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Tuesday, August 22, 2119

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    Wednesday, May 20, 2026

    ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में कम नंबरों के बाद अब सीबीएसई के री-इवैल्यूएशन पोर्टल की परेशानी, विद्यार्थियों ने पोर्टल पर लागिन नहीं कर पाने का लगाया आरोप

    ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में कम नंबरों के बाद अब सीबीएसई के री-इवैल्यूएशन पोर्टल की परेशानी, विद्यार्थियों ने पोर्टल पर लागिन नहीं कर पाने का लगाया आरोप

    कभी वेबसाइट पर ब्लैंक पेज दिखने तो कभी कैप्चा कोड नहीं आने की भी शिकायत


    नई दिल्लीः सीबीएसई की ओर से 12 वीं में कापियों की जांच के लिए आन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम से परिणाम में उम्मीद से कम अंक मिलने की शिकायतें मिली हैं। इसके बाद अब री-इवैल्यूएशन और स्कैन कापी हासिल करने के
     लिए खोले गए पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतों से विद्यार्थियों की चिंता और बढ़ गई है। कई विद्यार्थियों का आरोप है कि वे न तो पोर्टल पर लागिन कर पा रहे हैं और न ही आवेदन प्रक्रिया पूरी हो रही है।


    मंगलवार को सीबीएसई ने पोस्ट रिजल्ट (परिणाम के बाद) सुविधा शुरू की है। इसमें विद्यार्थी अपनी जांची हुई उत्तर पुस्तिका की स्कैन कापी लेकर री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन पोर्टल खुलते ही इंटरनेट मीडिया पर शिकायतों की संख्या बढ़‌ने लगी है।


    विद्यार्थियों का कहना है कि कभी वेबसाइट ब्लैंक पेज दिखा रही है, कभी कैप्चा कोड नहीं आ रहा। कई मामलों में भुगतान कटने के बाद भी आवेदन पूरा नहीं हो रहा है। एक छात्र ने बताया कि कई बार कोशिश के बाद भी वह पंजीकरण नहीं कर पाया, क्योंकि बार-बार वेब साइट हैंग हो रही है। इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी छात्रों ने स्क्रीनशाट साझा करते हुए बोर्ड की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। एक छात्र ने कहा कि कि रुपये कट गए पर वेरिफिकेशन फेल हो गया। सिस्टम अपग्रेड नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था ही फेल है। हालांकि, इस मामले में सीबीएसई ने किसी बड़ी तकनीकी विफलता से इन्कार किया है।

    बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि उन्हें सुबह कुछ छात्रों के फोन आए थे, जो लागिन नहीं कर पा रहे थे। वैसे इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है। उनके अनुसार कई बार पुराना सेव पेज खुल जाता है, जिसे कंप्यूटर रीस्टार्ट करने से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों को कुछ देर बाद दोबारा से लागिन करने की सलाह दी है। बोर्ड ने कहा कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल सही तरीके से काम कर रहा है। वैसे इस बार स्कैन कापी और री-इवैल्यूएशन की फीस भी कम की गई है। स्कैन कापी शुल्क 700 से 100 रुपये, री-इवैल्यूएशन फीस 500 से 100 रुपये और प्रति प्रश्न जांच शुल्क 100 से 25 रुपये किया गया है।

    न्यूनतम योग्यता वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर होगा विचार, 69000 शिक्षक भर्ती मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रखा प्रस्ताव

    न्यूनतम योग्यता वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर होगा विचार, 69000 शिक्षक भर्ती मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रखा प्रस्ताव

    उत्तर प्रदेश सरकार ने शीर्ष अदालत में कहा- मगर यह भविष्य के लिए नजीर नहीं होगा

    कोर्ट ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को रिकार्ड में लेते हुए छह सप्ताह का दिया समय

    भर्ती का मामला वर्ष 2018 से है लंबित, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने दी है चुनौती

    20 मई 2026
    ई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के मामले में नियुक्ति की योग्यता रखने वाले लेकिन चयन सूची से बाहर रह गए आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में क्हा कि वह उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने पर विचार करने के लिए राजी है, जो हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश के अनुसार मूल चयन सूची में शामिल होने की योग्यता रखते हैं। हालांकि, यह नियुक्ति उम्मीदवारों की प्राथमिक शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करने और उपलब्ध रिक्तियों के अधीन होगी।


    राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय मामले की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए लिया जाएगा और इसे भविष्य में किसी अन्य चयन में नजीर नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए इस प्रस्ताव को रिकार्ड पर लिया और प्रक्रिया तैयार करने के लिए छह  सप्ताह का समय दिया है। मामले की आठ सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

    इस भर्ती का मामला 2018 से लंबित है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने भर्ती की मेरिट लिस्ट को रद कर दिया था और प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि इस शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को मूल चयन सूची के रूप में आरक्षण के सभी नियमों के अनुसार तीन महीने के भीतर फिर से तैयार किया जाए।

    रद हुई चयन सूची के अनुसार, सामान्य वर्ग के जिन शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी थी, उन्होंने नौकरी पर खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने शुरू में ही हाई कोर्ट के इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। आरक्षण के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल की हैं और वे मूल याचिका में प्रतिवादी भी हैं। 
    पिछली सुनवाई पर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के वकील मनीष गोस्वामी ने कहा था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के साथ इस मामले में अन्याय हुआ है और वे न्याय के लिए 2020 से भटक रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग यह नहीं है कि जिन शिक्षकों की भर्ती हो गई है और जो पांच साल से नौकरी कर रहे हैं, उन्हें नौकरी से बाहर किया जाए।

    इस सिलसिले में मंगलवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ में हुई सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडीशनल सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और अंकित गोयल ने राज्य सरकार का प्रस्ताव कोर्ट के समक्ष रखा। भाटी ने कहा कि राज्य सरकार मामले पर विचार करने के लिए राजी है और प्रक्रिया पूरी करके कोर्ट में स्थिति रिपोर्ट देगी। कोर्ट ने उनके प्रस्ताव को रिकार्ड पर लेते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह का समय दिया। दूसरी ओर, कुछ वकीलों ने प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर दलीलें देने की कोशिश की, लेकिन पीठ ने कहा कि पहले राज्य सरकार को काम करने दिया जाए।




    69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर टिकीं निगाहें, 
    आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन

    18 मई 2026
    लखनऊपरिषदीय विद्यालयों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने दंडवत प्रणाम करते हुए धरना दिया। उनका कहना था कि वे छह साल से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है। इस मामले में अगली सुनवाई 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जार्ज मसीह की बेंच में होनी है। सरकार इसमें अपना पक्ष पर रख देती है तो मामले का जल्द समाधान हो सकता है।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने कहा कि इस मामले की पहली सुनवाई सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट में हुई थी। इसके बाद लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन मामले का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख रही, जिससे मामला लटकता जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट की डबल बेंच का फैसला उनके पक्ष में है। इसके बावजूद न्याय नहीं मिल रहा। 


    अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमण्डल ने बेसिक शिक्षा मंत्री को दिया ज्ञापन, मिला आश्वासन

    69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का तपती सड़क पर लेटकर प्रदर्शन


    लखनऊ ।  प्राइमरी स्कूल की 69 हजार शिक्षक भर्ती के सुप्रीम कोर्ट में याची बने आरक्षित अभ्यर्थी सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे भीषण गर्मी में तपती सड़क पर लेट-लेट कर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पहुंचे। अभ्यर्थियों ने 20 मिनट तक लेटकर प्रदर्शन किया और खूब नारेबाजी की। हाथ, पैर व पेट सड़क की गर्मी से तप गया। बेहाल अभ्यर्थी पसीने से तर-बतर हो गए। बेहाल अभ्यर्थियों को पुलिस ने पानी पिलाया।

    सूचना मिलते ही बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि मंडल को बुलाकर वार्ता की। अभ्यर्थियों ने उन्हें ज्ञापन देकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को होने वाली सुनवाई पर बात की। अभ्यर्थियों कहा कि प्रदेश सरकार याची लाभ का प्रस्ताव पेश कर ने इस मामले का निस्तारण करे। मंत्री अभ्यर्थियों के प्रस्ताव पर सहमति और आश्वासन दिया। इसके बाद पुलिस ने इन्हें बस में बैठाकर इको गार्डन भिजवाया। पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में 31 बार यह मामला सूचीबद्ध हो चुका है, लेकिन किसी भी तारीख में सरकार अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुई। अब फिर मंगलवार को सुनवाई होनी है।

    प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रामविलास, सुमित यादव, धनंजय गुप्ता, अमित, विक्रम ने बताया कि अभ्यर्थी न्याय के लिए बीते छह साल से याची बनकर न्याय मांग रहे हैं। चार दिसंबर 2018 को 69000 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन मांगे गए। छह जनवरी 2019 परीक्षा हुई। एक जून 2020 को परिणाम जारी हुआ। आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी 19000 आरक्षण सीट पर अनियमितता का आरोप लगाकर हाईकोर्ट चले गए


    इतनी बार अभ्यर्थियों ने किया प्रदर्शन

    मुख्यमंत्री आवास का घेराव-छह बार
    डिप्टी सीएम के आवास का घेराव व प्रदर्शन- 10 बार
    बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव 10 से अधिक बार
    पूर्व शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के आवास का घेराव-8 बार

    प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) व निजी डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के साथ शिक्षणेतर कर्मचारियों को भी मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा

    प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) व निजी डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के साथ शिक्षणेतर कर्मचारियों को भी मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा

