जांच की जाएगी।  यह देखा जाएगा कि जमीन एक ही स्थान पर लगातार जुड़ी हुई हो और अलग-अलग टुकड़ों में न बंटी हो।

    नियम के अनुसार शहरी क्षेत्र में कम से कम 20 एकड़ और ग्रामीण क्षेत्र में 50 एकड़ जमीन होना जरूरी है। समिति यह भी जांचेगी कि जमीन विश्वविद्यालय या उसकी प्रायोजक संस्था के नाम दर्ज है या नहीं। जमीन का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए हो रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल होगी।

    कैंपस में शैक्षणिक भवन छात्रावास और खेल मैदान जैसी सुविधाएं ही संचालित होंगी। किसी भी प्रकार के व्यावसायिक उपयोग पर नजर रखी जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय की जमीन या भवन किसी बैंक या मान्यताप्राप्त वित्तीय संस्था के पास गिरवी रखे गए हैं या नहीं। इसके लिए मार्गेज डीड और ऋण स्वीकृति पत्रों की जांच होगी। यह भी देखा जाएगा कि लिया गया ऋण केवल विश्वविद्यालय के विकास कार्यों में ही खर्च किया गया हो। निजी व्यक्ति या कंपनी के पक्ष में किसी तरह का चार्ज या गिरवी स्वीकार नहीं होगा। 


    24 हजार वर्गमीटर चाहिए कारपेट एरिया 
    विश्वविद्यालय भवनों के स्वीकृत नक्शे, पूर्णता प्रमाणपत्र और आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की भी जांच की जाएगी। साइट प्लान और भूमि रिकार्ड का मिलान कर यह देखा जाएगा कि भवन उसी जमीन पर बने हैं जो विश्वविद्यालय के नाम दर्ज है। आर्किटेक्चरल ड्राइंग और प प्रमाणित माप रिपोर्ट के आधार पर यह भी सत्यापित किया जाएगा कि विश्वविद्यालय का कुल कारपेट एरिया कम से कम 24 हजार वर्गमीटर है या नहीं।


    नाम बदलने के विवाद से खुली जांच की राह
    आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा का मामला एक छात्रा की ओर से दाखिल याचिका से शुरू हुआ था। इस प्रकरण में आरोप लगाया गया था कि सभी वैध दस्तावेज देने के बाद भी विश्वविद्यालय ने रिकार्ड में नाम बदलने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामला केवल एक छात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। इसके बाद अदालत ने देशभर के निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, नियमों और संचालन की व्यापक जांच कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पूछा है कि निजी विश्वविद्यालय किन कानूनों और परिस्थितियों में स्थापित किए गए। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि उन्हें जमीन, रियायतें और अन्य किस प्रकार की सुविधाएं दी गई।


    पुरानी पेंशन और टीईटी के मुद्दे पर अटेवा ने की आगामी कार्यक्रमों की घोषणा, 11 जून को जनजागरण यात्रा से होगी शुरुआत

    पुरानी पेंशन और टीईटी के मुद्दे पर अटेवा ने की आगामी कार्यक्रमों की घोषणा,  11 जून को जनजागरण यात्रा से होगी शुरुआत


    लखनऊ। पुरानी पेंशन की बहाली, निजीकरण की समाप्ति, टीईटी की अनिवार्यता की समाप्ति के लिए कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। अटेवा पेंशन बचाओ मंच की बैठक में इनकी घोषणा की गई।


    बैठक में अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु ने कहा कि आज टीईटी अनिवार्यता के कारण लाखों शिक्षकों की नौकरी खतरे में हैं। पुरानी पेंशन बहाल न होने से शिक्षक और कर्मचारियों को सेवानिवृत होने पर दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। इसलिए अटेवा द्वारा लखनऊ में काकोरी से 11 जून को 11 बजे शहीदों को नमन कर जनजागरण यात्रा प्रारंभ की जाएगी जो विभिन्न ब्लॉकों व जिलों में जाएगी।

    प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरजपति त्रिपाठी ने बताया कि 10 जुलाई से 15 अगस्त तक जनजागरण गोष्ठी, 29 अगस्त को जिला मुख्यालय में तिरंगा यात्रा और 25 सितंबर को लखनऊ में रैली की जाएगी। इसके माध्यम से सरकार से पुरानी पेंशन बहाली और टीईटी की अनिवार्यता पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की जायेगी।

    प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. आशाराम व चन्द्रहास सिंह ने कहा कि आज शिक्षकों से एसआईआर से लेकर जनगणना तक सभी काम लिए जा रहे हैं। इनको करने के साथ ही उसे बच्चों को पढ़ाने का भी जिम्मा है। इतने काम होने के बावजूद अब उसे बुढ़ापे में टीईटी पास करने के लिए कहा जा रहा है जोकि न्यायसंगत नहीं है।

    प्रदेश सलाहकार ओम प्रकाश कनौजिया, जनार्दन शुक्ला, रजत प्रकाश, सूफियान अहमद, कुलदीप सैनी, धर्मेंद्र गोयल, सुमन कुरील, डॉ. राजेश कुमार ने कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की। बैठक में रंजना सिंह, ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी, विजय प्रताप बुढ़नपुरी, नरेन्द्र कुमार, अशोक कन्नौजिया आदि उपस्थित थे।

    Sunday, June 7, 2026

    सुप्रीम कोर्ट के टीईटी की अनिवार्यता के आदेश के बाद नई मांग: सेवा अनुभव को वेटेज देकर कराया जाए विभागीय टीईटी

    सुप्रीम कोर्ट के टीईटी की अनिवार्यता के आदेश के बाद नई मांग: सेवा अनुभव को वेटेज देकर कराया जाए विभागीय टीईटी

    7 जून 2026
    लखनऊ। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर हाल में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में लंबे समय से कार्यरत टीईटी-प्रभावित शिक्षकों के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इसी क्रम में एक ओर शिक्षक संगठन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सेवा अनुभव को महत्व देते हुए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित करने की मांग उठाई है, वहीं दूसरी ओर विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी सरकार से व्यावहारिक समाधान निकालने का आग्रह किया है।


    ज्ञापन में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने हालिया निर्णय में टीईटी की अनिवार्यता को बरकरार रखते हुए राज्यों को वर्ष में कम से कम दो बार टीईटी आयोजित करने तथा प्रभावित शिक्षकों को परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख किया है। ऐसे में प्रदेश में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए उनके लिए अलग से विभागीय टीईटी आयोजित किया जाना चाहिए।

    मांग करने वालों का तर्क है कि परिषदीय विद्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्होंने वर्षों तक विद्यालयों में शिक्षण कार्य किया है और शिक्षा व्यवस्था को संभाले रखा है। यदि केवल औपचारिक परीक्षा के आधार पर उनकी सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इसका असर न केवल शिक्षकों पर पड़ेगा बल्कि विद्यालयों के संचालन और लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

    प्रस्ताव में यह भी सुझाव दिया गया है कि विभागीय टीईटी में शिक्षकों की सेवा अवधि के आधार पर अतिरिक्त अंक (वेटेज) दिए जाएं। साथ ही न्यूनतम उत्तीर्णांक में आवश्यक शिथिलता प्रदान कर अनुभव और दक्षता के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। इससे लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को एक न्यायसंगत अवसर मिल सकेगा और शिक्षा व्यवस्था में अचानक उत्पन्न होने वाली अस्थिरता से भी बचा जा सकेगा।

    ज्ञापन और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई मांगों के बाद अब निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं। शिक्षा जगत में यह चर्चा तेज है कि क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना का पालन करते हुए अनुभवी शिक्षकों के लिए कोई विशेष व्यवस्था या विभागीय टीईटी मॉडल तैयार करेगी, अथवा सभी प्रभावित शिक्षकों को सामान्य टीईटी प्रक्रिया से ही गुजरना होगा। फिलहाल इस मुद्दे ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।


    टीईटी की अनिवार्यता को लेकर मुख्यमंत्री से मिला प्रतिनिधिमंडल

    6 जून 2026
    लखनऊः  शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की नौकरी पर मंडरा रहे संकट के दृष्टिगत विधान परिषद के दो सदस्यों और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात कर उन्हें अपनी चिंता से अवगत कराया।

    प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से कहा कि वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की सेवाएं सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद संकट में हैं। शिक्षकों के लंबे अनुभव को देखते हुए उनके लिए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित की जाए और उन्हें सेवा अनुभव के आधार पर वेटेज देते हुए उनकी सेवाएं सुरक्षित की जाएं। प्रतिनिधिमंडल में विधान परिषद सदस्य राज बहादुर सिंह चंदेल व देवेंद्र प्रताप सिंह और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी व संयुक्त महामंत्री अमित सिंह शामिल थे।

    योगी के समक्ष सहायताप्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों के नियमितीकरण का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को सहानुभूतिपूर्वक सुना और भरोसा दिलाया कि सभी शिक्षकों के हितों की रक्षा की जाएगी और उनकी सेवाएं सुरक्षित रखने का प्रयास जारी रहेगा।



    परिषदीय स्कूलों में सेवारत शिक्षकों के लिए विभागीय टीईटी कराएं

    5 जून 2026
    लखनऊः शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले के बाद परिषदीय विद्यालयों में करीब 1.86 लाख सेवारत शिक्षकों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस बीच भाजपा के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) देवेंद्र प्रताप सिंह ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को पत्र लिखकर सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित करने और उनकी सेवा अवधि के आधार पर वेटेज अंक देने की मांग की है।.

