जागरण संवाददाता, बिजनौर : यूपी बोर्ड की तर्ज पर परीक्षा कराने चला बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों की खूब कलई खुल रही है। अफसरों की कार्यशैली से पूरी परीक्षा की सवालिया घेरे में आ गई है। कक्षा सात का संस्कृत का जो पेपर बच्चों में बांटा गया, दरअसल वह कक्षा आठ का था। हद तो तब हुई कि कक्षा आठ के संस्कृत का पेपर पूर्णांक मात्र चौदह अंकों का ही बना दिया। हालत तो तब और भी ज्यादा गंभीर हुई जब फ्रूफरी¨डग में गलती पकड़ में आने के बावजूद इन गलितयों में सुधार नहीं हो पाया। विभाग की फजीहत कराने और परीक्षा को मजाक बनाने वाले अफसर मामले पर खामोशी साधे हुए हैं और आरोपियों पर कार्रवाई के बजाए बचाने की तैयारी की जा रही है। 1गत शैक्षिक सत्रों में कुछ परिषदीय स्कूलों को छोड़ दे, तो अधिकांश में ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिखकर शिक्षक-शिक्षिकाएं अर्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षा कराते थे। वजह, शासन और विभाग स्तर से परीक्षा के लिए कोई खास निर्देश नहीं थे। कुछ जागरूक शिक्षक-शिक्षिकाएं अपने स्तर से प्रश्न पत्र छपवा कर छात्र-छात्रओं को आवंटित करके परीक्षा कराते है। इस बार बेसिक शिक्षा विभाग यूपी बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर परिषदीय गृह परीक्षा का आयोजन करा रही है। विभाग ने लोकल स्तर पर प्रश्न पत्र तैयार कराए और उनकी लोकल पर ही प्रूफरी¨डग कराई गई
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