    70 हजार से अधिक कर्मचारियों को मिलेगा इसका लाभ

    उच्च शिक्षा विभाग ने जारी किया उच्च शिक्षा निदेशक को निर्देश


    लखनऊ। प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) व निजी डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के साथ ही शिक्षणेतर कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा की सुविधा मिलेगी। कर्मचारियों को यह सुविधा दिए जाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। इसमें कर्मचारी व परिजनों को एक साल में पांच लाख तक के निशुल्क इलाज की सुविधा मिलेगी।


    उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर कर्मचारियों का ब्योरा व इस सुविधा देने से आने वाले अनुमानित खर्च की जानकारी मांगी है। यह जानकारी 20 मई तक शासन को देनी है। 


    उन्होंने कहा है कि राज्य विश्वविद्यालयों में नियमित के साथ-साथ सेल्फ फाइनेंस कोर्स के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे लगभग 70 हजार कर्मचारी लाभान्वित होंगे। पिछले महीने राज्य विश्वविद्यालयों, सरकारी व निजी डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को तो कैशलेस चिकित्सा की सुविधा देने का आदेश जारी कर दिया था किंतु इसमें से शिक्षणेत्तर कर्मचारी छूट गए थे। ऐसे में कर्मचारी संगठनों ने कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल करने की मांग उठाई थी।

    इसी क्रम में उच्च शिक्षा विभाग की ओर से राज्य विश्वविद्यालयों, एडेड व निजी डिग्री कॉलेजों के कर्मचारियों को भी इसका लाभदिलाने के लिए कवायद शुरू की गई है। 

    यूपी बोर्ड : अब घर बैठे ऑनलाइन पुस्तकें मंगा सकते हैं विद्यार्थी, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने विकसित किया छात्र अनुकूल ऑनलाइन पोर्टल

    यूपी बोर्ड : अब घर बैठे ऑनलाइन पुस्तकें मंगा सकते हैं विद्यार्थी, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने विकसित किया छात्र अनुकूल ऑनलाइन पोर्टल

    एनसीईआरटी पुस्तकों की ऑनलाइन उपलब्धता, अमेजन वेबसाइट और पोर्टल के जरिए बिक्री

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि यूपी बोर्ड ने विद्यार्थियों की पाठ्य पुस्तकों की खोज और ऑर्डर प्रक्रिया को सरल व सहज बनाने के लिए छात्र अनुकूल ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया है। इसके माध्यम से छात्र कक्षानुसार पुस्तक सेट का चयन कर सीधे संबंधित वेबसाइट के विक्रय पृष्ठ पर जाकर ऑनलाइन ऑर्डर कर सकेंगे और घर बैठे पुस्तकें प्राप्त कर सकेंगे।

    उन्होंने बताया कि शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौ, 10, 11 और 12 के विभिन्न विषयों की 70 एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त एवं वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए सस्ती दर पर उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान एवं गृह विज्ञान जैसे विषय शामिल हैं।

    इसके अलावा परिषद की ओर से विकसित हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की 12 पाठ्य पुस्तकें भी कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए प्रचलन में लाई गई हैं। सचिव ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को पुस्तकों की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने और घर बैठे पुस्तक प्राप्ति की सुविधा देने के उद्देश्य से अधिकृत प्रकाशकों के सहयोग से यह व्यवस्था शुरू की गई है।



    पहल: यूपी बोर्ड की किताबें अब घर बैठे मिल सकेंगी

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बड़ा कदम उठाते हुए शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौ से 12वीं तक की एनसीईआरटी आधारित पुस्तकों की ऑनलाइन उपलब्धता और होम डिलीवरी व्यवस्था शुरू कर दी है। अब छात्र-छात्राओं को किताबें खरीदने के लिए बाजारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि वे घर बैठे ही ऑनलाइन माध्यम से पुस्तकें मंगा सकेंगे।

    बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से मंगलवार को जारी सूचना के अनुसार, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र समेत कुल 36 विषयों की लगभग 70 एनसीईआरटी पैटर्न की पुस्तकें ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं। हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की पुस्तकें भी विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होंगी। पुस्तकों के मुद्रण और वितरण की जिम्मेदारी तीन प्रमुख प्रकाशकों को सौंपी गई है। कक्षा 9 से 12 तक की पुस्तकों के लिए मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिकेशर्स, आगरा को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं कक्षा 10 की पुस्तकों के लिए मेसर्स पीतांबरा बुक प्राइवेट लिमिटेड, झांसी तथा कक्षा 11 की पुस्तकों के लिए मेसर्स सिंघल एजेंसीज, लखनऊ को अधिकृत किया गया है।

    बोर्ड ने इस संबंध में सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और क्षेत्रीय कार्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। विद्यार्थी अमेजन और pioneerbooks.in पोर्टल के माध्यम से किताबें ऑर्डर कर सकेंगे। खास बात यह है कि होम डिलीवरी के लिए विद्यार्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। बोर्ड की इस पहल से दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है।

    शिक्षामित्र की ग्रेच्युटी, भविष्य निधि व पेंशन पर छह सप्ताह में निर्णय लेने का हाईकोर्ट का निर्देश

    शिक्षामित्र की ग्रेच्युटी, भविष्य निधि व पेंशन पर निर्णय लेने का निर्देश

    बीएसए वाराणसी को छह सप्ताह में याची को सुनकर सकारण आदेश करने को कहा


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्र को ग्रेच्युटी, कर्मचारी भविष्य निधि, पारिवारिक पेंशन का लाभ देने की मांग में दाखिल याचिका पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वाराणसी को छह सप्ताह में नियमानुसार याची को सुनकर सकारण आदेश करने का निर्देश दिया है।


    कोर्ट ने याची से तीन सप्ताह में नए सिरे से प्रत्यावेदन देने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने शहनाज बेगम की याचिका पर अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी को सुनने के बाद याचिका निस्तारित करते हुए दिया है। 

    एडवोकेट सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी का कहना था कि उत्तर प्रदेश में लगभग एक लाख 70 हजार शिक्षामित्र प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं, जिन्हें मात्र 10 हजार रुपये प्रत्येक माह दिया जाता था, जो वर्तमान में 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्हें न तो ग्रेच्युटी जबकि और न ही पेंशन दिया जा रहा है ऐसे शिक्षामित्र 25 वर्षों से निरंतर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं। 

    इतना ही नहीं यदि किसी शिक्षा मित्र की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उनके उत्तराधिकारी एवं परिवार को कोई सहायता नहीं दी जाती जबकि ग्रेच्युटी ऑफ पेमेंट एक्ट व कर्मचारी भविष्य निधि कानून शैक्षणिक संस्थाओं में लागू है। साथ ही संविधान की धारा 39, 42, 43, 47 में भी दैनिक वेतन भोगी, संविदाकर्मी एवं अन्य कार्मिकों को सामाजिक सुरक्षा देने का दायित्व राज्य का है। वाराणसी में कार्यरत शिक्षामित्र की 48 वर्ष में मृत्यु हो जाने के कारण उनकी पत्नी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से पारिवारिक पेंशन एवं ग्रेच्युटी भुगतान के लिए अनुरोध किया।

    Tuesday, May 19, 2026

    मुख्यमंत्री कंपोजिट मॉडल स्कूलों के निर्माण में करोड़ों रुपये के टेंडरों को लेकर बड़ा खेल, निर्माण में टेंडर की शर्तें अलग-अलग

    मुख्यमंत्री कंपोजिट मॉडल स्कूलों के निर्माण में करोड़ों रुपये के टेंडरों को लेकर बड़ा खेल,  निर्माण में टेंडर की शर्तें अलग-अलग
     

    लखनऊ। मुख्यमंत्री मॉडल स्कूलों के निर्माण में करोड़ों रुपये के टेंडरों को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। आरोप है कि यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन ने नियम-कानूनों को ताक पर रख दिया। प्रदेश में एक जैसे बनने वाले मॉडल स्कूलों के लिए अलग अलग टेंडर नियम बनाकर विभाग ने पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्रदेश में करीब 80 मुख्यमंत्री मॉडल स्कूलों का निर्माण किया जा रहा है। इसमें से करीब 40 स्कूलों के निर्माण की जिम्मेदारी शासन ने यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन को दी है, लेकिन अब इन्हीं के निर्माण में अनियमितता और टेंडर हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के पत्र के बाद मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने मामले में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा से रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों का दावा है,जांच की आंच ऊपर तक पहुंचती देख मामले को दबाने की कोशिश शुरू हो गई।


    जीएसटी जोड़कर बदले गए टेंडर के खेल: प्रदेश के लगभग सभी बड़े विभाग, पीडब्ल्यूडी, सीपीडब्ल्यूडी, एलडीए, नगर निगम, सिंचाई विभाग और आवास विकास परिषद खुद विकास कार्यों के टेंडर में जीएसटी अलग रखते हैं। इससे परियोजना की वास्तविक लागत और बिलो टेंडर की स्थिति स्पष्ट रहती है। लेकिन उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन ने कई टेंडरों में 18% जीएसटी जोड़कर लागत बढ़ा दी। 

    यह खेल सिर्फ इसलिए हुआ ताकि कुछ विशेष श्रेणी के ठेकेदारों को पात्र बनाया जा सके। दरअसल, 20 करोड़ तक के कार्यों में ए श्रेणी के ठेकेदार हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन 20 करोड़ से ऊपर का टेंडर होने पर ए-1 प्लस श्रेणी के बड़े ठेकेदार पात्र हो जाते हैं। आरोप है कि विभाग ने जानबूझकर जीएसटी जोड़कर कई परियोजनाओं की लागत 20 करोड़ के पार पहुंचा दी।