    पत्र में उन्होंने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों को सेवारत शिक्षकों के लिए वर्ष में कम से कम दो बार टीईटी आयोजित करने का निर्देश दिया है। साथ ही टीईटी उत्तीर्ण करने की समय सीमा में एक वर्ष का अतिरिक्त विस्तार भी दिया गया है। ऐसे में प्रदेश सरकार को प्रभावित शिक्षकों को राहत देने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए। यदि शिक्षकों की सेवाएं प्रभावित होती हैं तो इसका असर स्कूलों के संचालन के साथ गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

    एमएलसी ने सुझाव दिया कि सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित की जाए। इसके साथ ही न्यूनतम उत्तीर्णांक में आवश्यक शिथिलता प्रदान की जाए और शिक्षकों को उनकी सेवा अवधि के आधार पर अतिरिक्त भारांक (वेटेज) दिया जाए।

    उच्च शिक्षा के क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती को लेकर चर्चा तेज, शिक्षा निदेशालय में कार्यवाहक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

    उच्च शिक्षा के क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती को लेकर चर्चा तेज, शिक्षा निदेशालय में कार्यवाहक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल


    प्रयागराज। प्रदेश का उच्च शिक्षा निदेशालय प्रयागराज इन दिनों कार्यवाहक व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहा है। उच्च शिक्षा निदेशक स्वयं कार्यवाहक के रूप में कार्यरत हैं। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न मंडलों में 11 से अधिक क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों की तैनाती भी अस्थायी एवं कार्यवाहक आधार पर किए जाने से विभागीय हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कारण प्रोफेसर पदनाम वाले को स्थायी प्राचार्य के पद पर नियुक्ति दिया जाना शासनादेश का उल्लंघन है।


    सूत्रों के अनुसार, शासन ने अगस्त 2025 में प्रदेश के मंडलों में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के पद सृजित करने का निर्णय लिया था। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया था कि इन पदों को उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा नियमावली-1985 के प्रावधानों के अनुरूप राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों के स्थानांतरण के माध्यम से भरा जाएगा।

    हालांकि हाल में जारी तैनाती आदेशों में कई शिक्षकों को पदोन्नति की प्रतीक्षा के बीच अस्थायी रूप से क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी का दायित्व सौंपा गया है। आदेश में यह भी उल्लेख है कि प्राचार्य पद पर पदोन्नति बाधित होने के कारण यह व्यवस्था की गई है।

    विभागीय सूत्रों का कहना है कि उच्चतर शिक्षा सेवा नियमावली-1985 के तहत प्रशासनिक संरचना में निदेशक, स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य, स्नातक महाविद्यालय के प्राचार्य और शिक्षक शामिल हैं। नियमों के अनुसार पदोन्नति की क्रमिक व्यवस्था निर्धारित है। ऐसे में कार्यवाहक तैनाती को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विवाद की एक वजह वर्ष 2016 का शासनादेश भी बताया जा रहा है।

    उस समय शासन ने निर्णय लिया था कि राजकीय एवं सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों को प्राचार्य के साथ प्रोफेसर का पदनाम भी दिया जाएगा। शासन का तर्क था कि प्राचार्य और प्रोफेसर दोनों का वेतनमान एवं ग्रेड पे समान है।

    प्राचार्य पद के लिए अपेक्षित अनुभव प्रोफेसर की तुलना में अधिक है। दरअसल पदनाम इसलिए समकक्ष मानने कि अनुमति प्रदान की गई, जिससे कि प्रोफेसर पदनाम न होने के कारण महाविद्यालयों के स्थायी प्राचार्य विभिन्न समितियों में सदस्य बनने से वंचित न रह जाएं। उधर, विभाग में लंबे समय से नियमित पदोन्नति न होने की भी चर्चा है। करीब आठ वर्षों से विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक नहीं हो सकी है, जिससे नियुक्तियां लंबित हैं।


    मार्च 2016 के शासनादेश के अनुसार प्राचार्य एवं प्रोफेसर का वेतनमान समान है। जो अधिकारी प्राचार्य के वेतनमान में कार्य कर रहे हैं, उन्हें ही क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी बनाया गया है। इसमें किसी नियम की अनदेखी नहीं की गई है। लंबे समय से पदोन्नति नहीं होने के कारण व्यावहारिक कठिनाइयां हैं। – डा. बीएल शर्मा, निदेशक उच्च शिक्षा

    Saturday, June 6, 2026

    परिषदीय स्कूल खुलते ही पढ़ाई पर फोकस, किताब और अखबार पढ़ने पर रहेगा जोर, अपर मुख्य सचिव ने की सभी एडी बेसिक और बीएसए के साथ नए शैक्षिक सत्र की तैयारियों की समीक्षा

    परिषदीय स्कूल खुलते ही पढ़ाई पर फोकस, किताब और अखबार पढ़ने पर रहेगा जोर, अपर मुख्य सचिव ने की सभी एडी बेसिक और बीएसए के साथ नए शैक्षिक सत्र की तैयारियों की समीक्षा 


    लखनऊः गर्मी की छुट्टियों के बाद परिषदीय विद्यालय खुलते ही पढ़ाई, बच्चों की उपस्थिति और सीखने के स्तर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्कूलों में विद्यार्थियों को नियमित रूप से पुस्तकें और समाचार पत्र पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा, साथ ही उनमें स्वतंत्र लेखन की आदत विकसित करने पर भी जोर रहेगा। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शुक्रवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर नए शैक्षिक सत्र की तैयारियों की समीक्षा की।


    निर्देश दिए कि विद्यालय खुलने से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं ताकि पहले दिन से बच्चों को बेहतर शैक्षिक माहौल मिल सके। आरटीई के तहत लंबित प्रवेश पूरे करने, स्कूल चलो अभियान को गति देने और सभी पात्र बच्चों का नामांकन व शत-प्रतिशत ट्रांजीशन सुनिश्चित करने को कहा गया। 

    शिक्षकों के कौशल विकास, अंतरजनपदीय तबादलों की पारदर्शी प्रक्रिया, समग्र शिक्षा अभियान के लंबित कार्यों, स्कूल ग्रांट, पाठ्यपुस्तकों और अन्य भुगतान जल्द निपटाने के निर्देश भी दिए गए। निपुण भारत मिशन को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। 

    आपरेशन कायाकल्प के 19 मानक पूरे करने और छात्राओं और दिव्यांग बच्चों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा गया। बैठक में नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के विषय में बताया गया कि अब तक सात साक्षरता परीक्षाओं में 13.82 लाख असाक्षरों ने भाग लिया, जिनमें 11.68 लाख से अधिक लोगों को साक्षर बनाया जा चुका है।

    नौकरी की उम्मीदें धुंधली इसलिए डीएलएड से पीछे हट रहे छात्र, वर्ष 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया 15 जून से शुरू हो रही

    नौकरी की उम्मीदें धुंधली इसलिए डीएलएड से पीछे हट रहे छात्र, वर्ष 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया 15 जून से शुरू हो रही 

    5 जून 2026
    ◾वर्ष 2025 में 86 हजार से भी कम रह गई संख्या
    ◾वर्ष 2024 में 1.91 लाख अभ्यर्थियों ने कराया था पंजीकरण

    प्रयागराज। प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं में लंबे अंतराल और सीमित रोजगार अवसरों का असर अब शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों पर भी दिखाई देने लगा है। डीएलएड जैसे पाठ्यक्रमों में अभ्यर्थियों की रुचि लगातार घट रही है। स्थिति यह है कि जिन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कभी भारी प्रतिस्पर्धा होती थी, वहां अब बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने लगी हैं।

    परीक्षा नियामक प्राधिकारी के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 3,046 निजी कॉलेजों और 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में डीएलएड की लगभग 2.39 लाख सीटें हैं। वर्ष 2024 में जहां करीब 1.91 लाख अभ्यर्थियों ने डीएलएड प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण कराया था, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 86 हजार से भी कम कम रह गई। वर्ष 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया 15 जून से शुरू होगी।

    शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद भी लंबे समय तक भर्ती न निकलने से छात्रों का भरोसा कम हुआ है। प्रदेश में बीएड, डीएलएड और अन्य शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों से जुड़े अभ्यर्थियों की संख्या 28 से 30 लाख के बीच बताई जाती है, जो विभिन्न शिक्षक भर्तियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

    वर्ष 2017 में 72,825 और वर्ष 2019 में लगभग 69 हजार सहायक अध्यापक पदों की भर्ती से प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को अवसर मिला था, लेकिन इसके बाद से नई भर्तियों का इंतजार लगातार लंबा होता गया है।

    प्रतियोगिता बढ़ी, अवसर सीमित 
    वर्ष 2019 की शिक्षक भर्ती में लगभग 15 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। हाल में आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) के लिए 20 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं।

    अभ्यर्थी और संगठन की पीडा
    उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि प्रदेश में प्रशिक्षित करीब 30 लाख छात्र रोजगार के अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं को नियमित और समयबद्ध बनाए जाने की आवश्यकता है। वहीं प्रतियोगी छात्र प्रतिनिधि शीतला प्रसाद ओझा का कहना है कि लंबे समय से पर्याप्त संख्या में भर्तियां न होने के कारण डीएलएड सहित अन्य शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में अभ्यर्थियों की रुचि प्रभावित हुई है।




