हिन्दुस्तान’ की ओर से साउथ मलाका स्थित शिक्षक भवन में आयोजित संवाद में शिक्षकों ने आम बजट पर चर्चा की ’
इलाहाबाद। 29 फरवरी को पेश होने जा रहे आम बजट से शिक्षकों ने बड़ी उम्मीद
लगा रखी है। दशकों से सरकारी उपेक्षा के शिकार शिक्षक अपने लिए बुढ़ापे की
लाठी रूपी पेंशन व चिकित्सा सुविधा और समग्र रूप से शिक्षा की बेहतरी चाहते
हैं।वे आयकर में कटौती की सीमा कम से कम पांच लाख किए जाने के पक्ष में
हैं। शिक्षकों को इस बात की तकलीफ है कि एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त
साथियों के लिए 11 साल का समय बीतने के बावजूद पेंशन कटौती शुरू नहीं हो
सकी है। चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण गंभीर बीमारी की स्थिति में
इलाज करवाना मुश्किल हो जाता है। प्राइमरी स्कूल से लेकर डिग्री कॉलेज तक
में पढ़ा रहे शिक्षकों को सबसे बड़ी तकलीफ है कि सरकार ने शिक्षा का बजट
नहीं बढ़ाया। आज सकल घरेलू उत्पाद का तीन प्रतिशत से भी कम शिक्षा के मद
में खर्च किया जाता है जो शिक्षकों की राय में कम से कम 10 प्रतिशत होना
चाहिए। स्कूलों की स्थिति में सुधार हो और खेलकूद, लाइब्रेरी, साफ-सफाई
जैसी मूलभूत सुविधाएं बेहतर हों। प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश महामंत्री
डॉ. ब्रजेश शर्मा कहते हैं कि दुनिया तेजी से बदल रही है। इंटरनेट के युग
में शिक्षकों को अपडेट रखने के लिए उन्हें किफायत पर लैपटॉप, स्मार्टफोन
वगैरह मिलने चाहिए ताकि वे तकनीकी विकास में पिछड़ न जाएं। भारत स्काउट एवं
गाइड इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य योगेश चन्द्र त्रिपाठी स्कूल से बदहाली
से बहुत दुखी हैं। सीएमपी डिग्री कॉलेज के शिक्षक और ऑक्टा अध्यक्ष
सुनीलकान्त मिश्र बजट में शिक्षा के मद में होने वाले खर्च को बढ़ाने की
पुरजोर वकालत करते हैं। वरिष्ठ शिक्षक नेता महेशदत्त शर्मा वित्तविहीन
स्कूल के शिक्षकों की दुर्दशा से आहत हैं। माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट
के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी कहते हैं कि सरकारें सियासी
नफे-नुकसान के लिए पैसा पानी की तरह बहा रही है लेकिन शिक्षकों को वाजिब हक
नहीं दे रही।प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र श्रीवास्तव को
उम्मीद है कि बजट में मिड-डे-मील की कन्वजर्न कास्ट और नि:शुल्क ड्रेस
वितरण का खर्च बढ़ेगा। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के कामतानाथ की मांग है कि
आयकर कटौती की सीमा बढ़े।
पिछले दशक में
शिक्षा का विस्फोट हुआ। प्राइवेट स्कूल खुले पर शिक्षा के लिए बजट नहीं
बढ़ा। पढ़े-लिखे युवा दो-ढाई हजार रुपए में पढ़ा रहे हैं। -महेशदत्त शर्मा,
वरिष्ठ शिक्षक नेता
वर्तमान में चपरासी तक आयकर
के दायरे में है। आम बजट में मिड-डे-मील की कन्वजर्न कास्ट में वृद्धि
होनी चाहिए। -देवेन्द्र श्रीवास्तव जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ
सरकारें शिक्षा पर खर्च नहीं करना चाहती जो कि चिन्ता का विषय है। आज स्कूलों में डस्टर और चॉक खरीदने तक के पर्याप्त धन नहीं है। -चिन्तामणि त्रिपाठी, मंत्री प्राथमिक शिक्षक संघ
पेंशन कटौती शुरू न होने से शिक्षकों को नुकसान हो रहा है।अप्रैल 2005 के
बाद नियुक्त शिक्षकों संग हादसा होने पर परिवार का कोई सहारा नहीं।
-कामतानाथ, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ
शहरी
क्षेत्र में एचआरए अधिक मिलता है जिससे शिक्षक शहर में आना चाहते है। वहां
का एचआरए अधिक हो। -जंग बहादुर सिंह पटेलजिलाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ
रशर्मा गुट
पिछले तीन दशक में यूपी में हजारों
स्कूल खुले पर 1986 के बाद से एक स्कूल अनुदान पर नहीं लिया। शिक्षकों के
लिए पेंशन कटौती शुरू नहीं हुई। -लालमणि द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री ठकुराई
गुट
‘
शिक्षकों को फिट रखने के लिए लैपटॉप, इंटरनेट आदि पर शिक्षकों को रियायत
मिले। ताकि आधुनिक तकनीक के उपयोग से बच्चों को बेहतर शिक्षा दे पाएं। -डॉ.
ब्रजेश शर्मा, प्रधानाचार्यसेवा समिति विद्या मंदिर इंटर कॉलेज
शिक्षा का बजट बढ़ाया जाए। स्कूलों की लाइब्रेरी समेत अन्य मूलभूत सुविधाएं सुदृढ हों। हर विषय के शिक्षक दिए जाएं ताकि बेहतर पढ़ाई हो। -योगेश चन्द्र त्रिपाठी, प्रधानाचार्य भारत स्काउट एवं गाइड इंटर कॉलेज
आयकर कटौती की सीमा कम से कम पांच लाख रुपए हो। शिक्षकों को चिकित्सा सुविधा मिले ताकि गंभीर बीमारी के इलाज के लिए भटकना न पड़े। -डॉ. शैलेश कुमार पांडेय
बजट 3 प्रतिशत से बढ़ाकर कम से कम 10 प्रतिशत करना चाहिए। शिक्षा को पूरी तरह से बाजार के हवाले छोड़ दिया तो ऐसी सरकार होने का क्या फायदा। -डॉ. देवीशरण त्रिपाठी
बजट स्कूलों की सभी जरूरतें पूरी करने वाला होना चाहिए। बच्चों को उर्दू
की किताबें तक समय से नहीं मिल पाती। -अशफाक अहमद अल्वीमहासचिव उर्दू टीचर्स
एसोसिएशन
स्कूलों में इन्फार्मेशन कम्युनिकेशन
टेक्नालॉजी योजना औंधे मुंह गिर पड़ी है। कम्प्यूटर शिक्षक आज सड़क पर
मारे-मारे घूम रहे हैं। -केएम लाल,राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ
स्कूलों में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती पर लगी रोक हटाई
जाए। इनकी कमी से स्कूलों के संचालन में परेशानी हो रही है। -जगदीश प्रसाद,
माध्यमिक शिक्षक संघ
पहले शिक्षकों को टीचिंग लर्निग मैटेरियल के लिए 500 रुपए मिलता था जो बंद हो गया। बजट में इसके लिए व्यवस्था हो, शिक्षक ढंग से पढ़ा सकें। -गोपीकृष्ण तिवारी
सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के लिए बहुत कम बजट मिलता है।
प्रधानाचार्यो को अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। इसका प्रावधान बजट में
किया जाए। -सुमन सिंह

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