    टेंडर में जीएसटी की रकम नहीं जोड़ी जाती है। एलडीए में भी इसी तरह टेंडर होता है। यदि कोई विभाग कभी जीएसटी जोड़कर और कभी हटाकर टेंडर करता है तो सवाल उठेगा। -मानवेंद्र सिंह, मुख्य अभियंता, एलडीए



    भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं है। अधिकारी जहां जरूरत समझते हैं वहां जीएसटी जोड़ देते हैं और जहां नहीं समझते हटाकर टेंडर कराते हैं। इसका कोई नियम नहीं है। -एके सिंह, सीजीएम, उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड

    जहां चाहा जीएसटी हटाया, जहां चाहा जोड़ दिया

    प्रोजेक्ट कारपोरेशन में टेंडर प्रक्रिया में दोहरे मानदंडों के उदाहरण भी सामने आए हैं। 3 मार्च 2023 को आगरा के बिरुनी में 18.47 करोड़ के मॉडल स्कूल का टेंडर बिना जीएसटी जोड़े निकाला गया। कई अन्य जिलों में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। दूसरी ओर 30 मई 2023 को मऊ के पितवल में मॉडल स्कूल निर्माण के लिए 20.15 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया, जिसमें जीएसटी जोड़ दी गई। बस्ती के रुधौली में 22.36 करोड़ के टेंडर में भी जीएसटी जोड़कर लागत बढ़ाई गई। आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के जरिए बिलो टेंडर की वास्तविक तस्वीर भी धुंधली कर दी गई।


    टेंडर में एकरूपता होनी चाहिए। हम इस मामले को दिखवाएंगे। अलग अलग यूनिट के सीजीएम ने टेंडर कराए हैं। सुधारा जाएगा। सभी कामों के टेंडर एक ही शर्तों पर होंगे। संतोष कुमार सिंह, एमडी, उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन


    प्रदेश सरकार ने अनुदेशकों का मानदेय तो बढ़ाया, लेकिन बकाया देने को तैयार नहीं, एरियर रिव्यू पिटिशन से नाराजगी

    प्रदेश सरकार ने अनुदेशकों का मानदेय तो बढ़ाया, लेकिन बकाया देने को तैयार नहीं, एरियर रिव्यू पिटिशन से नाराजगी 
     

    प्रयागराज। प्रदेश सरकार ने परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय तो प्रतिमाह 17 हजार रुपये कर दिया है लेकिन उनके लाखों रुपये का भुगतान करने को तैयार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने चार फरवरी को अनुदेशकों के मानदेय में एक अप्रैल से वृद्धि करते हुए 2017-18 से बकाया का भुगतान छह महीने में करने का आदेश दिया था। प्रदेश में 2013 से कला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा तथा कार्यअनुभव शिक्षा के पद पर कार्यरत 24717 अनुदेशकों में से प्रत्येक को नौ-नौ लाख रुपये से अधिक का बकाया भुगतान होना था।


    शीर्ष कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया था कि पहले राज्य सरकार भुगतान करेगी और बाद में केंद्र सरकार से अपने हिस्से की धनराशि प्राप्त करेगी। हालांकि राज्य सरकार ने भुगतान करने की बजाय नौ मार्च 2026 को पुनर्विचार याचिका, सात मई को स्थगन प्रार्थना पत्र तथा 12 मई को संशोधन प्रार्थना पत्र दाखिल किया। इनमें मुख्य रूप से बकाया भुगतान में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया गया है। वर्तमान में ये सभी प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं।

    आरटीई के तहत अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति जुलाई 2013 में सात हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय एवं 11 माह की सेवा शर्तों पर की गई थी। 2016 में मानदेय बढ़ाकर 8470 रुपये किया गया। 2017 में शासन ने 17 हजार रुपये मानदेय निर्धारित किया था लेकिन दिसंबर 2017 में पुनर्विचार के नाम पर पुनः 8470 रुपये ही भुगतान किया जाने लगा और 17 हजार मानदेय नहीं मिल सका। इसके खिलाफ अनुदेशकों ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और चार फरवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था।

    मार्च 2017 से 17 हजार रुपये के हिसाब से एरियर पाना हमारा हक है और यह हमें मिलना ही चाहिए। इसके लिए हम राज्य सरकार से भी अनुरोध करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे। -भोलानाथ पांडेय, याचिकाकर्ता

    परिषदीय नगर क्षेत्र के विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों को समायोजित करने नगर क्षेत्र के अधियाचन को समाप्त करने और ग्रामीण क्षेत्र के रिक्त शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति करने की PSPSA की मांग

    बेसिक शिक्षा परिषद के परिषदीय नगर क्षेत्र के विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों को समायोजित करने नगर क्षेत्र के अधियाचन को समाप्त करने और ग्रामीण क्षेत्र के रिक्त शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति करने की PSPSA की मांग 


    Monday, May 18, 2026

    ग्रीष्मावकाश प्रभावित होता देख परिषदीय शिक्षकों ने बढ़ाया प्रतिकर अवकाश के लिए दबाव

    ग्रीष्मावकाश प्रभावित होता देख परिषदीय शिक्षकों ने बढ़ाया प्रतिकर अवकाश के लिए दबाव


    लखनऊ । ग्रीष्मावकाश प्रभावित होता देख शिक्षकों ने अब प्रतिकर अवकाश देने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। जनगणना एवं भर्ती परीक्षाओं के कारण शिक्षकों का ग्रीष्मावकाश इस बार प्रभावित होने जा रहा है।


    ऐसे में पूर्व से गर्मी की छुट्टियों के लिए कार्यक्रम बना चुके शिक्षकों में इससे भारी नाराजगी है। शादी-ब्याह से लेकर अन्य कार्यक्रमों व भ्रमण-पर्यटन आदि के लिए पहले से प्रोग्राम बना चुके शिक्षकों के भी बीच तो भारी असमंजस की स्थिति है। पहले से तैयारी कर बैठे ऐसे शिक्षकों ने पहले से ही अवकाश के लिए आवेदन तक कर रखा है।

    बेसिक शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अलग-अलग जिलों में प्रदेश भर में 12000 से अधिक शिक्षकों ने अवकाश के लिए आवेदन कर रखे हैं। दूसरी तरफ शिक्षक संगठनों ने भी ग्रीष्मावकाश नहीं मिलने की दशा में उसके बदले प्रतिकर अवकाश की सुविधा प्रदान करने की मांग करनी शुरू कर दी हैं। शिक्षकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग द्वारा जारी शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार निर्धारित शिक्षण कार्य इस बार पहले एसआईआर और अब जनगणना के कारण बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।

    Sunday, May 17, 2026

    स्पेशल बीटीसी प्रशिक्षण 2004 : नियुक्ति तक मानदेय पाने के हकदार हैं अभ्यर्थी – हाईकोर्ट, प्रशिक्षण अवधि तक मानदेय को सीमित करने का शासन का प्रयास खारिज

    स्पेशल बीटीसी प्रशिक्षण 2004 : नियुक्ति तक मानदेय पाने के हकदार हैं अभ्यर्थी – हाईकोर्ट, प्रशिक्षण अवधि तक मानदेय को सीमित करने का शासन का प्रयास khaarij


    प्रयागराजः हाईकोर्ट ने कहा कि स्पेशल बीटीसी ट्रेनिंग कोर्स 2004 के लिए चयनित अभ्यर्थी प्रशिक्षण शुरू होने से लेकर नियुक्ति की तिथि तक 2500 रुपये प्रति माह मानदेय पाने के वैधानिक हकदार हैं। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने राज्य सरकार द्वारा 14 मई 2015 को जारी उस विवादास्पद शुद्धिपत्र को रद कर दिया है, जिसके माध्यम से मानदेय को केवल प्रशिक्षण अवधि तक सीमित करने का प्रयास किया गया था। 


    कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अभ्यर्थियों के बकाया मानदेय का भुगतान चार महीने के भीतर सुनिश्चित करें। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि 14 जनवरी 2004 के मूल शासनादेश में अभ्यर्थियों को नियुक्ति तक मानदेय देने का स्पष्ट प्रविधान था, जिसे राज्यपाल की मंजूरी से जारी किया गया था।

    CBSE : नौवीं में त्रिभाषा अनिवार्य पर बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, स्कूलों में एक जुलाई से लागू हो जाएगा बदलाव, तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी

    CBSE : नौवीं में त्रिभाषा अनिवार्य पर बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, स्कूलों में एक जुलाई से लागू हो जाएगा बदलाव, तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी


    15 मई 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों में अब कक्षा नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा स्कूल शिक्षा 2023 के अनुरूप यह बड़ा बदलाव किया गया है। यह व्यवस्था एक जुलाई से लागू हो जाएगी। हालांकि, तीसरी भाषा के लिए बोर्ड परीक्षा नहीं कराई जाएगी।

    बोर्ड ने 15 मई को जारी परिपत्र में कहा है कि एक जुलाई से कक्षा नौ में तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। स्कूल सीबीएसई की विषय सूची में शामिल किसी भी भाषा को चुन सकते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं हों। विदेशी भाषा को केवल तीसरी भाषा या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ाया जा सकेगा।

    बोर्ड ने स्पष्ट किया कि तीसरी भाषा (आर-3) के लिए दसवीं में कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा। इसका उद्देश्यविद्यार्थियों पर परीक्षा का अतिरिक्त दबाव कम करना और भाषा सीखने को अधिक सहज बनाना है। सीबीएसई ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे जून तक ओएएसआईएस पोर्टल पर अपनी तीसरी भाषा के संबंध में जानकारी दें।