    डीएलएड से घटा प्रतियोगियों का मोह किसी डायट में नहीं भरी सभी सीटें, प्रदेश के 67 डायट में से 14 में आधी से ज्यादा रिक्त सीटें

    निजी डीएलएड संस्थानों को मिलाकर डेढ़ लाख सीटों पर नहीं मिले अभ्यर्थी

    29 मई 2026
    प्रयागराजः प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षण के प्रति छात्र-छात्राओं का रुझान लगातार कम हो रहा है। यही कारण है कि पिछले कई वर्ष से डीएलएड की सभी सीटें नहीं भर पा रही हैं। सत्र विलंबित होने के कारण वर्ष 2025 के लिए प्रवेश प्रक्रिया 2026 में पूरी हुई और प्रवेश की स्थिति यह है कि प्रदेश के 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में से कोई ऐसा नहीं है, जिसकी सभी सीटें भरी हों। 14 डायट ऐसे हैं, जिनमें आधी से ज्यादा सीटों पर अभ्यर्थी नहीं मिले। इस तरह डायट और निजी डीएलएड प्रशिक्षण संस्थानों को मिलाकर 2,39,500 सीटों में से करीब 90 हजार सीटों पर ही प्रवेश हुए हैं।


    प्रदेश में 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) संचालित हैं। इसमें वाराणसी में संचालित कालेज आफ टीचर एजुकेशन (सीटीई) भी सम्मिलित है। इसके अलावा 3,046 निजी डीएलएड संस्थान एवं 258 अल्पसंख्यक कालेज चल रहे हैं। इस तरह इन सभी संस्थानों को मिलाकर कुल 2,39,500 सीटों में से करीब 1.49 लाख खाली रह गई हैं। 


    स्थिति यह है कि डायट के रूप में संचालित सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों की सभी सीटों के लिए भी अभ्यर्थी नहीं मिले। डायट में प्रवेश के मामले में सबसे अच्छी स्थिति बांदा और श्रावस्ती की है। इनमें स्वीकृत कुल 50-50 सीटों में से 49-49 सीटों पर प्रवेश हुए हैं। दोनों में केवल एक-एक सीटें रिक्त हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर फर्रुखाबाद और महराजगंज है, जहां 50-50 सीटों में से केवल दो-दो खाली हैं। तीसरे नंबर पर इटावा, कुशीनगर, बलिया हैं। इटावा में 50 में 47 तथा बलिया एवं कुशीनगर में 100-100 सीटों के सापेक्ष 97-97 पर प्रवेश हुए हैं। इनमें तीन-तीन सीटें खाली हैं।

     इसके विपरीत मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, अमरोहा, बिजनौर, कन्नौज, औरैया, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, ललितपुर, वाराणसी में आधी से ज्यादा सीटें रिक्त हैं। इनमें अधिकांश में 200 सीटें सृजित हैं। इस तरह प्रदेश के डायट संस्थानों में कुल 10,600 सीटें हैं, जिनमें 7,198 सीटों पर प्रवेश हुए हैं। 3,402 सीटें रिक्त रह गई हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 2018 के बाद से बेसिक शिक्षक भर्ती नहीं आने से डीएलएड पाठ्यक्रम के प्रति आकर्षण कम हुआ है।

    शिक्षकों की तदर्थ सेवा अवधि जोड़कर पेंशन देंः हाईकोर्ट

    शिक्षकों की तदर्थ सेवा अवधि जोड़कर पेंशन देंः हाईकोर्ट


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तदर्थ (एडहॉक) सेवा अवधि को पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना में शामिल करने के मामले में शिक्षकों को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने कानपुर के उप शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) द्वारा छह मई 2026 को पारित उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ताओं को तदर्थ सेवाओं का लाभ देने से इनकार किया गया था।


    रमेश सिंह चौहान और तीन अन्य शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी संपूर्ण सेवा अवधि, जिसमें तदर्थ सेवाकाल भी शामिल है, को पेंशन, चयनित ग्रेड और पदोन्नति संबंधी लाभों की गणना में जोड़ने की मांग की थी।

    CBSE 12वीं की उत्तरपुस्तिकाओं के सत्यापन व पुनर्मूल्यांकन आवेदन अब सात जून तक

    CBSE 12वीं की उत्तरपुस्तिकाओं के सत्यापन व पुनर्मूल्यांकन आवेदन अब सात जून तक

    5 जून 2026
    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक बोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि एक दिन बढ़ाकर सात जून कर दी है। पहले यह समयसीमा छह जून आधी रात तक निर्धारित थी। 

    बोर्ड ने यह निर्णय उन छात्रों की शिकायतों के बाद लिया है, जिन्होंने परिणाम उपरांत सेवाओं (पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज) पोर्टल पर उत्तरपुस्तिकाओं की स्कैन कापी देखने और सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने में तकनीकी दिक्कतों की बात कही थी। यह पोर्टल दो जून से शुरू किया गया था। सीबीएसई ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जारी संदेश में कहा कि छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्हें अतिरिक्त समय और सुविधा प्रदान करने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने का फैसला किया गया है। बोर्ड ने छात्रों से संशोधित कार्यक्रम के अनुसार आवेदन करने का आग्रह किया है।

    बोर्ड ने मंगलवार को उन छात्रों के लिए आनलाइन सुविधा शुरू की थी जो उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं हैं। इसके तहत छात्र स्कैन कापी में पृष्ठ गायब होने, पूरक उत्तरपुस्तिका संलग्न न होने, नक्शे या ग्राफ के अभाव, धुंधले पन्नों, गलत उत्तरपुस्तिका अपलोड होने या किसी अन्य प्रश्नपत्र सेट के आधार पर मूल्यांकन जैसी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।



    सीबीएसई का पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन हेतु पोर्टल तय समय पर नहीं शुरू हो सका, छात्रों और अभिभावकों में बढ़ रही नाराजगी

    1 जून 2026
    नई दिल्ली। उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन के लिए एक जून से शुरू होने वाला केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का पोर्टल सोमवार को तय समय पर शुरू नहीं हो सका। इससे छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी है।

    सुबह से था इंतजारः हजारों छात्र और अभिभावक सुबह से ही पोर्टल खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन देर शाम तक वेबसाइट का लिंक एक्टिव नहीं हो सका। कॉपियों की स्क्रूटनी और वेरिफिकेशन के लिए महीनों से इंतजार कर रहे लाखों छात्र-छात्राएं लगातार वेबसाइट को रिफ्रेश करते रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

    गुस्से में छात्र और अभिभावक : इसके चलते छात्र, अभिभावक दोनों गुस्से में हैं। उन्हें डर है कि कहीं एक और डेट का इंतजार न करना पड़े। सीबीएसई ने दोपहर दो बजे एक्स पर जानकारी दी कि पोर्टल को जल्द शुरू किया जाएगा। इसके बाद भी शाम 8:30 बजे तक पोर्टल शुरू नहीं हो सका। इससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई।

    सोशल मीडिया पर उठे सवाल
    सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। एक्स यूजर योगेश ने लिखा कि सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल अब राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गए हैं, बोर्ड को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। एक अन्य यूजर ललित ने लिखा कि बोर्ड स्थिति संभालने में सक्षम नहीं है तो छात्रों को अतिरिक्त अंक देने पर विचार करना चाहिए। देर शाम तक पोर्टल शुरू होने का कोई नया समय घोषित नहीं किया गया था। 

    दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी
    सीबीएसई परीक्षा विवाद मामले में शिक्षा मंत्रालय ने कार्रवाई शुरू की। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सीओईएमपीटी को ठेका देने के मामले में रिपोर्ट तलब की गई है। टेंडर प्रक्रिया का विवरण भी जुटाया गया है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।




    CBSE : 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का सत्यापन व पुनर्मूल्यांकन अब एक जून से

    30 मई 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन प्रकिया अब तीन दिन की देरी से एक जून से शुरू होगी। पहले यह 29 मई से होनी थी। थी। वहीं, अगले साल से बोर्ड परीक्षा के अंकों के साथ स्कैन आंसरशीट (उत्तर पुस्तिकाएं) भी डिजिलॉकर में उपलब्ध करवाएगा।

    अधिकारियों के मुताबिक, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता व डिजिटलीकरण की दिशा में यह फैसला किया गया है। फिलहाल प्राथमिकता, पुनर्मूल्यांकन वाली सभी कॉपियों को दोबारा जांच कर नतीजा जारी करना है, ताकि विद्यार्थी आगे स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकें। देशभर के विश्वविद्यालयों समेत इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेजों में जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होना है और नतीजे में देरी से शैक्षणिक सत्र शुरू होने में देरी हो सकती है। 


    ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में हाईकोर्ट ने केंद्र राज्य सरकार और सीबीएसई से मांगा जवाब 

    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की नई ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार, सीबीएसई, परीक्षा नियंत्रक और उत्तर प्रदेश सरकार से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। यह प्रणाली 2025-26 की बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए शुरू की गई है।

