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Sunday, March 6, 2016

अमेठी और रायबरेली सबसे पिछड़े,दोनों जिलों के कई स्कूलों में नहीं हैं अध्यापक सुलतानपुर, अंबेडकर नगर व फैजाबाद भी सर्वे में शामिल रिपोर्ट में पूर्वी उत्तर प्रदेश में छात्रों तक पहुंचने के लिए नए विकल्प अपनाने की अनुशंसा


सर्वेक्षण के बिंदु ~संरचनात्मक स्थिति, ग्रामीण क्षेत्रों में रहन-सहन, ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक आर्थिक स्थिति, शिक्षा के अवसर और शैक्षिक स्थिति

प्रभात उपाध्याय, नोएडा पूर्वी उत्तर प्रदेश में अमेठी और रायबरेली सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक रूप से सबसे पिछड़े जिले हैं। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) के एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। इसे इन जिलों का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि यहां की लोकसभा सीटों पर देश के दिग्गज नेताओं का कब्जा होने के बावजूद क्षेत्र का विकास नहीं हो पाया है। बता दें कि रायबरेली से कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी सांसद हैं, तो अमेठी की संसदीय सीट पर कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी का कब्जा है। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में संस्थान के विस्तार के लिए एक सर्वेक्षण करवाया है। इसमें अमेठी, रायबरेली, देवरिया, बलिया, सुलतानपुर, गोरखपुर, फैजाबाद और अंबेडकर नगर जिले को शामिल किया गया था। जुलाई 2015 में शुरू हुए सर्वेक्षण की रिपोर्ट हाल ही में आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार अमेठी और रायबरेली की हालत सबसे बदतर है। अमेठी में सड़कों व राष्ट्रीय राजमार्गो की स्थिति बहुत खराब है। जिले के स्कूलों में अध्यापकों की संख्या छात्रों के अनुपात में काफी कम है।1रिपोर्ट के अनुसार अमेठी में कुल 2,498 प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें से 54 में शिक्षक ही नहीं हैं। वहीं 230 स्कूल एक अध्यापक के भरोसे है। 543 स्कूलों में दो शिक्षक हैं। रिपोर्ट के अनुसार 466 स्कूलों में छात्रओं के लिए शौचालय की व्यवस्था तक नहीं है। 1,517 स्कूलों में बिजली का कनेक्शन भी नहीं है। सर्वेक्षण में शामिल बच्चों में से 65.33 प्रतिशत बच्चों के माता-पिता मजदूरी करते हैं। 28 प्रतिशत बच्चों के माता-पिता कृषि पर निर्भर हैं। जबकि मात्र 6.66 फीसद बच्चों के माता-पिता किसी वैतनिक रोजगार या सरकारी नौकरी में हैं। सर्वेक्षण के दौरान 46.66 फीसद बच्चों ने पढ़ाई छूटने का कारण स्कूल का घर से दूर होना बताया। 22.66 फीसद बच्चों ने फीस देने में अक्षमता की वजह से पढ़ाई छोड़ी। 16 फीसद बच्चों ने माता-पिता की अनिच्छा को जिम्मेदार बताया।इसी तरह रायबरेली में सड़कों की स्थिति तुलनात्मक रूप से ठीक है, पर शैक्षणिक स्थिति बदतर है। जिले के 3,539 स्कूलों में 29 बिना शिक्षक के हैं। वहीं 489 स्कूल एक शिक्षक और 370 स्कूल मात्र दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। सर्वेक्षण में शामिल 22.72 फीसद बच्चों के माता-पिता मजदूरी करते हैं। वहीं 68.18 प्रतिशत बच्चों के माता-पिता कृषि पर निर्भर हैं। जबकि मात्र 9.09 फीसद बच्चों के माता-पिता वैतनिक या सरकारी नौकरी में हैं। वहीं रायबरेली की साक्षरता दर सभी जिलों में सबसे कम है। सर्वेक्षण में गोरखपुर और सुलतानपुर को सामाजिक-आर्थिक व शैक्षणिक दृष्टि से अन्य जिलों की तुलना में बेहतर पाया गया।

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