    छठवीं में तीसरी भाषा का चयन 31 मई तक तय करें स्कूल – सीबीएसई, ये है तीन भाषा चुनने का फार्मूला

    06 मई 2026
    नई दिल्लीः सीबीएसई ने छठवीं में तीसरी भाषा (आर 3) लागू करने को लेकर सभी संबद्ध स्कूलों को प्रक्रिया तेज करने को कहा है। बोर्ड का कहना है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य होगी और सभी स्कूलों को 31 मई तक ओसिस पोर्टल पर अपनी तीसरी भाषा का चयन करके अपलोड या संशोधित करना होगा। नई व्यवस्था एक जुलाई से शुरू करनी होगी।

    सीबीएसई के अनुसार, कई स्कूलों ने तीसरी भाषा का विकल्प पहले ही पोर्टल पर अपलोड कर दिया है, कुछ स्कूल अब भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं। वहीं, कुछ ने नीति के अनुरूप विकल्प नहीं चुने हैं। सीबीएसई ने कहा है, निर्धारित समय सीमा तक जानकारी अपडेट नहीं करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई हो सकती है।


    ये है तीन भाषा चुनने का फार्मूला

    आर 1 (पहली भाषा) : यह वह मुख्य भाषा होती है, जिसे स्कूल चुनता है। यह भाषा सीबीएसई की सूची में शामिल होती है, जैसे हिंदी या कोई क्षेत्रीय भाषा। आमतौर पर छात्रों की पढ़ाई की शुरुआत इसी भाषा से होती है।

    आर 2 (दूसरी भाषा) : दूसरी भाषा आर 1 से अलग होती है। यह भी एक मानक भाषा होती है, जिसे स्कूल पढ़ाता है जैसे अंग्रेजी या कोई दूसरी भारतीय भाषा।

    आर 3 (तीसरी भाषा) : तीसरी भाषा आर 1 और आर 2 दोनों से अलग होती है। इसमें छात्र अपनी क्षेत्रीय भाषा या मातृभाषा का चुनाव कर सकते हैं। इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए।




    छठी कक्षा से तीसरी भाषा को सीबीएसई ने किया अनिवार्य, नए नियम के तहत तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषा होना जरूरी

    कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू

    04 अप्रैल 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यामक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भाषा शिक्षा को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा (आर3) को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। यह कदम नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के तहत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है। साथ ही इसी सत्र से कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू किया जा रहा है।

    सीबीएसई के अनुसार अब छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कम से कम एक और भाषा पढ़नी होगी। नए नियम के तहत तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा। इस नीति के लागू होने के बाद कक्षा छठी से शुरू होने वाला तीसरी भाषा का अध्ययन कक्षा दसवीं तक जारी रहेगा। वर्तमान में हिंदी और अंग्रेजी समेत कुल 44 भाषाएं पढ़ाई जा रही हैं। जिनमें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाएं, अन्य क्षेत्रीय भारतीय भाषाएं और कुछ विदेशी भाषाएं भी शामिल हैं।

    छात्रों का होगा समग्र विकास : भाषा पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि छात्रों की सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमता का समग्र विकास हो सके। इसमें आर 1, आर2 और आर3 के रूप में तीन-भाषा ढांचा तय किया है। एनसीएफएसई-2023 की सिफारिशों के अनुसार इन तीन भाषाओं में से दो भाषाएं भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड द्वारा बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी जाएगी।

     सभी कक्षा में भाषा होगी अनिवार्य
    बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा की पढ़ाई शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठीं में अनिवार्य रूप से शुरू होगी। इसके बाद हर वर्ष इसे एक-एक कक्षा में बढ़ाया जाएगा ताकि छात्रों पर अचानक अतिरिक्त बोझ न पड़े और वह क्रमिक रूप से नई भाषा सीख सकें। जारी कार्यक्रम के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में केवल कक्षा छठीं के छात्रों के लिए आर3 अनिवार्य होगा। जबकि सत्र 2027-28 में यह कक्षा छठी और सातवी, सत्र 2028-29 में कक्षा छठी से आठवी, सत्र 2029-30 में कक्षा छठी से नौवीं और सत्र 2030-31 तक कक्षा छठी से दसवीं तक के सभी छात्रों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य हो जाएगी।

    सांस्कृतिक विविधता की समझ होगी मजबूत : इस नीति के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। सीबीएसई का मानना है कि इस पहल से छात्रों की भाषाई क्षमता के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विविधता की समझ भी मजबूत होगी। इस चरणवद्ध शुरुआत से पाठ्यक्रम का सुचारू रूप से परिवर्तन सुनिश्चित और माध्यमिक स्तर के मूल्यांकन सुधारों के साथ सामंजस्य स्थापित होगा।

    अधिकांश किताब 10 से 15 अप्रैल तक होंगी उपलब्ध : वहीं सीबीएसई द्वारा कक्षा नौवीं और दसवीं पाठ्यक्रम जारी करने को लेकर आयोजित वेबिनार में एनसीईआरटी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश सकलानी ने अनुसार नौवीं की किताबें तैयार हैं। प्रिंटिंग में हैं। इसमें अधिकांश किताबें 10 से 15 अप्रैल के बीच आ जाएंगी। एक से दो किताबें आने में देरी हो सकती है।



    सीबीएसई : नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए गणित, विज्ञान के दो स्तर अगले सत्र से होंगे लागू, 

    मानक और उन्नत प्रणाली पर आधारित 10वीं की पहली परीक्षा 2028 में होगी

    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए अपना नया शैक्षिक कार्यक्रम लागू कर दिया। इसके तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली होगी। गणित और विज्ञान के लिए दो स्तरीय प्रणाली (मानक और उन्नत) पर आधारित कक्षा 10 की पहली बोर्ड परीक्षा 2028 में होगी।

    सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि 2026 से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत अनिवार्य तीन भाषा फार्मूला कक्षा 6 के लिए लागू किया जाएगा, जबकि कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान में अनिवार्य मानक एवं वैकल्पिक उन्नत पाठ्यक्रमों की दो-स्तरीय प्रणाली शुरू की जाएगी। कक्षा 9 के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली शुरू होने से दोनों विषयों में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

    अधिकारी ने कहा, नए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे (एनसीएफ) की सिफारिशों के अनुसार, इन तीन भाषाओं में से दो भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए । भाषाओं को तीन चरणों-आर 1, आर 2 और आर3-में एक सुव्यवस्थित तीन-भाषा ढांचे के तहत व्यवस्थित किया गया है। बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन के बोर्ड के प्रयासों को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से तीसरी भाषा को अनिवार्य किए जाने से यह सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक छात्र कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करे। हालांकि, एक समान भाषा योजना को अपनाना वांछनीय है, लेकिन अगर कोई छात्र विदेश के किसी स्कूल से पढ़कर आया है और उसने वहां 8वीं या 9वीं तक जो तीसरी भाषा पढ़ी थी, वह स्कूलों में उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे खास मामलों में निर्धारित मानदंडों के अनुसार छूट दी जा सकती है। 


    मानक परीक्षा अनिवार्य, उन्नत वैकल्पिक

    गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली पर अधिकारी ने कहा, सभी छात्र मानक पाठ्यक्रम का अध्ययन करेंगे और तीन घंटे की 80 अंकों की एक समान परीक्षा में शामिल होंगे। उच्च दक्षता का विकल्प चुनने वाले छात्र दोनों विषयों में किसी एक या दोनों में एक अतिरिक्त उन्नत स्तर का चयन कर सकते हैं। इस स्तर में एक घंटे का 25 अंकों का एक अन्य प्रश्नपत्र हल करना होगा, जिसे उच्च-स्तरीय बौद्धिक कौशल और गहन वैचारिक समझ आंकने के लिए तैयार किया गया है। अधिकारी ने कहा, छात्रों के लिए मानक परीक्षा देना अनिवार्य होगा, जबकि उन्नत परीक्षा वैकल्पिक रहेगी। अहम बात यह है कि उन्नत परीक्षा में हासिल अंकों को कुल अंकों में नहीं जोड़ा जाएगा; इसके बजाय 50 फीसदी या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मार्कशीट में उन्नत स्तर की योग्यता अलग से दिखाई जाएगी।

    एडेड माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को फार्म-16 निःशुल्क मिलेगा, 75 लाख बजट जारी

    एडेड विद्यालय के शिक्षकों को फार्म-16 निःशुल्क मिलेगा, 75 लाख बजट जारी

    सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी, भुगतान की सभी प्रक्रियाएं जेम पोर्टल से सम्पन्न होंगी


    प्रयागराजः प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों को फार्म-16 (पूरे वित्तीय वर्ष का वेतन विवरण) निश्शुल्क उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा निदेशालय ने 75 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की है। वित्त नियंत्रक माध्यमिक शिक्षा निदेशालय प्रयागराज की ओर से जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआइओएस) को निर्देश जारी किए गए हैं।

    यह धनराशि वर्ष 2026-27 के बजट मद 'व्यावसायिक तथा विशेष सेवाओं के लिए भुगतान' के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई है। डीआईओएस को निर्देशित किया गया है कि फार्म 16 की व्यवस्था के लिए भुगतान प्रक्रिया शासनादेशों, वित्तीय नियमों एवं विभागीय आदेशों के अनुरूप सुनिश्चित की जाए। यदि किसी कारणवश अग्रिम, गलत अथवा दोहरा भुगतान होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों का होगी। 

    पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भुगतान की सभी प्रक्रियाएं जैम पोर्टल के माध्यम से संपन्न की जाएंगी। साथ ही व्यय का पूरा विवरण निर्धारित प्रारूप में समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया है कि आवंटित धनराशि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाएगा। 

    वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर संबंधित डीआइओएस तथा वित्त एवं लेखाधिकारी जवाबदेह होंगे। निदेशालय ने यह भी कहा है कि यदि वित्तीय वर्ष समाप्ति तक कोई धनराशि शेष रहती है तो उसे 31 मार्च 2027 से पूर्व नियमानुसार समर्पित करना होगा।



    राजकीय महाविद्यालयों में कम से कम चार शिक्षकों की होगी तैनाती, राजकीय महाविद्यालयों में तबादले के आवेदन कल से, समय सारिणी जारी

    डिग्री शिक्षकों का तबादला आवेदन बिना कारण निरस्त नहीं होगा, ऑनलाइन आवेदन फॉर्म को निरस्त करने का स्पष्ट कारण लिखना होगा


    लखनऊ। डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के स्थानांतरण आवेदन फॉर्म निरस्त करना प्राचार्यों को अब भारी पड़ेगा। वाजिब कारण के बिना आवेदन फॉर्म को रद्द करने पर जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। डिग्री कॉलेज शिक्षकों के तबादले के लिए ऑनलाइन फार्म 25 व 26 मई को भरे जा सकेंगे।

    उच्च शिक्षा विभाग ने वार्षिक स्थानांतरण नीति के तहत राजकीय डिग्री कॉलेज के शिक्षकों से आवेदन मांगे हैं। प्राचार्य को अब शिक्षक के स्थानांतरण के ऑनलाइन आवेदन फॉर्म को निरस्त करने का स्पष्ट कारण लिखना होगा। बिना पर्याप्त कारण के आवेदन फॉर्म रद्द करेंगे, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगर ऑनलाइन लॉगिन में प्राचार्य जानबूझकर लंबित रखेंगे, तो भी उन्हें स्पष्टीकरण देना होगा। ऐसे शिक्षक जिनके यहां चार से कम प्रवक्ता हैं, वह स्थानांतरण होने पर तभी कॉलेज छोड़ सकेंगे जब उनकी जगह कोई दूसरा शिक्षक स्थानांतरित होकर आ जाएगा।

    ऑनलाइन आवेदन फॉर्म https://hiedup.upsdc.gov.in/gdctransfer पर लिए जाएंगे। 29 मई को शिक्षकों के स्थानांतरण के आदेश जारी किए जाएंगे।


    जिले में तीन वर्ष पूरे कर चुके वही आवेदन के पात्र

    आकांक्षी जिलों के डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों का किसी दूसरे जिले में तबादला नहीं होगा, लेकिन दूसरे जिलों के शिक्षक आकांक्षी जिले में स्थानांतरित होकर आ सकेंगे। ऐसे शिक्षक जिनके प्रशासनिक स्थानांतरण की अवधि तीन वर्ष से कम हैं वह तबादले के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। सिर्फ वही शिक्षक आवेदन के पात्र होंगे जो किसी जिले में तीन वर्ष से अधिक की अवधि पूरी कर चुके हैं। प्राचार्यों के भी स्थानांतरण इसी के साथ किए जाएंगे।

    स्थानांतरण पोर्टल 18 मई तक तैयार हो जाएगा

    एनआईसी की ओर से स्थानांतरण के लिए पोर्टल 18 मई तक तैयार किया जाएगा। राजकीय महाविद्यालय 20 मई तक अपने कॉलेज में खाली पदों का ब्योरा भरेंगे। 21 व 22 मई को उच्च शिक्षा निदेशालय कॉलेजों की ओर से भरी गईं वैकेंसी को सत्यापित करेंगे। 25 मई से 26 मई तक शिक्षक स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरेंगे। 27 मई तक प्राचार्य शिक्षकों के आवेदन फॉर्म को सत्यापित करेंगे। 28 मई तक उच्च शिक्षा निदेशक की लॉगिन पर फॉर्म बढ़ाए जाएंगे।



    राजकीय महाविद्यालयों में कम से कम चार शिक्षकों की होगी तैनाती, राजकीय महाविद्यालयों में तबादले के आवेदन कल से, समय सारिणी जारी

    लखनऊ। राज्य सरकार की ओर से स्थानांतरण नीति जारी करने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने राजकीय महाविद्यालयों में पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती की कवायद तेज कर दी है। इसके तहत हर महाविद्यालय में कम से कम चार शिक्षकों की तैनाती का लक्ष्य है। विभाग ने ऑनलाइन तबादले के लिए समय सारिणी भी जारी की है। इसके तहत ऑनलाइन तबादला पोर्टल 18 मई से शुरू होगा।


    विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि तबादले के लिए शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। इसके लिए एनआईसी ने ऑनलाइन प्रणाली hiedup.upsdc.gov.in/gdctransfer विकसित की है। उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा सभी राजकीय महाविद्यालयों का डाटा और महाविद्यालयों की रिक्तियों की सूची फीड की जाएगी। इसके लिए सभी राजकीय महाविद्यालयों को लॉगिन आईडी व पासवर्ड दिया जा चुका है।

    तबादले के इच्छुक प्राचार्य व प्रवक्ता अपनी वरीयता आदि व मोबाइल नंबर खुद भरेंगे। आवेदन अंतिम रूप से सबमिट करने के बाद संशोधन नहीं हो सकेगा और स्वतः प्राचार्य लॉगिन पर अग्रसारित हो जाएगा। शिक्षक इसका प्रिंट आउट लेकर आवश्यक दस्तावेज के साथ हस्ताक्षर करके महाविद्यालय प्राचार्य को उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद प्राचार्य आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

    संयुक्त सचिव ने स्पष्ट किया है कि ऐसे महाविद्यालय जहां चार से कम प्रवक्ता हैं वहां कार्यरत प्रवक्ता आवेदन तो कर सकेंगे लेकिन उनका तबादला आदेश तभी मान्य होगा जब उस महाविद्यालय में कोई दूसरा प्रवक्ता कार्यभार ग्रहण कर लेगा। आकांक्षी जिलों में से किसी शिक्षक का तबादला कहीं और नहीं किया जाएगा जबकि बाहर से शिक्षक यहां आ सकेंगे।



    तीन साल से पहले आवेदन नहीं

    जिन शिक्षकों का पिछले साल तबादला हुआ है और उनकी अवधि तीन साल से कम है वे इस साल आवेदन नहीं कर सकेंगे। जिन प्राचार्य व प्रवक्ताओं के गत वर्षों में प्रशासनिक आधार पर तबादले हुए हैं और उनकी अवधि तीन साल से कम है वे भी तबादले के लिए योग्य नहीं होंगे। ऐसे आवेदन मिलने पर निदेशालय को निरस्त करने का अधिकार होगा।

    उच्च शिक्षा निदेशक निरस्त कर सकेंगे तबादला

    संयुक्त सचिव ने कहा है कि तबादले के लिए इच्छुक प्रवक्ता व प्राचार्य का ऑनलाइन तबादले में योग्य होने के बाद भी छात्रहित में उच्च शिक्षा निदेशक को तबादला निरस्त करने का अधिकार होगा। उन्होंने निदेशक उच्च शिक्षा व राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी को निर्देश दिया है कि इस प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा कराएं। साथ ही यह भी कहा है कि निदेशक उच्च शिक्षा द्वारा आवश्यकतानुसार समय सारिणी में बदलाव किया जा सकता है।

    तबादले की समय सारणी

    एनआईसी का ऑनलाइन तबादला पोर्टल 18 मई से शुरू होगा

    महाविद्यालयों द्वारा ऑनलाइन रिक्तियां 18 से 20 मई तक भरी जाएंगी

    उच्च शिक्षा निदेशालय रिक्तियों को 22 मई तक सत्यापित करेगा

    तबादले के इच्छुक प्राचार्य व शिक्षक 25-26 मई को आवेदन करेंगे

    प्राचार्य आवेदकों का 25 से 27 मई तक सत्यापन करेंगे

    निदेशक लॉगिन पर आवेदकों के फॉर्म 28 मई तक फारवर्ड करेंगे

    प्राचार्य व शिक्षकों का डाटा प्रोसेसिंग 28 मई तक किया जाएगा

    तबादला आदेश डाउनलोड 29 मई तक हो सकेगा


    प्रदेश की 90 स्कूली टीमें राष्ट्रीय स्तर पर होंगी पुरस्कृत, विकसित भारत बिल्डथॉन अंतर्गत 25 मई को पुरस्कार वितरण समारोह दिल्ली में होगा

    प्रदेश की 90 स्कूली टीमें राष्ट्रीय स्तर पर होंगी पुरस्कृत, विकसित भारत बिल्डथॉन अंतर्गत 25 मई को पुरस्कार वितरण समारोह दिल्ली में होगा

    विकसित भारत बिल्डथॉन में युवाओं के विचार चयनित, एक राष्ट्रीय व चार राज्य स्तर पर भी चुने गए


    लखनऊ। प्रदेश की १० स्कूली टीमें राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत होंगी। इनका चयन शिक्षा मंत्रालय की ओर से कराए गए विकसित भारत बिल्डथॉन की त्रिस्तरीय प्रतियोगिता के बाद किया गया है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य देश भर के स्कूली छात्रों में रचनात्मकता, समस्या समाधान और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है। राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर चयनित टीमों को नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा।