    न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एक अधिवक्ता की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर शुक्रवार को यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को जल्दबाजी में लागू किया गया है। इससे देशभर के लाखों छात्रों के मूल्यांकन में प्रणालीगत संस्थागत विफलता हुई है। 



    CBSE : 12वीं में चार लाख से अधिक आए पुनर्मूल्यांकन आवेदन, 11 लाख से अधिक स्कैन उत्तर पुस्तिकाएं मांगी गईं, पोर्टल दोबारा खोलने पर हो सकता है विचार

    27 मई 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं की परीक्षा में ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) के चलते पुनर्मूल्यांकन के लिए रिकॉर्ड चार लाख से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं। सीबीएसई के इतिहास में पहली बार किसी परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में पुनर्मूल्यांकन के आवेदन आए हैं।

    मंगलवार को शाम साढ़े चार बजे - तक 4,04,319 विद्यार्थी आवेदन कर चुके थे, जबकि गिनती अभी जारी है। वहीं, हजारों विद्यार्थियों को आंसर-शीट मिल ही नहीं पाई, इस कारण वे फिर से मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं कर पाए हैं। खास बात यह है कि 11,31,961 स्कैन उत्तर पुस्तिकाएं मांगी गई हैं। इसमें से अभी तक 8,98,214 उत्तर पुस्तिकाएं दी जा चुकी हैं। 

    अधिकारी भी मानते हैं कि 12वीं के नतीजे आने के 14 दिन बीतने के बाद अभी तक विद्यार्थी परेशान हैं। विद्यार्थियों की दिक्कतों को देखते हुए सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन के लिए विंडो फिर खोलने पर विचार कर सकता है। यदि विंडो खुलती है, तो चार लाख का आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है। उत्तर पुस्तिका की प्रति नहीं मिलने से आवेदन से वंचित रह गए विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक स्कैन कॉपी नहीं मिलेगी, तब तक कैसे पता चलेगा कि उन्हें कम नंबर क्यों मिले हैं? 




    सीबीएसई 12वीं के विद्यार्थियों को लौटाएगा पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में ली गई अतिरिक्त राशि, अब आज रात तक कर सकेंगे आवेदन

    कम नहीं हो रहीं समस्याएं : पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियां

    24 मई 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कहा कि 12वीं के नतीजे के बाद पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों से जिन विद्यार्थियों से अधिक शुल्क वसूला गया, उन्हें अतिरिक्त राशि लौटाई जाएगी। शिक्षा मंत्रालय ने पुनर्मूल्यांकन के दौरान बच्चों व अभिभावकों की तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतों पर सीबीएसई से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।

    सीबीएसई ने रविवार को बताया कि 21-22 मई को मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन करते समय तकनीकी समस्याओं के चलते कुछ मामलों में अधिक राशि वसूली गई, जबकि कुछ में कम शुल्क लिया गया। जिन मामलों में अधिक भुगतान लिया गया, उनमें अतिरिक्त राशि उसी भुगतान माध्यम में वापस की जाएगी, जिससे शुल्क जमा किया गया था। जिन मामलों में कम शुल्क लिया गया है, उनमें जरूरी होने पर विद्यार्थियों को शेष राशि जमा करने के बारे में अलग से सूचित किया जाएगा।

     बोर्ड ने यह भी बताया कि ऐसे सभी मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए दोबारा आवेदन की जरूरत नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने सर्वर डाउन होने, पेमेंट गेटवे में गड़बड़ी और प्रक्रिया के दौरान सामने आई अन्य तकनीकी खामियों पर संज्ञान लिया था। 


    अब आज रात तक कर सकेंगे आवेदन

    सीबीएसई ने 12वीं की उत्तर पुस्तिका की स्कैन प्रति हासिल करने के लिए आवेदन की तिथि एक दिन और बढ़ा दी है। अब 25 मई को रात 11:59 तक आवेदन किए जा सकेंगे।

    डिजिटल मूल्यांकन का आकलन जारी डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर व्यापक विरोध व विद्यार्थियों की बढ़ती चिंता के बीच शिक्षा मंत्रालय 12वीं के नतीजों पर सतर्कता से नजर बनाए हुए है। सीबीएसई को इसमें प्रशासनिक निगरानी भी मुहैया करा रहा है। इस वर्ष 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) के बाद सामने आईं विसंगतियों और पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों के बाद मंत्रालय ने हस्तक्षेप किया है।

    दाखिले में दिक्कत न आए प्रशासनिक निगरानी का मकसद सुनिश्चित करना है कि तकनीकी बाधाओं के कारण कॉलेज में दाखिले के दौरान विद्यार्थियों को असुविधा न हो।




    CBSE उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कापी लेने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि हुई 24 मई

    23 मई 2026
    नई दिल्लीः सीबीएसई ने 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए उत्तर पुस्तिका की स्कैन कापी लेने की अंतिम तारीख एक दिन के लिए और बढ़ा दी है। पहले अंतिम तिथि 23 मई थी, लेकिन अब विद्यार्थी 24 मई तक इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। वेबसाइट पर आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण यह निर्णय लिया गया है।

    बोर्ड ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वेबसाइट पर अत्यधिक ट्रैफिक और कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण कई विद्यार्थियों को आवेदन करने में परेशानी हो रही थी। इस कारण वे समय पर आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए यह निर्णय लिया गया है। वहीं, विद्यार्थियों का दावा है कि वेबसाइट हैक हो गई थी, जिस कारण फीस के मूल्य में बदलाव देखने को मिल रहा था।

    सीबीएसई के अनुसार, वेबसाइट पर बढ़े लोड के साथ कुछ तकनीकी हस्तक्षेप के प्रयासों के कारण भी सिस्टम पर असर पड़ा है, जिससे आवेदन प्रक्रिया बाधित हुई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि अब सभी प्रभावित विद्यार्थी अतिरिक्त एक दिन के भीतर आवेदन कर सकते हैं। स्कैन कापी प्राप्त करने के बाद छात्रों को आगे की प्रक्रिया यानी वेरिफिकेशन आफ इश्यूज आब्जर्व्ह और रि-इवैल्यूएशन के लिए भी दो दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा, ताकि वे अपनी उत्तरपुस्तिका को ठीक से देखकर निर्णय ले सकें। बोर्ड ने कहा कि अन्य सभी नियम और शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी।




    ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में कम नंबरों के बाद अब सीबीएसई के री-इवैल्यूएशन पोर्टल की परेशानी, विद्यार्थियों ने पोर्टल पर लागिन नहीं कर पाने का लगाया आरोप

    कभी वेबसाइट पर ब्लैंक पेज दिखने तो कभी कैप्चा कोड नहीं आने की भी शिकायत

    20 मई 2026
    नई दिल्लीः सीबीएसई की ओर से 12 वीं में कापियों की जांच के लिए आन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम से परिणाम में उम्मीद से कम अंक मिलने की शिकायतें मिली हैं। इसके बाद अब री-इवैल्यूएशन और स्कैन कापी हासिल करने के
     लिए खोले गए पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतों से विद्यार्थियों की चिंता और बढ़ गई है। कई विद्यार्थियों का आरोप है कि वे न तो पोर्टल पर लागिन कर पा रहे हैं और न ही आवेदन प्रक्रिया पूरी हो रही है।


    मंगलवार को सीबीएसई ने पोस्ट रिजल्ट (परिणाम के बाद) सुविधा शुरू की है। इसमें विद्यार्थी अपनी जांची हुई उत्तर पुस्तिका की स्कैन कापी लेकर री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन पोर्टल खुलते ही इंटरनेट मीडिया पर शिकायतों की संख्या बढ़‌ने लगी है।


    विद्यार्थियों का कहना है कि कभी वेबसाइट ब्लैंक पेज दिखा रही है, कभी कैप्चा कोड नहीं आ रहा। कई मामलों में भुगतान कटने के बाद भी आवेदन पूरा नहीं हो रहा है। एक छात्र ने बताया कि कई बार कोशिश के बाद भी वह पंजीकरण नहीं कर पाया, क्योंकि बार-बार वेब साइट हैंग हो रही है। इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी छात्रों ने स्क्रीनशाट साझा करते हुए बोर्ड की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। एक छात्र ने कहा कि कि रुपये कट गए पर वेरिफिकेशन फेल हो गया। सिस्टम अपग्रेड नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था ही फेल है। हालांकि, इस मामले में सीबीएसई ने किसी बड़ी तकनीकी विफलता से इन्कार किया है।

    बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि उन्हें सुबह कुछ छात्रों के फोन आए थे, जो लागिन नहीं कर पा रहे थे। वैसे इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है। उनके अनुसार कई बार पुराना सेव पेज खुल जाता है, जिसे कंप्यूटर रीस्टार्ट करने से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों को कुछ देर बाद दोबारा से लागिन करने की सलाह दी है। बोर्ड ने कहा कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल सही तरीके से काम कर रहा है। वैसे इस बार स्कैन कापी और री-इवैल्यूएशन की फीस भी कम की गई है। स्कैन कापी शुल्क 700 से 100 रुपये, री-इवैल्यूएशन फीस 500 से 100 रुपये और प्रति प्रश्न जांच शुल्क 100 से 25 रुपये किया गया है।

    Friday, June 5, 2026

    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक महासंघ करेगा आंदोलन, गैर-शैक्षिक कार्य का दायित्व स्वीकार नहीं करने का ऐलान

