आर्थिक संकट से जूझ रहे प्रशिक्षु शिक्षक
मौलिक नियुक्ति के बाद भी सात माह से नहीं मिला वेतन
जागरण संवाददाता, रामपुर : चार साल से अधिक समय से शिक्षक बनने की आस लगाए प्रशिक्षु शिक्षक अब आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कोर्ट के निर्देशों पर भले 72825 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया में प्रशिक्षु शिक्षकों को मौलिक नियुक्ति मिल गई हो लेकिन, उनकी परेशानी अभी खत्म नहीं हुई है। कोर्ट के फैसले को लेकर पहले से ही सांसत में प्रशिक्षु शिक्षक अब आर्थिक तंगी से भी जूझ रहे हैं। इनमें से अधिकतर प्रशिक्षु शिक्षकों को पिछले सात माह से न तो मानदेय मिला है और न ही वेतन भुगतान हुआ है। प्रशिक्षु शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर न तो सरकार और न ही शिक्षाधिकारी गंभीर नजर आ रहे हैं। आसमान से टपके, खजूर पर अटके यह कहावत प्रशिक्षु शिक्षकों के हालातों पर सटीक बैठ रही है। चार साल से अधिक समय के संघर्ष और झंझावतों को झेलने के बाद मौलिक नियुक्ति पाने वाले इन प्रशिक्षु शिक्षकों के हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं। नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के न आने से जहां इन प्रशिक्षु शिक्षकों में बेचैनी है तो वहीं सात माह से एक भी रुपया न मिलने से आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद ही लगभग एक साल से प्रशिक्षण और नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। जिसमें जिले में करीब छह सौ प्रशिक्षु शिक्षकों को मौलिक नियुक्ति दी जा चुकी है। सरकार और शिक्षाधिकारियों की बेरुखी के चलते इनमें से अधिकतर प्रशिक्षु शिक्षकों का छह माह का प्रशिक्षण ही दस माह में पूरा हो सका। इसके बाद लंबे संघर्ष और कोर्ट के आदेशों पर भले ही प्रशिक्षु शिक्षकों को मौलिक नियुक्ति दे दी गई हो लेकिन, इनके मानदेय और वेतन भुगतान को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। छह माह का प्रशिक्षण दस माह में पूरा कराने में प्रशिक्षु शिक्षकों की कोई खामी नहीं थी। इसके बावजूद उन्हें सिर्फ छह माह का ही मानदेय भुगतान किया गया। इसके बाद नवंबर से मौलिक नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है लेकिन, करीब तीन माह का समय होने पर भी इनको वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।
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