    योजना के तहत अटल इनोवेशन मिशन की ओर से कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान करने और उनके व्यावहारिक समाधान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने इस प्रतियोगिता का परिणाम जारी किया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से जारी सूची के अनुसार जिला स्तर पर 85 नवाचार व प्रोटोटाइप चयनित हुए हैं।

    महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी संबंधित बीएसए व डीआईओएस को बताया है कि 25 मई को इसका पुरस्कार वितरण समारोह दिल्ली में होगा। इसमें जिला व राज्य स्तरीय विजेताओं की राशि उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। यह टीमें कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़ेंगी। राष्ट्रीय स्तर की विजेता टीम संबंधित शिक्षक के साथ समारोह में शामिल होगी। उन्होंने टीम से संबंधित जानकारी जल्द उपलब्ध कराने को कहा है। 

    अनुकंपा नियुक्ति पर दूसरी बार ऊंचे पद का दावा नहीं स्वीकार्य : हाईकोर्ट, चतुर्थ श्रेणी पद पर नौकरी मिलने के बाद एलटी ग्रेड शिक्षक पद की मांग खारिज

    अनुकंपा नियुक्ति पर दूसरी बार ऊंचे पद का दावा नहीं स्वीकार्य : हाईकोर्ट, चतुर्थ श्रेणी पद पर नौकरी मिलने के बाद एलटी ग्रेड शिक्षक पद की मांग खारिज


    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सेवा मामलों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी मृतक कर्मचारी के आश्रित को एक बार अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल चुकी है, तो बाद में उसे किसी ऊंचे पद पर दोबारा अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। अदालत ने इसी आधार पर सुल्तानपुर निवासी दिलीप कुमार जायसवाल की याचिका खारिज कर दी।


    यह आदेश न्यायमूर्ति अमिताभकुमार राय की एकल पीठ ने दी। याचिकाकर्ता दिलीप कुमार जायसवाल के पिता सुल्तानपुर के एक इंटर कॉलेज में सहायक शिक्षक थे। 2003 में उनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद 2004 में दिलीप को अनुकंपा के आधार पर दूसरे इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर नौकरी दी गई। 

    बाद में दिलीप ने स्नातकोत्तर और बीएड की पढ़ाई पूरी कर ली। इसके आधार पर उसने एलटी ग्रेड सहायक शिक्षक के पद पर दोबारा अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की। लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) सुल्तानपुर ने 2007 में उसका आवेदन खारिज कर दिया।

    याचिकाकर्ता ने डीआईओएस के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि डीआईओएस का फैसला पूरी तरह सही और कानून के अनुरूप है। इसमें दखल की जरूरत नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देना होता है, न कि बाद में बेहतर पद प्राप्त करने का अवसर देना। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

    परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मिलेगी प्रयोग आधारित शिक्षा, 38 जिलों के 9356 विद्यालयों में पहुंची साइंस किट

    परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मिलेगी प्रयोग आधारित शिक्षा,  38 जिलों के 9356 विद्यालयों में पहुंची साइंस किट


    लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को प्रयोग और अनुभव आधारित विज्ञान शिक्षा से जोड़कर सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की कवायद की जा रही है। इसके तहत 38 जिलों में 9356 साइंस किट की आपूर्ति की गई है ताकि गांवों के गरीब परिवारों के बच्चों को भी आधुनिक और व्यावहारिक शिक्षा मिल सके। 


    किट की आपूर्ति आईआईटी गांधीनगर के माध्यम से सुनिश्चित की गई है। इसके तहत गोंडा में 370, शाहजहांपुर में 366, आगरा में 357, उन्नाव में 338, बुलंदशहर में 314 और अलीगढ़ में 301 साइंस किट पहुंचाई गई हैं। लखीमपुर खीरी में 464 और सीतापुर में 469 किट की आपूर्ति की गई है। इसके माध्यम से प्रयोग आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे परिषदीय विद्यालयों के बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि और नवाचार क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी। 

    साथ ही मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन, ऑपरेशन कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे अभियानों से सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में काम चल रहा है। 

    Saturday, May 16, 2026

    प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में कक्षा 11 और 12 के पंजीकृत छात्र-छात्राओं का पाठ्यक्रम पूर्ण कराने के सम्बन्ध में

    प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में कक्षा 11 और 12 के पंजीकृत छात्र-छात्राओं का पाठ्यक्रम पूर्ण कराने के सम्बन्ध में


    यूपी बोर्ड से संचालित होंगे अभिनव स्कूल, नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज किए जाने की मिली मंजूरी

    यूपी बोर्ड से संचालित होंगे अभिनव स्कूल, नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज किए जाने की मिली मंजूरी

    राजकीय अभिनव विद्यालयों की बदली गई व्यवस्था, अब तक ये सभी स्कूल सीबीएसई से चलते थे


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश के सभी 18 मंडल मुख्यालय वाले जिलों में अंग्रेजी माध्यम से संचालित पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय अभिनव विद्यालय अब यूपी बोर्ड से संचालित होंगे। अब तक ये सभी 18 स्कूल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संचालित थे। 

    शासन के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्त की ओर से 11 मई को माध्यमिक शिक्षा निदेशक को जारी पत्र में इन स्कूलों के सीबीएसई की बजाय राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की तरह यूपी बोर्ड से संचालित करने की अनुमति दी गई है। साथ ही इन 18 राजकीय अभिनव विद्यालयों के नाम भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज किए जाने की मंजूरी दी गई है।

    शिक्षा निदेशालय की ओर से 22 अगस्त 2024 और 21 अप्रैल 2026 को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था। यूपी बोर्ड ने 16 अप्रैल 2026 को संचालित करने की सहमति दी थी। व्यवस्था में बदलाव के पीछे कारण है कि एक तो माध्यमिक शिक्षा विभाग सीबीएसई मानकों के अनुसार मॉडल स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती नहीं कर पाता। इसके चलते समय-समय पर सीबीएसई को जवाब देना पड़ता है। दूसरे सीबीएसई हर पांच साल में स्कूलों से नवीनीकरण फीस के रूप में 25 हजार रुपये लेता है। सरकारी स्कूल होने के कारण विभाग के पास नवीनीकरण फीस के लिए कोई बजट नहीं होता।

    वैसे भी यूपी बोर्ड में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम लागू होने के कारण सीबीएसई और यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में कोई अंतर नहीं रह गया है। 



    यूपी के 18 राजकीय अभिनव विद्यालय अब माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधीन, नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज किए जाने की भी मिली अनुमति 

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में संचालित 18 राजकीय अभिनव विद्यालयों के संचालन को लेकर बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-7 द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब ये विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (CBSE), नई दिल्ली के स्थान पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के अधीन संचालित किए जाएंगे।

    11 मई 2026 को जारी पत्र में बताया गया है कि इस संबंध में पूर्व में जारी विभिन्न प्रस्तावों, पत्रों और तथ्यों पर विचार करने के बाद शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2015 के शासनादेश के अंतर्गत संचालित इन 18 राजकीय अभिनव विद्यालयों को अब प्रदेश में संचालित पंडित दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज/राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की तर्ज पर माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रयागराज से संचालित किया जाएगा।

    इसके साथ ही इन विद्यालयों के नाम परिवर्तित कर “पंडित दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज” किए जाने की भी अनुमति प्रदान कर दी गई है। शासन के इस फैसले को प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस निर्णय का उद्देश्य विद्यालयों के संचालन में आ रही व्यावहारिक और प्रशासनिक कठिनाइयों को दूर करना तथा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप एकरूपता स्थापित करना है। इससे विद्यालयों के प्रबंधन, पाठ्यक्रम संचालन और प्रशासनिक नियंत्रण में बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    आदेश जारी होने के बाद शिक्षा विभाग और संबंधित विद्यालयों में आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब इन विद्यालयों की शैक्षिक और प्रशासनिक गतिविधियां माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित होंगी।



    प्रदेश में जुलाई से 29 और राजकीय महाविद्यालय खोलने की तैयारी

    प्रदेश में जुलाई से 29 और राजकीय महाविद्यालय खोलने की तैयारी

    प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम के तहत खुल रहे 20 महाविद्यालय

    इन महाविद्यालयों में पद सृजन के लिए शासन से मांगा गया प्रस्ताव


    प्रयागराज। प्रदेश में एक जुलाई से शुरू होने जा रहे नए सत्र से 29 और राजकीय महाविद्यालय खोलने की तैयारी है। प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम योजना के तहत 20 महाविद्यालयों का संचालन राजकीय महाविद्यालय के रूप में किए जाने के लिए पद सृजन का प्रस्ताव उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से शासन को भेजा जा चुका है। पहले इनका संचालन अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग को करना था लेकिन अब इन्हें उच्च शिक्षा विभाग को हस्तांतरित किया जा रहा है।


    इन 20 कॉलेजों में प्रतापगढ़ के दो राजकीय महाविद्यालय गाबी महूआवन और राजकीय महाविद्यालय संडवा चंडिका पूरब गांव शामिल है। इसके अलावा नौ और महाविद्यालय खोलने की तैयारी है। पिछले साल नवनिर्मित 69 राजकीय महाविद्यालयों में से 46 का संचालन ही शुरू हो सका था। इनमें से सात ऐसे हैं जिन्हें संबद्ध महाविद्यालय के रूप में चलाने से राज्य विश्वविद्यालयों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। चूंकि इनमें पद सृजन पहले ही हो चुका है इसलिए इन्हें जुलाई से शुरू करने में कोई अड़चन भी नहीं हैं। 