    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक महासंघ करेगा आंदोलन, गैर-शैक्षिक कार्य का दायित्व स्वीकार नहीं करने का ऐलान

    लखनऊटीईटी की अनिवार्य के विरोध में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ आंदोलन करने जा रहा है। गुरुवार को हुई महासंघ की बैठक में निर्णय लिया गया कि शिक्षक अब शिक्षण कार्य के अतिरिक्त किसी भी प्रकार के गैर-शैक्षिक कार्य का दायित्व स्वीकार नहीं करेंगे। इसके साथ जुलाई में जनप्रतिनिधि जवाब दो अभियान भी चलाया जाएगा। वहीं यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने भी जुलाई से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।


    महासंघ की बैठक में वक्ताओं ने देश व प्रदेश के सभी शिक्षक और कर्मचारी संगठनों से आह्वान किया है कि वे इस लड़ाई को किसी एक संगठन का मुद्दा न मानकर शिक्षक समाज के अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई समझें और एक मंच पर आकर संयुक्त संघर्ष करें।

     बताया गया कि महासंघ द्वारा पांच जुलाई से 20 जुलाई के मध्य प्रदेश भर में 'जनप्रतिनिधि जवाब दो' अभियान चलाया जाएगा। इसमें सांसदों, विधायकों को ज्ञापन सौंपकर संसद और विधानमंडल में आवश्यक विधायी संशोधन के लिए बिल लाने की मांग की जाएगी। इसके बाद भी यदि समस्या का समाधान नहीं किया जाता है तो सितंबर में लखनऊ में लाखों शिक्षकों की सहभागिता के साथ विशाल महाआंदोलन किया जाएगा। 

    बैठक में महासंघ के महासचिव दिलीप चौहान, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय, अटेवा व एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, विशेष शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अनुज शुक्ला आदि उपस्थित रहे। 

    वहीं यूटा के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि संगठन की प्रदेश कार्यसमिति ने जुलाई में बड़ा आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है।

    यूपी बोर्ड : हाईस्कूल अंक सुधार व इंटर कम्पार्टमेंट परीक्षा के लिए आवेदन कल से

    यूपी बोर्ड : हाईस्कूल अंक सुधार व इंटर कम्पार्टमेंट परीक्षा के लिए आवेदन कल से


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल अंक सुधार और इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षा के लिए आवेदन कार्यक्रम जारी कर दिया है। कार्यक्रम के अनुसार ऑनलाइन आवेदन छह जून से 27 जून 2026 तक स्वीकार किए जाएंगे।

    परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन करने के बाद चालान की मूल प्रति और आवेदन पत्र की प्रति को 27 जून की अंतिम तिथि के बाद तीन दिनों के भीतर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में पंजीकृत डाक से भेजना अनिवार्य होगा। 

    हाईस्कूल अंक सुधार परीक्षा व इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षा में लिखित और प्रयोगात्मक दोनों भागों में अनुत्तीर्ण परीक्षार्थियों को दोनों भागों की परीक्षा देनी होगी। वहीं किसी विषय के एक भाग में अनुत्तीर्ण और दूसरे भाग में उत्तीर्ण अभ्यर्थी केवल अनुत्तीर्ण भाग की परीक्षा दे सकते हैं। यदि वे चाहें तो दोनों भागों की परीक्षा में भी शामिल हो सकते हैं। लिखित एवं प्रयोगात्मक परीक्षाओं की तिथियों की घोषणा अलग से की जाएगी। आवेदन प्रक्रिया एवं अन्य दिशा-निर्देश परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध है। 



    प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में प्रवेश में देरी तो रजिस्ट्रार होंगे जिम्मेदार, उच्च शिक्षा विभाग सत्र नियमित करने को लेकर सख्त

    प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में प्रवेश में देरी तो रजिस्ट्रार होंगे जिम्मेदार, उच्च शिक्षा विभाग सत्र नियमित करने को लेकर सख्त


    लखनऊ। प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में नए सत्र 2026-27 में सत्र नियमितीकरण पर जोर होगा। उच्च शिक्षा विभाग ने इस बार शैक्षिक कैलेंडर में सत्र नियमितीकरण को लेकर जिम्मेदारी तय की है। विभाग ने कहा है कि अगर समय से प्रवेश कार्य नहीं होता है तो संबंधित विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और समय से परीक्षा न होने पर परीक्षा नियंत्रक को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी।


    विभाग ने कहा है कि इंटर के परिणाम 15 मई और पीजी के 15 जून तक आ जाते हैं। सभी प्रकार के प्रवेश 25 जुलाई तक पूरे कर लिए जाएं। यदि सीयूईटी आदि परीक्षाओं के परिणम के कारण विद्यार्थी प्रवेश नहीं ले पाते हैं तो ऐसे विद्यार्थियों के लिए सीटें खाली होने पर प्रवेश की अनुमति विश्वविद्यालय दे सकता है। ताकि शैक्षिक कैलेंडर न प्रभावित हो।


    उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने कहा है कि प्रवेश कार्य निर्धारित समय में पूरा कराने का उत्तरदायित्व कुलसचिव का है। किसी भी प्रकार की देरी के लिए कुलसचिव की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी। इसी प्रकार उन्होंने कहा है कि सेमेस्टर परीक्षाएं दो बार आयोजित की जाएंगी।

    Thursday, June 4, 2026

    अब पीएसयू भी चला सकेंगे यूपी बोर्ड के विद्यालय, प्रदेश में वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता नियमों में शिथिलीकरण

    अब पीएसयू भी चला सकेंगे यूपी बोर्ड के विद्यालय, प्रदेश में वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता नियमों में शिथिलीकरण

    पहले से मान्यता प्राप्त कॉलेजों को नए विषय शुरु करने में भी राहत

    लखनऊ। प्रदेश में वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों की मान्यता संबंधी नियमावली में बड़े बदलाव की तैयारी है। इसके तहत अब सीबीएसई की भांति स्वायत्त निकाय, सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू), स्थानीय निकाय आदि को मान्यता देने में शामिल किया जाएगा। इससे कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से शिक्षा में निवेश बढ़ेगा।


    माध्यमिक शिक्षा विभाग ने माध्यमिक शिक्षा परिषद से तीन दिनों के अंदर इससे जुड़ा संशोधित प्रस्ताव भेजने को कहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार की ओर से इससे संबंधित निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा है कि वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता मानकों में शिथिलीकरण को लेकर अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में दी गई संस्तुति की आख्या शासन को मिली थी।


    इसके तहत वर्तमान में विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने के लिए उनका संचालन सोसाइटी, ट्रस्ट या पंजीकृत कंपनी के माध्यम से होना अनिवार्य है। अब सीबीएसई की तर्ज पर सांविधिक निकायों, स्वायत्त संस्थाओं, सार्वजनिक उपक्रमों और स्थानीय निकायों को भी विद्यालय संचालन और मान्यता के दायरे में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।


    इसके अलावा समिति ने भूमि संबंधी मानकों में भी लचीलापन देने की सिफारिश की है। 26 दिसंबर 2022 से पहले मान्यता प्राप्त कर चल रहे विद्यालयों को वर्तमान संशाधनों की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे विद्यालयों को अतिरिक्त विषय या सेक्शन की मान्यता के लिए नए भूमि मानकों का पालन नहीं करना होगा। यदि विद्यालय में अतिरिक्त कक्ष और प्रयोगशाला हैं तो अतिरिक्त भूमि की अनिवार्यता में छूट दी जाए।


    साल भर खुला रहेगा ऑनलाइन पोर्टल

    मान्यता आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाने की संस्तुति समिति ने की है। समिति ने मान्यता के लिए ऑनलाइन पोर्टल पूरे साल खुला रखने की सिफारिश की है। इसमें आगामी परीक्षा वर्ष के लिए मान्यता पर विचार तभी होगा जब संबंधित विद्यालय का आवेदन सभी औपचारिकताओं के साथ 31 मई तक मिल जाए। 31 मई के बाद मिलने वाले आवेदनों पर अगले से अगले परीक्षा वर्ष के लिए विचार किया जाएगा।

    1565 परिषदीय विद्यालय में हब एंड स्पोक मॉडल से मिलेगी नई दिशा

    1565 परिषदीय विद्यालय में हब एंड स्पोक मॉडल से मिलेगी नई दिशा 

    लखनऊ। प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा को आधुनिक, नवाचारी बनाने में पीएमश्री योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अंतर्गत प्रदेश के 1565 परिषदीय विद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक संसाधन और शिक्षा मिल सके। 


    इस मॉडल में हर जिले में एक चयनित पीएमश्री विद्यालयों में एस्ट्रोनॉमी लैब और एआई आधारित स्किल लैब की स्थापना यूपीईएलसी कर रहा है। इन प्रयोगशालाओं से विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा। इससे बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, नवाचार और शोध की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। हब एंड स्पोक मॉडल के रूप में विकसित किए जा रहे यह विद्यालय अपने आस-पास के अन्य विद्यालयों के लिए संसाधन, नवाचार और शैक्षिक उत्कृष्टता का केंद्र बनेगा। इसके माध्यम से आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, तकनीकी सुविधाओं और श्रेष्ठ शैक्षिक गतिविधियों का लाभ अधिक से अधिक विद्यालयों तक पहुंचाया जा सकेगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि इससे छात्र भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकेंगे। विज्ञान विषयों की अवधारणाओं को समझने में प्रयोगशालाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आधुनिक उपकरणों और तकनीकी संसाधनों से सुसज्जित ये प्रयोगशालाएं विद्यालयों को नई पहचान देगी। 

