यूपी बोर्ड में हिंदी की पढ़ाई का बदलेगा स्वरूप, रचनात्मक लेखन और अभिव्यक्ति पर रहेगा विशेष जोर
अगले वर्ष लागू होगा नया पाठ्यक्रम, भाषा के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ेंगे विद्यार्थी
लखनऊ: उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) कक्षा नौ से 12 तक की हिंदी पढ़ाई का स्वरूप बदलने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार वर्ष 2027 से हिंदी का नया पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा, जिसनें रचनात्मक लेखन, अभिव्यक्ति और भाषा के व्यावहारिक उपयोग पर विशेष जोर रहेगा। खास बात यह है कि जहां अन्य विषयों में एनसीईआरटी का पैटर्न अपनाया गया है, वहीं हिंदी के लिए प्रदेश की सामाजिक-सांस्कृतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम तैयार किया जाता है। अब हिंदी के मौजूदा पाठ्यक्रम को और अधिक समृद्ध किए जाने की तैयारी है।
हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा वाला यह प्रदेश रहा भारतेंद हरिश्चंद्र, मुंशी प्रेमचंद, महावीर प्रसाद द्विवेदी, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और अज्ञेय जैसे कालजयी साहित्यकारों की विरासत वहां की पहचान रही है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश का हिंदी पाठ्यक्रम भी ततन ही समृद्ध और उच्च स्तर का होना चाहिए, जिससे विद्यार्थी हिंदी को रटने के बजाय उसकी गहराई को समझते हुए अप्नी सृजनात्मक क्षमता को विकसित कर सकें। परिषद के अनुसार हिंदी भाषी प्रदेश में विद्यार्थियों की भाषाई जरूरतें भी विशिष्ट हैं।
एनसीईआरटी की मैजूदा हिंदी पुस्तकों में कई बार प्रदेश के सामाजिक जीवन, लोक संस्कृति और स्थानीय संदर्भों को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। इसी वजह से यूपी बोर्ड अपने स्तर पर हिंदी का ऐसा पाठ्यक्रम विकसित करता है, जो विद्यार्थियों को भाषा के साथ साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़ सके। अगे हिंदी को केवल व्याकरण और पाठ्यपुस्तक तक सीमित नहीं रखा जाएगा प्रस्तावित पाठ्यक्रम में कविता लेखन, कहानी लेखन, निबंध, संवाद लेखन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को और अधिक महत्व देने की योजना है। इससे छात्र केवल परीक्ष पास करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपनी सोच, अनुभव और भावनाओं को प्रभात्री ढंग से व्यक्त करना भी सीखेंगे।
परिषद के सचिव भगवती सिंह के अनुसार इस दिशा में प्रारंभिक कवायद शुरू कर दी गई है। पाठ्यक्रम तैयर करने के लिए शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से सुझाव लिए जा रहे हैं, ताकि इसे आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके। साथ ही हिंदी शिक्षण में नवाचार और व्यावहारिक उपयोगिता को भी प्रमुखता दी जाएगी। इससे प्रदेश के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी लेखन और अभिव्यक्ति के क्षेत्र में मजबूत पहचान बना सकेंगे।
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