    वहीं 69 राजकीय महाविद्यालयों में से दो राठ हमीरपुर और जमालपुर मिर्जापुर का निर्माण पिछले साल पूरा नहीं होने के कारण पठन-पाठन शुरू नहीं हो सका था। अब इनका काम लगभग पूरा है और ये भी जुलाई से शुरू होंगे। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा का कहना है कि प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम योजना के तहत 20 राजकीय महाविद्यालयों में पदसृजन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। वर्तमान में प्रदेश के 216 राजकीय महाविद्यालय संचालित हैं। सहायक निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. एसके पांडेय ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन प्रतिशत लगभग 27 है। 2035 तक सकल नामांकन 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

    Friday, May 15, 2026

    खेल में पुरस्कृत परीक्षार्थियों को बोनस अंक देगा यूपी बोर्ड, पांच से लेकर 20 नंबर तक बोनस अंक के रूप में देने का बोर्ड ने भेजा संशोधित प्रस्ताव

    खेल में पुरस्कृत परीक्षार्थियों को बोनस अंक देगा यूपी बोर्ड, पांच से लेकर 20 नंबर तक बोनस अंक के रूप में देने का बोर्ड ने भेजा संशोधित प्रस्ताव


    प्रयागराज : विभिन्न खेलों में प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के उन खिलाड़ी परीक्षार्थियों को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) परीक्षा में बोनस अंक प्रदान कर सम्मान व प्रोत्साहन देगा, जिन्होंने राज्य, राष्ट्रीय स्तर या अंतरराष्ट्रीय पर प्रथम/द्वितीय/तृतीय स्थान प्राप्त किए हैं। इन्हें हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में पांच से लेकर 20 नंबर तक बोनस अंक के रूप में देने की योजना का संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। 


    बोनस अंक स्कूल गेम्स फेडरेशन आफ इंडिया (एसजीएफआइ) द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग पर ही देय होंगे। सर्वाधिक बोनस अंक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विजेता होने पर दिए जाएंगे।

    बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने शासन को भेजे प्रस्ताव में स्पष्ट किया है कि बोनस अंक केवल उन्हीं परीक्षार्थियों को दिए जाएंगे, जिन्होंने हाईस्कूल अथवा इंटरमीडिएट परीक्षा में सम्मिलित होने से पूर्व प्रतियोगिता में प्रथम/द्वितीय/तृतीय स्थान प्राप्त करने का प्रमाणपत्र या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करने का प्रमाणपत्र परीक्षा वर्ष की 31 जनवरी तक प्राप्त किए हों। 

    हाईस्कूल परीक्षा में परीक्षार्थियों को प्रदान किए जाने वाले बोनस अंक उनके अंकपत्र/प्रमाणपत्र में प्रदर्शित किए जाएंगे। इंटरमीडिएट में अभी ग्रेडिंग व्यवस्था नहीं होने के कारण परीक्षा में प्रदान किए जाने वाले बोनस अंक उनके कुल प्राप्तांक में जोड़े जाएंगे। परीक्षार्थी के अनुत्तीर्ण होने की दशा में बोनस अंक किन्हीं दो विषयों में ग्रेस मार्क के रूप में जोड़े जाएंगे।

    उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत यूपी की 70 हजार छात्राओं को मिलेगी इलेक्ट्रिक स्कूटी

    उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत यूपी की 70 हजार छात्राओं को मिलेगी इलेक्ट्रिक स्कूटी


    प्रयागराज। उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत छात्राओं को स्कूटी देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को विधानसभा चुनाव से पहले धरातल की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से घोषित रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए पात्र छात्राओं की सूची बनाई जा रही है।


    खास बात यह है कि छात्राओं को ईंधन पर खर्च खत्म करने और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी वितरित की जाएगी। एक स्कूटी लगभग 55 हजार रुपये की पड़ रही है।

    इस लिहाज से 400 करोड़ में 72,727 स्कूटी पड़ रही है। कुछ बजट आयोजन वगैरह पर भी पड़ेगा। इसलिए 70 हजार से अधिक छात्राओं को वाहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि अभी लाभार्थियों की संख्या का निर्धारण नहीं हो सका है। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुति भी दे दी है। माना जा रहा है कि छह महीने के अंदर स्कूटी का वितरण हो जाएगा।

     मुख्यमंत्री ने भी महिला दिवस (आठ मार्च) को जल्द स्कूटी वितरित करने की बात कही थी। सरकार ने 20 फरवरी 2025 को इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया के साथ ही स्कूटी की विशिष्टताएं निर्धारित करने के लिए 11 मार्च 2025 को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गई थी। 

    हालांकि पिछले साल कोई ठोस पहल नहीं हो सकी थी। शिक्षा निदेशालय के अफसरों ने विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थाओं से पिछले साल स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष पास करने वाली छात्राओं की सूची मांगी है। स्कूटी वितरण में सभी वर्ग का भी ध्यान रखा जाएगा। जिस प्रकार नौकरी में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिलता है उसी प्रकार स्कूटी वितरण में भी सभी वर्ग की छात्राओं को लाभ दिया जाएगा।


    योजना से ग्रामीण इलाके की छात्राओं को लाभ
     इस महत्वाकांक्षी योजना का सर्वाधिक लाभ ग्रामीण इलाके की छात्राओं को होगा। अमूमन छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर कॉलेज जाना पड़ता है, विशेषकर ग्रामीण इलाके की छात्राओं को रोजाना कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्कूटी की सहायता से छात्राओं को घर से कॉलेज आने-जाने में आसानी होगी और समय भी बचेगा, जिससे वह अन्य कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी।

    Thursday, May 14, 2026

    कहीं जूनियर शिक्षक का तबादला तो कही सीनियर का, बेसिक शिक्षकों का अंतःजनपदीय समायोजन में जिलों में बीएसए कर रहे अलग-अलग आदेश


    कहीं जूनियर शिक्षक का तबादला तो कही सीनियर का, बेसिक शिक्षकों का अंतःजनपदीय समायोजन में जिलों में बीएसए कर रहे अलग-अलग आदेश


    शिक्षकों के समायोजन को लेकर जूनियर-सीनियर का विवाद शुरू, जिलों में समायोजन सूची पर भी विवाद

    हाईकोर्ट ने स्कूलों में न्यूनतम दो शिक्षकों की तैनाती के आदेश दिए थे, अगली सुनवाई 22 मई को होनी है

    हाल ही में अमेठी और भदोही में जूनियर शिक्षकों का समायोजन

    कौशाम्बी, बुलंदशहर, लखीमपुर में सीनियर को दूसरे स्कूल भेजा

    प्रयागराज। हाईकोर्ट के आदेश पर परिषदीय स्कूलों में हो रहे शिक्षकों के समायोजन में एक और विवाद पैदा हो रहा है। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा के आदेश पर कुछ जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने जूनियर शिक्षकों को दूसरे स्कूल में भेज दिया है जबकि कुछ अन्य जिलों के बीएसए ने सीनियर शिक्षकों को समायोजित कर दिया है। अब इसको लेकर शिक्षकों ने विवाद करना शुरू कर दिया है। सीनियर कह रहे हैं कि जूनियर शिक्षक का समायोजन होना चाहिए जबकि जूनियर शिक्षक पहले से कार्यरत शिक्षकों को दूसरे स्कूल में भेजने पर अड़े हैं।


    चूंकि अपर मुख्य सचिव के चार मई के आदेश में यह साफ नहीं है कि जूनियर या सीनियर में किसका समायोजन होगा इसलिए इसे लेकर कानूनी विवाद होना तय है। इसमें सीनियर और जूनियर दोनों में से जिसका मनमाफिक स्कूल में समायोजन नहीं होगा, वही न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। सौरभकुमार सिंह व छह अन्य की ओर से दायर विशेष अपील में हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल को परिषदीय स्कूलों में न्यूनतम दो शिक्षकों की तैनाती के आदेश दिए थे। इस मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होनी है।

    अपर मुख्य सचिव ने सभी बीएसए से समायोजन करते हुए 20 मई तक रिपोर्ट मांगी है। अब तक जिन जिलों में समायोजन हो चुका है उनमें अमेठी, बाराबंकी और भदोही में जूनियर शिक्षकों जबकि मेरठ, बुलंदशहर, प्रतापगढ़ और कौशांबी में सीनियर को दूसरों स्कूलों में भेजा जा रहा है। बरेली में वरिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस माना गया है। लखीमपुर खीरी में वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस माना गया है लेकिन यदि सरप्लस अध्यापक महिला है तो अधिक ठहराव वाले पुरुष शिक्षक को समायोजित करने जा रहे हैं। हरदोई में दो कदम आगे बढ़ते हुए वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों सरप्लस शिक्षकों का डेटा मंगा लिया है। लखनऊ में अभी तक बीएसए ने सरप्लस में कनिष्ठ जाएगा या वरिष्ठ इसकी स्थिति तय नहीं की है।