    अध्यापिका को CCL दिए जाने के मामले में मनमानेपन और मानसिक शोषण किए जाने तथा विभाग की छवि धूमिल करने पर कन्नौज के खण्ड शिक्षा अधिकारी निलंबित, देखें आदेश

    उत्पीड़न और भ्रष्टाचार की शिकायत पर कन्नौज के खंड शिक्षा अधिकारी निलंबित, प्रधानाध्यापक की शिकायत पर अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने की कार्रवाई

    चार बार सीसीएल निरस्त करने का भी आरोप

    कन्नौज। जिले में भ्रष्टाचार व उत्पीड़न के आरोप में मंगलवार को सौरिख ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ पाठक को अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामताराम पाल ने निलंबित कर दिया। इससे पहले तालग्राम के खंड शिक्षा अधिकारी रमेशचंद्र चौधरी को भी निलंबित किया जा चुका है। सौरिख क्षेत्र की एक प्रधानाध्यापक की शिकायत पर जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। उन्हें भी एडी बेसिक कानपुर कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।

    सौरिख ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया की प्रधानाध्यापक कल्पना पाल ने 24 अप्रैल को शपथ पत्र के साथ उच्चाधिकारियों से बीईओ विश्वनाथ पाठक की लिखित शिकायत की थी। उनका आरोप था कि दिसंबर 2025 में विद्यालय के मरम्मत कार्य के लिए 4,62,796 रुपये का बजट आया था। इस धनराशि को जारी करने और पास कराने के एवज में बीईओ उन पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 20 प्रतिशत कमीशन (सुविधा शुल्क) देने का दबाव बना रहे थे। उन्होंने रिश्वत देने से साफ मना कर दिया, तो बीईओ ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। 25 मार्च 2026 को बीईओ एक शिक्षामित्र को साथ लेकर स्कूल पहुंचे और उपस्थिति रजिस्टर सील कर दिया।

    उन्होंने आरोप लगाया कि खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा था कि जब तक रुपये नहीं दोगी, ऐसे ही परेशान किया जाएगा। काम चाहे जितना अच्छा कराओ, कमियां निकाली जाएंगी। उन्होंने इस 20 प्रतिशत कमीशन में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और डीसी का भी हिस्सा होने की बात कही थी। इसके बाद बीआरसी पर बुलाकर बीईओ ने धमकी दी कि आजकल पैसे से किसी भी अधिकारी को खरीदा जा सकता है। उसने (बीईओ) बहुत रुपया कमाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सात मई 2026 को बीईओ विश्वनाथ पाठक से स्पष्टीकरण मांगा था।


    चार बार सीसीएल निरस्त करने का भी आरोप
    प्रधानाध्यापक कल्पना पाल ने आरोप लगाया विश्वनाथ और बीएसए ने मिलकर सोची-समझी रणनीति के तहत उनकी बाल्य देखभाल अवकाश (सीसीएल) को चार बार आवेदन करने के बावजूद निरस्त किया। बीएसए कंट्रोल रूम से सुबह-सुबह स्कूल में फोन करवाकर पहले शिक्षिका को अनुपस्थित दर्शाया जाता था और फिर तकनीकी आधार पर रात को 9:50 बजे छुट्टी निरस्त कर दी जाती थी। 22 अप्रैल 2026 को स्कूल में पूरी टीम के साथ छापा मारकर शिक्षिका को निलंबित करने की धमकी भी दी गई थी। आरोप है कि नवंबर 2025 और फरवरी 2026 में जब प्रधानाध्यापिका छुट्टी या चिकित्सीय अवकाश पर थीं, और उसी दौरान सहायक अध्यापक ने भी आकस्मिक अवकाश लिया, तब बीईओ ने विद्यालय संचालन के लिए किसी अन्य शिक्षक की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की, जिससे स्कूल बिना देखरेख के चलता रहा।

    तालग्राम के बाद अब सौरिख बीईओ पर गिरी गाज
    तालग्राम विकास खंड में तैनात बीईओ रमेशचंद्र चौधरी पर बिना मान्यता संचालित राजकुमारी मेवाराम आदर्श विद्यालय को संरक्षण देने और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने का गंभीर आरोप थे। इसके अलावा अन्य आरोप लगाए गए थे। इन सभी आरोपों को देखते हुए आठ मई 2026 को निलंबित कर दिया गया था। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) कानपुर कार्यालय में संबद्ध किया गया था।




    अध्यापिका को CCL दिए जाने के मामले में मनमानेपन और मानसिक शोषण किए जाने तथा विभाग की छवि धूमिल करने पर कन्नौज के खण्ड शिक्षा अधिकारी निलंबित, देखें आदेश 

    Wednesday, June 3, 2026

    छात्रों के गुस्से के आगे झुकी सरकार, CBSE चेयरमैन और सचिव हटाए गए, OSM टेंडर की जांच के लिए समिति गठित

    छात्रों के गुस्से के आगे झुकी सरकार, CBSE चेयरमैन और सचिव हटाए गए, OSM टेंडर की जांच के लिए समिति गठित

    12वीं के नतीजों के 21 दिन बाद कार्रवाई, ओएसएम टेंडर की जांच के लिए राधा चौहान की अध्यक्षता में समिति गठित, एक माह में देगी रिपोर्ट

    02 जून 2026
    नई दिल्ली। 12वीं कक्षा के मूल्यांकन में मचे हाहाकार और निविदा आवंटन में अनियमितताओं को लेकर विद्यार्थियों में भारी गुस्से के बीच केंद्र सरकार ने आखिरकार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के चेयरमैन राहुल सिंह व सचिव हिमांशु गुप्ता को हटा दिया। साथ ही, ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रक्रिया के लिए टेंडर जारी करने में गड़बड़ियों की जांच के लिए उच्चस्तरीय एक-सदस्यीय समिति का गठन किया है। क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष व आईएएस अधिकारी राधा चौहान की अध्यक्षता वाली इस समिति को एक महीने में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

    सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अफसर और केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वह राहुल सिंह की जगह लेंगे, जिन्हें कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। सीबीएसई के सचिव पद से हटाए गए हिमांशु गुप्ता की जगह यहभीजिम्मेदारी अब वरिष्ठ अधिकारी वरुण भारद्वाज को सौंपी गई है।

    कैबिनेट सचिवालय की ओर से गठित जांच समिति मुख्य रूप से तीन गंभीर पहलुओं पर गौर करेगी। जांच की जाएगी कि क्या विशिष्ट तकनीकी प्रमाणन और टर्नओवर की शर्तों को सिर्फ खास कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर कमजोर किया गया? यह भी देखा जाएगा कि दागी कंपनी को तरजीह क्यों मिली।

     टेंडर के मूल नियमों में बदलाव कर पहले से विवादित या काली सूची में डाले जाने योग्य कंपनी को इतना संवेदनशील काम किन अफसरों की मिलीभगत से दिया गया। समिति यह भी जांच करेगी कि इस डिजिटल सिस्टम का पहले कोई पायलट टेस्ट किया गया था या इसे पूर्व परीक्षण के बिना ही लागू कर दिया गया। साथ ही, इसे इतनी जल्दबाजी में क्यों लागू किया गया।

    गंभीर आरोप... ओएसएम का ठेका हैदराबाद की कंपनी कोएम्प्ट एडुटेक को देने के लिए सीबीएसई ने नियमों और शर्तों में फेरबदल किए। यह कंपनी पहले ग्लोबारेना के नाम से काम करती थी। 2019 में तेलंगाना बोर्ड के परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी के आरोप लगे थे।


    जांच के बाद होगी आपराधिक कार्रवाई
    समिति की अध्यक्ष राधा चौहान को जांच में पूरी स्वायत्तता दी गई है। वह जांच के लिए जरूरत पड़ने पर किसी भी अन्य सरकारी विभाग से सक्षम अधिकारियों की सेवाएं भी ले सकती हैं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर घोटाले में संलिप्त अधिकारियों और निजी वेंडर पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने के बाद परीक्षा कराने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

    सार्थक ने संसदीय समिति के समक्ष दी प्रस्तुति
    12वीं कक्षा के छात्र सार्थक सिद्धांत (17) ने मंगलवार को संसदीय समिति के सामने पेश होकर ओएसएम से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं पर प्रस्तुति दी। उसने समिति को अपनी पड़ताल के बारे में सात पन्नों में प्रक्रिया की खामियां बताईं। झारखंड निवासी सार्थक ने बोर्ड की पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने बैठक में सीबीएसई अधिकारियों से कहा, आपसे अच्छा रिसर्च का काम तो इस छात्र ने किया है।




    CBSE ने माना-ऑनलाइन मार्किंग पोर्टल में हुई चूक, खामियां करेंगे दूर, बोर्ड ने पहले दावों को किया था खारिज, अब कहा-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए ले रहे आईआईटी और साइबर सुरक्षा पेशेवरों की मदद

    31 मई 2026
    नई दिल्ली। लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों के मानसिक उत्पीड़न के बाद आखिरकार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) पोर्टल में चूक स्वीकार कर ली है। ओएसएम पोर्टल दो बार हैक होने के बाद सीबीएसई ने रविवार को कहा कि उसके सेवा प्रदाता के ऑनमार्क पोर्टल में सामने आई खामियों को ठीक कर लिया गया है। विशेषज्ञ इसमें आ रही अन्य समस्याएं दूर करने के प्रयासों में जुटे हैं।

    बोर्ड ने खामियों के दावों को पहले खारिज कर दिया था। बोर्ड के रुख में यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब 12वीं के दो छात्रों ने सीबीएसई क्लाउड स्टोरेज मैनेजमेंट पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। 12वीं की परीक्षा की कॉपियों की ऑनलाइन मार्किंग में गड़बड़ियों पर लगातार विवाद बना हुआ है। 

    सीबीएसई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, हम ऑनमार्क पोर्टल में खामियों की गहन निगरानी कर रहे हैं। इन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए पिछले कुछ दिनों में सरकार के विभिन्न विभागों के साथ आईआईटी से साइबर सुरक्षा पेशेवरों की विशेषज्ञ टीम को तैनात किया गया है, ताकि प्रणाली को और दुरुस्त किया जा सके। 

    सार्वजनिक डोमेन में तकनीकी चूक की खबरें आने के तुरंत बाद सरकार और देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों ने मिलकर इस काम को शुरू कर दिया, जिसके बाद अब खतरे को पूरी तरह टाल दिया गया है। हालांकि, अन्य शिकायतों को दूर करने की कोशिश की जा रही है।

    एथिकल हैकर का जताया आभार
    सीबीएसई ने सतर्क नागरिकों और हैकर का आभार जताया, जिन्होंने ऐसी खामियों की ओर ध्यान दिलाया। अधिकारियों ने बताया कि वे इनमें से कई साइबर विशेषज्ञों के साथ सीधे संपर्क में हैं और उनकी मदद ले रहे हैं। बोर्ड ने कहा, कोई भी जानकारी देने के लिए लोगों से हमारी सुरक्षा टीम से संपर्क करने का अनुरोध है। किसी भी तकनीकी इनपुट या सुरक्षा संबंधी जानकारी को साझा करने के लिए secy-cbse@nic.in पर मेल करने को कहा गया है।


    सवाल दर सवाल : स्कैनिंग से ऑन स्क्रीन मार्किंग तक

    🔴 एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी ने 25-26 मई को दावा कि ओएसएम पर तकनीकी खामियों का पता लगाकर उसने साइबर सुरक्षा एजेंसी सर्ट-इन को जानकारी भेजी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    🔴 निसर्ग ने मास्टर पासवर्ड मिलने का दावा भी किया...कहा, वह कॉपियों के नंबर तक बदल सकता है। हालांकि, सीबीएसई ने कहा-जिस पोर्टल के हैक का दावा है, वह सिर्फ परीक्षण व समीक्षा के लिए बनाई सैंपल साइट थी।

    🔴 पुनर्मूल्यांकन भुगतान में भी पोर्टल में गड़बड़ियां आईं। एचडीएफसी पेमेंट गेटवे में तकनीकी सेंधमारी हुई। इससे 50 छात्र प्रभावित हुए।

    🔴 छात्र सार्थक सिद्धांत ने उत्तर पुस्तिकाएं साझा कर सवाल उठाया-क्या इन कॉपियों को वास्तव में उच्च क्वालिटी के स्कैनर से स्कैन किया है। कॉपियों में परछाईं व मुड़े पन्ने क्यों दिख रहे हैं। स्कैनर से स्कैन किए गए दस्तावेज में ऐसा नहीं होता।

    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक/शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण किये जाने के सम्बन्ध में शासनादेश जारी

    राजकीय माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों के जून अंत तक होंगे तबादले, शासन ने जारी किया शासनादेश, संवर्ग में 20 फीसदी से अधिक नहीं किए जाएंगे तबादले


    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादले को शासन ने हरी झंडी दे दी है। इसके तहत जून में पहले सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। बाद में सामान्य तबादले होंगे। संवर्ग की संख्या के 20 फीसदी तक तबादले किए जाएंगे।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग की सचिव किंजल सिंह ने निर्देश जारी किया। कहा, राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेजों में पहले चरण में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। इसमें कार्यरत विद्यालय में बाद में कार्यभार संभालने वाले को पहले सरप्लस माना जाएगा। वहीं, सेना से जुड़े लोगों के पति-पत्नी, कैंसर आदि गंभीर बीमारी से ग्रस्त, जिनकी आयु 30 जून को 58 साल पूरी हो रही है, राष्ट्रीय-राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक को इसमें यथासंभव शामिल नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने कहा है कि इसकी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। दूसरे चरण में चार श्रेणी के शिक्षकों को निर्धारित मानक पर तबादला दिया जाएगा। इसमें सेना से जुड़े लोगों के पति-पत्नी, कैंसर आदि गंभीर बीमारी से ग्रस्त, जिनकी आयु 30 जून को 58 साल पूरी हो रही है, यदि पति-पत्नी दोनों शासकीय सेवा में अलग-अलग जिले में तैनात हैं। तीसरे चरण में शेष शिक्षकों का तबादला किया जाएगा।

    सचिव ने कहा है कि संवर्ग की संख्या के 20 प्रतिशत सीमा तक तबादले होंगे। इसे बढ़ाने का अधिकार विभागीय मंत्री के पास होगा। आवेदन से लेकर तबादला प्रक्रिया जून में ही पूरी की जाएगी। ताकि विद्यालय खुलने से पहले शिक्षकों की तैनाती हो सके। उन्होंने यह भी कहा है कि किसी भी शिक्षक को उसकी मूल तैनाती के स्थान से अलग संबद्ध नहीं किया जाएगा। किसी भी विद्यालय में मानक से अधिक शिक्षक तैनात नहीं किए जाएंगे। उन्होंने महानिदेशक स्कूल शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा निदेशक को इसे पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।


    सरप्लस शिक्षकों के लिए मानक

    ◾खुद के दिव्यांग होने पर 10 से 20 नंबर

    ◾पत्नी-पति, बच्चे के दिव्यांग होने पर 10 नंबर

    ◾राष्ट्रीय-राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक होने पर 10 नंबर

    ◾विधवा-तलाकशुदा महिला शिक्षिका को 10 नंबर

    ◾आश्रित बच्चों की देखभाल वाले पुरुष शिक्षकों को 10 नंबर

    ◾महिला शिक्षिका होने पर 10 नंबर

    ◾जोन 3 में तैनात शिक्षक को अधिकतम 10 नंबर

    ◾जोन 2 में तैनात शिक्षक को अधिकतम 10 नंबर

    ◾शिक्षक की आयु के अनुसार हर साल के लिए एक नंबर





    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक/शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण किये जाने के सम्बन्ध में शासनादेश जारी 


    Tuesday, June 2, 2026

    समग्र शिक्षा (माध्यमिक) में प्रतिनियुक्ति पर विभिन्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित, देखें विज्ञप्ति


    समग्र शिक्षा (माध्यमिक) में प्रतिनियुक्ति पर विभिन्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित, देखें विज्ञप्ति


    लखनऊ। राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश, लखनऊ ने प्रतिनियुक्ति के आधार पर विभिन्न प्रशासनिक एवं तकनीकी पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी की है। विज्ञप्ति के अनुसार संयुक्त निदेशक, उप निदेशक, सहायक निदेशक, वित्त एवं लेखाधिकारी, सांख्यिकीय सहायक, विषय विशेषज्ञ, वरिष्ठ सहायक तथा सहायक लेखाकार सहित कुल 10 रिक्त पदों को प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरा जाएगा।


    जारी सूचना के अनुसार इन पदों पर केवल उत्तर प्रदेश सरकार अथवा भारत सरकार के अधीन कार्यरत नियमित अधिकारी एवं कर्मचारी ही आवेदन कर सकेंगे। विभिन्न पदों के लिए निर्धारित वेतनमान, शैक्षिक योग्यता एवं अनुभव की शर्तें भी तय की गई हैं। विशेष रूप से विषय विशेषज्ञ पद के लिए संबंधित विभाग में न्यूनतम पांच वर्ष की सतत एवं संतोषजनक सेवा अनिवार्य रखी गई है।


    विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रतिनियुक्ति की सामान्य अवधि तीन वर्ष होगी, जिसे विशेष परिस्थितियों में बढ़ाकर पांच वर्ष तक किया जा सकता है। चयनित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी प्रतिनियुक्ति संबंधी नियमों एवं प्रावधानों के अनुसार सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।


    आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु 1 जुलाई 2026 को 55 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही आवेदन संबंधित विभागाध्यक्ष की संस्तुति के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। जिन अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय अथवा सतर्कता संबंधी जांच लंबित है, वे आवेदन के पात्र नहीं होंगे।


    विज्ञप्ति के अनुसार आवेदन पत्र पंजीकृत डाक के माध्यम से राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा (माध्यमिक), 18 पार्क रोड, लखनऊ को भेजना होगा। आवेदन प्राप्त होने की अंतिम तिथि 15 जून 2026 सायं 5 बजे निर्धारित की गई है। अंतिम तिथि के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।