    जिले में शिक्षकों की समायोजन सूची पर भी विवाद

    प्रयागराज। परिषदीय शिक्षकों के समायोजन के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने मंगलवार को सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी कर दी। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस दिखाया गया है। हालांकि सूची में आरटीई नियमों की खुलकर अनदेखी की गई है। उच्च प्राथमिक स्तर पर 100 छात्रसंख्या तक विषयवार तीन शिक्षक होना अनिवार्य है। तमाम विद्यालयों में एक विषय के एक से अधिक शिक्षक होने के बावजूद उन्हें सरप्लस नहीं दिखाया गया है। सिर्फ उन्हीं शिक्षकों को सरप्लस किया गया है जहां छात्रसंख्या 100 से कम है और अध्यापक तीन से अधिक हैं। एनआईसी की वेबसाइट पर प्रदर्शित डाटा के संबंध में शिक्षकों को कोई आपत्ति हो तो जनपदीय स्थानान्तरण/समायोजन समिति के सदस्य सचिव बीएसए को 19 मई तक साक्ष्य सहित प्रस्तुत कर सकते हैं। बीएसए ने साफ किया है कि 19 मई के बाद किसी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।


    सीबीएसई: 12वीं का परिणाम 3.19 फीसदी गिरा, बेटियों ने फिर मारी बाजी

    सीबीएसई: 12वीं का परिणाम 3.19 फीसदी गिरा, बेटियों ने फिर मारी बाजी 

    88.86 फीसदी लड़कियां हुईं पास, 82.13 फीसदी रहा लड़कों का नतीजा


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    CBSE 12th Class Result OUT


    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 12वीं कक्षा के नतीजों में 85.20 फीसदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.19 फीसदी कम है। बेटियों का प्रदर्शन इस बार भी शानदार रहा है। 88.86 फीसदी बेटियां पास हुईं, तो लड़कों का नतीजा 82.13 फीसदी ही रहा। बेटियां लड़कों से फीसदी आगे रहीं। ट्रांसजेंडर का परिणाम सौ फीसदी रहा। इस बार भी बोर्ड ने टॉपरों की  सूची जारी नहीं की। 


    इस बार बोर्ड ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को अपनाया है। इस साल 17,80,365 परीक्षार्थी पंजीकृत थे और 17,68,968 ने परीक्षा दी थी। इनमें से 15,07,109 विद्यार्थी पास हुए। बीते साल 14,96,307 उत्तीर्ण हुए थे। 1,63,800 विद्यार्थियों को कंपार्टमेंट मिली है। बीते साल यह संख्या 1,29,095 थी। कंपार्टमेंट या विषय में प्रदर्शन सुधारने के इच्छुक विद्यार्थी 15 जुलाई को सप्लीमेंट्री परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।


    त्रिवेंद्रम रीजन अव्वल प्रयागराज सबसे नीचे

    देशभर के 22 रीजन में से त्रिवेंद्रम 95.62% परिणाम के साथ शीर्ष पर है, जबकि प्रयागराज 72.43% के साथ सबसे नीचे रहा। दस रीजन का परिणाम औसत पास फीसदी से भी कम है। दिल्ली रीजन का पास प्रतिशत भी कम रहा। इस साल दिल्ली रीजन से 91.97 फीसदी छात्र सफल हुए, जो पिछले साल 95.18 रहा था। 90 एवं 95 फीसदी अंक पाने वालों विद्यार्थियों की संख्या भी कम हुई है। 90% से अधिक अंक पाने वालों की संख्या 94,028 है, जबकि 17,113 ने 95 फीसदी से अधिक अंक हासिल किए हैं। कुल 92 विषयों में 49,676 ने सौ में सौ अंक हासिल किए है।

    एक दिन हो सकती है प्राथमिक व उच्च के 3.96 लाख अभ्यर्थियों की टीईटी, दो, तीन और चार जुलाई को UPTET परीक्षा

    एक दिन हो सकती है प्राथमिक व उच्च के 3.96 लाख अभ्यर्थियों की टीईटी, दो, तीन और चार जुलाई को UPTET परीक्षा

    प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए 7.84 लाख व उच्च के लिए 12.12 लाख आवेदन

    उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग दो, तीन और चार जुलाई को कराएगा परीक्षा


    प्रयागराज : उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 के उन अभ्यर्थियों की परीक्षा एक दिन में आयोजित कर बड़ी राहत दे सकता है, जिन्होंने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक दोनों स्तर की टीईटी के लिए आवेदन किया है। ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या करीब 3.96 लाख है। एक ही दिन में दो अलग-अलग पालियों में परीक्षा कराए जाने से इन अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के जनपद में दो बार नहीं जाना-आना पड़ेगा। इसके अलावा केवल प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए करीब 7.84 लाख व उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए 12.12 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं। टीईटी आयोजन दो, तीन व चार जुालई को प्रस्तावित है।




    शिक्षा सेवा चयन आयोग ने एक ही आवेदन में अलग अलग शुल्क लेकर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक की टीईटी के लिए आनलाइन आवेदन लिया है। अंतिम तिथि तीन मई तक कुल 16.16 आवेदन किए गए। आयोग ने परीक्षा व्यवस्था के लिए प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी के आवेदनों की अलग-अलग गणना कराई। इसमें करीब 3.96 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों के लिए आवेदन किया है। 

    चूंकि दोनों स्तर की टीईटी का आयोजन अलग-अलग किया जाएगा, इसलिए दोनों में आवेदन करने वाले परीक्षार्थियों को दो बार परीक्षा देने जाना पड़ेगा। इसे ध्यान में रखकर आयोग अध्यक्ष डा. प्रशांत कुमार ऐसी व्यवस्था बनाने के प्रयास में हैं, जिसमें दोनों स्तर के अभ्यर्थियों की परीक्षा एक ही दिन दो अलग-अलग पालियों में संपन्न कराई जा सके।

    अध्यक्ष ने बताया कि इस अनुरूप व्यवस्था बन जाने पर इन अभ्यर्थियों का समय और खर्च दोनों बचेंगे। इसके अलावा प्राथमिक व उच्च प्राथमिक के अलग-अलग अभ्यर्थी अपने लिए निर्धारित पाली में सम्मिलित होकर परीक्षा दे सकेंगे। परीक्षा केंद्रों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र तथा अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग विस्तृत योजना तैयार कर रहा है।

    माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई के साथ मिलेगी हुनर की शिक्षा, विद्यार्थियों का होगा कौशल विकास

    माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई के साथ मिलेगी हुनर की शिक्षा, विद्यार्थियों का होगा कौशल विकास

    जून के प्रथम सप्ताह से तैयारी

     लखनऊराजधानी समेत प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को हुनर का ज्ञान भी दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहयोग से विद्यालयों में कौशल विकास की विशेष पाठशाला शुरू करने की तैयारी की जा रही है। जून के प्रथम सप्ताह से इसकी शुरुआत होने की संभावना है। इसके तहत विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ ही निश्शुल्क तकनीकी और रोजगारपरक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।


    कौशल विकास मिशन की ओर से माध्यमिक शिक्षा विभाग को भेजे गए प्रस्ताव में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यालय स्तर पर कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने का अनुरोध किया गया है। योजना के अनुसार छात्र-छात्राओं को उनकी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे वह पढ़ाई के साथ रोजगार से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी भी हासिल कर सकेंगे। तीन महीने से लेकर एक साल तक के कोर्स की पढ़ाई होंगी। हाईस्कूल और इंटर के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। भारतीयों की इच्छा के एन यूरोप प्रवेश दिया जाएगा। हर ट्रेड में 30 विद्यार्थियों का ही प्रवेश होगा।

    इन ट्रेडों में मिलेगा प्रशिक्षण :
    इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर, प्लंबर, कंप्यूटर आपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, डाटा एंट्री आपरेटर, फैशन डिजाइनिंग, ब्यूटी एंड वेलनेस, सिलाई एवं कढ़ाई,


    मोबाइल रिपेयरिंग, आटोमोबाइल सर्विस टेक्नीशियन, रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग, हेल्थकेयर असिस्टेंट, होटल मैनेजमेंट एवं फूड प्रोडक्शन, हाउसकीपिंग, रिटेल सेल्स एसोसिएट, सीसीटीवी एवं सिक्योरिटी सिस्टम इंस्टालेशन, ग्राफिक डिजाइनिंग, वेब डिजाइनिंग, डिजिटल मार्केटिंग, टैली एवं अकाउंटिंग, कृषि आधारित प्रशिक्षण, डेयरी एवं पशुपालन, ड्रोन टेक्नोलाजी एवं संचालन, सोलर पैनल टेक्नीशियन, ई-रिक्शा एवं ईवी रिपेयरिंग, फर्नीचर एवं बढ़ई का कार्य, पेंटिंग एवं पालिशिंग, फायर एंड सेफ्टी मैनेजमेंट।


    विद्यालय स्तर पर कौशल विकास की शुरुआत होने से विद्यार्थी कम उम्र में ही रोजगारपरक शिक्षा से जुड़ सकेंगे। इस मिशन का लक्ष्य युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना है। माध्यमिक शिक्षा के अलावा अल्प संख्यक कल्याण विभाग, महिला कल्याण व नगर विकास समेत 13 विभागों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। –पुलकित खरे, मिशन निदेशक


    आइसीटी लैब संचालन प्रशिक्षण 16 को
    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित आइसीटी लैब उपकरणों के सुचारु संचालन को लेकर 16 मई निशागंज के राजकीय इंटर कालेज एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण मंडल के छह जनपदों के 129 प्रधानाचार्यों को दिया जाएगा। मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डा. दिनेश कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण आईसीटी लैब सेवा द्वारा दो सत्रों में आयोजित होगा। सुबह 11 बजे से से दोपहर एक बजे व द्वितीय सत्र तीन से शाम पांच बजे तक चलेगा।

    Wednesday, May 13, 2026

    राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 'भारतीय भाषा समर कैंप-2026' के आयोजन के संबंध में

    राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 'भारतीय भाषा समर कैंप-2026' के आयोजन के संबंध में