    समग्र शिक्षा (माध्यमिक) विभाग का मानना है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से राज्य स्तर पर योजनाओं के संचालन, वित्तीय प्रबंधन, शैक्षिक अनुश्रवण एवं प्रशासनिक कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। विभाग ने योग्य एवं इच्छुक अधिकारियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करने का आग्रह किया है।



    सीएम योगी ने सभी बोर्ड के टॉप टेन मेधावियों को किया सम्मानित, सोशल मीडिया से दूरी बनाने का आह्वान

    सीएम योगी ने सभी बोर्ड के टॉप टेन मेधावियों को किया सम्मानित, सोशल मीडिया से दूरी बनाने का आह्वान 

    सोशल मीडिया पर अफवाहें, अखबार पढ़ें: योगी

    02 जून 2026
    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेधावी छात्र-छात्राओं से अपने अभिभावकों पर स्मार्टफोन के लिए अनावश्यक दबाव न डालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन का प्रयोग सही दिशा में कीजिए। डिजिटल लाइब्रेरी से जुड़िए, अपने पाठ्यक्रम से जुड़िए। समाचार पत्रों को नियमित पढ़ें, अपडेट रहें। टीवी पर न्यूज देखिए, अन्य व्यर्थ कार्यक्रम न देखें।

    सीएम ने सोमवार को लोक भवन में यूपी बोर्ड व संस्कृत शिक्षा परिषद के टॉप टेन, सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के सर्वोच्च दस कुल 223 राज्य स्तरीय मेधावियों को एक-एक लाख रुपये का चेक, टैबलेट, मेडल व प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया। 

    छात्रों को संबोधित करते हुए सीएम ने छात्रों से सोशल मीडिया से दूरी बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि अधिकतम 10-15 मिनट तक ही सोशल मीडिया पर रहें। सोशल मीडिया पर ज्यादातर कंटेंट अफवाहों और झूठ पर आधारित होते हैं। किसी प्रतियोगिता या इंटरव्यू में कोई आपसे आपके फॉलोअर्स की संख्या नहीं पूछेगा। कार्यक्रम में सीएम ने मेधावियों के साथ उनके अभिभावक व विद्यालय के प्रधानाचार्यों को भी सम्मानित किया।

    छूटे हुए विद्यालयों तक पहुंचेगा अखबार

    मुख्यमंत्री ने बोर्ड परीक्षा के मेधावी छात्रों को सही जानकारी के लिए नियमित रूप से अखबार पढ़ने की सलाह दी। इसके बाद प्रदेश के विद्यालयों में अखबार पढ़ने के अभियान को और गति मिलने की उम्मीद है। 

    बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने छात्रों का स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह दी। उन्हें पुस्तकों और समाचार पत्रों के अध्ययन के प्रति प्रेरित करने के उ‌द्देश्य से विद्यालयों में अखबार पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के निर्देश दिए थे। इसके लिए विद्यालयों में अखबार पढ़ने का समय भी निर्धारित किया गया है। साथ ही समाचारों से संबंधित विभिन्न शैक्षिक एवं रचनात्मक गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

    सभी अटल आवासीय विद्यालयों और कौशल विकास केंद्रों में भी अखबार पठन-पाठन को अनिवार्य किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने विद्या को केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं रखा। हम ऐसी विद्या दें जो जीवन के हर क्षेत्र में मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करे। चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणा दे और समाज व राष्ट्र को आगे बढ़ाए। दुनिया मैं भारत का सम्मान इसलिए था क्योंकि हमारे पास ज्ञान की सबसे बड़ी धरोहर थी। यह मेधावी सम्मान उसी कड़ी का हिस्सा है।

    जहां भी अच्छा ज्ञान मिले, लेने के लिए तैयार रहें
    सीएम ने कहा कि इस राज्य स्तरीय परिणाम में कुल 223 विद्यार्थी हैं। इसमें छात्र 85, छात्राएं 138 हैं। छात्राएं मेरिट सूची में ज्यादा और छात्र कम आए हैं। हाईस्कूल में 115 में से 34 छात्र व 81 छात्राएं हैं। इंटर में 9 छात्र व 14 छात्राएं हैं। उन्होंने कहा कि छात्राएं ज्यादा मेहनत कर लेती हैं। ज्यादा अंक पाने का सामर्थ्य रखती हैं। उन्होंने मेरिट से छात्रों की संख्या कम होने पर तंज कसा कि लगता है अब लड़के झाडू-पोछा ज्यादा करने लगे हैं। सीएम ने कहा लड़के छात्राओं से प्रेरणा लें और अच्छे नंबर लाएं।

    छात्रों को परेशान करने के लिए न बनाएं पेपर
    मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि छात्रों का पसीना छुड़ाने के लिए परीक्षा के पेपर न बनाएं। छात्रों को परेशान न करें। उन्होंने कहा कि प्रश्न ऐसा हो कि छात्र थोड़े प्रयास से उसे हल कर सकें। सीएम ने कहा कि नौ साल पहले बोर्ड परीक्षा में नकल होती थी। शिक्षक भर्ती नहीं होती थी। विद्यालय भी वैसे ही थे। छात्रों को पता था कि अंत में ठेका ही होना है तो मेहनत क्यों करें।

    बच्चों के मित्र बनकर रहें : गुलाब देवी
    माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि अभिभावक बच्चों के मित्र बनकर रहेंगे तो बच्चा सही रुप से आगे बढ़ेगा। आज माता-पिता को फुर्सत ही नहीं रहती है बच्चों के लिए। शिक्षकों की भी समाज में एक अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि यह छात्रों का अंतिम पड़ाव नहीं, जीवन की शुरुआत है। जीवन में हमेशा चुनौती होगी, इसलिए समय को पकड़े रहिए तभी चुनौती से पार पाएंगे। 




    सीएम आज लोकभवन में सभी बोर्ड्स के मेधावियों का करेंगे सम्मान, राज्य स्तरीय मेधावियों को एक-एक लाख रुपये, टैबलेट व मेडल देकर करेंगे सम्मानित

    01 जून 2026
    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को लोकभवन में सुबह 11 बजे से आयोजित कार्यक्रम में यूपी बोर्ड और संस्कृत शिक्षा परिषद के टॉप 10, सीबीएसई और आईसीएसई के सर्वोच्च 10-10 समेत कुल 223 राज्य स्तरीय मेधावियों को एक-एक लाख रुपये, एक-एक टैबलेट, प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित करेंगे।

    सीएम समारोह में 11 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को शॉल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करेंगे। वहीं, माध्यमिक शिक्षा विभाग भी सभी 75 जिलों में जिले के टॉप 10 मेधावियों को सम्मानित करेगा। जिलों में सीएम के लोकभवन में होने वाले कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा।


    जल्द ही मदरसा बोर्ड के मेधावी भी होंगे सम्मानित
     योगी सरकार वर्ष 2026 की मदरसा बोर्ड परीक्षा के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करेगी। जून के पहले सप्ताह में लखनऊ में विशेष कार्यक्रम होगा। मुंशी/मौलवी (सेकंडरी) और आलिम (सीनियर सेकेंडरी) परीक्षा के टॉप-10 छात्र-छात्राओं को बुलाया जाएगा। दोनों वर्गों के शीर्ष तीन छात्र-छात्राओं को टैबलेट दिया जाएगा। 




    एक जून को सीएम 223 बोर्ड मेधावियों को करेंगे सम्मानित, राज्य स्तरीय मेधावियों को एक-एक लाख रुपये टैबलेट, प्रशस्ति पत्र देंगे

    जिला स्तर पर होने वाले आयोजन में मेधावियों को 21-21 हजार रुपये व प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे

    27 मई 2026
    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक जून को लोकभवन में हाईस्कूल व इंटर के विभिन्न बोर्ड के राज्य स्तरीय मेधावियों को सम्मानित करेंगे। राज्य स्तर पर प्रथम 10 मेधावियों को एक-एक लाख रुपये का चेक, एक-एक टैबलेट, प्रशस्ति पत्र व मेडल दिए जाएंगे। जिला स्तरीय सम्मान समारोह में जिले के प्रथम 10 मेधावियों को 21–21 हजार रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र व मेडल दिए जाएंगे। 


    माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से जारी निर्देश के अनुसार राज्य स्तर पर यूपी बोर्ड, संस्कृत शिक्षा परिषद, सीआईएसई व सीबीएसई के हाईस्कूल व इंटर के कुल 223 मेधावियों को सीएम लोकभवन में सम्मानित करेंगे। जिला स्तर पर कुल 1459 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया जाएगा। राज्य स्तरीय आयोजन में मेधावियों के साथ उनके एक-एक अभिभावक भी शामिल हो सकेंगे।

     उन्होंने सभी डीआईओएस को निर्देश दिया है कि राज्य स्तरीय कार्यक्रम का लाइव प्रसारण जिला मुख्यालय पर करने के लिए व्यवस्था की जाए। डीआईओएस एक जून को होने वाले आयोजन में मंत्री या जनप्रतिनिधि की उपस्थिति में आयोजन सुनिश्चित कराएं। निदेशक ने कहा है कि मेधावियों को दी जाने वाली धनराशि कोषागार से उनके खातों में हस्तांतरित कराई जाएगी।